गुलबदन और गुलनार की मस्ती compleet

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Rohit Kapoor
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गुलबदन और गुलनार की मस्ती compleet

Post by Rohit Kapoor » 05 Sep 2015 22:57

गुलबदन और गुलनार की मस्ती

फ्रेंड्स कहानी कहानी कुछ हद तक तैयार है जैसा कि मैने पहले कहा था अगली कहानी मुस्लिम गर्ल की होगी दोस्तो आपने मेरी पहली कहानी -कलयुग की सीता ( एक छिनार ) को पसन्द किया था आइ होप आपको ये कहानी भी पसंद आएगी
Last edited by Rohit Kapoor on 10 Sep 2015 08:56, edited 1 time in total.

गुलबदन और गुलनार की मस्ती compleet

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komaalrani
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Re: गुलबदन और गुलनार की मस्ती

Post by komaalrani » 05 Sep 2015 23:01

OK post kariye na

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Rohit Kapoor
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Re: गुलबदन और गुलनार की मस्ती

Post by Rohit Kapoor » 05 Sep 2015 23:34



कहानी के कुछ अंश....................................................



जय के हाथ से मम्मे ऐसे दबवाने से गुलनार को दर्द हुआ लेकिन मजा भी आया। असल में गुलनार यह सब नाटक कमरे में जाके, अपनी माँ का परदाफाश करके उसके सामने ही जय से चुदवाना चाहती थी।


जय का हाथ सीने से हटाके वो बोली- “मै क्यों रोड पे जाऊँगी… मै तो अंदर जा के माँ को बोल दूंगी कि तू उसके बारे में कैसी गंदी बात कर रहा है और मुझे कैसे नंगी करके, लंड चुसवाके अभी हम माँ बेटी को एक दूसरे के सामने चोदने की बात कर रहा है। चल साले, देख राज चाचा क्या हाल करेगा तेरा…”

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Rohit Kapoor
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Re: गुलबदन और गुलनार की मस्ती

Post by Rohit Kapoor » 06 Sep 2015 20:12

दोस्तो शाम के 8 :45 हो चुके हैं रेलवे स्टेशन पर शांति छाई हुई है 15 मिनट बाद एक ट्रेन उस छोटे से स्टेशन पे जब रुक गयी तो रात के 9:00 बजे थे। लॉन्ग स्टॉप का यह रुट असल में शाम को 4:00 बजे आता था। पर ट्रेन लेट होने से इतना टाइम लगा। जिस स्टेशन पे ट्रेन रुकी वो गॉव इतना बड़ा नहीं था। पर वो स्टेशन इंडस्ट्रियल एरिया से २० किमी दूर होने से काफी ट्रेन वहांपर रूकती थी. जब ट्रेन रुकी तो 30-40 लोग उतर गये।

उन लोगों में प्लेटफार्म पे एक 40-42 साल की औरत उसकी 20 साल की बेटी के साथ उतर गयी । जो लोग ट्रेन से उतरे, वो जल्दी जल्दी निकल गये और सिर्फ 3-4 लोग ही, थे अब प्लेटफार्म । गुलबदन जो अपनी बेटी गुलनार के साथ उतरी वो अपने पति से मिलने आइ थी। गुलबदन का पति , उस इंडस्ट्रियल एरिया में काफी अच्छी पोस्ट पे था और आज 4 महीने हो गये थे, वो एक प्रोजेक्ट पे था। इन 4 महीने में ना ही वो घर आ सका था और ना गुलबदन उससे मिल सकी थी। प्रोजेक्ट कंपनी के लिए बड़ा इम्पोर्टेन्ट था और गुलबदन का पति प्रोजेक्ट मैनेजर होने से अपने लिए वक़्त ही नहीं दे पा रहा था। अब गुलनार के कालेज की छुट्टियां होने से उसने अपनी बीवी और बेटी को अपने पास बुला लिया था।

