चूतो का समुंदर

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Ankit
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Re: चूतो का समुंदर

Postby Ankit » 10 Jan 2017 19:49


स- आ गया...क्या हाल है अब...और वो चोट कैसी है...

मैं- मामूली खरॉच थी...अब ठीक है...आप बताओ...

स- मस्त...ऐज ऑल्वेज़...हाहाहा...

मैं- अच्छा...वो बात...क्या बताने वाले थे आप...कामिनी और मेरे डॅड का क्या...

स- हां...दिखाता हूँ...तुम खुद देख कर डिसाइड करो..मुझे तो समझ नही आया...

और फिर एस ने मुझे एक फाइल पकड़ा दी...

स- ये फाइल उसी ऑफीस के लॉकर मे मिली...देखो इसे...

मैं फाइल को देखने लगा और पार्ट्नर्स का नाम पढ़कर मेरा दिमाग़ हिल गया....

मैं- क्या...हाउज़ ईज़ पॉसिबल...ये नही हो सकता....

स- ये ओरिजिनल है...तभी तो मैं भी चौंक गया....

मैं- पर...डॅड ने कामिनी के नाम 30% शेर किए है...क्यो....कामिनी का डॅड से क्या संबंध....????

और मैं फाइल हाथ मे ले कर अपने दिमाग़ मे आए गुस्से को काबू करने मे लग गया......
मैं काफ़ी देर तक उस फाइल को देखते हुए मन मे सोचता रहा कि आख़िर ये चक्कर क्या है....

कौन है ये कामिनी....और डॅड से इसका रिश्ता क्या है....डॅड ने इसे पार्ट्नर क्यो बनाया...???

मुझे यू परेशान देख कर मेरे सामने बैठा मेरा आदमी स उठा और मेरे कंधे पर हाथ रख कर बोला....

स- अंकित...ये टाइम गुस्से से काम लेने का नही...बल्कि दिमाग़ को यूज़ करने का है...

मैने उसकी बात सुनकर उसकी आँखो मे देखा....और अपने आप को कंट्रोल कर के बोला...

मैं- आप सही कहते हो...लेकिन डॅड ने...

स(बीच मे)- मैने कहा ना...माइंड यूज़ करो...बिना किसी सबूत के किसी रिज़ल्ट पर मत पहुचो...पहले पता करो...

मैं- ह्म्म...आप सही हो...मुझे पता करना ही होगा...ये कामिनी की जड़ कहाँ तक है..और क्यो है...

स- ह्म..लो कॉफी आ गई...पहले कॉफी पियो और रिलॅक्स हो जाओ...

फिर हमने बैठ कर कॉफी पी और कॉफी ख़त्म होते ही....

मैं- एक बात बताइए....आपको लगता है कि कामिनी ने जो बोला वो सच है...

स- हाँ...लगता तो यही है...उस वक़्त वो झूट बोलती क्या...आइ डोंट थिंक सो...

मैं- सही कहा...जब किसी की फटी होती है तो वो सच ही बकता है....

स- और हाँ ...उसके घर जो कॅमरास न्ड माइक्रो फोन्स लगाए थे...उससे भी कुछ खास पता नही चला...

मैं- ह्म्म...इसका मतलब कामिनी ने सच कहा...दामिनी सब जानती है...और कामिनी तो बस अपनी बहेन के कहने पर चल रही है...

स- बिल्कुल...

मैं- पर डॅड और कामिनी का क्या रिश्ता...क्या ये सिर्फ़ बिज़्नेस है या फिर कुछ और...ओह्ह्ह...ये बात बिल्कुल भी नही समझ आ रही...क्या करूँ...

स- पहले रिलॅक्स हो जाओ...और हाँ..चाहो तो हम कामिनी से पूछ सकते है...

मैं- शायद नही...मुझे नही लगता कि कामिनी को इस बारे मे कुछ भी पता है...

स- तो तुम्हारा मतलब कि तुम्हारे डॅड ...

