दर्द भरी शायरी

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jay
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Re: दर्द भरी शायरी

Post by jay » 23 Oct 2015 21:56

जिस रात के ख़्वाब आये वोह ख़्वाबों की रात आई
शर्मा के झुकी नज़रें होटों पे वोह बात आई

पैगाम बहारों का आखिर मेरे नाम आया
फूलों ने दुआएँ दि तारों का सलाम आया
आप आये तो महफ़िल में नग़मों की बरात आई
जिस रात के ख़्वाब आये वोह ख़्वाबों की रात आई

यह महकी हुई जुल्फ़े यह बहकी हुई साँसे
नींदों को चुरा लेंगी यह नींद भरी आँखें
तक़दीर मेरी जागी जन्नत मेरे हाथ आई
जिस रात के ख़्वाब आये वोह ख़्वाबों की रात आई

चेहरे पे तब्बसुम ने एक नूर सा चमकाया
क्या काम चराग़ों का जब चाँद निकल आया
लो आज दुल्हन बन के पहलु में हयात आई
जिस रात के ख़्वाब आये वोह ख़्वाबों की रात आई

~अली सरदार जाफ़री
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(ज़िद (जो चाहा वो पाया) running).
(वक्त का तमाशा running)..
(दास्तान ए चुदाई (माँ बेटी बेटा और किरायेदार ) complete) .. (सातवें साल की खुजली complete)
(एक राजा और चार रानियाँ complete).............(माया complete...)-----(तवायफ़ complete).............
(मेरी सेक्सी बहनें compleet)........(दोस्त की माँ नशीली बहन छबीली compleet)............(माँ का आँचल और बहन की लाज़ compleet)..........(दीवानगी compleet )....... (मेरी बर्बादी या आबादी (?) की ओर पहला कदमcompleet)........(मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग)........


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(कोई तो रोक लो)
(ननद की ट्रैनिंग compleet)..............( सियासत और साजिश)..........(सोलहवां सावन)...........(जोरू का गुलाम या जे के जी).........(मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन)........(कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास)........(काले जादू की दुनिया)....................(वो शाम कुछ अजीब थी)

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jay
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Re: दर्द भरी शायरी

Post by jay » 23 Oct 2015 21:57

तुम्हारे एजाज़-ए-हुस्न की मेरे दिल पे लाखों इनायतें हैं
तुम्हारी ही देन, मेरे जौक-ए-नज़र की सारी लताफतें हैं

जवां है सूरज, जबीं पे जिसके, तुम्हारे माथे की रौशनी है
सहर हसीं है, के उसके रुख पे तुम्हारे रुख की सबाहतें हैं

मैं जिन बहारों की परवरिश कर रहा हूँ, ज़िन्दान-ए-ग़म में हमदम
किसी के गेसू-ओ-चश्म-ए-रुख्सार-ओ-लब की, रंगी हिकायतें हैं

न जाने छलकाए जाम कितने, न जाने कितने सुबू उछाले
मगर मेरी तिशनगी, कि अब भी तेरी नज़र से शिकायतें हैं

मैं अपनी आँखों में, सैल-ए-अश्क-ए-रवां नहीं, बिजलियाँ लिए हूँ
जो सर-बलंद और ग़यूर हैं, अहल-ए-ग़म! ये उनकी रवायतें हैं

~ सरदार जाफरी
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Re: दर्द भरी शायरी

Post by jay » 23 Oct 2015 21:58

ग़ज़ल (मैं और मेरी तन्हाई इन दिनों)
मैं और मेरी तन्हाई इन दिनों
बस बेज़ार से हो गए हैं

शहर की आवारा गलियों में
अपनों के मोहताज़ हो गए है

किधर जाये किससे पूछे रहगुज़र
राहे मंज़िल के तलबगार हो गए है

हर तरफ रुसवाई का मज़मा है
न जाने अपने कहाँ खो गए है

ज़ख्म पर दिल के अब दवा नहीं बाकी
हकिम सारे शहर के फना हो गए है

शहनाई जब जब बजी किसी महफ़िल में
जख्म दिल के "विकास" फिर जवां हो है

- गुमनाम विकास
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Re: दर्द भरी शायरी

Post by s_bajaj4u » 25 Jul 2016 15:02

mast dil ke dard ko mahsoos karne wali shyari
Sanjay Bajaj

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Re: दर्द भरी शायरी

Post by s_bajaj4u » 25 Jul 2016 15:06

superb shyari
Sanjay Bajaj

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