सियासत और साजिश complete

दोस्तो इस फोरम में आप हिन्दी और रोमन (Roman ) स्क्रिप्ट में नॉवल टाइप की कहानियाँ पढ़ सकते हैं
mastram
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सियासत और साजिश complete

Postby mastram » 08 Mar 2016 22:35

सियासत और साजिश

दोस्तो हम भी इस फोरम पर एक कहानी शुरू करना चाहते है अगर आपकी इजाज़त हो तो वैसे सही बात तो ये है कि हम कोई रायटर नही है पर अगर कोई कहानी ज़्यादा ही पसंद आ जाए तो अपने पास रख लेते है दोस्तो एक ऐसी ही कहानी जिसे मैने बहुत समय पहले पढ़ा था उसे हिन्दी फ़ॉन्ट मे इस फोरम पर पोस्ट करना चाहता हूँ
दोस्तो इस कहानी मे आपको वो सब कुछ मिलेगा जो आज हम सबकी पसंद बन चुका है जैसे लव सेक्स सियासत और धोका
Last edited by mastram on 21 May 2016 09:38, edited 1 time in total.
mastram
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Re: सियासत और साजिश

Postby mastram » 08 Mar 2016 22:36

राज: जैसा नाम वैसी ही सख्सियत का मलिक राज अपने इलाक़े का सबसे अमीर ज़मींदार कद 6,3 इंच चौड़ा सीना मजबूत और गठीले बदन का मालिक उम्र 30 साल

ललिता : राज की पत्नी उम्र 27 साल

डॉली: राज की छोटी बेहन उम्र 22 साल 6 महीने पहले ही उसके पति का देहांत एक रोड आक्सिडेंट मे हो गया था

साहिल: डॉली का बेटा जो *** साल पहले पैदा हुआ था और पूरे घर के लोग उसपर जान देते थी क्यों कि पूरे घर मे साहिल ही अकेला बच्चा था राज के अभी तक कोई बच्चा नही हुआ था जिसका कारण कोई नही जानता क्यों कि राज जिस तरह के बदन का मालिक था उसे देख कर अंदाज़ा लगया जा सकता था कि उसे कोई कमज़ोरी तो नही हो गी

रविंदर: (रवि) उम्र **** साल हाइट 5,4 इंच दुबला पर तेज तरार रवि के माँ बाप भी मौत से पहले राज के खेतों मे मज़दूरी करते थी उनके देहांत के बाद राज ने ही उसकी देख भाल की अब रवि राज के महल नुमा घर की देखबाल और राज के बताए हुए हर काम को करता है कुल मिलाकर वो एक नौकर से ज़्यादा कुछ नही है

वैसे तो इस कहानी मे बहुत से किरदार है पर अभी उनसे मिलने का समय नही आया जैसे-2 कहानी आगे बढ़े गी नये किरदारों का आना शुरू हो जाएगा

इनके इसके घर मैं एक बबर्चि हरिया और दो औरतें और थी जो राज की हवेली के सॉफ सफाई का काम करती थी इसके इसके एक माली दीनू काका थे जो हवेली के गार्डेन के देखभाल करते थे



तो दोस्तो अब मैं आप लोगो के साथ के उमीद करते हुए इस कहानी को शुरू करता हूँ

राज जैसा नाम वैसी ही सख्सियत का मालिक राज यू पी के अलीगढ़ डिस्ट्रिक्ट के इलाक़े मैं एक गाँव का ज़मींदार था राज को अपने स्वर्गीय माँ बाप से आपार धन दौलत ज़मीन जयदाद मिली थी राज की ज़मीन आस पास के कई गाँव मे फैली हुई थी माँ बाप के मरने के बाद राज अपनी पहली पत्नी के साथ अलीगढ़ सिटी मे आ गया और वहाँ एक बड़ा सा आलीशान घर बना लिया घर हर तरह के सुख साधनों से संपन्न और अपनी पत्नी के साथ वहीं रहने लगा . राज शुरू से अयाश किस्म का आदमी नही था राज अपनी पहली पत्नी से बहुत प्यार करता था राज की शादी उसके माँ बाप ने 20 साल की उम्र मे करवा दी पर शादी के 10 साल बाद भी उसके घर संतान नही हुई थी राज की एक छोटी बेहन जिसके पति की मौत एक आक्सिडेंट मे हो गयी थी डॉली का एक **** साल का लड़का था पति की मौत के बाद डॉली अपने बेटे को लेकर अपने भाई भाभी के पास ही रहने लगी

