कोई तो रोक लो

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rajaarkey
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कोई तो रोक लो

Post by rajaarkey » 08 Jun 2016 22:01

कोई तो रोक लो
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दोस्तो आज से एक और नई कहानी शुरू कर रहा हूँ ये कहानी प्रीतम ने लिखी है मैं इसे हिन्दी फ़ॉन्ट में आपके लिए प्रस्तुत कर रहा हूँ . उम्मीद है कि ये कहानी आपको पसंद आएगी .
मेरा नाम पुनीत है. मैं 24 साल का हूँ और मेरी हाइट 5'7" फुट है. देखने मे किसी हीरो की तरह हॅंडसम तो नही हूँ. लेकिन फिर भी इतना ज़रूर है कि, यदि कोई लड़की मुझे देखे तो, एक बार अपने दिल मे, ये बात ज़रूर सोचेगी कि, काश ये लड़का मेरा बाय्फ्रेंड होता.

ये तो मेरा परिचय हो गया. अब मैं अपने परिवार के बाकी सदस्यों का परिचय भी आप से करवा देता हूँ. जिनके इर्द गिर्द ये कहानी घूमना है.

सबसे पहले मैं आपका परिचय मेरे घर के मुखिया से करता हूँ. मेरे घर के सबसे पहले सदस्य मेरे पापा अमरनाथ है. उनकी उमर 48 साल है. लेकिन इस उमर मे भी वो अपने आपको बहुत मेनटेन करके रखते है. इसलिए 48 के होने के बाद भी वो बिल्कुल चुस्त दुरुस्त दिखते है.

उनकी इस चुस्ती का राज भी मुझे बहुत बाद मे पता चला. जो आपको भी आगे चलकर स्टोरी मे पता चल जाएगा. पापा एक बिज़्नेसमॅन है और उनका बिज़्नेस दूसरे सहरों मे भी फैला हुआ है. जिस वजह से हमारे यहाँ पैसो की कोई कमी नही है और हमारा परिवार आमिर परिवारों की गिनती मे आता है.

मेरे परिवार की दूसरी सदस्या मेरी माँ सुनीता है. उनकी उमर 36 साल है. देखने मे वो बिल्कुल शिल्पा सेठी की तरह दिखती है और 2 बेटियों की माँ होने के बाद भी बड़ी ही स्मार्ट पर्सनॅलिटी की मालकिन है.

अब मेरी माँ की उमर 36 साल और मेरी उमर 24 साल देख कर, आपके मन मे ये सवाल ज़रूर आएगा कि ऐसा कैसे हो सकता है. तो मैं आपको बता दूं की, सुनीता मेरी सग़ी माँ नही है. मेरी सग़ी माँ का देहांत तो, तभी हो गया था, जब मैं बहुत छोटा था. सुनीता मेरी सौतेली माँ है और मैं उन्हे छोटी माँ कह कर बुलाता हूँ.

छोटी माँ के बाद मेरे परिवार की तीसरी सदस्या मेरी सौतेली बहन अमिता है. अमिता अभी 12थ मे पढ़ रही है. वो बचपन से ही शांत स्वाभाव की और समझदार लड़की है. अमिता देखने मे दुबली पतली है और पूरी तरह से छोटी माँ पर गयी है. वो मुझसे 7 साल छोटी है. सब उसे प्यार से अमि बुलाते है और मैं उसे अमि के साथ साथ बेटू भी बुलाता हूँ.

अमिता के बाद मेरे परिवार की चौथी सदस्या मेरी सौतेली बहन नामिता है. नामिता अभी 10थ मे पढ़ रही है. वो बचपन से ही चंचल और नटखट स्वाभाव की लड़की है. गुस्सा तो उसकी नाक पर ही बैठा रहता है. नामिता देखने मे भरे बदन की लड़की है. मगर मोटी बिल्कुल नही है. वो मुझसे 9 साल छोटी है. सब उसे प्यार से निमी बुलाते है और मैं निमी के साथ साथ छोटी भी बुलाता हूँ.

मेरे परिवार का पाँचवा सदस्या मैं खुद हूँ. मेरी पढ़ाई पूरी हो चुकी है और अब मैं अपने पापा के साथ उनका बिज़्नेस संभालता हूँ. मुझे सब प्यार से पुन्नू बुलाते है. ये मेरे छोटे से परिवार का परिचय था. अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ.

ये कहानी तब सुरू होती है. जब मैं पहली क्लास मे पढ़ता था और मेरी माँ का देहांत हुए कुछ ही समय हुआ था. मेरी देख भाल मेरे पापा, और मेरे घर मे काम करने वाली चंदा मौसी किया करती थी.

पापा की उमर उस समय 30 साल रही होगी. एक दिन उनके ऑफीस मे एक लड़की सुनीता जॉब के लिए आई. उसकी उमर उस समय 18 साल रही होगी. पापा सुनीता को देखते ही उसके रूप पर मोहित हो गये और पहली ही मुलाकात मे उसके सामने जॉब की जगह शादी का प्रस्ताव रख दिया.

अचानक से पापा की तरफ से ये शादी का प्रस्ताव पाकर, सुनीता के कुछ समझ मे नही आया. वो एक मध्यम परिवार की लड़की थी और पापा एक रहीश खानदान के इकलौते लड़के होने के साथ साथ एक कंपनी के मालिक थे.

इसलिए सुनीता ने थोड़ा बहुत सोचने के बाद पापा के शादी के प्रस्ताव मंजूर कर लिया. कुछ ही दिनो मे पापा की शादी सुनीता के साथ हो गयी और सुनीता मेरी सौतेली माँ बनकर मेरे घर आ गयी. उनकी शादी के 1 साल बाद मेरी सौतेली बहन अमिता और 3 साल बाद नामिता का जनम हुआ.

लेकिन ये कहानी अमिता और नामिता के जनम से पहले, पापा की शादी की पहली रात से सुरू होती है. उस समय पापा की एज 30 साल और सुनीता की आगे 18 साल थी. मेरी सौतेली माँ का पति मतलब की पापा उनसे 12 साल बड़े थे, और उनके पति का बेटा मतलब कि मैं उनसे 12 साल छोटा था.

मुझे अच्छे से याद है कि उस समय मैं पापा के साथ ही सोया करता था. मगर जब पापा ने मुझे शादी की पहली रात मेरी सौतेली माँ से मिलवाया तो कहा कि “ये तुम्हारी नयी माँ है और आज से तुम इनको ही मम्मी कहोगे और आज से तुम दूसरे कमरे सोया करोगे.”

इसके बाद मेरे सोने की व्यवस्था एक दूसरे कमरे मे कर दी गयी. उस समय मुझे इतनी समझ तो थी नही जो पापा और छोटी माँ के एक साथ सोने का कुछ मतलब समझ पता. मुझे उस रात अकेले ज़रा भी नींद नही आई.

मुझे कुछ समझ मे नही आ रहा था. ऐसा लग रहा था कि मेरी माँ की मौत के साथ ही मेरी खुशिया भी ख़तम हो गयी हो. मैं सारी रत अपनी मरी हुई माँ को याद करके, रोता रहा और मुझे पहले दिन ही अपनी नयी माँ से नफ़रत हो गयी.




1

Mera naam punit hai. Mai 24 saal ka hun aur meri height 5'7" ft hai. Dekhne me kisi hero ki tarah handsome to nahi hu. Lekin fir bhi itna jarur hai ki, yadi koi ladki mujhe dekhe to, ek baar apne dil me, ye bat jarur sochegi ki, kash ye ladka mera boyfriend hota.

Ye to mera parichay ho gaya. Ab mai apne parivar ke baki sadasyon ka parichay bhi aap se karwa deta hu. Jinke ird gird ye kahani ghumna hai.

