अजब प्रेम की गजब कहानी compleet

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rajaarkey
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अजब प्रेम की गजब कहानी compleet

Post by rajaarkey » 15 Oct 2014 08:33

चेतावनी ...........दोस्तो ये कहानी समाज के नियमो के खिलाफ है क्योंकि हमारा समाज मा बेटे और भाई बहन और बाप बेटी के रिश्ते को सबसे पवित्र रिश्ता मानता है अतः जिन भाइयो को इन रिश्तो की कहानियाँ पढ़ने से अरुचि होती हो वह ये कहानी ना पढ़े क्योंकि ये कहानी एक पारवारिक सेक्स की कहानी है



अजब प्रेम की गजब कहानी --1

लेखक-RKS

हिन्दी फ़ॉन्ट बाइ मी


डिंपल, ओ डिंपल ये अवी कहाँ गया है आज उसको कहा था मैने की मेरी वर्दी मे प्रेस कर देना लेकिन मुझे कही दिखाई नही दे रही है, अरे समझ मैं नही आता कि जब उसको नही करना था तो जाकर धोबी के यहाँ से करवा लाता पर इस नालयक को आवारा गर्दि के अलावा कोई कम नही है, किसी दिन मेरे हाथ से पिट जाएगा और कुछ नही,

डिंपल- अरे पापा उसने प्रेस करके आप की ड्रेस अलमारी मे रख दी थी ये लो, आप तो बेकार मे बेचारे के उपर नाराज़ हो रहे है,

अनिल- अरे अपने इस बेचारे को समझा कि घूमना फिरना बंद करे इस बार 12थ की बोर्ड एग्ज़ॅम है अगर फैल हुआ तो कह देना कि इस घर मे आने की ज़रूरत नही है,

डिंपल- पापा हो जाएगा पास आप क्यो चिंता करते हो

अनिल- अरे क्या ना चिंता करू बड़ी मुश्किल मैं 10थ जैसे तैसे पास हुआ है और अब मैं कहता हू कि पोलीस भरती के लिए थोड़ी दौड़ धूप कर ले मैं एस पी साहेब से बात करके कोशिश कर लूँगा पर इतना नालयक है सुबह 10 बजे सो कर उठता है अब तू ही बता कौन भरती करेगा ऐसे लाड़ साहेब को, कहता है पापा मुझे नही बनना पोलीस वाला, सबसे गंदी नौकरी है वह, अब तू ही उसे कुछ समझा कमाई तो पोलीस वाले की ही खा रहा है और पोलीस की नौकरी को गंदा कहता है,

डिंपल- ऑफ हो पापा अब वह पोलीस मे नही जाना चाहता तो ना सही कुछ और कर लेगा

अनिल- क्या खाक कर लेगा 10 मैं थर्ड डिविषन पास हुआ है और 12 पास होने के कोई ठिकाने नही है, आज कल 80-80 पर्सेंट वालो को नौकरी नही मिलती इस 40 पेसेंट वाले को कोई चपरासी भी नही बनाएगा,

डिंपल- आपकी चाइ ठंडी हो रही है जल्दी पी लो

अनिल चाइ पीते हुए अपने पेर को जूते मे डाल कर, अच्छा डिंपल मैं चलता हू दो दिन बाद इनस्पेक्षन है थाने मे जाकर देखता हू डूटी कहाँ लगी है तू अवी से कह कर मेरे बाकी के कपड़े प्रेस करवा देना, अच्छा मैं जा रहा हू और फिर अनिल घर से निकल जाता है और डिंपल गाना गुनगुनाते हुए घर के कम मे लग जाती है,

वह अपना काम ख़तम करके अपने कॉलेज जाने के लिए दरवाजे तक पहुचती है तभी मनोज नाम का लड़का भागता हुआ उसके दरवाजे के पास आकर

मनोज- हॅयन्फ्ट हुए डिंपल दीदी, डिंपल दीदी,

डिंपल-घबरा कर क्या मनोज इतना घबराया हुआ क्यो है,

मनोज- दीदी वो अवी किसी लड़के को साइकल की चैन ही चैन से बुरी तरह मार रहा है

डिंपल- घबरा कर कहाँ

मनोज- वो सामने वाले चौराहे पर

डिंपल मनोज को साथ लेकर तू चल मेरे साथ और फिर डिंपल दौड़ लगा कर वहाँ पहुचती है तब तक वहाँ कोई नही होता है,

डिंपल- कहाँ है

मनोज- दीदी अभी इसी जगह अवी मार रहा था औ एक दूसरे लड़के से पूछते हुए क्यो अभी एक लड़का यहाँ किसी को मार रहा था ना,

लड़का- हाँ मार रहा था लेकिन पोलीस की गाड़ी को देख कर भाग गया और जो मार खा रहा था वह भी उठ कर भाग गया

उसकी बात सुन कर डिंपल अपना माथा पकड़ते हुए हे भगवान क्या करू इस लड़के का, कही पापा को पता लगा तो आज अवी की खेर नही है,

डिंपल वापस घर आकर अपने आप से बाते करती हुई, कितनी देर हो रही है अभी तक खाना भी नही बन पाया और फिर आज 11:30 पर कॉलेज मे प्रॅक्टिकल भी है और उपर से इस अवी का कोई ठिकाना नही स्कूल कह कर जाता है और फिर कही ना कही लड़ाई झगड़ा करता हुआ नज़र आता है, अगर यह इस साल 12 मे फैल हुआ तो पापा तो ज़रूर इसे घर से निकाल कर ही मानेगे, अभी कुछ देर मे ही स्वीटी भी आती ही होगी, चलो आज दाल चावल बना कर ही अवी के लिए रख देती हू पापा का तो कोई ठिकाना ही नही है वह कब आएगे और फिर डिंपल जल्दी से सब काम निपटा कर जैसे ही अपने कपड़े चेंज करने के लिए घर का गेट लगाने जाती है उसे सामने से अपनी स्कूटी मे स्वीटी आते हुए दिखाई देती है,

