कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास complete

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Jemsbond
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कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास complete

Postby Jemsbond » 26 Aug 2015 22:18

कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास

लेखक-राजेश सरहदी


जिस्म की प्यास जब जागती है तो अच्छे अच्छों के दिमाग़ घास चरने चले जाते हैं. ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ.

मैं एक सीधी सादी लड़की बस अपने फॅशन डिज़ाइनिंग कोर्स में ही मस्त रहती थी. फॅशन की दुनिया में अपना नाम बनाना चाहती थी, बस दिन रात नये नये डिज़ाइन सोचा करती थी और उनकी ड्रॉयिंग बनाया करती थी.

एक दिन ऐसा कुछ हुआ कि मेरा जिंदगी के बारे में सोचने का नज़रिया ही बदल गया. इस से पहले कि मैं अपनी कहानी आपको सुनाऊ मैं अपने परिवार के बारे में आपको बताती हूँ :

रमेश केपर - 49 य्र्स हेवी बिल्ट बॉडी - एक नंबर के चोदु - बस चूत पसंद आनी चाहिए फिर नही बच ती. अपना बिज़्नेस चला रहे हैं. पैसे की पूरी रेल पेल है.

कामया - 44 साल लगती है 30 साल की - 38-30-38 - हाउसवाइफ

विमल : 24 साल मेरा बड़ा भाई - एमबीए कर रहा है हॉस्टिल में रहता है. हफ्ते में एक बार घर ज़रूर आता है. एक दम हीरो के माफिक पर्सनॅलिटी, लड़कियाँ देख कर ही आँहें भरने लगती हैं.

मैं : राम्या - 20 साल 34-24-30 मुझे देखते ही सबके लंड खड़े हो जाते हैं. फॅशन डिज़ाइनिंग का कोर्स कर रही हूँ.

रिया : मेरी छोटी बहन 18 साल - 30-22-30 एक दम पटाका, नटखट चुलबुली, ज़ुबान कैंची की तरहा चलती रहती है अभी एमबीबीएस में अड्मिशन लिया है , जितना खूबसूरत जिस्म उतना ही तेज़ दिमाग़.


और लोग जैसे जसी जुड़ते जाएँगे उनके बारे में बताती रहूंगी .

तो क्या बताना शुरू करूँ कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास , साथ देते रहना और अपने कॉमेंट्स भी ताकि मुझे पता चलता रहे कि मेरी ये कहानी आपको कितनी अच्छी लग रही है


लीजिए कहानी कुछ इस तरह है ............................................................

घर से इन्स्टिट्यूट और इन्स्टिट्यूट से घर , यही थी मेरी जिंदगी. अपने सपनो की ही दुनिया में खोई रहती थी. एक जनुन सवार था मुझ पे. बहुत बड़ी फॅशन डिज़ाइनर बनने का. माँ और भाई भी मेरा पूरा साथ देते थे. भाई तो जब भी घर आता, घंटो मेरे साथ बैठ के मेरे डिज़ाइन डिसकस करता, कुछ को अच्छा कहता, कुछ को बहुत बढ़िया और कुछ में तो इतनी कामिया निकालता कि मुझे हैरानी होती, उसे डिज़ाइन्स के बारे में इतनी पहचान कैसे है. वो मार्केटिंग में स्पेशलाइज़ कर रहा था.

MBBएस की पड़ाई में इतना ज़ोर होता है पर फिर भी मेरी छोटी बहन रिया सनडे को मेरे डिज़ाइन पकड़ के बैठ जाती और अपनी राय देती, कई बार तो उसकी राय बिल्कुल किसी प्रोफेशनल डिज़ाइनर की तारह होती.

माँ मुझे किचन में बिल्कुल काम नही करने देती थी, बस रोज सुबह की चाइ बनाना मेरी ड्यूटी थी, क्यूंकी पापा सुबह मेरे हाथ की चाइ पीना पसंद करते थे. कहते हैं दिन अच्छा निकलता है और मुझे भी बहुत खुशी होती.

मेरी सारी फ्रेंड्स अपने बॉय फ्रेंड्स के साथ ज़यादा वक़्त गुज़ारा करती थी, पर मैं लड़कों से हमेशा दूर रही. मुझे इस बात से कोई फरक नही पड़ता था कि मेरा कोई बॉय फ्रेंड नही. मुझे तो जो भी वक़्त मिलता नये नये डिज़ाइन्स सोचने में ही निकल जाता. घर से निकलती तो लड़कों की चुभती हुई नज़रें मेरा पीछा करती, मेरा जिस्म है ही इतना मस्त कि देखनेवाले जलते रहते थे पर कोई मेरे पास फटकने की कोशिश नही करता था. मेरे पापा और भाई का डर सब के दिलों में रहता था. इन्सिटुट में भी लड़के मेरे आगे पीछे रहते पर मैं कोई भाव नही देती.