Sabse pahle mai aapka parichay mere ghar ke mukhiya se karata hu. Mere ghar ke sabse pahle sadasya mere papa amarnath hai. Unki umar 48 saal hai. Lekin is umar me bhi wo apne aapko bahut maintain karke rakhte hai. Isliye 48 ke hone ke bad bhi wo bilkul chust durust dikhte hai.

Unki is chusti ka raj bhi mujhe bahut bad me pata chala. Jo aapko bhi aage chalkar story me pata chal jayega. Papa ek businessman hai aur unka business dusre sahron me bhi faila hua hai. Jis vajah se hamare yaha paiso ki koi kami nahi hai aur hamara parivar amir parivaron ki ginti me aata hai.

Mere parivar ki dusri sadasya meri maa sunita hai. Unki umar 36 saal hai. Dekhne me wo bilkul shilpa setty ki tarah dikhti hai aur 2 betiyon ki maa hone ke bad bhi badi hi smart personality ki malkin hai.

Ab meri maa ki umar 36 saal aur meri umar 24 saal dekh kar, aapke man me ye sawal jarur aayega ki aisa kaise ho sakta hai. To mai aapko bata du ki, sunita meri sagi maa nahi hai. Meri sagi maa ka dehant to, tabhi ho gaya tha, jab mai bahut chhota tha. Sunita meri sauteli maa hai aur mai unhe chhoti maa kah kar bulata hu.

Chhoti maa ke bad mere parivar ki teesri sadasya meri sauteli bahan amita hai. Amita abhi 12th me pad rahi hai. Wo bachpan se hi shant swabhav ki aur samajhdar ladki hai. Amita dekhne me dubli patli hai aur puri tarah se chhoti maa par gayi hai. Wo mujhse 7 saal chhoti hai. Sab use pyar se ami bulate hai aur mai use ami ke sath sath betu bhi bulata hu.

Amita ke bad mere parivar ki chauthi sadasya meri sauteli bahan namita hai. Namita abhi 10th me pad rahi hai. Wo bachpan se hi chanchal aur natkhat swabhav ki ladki hai. Gussa to uski naak par hi baitha rahta hai. Namita dekhne me bhare badan ki ladki hai. Magar moti bilkul nahi hai. Wo mujhse 9 saal chhoti hai. Sab use pyar se nimi bulate hai aur mai nimi ke sath sath chhoti bhi bulata hu.

Mere parivar ka panchwa sadasya mai khud hu. Meri padai puri ho chuki hai aur ab mai apne papa ke sath unka business sambhalta hu. Mujhe sab pyar se punnu bulate hai. Ye mere chhote se parivar ka parichay tha. Ab mai apni kahani par aata hu.

Ye kahani tab suru hoti hai. Jab mai pahli class me padta tha aur meri maa ka dehant huye kuch hi samay hua tha. Meri dekh bhal mere papa, aur mere ghar me kaam karne wali chanda mausi kiya karti thi.

Papa ki umar us samay 30 saal rahi hogi. Ek din unke office me ek ladki sunita job ke liye aayi. Uski umar us samay 18 saal rahi hogi. Papa sunita ko dekhte hi uske roop par mohit ho gaye aur pahli hi mulakat me uske samne job ki jagah shadi ka prastav rakh diya.

Achanak se papa ki taraf se ye shadi ka prastav pakar, sunita ke kuch samajh me nahi aaya. Wo ek madhyam parivar ki ladki thi aur papa ek rahish khandan ke ikloute ladke hone ke sath sath ek company ke malik the.

Isliye sunita ne thoda bahut sochne ke bad papa ke shadi ke prastav manjur kar liya. Kuch hi dino me papa ki shadi sunita ke sath ho gayi aur sunita meri sauteli maa bankar mere ghar aa gayi. Unki shadi ke 1 saal bad meri sauteli bahan amita aur 3 saal bad namita ka janam hua.

Lekin ye kahani amita aur namita ke janam se pahle, papa ki shadi ki pahli rat se suru hoti hai. Us samay papa ki age 30 saal aur sunita ki age 18 saal thi. Meri sauteli maa ka pati matlab ki papa unse 12 saal bade the, aur unke pati ka beta matlab ki mai unse 12 saal chhota tha.

Mujhe ache se yad hai ki us samay mai papa ke sath hi soya karta tha. Magar jab papa ne mujhe shadi ki pahli rat meri sauteli maa se milwaya to kaha ki “ye tumhari nayi maa hai aur aaj se tum inko hi mummy kahoge aur aaj se tum dusre kamre soya karoge.”

Iske bad mere sone ki vyavastha ik dusre kamre me kar di gayi. Us samay mujhe itni samajh to thi nahi jo papa aur chhoti maa ke ek sath sone ka kuch matlab samajh pata. Mujhe us rat akele jara bhi nind nahi aayi.

Mujhe kuch samajh me nahi aa raha tha. Aisa lag raha tha ki meri maa ki maut ke sath hi meri khushiya bhi khatam ho gayi ho. Mai sari rat apni mari huyi maa ko yad karke, rota raha aur mujhe pahle din hi apni nayi maa se nafrat ho gayi.


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Post by rajaarkey » 08 Jun 2016 22:09

{अपडेट-2}

रात को रोते रोते कब मेरी नींद लग गयी, मुझे पता ही नही चला. सुबह सुबह मेरी नींद पापा की आवाज़ से खुली. पापा मुझे नींद से जगा रहे थे. मेरी नींद खुली तो पापा कहने लगे.

पापा बोले "पुन्नू जल्दी से उठ जाओ, नही तो स्कूल के लिए देर हो जाएगी."

मैने आँख खोल कर देखा तो नयी माँ भी पापा के साथ खड़ी मुस्कुरा रही थी. उन्हे हंसता देख कर मैं मन ही मन जल रहा था.

मैं बिना कुछ बोले फ्रेश होने चला गया. नहाने के बाद मुझे रोज की तरह मेरे घर मे काम करने वाली चंदा मौसी ने तैयार किया और फिर मैं स्कूल चला गया.

स्कूल मे भी मैं सारे समय उदास रहा. मुझे उदास देख कर मेरे दोस्त मेहुल ने कहा.

मेहुल बोला "सुना है तेरे पापा तेरे लिए नयी माँ लाए है."

मैं बोला "हाँ यार लाए तो है, पर नयी माँ अच्छी नही है. आते ही उसने मुझे पापा के कमरे से बाहर निकाल दिया. कल पहली बार मैं अकेले सोया."

ये कहते कहते मैं रो पड़ा. मेहुल मुझे चुप करता रहा और फिर कहने लगा.

मेहुल बोला “देख पुन्नू सौतेली माँ बहुत गंदी होती है.”

मैं बोला “ये सौतेली माँ क्या होता है.”

मेहुल बोला “जब किसी की माँ मर जाती है और उसके पापा जो नयी माँ लाते है, उसे सौतेली माँ कहते है.”

मेहुल की बात सुनकर मेरे मन की उत्सुकता बढ़ गयी. मैने उस से कहा.

मैं बोला “तुझे कैसे पता की सौतेली माँ गंदी होती है.

मेहुल बोला “मेरे पड़ोस मे एक लड़का रामू रहता है उसकी भी सौतेली माँ है. उसकी सौतेली माँ ने उसका स्कूल छुड़वा दिया है और उस से घर का सारा काम करवाती है. अपने बच्चों को तो खूब अच्छा अच्छा खाना देती है पर रामू को बचा हुआ खाना देती है और कभी कभी तो उसे भूका भी रखती है.”

मैं बोला “क्या रामू के पापा सौतेली माँ को ऐसा करने से नही रोकते.”

