दर्द भरी शायरी

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rajaarkey
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दर्द भरी शायरी

Post by rajaarkey » 08 Jun 2015 09:41

दर्द भरी शायरी

(१) कोई मिला ही नहीं जिसको वफ़ा देता !

हर एक ने धोखा दिया किस - किस को सजा देता !!

ये तो हम थे की चुप रह गए वर्ना......!

दास्तान सुनाते तो महफिल को रुला देता !!



(२) वो हमारे कब थे जो बेगाने हो गए !

ज़रा सी बात थी क्या फ़साने हो गए !!

क्या उसे इलज़ाम दे क्या सुनाये हालेदिल !

अब कोई होगा नया हम पुराने हो गए !!



(३) तू कही भी रह सर पे तेरा इलज़ाम तो हैं !

तेरे हाथों की लकीर में मेरा नाम तो हैं !!

मुझे अपना बना या न बना ये तेरी मर्जी !

पर तू मेरे नाम से बदनाम तो हैं....!!



(४) वक़्त की रफ्तार रुक गई होती !

शरम से आँखे झुक गई होती....!!

अगर दर्द जानती शमा परवाने का !

तो जलने से पहले ही वो बुझ गई होती !!



(५) किसी का दर्द जब हद से गुजर जाता हैं !

समंदर का पानी आँखों में उतर आता हैं !!

कोई तो बना लेता हैं रेत पर भी घर....!

किसी का लहरों में सब कुछ बिखर जाता हैं !!
(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &;
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj sharma

दर्द भरी शायरी

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rajaarkey
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Re: दर्द भरी शायरी

Post by rajaarkey » 08 Jun 2015 09:41



(6) जला देंगे अपने दिल को दिये की तरह !

तेरी जिंदगी में रौशनी लाने के लिए.....!!

सह लेंगे चुभन को पैरों तले....!

तेरी राहों में फूल बिछाने के लिए !!



(7) यादें होती हैं सताने के लिए !

कोई रूठता हैं फिर मनाने के लिए !!

रिश्ता बनाना कोई मुस्किल तो नहीं !

बस जान चली जाती हैं उसे निभाने के लिए !!



(8) आँशु आँखों से कभी गिर न पाए !

न दर्द हो तुझे न कभी चोट आए !!

मेरे हिस्से में ज्यादा ख़ुशी तो नहीं !

पर रब करे वो भी तुझे मिल जाए !!



(9) जुबान खामौश आँखों में नमी होगी !

यही बस एक दास्ता-ऐ-जिंदगी होगी !!

भरने को तो हर जख्म भर जायेंगे !

कैसे भरेगी वो जगह जहाँ आपकी कमी होगी !!



(10) खुशियों से नाराज़ हैं मेरी जिंदगी !

प्यार की मोहताज़ हैं मेरी जिंदगी...!!

हँस लेते हैं दुसरो को दिखाने के लिए !

वर्ना दर्द की खुली किताब हैं मेरी जिंदगी !!
(¨`·.·´¨) Always
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Re: दर्द भरी शायरी

Post by komaalrani » 30 Jun 2015 15:52

अच्छा है डूब जाये सफीना हयात का,
उम्मीदो-आरजूओं का साहिल नहीं रहा।
-'असर' लखनवी

1.सफीना- नाव, नौका, किश्ती 2.हयात - जिन्दगी
2.साहिल- किनारा, तट

*****

अपना गम किस तरह से बयान करूँ,
आग लग जायेगी इस जमाने में।
-फिराक गोरखपुरी

*****

अपने ही दिल के आग में शम्अ पिघल गई,
शम्ए-हयात मौत के सांचे मे ढल गई।
-'असर' लखनवी

1.शम्ए-हयात- जिन्दगी की शम्अ

*****

अब जी रहा हूँ गर्दिशे-दौरां के साथ-साथ,
यह नागवार फर्ज अदा कर रहा हूँ मैं।
-शौरिश काश्मीरी

1.गर्दिशे-दौरां समय का चक्कर, काल-चक्र, समय का उलट-फेर।
2.नागवार - जो पसन्द न हो, जो अच्छा न लगे
3.खल्वत एकान्त, तन्हाई, जहाँ कोई दूसरा न हो।

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Re: दर्द भरी शायरी

Post by komaalrani » 30 Jun 2015 15:53

इस दौर में जिन्दगी बशर की,
बीमार की रात हो गयी है।
-'फिराक' गोरखपुरी

1.बशर- मनुष्य, मानव, आदमी

*****

इसको क्या कहिये कि हम हर हाल में जलते रहे,
दूरियों में चाँद थे, कुर्बत में परवाने हुए।
-'खातिर' गजनवी

1.कुर्बत - सामीप्य, नजदीकी, निकटता 2. परवाना - शलभ, पतंगा।

*****

इसी पै नाज घड़ी दो घड़ी जली होगी,
इसी पै शम्अ हमारी बराबरी होगी।

*****

उम्मीदी-नाउम्मेदी का वहम होना वही जाने,
कि जिसने कश्तियों को डूबते देखा हो साहिल पर।

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Re: दर्द भरी शायरी

Post by komaalrani » 30 Jun 2015 15:53

नाकामियों के खौफ ने दीवाना कर दिया,
मंजिल के सामने भी पहूँच के निराश हूँ।
-बहजाद लखनवी

*****

नादाँ हो जो कहते हो क्यों जीते हो 'गालिब',
किस्मत में है मरने की तमन्ना कोई दिन और।
-मिर्जा 'गालिब'

*****

नाम अलबता सुनते आये हैं,
हम नहीं जानते खुशी क्या है?
-'असर' लखनवी

*****

नींद भी मौत बन गई है, 'अदम',
बेवफा रात भर नहीं आती।
-अब्दुल हमीद 'अदम'

*****

पहले आती थी हाले-दिल पै हँसी,
अब किसी बात पै नहीं आती।
-मिर्जा 'गालिब'

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