बस अपनी दो फ्रेंड्स के साथ ही ज़यादा टाइम गुजरती. क्यूंकी हमे ग्रूप प्रॉजेक्ट्स मिलते हैं तो ग्रूप में एक दो लड़के भी होते हैं. मैं उनसे सिर्फ़ प्रॉजेक्ट के बारे में ही बात करती थी और उनको भी पता था कि अगर कोई ज़यादा आगे बढ़ने की कोशिश करेगा तो मैं ग्रूप ही छोड़ दूँगी.. इस लिए इन दो लड़कों से मेरे दोस्ती बस काम तक ही थी,ना वो आगे बढ़े ना मैने कोई मोका दिया. धीरे धीरे गली के लड़के भी मेरी इज़्ज़त करने लगे और उनकी आँखों से वासना भरी नज़रें गायब हो गई. पर इन्स्टिट्यूट के लड़के मुझे देख कर आँहें भरते थे, बहुत कोशिश करते थे कि मेरे से दोस्ती बढ़ाए पर मेरा सख़्त रवईया उन्हे दूर ही रखता था.

मैं कभी किसी से ज़्यादा बात नही करती थी बस दो टुक मतलब की बात. मेरी सहेलियाँ भी जब अपने बाय्फरेंड्स के बारे में बाते करती तो मैं उठ के चली जाती.

यूँही चल रही थी मेरी जिंदगी की एक तुफ्फान आया और मेरे जीने की राह बदल गयी.
Last edited by Jemsbond on 04 Dec 2015 09:03, edited 1 time in total.
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Re: कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास

Postby Jemsbond » 26 Aug 2015 22:33

आज मम्मी पापा सुबह ही पापा के दोस्त के यहाँ चले गये. उनके दोस्त की बेटी की शादी होने वाली थी तो तैयारियों में उनकी मदद करनी थी. दोपहर तक मैं भी अपने इन्स्टिट्यूट से वापस आ गई. और कुछ खा पी कर थोड़ी देर आराम किया. धोबी आ कर प्रेस किए हुए कपड़े दे गया तो मैने सोचा कि सबके कपड़े उनकी अलमारी में लगा देती हूँ.

मम्मी के कपड़े लगा रही थी एक बॉक्स दिखा जो बिल्कुल पीछे रक्खा हुआ था. मैने पहले ऐसा बॉक्स मम्मी के पास नही देखा था, अपनी जिग्यासा शांत करने के लिए मैने वो बॉक्स खोल लिया तो देखा की दुनिया भर की डीवीडी पड़ी हुई हैं. मुझे ताज्जुब हुआ कि मम्मी ये डीवीडी अपनी अलमारी में क्यूँ रखती है. उनमे से एक डीवीडी पे गोआ लिखा हुआ था. मैने सोचा शायद गोआ की साइटसीयिंग के उपर होगी. मैने कपड़े लगाए और वो डीवीडी ले कर अपने रूम में आ गई.

डीवीडी अपने लॅपटॉप पे लगाया और पहले सीन को देखते ही मेरी आँखें फटी की फटी रह गई. ये एक पॉर्न डीवीडी थी पर इस में जो दिख रहा था वो मेरे वजूद को हिला बैठा. ये डीवीडी शायद उस वक़्त की थी जब हम पैदा भी नही हुए थे.

हां डीवीडी में मेरे पापा, मम्मी और चाचा चाची एक दम नंगे एक दूसरे के जिस्म के साथ खेल रहे थे. मम्मी नीचे बैठ चाचा का लंड चूस रही थी और चाची मम्मी की चूत चूस रही थी और पापा चाची की चूत में अपना लंड डाल के चोद रहे थे. मम्मी ने चूस चूस कर चाचा का लंड खड़ा कर दिया. फिर पापा ने अपना लंड चाची की चूत में से निकाल लिया.