मैं(बीच मे)- हाँ...सिर्फ़ डॅड ही ये जानते है...और इस बात का जवाब वही देगे...पर पुच्छू कैसे....उनसे कुछ भी पूछा तो वो भी कई सवाल करेंगे...और उनके आन्सर मैं अभी नही देना चाहता....

स- तो करना क्या है अभी..ये बोलो...

मैं- मुझे तो अभी काजल का वेट है...देखे तो कि वो क्या करती है...और हां...रजनी...

स(बीच मे)- हाँ...रजनी से बात की...

मैं- नही...आज गया था...बट पहले रक्षा के साथ फस गया और जब फ्री हुआ तो आंटी कहीं जा रही थी...तो मैं निकल आया....पर अब पूछना ही होगा..रजनी आंटी से बात करके कुछ तो बोझ हल्का होगा...शायद इससे कामिनी का भी कुछ आइडिया निकल आए....

स- ह्म्म..सही है..मुझे भी लगता है कि रजनी से कामिनी का कुछ तो पता लगेगा...

मैं- तो ठीक है...आज रात तक कुछ करता हूँ....आज रजनी आंटी को जवाब देना ही होगा...अच्छे से या बुरे से....

और फिर मैं दाँत पीसते हुए वो फाइल ले कर खड़ा हो गया....


स- जा रहे हो....ज़रा उससे मिल तो लो...बहुत परेशान है वो...

मैं- आज नही...उसे बोलना कि थोड़ा और वेट करे...और हाँ...बहादुर को भी...

स- ओके...तुम रिलॅक्स हो कर कदम बढ़ाना...

मैं- ह्म्म...

और मैं वहाँ से निकल आया....

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Re: चूतो का समुंदर

Postby Ankit » 10 Jan 2017 19:50

Kamini ke ghar........


काजल ने कार पार्क की और अंदर की तरफ चल पड़ी. ..इस टाइम काजल थोड़े गुस्से मे लग रही थी ....

अंदर आते ही उसने नोकरानी को कॉफी बनाने को बोला...

काजल ने काफ़ी गुस्से मे बोला और तेज आवाज़ मे भी....जिसे रूम मे लेटी कामिनी ने सुन लिया...और वो समझ गई कि काजल गुस्से मे है....

कामिनी- काजल...काजल बेटा....यहाँ आओ...

काजल गुस्से से पैर पटकती हुई कामिनी के पास पहुच गई...

काजल के चेहरे पर गुस्सा सॉफ झलक रहा था...

कामिनी- आ गई बेटा....

काजल(गुस्से से)- हाँ आ गई...बोलो क्या काम है....

कामिनी- तू पहले यहाँ बैठ...मेरे पास मे आ...

काजल- मोम...

कामिनी(बीच मे)- चुप...पहले बैठ जा...फिर बोलना...

काजल ना चाहते हुए भी कामिनी के पास बैठ गई...

कामिनी- हाँ..अब बोल...इतना गुस्सा किस बात का...??

काजल- गुस्सा नही करूँ तो क्या करूँ...कुछ भी नही हुआ...

कामिनी- क्या नही हुआ...क्या अंकित ने कुछ...

काजल(बीच मे)- नही मोम...वो साला तो मिला ही नही...इसीलिए तो गुस्सा आ रही है...

कामिनी- नही मिला....तो इसमे इतना गुस्सा क्यो....गया होगा किसी काम से कही...

काजल- तभी तो...मैं इतनी मेहनत से रेडी हुई...कुछ प्लान किया...सोचा था कि आज...पर कुछ नही हुआ...

कामिनी(काजल का हाथ पकड़ कर)- देखो बेटा....ऐसी छोटी बातों पर गुस्सा नही करते....उसे क्या पता कि तुम आ रही हो...अभी नही मिला तो फिर मिल जायगा...

काजल- जानती हूँ...पर...

कामिनी(बीच मे)- कुछ नही...तू बस ये याद रख कि तुझे करना क्या है...और हाँ..ये सब तू गुस्से के साथ तो नही कर पायगी ना...प्यार से करना होगा....

