भैया का ख़याल मैं रखूँगी complete

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Dolly sharma
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Re: भैया का ख़याल मैं रखूँगी

Postby Dolly sharma » 01 Nov 2016 21:47


बिहारी ने उसे बस गर्दन हिला कर "ठीक है" का जवाब दिया. बिहारी ने आँखें बंद की तो अचानक उसे याद आया कि वो किस वजह से बेहोश हुआ था. बिहारी एक दम उठ कर बैठ गया. उसकी हार्ट बीट एक दम तेज़ चलने लगी. नर्स ने उसे पकड़ कर बिस्तर पर लिटाना चाहा लेकिन बिहारी को काबू कर पाना उसके लिए मुश्किल साबित हो रहा था.

बिहारी के चेहरे पर खोफ़ को देख कर वीरेंदर अंदर ही अंदर झूम रहा था. वीरेंदर ने नर्स की हेल्प से बिहारी को बिस्तर पर लिटाया और नर्स ने उसे बेहोशी का इंजेक्षन दे दिया. धीरे धीरे बिहारी बेहोशी मे चला गया.

नर्स: शायद यह किसी घटना से आतंकित हो गये हैं. शाम को डॉक्टर. आकर इन्हे एक बार फिर चेक कर लेंगे. मैने ऑब्ज़र्वेशन्स ले ली हैं. कोई प्राब्लम होगी तो आप मुझे कॉल करके बुला सकते हैं. तब तक ध्यान रहे कि पेशेंट को सोने दिया जाए. इनके दिमाग़ पर काफ़ी मेंटल स्ट्रेस है. यू हॅव टू बी वेरी केर्फुल टू डील वित हिम. ही कॅन लूज़ हिज़ मेंटल बॅलेन्स.

वीरेंदर ने नर्स को उसकी फी देकर विदा किया और उसे बता दिया कि ज़रूरत पड़ने पर वो उसे बुला लेंगे. बिहारी को उसके कमरे मे सोता हुआ छोड़ कर वीरेंदर, आशना के रूम में आ गया. आशना और रागिनी दोनो वहाँ बैठी बातें कर रही थी. वीरेंदर को देखते ही रागिनी उठी और वीरेंदर के पाँव मे गिर गयी.

रागिनी: मुझे माफ़ कर दीजिए सर. मैं बहकावे में आ गयी थी. मैं अपनी ही नज़रों मे गिर चुकी हूँ. जिस घर मे मुझे सहारा मिला मैं उसी को बर्बाद करने पर तूल गयी थी.

वीरेंदर: पुरानी सब बातों को भूल जाओ. तुम ठीक हो हमारे लिए यही सबसे बड़ी खुशी की बात है. परसो रात जब तुम्हे सर्वेंट क्वॉर्टर्स से उठाकर हॉस्पिटल पहुँचाया था उस वक्त तुम्हारी कंडीशन काफ़ी नाज़ुक थी. भगवान का शूकर है कि तुम ठीक हो. अभी कुछ दिन तुम आराम करो. जब तक पूरी तरह से रिकवर नहीं कर लेती तब तक तुम घर से बाहर कदम भी नहीं रखोगी.

वीरेंदर के दिल की सफाई को जानकार रागिनी की आँखें छलक आई. उसे अपने किए पर बहुत पछ्तावा हो रहा था. उसे ऐसा लग रहा थे कि उसने खुद भगवान का दिल दुखा दिया है. वीरेंदर ने उसे एक बार भी यह अहसास नहीं होने दिया कि रागिनी ने उनके साथ ग़लत किया है बल्कि वो तो उसकी हालत पर चिंतित था. इस इंसान को तो शैतान भी धोखा देने मे एक बार सोचेगा तो फिर बिहारी मे कितना कमीनपन होगा जो ऐसे देवता समान पुरुष की पीठ मे चुरा घोंपने चला था.


वीरेंदर: तुम्हारी दीदी ने तुम्हारे लिए एक बेहतर भविष्य चुना है. अगर हम पर भरोसा है तो तुम आशना की सलाह पर गौर करना वरना तुम जहाँ कहोगी हम तुम्हारे लिए रहने का प्रबंध कर देंगे. इस घर के दरवाज़े भी तुम्हारे लिए हमेशा खुले रहेंगे. अब फ़ैसला तुम पर है.

रागिनी सर झुकाए खड़ी रही.

वीरेंदर: अगर तुम चाहो तो तुम्हे तुम्हारे घर पहुँचा दें.

