जोरू का गुलाम या जे के जी

दोस्तो इस फोरम में आप हिन्दी और रोमन (Roman ) स्क्रिप्ट में नॉवल टाइप की कहानियाँ पढ़ सकते हैं
komaalrani
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जोरू का गुलाम या जे के जी

Post by komaalrani » 04 Jul 2015 23:22

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आ रहा है , आ रहा है , आरहा है

इसी फोरम में पहली बार , आप सबकी मांग पर





जोरू का गुलाम (हिंदी में )




"मेरे भैय्या , आम छू भी नहीं सकते ,…"

" अरे तूने कभी अपनी ये कच्ची अमिया उन्हें खिलाने की कोशिश की , कि नहीं , शर्तिया खा लेते " चिढ़ाते हुए मैं बोली।

जैसे न समझ रही हो वैसे भोली बन के उसने देखा मुझे।

" अरे ये , " और मैंने हाथ बढ़ा के उसके फ्राक से झांकते , कच्चे टिकोरों को हलके से चिकोटी काट के चिढ़ाते हुए इशारा किया और वो बिदक गयी।

" पास भी नहीं आएंगे आपके , मैं समझा रही हूँ आपको , मैं अपने भैया को आपसे अच्छी तरह समझतीं हूँ, आपको तो आये अभी तीन चार महीने भी ठीक से नहीं हुए हैं . अच्छी तरह से टूथपेस्ट कर के , माउथ फ्रेशनर , … वरना,… "उस छिपकली ने गुरु ज्ञान दिया।

" ये देख रही हो , अब ये चाहिए तो पास आना पड़ेगा न " मुस्करा के मैंने अपने गुलाबी रसीले भरे भरे होंठों की ओर इशारा करके बताया। और एक और दसहरी आम उठा के सीधे मुंह में , …और जब मैं ऊपर कमरे की ओर गयी तो उसे दिखा के , मेरे होंठों से न सिर्फ आमरस टपक रहा था बल्कि मेरी जुबान पे एक छोटी सी फांक अभी भी थी।

जैसे बच्चे चिढ़ाते हैं बस वैसे , उसे दिखाते हुए , मैंने जुबान दिखायी और जुबान से ज्यादा , उसपर रखी आम की फांक , और धड़धड़ा के सीधे सीढ़ियां चढ़ गयी ऊपर अपने कमरे की ओर।

लेकिन मेरे कानों में सिर्फ उसकी बात गूँज रही थी , और मैंने दिल में तय कर लिया ,

की अपनी इस छुटकी छिनार ननदिया को की , मेरे भैय्या ये मेरे भैय्या वो , देख तेरे ये १६ साल के गदराये आम तेरे सीधे सादे भैय्या को न खिलाये तो कहना।


मैं भी न कहीं से कहानी शुरू कर देती हूँ ,इसलिए तो न तो मेरी कहानी को कोई पढता है और न लाइक करता है। अरे कहानी शुरू से शुरू कर और अंत पे खत्म और फिर जब कहानी अपनी हो , अपनी जुबानी हो तो फिर ये उछल कूद क्यों ,

ओके ओके चलिए शुरू से शुरू करती हूँ।


शादी के बाद मेरी विदायी , मम्मी मुझे गलें भेंट रही थी और जब बाकी मम्मी नौ नौ आंसू रोती हैं , बेटी को ससुराल में अच्छे से रहने के कायदे ,सास के पैर छूने के बारे में सिखाती हैं वो मेरे कान में बोल रही थीं ,

' देख जैसा इसके मायकेवालों ने ट्रेन किया हो न एकदम उसके उल्टा , शादी के बाद एकदम बदल जाए तो बात है। अगर स्मोकर हो न तो एकदम नान स्मोकर और अगर हाथ न लगाता हो तो चेन स्मोकर , तभी तो मायकेवालियों को लगेगा की , .... पूरी दुनिया को लगे की शादी के बाद एकदम बदल गया। तभी तो , …"

मैंने अपना पल्लू सम्हालते हुए धीरे से हामी में सर हिलाया।








तो बस अपनी जगह आप बुक करा लें ,


और ये हिंदी अनुवाद नहीं है बल्कि ,ढेर सारी मिर्च मसाले और नए तड़के के साथ


खास तौर पे इस फोरम के लिए एक्सक्लूसिव,


तो ,.... वाच दिस स्पेस

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jay
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Re: जोरू का गुलाम या जे के जी

Post by jay » 05 Jul 2015 08:29

कोमल जी एक और नई कहानी के लिए आपको मुबारकबाद

आप तो प्रतिभाओं का भंडार हो इस कहानी को हिन्दी फ़ॉन्ट में लिख कर आपने अपने पाठक वर्ग पर विशेष अनुकंपा की बरसात की है हम सब आपके आभारी हैं

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rajaarkey
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Re: जोरू का गुलाम या जे के जी

Post by rajaarkey » 05 Jul 2015 10:19

कोमल जी मेरी भी हाज़िरी लगा कर मेरी सीट पक्की कर देना मैं भी इस मस्ती के सफ़र पर आपके साथ चलना चाहता हूँ


एक और सुपरहिट कहानी की शुरुआत...............................मज़ा आ गया
(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &;
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj sharma

Jaunpur
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Re: जोरू का गुलाम या जे के जी

Post by Jaunpur » 05 Jul 2015 12:45

कोमलजी,

आपके साथ मैं भी ‘जोरू का ग़ुलाम’ के सफ़र पर चलना चाहता हूँ। जगह सुरक्षित करने का अनुरोध है।

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lalaora
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Re: जोरू का गुलाम या जे के जी

Post by lalaora » 05 Jul 2015 13:06

ईस फ़ोरम पर ख्याति वाले नाम जुड़ रहे है आपकी मेहनत अब रंग ला रही है

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