गुलबदन ने यहां वहाँ देखा पर उसका पति कहीं नजर नहीं आ रहा था। उसका पति उसे लेने आने वाला था, पर वो अभी तक आया नहीं था और इस लिए गुलबदन और उसकी बेटी अकेली खड़ी थी प्लेटफार्म पे। जिस ट्रेन से वो आई थी, वो ट्रेन भी धीरे-धीरे करके स्टेशन से निकल गयी थी। गुलबदन ने शिफॉन की लाल साड़ी और ब्लाउज पहना था। स्लीवलेस ब्लाउज से उसके गोरे आर्म्स सेक्सी लग रहे थे। ब्लाउज टाईट होने से, अंदर की ब्रा का आउटलाइन साफ नजर रहा था।

गुलनार ने शार्ट जींस स्कर्ट और टाईट शार्ट टी शर्ट पहना था। टी शर्ट इतना टाईट था की उसकी चूंचियां उभरी उभरी दिखाई दे रही थी और टी शर्ट शार्ट होने से काफी बार उसका बेल्ली बटन भी दीखता था। दोनों माँ बेटी, एकदम सेक्सी दिख रही थी और अब ऐसी जगह खड़ी थी जहां के लोगों ने कभी इतनी सुंदर औरते देखी नहीं थीं।

गुलबदन उसके सामान के साथ खड़ी थी तो एक कुली उसका सामान उठाने के लिए आते हुए बोला- “मेमसाब, कुली चाहिए मैं सामान उठाऊँ आपका…”


गुलबदन ने उस कुली के कपड़े देखते हुए नजरें दिखाते कहा- “कैसे-कैसे गंदे कुली रखे हैं रेलवे ने स्टेशन पे। नहीं हमें कुली नहीं चाहिए। हमारे पास इतना सामान नहीं, है ना गुलनार कि कुली चाहिए ”

गुलनार ने भी उस कुली को देखते ना कहा।

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Rohit Kapoor
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Re: गुलबदन और गुलनार की मस्ती

Post by Rohit Kapoor » 06 Sep 2015 20:34


उस कुली ने उन माँ-बेटी को ऊपर से नीचे तक देखते, और आहें भरते कहा- “क्यों मेमसाब… क्या हम इतने गंदे है…
अरे मेमसाब, आजमा के देखो तो समझ ना मेमसाब कि कैसे कुली है हम… कहो तो आप दोनो को एक साथ उठाऊँ…” दोनो को उठाने की बात करते वक़्त उस कुली की नजर में क्या फीलिंग्स थी, वो गुलबदन की नजर से छुपी नहीं थी।

पर इस अंजान जगह पर गुलबदन कुछ बोल भी नहीं सकती थी। प्लेटफार्म अब पूरा खाली हो गया था स्टेशन मास्टर और उसका असिस्टेंट और इन तीन के सिवा और कोई नहीं था वहाँ। गुलबदन ने अपनी नजर में गुस्सा दिखाते पर आवाज में वही नरमी रखते कहा- “सामान उठाने की बात जाने दो, यह बताओ, यहां से गॉव और वो इंडस्ट्रियल एरिया कितने दूर हैं गॉव में कोई अच्छा होटेल है क्या… और इसके बाद कोई ट्रेन हैं क्या …”

वो कुली गुलनार के एकदम पास खड़े होके बोला- “कल सुबह अगली ट्रेन आएगी, अब तो मेमसाब, गॉव स्टेशन से 3 किमी दूर है और वो एरिया तो 20 किमी दूर है। मेमसाब, हमारा गॉव इतना छोटा है कि कोई ढंग का लॉज भी नहीं है उसमे। और जो लॉज है एकदम गंदा और बदनाम है, जहां आप जैसे परिवार एक मिनट भी नहीं रह सकते। वैसे मेमसाब, आप रात को कहाँ ठहरोगी…”

