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by 007
24 Mar 2017 14:33
Forum: Hindi ( हिन्दी )
Topic: कहीं वो सब सपना तो नही
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Re: कहीं वो सब सपना तो नही

करण ने गेट खोला ऑर हम अंदर चले गये ,,दीदी तो गेट के अंदर आते ही करण से लिपट गई ऑर किस करने लगी,,,,तभी अंदर से करण की माँ की आवाज़ आई ऑर दीदी एक दम से करण से अलग हो गई ऑर थोड़ी निराश भी हो गई,,,,उसने सोचा था को करण की माँ घर पर नही होगी तो मस्ती कर लेंगे लेकिन वो तो घर पर थी,,,,इसलिए दीदी निराश हो ग...
by 007
24 Mar 2017 14:32
Forum: Hindi ( हिन्दी )
Topic: कहीं वो सब सपना तो नही
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Re: कहीं वो सब सपना तो नही

मैने भी अपने पैरो को बेड पर टिकाया ऑर खड़ा होके माँ की गान्ड पर झुक कर लंड को गान्ड मे डाल दिया फिर अपने हाथ माँ के बूब्स पर ले गया जिस से मेरा सर माँ की पीठ पर आ गया ऑर मैं भी मामा की तरह माँ की पीठ पर किस करने लगा थोड़ी देर तो माँ की गान्ड मारता हुआ माँ के बूब्स मसतला रहा ऑर माँ की पीठ पर किस करत...
by 007
24 Mar 2017 14:31
Forum: Hindi ( हिन्दी )
Topic: कहीं वो सब सपना तो नही
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Re: कहीं वो सब सपना तो नही

san1381 wrote:bhai update plz, need a long update.


aaj ek bada sa update aa raha hai
by 007
15 Mar 2017 20:52
Forum: Hindi ( हिन्दी )
Topic: कहीं वो सब सपना तो नही
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Re: कहीं वो सब सपना तो नही

दीदी मामा के उपर लेटी हुई थी दोनो क़िस्स्स करते हुए पागलो की तरह एक दूसरे के जिस्म से खेल रहे थे सहला रहे थे,,,फिर मामा की हालत कुछ ज़्यादा ही खराब होने लगी तो उसने जल्दी से दीदी की टाँगों को खोला ऑर दीदी के कुछ समझने से पहले ही लंड दीदी की चूत मे डाल दिया,,,,,,,,,,,,दीदी के मुँह से आहह निकल गई,,,,...
by 007
09 Mar 2017 20:04
Forum: हिंदी साहित्य
Topic: रेहन पर रग्घू /काशीनाथ
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Re: रेहन पर रग्घू /काशीनाथ

बारह रघुनाथ को कुछ पता नहीं कि वे अपने कमरे में कैसे पहुँचे ? कौन ले गया? कब ले गया? कैसे ले गया? कपड़े किसने उतारे? बदन किसने पोंछा और तीस साल पुराना खादी आश्रमवाला वह गाउन या ओवरकोट किसने पहनाया जिसके रोएँ झड़ गए थे और जो टाट रह गया था? वे नीचे से नंगे थे और गर्भ में पड़े हुए बच्चे की तरह बुक्की ...
by 007
09 Mar 2017 20:03
Forum: हिंदी साहित्य
Topic: रेहन पर रग्घू /काशीनाथ
Replies: 15
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Re: रेहन पर रग्घू /काशीनाथ

................................................दस जीवनाथ वर्मा जाते-जाते एक नई मुसीबत खड़ी कर गए थे यह कहते हुए कि अपनों के लिए बहुत जी चुके रग्घू, अब अपने लिए जियो! यह वह बात थी जो कभी उनके अपने दिमाग में ही नहीं आई! अपनों से अलग भी अपना कुछ होता है क्या? क्या बेटे अपने नहीं थे? बेटी अपनी नहीं थी?...

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