पर किस्मत जैसे राज से रूठ गयी हो अभी डॉली के पति के देहांत को 5 दिन ही बीते थे कि राज की पत्नी का लंबी बीमारी के बाद देहांत हो गया राज जैसे टूट सा गया और अपनी बेहन और भानजे साहिल को लेकर अपने गाँव वापिस आ गया तब राज 30 साल का था राज ने अपने आने की खबर पहले ही रविंदर (रवि) को अपने आने के खबर दे दी थी

डेट :- 11 एप्र 1998

एक बड़ी सी आलीशान कार गाँव की हवेली के सामने आकर रुकी जिसमे से राज उसकी बेहन डॉली निकले हवेली के मेन गेट पर रवि हरिया दीनू और दोनो नौकरानी हाथ जोड़ कर राज के सामने झुक कर खड़े हो गये राज कई सालों बाद अपने गाँव वापिस आया था डॉली भी शादी के बाद पहली बार ही गाँव वापिस आई थी राज अपनी आँखों से लगे हुए काले रंग के चश्मे को उतारता है और अपना एक हाथ जेब मे डाल कर रुमाल बाहर निकाल कर अपनी नम हुई आँखों को सॉफ करता है डॉली ने आज तक अपनी भाई की आँखों मैं आँसू नही देखे थे आज वो उस शख्स
की आँखों मे आँसू देख रही थी जिसने रोना तो शायद सीखा ही नही था अपने भाई की नम आँखों को देख डॉली का दिल भर आया वो अपनी गोद में उठाए *** साल के साहिल की तरफ देखती है और फिर अपने भाई राज की तरफ देख कर फुट -2 कर रोने लगती है

राज(डॉली को अपनी बाहों से सहारा देते हुए)हॉंसला रखो डॉली हॉंसला रखो

डॉली: ( रोते हुए भरी हुई आवाज़ मैं ) भैया मुझ से आप का दुख नही देखा जाता मैने कभी सोचा नही था जब मैं इस तरह से अपने गाँव वापिस आउन्गी मैं तो जैसे आप के जीवन मैं मनहुसियत बन कर आई हूँ

राज : नही डॉली ऐसे नही बोलते अगर तुम ना होती तो शायद साहिल भी ना होता यही तो मेरे जीने का मकसद है पगली इसे देख देख कर ही तो अब तक जी रहा हूँ

डॉली: (अपनी आँखों से आँसू पौन्छ्ते हुए) चले भैया अंदर चलते हैं

राज : हां चलो (और वो साहिल को अपनी बाहों मे लेकर उठा लेता है ) हरिया
हरिया: जी मालिक

राज शर्मा: चलो गाड़ी से समान निकालो और अंदर रखो रवि तुम ने हवेली के सभी कमरों के सफाई कर दी है ना

रवि:जी मलिक कर दी है

और दोनो अंदर आ जाते हैं अंदर आते हुए दोनो सोफे पर बैठ जाते हैं हाल मे पहले से ए सी ऑन था हरिया कार से समान निकाल कर अंदर आ चुका था और डॉली के बॅग्स को उसकी शादी से पहले वाले रूम मे रख कर राज के रूम मे राज का समान रख दिया

राज: तुम देखना डॉली जब साहिल थोड़ा बड़ा हो जाएगा तो घर मे फिर से रौनक आ जाएगी मैं इसे इतना शरारती बनाउन्गा कि तुम सारा दिन इससके पीछे भागती फ़िरो गी और तुम्हारा टाइम पास भी होता रहे गा

डॉली: (मुस्कुराते हुए) आप ठीक कह रहे हैं भैया अब इसके अलावा मेरे पास जीने की कोई और वजह भी नही है