स्वीटी- गाड़ी खड़ी करती हुई ओ मेडम अभी तक तुम्हारा मेकप ही हो रहा था क्या आज कॉलेज जाने का इरादा नही है या फिर आज एमसी मे हो, रोज के रोज लेट आख़िर कब तक तेरे चक्कर मे मुझे भी लेट होना पड़ेगा,

डिंपल- मुस्कुराते हुए बस दो मिनिट स्वीटी तू बैठ मैं अभी कपड़े बदल कर आती हू और स्वीटी वही चेर पर बैठ जाती है, डिंपल जल्दी से अपने कपड़े चेंज करने के बाद बाहर आती है और अपना बॅग उठाते हुए चल स्वीटी

स्वीटी- मुस्कुरा कर क्या बात है आज तो मेडम जीन्स और टीशर्त फसा कर जा रही है अगर किसी लोंडे ने तुम्हारी यह गदराई जवानी और भारी चूतादो को दबा दिया तो फिर मुझसे मत कहना

डिंपल-मुस्कुराते हुए, क्यो तू गदराई नही है, तेरे भी चूतड़ क्या कम फैले और उठे हुए है और उपर से जद्दि की साइज़ की तेरी यह स्कर्ट ज़रा खुद को देख आधी नंगी तो वैसे ही लग रही है और उस पर तेरी मोटी-मोटी जंघे पूरी नज़र आ रही है, लड़के मुझे नही तुझे पकड़ ले तो फिर मुझसे मत कहना,
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Re: अजब प्रेम की गजब कहानी

Post by rajaarkey » 15 Oct 2014 08:34

डिंपल-चिंता मत कर तेरी मुराद भी पूरी हो जाएगी जब तू फस्ना चाहती है तो तुझे कोई नही रोक सकता

स्वीटी- मेरी जान कभी-कभी उल्टा हो जाता है जो फस्ना चाहती है उसे कोई नही फसाता और जो नही फस्ना चाहती है उसे ज़रूर कोई ना कोई फसा लेता है, कही ऐसा ना हो कि मुझसे पहले तुझे ही कोई फसा ले

डिंपल- अरे डिंपल को फसाने वाला अभी तक कोई पेदा नही हुआ है

स्वीटी- अरे मेरी जान वह पेदा भी हो गया होगा और तुझे फसा भी लेगा, या तो वह अभी तक तुझसे मिला नही होगा या फिर अगर वह तुझसे मिल लिया होगा तो तेरी गदराई जवानी पर उसकी नज़र नही पड़ी होगी

डिंपल- चल ठीक है देखते है तू भी यही है और मैं भी सब पता चल जाएगा कि कौन फस्ता है और कौन नही

स्वीटी- अच्छा एक बात बता कभी तू मूठ मारती है कि नही

डिंपल-मुस्कुराते हुए स्वीटी अब बंद भी कर अपनी बकवास

स्वीटी- अरे बता ना मुझसे क्यो शर्मा रही है

डिंपल- मुस्कुराते हुए नही मैने ऐसा काम कभी नही किया,

स्वीटी- अरे कुछ तो करती होगी जब तेरा मन करता होगा

डिंपल- मुस्कुराते हुए बस ऐसे ही थोड़ा बहुत अपने हाथ से सहला लेती हू

स्वीटी- यार तू तो गजब है मैं तो जब 10 मे थी तब से ही अपने भैया और भाभी की चुदाई देख चुकी थी और तब से कई बार अपनी चूत मे ना जाने क्या-क्या ट्राइ कर चुकी हू सच जब आख़िरी मे निकलता है ना तो बहुत मज़ा आता है पता नही जब लड़को का मोटा लॅंड घुसता होगा तो कितना मज़ा आता होगा, मेरे पास तो कई सारी सेक्सी किताब भी है अगर तुझे चाहिए तो दे सकती हू

डिंपल- अपने पास ही रख अपनी किताब मुझे नही

देखना वैसे भी मेरे घर मे मेरा भाई और पापा रहते है कही किसी ने तेरी गंदी किताबो को देख लिया तो मुझे घर से ही निकल देंगे

स्वीटी- यार तू डरती बहुत है, अच्छा एक काम कर कंप्यूटर ही खरीद ले उसमे भी नेट चला कर तू मज़ा ले सकती है

डिंपल- देखा जाएगा अभी तो मुझे पढ़ने से ही फ़ुर्सत नही मिलती है उपर से पूरे घर का काम भी मुझे अकेले ही करना पड़ता है, इन सब के बाद टाइम ही कहाँ मिलता है इन सब बातो के लिए

स्वीटी- अच्छा तेरे घर मे तो दो ही बेडरूम है तू किसके साथ सोती है

डिंपल- मैं और अवी एक ही रूम मे सोते है मगर तू यह सब क्यो पूछ रही है

स्वीटी- मतलब तुझे अगर मूठ मारना हो तो तुझे बाथरूम मे ही जाना पड़ेगा तू तो अपने बेड पर पूरी नंगी होकर भी नही सो सकती है

डिंपल- क्यो तू अपने बेड पर रात को नंगी होकर सोती है क्या

स्वीटी- हाँ मैं तो कब से रोज रात को पूरी नंगी होकर ही सोती हू जब तक मैं अपनी चूत और दूध से पूरी नंगी होकर खेल नही लेती हू मुझे तो नींद ही नही आती है

