मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त

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Rohit Kapoor
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मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त

Post by Rohit Kapoor » 22 Feb 2016 09:43

मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त


भाइयो रीत की लिखी हुई एक और कहानी ये आपको ज़रूर पसंदआएगी
'रीत बेटा उठो जल्दी देखो बाहर कितना उजाला हो चुका है और तुम हो कि सो रही हो'
मैं बेड के उपर ही कसमसाती हुई बोली 'उम्म्म मोम सोने दो ना'
मोम-मेरी प्यारी बच्ची स्कूल नही जाना क्या देख 7 बज गये है'
मैं बेड के उपर उल्टी लेटी थी और बेड के उपर ही घूम कर सीधी हो गई और बोली.
मे-मोम 7 ही तो बज़े है अभी तो एक घंटा बाकी है स्कूल जाने में.
मोम प्यार से मेरे सिर पे हाथ फेरती हुई बोली.
मम्मी-अरे तो क्या ऐसे ही उठ कर चली जाओगी स्कूल. चल जल्दी से उठ कर मूह धो ले और चाइ रख कर जा रही हूँ पी लेना.
मम्मी ने मेरा माथा चूमा और रूम से बाहर निकल गई.
मम्मी द्वारा इतने प्यार से उठाए जाने के कारण मेरा चेहरा मुस्कुराहट से खिल उठा. मैं कसमसाती हुई उठी और दोनो हाथ उपर करते हुए अंगड़ाई ली.
................
भले ही रीत सो कर उठी थी मगर इस हालत में भी बहुत खूबसूरत लग रही थी. मोम की तरह तराशा हुया उसका गोरा बदन और हर अंग की अपनी एक अलग ही ख़ासियत. देखने वाला यही कहता था कि 'खुदा ने ज़रूर इसे फ़ुर्सत में बनाया होगा'
अगर खुदा ने रीत को इतना हुस्न दिया था तो रीत ने भी उसे बहुत संभाल कर रखा हुआ था. उसने बहुत अच्छे तरीके से अपने आप को मेनटेन किया था. उसका बदन ना तो ज़्यादा भारी था और नही ज़्यादा हल्का बस जो अंग यहाँ से भारी होना चाहिए था वहाँ से भारी था और यहाँ से हल्का होना चाहिए था वहाँ से हल्का था. बस यही बात थी जो हर कोई उसको देखते ही दीवाना हो जाता था. लेकिन रीत इस सब से अंजान थी अभी तो जवानी ने उसकी लाइफ में पहला कदम ही रखा था. और जैसे ही उसकी जवानी की महक भंवरों के पास पहुँची तो भंवरे भी अपने स्वाभाव के मुताबिक़ उसके इर्द-गिर्द मंडराने शुरू हो गये थे मगर रीत इस सब से अंजान अपनी मस्ती में ही जी रही थी.
वो 18 साल की कच्ची कली थी जो कि खिलने के लिए तैयार थी. वो नज़दीक के गूव्ट. स्कूल में स्टडी कर रही थी.
..................
मैं बेड से उठी और वॉशरूम में घुस गई. थोड़ी देर बाद फ्रेश होकर बाहर निकली और चाइ उठा कर अपने रूम से बाहर निकल गई और सीधा जाकर ड्रॉयिंग रूम में बैठ गई. मैने टीवी ऑन किया और साथ साथ चाइ की चुस्की लेने लगी.
मैं टीवी देख रही थी तभी मेरे कानो में एक आवाज़ सुनाई दी 'गुड मॉर्निंग स्वीटहार्ट'
मैने ने आवाज़ की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए जवाब दिया 'गुड मॉर्निंग भैया'
भैया-अरे बड़ी जल्दी उठ गई तू.