इतने मे हरिया एक ट्रे मे कोल्ड ड्रिंक्स और कुछ नाश्ता ले आया

राज : (ग्लास को उठाते हुए ) ज़रा रवि को भेजो

हरिया:जी मालिक अभी भेजता हूँ

थोड़ी देर बाद रवि राज के सामने आकर खड़ा हो जाता है
रवि: (हाथ को जोड़े हुए) जी बाबू जी कहिए

राज : ओर्र बता खेतों का क्या हाल है ठीक से देख भाल हो रही है कि नही

रवि: जी बाबू जी मैं तो अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा हूँ पर आप तो जानते है कि आप की ज़मीन इतनी दूर-2 तक फैली हुई हैं सच बोलूं तो मैं एक दिन में हर जगह नही जा पाया
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Re: सियासत और साजिश

Postby mastram » 08 Mar 2016 22:36


राज : मुझ तुम्हारी यही बात बहुत अच्छी लगती है जो तुम हमेशा सच बोलते हो और हां आज के बाद तुम खेतों का काम नही देखो गे आज से तुम अपनी दीदी डॉली और उसके बच्चे का ध्यान रखो गी याद रहे मुझे शिकायत का मोका ना देना मैं तुम्हें बहुत ज़रूरी काम दे रहा हूँ

रवि:जी बाबू जी मैं दीदी और छोटे बाबा का पूरा ध्यान रखूँगा

राज : हां और आज शाम को मेरे साथ चलना ज़रा खेतों का चक्कर लगा आएँगे और मजदूरों मे से ही कुछ लोगो पर खेतों की ज़िम्मेदारी सोन्प देंगे ताकि सब का काम बँट जाए

रवि:जी बाबू जी जैसे आप कहें
राज : अच्छा अब तुम जाओ शाम को यहीं मिलना

और रवि हाथ जोड़ कर राज के सामने झुक कर वापिस मूड जाता है उधर हरिया ने दोपहर के लिए खाना तैयार करके डाइनिंग टेबल पर लगा कर राज और डॉली को खाने के लिए बोल दिया राज और डॉली दोनो डाइनिंग टेबल पर बैठ कर खाना खाने लगे

राज: बहुत ही अच्छा लड़का है बेचारा छोटी सी उम्र मे आनाथ हो गया बहुत मेहनत करता है

डॉली:जी भैया सच मे उसके साथ भी किस्मत ने बहुत बुरा किया है

दोनो इधर उधर के बातें करते करते खाना खा रहे थे छोटा सा साहिल जिसे डॉली अपनी गोद मे लेकर बैठ थी वो अपने हाथ पैर चला रहा था जिसे रवि हाल के डोर के पास खड़ा देख रहा था डॉली को खाना खाने मे तकलीफ़ हो रही थी रवि डॉली के पास आया और बोला लाएँ दीदी मैं बाबा को उठा लेता हूँ डॉली राज की तरफ देखते है

राज: उठाने दो अब से ये अपने साहिल की देखभाल यही करेगा

डॉली ने साहिल को रवि के हाथों मे दे दिया रवि ने साहिल को अपनी बाहों मे उठा लिया और उसे खिलाता हुआ हाल के एक कोने मे ले गया और एक चेर पर बैठ कर उसे खेलने लगा डॉली और राज खाना खा कर खड़े हो गये