मेहुल बोला “पहले तो रोकते थे पर जब से सौतेली माँ के बच्चे हुए तब से वो उन बच्चों को प्यार करने लगे और रामू को अपनी माँ और भाई बहनो के साथ मिल कर ना रहने के लिए गुस्सा करने लगे. बेचारा रामू बिल्कुल अकेला हो गया. तब उसके नाना रामू को अपने साथ ले गये. अब रामू अपने नाना के साथ ही रहता है.”

रामू के उसके नाना के साथ जाने की बात सुनकर ना जाने क्यो मुझे खुशी हुई.

मैं बोला “क्या अब रामू अपने नाना के यहाँ खुश है.”

मेहुल बोला "नही यार वो बेचारा तो वहाँ भी खुश नही है. वहाँ उसके नाना नानी के साथ उसके 3 मामा और मामी भी रहते है. उसकी ममिया भी उसे परेशान करती है. बस फ़र्क इतना है कि उसके नाना नानी उसे बहुत प्यार करते है. इसलिए वो वहाँ से वापस आना नही चाहता.”

मेहुल की बात सुनकर मुझे बहुत निराशा हुई.

मैने बोला “यार अब मैं क्या करूँ. मेरी छोटी माँ भी तो सौतेली माँ है. क्या वो भी मुझे रामू की तरह दुख देगी.”

मुझे परेशान देख कर मेहुल ने मुझे दिलासा देते हुए कहा.

मेहुल बोला “यार तू दुखी मत हो. मैं कुछ ना कुछ रास्ता ढूँढ निकालुगा.”

मेहुल की बातों से मुझे कुछ सुकून महसूस हुआ और फिर हम लोग अपने अपने घर के लिए निकल लिए.


2
Rat ko rote rote kab meri nind lag gayi, mujhe pata hi nahi chala. Subah subah meri nind papa ki aawaj se khuli. Papa mujhe nind se jaga rahe the. Meri nind khuli to papa kane lage.

Papa bole "punnu jaldi se uth jao, nahi to school ke liye der ho jayegi."

Maine aankh khol kar dekha to nayi maa bhi papa ke sath khadi muskura rahi thi. Unhe hansta dekh kar mai man hi man jal raha tha.

Mai bina kuch bole fresh hone chala gaya. Nahane ke bad mujhe roj ki tarah mere ghar me kaam karne wali chanda mausi ne taiyar kiya aur fir mai school chala gaya.

School me bhi mai sare samay udas raha. Mujhe udas dekh kar mere dost mehul ne ka kaha.

Mehul bola "suna hai tere papa tere liye nayi maa laye hai."

Mai bola "han yar laye to hai, par nayi maa achi nahi hai. Aate hi usne mujhe papa ke kamre se bahar nikal diya. Kal pahli bar mai akele soya."

Ye kahte kahte mai ro pada. Mehul mujhe chup karata raha aur fir kahne laga.

Mehul bola “dekh punnu sauteli maa bahut gandi hoti hai.”

Mai bola “ye sauteli maa kya hota hai.”

Mehul bola “jab kisi ki maa mar jati hai aur uske papa jo nayi maa late hai, use sauteli maa kahte hai.”

Mehul ki bat sunkar mere man ki utsukta bad gayi. Maine us se kaha.

Mai bola “tujhe kaise pata ki sauteli maa gandi hoti hai.

Mehul bola “mere pados me ek ladka ramu rahta hai uski bhi sauteli maa hai. Uski sauteli maa ne uska school chhudwa diya hai aur us se ghar ka sara kaam karwati hai. Apne bacho ko to khub acha acha khana deti hai par ramu ko bacha hua khana deti hai aur kabhi kabhi to use bhuka bhi rakhti hai.”

Mai bola “kya ramu ke papa sauteli maa ko aisa karne se nahi rokte.”

Mehul bola “pahle to rokte the par jab se sauteli maa ke bache huye tab se vo un bacho ko pyar karne lage aur ramu ko apni maa aur bhai bahno ke sath mil kar na rahne ke liye gussa karne lage. Bechara ramu bilkul akela ho gaya. Tab uske nana ramu ko apne sath le gaye. Ab ramu apne nana ke sath hi rahta hai.”

Ramu ke uske nana ke sath jane ki bat sunkar na jane kyo mujhe khushi huyi.

Mai bola “kya ab ramu apne nana ke yaha khush hai.”

Mehul bola "nahi yar wo bechara to waha bhi khush nahi hai. Waha uske nana nani ke sath uske 3 mama aur mami bhi rahte hai. Uski mamiya bhi use paresan karti hai. Bas fark itna hai ki uske nana nani use bahut pyar karte hai. Isliye wo waha se vapas aana nahi chahta.”

Mehul ki bat sunkar mujhe bahut nirasha huyi.

Maine bola “yar ab mai kya karu. Meri chhoti maa bhi to sauteli maa hai. Kya wo bhi mujhe ramu ki tarah dukh degi.”

Mujhe pareshan dekh kar mehul ne mujhe dilasa dete huye kaha.

Mehul bola “yar tu dhukhi mat ho. Mai kuch na kuch rasta dud nikaluga.”

Mehul ki bato se mujhe kuch sukun mahsus hua aur fir hum log apne apne ghar ke liye nikal liye.



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Post by rajaarkey » 08 Jun 2016 22:15

मैं घर पहुचा तो नयी माँ हॉल मे बैठी टीवी देख रही थी. मुझे स्कूल से आया देख कर नयी माँ ने मुझे अपने पास बुला कर पूछा.

नयी माँ बोली “तुम्हारी स्कूल कितने बजे छूटी है.”

उनके इस सवाल से मैं सहम गया. मुझे लगा मेरी चोरी पकड़ी गयी है. मैने धीमी आवाज़ मे कहा.

मैं बोला “जी 1 बजे छूटी है.”

उन्होने मुझे गुस्से मे घूरते हुए कहा.

नयी माँ बोली “तब फिर तुम 2:30 बजे घर क्यो आ रहे हो. इतनी देर कहाँ थे और क्या कर रहे थे.”

मैने उनको अपनी सफाई देते हुए कहा.

मैं बोला “स्कूल तो 1 बजे छूट गया था पर मैं अपने दोस्त मेहुल से बात करने लगा था, इसलिए मुझे आने मे देर हो गयी.”

नयी माँ बोली “ठीक है आज मेरे सामने तुमने पहली बार ऐसा किया है. इसलिए मैं तुम पर कोई गुस्सा नही कर रही हूँ. मगर कल से ऐसा नही चलेगा. कल से समय पर घर आना. अब जाओ और जाकर कपड़े बदल कर खाना खा लो.”

मैं बोला “जी नयी माँ.”

इतना कहकर मैं सरपट अपने कमरे की तरफ भाग गया. जिसे कल रात ही मेरे लिए तैयार किया गया था.

रात को डिन्नर पर नयी माँ ने पापा को, मेरे स्कूल से देर से आने की बात बता दी. पापा ने मुझे बहुत गुस्सा किया. जिस वजह से मेरी नयी माँ के लिए नफ़रत और गहरी हो गयी. उस रात भी मैं अपनी नयी माँ को कोसते हुए सोया.

अगले दिन मैने मेहुल को सारी बात बताई. तब उसने कहा.

मेहुल बोला “देखा तेरी सौतेली माँ अब धीरे धीरे अपना रंग दिखाने लगी है. तू उस से डरना बंद कर और उसको सबक सिखा नही तो एक दिन तुझे भी रामू की तरह दुख सहने पड़ेँगे.”

मेहुल की बात मुझे जम गयी मैने उस से पूछा.

मैं बोला “मैं नयी माँ को सबक सिखाने के लिए क्या करू.”