रागिनी की आँखों से आँसू छलक पड़े.

रोते हुए रागिनी बोली: अब क्या मुँह लेकर वहाँ जाउन्गी. वो तो अब तक मुझे भूल भी गये होंगे. मेरे वहाँ जाने से उनके ज़ख़्म फिर से हरे हो जाएँगे. आप मुझे किसी भी जगह कोई छोटा मोटा काम दिलवा दीजिए, बाकी की ज़िंदगी मैं इसी तरह गुज़ार लूँगी.

वीरेंदर: आशना, तुम रागिनी से बात कर लो. अगर इसे मंज़ूर हो तो मुझे बता देना, मैं सब फ्रॉमॅलिटीस पूरी करवा दूँगा. आशना ने वीरेंदर की बात सुनकर हामी भरी.

आशना और रागिनी ने किचन मे जाकर लंच तैयार किया. खाना खाते हुए रागिनी बोली: दीदी अब तो आपके पास सारे सबूत हैं, मुझे लगता है कि अब हमे पोलीस की मदद ले लेनी चाहिए. रागिनी की बात सुनकर आशना और वीरेंदर की नज़रें मिली और दोनो मुस्कुरा दिए.

जिस सच को छुपाने के लिए उन्होने यह खेल खेला था उस सच से रागिनी अंजान थी.

आशना: इस इंसान ने हम सबकी ज़िंदगी मे ज़हर घोलने की कोशिस की है. इतनी जल्दी इसे पोलीस के हवाले नहीं करेंगे. बहुत जल्द यह सलाखों के पीछे होगा मगर उस से पहले हमे इसके दिमाग़ की नसों के चिथड़े उड़ाने होंगे ताकि ज़िंदगी मे कभी यह दोबारा अपने दिमाग़ का इस्तेमाल ही ना कर सके.

आशना की बात सुनकर रागिनी चुप चाप खाना खाने लगी. थोड़ी देर बाद जैसे अचानक रागिनी को कुछ याद आया हो.

रागिनी: एक बात तो पूछना भूल ही गयी. अगर उस रात आपने मुझे सर्वेंट्स क्वॉर्टर से छुड़ा लिया था तो फिर वो कॉन थी जिसे बिहारी ने मुझे समझ कर मार दिया और इतना सब होने के बावजूद उस लड़की ने कोई हरकत क्यूँ नहीं की.

आशना मुस्कुराइ और बोली: क्यूंकी लाशें हरकतें नहीं करती.

रागिनी, आशना की तरफ हैरानी से देखने लगी.

वीरेंदर: मैं बताता हूँ.

रागिनी ने वीरेंदर की तरफ देखते हुए नज़रें झुका ली.

वीरेंदर: परसो रात तुम्हे सर्वेंट क्वॉर्टर्स से निकालने से पहले हम ने सारा इंतज़ाम कर लिया था.

तुम्हे याद होगा, जिस हॉस्पिटल मे तुम्हे अड्मिट किया था वहाँ एक डॉक्टर. थे डॉक्टर. विजय.

रागिनी: हां, उन्होने ही तो अपनी सुपारविषन मैं मेरा इलाज करवाया था और डॉक्टर्स. को सख़्त हिदायत दी थी मेरा ख़याल रखने की.

वीरेंदर: वो मेरे होने वाले शाडू साहब हैं. यानी कि आशना की छोटी बेहन के फियान्से.

रागिनी ने धीरे से गर्दन हिला दी.

वीरेंदर: परसो जब मैने और आशना ने तुम्हे वहाँ से छुड़ाने के प्लान को अमल मे लाने के लिए उनसे एक लड़की की लाश की डिमॅंड की तो यह काम उनके लिए कोई मुश्किल तो नहीं था मगर लीगल तौर पर इतना आसान भी नहीं था.
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Dolly sharma
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Re: भैया का ख़याल मैं रखूँगी

Postby Dolly sharma » 01 Nov 2016 21:48


किसी भी हॉस्पिटल की मॉर्चुवरी मे लावारिस लाश को ज़्यादा से ज़्यादा 6 से 7 दिन तक स्टोर कर रखा जाता है. अगर फिर भी कोई जान-पहचान वाला लाश को लेने ना आए तो हॉस्पिटल की तरफ से उसे डिस्पोस कर दिया जाता है. हम ने जब उनसे एक लाश की डिमॅंड की तो उन्होने बिना किसी झीजक के मुझे हां कर दी लेकिन इस काम के लिए हमे कुछ फॉरमॅलिटीस पूरी करनी थी. उस लाषो को अपना दूर का रिलेटिव बताकर और कुछ झूठे सबूत पैदा कर वो लाश हमे सौंप दी गयी.