डॉली उठ कर सीधा रवि के पास गयी और साहिल को रवि से ले लाया

डॉली: चलो अब इसके सोने का टाइम हो गया

रवि: जी दीदी मैं चलता हूँ

राज : तो रवि याद रखना शाम को तुम्हे मेरे साथ चलना है

रवि: जी ठीक है बाबू जी

राज :तो फिर शाम 4 बजे यहीं मिलना

और राज और डॉली अपने अपने रूम मे चले गये डॉली ने रूम मे अंदर आते ही साहिल को बेड पर लिटा दिया और डोर लॉक करके वापिस बेड पर आ गयी और बेड के पास पड़े बॅग्स मे से अपनी नाइटी निकाल ली और नाइटी को बेड पर रख कर डॉली ने अपने कपड़े उतारने चालू कर दिए डॉली ने अपनी सलवार कमीज़ उतार कर बाथरूम मे टाँग दी और फिर अपनी ब्रा और पैंटी को उतार कर बाथरूम में ही रख दिया और वैसे ही बाहर आ गये बाहर बेड के पास आकर उसने अपनी नाइटी उठाई और जैसे ही डॉली नाइटी पहनने लगी उसकी नज़र ड्रेसिंग टेबल के आयने पर चली गयी ट्यूब लाइट की रोशनी मे डॉली का दूधिया बदन एक दम चमक रहा था डॉली ने अपनी नाइटी वहीं छोड़ दी और ड्रेसिंग टेबल के पास चली गयी और आईने मे अपने आप को देखने लगी कुदरत ने डॉली को सच मे बहुत हसीन बनाया था डॉली के 38 साइज़ के बूब्स जो दूध से भरे होने के कारण एक दम तने हुए थी और काले मोटे रंग के निपल मानो जैसे अपना सर घमंड मे उँचा किए हुए थे डॉली अपने हाथों को अपनी बूब्स पर ले आई और उन्हे नीचे से हाथों मे लेकर ऊपेर की ओर उठाया उसके होंटो पर थोड़ी देर के लिए मुस्कान आ गयी आज भी उसके हुश्न का कोई जवाब नही था पर कुछ ही पलों मे उसकी मुस्कान जैसे किसी ने चुरा ली हो डॉली के चेहरे मायूसी छा गयी एक बार फिर उसका गला भर आया डॉली तेज कदमों से वापिस बेड के पास आई और नाइटी उठा कर पहन ली और साहिल की तरफ देखने लगी साहिल बेड पर बैठा खेल रहा था डॉली ने प्यार से साहिल माथा चूमा

डॉली: मेरा बच्चा भूक लगी है (और अपने हाथ को साहिल के फूल जैसे मुलायम चेहरे पर रख देते है साहिल अपनी माँ डॉली के हाथ को अपने छोटे-2 हाथों से पकड़ कर डॉली की उंगली को मुँह मे लेकर चूसने लगता है डॉली बेड पर लेट जाती है और अपनी नाइटी के ऊपेर के बटन्स खोल कर साहिल को अपने साथ लेटा लेती है और साहिल को दूध पिलाने लगती है
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Re: सियासत और साजिश

Postby mastram » 08 Mar 2016 22:37


दूसरी तरफ राज अपने रूम मे लेटा अपने पास्ट के बारें मे सोच रहा था वो अपनी यादों मे खोया हुआ अतीत की गहराइयों मे उतरता जा रहा था उसे मानो ऐसे लग रहा था जैसे कल के ही बात हो एक एक करके उसकी यादें ताज़ा होने लगती है

फ्लश बॅक:- (जब राज कॉलेज मे अपने ग्रॅजुयेशन के आख़िरी साल मे था और यूनिवर्सिटी मे पढ़ रहा था राज ने वहीं एक फ्लॅट रेंट पे ले रखा था जिसमे उसका एक दोस्त लकी भी साथ मे रह रहा था )

राज : ओह्ह लकी उठ देख कितना टाइम हो गया है क्लास के लिए नही जाना क्या

लकी: (आँखों को मलते हुए उठता है) अर्रे भाई जाना है पर तू यार इतनी सुबह -2 तंग ना किया कर अच्छा भला गुरमीत मेडम के सपने देख रहा था

राज: अबे साले कुछ तो शरम कर गुरमीत और अपनी उम्र को तो देख 10 साल बड़ी हो गी तुमसे

लकी: जानता हूँ यार पर क्या करूँ यार ये दिल आया तो उसी पर है इस दिल को कैसे समझाऊ यार मैं तो गुरमीत जी का दीवाना हो गया

राज: चल उठ भी जा गुरमीत के मजनू मैं ज़रा बाहर जॉगिंग के लिए जा रहा हूँ उठ कर नाश्ता बना कल भी नाश्ता नही बनाया और बाहर टोस्ट और चाइ से काम चलाना पड़ा