तब मेहुल ने मुझे समझाते हुए कहा.

मेहुल बोला “सबसे पहले तू उस से डरना बंद कर और उसको हर बात का जबाब देना सुरू कर. आख़िर घर तो तेरा ही है. फिर वो तेरी सग़ी माँ तो है नही. जो तुझ पर इस तरह से हुकुम चलाए. जैसे वो तेरी शिकायत तेरे पापा से करती है. तू भी उसकी शिकायत पापा से कर.”

आख़िर छोटे बच्चों की सोच भी तो छोटी ही होती है. मुझे मेहुल की बात बहुत पसंद आई. मैने उस पर अमल करना भी शुरू कर दिया. जिसका नतीजा ये निकला कि, एक हफ्ते के अंदर मेरे और मेरी नयी माँ के बीच तनाव और भी ज़्यादा बढ़ गया. फिर एक दिन वो हो गया जो मेरे छोटे से दिमाग़ ने सोचा भी नही था.



3
Mai ghar pahucha to nayi maa hall me baithi tv dekh rahi thi. Mujhe school se aaya dekh kar nayi maa ne mujhe apne pas bula kar pucha.

Nayi maa boli “tumhari school kitne baje chhutti hai.”

Unke is sawal se mai saham gaya. Mujhe laga meri chori pakdi gayi hai. Maine dhimi awaaj me kaha.

Mai bola “jee 1 baje chhutti hai.”

Unne mujhe gusse me ghurte huye kaha.

Nayi maa boli “tab fir tum 2:30 baje ghar kyo aa rahe ho. Itni der kaha the aur kya kar rahe the.”

Maine unko apni safayi dete huye kaha.

Mai bola “school to 1 baje chhut gaya tha par mai apne dost mehul se bat karne laga tha, isliye mujhe aane me der ho gayi.”

Nayi maa boli “thik hai aaj mere samne tumne pahli bar aisa kiya hai. Isliye mai tum par koi gussa nahi kar rahi hu. Magar kal se aisa nahi chalega. Kal se samay par ghar aana. Ab jao aur jakar kapde badal kar khana kha lo.”

Mai bola “jee nayi maa.”

Itna kahkar mai sarpat apne kamre ki taraf bhag gaya. Jise kal rat hi mere liye taiyar kiya gaya tha.

Rat ko dinner par nayi maa ne papa ko, mere school se der se aane ki bat bata di. Papa ne mujhe bahut gussa kiya. Jis vajah se meri nayi maa ke liye nafrat aur gahri ho gayi. Us rat bhi mai apni
nayi maa ko koste huye soya.

Agle din maine mehul ko sari bat batayi. Tab usne kaha.

Mehul bola “dekha teri sauteli maa ab dhire dhire apna rang dikhane lagi hai. Tu us se darna band kar aur usko sabak sikha nahi to ek din tujhe bhi ramu ki tarah dukh sahne padege.”

Mehul ki bat mujhe jam gayi maine us se pucha.

Mai bola “mai nayi maa ko sabak sikhane ke liye kya karu.”

Tab mehul ne mujhe samjhate huye kaha.

Mehul bola “sabse pahle tu us se darna band kar aur usko har bat ka jabab dena suru kar. Aakhir ghar to tera hi hai. Fir wo teri sagi maa to hai nahi. Jo tujh par is tarah se hukum chalaye. Jaise wo teri sikayat tere papa se karti hai. Tu bhi uski sikayat papa se kar.”

Aakhir chhote bachon ki soch bhi to chhoti hi hoti hai. Mujhe mehul ki bat bahut pasand aayi. Maine us par amal karna bhi suru kar diya. Jiska natija ye nikla ki, ek hafte ke andar mere aur meri nayi maa ke bich tanav aur bhi jyada bad gaya. Fir ek din vo ho gaya jo mere chhote se dimag ne socha bhi nahi tha.


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Re: कोई तो रोक लो

Post by rajaarkey » 08 Jun 2016 22:24

हुआ ये कि पापा ने नयी माँ के जनमदिन की पार्टी रखी थी. पापा ने कभी मेरे जनम दिन की पार्टी नही रखी थी और आज नयी माँ के जनमदिन की पार्टी कर रहे थे. जो मुझे ज़रा भी अच्छा नही लगा. मैं पार्टी मे नही गया और अपने कमरे मे ही बुक खोल कर बैठ गया. ताकि कोई आए तो उसे लगे कि, मैं पढ़ाई कर रहा हूँ.

मेरा सोचना ठीक ही निकला. क्योकि कुछ ही देर बाद किसी ने मेरा दरवाजा खटखटाया. मैने दरवाजा खोला तो सामने नयी माँ खड़ी थी. उन्हे दरवाजे पर खड़ा देख कर मैने कहा.

मैं बोला “जी नयी माँ.”

नयी माँ बोली “नीचे इतनी बड़ी पार्टी चल रही है. तुम यहाँ कमरे मे बैठे बैठे क्या कर रहे हो. चलो जल्दी से कपड़े बदलो और पार्टी मे आ जाओ.”

मैं बोला “नयी माँ, मुझे पार्टी पसंद नही है. मैं पार्टी मे नही आउन्गा और मुझे पढ़ाई भी करनी है.”

नयी माँ बोली “देखो पार्टी हम लोगो ने दी है, इसलिए पार्टी मे हमारे परिवार के सभी लोगो का होना ज़रूरी है. तुम चाहो तो थोड़ी देर बाद वापस आ जाना और अपनी पढ़ाई कर लेना. अब देर मत करो और तैयार होकर जल्दी से आ जाओ.”

ये कहकर नयी माँ चली गयी, पर मैं पार्टी मे नही गया. काफ़ी देर तक मैं पार्टी मे नही गया तो, नयी माँ फिर मुझे बुलाने आई मगर मैने आने से साफ मना कर दिया. तब नयी माँ ने मुझे समझाते हुए कहा.

नयी माँ बोली “देखो, पार्टी मे सभी रिश्तेदार आए है. यदि तुम नही आओगे तो वो तरह तरह की बाते करेगे. जो तुम्हारे पापा को अच्छी नही लगेगी और हो सकता है तुम्हारे पापा अपना सारा गुस्सा तुम पर उतार दे. इसलिए बेहतर यही होगा कि तुम कुछ देर के लिए पार्टी मे आ जाओ.”

इतना कह कर नयी माँ चली गयी. मगर मुझे तो नयी माँ की बात ना मानने और उनको नीचा दिखाने का जुनून सवार था. इसलिए मैने इस बार भी उनकी बात पर कोई ध्यान नही दिया और मैं पार्टी मे नही गया.

देर रत को पार्टी ख़तम हुई. तब पापा और नयी माँ मेरे कमरे मे आए. मैं अपने बिस्तर पर लेटा हुआ, सोने का नाटक कर रहा था. पापा ने 2 बार मुझे आवाज़ दी, पर मैं चुपचाप लेटा रहा.

तब नयी माँ बोली “देखो पढ़ाई करते करते सो गया है. मैं तो पहले ही कह रही थी कि, वो पढ़ाई करते करते सो गया होगा. लेकिन आप मेरी बात मान ही रहे थे.”

मगर पापा मेरी वजह से बहुत गुस्से मे लग रहे थे. वो नयी माँ की इस बात के जबाब मे कहने लगे.

पापा बोले “ये लड़का बहुत ही बिगड़ गया है. इसे सुधारने का अब एक ही रास्ता है कि, इसे बोर्डिंग स्कूल मे डाल दिया जाए. वरना एक दिन ये लड़का हमारे हाथ से निकल जाएगा.”

पापा की बात सुनकर नयी माँ ने उन्हे समझाते हुए कहा.