मे-ऐसे ही है जनाब हमे तो जल्दी उठना ही अच्छा लगता है.
भैया-बस बस बड़ी आई जल्दी उठने वाली वो तो शूकर करो कि मम्मी ने तुम्हे उठा दिया अगर मैं उठाने आता तो पूरी पानी की बाल्टी उपर फेंक कर उठाता तुम्हे.
मे-भैया अभी 7 ही तो बजे हैं.
भैया-मेडम ज़रा घड़ी में देखो 7:20 हो रहे हैं और तुम अभी तक नहाई भी नही हो. तुम रोज़ लेट उठती हो और रोज़ मुझे तुम्हे छोड़ कर आना पड़ता है. आज मैं नही जाने वाला.
मैने मिन्नत भरी निगाहों से देखते हुए कहा.
मे-प्लीज़ भैया ऐसा मत कहो.
भैया-नो नो मुझे तो कॉलेज जाना है मेरे पास टाइम नही है.
मैने अपनी कमर पे हाथ रखते हुए अकड़ कर कहा.
मे-भैया सीधी तरह से मान जाओ वरना मम्मी की सिफाराश लगवा दूँगी.
भैया-ओह हो हो बड़ी आई सिफाराश लगाने वाली आज कोई सिफाराश नही चलेगी.
सिफारिश वाला आइडिया फैल होता देख मैने फिरसे मूह लटकाते हुए कहा.
मे-मैं लेट हो जाउन्गी तो डाँट पड़ेगी क्लास में भैया और आपको अच्छा लगेगा ऐसा करके.
भैया-अरे अच्छा मुझे तो बहुत बहुत खुशी होगी अगर तुझे डाँट पड़ेगी. कम से कम सुबह जल्दी उठने का सोचोगी तो सही तुम.
मे-ओके अगर ऐसा है तो मुझे मत बुलाना.
तभी मम्मी किचन से बाहर आई और बोली.
मम्मी-रीत बेटा क्या हुआ.
मे-देखो ना मम्मी भैया मुझे स्कूल छोड़ने नही जा रहे.
मम्मी-हॅरी बेटा क्यूँ बच्ची को परेशान कर रहा है.
हॅरी-देखो ना मम्मी इसका रोज़ का काम है.
मम्मी-तो क्या हुआ इसका स्कूल तेरे कॉलेज के रास्ते में ही तो है तू छोड़ दिया कर इसे.
मे-मम्मी आपको नही पता है भैया को मुझे साथ लेजाने में शरम आती है.
मैने हंसते हुए कहा.
हॅरी-देखो देखो मम्मी कुछ ज़्यादा ही ज़ुबान चलने लगी है इसकी.
मम्मी-बस बस अब बंद करो अपनी बातें और रीत बेटा जल्दी से तैयार हो जा.
मे-ओके मम्मी.
हॅरी-चल चल अब जल्दी कर वरना मैं अकेला ही निकल जाउन्गा फिर आती रहना.
मैं जल्दी से उठी और भैया को चिड़ाती हुई अपने रूम की तरफ बढ़ गई.
7:45 वज रहे थे जब मैं रेडी होकर रूम से बाहर आई. इस बीच भैया मुझे पता ही नही कितनी दफ़ा आवाज़ दे चुके थे. मुझे रूम से निकलते देख वो बोले.
हॅरी-ओह गॉड कितना टाइम लगाती हो तुम तैयार होने में.
मे-अब आ तो गई भैया. जल्दी चलो.
भैया ने बाइक निकली और मैं पीछे बैठ गई और भैया ने बाइक दौड़ा दी.
हॅरी-अब ठीक से पकड़ कर बैठ जा आज इतनी तेज़ बाइक चाउन्गा कि तू कभी मेरे साथ नही बैठेगी.
मे-प्लीज़ भैया धीरे चलाओ नही तो पापा को बता दूँगी.
हॅरी-तू जिसे मर्ज़ी बता देना.
बाइक इतनी तेज़ थी कि. 20मिनट का रास्ता 10मिनट में पार कर दिया.
स्कूल पहुँच कर मैं उतरी और कहा.
मे-आज आपकी खेर नही घर पे.
भैया-अरे माइ स्वीतू ज़रा टाइम देख सिर्फ़ 5मिनट बाकी है तेरी क्लास में अगर मैं तेज़ ना चलाता तो हमे 20मिनट लग जाते और तुझे डाँट पड़ती.
मैं भैया की बात सुनकर खुश हो गई और उनकी गाल पे किस किया और क्लास की तरफ चल दी.

मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त

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Rohit Kapoor
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Re: मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त

Post by Rohit Kapoor » 22 Feb 2016 09:53

भैया को बाइ बोल कर मैं क्लास में पहुँची और सेधा जाकर अपनी फ़्रेंड महक के पास बैठ गई. महक मुझे देखते ही बोली.
महक-आ गई मेडम आप कभी जल्दी भी आ जाया करो.
मे-क्यूँ जल्दी आकर क्या करना होता है यहाँ.
महक-थोड़ी बहुत एक्सट्रा स्टडी हो जाती है.
मे-बस बस अच्छी तरह से जानती हूँ जो तू एक्सट्रा स्टडी करती है जल्दी आकर.
महक-तो तुम भी मेरे वाली एक्सट्रा स्टडी कर लिया करो कभी.
मे-स्कूल टाइम में जो स्टडी होती है मुझसे वो ठीक ढंग से नही हो पाती एक्सट्रा स्टडी की तो माँ की आँख.
महक-मेरे वाली एक्सट्रा स्टडी किया कर देखना कितनी आसान है वो.
मे-बस बस अब लेक्चर बंद कर आज तेरा लफंगा नही दिख रहा कहीं.
महक-अरे यहीं तो था पता नही कहाँ चला गया.
तभी रूम में एक लड़का एंटर हुया जिसका नाम था आकाश. मैने महक को कोहनी मारते हुए कहा.
मे-लो आ गये तुम्हारे मिस्टर. लफंगा जी.
आकाश हमारे टेबल के साथ में जो टेबल था नेक्स्ट रो में उसपे जाकर बैठ गया. उसी टेबल पे एक लड़का और बैठा था जिसका नाम तुषार था. आकाश और तुषार काफ़ी अच्छे दोस्त थे.
महक ने आकाश को देखकर स्माइल पास की और जवाब में आकाश ने भी महक को स्माइल की.
फिर हमारे टीचर क्लास में आए और पहला पीरियड स्टार्ट हो गया. जैसे तैसे करके पहले 5 पीरियड निकले और फिर रिसेस के लिए बेल हो गई. मैने अपना टिफेन उठाया और बाहर ग्राउंड में आकर बैठ गई. महक मेरे साथ बाहर नही आई थी और मैने उसे बाहर आने को कहा भी नही था. क्यूंकी मैं जानती थी कि वो क्लास में ही आकाश के साथ रहेगी और दोनो लैला-मजनू एक दूसरे को हाथ से खाना खिलाएँगे. ये इनका रोज़ का काम था. मैने खाना ख़तम किया और टिफेन उठा कर क्लास की तरफ चल पड़ी. जब मैं क्लास में एंटर होने लगी तो तुषार ने मुझे रोक दिया और कहा.
तुषार-रीत प्लीज़ अभी अंदर मत जाओ महक और आकाश अंदर है.
ये इनका रोज़ का काम था हर रोज़ रिसेस में खाना खाने के बाद आकाश और तुषार सभी स्टूडेंट्स को रूम से बाहर निकाल देते थे. इन दोनो से सभी डरते थे और चुप चाप बाहर निकल जाते थे. और फिर अंदर शुरू होता था महक और आकाश का लिपटना-च्चिपटना. जितनी देर तक आकाश और महक अंदर होते थे तो तुषार बॉडी-गार्ड बनकर रूम के गेट पे खड़ा रहता था. स्टूडेंट तो कोई अंदर आता नही था बस डर होता था तो सिर्फ़ किसी टीचर के आ जाने का. और इसी सिलसिले में तुषार बॉडी-गार्ड बन कर खड़ा रहता था.
और आज जब मुझे तुषार ने रोका तो मैने थोड़ी शरारत करने की सोची.
मे-मुझे अंदर जाने दो मुझे टिफेन बॅग में रखना है.
तुषार-लाओ मैं रख देता हूँ तुम्हारे बॅग में.
मे-मैं तुम्हे क्यूँ दूं तुमने बॅग में से कुछ निकाल लिया तो चुप चाप मुझे अंदर जाने दो.
तुषार-मैने कहा ना तुम अंदर नही जा सकती.
तुषार ने थोड़ा गुस्से में कहा तो मैं खड़ी खड़ी ही काँप गई. मैने थोड़ी हिम्मत जुटाते हुए थोड़ा उचे स्वर में कहा ताकि मेरी बात महक और आकाश तक भी जा सके.
मे-ओके तो अब मैं प्रिन्सिपल सर के पास जा रही हूँ अब वो ही मुझे रूम के अंदर लेकर जाएँगे.