लकी:तो क्या अब जनाब के लिए परान्ठे बनाऊ

राज: (हंसते हुए) यार मैं सॅंडविच से ही गुज़ारा कर लूँगा तो उठ तो सही

और ये कह कर राज फ्लॅट से बाहर निकल कर यूनिवर्सिटी के ग्राउंड मे आ गया उसका फ्लॅट यूनिवर्सिटी के बिल्कुल सामने की कॉलोनी मे ही था और ग्राउंड मे पहुँच कर राज ने जॉगिंग करते हुए राउंड लगाना चालू कर दिया मई का महीना चल रहा था 6 बज रहे थे पर सूरज अभी से निकल कर गरमी कर रहा था एक राउंड मे ही राज का बदन पसीने से भीग गया राज बेंच के पास आया जहाँ पर उसने अपना छोटा सा कॅरी बॅग रखा हुआ था राज ने उसमे से पानी की बॉटल निकाली और पानी पीने लगा अचानक उसकी नज़र एक जगह ठहर गयी राज ने पानी की बॉटल को बेंच पर रख दिया राज की नज़र ग्राउंड मे जॉगिंग कर रही एक लड़की पर पड़ी ये लड़की ललिता थी राज के नज़रें जॉगिंग कर रही ललिता से हट नही रही थी कुदरत ने उसे अपने हर रंग से नवाजा था राज भले ही लड़कियों से घिरा रहता था पर आज तक उसने अपना दिल किसी को नही दिया था ललिता पहली ही नज़र मे राज के दिल मे उतर गयी क्या हसीन बनाया था बनाने वाले ने जैसे भगवान ने अपनी सारी मेहनत उसे बनाने मे लगा दी हो बड़ी-2 आँखें गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होन्ट और गोरा रंग सूरज की किरनो में और दमक रहा था ललिता ने ऑरेंज कलर की टीशर्ट पहनी हुई थी जिसपर सूरज की किरणें रिफ्लेक्ट होकर उसके गालों पर पड़ रही थी एक तो ललिता का खुद का गोरा रंग और ऑरेंज कलर के रिफ्लेक्ट के कारण ऐसा लग रहा था जैसे उसके गोरे गाल दहक रहे हों राज उस खूबसूरत चहरे में खो सा गया ललिता जॉगिंग करते हुए राज के पास से निकली तो राज को यूँ अपनी तरफ देखता देख राज की तरफ थोड़ा गुस्से से देखा राज ने अपनी नज़रें घुमा ली और बॉटल को बॅग मे रख कर बॅग उठा कर फ्लॅट की ओर वापिस चल पड़ा फ्लॅट वापिस आने पर राज सीधा बाथरूम मे घुस गया और फ्रेश होकर बाहर आ गया

लकी: जनाब नाश्ता तैयार है टेबल पर लगाऊ

राज : हां यार जल्दी कर भूख बहुत लगी है 9 बजे पहली क्लास शुरू हो जाएगी

लकी: यार आज मैं पहली क्लास आटेड नही करूँगा

राज:क्यों क्या हो गया

लकी: यार मुझ पता लगा है कि गुरमीत मेडम की क्लास 10 बजे से शुरू होती हैं और वो पूरा एक घंटा लाइब्ररी मे रहती हैं यार मैं तो बस वहीं जाकर बैठकर उनका दीदार करूँगा

राज: अच्छा तो आज से लाइब्ररी मे जाएगा तुझे पता भी है लाइब्ररी हैं कहाँ कभी गया भी है

लकी: यार जब आदमी प्यार मे होता हैं ना वो तो भगवान भी ढूँढ लेता है मुझ तो फिर सिर्फ़ लाइब्ररी ही ढूँढनी है पूछ लूँगा ना किसी से