नयी माँ बोली “अभी ये बहुत छोटा है. इतनी सी उमर मे इसे बोर्डिंग स्कूल मे डालना, ठीक नही रहेगा. वो थोड़ा बड़ा हो जाएगा तो, खुद ही हर बात को समझने लगेगा.”

पापा बोले “नही ये बहुत ढीठ हो गया है और यदि हमने इसे अपने साथ रखा तो, इसका ढीठपन और भी बढ़ता जाएगा. इसके लिए यही ठीक होगा कि, ये बोर्डिंग मे रहे.”

इतना कहकर पापा और नयी माँ चले गये. लेकिन उनकी ये बात सुनकर तो, मेरी सिट्टी पिटी गुम हो गयी थी. अब मैं उस घड़ी को कोस रहा था, जब मैने नयी माँ की बात ना मान कर, पार्टी मे ना जाने का फ़ैसला था.

मैने खुद ही अपने लिए एक परेशानी खड़ी कर ली थी. लेकिन अब हो भी क्या सकता था. मेरे दिमाग़ मे तो कुछ आ ही नही रहा था, इसलिए मैने सोचा कि, अब जो भी कर पाएगा, मेहुल ही कर पाएगा और फिर ये सब सोचते सोचते मैं सो गया.

दूसरे दिन मैं पापा का सामना किए बिना ही स्कूल निकल गया और फिर लंच मे मैने मेहुल को सारी बात बताई. तब मेहुल ने कहा.

मेहुल बोला “यार ये तो बहुत बड़ी मुसीबत हो गयी है. इसके लिए तो अब हमे मम्मी ही कोई रास्ता बता सकती है.”

मैं बोला “तो फिर चल, घर चलते है और आंटी से ही रास्ता पूछते है”

इसके बाद हम ने लंच से ही स्कूल से छुट्टी मार दी और हम दोनो, मेहुल के घर के लिए निकल पड़े.

मेहुल की मम्मी, रिचा आंटी 26 साल की अत्यंत सुंदर महिला थी. जब से मेरी मम्मी की डेत हुई थी, तब से वो मुझे बहुत ही ज़्यादा प्यार करती थी और जब भी मैं उनके घर जाता था. वो मुझे बिना खाना खाए नही जाने देती थी और हमेशा मेहुल के हाथ से भी मेरे लिए, कुछ ना कुछ भेजती रहती थी. इसलिए मैं उन्हे बहुत पसंद करता था और अपनी मम्मी की तरह ही उन्हे प्यार करता था.

मेहुल के घर पहुचने पर जब रिचा आंटी ने दरवाजा खोला तो, हमे देख कर चौुक्ते हुए पुछा.

रिचा आंटी बोली “तुम लोग इतनी जल्दी घर कैसे आ गये.”

तब मेहुल बोला “मम्मी पुन्नू परेशान है और उसी परेशानी का हल आप से जानने आया है.”

रिचा आंटी बोली “ठीक है, पहले तुम दोनो कुछ खा लो. उसके बाद मैं पुन्नू की परेशानी भी सुनूँगी और उसे हल करने का रास्ता भी बताउन्गी.”

ये कह कर आंटी हम दोनो को घर के अंदर ले गयी. उन ने हम दोनो को बैठने को कहा और खुद हमारे लिए खाना लेने रसोई मे चली गयी.



4
Hua ye ki papa ne nayi maa ke janamdin ki party rakhi thi. Papa ne kabhi mere janam din ki party nahi rakhi thi aur aaj nayi maa ke janamdin ki party kar rahe the. Jo mujhe jara bhi acha nahi laga. Mai party me nahi gaya aur apne kamre me hi book khol kar baith gaya. Taki koi aaye to use lage ki, mai padayi kar raha hu.

Mera sochna thik hi nikla. Kyoki kuch hi der bad kisi ne mera darwaja khatkhataya. Maine darwaja khola to samne nayi maa khadi thi. Unhe darwaje par khada dekh kar maine kaha.

Mai bola “ji nayi maa.”

Nayi maa boli “niche itni badi party chal rahi hai. Tum yaha kamre me baithe baithe kya kar rahe ho. Chalo jaldi se kapde badlo aur party me aa jao.”

Mai bola “nayi maa, mujhe party pasand nahi hai. Mai party me nahi aauga aur mujhe padai bhi karni hai.”

Nayi maa boli “dekho party hum logo ne di hai, isliye party me hamare parivar ke sabhi logo ka hona jaruri hai. Tum chaho to thodi der bad vapas aa jana aur apni padai kar lena. Ab der mat karo aur taiyar hokar jaldi se aa jao.”

Ye kahkar nayi maa chali gayi, par mai party me nahi gaya. Kafi der tak mai party me nahi gaya to, nayi maa fir mujhe bulane aayi magar maine aane se saf mana kar diya. Tab nayi maa ne mujhe samjhate huye kaha.

Nayi maa boli “dekho, party me sabhi rishtedar aaye hai. Yadi tum nahi aaoge to vo tarah tarah ki bate karege. Jo tumhare papa ko achi nahi lagegi aur ho sakta hai tumhare papa apna sara gussa tum par utar de. Isliye behtar yahi hoga ki tum kuch der ke liye party me aa jao.”

Itna kah kar nayi maa chali gayi. Magar mujhe to nayi maa ki bat na manne aur unko nicha dikhane ka junun sawar tha. Isliye maine is baar bhi unki bat par koi dhyan nahi diya aur mai party me nahi gaya.

Der rat ko party khatam huyi. Tab papa aur nayi maa mere kamre me aaye. Mai apne bistar par leta hua, sone ka natak kar raha tha. Papa ne 2 bar mujhe awaaj di, par mai chupchap leta raha.

Tab nayi maa boli “dekho padai karte karte so gaya hai. Mai to pahle hi kah rahi thi ki, wo padai karte karte so gaya hoga. Lekin aap meri bat maan hi rahe the.”

Magar papa meri vajah se bahut gusse me lag rahe the. Wo nayi maa ki is bat ke jabab me kahne lage.

Papa bole “ye ladka bahut hi bigad gaya hai. Ise sudharne ka ab ek hi rasta hai ki, ise bording school me dal diya jaye. Warna ek din ye ladka hamare hanth se nikal jayega.”

Papa ki bat sunkar nayi maa ne unhe samjhate huye kaha.

Nayi maa boli “abhi ye bahut chhota hai. Itni si umar me ise bording school me dalna, thik nahi rahega. Wo thoda bada ho jayega to, khud hi har bat ko samajhne lagega.”

Papa bole “nahi ye bahut dheet ho gaya hai aur yadi hamne ise apne sath rakha to, iska dheetpan aur bhi badta jayega. Iske liye yahi thik hoga ki, ye bording me rahe.”

Itna kahkar papa aur nayi maa chale gaye. Lekin unki ye bat sunkar to, meri sitti pitti gum ho gayi thi. Ab mai us ghadi ko kos raha tha, jab maine nayi maa ki bat na maan kar, party me na jaane ka faisla tha.

Maine khud hi apne liye ek pareshani khadi kar li thi. Lekin ab ho bhi kya sakta tha. Mere dimag me to kuch aa hi nahi raha tha, isliye maine socha ki, ab jo bhi kar payega, mehul hi kar payega aur fir ye sab sochte sochte mai so gaya.

Dusre din mai papa ka samna kiye bina hi school nikal gaya aur fir lunch me maine mehul ko saari bat batayi. Tab mehul ne kaha.

Mehul bola “yar ye to bahut badi musibat ho gayi hai. Iske liye to ab hume mammy hi koi rasta bata sakti hai.”

Mai bola “to fir chal, ghar chalte hai aur aunty se hi rasta puchte hai”

Iske bad humne lunch se hi school se chhuti maar di aur hum dono, mehul ke ghar ke liye nikal pade.