डिंपल- और तू अपने भैया और भाभी के रूम मे भी झाँक कर देखती है ना

स्वीटी- हाँ मुझे उन दोनो को नंगे होकर चुदाई करते देखने मे बहुत मज़ा आता है

डिंपल- तुझे शर्म आना चाहिए ऐसी हरकते करते हुए

स्वीटी- अरे इसमे शर्म की क्या बात है, अगर तू किसी को चोद्ते हुए देखती तो ऐसी बात नही करती तू नही जानती कितना मज़ा आता है जब कोई किसी को चोद्ता है और हम अपनी चूत सहलाते हुए उन्हे चोद्ते देखते है

डिंपल- मतलब तू अपने भैया का लंड देखती है और उत्तेजित होती है

स्वीटी- अरे तो इसमे ग़लत क्या है मुझे अच्छा लगता है तो मैं देख लेती हू

डिंपल- फिर तो तुझे अपने भैया से भी चुदने का मन करता होगा

स्वीटी- देख यार मैने ऐसा कभी सोचा तो नही पर हाँ यह ज़रूर सच है की जब मैं मूठ मारती हू तो कभी-कभी मुझे अपने भैया का मोटा लंड याद आने लगता है और ऐसा लगने लगता है जैसे मेरे भैया ही मुझे नंगी करके चोद रहे हो,

डिंपल- छि तू कितनी गंदी है स्वीटी,

स्वीटी- अरे अब इसमे गंदी बात क्या है क्या किसी का लंड देखना गंदी बात है

डिंपल- किसी का लंड देखना गंदी बात नही है पर अपने बड़े भाई के लंड को सोच कर अपनी कल्पना मे चुदना गंदी बात है

स्वीटी- देख डिंपल हर इंसान की सोच समय के साथ बदल जाती है पहले मैं भी अपने भैया के बारे मे कभी ऐसा नही सोचती थी लेकिन एक दिन जब ग़लती से मैने उनका मोटा लंड देख लिया तो धीरे-धीरे मेरी सोच भी चेंज हो गई और अभी तुझे ऐसा लगता है कि यह ग़लत है हो सकता है कभी तू भी अपने भाई का लंड देख ले और तुझे उसके लंड से चुदने का मन होने लगे

डिंपल- मैं तेरी जैसी चुड़क्कड़ नही हू कि अपने भाई के लंड से ही चुद जाउ

स्वीटी- सब समय की बाते है मेरी जान वक़्त कब क्या करवा दे कोई नही जानता

डिम्पलाए- चल अब चले यहा से क्लास का टाइम हो रहा है और फिर दोनो उठ कर क्लास मे चली जाती है,

अवी- और क्या रघु भाई क्या हाल है

रघु- अरे आओ अवी भैया क्या बात है आजकल तो आपको हमारी याद ही नही आती बहुत दिनो मे हमारी दुकान पर आए हो

अवी- अरे ऐसी बात नही है रघु भाई थोड़ा बिज़ी था फिर आज सोचा कि चल के रघु भाई के यहा पान ही खा लिया जाए

रघु- तो फिर आ जाओ यहा काउंटर को थोड़ा सरका कर बैठो मैं अभी आपको बढ़िया बनारसी पत्ता बनाकर खिलाता हू

अवी- अरे रघु भाई वो सामने वाली भाभी ने आज अपनी शॉप नही खोली कही गई है क्या

रघु- मुस्कुराते हुए, आप भी ना अवी भैया जब तक उसके मतकते चूतादो को देख नही लेते आपका दिल नही लगता है,

अरे उधर देखो क्या माल जा रहा है क्या गदराई गंद है साली की

अवी- अरे रघु भाई बहुत ही मोटी गंद है उसकी तो क्या मस्त औरत है कितने साल की होगी

रघु- अरे अवी हैया होगी कम से कम 35-40 की

अवी- यार रघु भाई अपने यहा की औरतो के चूतड़ गजब भारी-भारी हो गये है बहुत ही मज़ा दे अगर चोदने को मिल

जाए तो

रघु- अपने लंड को पेंट के उपर से मसलता हुआ, मुस्कुरकर अवी भैया हमे आपकी यही बात तो सबसे अच्छी लगती है

आप 5 मिनिट के लिए भी हमारी दुकान पर आते हो तो हमारा लंड खड़ा किए बिना नही मानते हो

अवी- अरे रघु भाई तुम्हारी दुकान है ही ऐसी जगह पर कि अगर मैं यहाँ दिन भर बैठा रहू तो यहा से इतने गदराए हुए

माल निकलते है क मेरा लंड दिनभर खड़ा रहे पता नही तुम कैसे चुपचाप पान लगाते बैठे रहते हो

रघु- लो पान लो भैया हमारी तो आदत पड़ गई है, कभी-कभी तो इतने गदराए और भारी चूतादो वाली औरते दिख जाती है

की लगता है साला पेंट मे ही पानी निकल जाएगा,

रघु- अच्छा अवी भैया मैने सुना आज तुमने फिर किसी की धुनाई करदी

अवी- हा यार बहन्चोद तीन चार दिन से मेरी दीदी को लाइन मारने की कोशिश कर रहा था अब नही मा चुदायेगा अपनी जम कर बजाया है साले को आज

रघु- लेकिन अवी भैया तुम्हे कैसे पता चला कि वह डिंपल दीदी के चक्कर मे था

अवी- अरे मैं दीदी के कॉलेज मे नही पढ़ता तो क्या हुआ मेरे खबरी उसके कॉलेज मे भी मौजूद है मुझे उस कॉलेज की

हर खबर रहती है कि कब क्या हो रहा है और फिर बस इसी साल की बात है रघु भाई अगले साल से तो मैं खुद उस कॉलेज मे

चला जाउन्गा फिर देखना तुम कैसे मैया चोद्ता हू इन बहन्चोदो की

रघु- और थानेदार साहेब की ड्यूटी कहाँ लगी है आजकल

अवी- अरे पापा का क्या है उनके संबंध तो सीधे एसपी से है वह जब चाहे जहा चाहे ट्रान्स्फर भी ले सकते है या ड्यूटी भी

बदल सकते है वैसे अभी तो वह हमारे थाना क्षेत्रा के ही इंचार्ग है

अच्छा रघु भाई पान के पैसे खाते मे लिख लेना अब मैं चलता हू दीदी वेट कर रही होगी,

क्रमशः........