मेरा आइडिया काम कर गया और जैसे ही मैं वहाँ से चलने को हुई तो महक की आवाज़ मुझे सुनाई दी.
महक-अरे रीत.....रीत प्लीज़ सुनो तो.......
मैने पीछे घूम कर देखा तो महक अपने कमीज़ को अपने उरोजो के पास से ठीक करती हुई बाहर आई और पीछे पीछे आकाश पॅंट की ज़िप लगाता हुया बाहर निकला. महक मेरे पास आई और बोली.
महक-पागल हो गई है क्या तू.
मैं उसे देखकर हँसने लगी और मुझे हंसते देख उसने कहा.
महक-हंस क्यूँ रही है.
मे-में किसी के पास नही जाने वाली थी. मैं तो बस तुम लोगो को बाहर निकालना चाहती थी.
और मैं फिरसे हँसने लगी. मैने उसका हाथ पकड़ा और ग्राउंड की तरफ ले गई.
महक-क्या मिला तुझे ये सब करके. अच्छे ख़ासे मज़े आ रहे थे सारा मूड ऑफ कर दिया.
मे-ओह हो तो मुझे भी बताओ कैसे मज़े कर रही थी तुम उस लफंगे के साथ.
महक-तुझे ही भेज देती हूँ अंदर जा खुद ही करले जो मज़े करने है.
मे-तौबा तौबा भगवान बचाए ऐसे मज़े से.
मैने अपने कानो को हाथ लगाते हुए कहा.
महक-देखना जब किसी के प्यार में पड़ गई ना तब पूछूंगी तुझसे.
मे-नो वे ऐसा दिन कभी नही आएगा.
महक-आएगा मेरी जान बहुत जल्द आएगा. वो तुषार है ना तेरे बारे में पूछता रहता है मुझसे.
मे-वो बॉडी-गार्ड. उसको बोलना भूल जाए मुझे.
महक-अरे वो तो बोलता है कि तू उसके सपनो में आती है.
मे-देखना एक दिन सपने में ही चाकू लेकर जाउन्गी और मार डालूंगी उसे.
महक-तेरा कुछ नही हो सकता.
मे-तेरा तो बहुत कुछ हो गया है ना चल अब नेक्स्ट पीरियड स्टार्ट होने वाला है.
रिसेस के बाद वाले 4 पीरियड बड़ी मुश्क़िल से बीते और फिर आख़िरकार छुट्टी हुई तो मैं और महक बॅग उठाकर स्कूल के नज़दीक वाले बस स्टॉप के उपर आ गई. यहाँ बस स्टॉप तो था मगर सिर्फ़ नाम का कियुंकी बस तो यहाँ रुकती नही थी और ऑटो थे जो यहाँ के लोगो का आना-जाना आसान करते थे. एक ऑटो को महक ने हाथ दिया और ऑटो के रुकते ही मैं और महक ऑटो में बैठ गई और ऑटो रोड पे दौड़ने लगी. मेरा गाओं आने पर मैं ऑटो से उतर गई और महक अभी ऑटो में ही थी क्यूंकी उसका गाँव आगे था.
मैं घर आई और मैने टीवी ऑन किया और सेट मॅक्स पे आइपीएल का मुंबई व/स पुणे का मॅच देखने लगी. सचिन मेरा फेव. था और उसका मॅच देखना मैं कभी नही भूलती थी.

क्रमशः......................

sunita123
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Re: मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त

Post by sunita123 » 22 Feb 2016 12:17

wow fir se ek nayi kahani Rohit lagta hai tum hum ladkiyo ko pagal kar ke chodoge wow kya mast hoti hai kahaniya tumhri sch me plesae jaldi se update dedo na bahto tars rahe hai ab hum

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jay
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Re: मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त

Post by jay » 22 Feb 2016 22:05

रोहित एक और नई कहानी बहुत ही बढ़िया

नई कहानी के लिए बधाई हो भाई
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Re: मैं चीज़ बड़ी हूँ मस्त मस्त

Post by 007 » 23 Feb 2016 15:02

thanks rohit bhai new story ke liye
(¨`·.·´¨) Always

`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &

(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !

`·.¸.·´
-- 007

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