चाचा बिस्तर पे पीठ के बल लेट गये और चाची उठ कर चाचा के लंड पे बैठती चली गई, जब चाचा का पूरा लंड चाची की चूत में समा गया तो चाची ने अपनी गंद इस तरह उठाई कि उसका छेद सॉफ सॉफ दिख रहा था, पापा चाची के पीछे चले गये और अपना लंड चाची की गंद में घुसा दिया. अब दोनो मिलके चाची को चोद रहे चाची की सिसकिया गूँज रही थी. मम्मी जो खाली हो गई थी वो चाचा के पास आ गई और चाची की तरफ मुँह करके चाचा मे मुँह पे बैठ गई.
चाचा नीचे से धक्के मार कर चाची की चूत में अपना लंड पेल रहे थे और मम्मी के अपने मुँह पे बैठने के बाद चाचा ने मम्मी की चूत को चाटना और चूसना शुरू कर दिया शायद अपनी जीब मम्मी की चूत में घुसा दी होगी क्यूंकी मम्मी ने ज़ोर की सिसकी मारी और चाची को पकड़ लिए.

मम्मी और चाची ने एक दूसरे के बूब्स पकड़े और दबाने लगी, दोनो के होंठ आपस में जुड़ गये. मम्मी की तो सिर्फ़ चूत चूसी जा रही थी पर चाची की तो दोनो तरफ से चुदाई हो रही थी. पापा ज़ोर ज़ोर से चाची की गंद मार रहे थे. पापा के धक्के के साथ चाची आगे होती और चाचा का लंड चाची की चूत में अंदर तक घुस जाता और जब पापा अपना लंड बाहर निकालते तो चाची अपनी गंद पीछे करती जिससे चाचा का लंड चाची की चूत से बाहर निकलता.

फिर पापा के धक्के के साथ चाचा का लंड चाची की चूत में घुस जाता. पापा ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और ज़ोर ज़ोर से चाची की गंद मारने लगे. नीचे से चाचा ने भी अपनी कमर उछालनी शुरू कर दी और अब तो मम्मी भी अपनी गंद चाचा के मुँह पे उपर नीचे करती हुई चाची की जीब को अपनी चूत में ले रही थी. पूरे कमरे में एक तुफ्फान आया हुआ था और ये तुफ्फान मेरे सर चढ़ रहा था. मैने पहले कभी कोई ब्लू फिल्म नही देखी थी और आज देखी भी तो उसमे सब मेरे घर के लोग ही थे. पापा के धक्के और तेज़ हो गये और थोड़ी देर में पापा अहह भरते हुए चाची की गंद में झड़ने लगे और चाचा भी तेज़ी से अपनी कमर उछलते हुए चाची की चूत में झड़ने लगे, चाची का तो बुरा हाल था, चाचा के लंड पे इतना रस छोड़ रही थी जो चाचा के लंड से होता हुआ नीचे बिस्तर पे तालाब बना रहा था. इधर मम्मी भी चाचा के मुँह पे झड गई और चाचा गपगाप मम्मी की चूत का सारा रस पी गये. चारों ही हान्फते हुए बिस्तर पे निढाल पड़ गये और अपनी साँसे संभालने लगे.

अभी डीवीडी में और भी बहुत कुछ बाकी था. मैने वो डीवीडी अपनी अलमारी में छुपा दी और बाथरूम भाग गई. अपने कपड़े उतारे और शवर के नीचे खड़ी हो गई. चारों की चुदाई का सीन अब भी मेरी आँखों के सामने घूम रहा था. मेरे जिस्म में एक आग सी लग गई थी. मेरी चूत में हज़ारों चिन्टिया जैसे रेंग रही थी. मेरा बुरा हाल हो रहा था पर इस आग को कैसे शांत करूँ ये समझ में नही आ रहा था, मेरा हाथ अपने आप मेरी चूत पे चला गया और मैं उसपे ज़ुल्म ढाने लगी, मेरी उंगली मेरी चूत में घुस गई और मेरी एक चीख निकल पड़ी, पहली बार अपनी चूत में मेने उंगली डाली थी. फिर अपनी उंगली को अंदर बाहर करने लगी और तब तक करती रही जब तक मेरी चूत ने अपना रस नही छोड़ दिया और मुझे थोड़ा सकुन मिला.

इस डीवीडी ने मेरे जिस्म की प्यास जगा दी थी. एक तुफ्फान मेरे दिलो दिमाग़ में खलबली मचा रहा था.
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Re: कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास

Postby rajaarkey » 27 Aug 2015 09:13

एक और नई कहानी ............................................


मुबारक बाद स्वीकार करें
(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &;
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`·.¸.·´ -- raj sharma
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Re: कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास

Postby jay » 27 Aug 2015 09:44

Nice short start! Waiting to read more
sapat70
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Re: कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास

Postby sapat70 » 27 Aug 2015 10:31

बढिया, एक और चुदाई का मेला. बस जोरसे आगे बढाइए. फॅमिली में मोहब्बत जैसा अधूरा न छोडना, हांउसे भी साथ साथ आगे बढाइए

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