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Re: अजब प्रेम की गजब कहानी

Post by rajaarkey » 15 Oct 2014 08:35

AJAB PREM KI GAJAB KAHANI --1

dimple, O dimple ye avi kaha gaya hai aaj usko kaha tha maine ki meri vardi mai press kar dena lekin mujhe kahi dikhai nahi de rahi hai, are samajh mai nahi aata ki jab usko nahi karna tha to jakar dhobi ke yaha se karwa lata par is nalayak ko awara gardi ke alawa koi kam nahi hai, kisi din mere hath se pit jayega aur kuch nahi,

dimple- are papa usne press karke aap ki dress almari mai rakh di thi ye lo, aap to bekar mai bechare ke upar naraj ho rahe hai,

anil- are apne is bechare ko samjha ki ghumna phirna band kare is bar 12th ki board exam hai agar fail hua to kah dena ki is ghar mai aane ki jarurat nahi hai,

dimple- papa ho jayega pas aap kyo chinta karte ho

anil- are kya na chinta karu badi mushkil mai 10th jaise taise pass hua hai aur ab mai kahta hu ki police bharti ke liye thodi daud dhup kar le mai sp saheb se bat karke koshish kar lunga par itna nalayak hai subah 10 baje so kar uthta hai ab tu hi bata kaun bharti karega aise lad saheb ko, kahta hai papa mujhe nahi banna police wala, sabse gandi naukri hai vah, ab tu hi use kuch samjha kamai to police wale ki hi kha raha hai aur police ki naukri ko ganda kahta hai,

dimple- off ho papa ab vah police mai nahi jana chahta to na sahi kuch aur kar lega

anil- kya khak kar lega 10 mai thired division pass hua hai aur 12 pass hone ke koi thikane nahi hai, aaj kal 80-80 percent walo ko naukri nahi milti is 40 pecent wale ko koi chaprasi bhi nahi banayega,

dimple- aapki chai thandi ho rahi hai jaldi pi lo

anil chai pite huye apne per ko jute mai dal kar, achcha dimple mai chalta hu do din bad inspection hai thane mai jakar dekhta hu deuty kaha lagi hai tu avi se kah kar mere baki ke kapde press karwa dena, achcha mai ja raha hu aur phir anil ghar se nikal jata hai aur dimple gana gungunate huye ghar ke kam mai lag jati hai,

vah apna kam khatam karke apne college jane ke liye darwaje tak pahuchti hai tabhi manoj nam ka ladka bhagta hua uske darwaje ke pass aakar

manoj- hafte huye dimple didi, dimple didi,

dimple-ghabra kar kya manoj itna ghabraya hua kyo hai,

manoj- didi vo avi kisi ladke ko cycle ki chain hi chain se buri tarah mar raha hai

dimple- ghabra kar kaha

manoj- vo samne wale chaurahe par

dimple manoj ko sath lekar tu chal mere sath aur phir dimple daud laga kar vaha pahuchti hai tab tak vaha koi nahi hota hai,

dimple- kaha hai

manoj- didi abhi isi jagah avi mar raha tha au ek dusre ladke se puchte huye kyo abhi ek ladka yaha kisi ko mar raha tha na,

ladka- ha mar raha tha lekin police ki gadi ko dekh kar bhag gaya aur jo mar kha raha tha vah bhi uth kar bhag gaya

uski bat sun kar dimple apna matha pakadte huye he bhagwan kya karu is ladke ka, kahi papa ko pata laga to aaj avi ki kher nahi hai,

dimple vapas ghar aakar apne aap se bate karti hui, kitni der ho rahi hai abhi tak khana bhi nahi ban paya aur phir aaj 11:30 par college mai practical bhi hai aur upar se is avi ka koi thikana nahi school kah kar jata hai aur phir kahi na khi ladai jhagda karta hua najar aata hai, agar yah is sal 12 mai fail hua to papa to jarur ise ghar se nikal kar hi manege, abhi kuch der mai hi sweety bhi aati hi hogi, chalo aaj dal chawal bana kar hi avi ke liye rakh deti hu papa ka to koi thikana hi nahi hai vah kab aayege aur phir dimple jaldi se sab kam nipta kar jaise hi apne kapde change karne ke liye ghar ka gate lagane jati hai use samne se apni scooty mai sweety aate huye dikhai deti hai,

sweety- gadi khadi karti hui o madam abhi tak tumhara makup hi ho raha tha kya aaj college jane ka irada nahi hai ya phir aaj mc mai ho, roj ke roj late aakhir kab tak tere chakkar mai mujhe bhi late hona padega,

dimple- muskurate huye bas do minute sweety tu beth mai abhi kapde badal kar aati hu aur sweety vahi chair par beth jati hai, dimple jaldi se apne kapde change karne ke bad bahar aati hai aur apna bag uthate huye chal sweety

sweety- muskura kar kya bat hai aaj to madam jeans aur tshirt phasa kar ja rahi hai agar kisi londe ne tumhari yah gadrai jawani aur bhari chutado ko daba diya to phir mujhse mat kahna

dimple-muskurate huye, kyo tu gadrai nahi hai, tere bhi chutad kya kam phaile aur uthe huye hai aur upar se jaddi ki size ki teri yah skirt jara khud ko dekh aadhi nangi to vaise hi lag rahi hai aur us par teri moti-moti janghe puri najar aa rahi hai, ladke mujhe nahi tujhe pakad le to phir mujhse mat kahna,