काजल- ह्म्म...जानती हूँ...पर मोम...क्या मैं ये कर पाउन्गी...??

कामिनी- बिल्कुल...मेरी बेटी को देख कर कोई भी पागल हो जाए...ये अंकित क्या चीज़ है...

काजल- सच मे...

कामिनी- हाँ बेटा...तुझे ये करना ही है...नही तो दामिनी को सच पता चल गया तो...

तभी एक जोरदार आवाज़ ने कामिनी और काजल को हिला दिया...

""कौन सा सच कम्मो...""

ये आवाज़ दामिनी की थी ...जो इस वक़्त गेट पर खड़ी हुई थी....दामिनी को देख कर कामिनी सकपका गई...पर काजल ने कुछ रिएक्ट नही किया...

कामिनी- अरे दी तुम...अचानक से...

दामिनी- हाँ...तू ये बता कि कौन से सच की बात कर रही थी...

कामिनी- वो ..दीदी...आप आइए ना...

दामिनी- वो सब छोड़...मुझे पूरी बात बता...और ये तेरा पैर...क्या हुआ...

कामिनी- सब बताती हूँ दीदी..आप आइए तो...

दामिनी भी कामिनी के बेड पर आ कर बैठ गई ...

कामिनी- आप जिस काम से गई थी, वो हुआ क्या...??

दामिनी- वो बाद मे...पहले ये पता कि क्या सच छिपा रही है...बोल जल्दी...

दामिनी को थोड़ा गुस्सा आने लगा था...जिससे कामिनी को थोड़ी घबराहट होने लगी थी....

कामिनी- दीदी...वो..मैं सब शुरू से बताती हूँ..पर गुस्सा मत करना...

दामिनी- तू जल्दी बता...फिर देखुगी...

फिर कामिनी ने आक्सिडेंट से ले कर काजल के साथ हुई बात-चीत तक , सब कुछ दामिनी को बता दिया...
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Re: चूतो का समुंदर

Postby Ankit » 10 Jan 2017 19:50


जिसे सुनकर दामिनी की आखो मे गुस्सा बढ़ने लगा था....कामिनी ने जैसे ही बोलना बंद किया तो दामिनी चिल्लाते हुए बोली...


दामिनी- तेरा दिमाग़ खराब है क्या...भूत-बूत कुछ नही होता..समझी...और तूने भूत समझ कर कमल का सच बक दिया...हाँ...

और दामिनी ने कामिनी को एक थप्पड़ मार दिया....

कामिनी- क्या करती मैं...भूत से कौन जीत सकता है...उसने मेरी बेटी को मारने की धमकी....मैं क्या करती...

दामिनी- पर ये कैसे मान गई तू कि वो भूत है इंसान नही...

कामिनी- मैने बताया ना...इतनी गोलिया मारने पर भी उसे कुछ नही हुआ ...और मेरी बेटी के साथ...

कामिनी धीरे-2 आँसू बहाने लगी थी...जिसे देख कर दामिनी का गुस्सा भी कम हो गया...

दामिनी भी एक माँ थी..वो कामिनी की हालत समझ सकती थी...इसलिए उसने कामिनी को गले से लगा कर मानना शुरू कर दिया.....

दामिनी- अब रो मत...जो हुआ सो हुआ...अब आगे क्या सोचा...ये काजल को क्या करने का बोला...

काजल , जो इतनी देर से चुप बैठी थी...उसने दामिनी को आन्सर दिया...

काजल- अब एक ही काम करना है...अंकित को फसाओ...सब कुछ छीन लो...और फिर बाप-बेटे का काम तमाम.....

दामिनी- प्लान तो अच्छा है...पर ये इतना आसान नही....पहले हमे सब कुछ लेना होगा....मारना तो आसान है...लेकिन अपना हक़ लेना मुस्किल पड़ेगा....

काजल- जानती हूँ...लेकिन भरोशा रखो....मैं सब सेट कर लूगी...