Mehul ki mammy, richa aunty 26 saal ki atyant sundar mahila thi. Jab se meri mammy ki death huyi thi, tab se wo mujhe bahut hi jyada pyar karti thi aur jab bhi mai unke ghar jata tha. Wo mujhe bina khana khaye nahi jane deti thi aur hamesa mehul ke hanth se bhi mere liye, kuch na kuch bhejti rahti thi. Isliye mai unhe bahut pasand karta tha aur apni mammy ki tarah hi unhe pyar karta tha.

Mehul ke ghar pahuchne par jab richa aunty ne darwaja khola to, hume dekh kar chaukte huye puchha.

Richa aunty boli “tum log itni jaldi ghar kaise aa gaye.”

Tab mehul bola “mammy punnu paresan hai aur usi paresani ka hal aap se janne aaya hai.”

Richa aunty boli “thik hai, pahle tum dono kuch kha lo. Uske bad mai punnu ki pareshani bhi sunugi aur use hal karne ka rasta bhi bataugi.”

Ye kah kar aunty hum dono ko ghar ke andar le gayi. Un ne hum dono ko baithne ko kaha aur khud hamare liye khana lene rasoi me chali gayi.

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Re: कोई तो रोक लो

Post by rajaarkey » 08 Jun 2016 22:42

आंटी ने हम लोगों को आलू के पराठे बनाकर खिलाए और जब हम लोगों ने पराठे खा लिए तो फिर उन्हो ने मुझसे पूछा.

आंटी बोली “हाँ बेटा, अब बताओ तुम्हे क्या परेशानी है, जिसको हल करने का रास्ता तुम मुझसे जानना चाहते हो.”

मैने आंटी को, अपने रात को नयी माँ की बर्थ’डे पार्टी मे ना जाने और पापा की मुझे बोर्डिंग भेजने वाली बात बता दी. जिसे सुनने के बाद आंटी ने कहा.

आंटी बोली “बेटा जब तुम्हारी नयी माँ ने तुम्हे पार्टी मे आने को बोला तो, तुम पार्टी मे क्यों नही गये. ये तो तुम्हारी ही ग़लती है और इस बात पर तुम्हारे पापा का गुस्सा करना ज़रा भी ग़लत नही है.”

मुझे आंटी की ये बात सुनकर बहुत ज़्यादा निराशा हुई और मैं उदास हो गया. मुझे उदास देख कर, आंटी मेरे पास आकर बैठ गयी और मेरे सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहने लगी.

आंटी बोली “बेटा मेरी बात का बुरा मत मानो. मैं जो भी कहुगी, तुम्हारे भले के लिए ही कहुगी. अब मैं तुमसे जो भी पूछती हूँ, तुम उसका सही सही जबाब दो. तभी तो मैं तुम्हारी परेसानी को दूर करने का कोई रास्ता बता सकुगी.”

मुझे आंटी का यूँ प्यार से हाथ फेरना और उनकी बात दोनो बहुत अच्छे लगे. मैने खुश होते हुए आंटी से कहा.

मैं बोला “आप पूछिए आंटी, मैं आपकी हर बात का सही सही जबाब दूँगा.”

आंटी बोली “अच्छा ये बताओ, कल रात को अपनी नयी माँ के बार बार कहने पर भी, तुम पार्टी मे क्यो नही गये थे.”

मैं बोला “मुझे नयी माँ बिल्कुल भी पसंद नही है. इसलिए कल मैने उनकी बात नही मानी.”

आंटी बोली “क्यो, तुम्हे नयी माँ क्यो पसंद नही है.”

आंटी की इस बात पर मैं मेहुल की तरफ देखने लगा तो, मेहुल समझ गया कि, अब आगे की बात बताने की बारी उसकी है और फिर उसने पहले दिन से लेकर अभी तक हुई सारी बात आंटी को बता दी. जिसे सुनने के बाद आंटी ने कहा.


आंटी बोली “तुम लोगो को ये कैसे लगा कि, जो रामू की माँ ने रामू के साथ किया है. वही पुन्नू की नयी माँ पुन्नू के साथ करेगी. रामू की माँ तो एक अच्छी औरत नही है. इसलिए वो रामू को परेशान किया करती थी. लेकिन पुन्नू की नयी माँ बहुत अच्छी औरत है, इसलिए वो पुन्नू को कभी परेशान नही करेगी.”

आंटी के मूह से नयी माँ की तारीफ सुनकर भी, मुझे आंटी की बात पर विस्वास नही आ रहा था. मैने आंटी से कहा.

मैं बोला “आंटी आपने तो नयी माँ को देखा ही नही और जब आप उन्हे जानती ही नही है तो, फिर आप ये कैसे कह सकती है कि नयी माँ एक अच्छी औरत है और वो मुझे कभी परेशान नही करेगी.”

मेरी बात सुनकर आंटी हँसने लगी और फिर मुझे समझाते हुए कहा.

आंटी बोली “बेटा ये तुमसे किसने कह दिया कि, मैं तुम्हारी नही माँ को नही जानती. मैने तुम्हारी नयी माँ को देखा भी है और मैं उन्हे अच्छे से जानती भी हूँ. वो मेरी सहेली की छोटी बहन है. इसलिए मुझे मालूम है कि, वो बहुत अच्छी है.”

आंटी की ये बात सुनने के बाद भी मैं नयी माँ को अच्छा मानने को तैयार नही था. मैने आंटी से कहा.

मैं बोला “आंटी यदि नयी माँ अच्छी है तो, फिर उन ने मुझे पापा के कमरे से बाहर क्यो निकलवाया.”

आंटी बोली “देखो अभी तुम छोटे हो इसलिए इस बात को नही समझ सकते हो. फिर भी मैं इक दूसरे तरीके से तुमको ये बात समझाती हूँ. देखो तुम और मेहुल एक बराबर के हो. मेहुल भी पहले मेरे और अपने पापा के साथ, हमारे कमरे मे सोता था. मगर फिर ये स्कूल जाने लगा तो, हम ने इसके सोने और पढ़ाई के लिए इसे एक अलग कमरा दे दिया. अब तुम्हारी माँ तो थी नही. फिर तुम्हारे लिए ये सब कौन करता. मगर जब तुम्हारी नयी माँ आई तो, उन ने तुम्हारे लिए वही किया, जो मैने मेहुल के लिए किया था. अब यदि तुम्हारे लिए ऐसा करने से तुम्हारी नयी माँ अच्छी नही है तो, फिर मैने भी तो मेहुल के लिए ऐसा ही किया है. क्या तब मैं भी अच्छी नही हू.”

ये कह कर आंटी मेरी तरफ देखने लगी. मुझे उनकी बात समझ मे आ रही थी. फिर भी मैं नयी माँ को अच्छा मानने को तैयार नही था. मैने फिर से आंटी से सवाल किया.

मैं बोला “यदि ऐसा ही बात है तो, फिर नयी माँ ने मुझे उस दिन, मेहुल के साथ देर तक स्कूल मे रहने पर, गुस्सा क्यो किया था.”

आंटी बोली “देखो बेटा, उस दिन उनका तुम्हारे घर मे पहला ही दिन था और तुम उस दिन समय पर घर नही पहुचे तो, उन्हे तुम्हारी चिंता हो रही होगी. इसलिए उन्हो ने तुम्हे देर से आने के उपर से गुस्सा किया. उस दिन तो मैने भी मेहुल को गुस्सा किया था. तुम चाहो तो मेहुल से पूछ सकते हो.”

आंटी की बात सुनकर मैं मेहुल की तरफ देखने लगा. तब मेहुल ने कहा.