राज: साले दो साल हो गये यूनिवर्सिटी मे पढ़ते हुए आज पूछेगा तो सब हँसेंगे तुम पर

लकी: यार हँसने दो लोगो कों वैसे भी बहुत से फ्रेशर आए हैं किसी से पूछ लूँगा तू मेरी फिकर छोड़ तू ये बता आज जनाब जॉगिंग से इतनी जल्दी क्यों आ गये

जैसे ही लकी ने राज से ये सवाल किया राज की आँखों के सामने ललिता का हसीन चेहरा आ गया वो जैसे खो सा गया

लकी; ओह्ह क्या हुआ कहाँ खो गया लगता है सुबह-2 किसी हसीना के दर्शन हो गये पर यार तुझे क्या फरक पड़ता है आज तक तो लड़कियों से दूर भागता आया है फिर किस के ख़याल मे खो गया

राज: नही यार कोई बात नही बस थकान जल्दी हो गयी थी इस लिए जल्दी वापिस आ गया
चल जल्दी नाश्ता कर और तैयार हो जा

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Re: सियासत और साजिश

Postby mastram » 08 Mar 2016 22:37

दोनो ने नाश्ता किया और तैयार होकर फ्लॅट से निकल आए यूनिवर्सिटी पहुँच कर दोनो पार्क मे खड़े हो गये क्योंकि क्लास मे अभी टाइम था उनके कुछ और दोस्त साथ मे खड़े बाते कर रहे थे तभी अचानक फिर से राज की नज़र ललिता पर पड़ी वो अपनी सहेली के साथ आ रही थी वो बातों के दर्मियान हँस रही थी राज तो ललिता के हुश्न मे ऐसा खो गया जैसे उसके आसपास कोई हो ही ना सब लोग आपस मे बातें कर रहे थे पर राज की नज़रें ललिता का पीछा कर रही थी अचानक लकी का ध्यान राज पर गया जो ललिता को देख रहा था लकी मुस्कुराने लगा और राज के कंधे पर हाथ रखते हुए हिलाया

लकी:कहाँ खो गये सरकार क्लास मे नही जाना

राज:जाना क्यों नही चलो चलते हैं

लकी:तुम जाओ यार आज तो मेरी क्लास लाइब्ररी मे ही लगेगी

राज: चंगा ठीक हैं मैं चलता हूँ

और राज और बाकी लड़के क्लास मे चले गये उनके जाने के बाद लकी ने ललिता की तरफ देखा और मन ही मन में बोला यार वैसे राज की पसंद का जवाब नही पर सला खुद तो हिम्मत करेगा नही मुझ ही कुछ करना पड़ेगा लकी ने हाथ मे बँधी हुई घड़ी पर टाइम देखा 9 बजने मे अभी भी 15 मिनट बाकी थी इसका मतलब मेरे पास इस लड़की के बारें मे पता लगाने के लिए सिर्फ़ 15 मिनट और हैं ललिता अपनी सहेली के साथ पार्क के एक कोने मे खड़ी बातें कर रही थी लकी चलता हुआ उनके पास आकर खड़ा हो गया और उनकी बातों को सुनने लगा लकी उनसे कुछ ही कदमों के दूरी पर खड़ा उनकी बातें सुन रहा था


लड़की: ललिता दीदी आज तुम्हें यहाँ देख कर अच्छा लगा काफ़ी सालों बाद मिली हो

ललिता:हां यार स्कूल के वो दिन आज भी याद आते हैं तुम्हारी बेहन मेरी ही क्लास मे थी और तुम शायद दो क्लास नीचे थी ना

लड़की:हां दीदी तब मे 10थ मे थी और आप दोनो 12थ मे थी

ललिता:तो आज कल काजल क्या कर रही हैं

लड़की:आप को पता नही उनकी तो शादी हो गयी हैं

ललिता:क्या इतनी जल्दी

लड़की: हां दीदी लव मॅरेज हुई है जीजू दीदी को बहुत प्यार करतें हैं और वो भी उनके साथ खुश है

ललिता:पर मेरा मानना ये है कि इतनी जल्दी शादी करना ठीक नही है मे तो जब तक कुछ बन नही जाती शादी नही करूँगी