दामिनी- ह्म्म...मुझे भरोशा है तुझ पर...पर याद से...अंकित बिस्तर पर हैवान बन जाता है...फाड़ के रख देगा...

काजल- अरे मौसी...आपकी और मोम की खूबी है मुझ मे...सब संभाल लूगी...हहहे...

और काजल की बात सुनकर दामिनी और कामिनी भी हँसने लगी....

ये तीनो यहाँ अंकित को फसाने का प्लान बना कर खुश हो रही थी...और इनसे दूर बैठा अंकित का आदमी ( स ) इनकी सारी बातें सुन रहा था....

स- ह्म्म..प्लान तो मस्त है...पर सॉरी...काम नही होगा....और दामिनी...तेरी घर वापिसी का गिफ्ट भी तैयार है...जल्दी मिल जायगा.....फिर आएगा मज़ा......

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Re: चूतो का समुंदर

Postby shubhs » 10 Jan 2017 23:09

अच्छी कहनी
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Re: चूतो का समुंदर

Postby Ankit » 12 Jan 2017 11:07

अंकित के घर.....

सीक्रेट हाउस से निकल कर मैं सीधा घर आ गया था....

मेरा मूड अभी भी खराब था...मुझे समझ नही आ रहा था कि फाइल मे जो लिखा है वो कैसे सही हो सकता है....

इस सवाल का जवाब भी मुझे सिर्फ़ डॅड से ही पता चल सकता था...पर मेरी मजबूरी ये थी कि मैं दाद से डाइरेक्ट पूछ नही सकता था....

ऐसे ही दिमाग़ मे कस्मकस लिए मैं सीधा अपने रूम मे चला आया...और आते ही पेग बना कर गटाकने लगा....

मैं(मन मे)- अब क्या किया जाए....जितना भी अच्छा करने का सोचता हूँ उतना ही बुरा हो जाता है....

अभी रजनी और कामिनी को निपटने का सोच ही रहा था कि अब ये फाइल....आख़िर डॅड और कामिनी का रीलेशन होगा क्या...

क्या डॅड और कामिनी....नही-नही...डॅड ऐसे नही है...अगर ऐसी कोई बात होती तो कभी तो कुछ सामने आता ही...

ये बात कुछ और है...शायद ये भी उनकी दुश्मनी की एक वजह होगी...शायद दादाजी के टाइम की कोई बात....

पर डॅड ने ये बिज़्नेस खुद की दम पर खड़ा किया...इसमे दादाजी का कोई रोल ही नही था....तो क्या बात होगी....

यही सब सोचते-सोचते मैं 4 पेग गटक गया...फिर मुझे ख्याल आया कि क्यो ना वो डाइयरी फिर से चेक करूँ...शायद इस बात का कोई क्लू मिल जाए....

मैने एक पेग और मारा और गेट लगा कर डाइयरी पढ़ने लगा...

पूरी डाइयरी टटोल डाली पर कुछ भी पता नही चला.....

मैने मायूस हो कर डाइयरी साइड की और रेस्ट करने लगा....

डाइयरी पढ़ कर मेरे सवाल का जवाब तो नही मिला...पर एक बार फिर मेरी आँखो मे मेरे परिवार की बुरी हालत की तस्वीर छा गई..और मेरी आँखो से आँसू बहने लगे....

और आँसू बहाते हुए मैं कब सो गया...ये पता ही नही चला....


काफ़ी देर सोने के बाद मेरी नीद फ़ोन के बजने से टूटी....ये कॉल मेरे आदमी का था....

(कॉल पर)

मैं- ह्म..हेलो...

स- सो रहे थे क्या...

मैं- हाँ...क्या हुआ...

स- तुम टेन्षन मत लो...सब ठीक होगा....ओके...

मैं- ह्म...

स- वैसे मैने एक गुड न्यूज़ देने के लिए कॉल किया था....

मैं- गुड न्यूज़....क्या....??