मेहुल बोला “हाँ, उस दिन मम्मी ने भी मुझ पर गुस्सा किया था.”

मेहुल के मूह से ये सच्चाई जानने के बाद भी मैने अपनी बात आंटी के सामने रखते हुए कहा.

मैं बोला “चलो मैं आपकी ये बात भी मान लेता हूँ कि, नयी माँ ने उस दिन मुझे, मेरी चिंता होने की वजह से गुस्सा किया था. लेकिन इसके बाद उन्हो ने, मेरी शिकायत पापा से क्यो की. पापा ने उनकी शिकायत सुनकर मुझ पर बहुत गुस्सा किया था. जब वो खुद मुझ पर इस बात के लिए गुस्सा कर चुकी थी. तब उन्हे पापा से मेरी शिकायत करने की क्या ज़रूरत थी.”

आंटी बोली “देखो बेटा, अभी वो तुम्हारे घर मे नयी है. उस ने सोचा होगा कि, यदि उसने तुम्हारे स्कूल से देर से आने की बात तुम्हारे पापा से ना बताई और कल को तुम्हे कुछ हो गया तो, सब यही कहेगे कि सौतेली माँ थी, इसलिए लड़के का ख़याल नही रखा. अब वो नयी है तो, उसे तुम लोगों को समझने मे कुछ समय तो लगेगा ही है.”

मैं बोला “चलिए आंटी, मैं आपकी ये बात भी मान लेता हूँ. लेकिन मुझे इतनी सी बात के लिए बोर्डिंग क्यो भेजा जा रहा है. ये तो बिल्कुल रामू की तरह ही हो गया है. उसे उसकी नयी माँ के आने पर उसके नाना के घर जाना पड़ा था और मुझे मेरी नयी माँ के आने पर बोर्डिंग जाना पड़ रहा है.”

ये कह कर मैं आंटी की तरफ देखने लगा. आंटी ने मुझसे पुछा.

आंटी बोली “तुम्हे बोर्डिंग भेजने की बात क्या तुम्हारी नयी माँ ने की थी.”

मैं बोला “नही पापा ने की थी.”

आंटी बोली “तब तुम्हारी नयी माँ ने क्या कहा.”

मैं बोला “उन्हो ने कहा कि ये बोर्डिंग के लिए अभी बहुत छोटा है. इसे बोर्डिंग मे नही डालना चाहिए.”

आंटी बोली “देखो बेटा जिस बात से तुम परेशान हो. उस बात के लिए तुम्हारी नयी माँ ने तुम्हारी तरफ़दारी ली. मैं मानती हूँ कि तुम मे अभी अच्छे बुरे की पहचान नही है. लेकिन तुम इतना तो समझ ही सकते हो कि, जो तुम्हारे भले की सोचे वो बुरा नही हो सकता.”

मैं बोला “आंटी आपकी सब बात सही पर आप मुझे बोर्डिंग जाने से रोक लो. मैं बोर्डिंग नही जाना चाहता.”

आंटी बोली “तुम चिंता मत करो. मैं तुम्हे बोर्डिंग नही जाने दूँगी. मगर इसके लिए पहले तुम खुद कोशिश करो. यदि तुम से कुछ नही हुआ तो, फिर मैं तुम्हारी नयी माँ से बात करके, तुम्हारा बोर्डिंग जाना रुकवा दूँगी.”

आंटी की बात सुनकर मैं सोच मे पड़ गया. जब मेरे कुछ समझ मे नही आया तो मैने आंटी से पुछा.

मैं बोला “आंटी मैं भला क्या कर सकता हूँ. मेरी बात भला कौन मानेगा.”

आंटी बोली “सब से पहले तुम अपनी नयी माँ को बुरा मानना बंद करो और जैसे मेरी हर बात को मानते हो, वैसे ही अपनी नयी माँ की बात भी मानना सुरू कर दो. फिर देखो वो खुद तुम्हे बोर्डिंग नही जाने देगी.”

मैं बोला “आंटी वो मुझ से हमेशा गुस्से मे बात करती है. इसलिए मुझे भी उन पर गुस्सा आ जाता है.”

आंटी बोली “बेटा वो शुरू से ही गुस्से वाली है और यदि कोई उसकी बात नही मानता तो, उसे और भी गुस्सा आ जाता है. मगर जब तुम उसकी बात मनोगे तो, वो तुम पर ज़रा भी गुस्सा नही करेगी.”

मैं बोला “लेकिन आंटी, नयी माँ तो मुझसे कल की बात को लेकर नाराज़ होगी. वो भला मुझसे कोई बात क्यो करेगी. जब वो मुझसे कोई बात नही करेगी तो, फिर मैं उनकी बात कैसे मानूँगा.”

आंटी बोली “सबसे पहले तुम उसे नयी माँ की जगह छोटी माँ बोलना सुरू करो. आज घर जाते ही सब से पहले उसे कल की ग़लती के लिए सॉरी कहना और बर्तडे विश करना. उसकी सारी नाराज़गी खुद ही ख़तम हो जाएगी.”

मई बोला “ठीक है आंटी, अब मेरे घर जाने का टाइम भी हो रहा है. मई घर जाता हू.”

फिर मैने आंटी और मेहुल को बाइ बोला और घर के लिए निकल पड़ा मगर अब मेरे मान से बोर्डिंग जाने का दर निकल गया था. आंटी ने मेरे दिमाग़ मे नयी मा की जो तस्वीर बनाई थी, वो मुझे अची लगने लगी थी. मई बस इसी बारे मे सोचते सोचते अपने घर की तरफ चला जा रहा था.

5

Aunty ne hum logon ko aalu ke paranthe banakar khilaye aur jab hum logon ne paranthe kha liye to fir un ne mujhse pucha.

Aunty boli “han beta, ab batao tumhe kya paresani hai, jisko hal karne ka rasta tum mujhse janna chahte ho.”

Maine aunty ko, apne rat ko nayi maa ki b’day party me na jane aur papa ki mujhe bording bhejne wali bat bata di. Jise sunne ke bad aunty ne kaha.

Aunty boli “beta jab tumhari nayi maa ne tumhe party me aane ko bola to, tum party me kyo nahi gaye. Ye to tumhari hi galti hai aur is bat par tumhare papa ka gussa karna jara bhi galat nahi hai.”

Mujhe aunty ki ye bat sunkar bahut jyada nirasha huyi aur mai udas ho gaya. Mujhe udas dekh kar, aunty mere pas aakar baith gayi aur mere sar par pyar se hanth ferte huye kahne lagi.

Aunty boli “beta meri bat ka bura mat mano. Mai jo bhi kahugi, tumhare bhale ke liye hi kahugi. Ab mai tumse jo bhi puchti hu, tum uska sahi sahi jabab do. Tabhi to mai tumhari paresani ko dur karne ka koi rasta bata sakugi.”

Mujhe aunty ka yun pyar se hanth ferna aur unki bat dono bahut ache lage. Maine khush hote huye aunty se kaha.

Mai bola “aap puchiye aunty, mai aapki har bat ka sahi sahi jabab duga.”

Aunty boli “acha ye batao, kal rat ko apni nayi maa ke baar baar kahne par bhi, tum party me kyo nahi gaye the.”

Mai bola “mujhe nayi maa bilkul bhi pasand nahi hai. Isliye kal maine unki bat nahi maani.”

Aunty boli “kyo, tumhe nayi maa kyo pasand nahi hai.”

Aunty ki is bat par mai mehul ki taraf dekhne laga to, mehul samajh gaya ki, ab aage ki bat batane ki baari uski hai aur fir usne pahle din se lekar abhi tak huyi sari bat aunty ko bata di. Jise sunne ke bad aunty ne kaha.