sweety- muskura kar hay janeman mai to chahti hi hu ki koi mast londa meri jangho ko aakar chum le lekin apne college ke londe bhi sale dabbu kisam ke hai ladkiyo se ijhar karne mai to unki fatne lagti hai ladkiyo ko pakad kar dabochne ki to unki himmat hi nahi ho sakti hai, bas apni ullu jaisi najro se hamari gadrai jawani ko dekh-dekh kar hi aahe bharte rahte hai,

dimple- ab chal bhi tu to ek bar shuru ho jati hai to phir band hone ka nam hi nahi leti chal start kar gadi

sweety- gadi start karke, dimpale ko betha leti hai aur gadi apne college ki aur uda deti hai,

sweety- achcha kuch din se tera chikna bhai najar nahi aa raha hai,

dimple- are ab kya batau sweety mai to uske mare pareshan ho gai hu

sweety- kyo kya hua kahi vah tujhe akele mai pakadne to nahi laga hai vaise bhi ghar mai tu dinbhar akeli hi rahti hai

dimple- sweety ki pith par marti hui, kabhi to achchi bate kiya kar jab dekho ulti bakwas karti rahti hai, are mai to uski harkato se tang aa gai hu din bhar awaragardi ke alawa uske pas koi kam hi nahi hai aur ghar par to tikta hi nahi hai subah school ka kah kar nikal jata hai uske bad uski harkato ki din bhar kisi na kisi ke muh se charchaye sunne ko milti rahti hai aur sham ko 7 baje aayega kahega tution bhi padh kar aa raha hai aur phir khana khane ke bad rat ko 1 baje tak tv mai ghusa rahega aur phir vahi subah usko jakar mar-mar kar jagao aur phir jabaran request karke school bhejo pata nahi uska bachpana kab jayega aur ladaku to itna hai ki jara si bat par bigad jayega

sweety- bhai ye ladke hote hi aise hai par ek bat mujhe samajh mai nahi aai ki vah dinbhar karta kya hai agar school nahi jata to, kahi kisi londiya ke chakkar mai to nahi laga hai

dimple- apne chehre par gussa lati hui, mera bhai aisa nahi hai

sweety- muskurate huye, kyo uske pas lulli nahi hai kya

dimple- msukurate huye sweety ki peeth par mar kar tu phir shuru ho gai apan dhyan gadi chalane mai laga

sweety- vaise ek bat to hai dimple

dimple- kya

sweety- tera bhai hai to bada handsome aur chikna bhi bahut hai agle sal se hamare college mai hi aayega na, dekh lena londiyo ki line lag jayegi use patane ke liye

dimple- kuch sochti hui are pahle 12 to pass ho jaye phir uske college mai aane ke bare mai sochna

sweety- yaar ho jayega pass tu bekar tension karti hai

dono bate karte-karte college pahuch jati hai aur dono Bsc I year ki practicle lab mai pahuch jati hai

practicle karne ke bad dono canteen mai jakar khane pine lagti hai aur

dimple- yaar sweety sunday ko chal shoping karne chalte hai mujhe kuch saman kharidna hai

sweety- kya bat hai abhi pichle mahine hi tune nai bra aur penty kharidi thi na itni jaldi kaise phad deti hai tu

dimple-muskurate huye, tujhe in sab bato ke alawa bhi kuch sujhta hai ki nahi

sweety- muskurakar vo to thik hai par tujhe bhi to meri bate achchi lagti hai na

dimple-haste huye tu badi kamini hai, pata nahi abhi tak kunwari kaise bachi hui hai

sweety- are meri chut to bahut pani chodti hai man bhi bahut hota hai par darti hu kise se marwa li aur vah chod kar bhag gaya ya kisi se kah kar mujhe badnam kar diya to meri bhabhi aur bhaiya to meri jan hi le lenge

dimple- muskurate huye mujhe to nahi lagta teri harkato ko dekh kar ki tu shadi tak ruk payegi

sweety- meri jan meri harkate to tu dekh rahi hai par teri khamoshi mujh se bhi jyada khatarnak hai jo log kuch baya nahi karte vah jyada khatarnak hote hai, vasie bhi tujhe dekh kar koi bhi kah sakta hai ki yah ladki bahut sexy hogi

dimple- muskurate huye kyo mere chehre par likha hai kya ki mai bahut sexy hu

sweety- are tu to itni gadrai aur mast lagti hai ki mai ladka hoti to abhi tak tujhe phasa kar jarur chod deti

dimple- apna aguntha dikha kar apni jeebh nikal kar muskurate huye jaise mai tujhse phas hi jati, mujhe phasane ke liye jo bhi ladka try karega use aidi choti tak ka jor lagana padega uske bad bhi mai usse phas jau iski koi guaranty nahi hai

sweety- mai to phasne ke liye taiyar bethi hu par koi mua try hi nahi karta

dimple-chinta mat kar teri murad bhi puri ho jayegi jab tu phasna chahti hai to tujhe koi nahi rok sakta

sweety- meri jan kabhi-kabhi ulta ho jata hai jo phasna chahti hai use koi nahi phasata aur jo nahi phasna chahti hai use jarur koi na koi phasa leta hai, kahi aisa na ho ki mujhse pahle tujhe hi koi phasa le

dimple- are dimple ko phasane wala abhi tak koi peda nahi hua hai

sweety- are meri jan vah peda bhi ho gaya hoga aur tujhe phasa bhi lega, ya to vah abhi tak tujhse mila nahi hoga ya phir agar vah tujhse mil liya hoga to teri gadrai jawani par uski najar nahi padi hogi