रागिनी: तो क्या डॉक्टर. विजय ने पूछा नहीं कि लाश का क्या करोगे?

वीरेंदर: डॉक्टर. बीना को वो बड़े अच्छे से जानते थे. मैने जब उन्हे बताया कि यह लाश हमे डॉक्टर. बीना के कातिल तक पहुँचा सकती है तो उन्होने उस से आगे कोई सवाल नहीं किया और हमारी हर मुमकिन मदद की. बाकी सब तो तुम जानती ही हो तुम्हे छुड़ाने के बाद हम ने वो लाश वहाँ रख दी.
रागिनी: तो क्या बिहारी को पता नहीं चला कि वो लाश किसी और की है.

आशना: पता तो तब चलता जब वो उस लाश का चेहरा देख पाता. हम ने सर्वेंट्स क्वॉर्टर की सर्विस लाइन को पोल से ही निकाल दिया था.

रागिनी खामोश हो गयी. इसके आगे की कहानी वो जानती थी.

खाना ख़तम करने के बाद वीरेंदर ने अपने अगले प्लान के बारे मे आशना और रागिनी से डिसकस किया. इस प्लान के सफल होने के साथ बिहारी अपना मानसिक संतुलन खो सकता था या फिर उसे दिमागी तौर पर बीमार साबित किया जा सकता था.

शाम करीब 5:00 बजे डॉक्टर. ने आकर बिहारी का चेक अप किया.

डॉक्टर.: ही ईज़ ऑलराइट नाउ मिस्टर. वीरेंदर, बस मेडिसिन्स टाइम पर देते रहना. ही विल बी ऑल ओक इन वन ओर टू डेज़.

वीरेंदर ने डॉक्टर. को बाहर तक छोड़ा. अब उनके प्लान के अगले फेज़ का वक्त था.

5:30 बजे रागिनी नर्स की ड्रेस पहन कर बिहारी के रूम मे घुसी. बिहारी अभी भी आँखें बंद किए लेटा हुआ था. वीरेंदर पहले से ही वहीं बैठा था. वो जानता था कि बिहारी को देख कर रागिनी अपना होश खो सकती है. रागिनी ने जब बिहारी को देखा तो उसके दिल मे उसके लिए नफ़रत के भाव आने लगे. रागिनी के दिल का हाल जान कर वीरेंदर ने उसे दिल को मज़बूत रखने और सबर से काम लेने का इशारा किया.

रागिनी ने एक टॅबलेट ली और पानी का गिलास लेकर बिहारी के पास चली गयी. रागिनी ने बिना कुछ बोले बिहारी के आगे दवाई और गिलास बढ़ा दिया.

वीरेंदर: काका, उठिए और दवाई खा लीजिए.


बिहारी बेसूध सा पड़ा रहा. वीरेंदर ने इस बार उसे हिलाकर जगाया तो बिहारी की नींद टूटी. वो काफ़ी थकावट महसूस कर रहा था. बेहोशी की दवाई का असर अभी भी उस पर था. बिहारी ने धीरे से आँखें खोली और वीरेंदर की तरफ देखा.

वीरेंदर: काका, अब कैसा महसूस कर रहे हैं आप?

बिहारी ने धीरे से हां मे गर्दन हिलाई.

वीरेंदर: काका यह दवाई खा लीजिए.

रागिनी ने झट से टॅबलेट और गिलास बिहारी के आगे बढ़ा दिया. बिहारी ने रागिनी की तरफ देखे बिना ही टॅबलेट ली और मुँह में डाल ली. जैसे ही पानी का ग्लास लेने के लिए उसने हाथ आगे बढ़ाया उसकी नज़र रागिनी के चेहरे पर पड़ी. रागिनी के चेहरे को देखते ही बिहारी के चेहरे का रंग उड़ गया और उसके गले से एक ज़ोरदार चीख निकली. चीख इतनी भयानक थी कि बिहारी के बेहोश होते ही ऐसा लगा कि जैसे उसके प्राण ही निकल गये हों.

वीरेंदर ने बिहारी को हिलाकर जगाना चाहा लेकिन बिहारी तो जैसे डर की वजह से कोमा मे चला गया था.