Aunty boli “tum logo ko ye kasie laga ki, jo ramu ki maa ne ramu ke sath kiya hai. Wahi punnu ki nayi maa punnu ke sath karegi. Ramu ki maa to ek achi aurat nahi hai. Isliye wo ramu ko paresan kiya karti thi. Lekin punnu ki nayi maa bahut achi aurat hai, isliye wo punnu ko kabhi paresan nahi karegi.”

Aunty ke muh se nayi maa ki tarif sunkar bhi, mujhe aunty ki bat par viswas nahi aa raha tha. Maine aunty se kaha.

Mai bola “aunty aapne to nayi maa ko dekha hi nahi aur jab aap unhe janti hi nahi hai to, fir aap ye kaise kah sakti hai ki nayi maa ek achi aurat hai aur wo mujhe kabhi paresan nahi karegi.”

Meri bat sunkar aunty hansne lagi aur fir mujhe samjhate huye kaha.

Aunty boli “beta ye tumse kisne kah diya ki, mai tumhari nahi maa ko nahi janti. Maine tumhari nayi maa ko dekha bhi hai aur mai unhe ache se janti bhi hu. Wo meri saheli ki chhoti bahan hai. Isliye mujhe malum hai ki, wo bahut achi hai.”

Aunty ki ye bat sunne ke bad bhi mai nayi maa ko acha manne ko taiyar nahi tha. Maine aunty se kaha.

Mai bola “aunty yadi nayi maa achi hai to, fir un ne mujhe papa ke kamre se bahar kyo nikalwaya.”

Aunty boli “dekho abhi tum chhote ho isliye is bat ko nahi samajh sakte ho. Fir bhi mai ik dusre tarike se tumko ye bat samjhati hu. Dekho tum aur mehul ek barabar ke ho. Mehul bhi pahle mere aur apne papa ke sath, hamare kamre me sota tha. Magar fir ye school jane laga to, humne iske sone aur padai ke liye ise ek alag kamra de diya. Ab tumhari maa to thi nahi. Fir tumhare liye ye sab kaun karta. Magar jab tumhari nayi maa aayi to, un ne tumhare liye wahi kiya, jo maine mehul ke liye kiya tha. Ab yadi tumhare liye aisa karne se tumhari nayi maa achi nahi hai to, fir maine bhi to mehul ke liye aisa hi kiya hai. Kya tab mai bhi achi nahi hu.”

Ye kah kar aunty meri taraf dekhne lagi. Mujhe unki bat samajh me aa rahi thi. Fir bhi mai nayi maa ko acha manne ko taiyar nahi tha. Maine fir se aunty se sawal kiya.

Mai bola “yadi aisa hi bat hai to, fir nayi maa ne mujhe us din, mehul ke sath der tak school me rahne par, gussa kyo kiya tha.”

Aunty boli “dekho beta, us din unka tumhare ghar me pahla hi din tha aur tum us din samay par ghar nahi pahuche to, unhe tumhari chinta ho rahi hogi. Isliye un ne tumhe der se aane ke upar se gussa kiya. Us din to maine bhi mehul ko gussa kiya tha. Tum chaho to mehul se puch sakte ho.”

Aunty ki bat sunkar mai mehul ki taraf dekhne laga. Tab mehul ne kaha.

Mehul bola “han, us din mammy ne bhi mujh par gussa kiya tha.”

Mehul ke muh se ye sachai janne ke bad bhi maine apni bat aunty ke samne rakhte huye kaha.

Mai bola “chalo mai aapki ye bat bhi maan leta hu ki, nayi maa ne us din mujhe, meri chinta hone ki vajah se gussa kiya tha. Lekin iske bad un ne, meri sikayat papa se kyo ki. Papa ne unki sikayat sunkar mujh par bahut gussa kiya tha. Jab wo khud mujh par is bat ke liye gussa kar chuki thi. Tab unhe papa se meri sikayat karne ki kya jarurat thi.”

Aunty boli “dekho beta, abhi wo tumhare ghar me nayi hai. Us ne socha hoga ki, yadi usne tumhare school se der se aane ki bat tumhare papa se na batayi aur kal ko tumhe kuch ho gaya to, sab yahi kahege ki sauteli maa thi, isliye ladke ka khayal nahi rakha. Ab wo nayi hai to, use tum logon ko samajhne me kuch samay to lagega hi hai.”

Mai bola “chaliye aunty, mai aapki ye bat bhi maan leta hu. Lekin mujhe itni si bat ke liye bording kyo bheja ja raha hai. Ye to bilkul ramu ki tarah hi ho gaya hai. Use uski nayi maa ke aane par uske nana ke ghar jaana pada tha aur mujhe meri nayi maa ke aane par bording jaana pad raha hai.”

Ye kah kar mai aunty ki taraf dekhne laga. Aunty ne mujhse puchha.

Aunty boli “tumhe bording bhejne ki bat kya tumhari nayi maa ne ki thi.”

Mai bola “nahi papa ne ki thi.”

Aunty boli “tab tumhari nayi maa ne kya kaha.”

Mai bola “un ne kaha ki ye bording ke liye abhi bahut chhota hai. Ise bording me nahi dalna chahiye.”

Aunty boli “dekho beta jis bat se tum paresan ho. Us bat ke liye tumhari nayi maa ne tumhari tarafdari li. Mai manti hu ki tum me abhi ache bure ki pahchan nahi hai. Lekin tum itna to samajh hi sakte ho ki, jo tumhare bhale ki soche wo bura nahi ho sakta.”

Mai bola “aunty aapki sab bat sahi par aap mujhe bording jane se rok lo. Mai bording nahi jana chahta.”

Aunty boli “tum chinta mat karo. Mai tumhe bording nahi jane dungi. Magar iske liye pahle tum khud koshish karo. Yadi tum se kuch nahi hua to, fir mai tumhari nayi maa se bat karke, tumhara bording jana rukwa dugi.”

Aunty ki bat sunkar mai soch me pad gaya. Jab mere kuch samajh me nahi aaya to maine aunty se puchha.

Mai bola “aunty mai bhala kya kar sakta hu. Meri bat bhala kaun manega.”

Aunty boli “sab se pahle tum apni nayi maa ko bura manna band karo aur jaise meri har bat ko mante ho, waise hi apni nayi maa ki bat bhi manna suru kar do. Fir dekho wo khud tumhe bording nahi jane degi.”

Mai bola “aunty wo mujh se hamesa gusse me bat karti hai. Isliye mujhe bhi un par gussa aa jata hai.”

Aunty boli “beta wo suru se hi gusse wali hai aur yadi koi uski bat nahi manta to, use aur bhi gussa aa jata hai. Magar jab tum uski bat manoge to, wo tum par jara bhi gussa nahi karegi.”

Mai bola “lekin aunty, nayi maa to mujhse kal ki bat ko lekar naraj hogi. Wo bhala mujhse koi bat kyo karegi. Jab wo mujhse koi bat nahi karegi to, fir mai unki bat kaise manuga.”

Aunty boli “sabse pahle tum use nayi maa ki jagah chhoti maa bolna suru karo. Aaj ghar jate hi sab se pahle use kal ki galti ke liye sorry kahna aur birthday wish karna. Uski saari narajgi khud hi khatam ho jayegi.”

Mai bola “thik hai aunty, ab mere ghar jane ka time bhi ho raha hai. Mai ghar jata hu.”

Fir maine aunty aur mehul ko bye bola aur ghar ke liye nikal pada magar ab mere man se bording jane ka dar nikal gaya tha. Aunty ne mere dimag me nayi maa ki jo tasvir banayi thi, wo mujhe achi lagne lagi thi. Mai bas isi baare me sochte sochte apne ghar ki taraf chala ja raha tha.
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