दर्द भरी शायरी

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rajaarkey
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Re: दर्द भरी शायरी

Postby rajaarkey » 04 Jul 2015 08:12

bahut achhe komal ji

puraani shaayari ki baat hi kuch or hai
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Re: दर्द भरी शायरी

Postby rajaarkey » 12 Aug 2015 09:46

पत्थर से दिल लगा कर बर्बाद हो गए,

दिल शाद था मगर अब नाशाद हो गाए,

जिनके वफाओं पर ऐतबार था राज ,

करके हमे तबाह वह खुद आबाद हो गए।
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Re: दर्द भरी शायरी

Postby rajaarkey » 12 Aug 2015 09:47

दिल तू मुहब्बत करता क्यूँ है

ए दिल तू मुहब्बत करता क्यूँ है?
जो करता है तो फिर तड़पता क्यूँ है ?
जो बैठ गया है दिल में प्यार का दर्द
बनकेवोह आँखों के रस्ते निकलता क्यूँ है?........... ..



आग लगती है तो पत्ते भी हवा ही देते है

दोस्त क्या खूब वफाओं का सिला देते है!
हर नए मोड़ पे एक दर्द नया देते है
तुम से तो खैर घडी भर का ताल्लुक रहा,
लोग सदियों की रफ़क़त भुला देते है!!
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Re: दर्द भरी शायरी

Postby jay » 13 Aug 2015 20:33

न आंखों को चैन न जिगर को करार आया
मेरे हिस्से मोहब्बत में बस इंतजार आया


वो मिल न सकी फिर भी उससे मिलते रहे
खयालों में उसपे मैं सबकुछ निसार आया


बरसता रहा गम आंखों से सावन की तरह
हर मौसम मेरे लिए दर्द की फुहार लाया


अब न रहा कुछ भी इस जमाने से वास्ता
तुझे खोकर दुनिया के रिश्ते बिसार आया
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Re: दर्द भरी शायरी

Postby komaalrani » 23 Oct 2015 13:03

आवारा हैं गलियों में मैं और मेरी तनहाई
जाएँ तो कहाँ जाएँ हर मोड़ पे रुसवाई

ये फूल से चहरे हैं हँसते हुए गुलदस्ते
कोई भी नहीं अपना बेगाने हैं सब रस्ते
राहें हैं तमाशाई रही भी तमाशाई

मैं और मेरी तन्हाई

अरमान सुलगते हैं सीने में चिता जैसे
कातिल नज़र आती है दुनिया की हवा जैसे
रोटी है मेरे दिल पर बजती हुई शहनाई

मैं और मेरी तन्हाई

आकाश के माथे पर तारों का चरागाँ है
पहलू में मगर मेरे जख्मों का गुलिस्तां
है आंखों से लहू टपका दामन में बहार आई

मैं और मेरी तन्हाई

हर रंग में ये दुनिया सौ रंग दिखाती है
रोकर कभी हंसती है हंस कर कभी गाती है
ये प्यार की बाहें हैं या मौत की अंगडाई

मैं और मेरी तन्हाई
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Re: दर्द भरी शायरी

Postby jay » 23 Oct 2015 21:51

क्या बात है भाभी जी -..........................-मैं और मेरी तन्हाई.......................

वाह वाह वाह


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