लड़की: आप ठीक कह रही हैं दीदी पर जब आप को किसी से प्यार हो जाएगा तो अब उसके बैगर एक पल नही रह पाओगी

ललिता:अच्छा चलो देखते हैं वैसे अभी तक मुझ प्यार हुआ नही बाकी जब होगा देखा जाएगा.अच्छा ये बता तू रह कहाँ रही है

लड़की:दीदी मे यहीं हॉस्टिल मे रह रही हूँ आप कहाँ रह रही हो

ललिता: मे यहीं पास मे मेरे नाना नानी जी का घर है वहीं पर रह रही हूँ क्योंकि मामा जी अपनी फॅमिली को लेकर लंडन मे सेट्ल हो गये हैं इसीलिए वो अकेले थे उन्हो ने मुझ अपने पास बुला लिया

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Re: सियासत और साजिश

Postby mastram » 08 Mar 2016 22:38

लकी वहीं खड़ा सारी बातें सुन रहा था उसने घड़ी मे टाइम देखा 9 बज रहे और मन मे सोचने लगा यार मे भी राज भाई का घर बसाने मे अपने आप को ही भूल गया और भागता हुआ लाइब्ररी मे चला गया लाइब्ररी मे आने के बाद लकी की आँखें गुरमीत मेडम को ढूँढ रही थी.

तभी उसकी नज़र गुरमीत मेडम पर पड़ी लकी का दिल ख़ुसी से कुलाँचे भरने लगा उसने जल्दी से एक बुक उठाई और गुरमीत मेडम के सामने जाकर बैठ गया और बुक खोल कर पढ़ने का नाटक करने लगा गुरमीत मेडम जो बुक पढ़ रही थी अचानक उसका ध्यान लकी की तरफ गया जो उसी टेबल पर बैठा चोर निगाहो से गुरमीत को देख रहा था आपने आप को यूँ घूरता देख गुरमीत मेडम के होंटो पर मुस्कान आ गयी.

गुरमीत ये जानती थी कि लकी पिछले कई दिनो से उसे छुप-2 कर देख रहा है वो जानती है कि लकी उसे शायद पसंद करने लगा है और इसे लिए वो अपनी क्लास छोड़ कर आया है गुरमीत की एज 30 साल थी पर अभी भी 25 से ज़्यादा की नही लगती थी और ना ही अभी तक उसकी शादी हुई थी गुरमीत भी लकी के शरारती भरे अंदाज को पसंद करने लगी थी

गुरमीत: अरे लकी क्या हुआ यहाँ क्या कर रहा है क्लास मे नही गया

लकी: (एक दम चोंक गया और ऐसे देख कर बोला जैसे उसने अभी गुरमीत मेडम को देखा हो ) जी गुरमीत मॅम आप वो मुझ कोई ज़रूरी काम था इसीलिए क्लास के लिए देर हो गयी तो यहाँ पढ़ने आ गया

गुरमीत: (मुस्कुराते हुए) ओह्ह अच्छा तो जनाब यहाँ पढ़ने आए हैं क्लास मे तो कभी पढ़ते नही देखा

लकी: नही मेम ऐसी बात नही वैसे पढ़ने के टाइम मे ज़रूर पढ़ता हूँ

गुरमीत: और बाकी टाइम मुझ घूरते रहते हो क्यों

लकी: ये क्या बोल रही हैं आप मॅम मे क्यों आप को घूर के देखने लगा
गुरमीत: (चेर से खड़ी होते हुए) चल मेरे साथ आ

और बिना कुछ बोले लकी उठ कर गुरमीत के पीछे चल पड़ा गुरमीत ने लाइट पिंक कलर का सलवार कमीज़ पहना हुआ था हाइट 5,6 इंच एक पंजाबी मूटेयीयर 38 साइज़ के बूब्स जो उसकी टाइट फिटिंग कमीज़ मे एक दम बाहर की तरफ उभरे हुए थे और पतली कमर और 38 साइज़ के कूल्हे लकी का तो बुरा हाल हो रहा था गुरमीत चलते हुए कॅंटीन मे आ गयी लकी भी उसके पीछे आ गया दोनो एक कोने मे जाकर बैठ गये दोनो एक दोसरे के सामने बैठे थे गुरमीत ने दो ग्लास जूस ऑर्डर कर दिया था कॅंटीन मे कुछ ही स्टूडेंट्स थी दोनो काफ़ी अलग से बैठे हुए थे