स- दामिनी ईज़ बॅक...और उसकी बेटी भी मिल गई...

मैं- ग्रेट....आप उसकी बेटी पर नज़र रखो....अब इस दामिनी और कामिंज का खेल ख़तम ही होगा...इससे पहले कि ये भाग जाए...

स- ईज़ी यार....थोड़ा रूको...पहले पता तो चले की दामिनी का नेक्स्ट स्टेप क्या है...शायद हमारे लिए अच्छा हो...

मैं- ह्म्म..सही कहा...तो थोड़ा रुक जाते है...पर इस बात का ख्याल रखना कि अब साली निकल ना पाए...

स- बिल्कुल...और निकली भी तो दुम(पूछ) हिलाते हुए वापिस आ जाएगी...इसका इंतज़ाम कर लिया है...

मैं- बहुत खूब...अच्छा...डॅड की क्या खबर है...

स- वो सेफ है....मेरे लोग नज़र जमाय हुए है...कुछ भी ऐसा-वैसा नही होगा...डोंट वरी..

मैं- थॅंक्स...

स- अरे..थॅंक्स मत बोलो...ये सब मैं अपने दिल से कर रहा हूँ..ओके...

मैं- जानता हूँ...पर आपने कभी बताया नही कि आप मेरा साथ दे क्यो रहे है...

स- टाइम आने पर सब बता दूँगा बेटा...अभी वेट करो...ओके...चलो बाइ...

मैं- ह्म्म ..बाइ...

कॉल कट होने के बाद मैं कुछ देर कॉल पर हुई बातों को सोचता रहा....

और फिर फ्रेश होने चला गया.....
जब मैं फ्रेश हो कर वापिस आया तो मैने मोबाइल चेक किया....जिसमे कई मिस कॉल पड़े थे....शायद जब सो रहे था...तभी से आ रहे थे....

मैं जल्दी से रेडी हुआ और सीधा संजू के घर पहुच गया....

वहाँ पर सब मौजूद थे....और मुझे अचानक देख कर सब चौंक गये....

रजनी- बेटा...तुम इस टाइम...अचानक...क्या हुआ....

मैं- वो...आक्च्युयली आंटी...मुझे ना अनु से एक बुक लेनी थी...वो पारूल के लिए....तो अचानक आ गया...सॉरी

रजनी- अरे...तो इसमे सॉरी क्या...ये तुम्हारा ही घर है....जब दिल करे आओ...जाओ...अनु अपने रूम मे ही है...ले लो...

मैं तुरंत ही अनु के पास निकल गया और जैसे ही उसके रूम मे गया तो अनु को देख कर मेरा दिल बुझ गया...

अनु अपने बेड पर पड़ी हुई सिसक रही थी...और शायद इसकी वजह मैं ही था...
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Re: चूतो का समुंदर

Postby Ankit » 12 Jan 2017 11:09


मैने गेट लॉक किया और अनु के पास पहुच गया...अनु ने मुझे देख कर मुँह दूसरी तरफ घुमा लिया और ज़ोर से सिसकने लगी....

मैं- अनु...आइ एम सॉरी जान...प्लीज़...चुप हो जाओ...

अनु ने जैसे मेरी बात सुनी ही नही और कोई रिक्ट नही किया...

मैने अपना हाथ उसके सिर पर फिराते हुए बोला...

मैं- प्लीज़ यार...ऐसा मत करो...कम से कम मुझे देखो तो...गुस्सा हो तो गुस्सा करो...पर प्लीज़...नज़रे मत चुराओ...प्लीज़ जान...

आख़िर मेरी बात अनु पर असर कर गई और उसने चेहरा घुमा लिया..

अनु के आँसू उसके गालो पर सूख चुके थे...और नये आँसू फिर से बहने लगे थे...

मैने अनु के आँसू सॉफ किए और झुक कर उसके माथे को चूम लिया...

मैं- आइ म सॉरी जान...

अनु(सुबक्ते हुए)- सॉरी...बस हो गया...