dimple- chal thik hai dekhte hai tu bhi yahi hai aur mai bhi sab pata chal jayega ki kaun phasta hai aur kaun nahi

sweety- achcha ek bat bata kabhi tu mutth marti hai ki nahi

dimple-muskurate huye sweety ab band bhi kar apni bakwas

sweety- are bata na mujhse kyo sharma rahi hai

dimple- muskurate huye nahi maine aisa kam kabhi nahi kiya,

sweety- are kuch to karti hogi jab tera man karta hoga

dimple- muskurate huye bas aise hi thoda bahut apne hath se sahla leti hu

sweety- yaar tu to gajab hai mai to jab 10 mai thi tab se hi apne bhaiya aur bhabhi ki chudai dekh chuki thi aur tab se kai bar apni chut mai na jane kya-kya try kar chuki hu sach jab aakhiri mai nikalta hai na to bahut maza ata hai pata nahi jab ladko ka mota land ghusta hoga to kitna maza aata hoga, mere pas to kai sari sexy kitab bhi hai agar tujhe chahiye to de sakti hu

dimple- apne pas hi rakh apni kitab mujhe nahi

dekhna vaise bhi mere ghar mai mera bhai aur papa rahte hai kahi kisi ne teri gandi kitabo ko dekh liya to mujhe ghar se hi nikal denge

sweety- yaar tu darti bahut hai, achcha ek kam kar computer hi kharid le usme bhi net chala kar tu maza le sakti hai

dimple- dekha jayega abhi to mujhe padhne se hi fursat nahi milti hai upar se pure ghar ka kam bhi mujhe akele hi karna padta hai, in sab ke bad time hi kaha milta hai in sab bato ke liye

sweety- achcha tere ghar mai to do hi bedroom hai tu kiske sath soti hai

dimple- mai aur avi ek hi room mai sote hai magar tu yah sab kyo puch rahi hai

sweety- matlab tujhe agar mutth marna ho to tujhe bathroom mai hi jana padega tu to apne bed par puri nangi hokar bhi nahi so sakti hai

dimple- kyo tu apne bed par rat ko nangi hokar soti hai kya

sweety- ha mai to kab se roj rat ko puri nangi hokar hi soti hu jab tak mai apni chut aur doodh se puri nangi hokar khel nahi leti hu mujhe to neend hi nahi aati hai

dimple- aur tu apne bhaiya aur bhabhi ke room mai bhi jhank kar dekhti hai na

sweety- ha mujhe un dono ko nange hokar chudai karte dekhne mai bahut maza aata hai

dimple- tujhe sharm aana chahiye aisi harkate karte huye

sweety- are isme sharm ki kya bat hai, agar tu kisi ko chodte huye dekhti to aisi bat nahi karti tu nahi janti kitna maza aata hai jab koi kisi ko chodta hai aur hum apni chut sahlate huye unhe chodte dekhte hai

dimple- matlab tu apne bhaiya ka land dekhti hai aur uttejit hoti hai

sweety- are to isme galat kya hai mujhe achcha lagta hai to mai dekh leti hu

dimple- phir to tujhe apne bhaiya se bhi chudne ka man karta hoga

sweety- dekh yar maine aisa kabhi socha to nahi par ha yah jarur sach hai ki jab mai mutth marti hu to kabhi-kabhi mujhe apne bhaiya ka mota land yaad aane lagta hai aur aisa lagne lagta hai jaise mere bhaiya hi mujhe nangi karke chod rahe ho,

dimple- chhi tu kitni gandi hai sweety,

sweety- are ab isme gandi bat kya hai kya kisi ka land dekhna gandi bat hai

dimple- kisi ka land dekhna gandi bat nahi hai par apne bade bhai ke land ko soch kar apni kalpana mai chudna gandi bat hai

sweety- dekh dimple har insan ki soch samay ke sath badal jati hai pahle mai bhi apne bhaiya ke bare mai kabhi aisa nahi sochti thi lekin ek din jab galti se maine unka mota land dekh liya to dhire-dhire meri soch bhi change ho gai aur abhi tujhe aisa lagta hai ki yah galat hai ho sakta hai kabhi tu bhi apne bhai ka land dekh le aur tujhe uske land se chudne ka man hone lage

dimple- mai teri jaisi chudakkad nahi hu ki apne bhai ke land se hi chud jau

sweety- sab samay ki bate hai meri jan waqt kab kya karwa de koi nahi janta

dimplae- chal ab chale yaha se class ka time ho raha hai aur phir dono uth kar class mai chali jati hai,

avi- aur kya raghu bhai kya hal hai

raghu- are aao avi bhaiya kya bat hai aajkal to aapko hamari yaad hi nahi aati bahut dino mai hamari dukan par aaye ho

avi- are aisi bat nahi hai raghu bhai thoda busy tha phir aaj socha ki chal ke raghu bhai ke yaha pan hi kha liya jaye

raghu- to phir aa jao yaha counter ko thoda sarka kar betho mai abhi aapko badhiya banarsi patta banakar khilata hu

avi- are raghu bhai vo samne wali bhabhi ne aaj apni shop nahi kholi kahi gai hai kya

raghu- muskurate huye, aap bhi na avi bhaiya jab tak uske matkate chutado ko dekh nahi lete aapka dil nahi lagta hai,

are udhar dekho kya mal ja raha hai kya gadrai gand hai sali ki

avi- are raghu bahi bahut hi moti gand hai uski to kya mast aurat hai kitne sal ki hogi

raghu- are avi haiya hogi kam se kam 35-40 ki

avi- yaar raghu bhai apne yaha ki aurto ke chutad gajab bhari-bhari ho gaye hai bahut hi maza de agar chodne ko mil