वीरेंदर ने रागिनी की तरफ मुस्कुराते हुए देखा और बोला: थॅंक्स, यू कॅन गो नाउ.

रागिनी कुछ कहना चाहती थी लेकिन वीरेंदर के कहने पर वो आशना के कमरे मे चली गयी.
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Re: भैया का ख़याल मैं रखूँगी

Postby Dolly sharma » 03 Nov 2016 22:01


वीरेंदर ने तुरंत ही डॉक्टर. को फोन करके बता दिया कि होश मे आने के बाद बिहारी अबनॉर्मल तरीके से बिहेव कर रहा है. उसके बाद वीरेंदर, बिहारी को होश मे लाने की कोशिश करने लगा. करीब 20 मिनट तक बिहारी को होश मे लाने की अथक कोशिश के बाद जब बिहारी को होश आया तो वो अपने आप मे नहीं था. वो काफ़ी डरा हुआ था और चिल्लाए जा रहा था. वो बिस्तर से उठकर भागने लगा तो वीरेंदर ने उसे पकड़ लिया.

वीरेंदर: होश मैं आओ काका, यह क्या हो रहा है आपको?

बिहारी: वो वो भी आ गयी. अब मैं नहीं बचूँगा. वो दोनो मिलकर मुझे मार डालेंगी. छोड़ दो मुझे, मैं भाग जाना चाहता हूँ यहाँ से.

तभी उसे बाहर खड़ी आशना की वोही भयानक आवाज़ आई.

आशना: कहाँ जाएगा तू. तू कहीं भी भाग ले, मैं तेरा पीछा नहीं छोड़ूँगी. अब तू नहीं बचेगा, तूने ही मेरा कतल किया है कमिने. मैं जानती थी यह नीच हरकत तेरे सिवा कोई नहीं कर सकता. बीना की आत्मा की आवाज़ सुनकर बिहारी की सोचने समझने की रही सही शक्ति भी जवाब दे गयी. वो एक दम बौखला गया.

तभी कॉल बेल बजी. आशना ने बेल्ट का बटन दबाकर माइक्रोफोन ऑफ किया और दरवाज़े पर खड़े डॉक्टर. और नर्स को जल्द से अंदर ले आई. बिहारी, वीरेंदर की पकड़ से निकलने की लाख कोशिश कर रहा था. बिहारी ज़ोर ज़ोर से चीख रहा था और वीरेंदर से छूटने का भरसक प्रयास कर रहा था. बेकाबू बिहारी को देख कर डॉक्टर. ने नर्स को झट से इंजेक्षन तैयार करने को कहा.

बिहारी: तुम सब भी मारे जाओगे. छोड़ दो मुझे, एक एक को मरना है. मुझे जाने दो, मैं मरना नहीं चाहता. मुझे जाने दो. वो दोनो मिलकर सब सत्यानाश कर देंगी. बिहारी की बातें डॉक्टर. और नर्स की समझ मे नहीं आ रही थी. उन्हे यह सब बिहारी के दिमाग़ का फितूर लग रहा था. नर्स ने इंजेक्षन तैयार करके बिहारी को इंजेक्ट कर दिया. बिहारी कुछ देर तक छटपटाता रहा और फिर धीरे धीरे शांत पड़ गया.

बेहोशी मैं भी वो कुछ कुछ बुद्बुदाये जा रहा था.

डॉक्टर. ने वीरेंदर की तरफ देखा और बोला: मिस्टर. वीरेंदर, ऐसा कब से बिहेव कर रहे हैं यह?

वीरेंदर: डॉक्टर. दोपहर को यह मेरे साथ ही थे. ऑफीस की तरफ जाते हुए गाड़ी मे ही यह सब शुरू हो गया.

डॉक्टर.: देखिए मिस्टर. वीरेंदर, इनके कुछ टेस्ट्स करने पड़ेंगे उनकी बिना पर ही मैं कुछ बता सकूँगा लेकिन यहाँ तक फिज़िकल ओप्ब्स्वेशन्स का सवाल है, मुझे तो यह केस पूरे हिस्टीरिया का लगता है. यह अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं. इस अवस्था मे इन्हे घर मे रखना काफ़ी ख़तरनाक साबित हो सकता है.

वीरेंदर: लेकिन डॉक्टर. सुबह तक तो यह बिल्कुल नॉर्मल थे और फिर अचानक से यह सब?