उस कुली, को एक बार देखते ही गुलबदन को लगा कि उसे कुछ सुना डाले पर वो कुछ नहीं बोल सकी उसने इधर-उधर अपने पति को खोजते हुए कहा- “हमको तो यही रुकना है। हमारे पति हमें लेने आने वाले हैं। हमारे पति उस इंडस्ट्रियल एरिया में काम करते हैं और हम उनसे मिलने आये हैं। हम वेटिंग रूम में उनका वेट करेंगे गुलनार…”

गुलनार उसके बैग उठाते नाराजी से बोली,- “मम्मी, देखा अब्बू कैसे हैं… उनको मालूम है कि हम दोनों यहां अजनबी हैं लेकिन फिर भी हमको लेने नहीं आये…”

गुलबदन ने अपनी हैंड बैग उठाके उस कुली की तरफ देखते हुए जवाब दिया- “पता नहीं उनको कुछ काम आ गया होगा बेटा। चल हम वेटिंग रूम में उनकी राह देखते हैं और तू उनको फोन लगा। वैसे भी प्लेटफार्म पे लाइट बहुत कम है और कोई आदमी भी नहीं दिख रहे…”


जैसे ही गुलबदन वेटिंग रूम की तरफ जाने लगी तो उस कुली ने बिना बोले उनका बाकि सामान उठाके वेटिंग रूम में ले जाके रखते हुए गुलबदन के सीने की तरफ देखते कहा- “ठीक है मेमसाब, जैसी आपकी मर्जी । वैसे मैं यहां बाहर ही सोया हूँ कुछ लगे तो मुझे बुलाना। मेरा नाम राज है। मेमसाब, मेरा घर यहाँ, बाजू में है, अगर आप चाहे तो हमारे घर रुक सकती हो आपकी बेटी के साथ। यहां वेटिंग रूम में कोई नहीं होता है रात में …”

गुलबदन राज की इस बात पे कोई जवाब नहीं देती तो राज बाहर जाके, वेटिंग रूम के एकदम सामने, प्लेटफार्म पे एक कपड़ा बिछा के, गुलबदन की तरफ पैर करके लेट गया। गुलबदन ने अपने पति को मोबाइल लगाया। जब उसके पति ने फोन उठाया तो गुलबदन ने उनसे पूछा कि वो स्टेशन क्यों नहीं आये उनको लेने।

अपनी बीवी की बात सुनके उसका पति एकदम सन्न रह गया। गुलबदन का पति काम के सिलसिले में दो दिन बाहर गया था और वो यह बात भूल ही गया था कि उसकी बीवी और बेटी आने वाले थे। उनका कोई स्टाफ भी नहीं था जिसको वो बोलते कि जाके उनकी बीवी और बेटी को ले आये। आख़िर में गुलबदन के पति ने उनको कल रात का वक़्त किसी लॉज में निकालने को कहा और यह भी कहा कि वो परसों सुबह उनको लेने आएँगे। गुलबदन ने फोन कट किया और सोचने लगी कि परसो सुबह तक का वक़्त कैसे निकाला जाए। उसने गुलनार को इसके बारे में कुछ नहीं बताया।


वेटिंग रूम में काफी लाइट्स थी। उन दोनों के सिवा उस रूम में और कोई नहीं था। गुलबदन एक चेयर पे बैठी और सामने के टेबल पे अपने पैर रखे। ऐसा करने से उसकी साड़ी जरा ऊपर की तरफ उसके घुटने तक उठ गयी। गुलबदन ने साड़ी नीचे नहीं की। जब उसकी नजर बाहर लेटे राज की तरफ गयी तो उसने देखा कि राज की लुंगी घुटने के ऊपर उठी हुई थी। अचानक गुलबदन ने जो देखा उसे धक्का लगा। वेटिंग रूम की लाइट राज की ओपन लुंगी में रोशनी डाल रही, थी जिसमें गुलबदन को राज का लंड साफ दिख रहा था। राज बेखबर होके लेटा था। गुलबदन की नजर बार-बार उसके उस लंड की तरफ पहुच रही थी। गुलबदन ने गुलनार को देखा तो गुलनार एक मैगजीन पढ़ रही थी।

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