jaye to

raghu- apne land ko pent ke upar se masalta hua, muskurakar avi bhaiya hame aapki yahi bat to sabse achchi lagti hai

aap 5 minute ke liye bhi hamari dukan par aate ho to hamara land khada kiye bina nahi mante ho

avi- are raghu bhai tumhari dukan hai hi aisi jagah par ki agar mai yaha din bhar betha rahu to yaha se itne gadraye huye

mal nikalte hai k mera land dinbhar khada rahe pata nahi tum kaise chupchap pan lagate bethe rahte ho

raghu- lo pan lo bhaiya hamari to aadat pad gai hai, kabhi-kabhi to itne gadraye aur bhari chutado wali aurte dikh jati hai

ki lagta hai sala pent mai hi pani nikal jayega,

raghu- achcha avi bhaiya maine suna aaj tumne phir kisi ki dhunai kardi

avi- ha yaar bahanchod teen char din se meri didi ko line marne ki koshish kar raha tha ab nahi ma chudayega apni jam

kar bajaya hai sale ko aaj

raghu- lekin avi bhaiya tumhe kaise pata chala ki vah dimple didi ke chakkar mai tha

avi- are mai didi ke college mai nahi padhta to kya hua mere khabri uske college mai bhi maujud hai mujhe us college ki

har khabar rahti hai ki kab kya ho raha hai aur phir bas isi sal k bat hai raghu bhai agle sal se to mai khud us college mai

chala jaunga phir dekhna tum kaise maiya chodta hu in bahanchodo ki

raghu- aur thanedar saheb ki duty kaha lagi hai aajkal

avi- are papa ka kya hai unke sambandh to sidhe sp se hai vah jab chahe jaha chahe transfer bhi le sakte hai ya duty bhi

badal sakte hai vaise abhi to vah hamare thana kshetra ke hi incharg hai

achcha raghu bhai pan ke paise khate mai likh lena ab mai chalta hu didi wait kar rahi hogi,

kramashah........
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Re: अजब प्रेम की गजब कहानी

Post by rajaarkey » 15 Oct 2014 08:37

अजब प्रेम की गजब कहानी --2

गतान्क से आगे......

रघु- अरे अवी भैया आप बार-बार पैसो का कह कर हमे शर्मिंदा ना किया करो, आपसे पैसा माँगता कौन है

अवी- नही रघु भाई दोस्ती अपनी जगह और धंधा अपनी जगह होना चाहिए, ठीक है अब मैं चलता हू

रघु- अच्छा अवी भैया फिर आना

अवी- अपने घर की ओर पेदल-पेदल चल देता है और घर पहुच कर

डिंपल- आ गये लाड़ साहेब, पूरा दिन आवारा गार्दी के अलावा भी कुछ काम रहता है आपके पास

अवी- मुस्कुराता हुआ, कहाँ दीदी मैं तो ट्यूशन गया था

डिंपल- अपने चेहरे पर गुस्सा दिखाते हुए, झूठ मत बोल, तू क्या मुझे पागल समझता है, मैं सब जानती हू दिन भर

यहाँ वहाँ फिरने के अलावा और कुछ नही करता है और उपर से स्कूल से भी गायब रहता है, और आज किसके साथ मारपीट

कर रहा था, है बोलता क्यो नही

अवी- अरे दीदी वह तो बस ऐसे ही छोटी मोटी बात थी तुम तो बेकार परेशान हो रही हो

डिंपल- मुझे क्या करना है, जब पापा पूछेगे तब बताना उनको कि छोटी बात थी या बड़ी, वैसे भी वह तुझ पर सुबह से

ही भड़क रहे थे

अवी- क्यो अब मैने ऐसा क्या कर दिया

डिंपल- देख अवी अब बहुत मौज मस्ती कर ली तूने डिसेंबर भी ख़तम होने वाला है सिर्फ़ दो महीने है तेरी एग्ज़ॅम के

थोड़ा पढ़ ले तो कम से कम पास तो हो जाएगा, नही तो समझ ले अगर फैल हुआ तो पापा तुझे घर से ही भगा देंगे

अवी- डिंपल का हाथ पकड़ते हुए ठीक है अगर पापा भागाते है तो मैं चला जाउन्गा पर तुम्हे भी मेरे साथ चलना

होगा, क्यो कि मैं पापा के बगैर तो रह लूँगा पर तुम्हारे बिना कैसे रह पाउन्गा

डिंपल- मुस्कुराते हुए उसके गाल खींच कर चल अब ज़्यादा बाते ना बना जा जाकर हाथ मूह धो कर आ मैं तेरे लिए खाना

लगाती हू, अवी हाथ मूह धोकर आ जाता है और डिंपल सोफे के सामने नीचे आसान लगा कर अवी की थाली रख देती है और

खुद सोफे पर टिक कर अपने दोनो पेर मोड़ कर सोफे पर रख लेती है और अवी आकर उसके सामने आसान पर बैठ कर खाना

शुरू करता है फिर खाते हुए डिंपल की ओर देखता है और अचानक उसकी नज़र डिम्पल की सलवार पर पड़ती है जो उसकी

फूली हुई चूत के पास से फटा हुआ था और उसकी सफेद कलर की पेंटी उसकी चूत को फुलाए हुए साफ नज़र आ रही थी,
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Re: अजब प्रेम की गजब कहानी

Post by rajaarkey » 15 Oct 2014 08:38

अवी

एक पल के लिए उसकी दोनो जाँघो के बीच देखने लगता है और डिंपल की नज़र उसके उपर पड़ती है और वह एक दम से झुक

कर अपनी जाँघो की जड़ो मे देखती है और अपनी फटी सलवार से झाँकती उसकी फूली हुई चूत को कसे हुए सफेद पेंटी पर

