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by Jemsbond
12 Jan 2017 11:04
Forum: Thriller Stories
Topic: हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - रीमा भारती सीरीज
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Re: हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - रीमा भारती सीरीज

13 वह तो आर्मी एरिया से निकलने की बाते कह रहा था, मुझे तो बस मौका मिलना चाहिये, फिर उनके पास हाथ मलते रह जाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचने वाला था । "जवाब दो ।" कमाण्डर ने फिर यही राग अलापा-"वरना तुम्हें इतनी यातनाएं दी जायेंगी कि तुम्हारी आत्मा भी सच बोलने पर मजबूर हो जायेगी । श...
by Jemsbond
12 Jan 2017 11:04
Forum: Thriller Stories
Topic: हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - रीमा भारती सीरीज
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Re: हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - रीमा भारती सीरीज

12 "तुम्हें मेरी बात बकवास लग रही है ।" "सरासर बकवास लग रही हैं। मैं सच जानना चाहता हूं।" "सच यही है ।" "फिर बकवास? जबकि सच ये है कि या तो तुम कोई जासूस हो, या फिर राष्ट्रपति सर एडलॉंफ की कोई कट्टर समर्थक, जो जानबूझ कर किसी खास मकसद से आर्मी एरिया में घुसी हो ।&qu...
by Jemsbond
12 Jan 2017 11:03
Forum: Thriller Stories
Topic: हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - रीमा भारती सीरीज
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Re: हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - रीमा भारती सीरीज

11 "वो तो मैं देख सा हू। मैंने तुम्हारा नाम पूछा है ।" "डियाना ।" "इस तरह आर्मी एरिया में विमान से कूदने का तुम्हारा क्या मकसद है?" उसने सवाल किया । "भला एक लड़की का इतनी रात में आर्मी एरिया में कूदने का क्या मकसद हो सकता है?" मैं पूरी दिठाई से बोली । "स...
by Jemsbond
12 Jan 2017 10:59
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Topic: हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - रीमा भारती सीरीज
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Re: हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - रीमा भारती सीरीज

10 मेरे जिस्म को एक तेज झटका लगा था । मैंने पहले आंखें खोल दीं और एक झटके से सीधी होकर बैठ गई । जोगा रुक चुका था । जोगे का पिछला दरवाजा खुला । अगले क्षण उसमें से एक एक करके सैनिक नीचे कूदने लगे । जब सारे सैनिक नीचे उतर चुके तो उनमें से एक मुझे घूरता हुआ कर्कश स्वर में बोला-"नीचे उतरो ।" म...
by Jemsbond
12 Jan 2017 10:59
Forum: Thriller Stories
Topic: हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - रीमा भारती सीरीज
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Re: हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - रीमा भारती सीरीज

Page 9 कुछं देर बाद वे सैनिक मुझे जिस जगह लेकर पहुचे, वहां पर्याप्त उजाला था । वहां एक जोंगा, खड़ा था । वे संख्या में चार थे । चारों के कन्धों पर रायफलें लटकी हुई थी । चारों के चेहरे इस बात की चुगली खा रहे थे, अगर मैंने कोई भी हरकत की तो पलक झपकते ही उनकी रायफल कंधों से उतरकर उनके हाथों में आ सकती ...
by Jemsbond
12 Jan 2017 10:58
Forum: Thriller Stories
Topic: हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - रीमा भारती सीरीज
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Re: हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - रीमा भारती सीरीज

page 8 उस बियाबान में क्या कर रहे थे ? पलक झपकते ही ऐसे कईं सवाल मेरे जेहन में कौंध गये थे । वहां सन्नाटा था । मौत जैसा सन्नाटा । सन्नाटे के साथ चारों तरफ पूर्ण अंधकार था । काजल-सा स्याह अंधकार, जिसे मानो उंगली से ही छुआ जा सके । ऐसे में कुछ भी कर पाना सम्भव नहीं था । अत: मैं उन लोगो के चेहरे तक नह...

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