मैं- नही...पर मैं क्या करता...मुझे टाइम ही नही मिला..

अनु- मैं कॅब्स आपके आने का वेट कर रही थी...और आप...आते ही सबसे मिलने लगे..मेरा तो ख्याल ही नही था...

मैं- ऐसा नही है...मैं मिलने आया था...पर वो रक्षा...

अनु- हाँ...अब रक्षा ही सबकुछ है...मैं कुछ नही...

मैं- नही यार...तू तो मेरी जान है...तेरी जगह कोई नही आ सकता...

अनु- अच्छा...तो फिर मेरे कॉल क्यो नही लिए...

मैं- यार..मैं सो रहा था...

अनु- झूठ...आपका मोबाइल बीच मे बिज़ी था...

मैं- हाँ...मेरे जागते ही एक फ्रेंड का कॉल आ गया...फिर मैं फ़ोन रख कर फ्रेश होने निकल गया...और जब वापिस आ कर देखा तो सीधा यहाँ भाग आया...

अनु- अच्छा...

मैं- हाँ...पूरी स्पीड मे कार दौड़ाई...

अनु- क्या...आप पागल हो क्या...तेज कार चलाने से आक्सिडेंट हो सकता है..

मैं- ह्म्म...पर अपनी जान से मिलने के लिए आक्सिडेंट तो क्या....मरने की भी परवाह नही...

अनु ने अपना हाथ मेरे मुँह पर रख दिया...

अनु- बस...ऐसा कभी मत बोलना...आपसे पहले मैं मर जाउन्गी...

मैने अनु का हाथ पकड़ा और प्यार से चूम लिया...

मैं- तेरी यही बात तो मुझे मरने नही देती....

अनु- फिर से मरने की बात...जाओ मैं बात नही करती...

मैं- ह्म्म..तो हम आपके होंठो से बात कर लेते है...

और मैं अनु के उपेर झुकने लगा...अनु शरमाते हुए अपना सिर ना मे हिलाती रही...पर उसके होंठ कुछ और ही कह रहे थे...

मैं धीरे -2 अपने होंठ अनु के होंठो के पास ले गया...तो अनु के होंठ भी खुलने लगे...


अनु की साँसे बढ़ रही थी और मेरी साँसे अनु के होंठो को गर्माहट दे रही थी.....

पलक झपकते ही हमारे होंठो ने आपस मे मिलन कर लिया और प्यार से एक-दूसरे को चूसने लगे...

मैं- सस्स्रररुउुउउप्प्प...उूुउउंम..उउउंम्म...

अनु- उउउम्मह...उउंम...उउंम्म...

थोड़ी देर तक रस्पान करते हुए मेरे हाथ आगे बढ़ते हुए अनु के सीने पर पहुच गये और उसके उपेर नीचे होते बूब्स को सहलाने लगे....

अनु भी तेज़ी से साँसे लेती हुई मेरे होंठो को ज़ोर से चूसने लगी....

थोड़ी देर बाद हमारे होंठ अलग हो गये..क्योकि दोनो ही साँस लेना चाहते थे....

अनु- आअहह...आप भी ना....गुस्सा भी दिलाते है और...आअहह...मना भी लेते है...

मैं- एयेए...तो सही है ना...मेरी जान गुस्से मे अच्छी नही लगती...

अनु- ह्म्म..तो दिलाते ही क्यो है...

मैं- अब नही दिलाउन्गा...ओके..

अनु- अच्छा...अब उपेर से उठिए और गेट खोल दीजिए....कोई आ गया तो....

मैं- डरती हो...

अनु(सिर हिला कर)- नही...आप है ना मेरे साथ...

मैं- ह्म्म...तो फिर...

अनु- फिर भी...अभी तो खोल दीजिए...या कुछ और इरादा है...

मैं- इरादा तो बहुत है...पर आज नही...किसी ख़ास दिन..

और मैने उठ कर गेट खोला....गेट खोलते ही रक्षा मेरे सामने खड़ी थी...

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