पड़ती है और फिर वह जैसे ही अवी को देखती है दोनो की नज़रे मिल जाती है और डिंपल एक दम से अपनी नज़रे नीचे करती हुई

अपने पेर नीचे कर लेती है और अवी अपनी बहन के शरमाये हुए चेहरे को देख कर अपनी नज़रे वापस थाली पर लगा कर

खाने लगता है,

कुछ देर बाद अवी डिंपल को देखता है और उनकी नज़रे फिर मिल जाती है और इस बार डिंपल अपनी नज़रे हटा कर उठ कर अपनी

गदराई गंद मतकाती हुई किचन की ओर जाने लगती है और अवी अपनी एक नज़र डिंपल की कसी हुई गदराई जवानी पर मारता है

और उसकी नज़रे अपनी बहन के भारी-भारी मटकते हुए चूतादो पर पहली बार एक अलग अंदाज से पड़ती है और उसका हाथ

उसकी थाली मे ही रुक जाता है और वह अपनी दीदी के मस्ताने मटकते चूतादो को घूर-घूर कर देखने लगता है तभी

अचानक डिंपल पलट कर अवी को देखती है और उसे अपने मोटे-मोटे चूतादो को घूरता हुआ पकड़ लेती है और दोनो की

नज़रे एक बार फिर से मिल जाती है और अवी जल्दी से अपनी नज़रे नीचे करके खाने लगता है और डिंपल उसको घुरती हुई किचन

मे चली जाती है और कुछ देर बाद प्लॅट मे रोटी लेकर आती है इस बार अवी उसको आते हुए देखता है और उसकी नज़रे अपनी दीदी की मोटे-मोटे दूध को देखने लगती है डिंपल उसकी नज़रो को ताड़ जाती है और अपनी नज़रे नीचे किए हुए आकर झुकती है और उसकी थाली मे रोटी रखने लगती है, इस बार अवी बिल्कुल करीब से अपनी दीदी की कमीज़ मे से झँकते बड़े-बड़े दूध को

देखने लगता है और जैसे ही डिंपल की आँखो मे देखता है उन दोनो की नज़रे बिल्कुल करीब से मिल जाती है और डिंपल

अपने चेहरे पर थोड़ा गुस्सा दिखाती है और अवी उसकी आँखो से अपनी नज़रे हटा कर वापस उसके दूध पर एक सरसरी नज़र मारते हुए अपनी थाली की ओर देखते हुए खाने लगता है,

डिंपल जैसे ही पलट कर जाने लगती है अवी फिर से उसके भारी-भारी मटकते हुए चूतादो को देखने लगता है और डिंपल

फिर से उसे जैसे ही पलट कर देखती है अवी को अपने चूतादो को देखता हुआ पाती है और उसे गुस्से से घूर कर देखती हुई

किचन मे घुस जाती है लेकिन किचन मे घुसते ही ना जाने क्यो उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ जाती है.

डिंपल किचन से आवाज़ लगा कर अवी और कुछ लेना है

अवी- नही दीदी बस हो गया

डिंपल- एक रोटी और ला दू

अवी- नही दीदी बस

डिंपल किचन से बाहर आकर क्या बात है आज ठीक से खाना क्यो नही खा रहा है

अवी- अपनी नज़रे थाली मे ही गढ़ाए हुए बस दीदी आज ज़्यादा भूख नही है

डिंपल- अच्छी बात है और डिंपल वापस किचन मे चली जाती जाई, अवी खाना खाने के बाद वही सोफे पर बैठ जाता है और

डिंपल अपने लिए खाना लेकर अवी की जगह पर बैठ कर खाने लगती है और अवी अपनी बहन के खूबसूरत चेहरे को देखने

लगता है और अपने मन मे सोचने लगता है- दीदी कितनी खूबसूरत और जवान दिखती है, आज तक मेरी नज़र दीदी के इस मनमोहक हुस्न पर पड़ी क्यो नही, कितने सुंदर गाल और होंठ है और दीदी की आँखे कितनी खूबसूरत और नशीली है जब

दीदी ने गुस्से से मुझे अपनी नशीली आँखो से देखा था तब एक दम से दीदी का चेहरा देख कर मेरा तो लंड खड़ा सा हो

गया था, एक अलग ही कशिश है दीदी की आँखो मे, कितनी प्यारी है दीदी को देख कर तो मुझे ऐसा लगता है कि उसे अपनी गोद

मैं बैठा कर उसे खूब प्यार करू, उसके पूरे चेहरे को, होंठो को पागलो की तरह चुमू, कितनी सुंदर और सेक्सी है मेरी

दीदी,

डिंपल- क्या देख रहा है अवी इस तरह मुझे घूर कर

अवी- अपने ख्यालो से एक दम से बाहर आता हुआ, कुछ नही दीदी, देख रहा हू कि आप कितनी जल्दी-जल्दी खा रही हो लगता है

आपको बहुत भूख लगी थी,

डिंपल- मुस्कुराते हुए हाँ रे, आज सुबह दाल चावल बना कर चली गई थी और खाना भी नही खाया था फिर कॅंटीन मे

ही थोड़ा बहुत नाश्ता किया इसलिए इस वक़्त तक तो मेरे पेट मे चूहे कूदने लगे थे, तभी डिंपल को थस्का लग जाता है

और वह खांसने लगती है और अवी दौड़ कर किचन से पानी लेकर आता है और डिंपल को दे देता है और डिंपल पानी पी कर

मुस्कुराते हुए, क्या बात है आज बड़ी सेवा कर रहा है अपनी दीदी की

अवी- दीदी मे आपकी किसी भी काम मे कोई हेल्प नही करता हू ना और दिन भर आवारा जैसे घूमता रहता हू, लेकिन कल से मे

आपकी सभी काम मे हेल्प किया करूँगा
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