डॉक्टर. : आइ कॅन अंडरस्टॅंड मिस्टर. वीरेंदर, लेकिन कयि बार ऐसा हो जाता है कि इंसान अपने दिल की बात किसी को बता नहीं पाता और फिर जब एक दम से उस पर सारे एमोशन्स हावी हो जाते हैं तो वो इस तरह से बिहेव करना शुरू कर देता है.

वीरेंदर: तो अब हमे क्या करना चाहिए?

डॉक्टर.: आइ थिंक के आपको एक बार नूरॉलजिस्ट से कन्सल्ट कर लेना चाहिए. कल आप इन्हे लेकर हॉस्पिटल आ जाइए. इनके सारे टेस्ट्स वहीं हो जाएँगे. अभी तो इन्हे इंजेक्षन दे दिया है और सुबह तक यह बेहोश ही रहेंगे, बाकी की रिपोर्ट कल के डाइयग्नोसिस के बाद ही पता चलेगी.

डॉक्टर. को विदा करके वीरेंदर ने बिहारी के दरवाज़े को बाहर से लॉक किया और अपने रूम मे आ गया.

आशना और रागिनी ने मिलकर डिन्नर तैयार किया. डिन्नर के बाद आशना और रागिनी, आशना के कमरे मे चले गये और वीरेंदर अपने कमरे में. वीरेंदर और आशना, रागिनी को अपने बीच के संबंध के बारे मे अभी नहीं जताना चाहते थे इस लिए उन्होने उस रात अलग सोने का फ़ैसला किया.

रात को ही बातों के दौरान आशना ने रागिनी को बता दिया कि उसके फ्यूचर के बारे मे सोचते हुए वीरेंदर ने डिसिशन लिया है कि उसकी और मोहित(वीरेंदर के शोरुम का मॅनेजर) की शादी करवा दी जाए. आशना ने रागिनी को बताया कि मोहित एक डाइवोर्स है. उसकी पहली बीवी शादी के कुछ दिनो बाद ही अपने बाय्फ्रेंड के साथ भाग गयी थी.

रागिनी, मोहित को अच्छे से जानती थी. रागिनी ने बिना किसी शर्त के आशना की बात मान ली.

आशना: तुम्हारी शादी की तारीख 11 नवंबर. को तय हुई है. हम ने मोहित से भी बात कर ली है, उसे भी कोई आपत्ति नहीं है. अगर तुम्हे लगता है कि तुम उसके साथ खुश रह पाओगी तो हम शादी की तैयारियाँ शुरू कर देते हैं.
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Re: भैया का ख़याल मैं रखूँगी

Postby Dolly sharma » 03 Nov 2016 22:02


रागिनी: दीदी, आपके तो पहले ही मुझ पर बहुत एहसान हैं. एक और एहसान करके आपने मुझे अपनी ही नज़रों मे गिरने से बचा लिया. ज़िंदगी में शायद ही मैं कभी अपने आप से नज़रें मिला सकूँ लेकिन आपने मुझे दुनिया के सामने शर्मिंदा होने से बचा लिया है.

आशना: तो फिर हमें कल से ही सारी तैयारियाँ शुरू कर देनी चाहिए. वीरेंदर, बड़ा भाई होने के नाते तुम्हारा कन्यादान करेगा. 11 नवंबर. के दिन इस घर से एक लड़की जाएगी और एक लड़की हमेशा के लिए इस घर मे आएगी.

रागिनी हैरानी से आशना की तरफ देखने लगी.

आशना: सोच रही हूँ कि अब मैं भी वीरेंदर के साथ शादी कर ही लून वरना पता नहीं लोग हमारे बारे में क्या क्या बातें करेंगे. इसी बहाने तुम्हे एक भाभी और तुम्हारे भैया को एक बीवी मिल जाएगी.

आशना की बात सुनते ही रागिनी के होंठों पर एक स्माइल आ गयी और दोनो खिलखिलाकर हंस पड़ी.


बेहोशी के इंजेक्षन के कारण बिहारी को सुबह काफ़ी देर तक होश नहीं आया. मेंटली डिस्टर्ब्ड तो वो पहले से ही था उसपर बेहोशी के दो दो इंजेक्षन्स ने उसे अगले दिन भी जकड रखा था. वीरेंदर घर से निकल चुका था.

आशना: रागिनी, बिहारी को तुम जगाओगी या मैं जगा दूं?