गुरमीत: अब बातों क्या प्राब्लम है

लकी: प्राब्लम नही मेडम मुझ कोई प्राब्लम नही है आप किस प्राब्लम की बात कर रही हैं
गुरमीत: तुम्हें ये प्राब्लम नही लगती जो तुम मुझे लाइन मारते हो पता भी है मे तुमसे 10 साल बड़ी हूँ और तुम मुझे लाइन मार रहे हो क्या तुम्हें तुम्हारी उमर की कोई लड़की पसंद नही आई अभी तक

लकी: मेडम इसमे मेरा क्या कसूर है जिसे भी प्रपोज करता हूँ वो मानती ही नही अब मुझ जैसी शकल वाले को कॉन पसंद करेगा

गुरमीत: क्यों अच्छी पर्सनाल्टी है तुम्हारी मुझे तो कोई कमी नज़र नही आती

लकी: नही मॅम आप दिल रखने के लिए बोल रही हैं मेरी किस्मत ही खराब है


गुरमीत: हाए चियरअप मन मे तुम्हारी मदद करूँगी ना तुम्हारे लिए गर्लफ्रेंड दूंडने के लिए उदास मत हो

लकी: सच मे मॅम मे एक बात कहूँ

गुरमीत:हां बोल

लकी: पर मॅम मे आप को बहुत लाइक करता हूँ क्या आप मुझ से फ्रेंडशिप करोगी

गुरमीत: मेने बोला ना ये नही हो सकता

लकी; उदास होते हुए) मे कुछ नही जानता मे आप को बहुत लाइक करता हूँ मे आपको बहुत प्यार करता हूँ अगर मेरा प्यार सच्चा है तो आप आज मुझे ****** रेस्टोरेंट मे मिलेगीं मे शाम 5 बजे आप का इंतजार करूँगा

गुरमीत बिना कुछ बोले खड़ी हो गयी और कॅंटीन वाले को बिल दे दिया लकी भी खड़ा होकर चल दिया जब लकी बाहर आया तो पहली क्लास ख़तम हो चुकी थी राज अपने एक दोस्त के साथ हाल मे खड़ा था उसने लकी को देखा और पुकारा

राज : ओह्ह किधर घूम रहा है इधर आ चल अगली क्लास तो आटेड करेगा ना तेरी गुरमीत मॅम की क्लास है

लकी: इसमे पूछने की क्या बात है यार क्लास तो आटेड करूँगा ही वैसे जनाब सुबह जिस लड़की को देख रहे थे उसका नाम ललिता है फॉर मोर इन्फर्मेशन कॉंटॅक्ट मिस्टर.लकी

राज : साले कुछ भी बोलता रहता है

लक: (हंसते हुए) चल अब क्लास मे चलते हैं

सब क्लास की तरफ चल पड़े लकी आज राज के साथ ना बैठ आ कर लास्ट वाली रो मे चला गया लास्ट रो मे वहीं अकेला बैठा था तभी क्लास मे गुरमीत मॅम एंटर हुई उसने अपनी बुक्स को अपने बूब्स मे दबा रखा था आते ही उसने बुक्स को टेबल पर रखा और जिस बेंच पर लकी और राज बैठते थे उस बेंच की तरफ देखा.

पर बेंच पर लकी को ना देख गुरमीत एक पल के लिए सोच मे पड़ गयी फिर उसने पूरे क्लास मे नज़र दौड़ाई और जब उसकी नज़र लास्ट बेंच पर बैठे लकी पर पड़ी तो गुरमीत के होंटो पर मुस्कान आ गयी गुरमीत ने क्लास को पढ़ाना चालू कर दिया इस बीच गुरमीत मॅम और लकी की नज़रें आपस मे बार-2 मिल रही थी.

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