रागिनी: अगर मैं जगाने गयी तो शायद वो फिर कभी उठ ही ना पाए. अच्छा होगा कि अगर आप ही उसे जगा दें.

आशना, बिहारी के कमरे मे गयी तो वो हैरान रह गयी. बिहारी अपने बिस्तर पर नहीं था. आशना का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा. आशना ने झट से मोबाइल जेब से निकाला और वीरेंदर का नंबर. डाइयल किया ही था कि उसकी नज़र अपने सामने लगे मिरर पर पड़ी.

अपने पीछे पड़े सोफे की बगल मे बिहारी को छुपे हुए देख कर आशना एक दम घबरा गयी. आशना ने झट से पीछे मुड़कर बिहारी को देखा. जैसे ही दोनो की नज़रें मिली, बिहारी का जिस्म काँपने लगा. ज़ुबान थरथराने लगी.

बिहारी: म.....मा.......मत मार...मारो मुझे. म.....मैने कुछ नहीं किया.

आशना ने बिहारी की तरफ कदम आगे बढ़ाया तो बिहारी की आँखों मे खोफ़ उतर आया. वो एक दम चिल्लाने लगा.

बिहारी: त.....तुम ज़िंदा नहीं हो सकती. त..तू....तुम्हे मैने अपने हाथों से मारा था. त....तू.....तुम रागिनी नहीं हो.

आशना: काका होश मे आओ, मैं आशना हूँ रागिनी नहीं.

बिहारी: न...नहीं तुम रागिनी हो, तुम रूप बदल कर आई हो. तुम रागिनी का भूत हो. तुम जानती हो कि मैं आशना को कभी कोई नुकसान नहीं पहुन्चाउन्गा इसी लिए तुम आशना के रूप मे आई हो.

आशना: काका, क्या हो गया है आपको.

बिहारी: चुप का साली, तुझे क्या लगा मैं तुझे पहचान नहीं पाउन्गा, देख अपने चेहरे की तरफ. आशना के कपड़े पहन लेने से क्या तू आशना बन जाएगी.

आशना ने मुड़कर अपने चेहरे की तरफ देखा और फिर दोबारा बिहारी की तरफ देखा.

आशना: काका, मैं आशना ही हूँ.

बिहारी: द.....दे.....देख तेरा चहरा बदल रहा है. तू...तू बीना बन गयी, देख आईने मे तेरा चहरा कैसे बदल रहा है.

आशना ने एक बार फिर से आईने में अपने आप को देखा लेकिन उसे अपने चेहरे में कुछ भी फरक नज़र नहीं आया.

बिहारी बुरी तरह से मेंटली डिस्टर्ब्ड हो चुका था.

आशना: काका, मैं आपकेलिए नाश्ता लाती हूँ, आप फ्रेश हो जाइए.

यह कहकर आशना उसके रूम से बाहर आ गयी. अपने रूम में जाकर उसके रागिनी को सारी बात बताई और फिर वीरेंदर को भी फोन पर सारी बात बता दी. उनका प्लान बहुत जल्द असर दिखा रहा था. जिस मकसद से उन्होने बिहारी के खिलाफ चाल चली थी वो कामयाब होती नज़र आ रही थी. वीरेंदर ने उन्हे समझा दिया कि अब आगे क्या करना है.

रागिनी को यही बताया गया था कि बिहारी को पागल बनाकर वो उसे उसके चंगुल से आसानी से छुड़ा सकते हैं क्यूंकी एक बार कोर्ट ने बिहारी को पागल करार दे दिया तो उसे बिहारी से आसानी से तलाक़ मिल जाएगा और फिर वो मोहित के साथ मिलकर नयी ज़िंदगी शुरू कर सकती है. वैसे भी बिहारी के पापों का घड़ा भर चुका था, अब उसका अंत करने मे ही भलाई थी. पाप का अंत भी हो जाए और किसी को नुकसान भी ना हो ऐसा प्लान करना बहुत ज़रूरी था और अब तक का उनका प्लान सफल होता हुआ नज़र आ रहा था.
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Re: भैया का ख़याल मैं रखूँगी

Postby shubhs » 04 Nov 2016 20:14

:lol: बहुत ही बिंदास
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Dolly sharma
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Re: भैया का ख़याल मैं रखूँगी

Postby Dolly sharma » 06 Nov 2016 13:30

shubhs wrote::lol: बहुत ही बिंदास
THANKS DEAR

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