एक राजा और चार रानियाँ complete

दोस्तो इस फोरम में आप हिन्दी और रोमन (Roman ) स्क्रिप्ट में नॉवल टाइप की कहानियाँ पढ़ सकते हैं
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jay
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Re: एक राजा और चार रानियाँ

Post by jay » 27 Dec 2016 19:02

ज़ेबा;सॅम को देखते हुए
थोड़ा थका हुआ लग रहा है सॅम कहीं से मेहनत करके आया है क्या

सॅम;हड्बडाता हुआ नही तो खाला मैं एकदम ठीक हूँ

ज़ेबा;ह्म्म्म्म लग तो नही रहा ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने तेरी एनर्जी खींच ली हो और वो हँसने लगती है

सॅम;जो कुछ देर पहले ज़ेबा पे गुस्सा हो रहा था उसे अब उसकी बातों से लगने लगा था कि रांड़ जल्द ही पैर खोल देगी
दोनो कार में बैठ जाते है

सॅम;कार ड्राइव करते हुए
खाला मुझ जैसे ग़रीब की एनर्जी भला कौन खींच सकता है हमारी किसे परवाह है

ज़ेबा;बेटा तू ठीक से खाया कर ना घर में बाहर का खाने से तबीयत खराब हो जाएगी

सॅम;नही खाला घर पे मज़ा ही नही आता

ज़ेबा;सॅम की जाँघ पे हाथ फेरते हुए में आ गई हूँ ना तुझे ऐसा मज़ा आएगा घर पे कि बाहर का खाना भूल जाएगा..खाने के साथ पिलाउन्गी भी अपने हाथों से पीएगा ना बेटा

सॅम;नेकी और पूछ पूछ खाला

ऐसी ही बातों में दोनो घर पहुँच जाते है जब ज़ेबा कार से बाहर उतरती है तब सॅम जानबूझ के ज़ेबा की मोटी मोटी कमर पे दबा के हाथ फेर देता है और धीरे से कहता है गरम है

ज़ेबा;कुछ बोल पाती इससे पहले नजमा और शबनम उसके पास आ जाते है

शबनम;अपनी अम्मी को देख के काफ़ी खुश थी दोनो माँ बेटी आपस में मिलते है और फिर नजमा भी ज़ेबा से मिलके उसे घर के अंदर ले जाती है

नजमा;;कुछ देर बाद सॅम को अपने रूम में बुलाती है
जब सॅम रूम में पहुँचता है तब नजमा
सॅम के कान मरोड़ती हुई उसे
नजमा;कमिने क्या कर रहा था तू ज़ेबा के साथ

सॅम;चौंकता हुआ क्यूँ कुछ भी तो नही अम्मी

नजमा;अच्छा मैने सब देखा जो हरकत तूने कार से निकालने के बाद की
अरे कुछ तो शरम कर वो तेरी खाला है अगर तूने ऐसी वैसी हरकत दुबारा की ना ज़ेबा के साथ तो देख ले सॅम

सॅम;उफफफफफ्फ़ हो अम्मी ना खुद कुछ करती हो ना मुझे दूसरों के साथ कुछ करने देती हो अगर तुम मेरा साथ दो तो मैं अपनी आँखों पे पट्टी बाँधे रखूं दिन भर पर आफसूवस्स्सस्स्सस्स
वो एकदम उदास सा चेहरा बना के बोल रहा था जिससे नजमा को हँसी आ जाती है और वो सॅम को ऐसे ही हँसते हुए मारने आगे बढ़ती है तभी सॅम की मज़बूत बाहें नजमा को घुमा देती है और नजमा की पीठ सॅम की छाती से चिपक जाती है

सॅम;का डंडा नजमा की गुफा के ठीक मुहाने पे अड़ जाता है

नजमा;अहह छोड़ कम्बख़्त

सॅम;अपने दोनो हाथों से नजमा को पीछे से कस लेता है अम्मी एक बार दोना

नजमा;कभी नही दूँगी तू कितनी भी कोशिश कर ले सॅम वो फीरोजा थी जो तेरी बातों में अहह गयी में तुझे जान से मार दूँगी अगर मेरे अहह ऊईीईईईईईई

सॅम;के दोनो हाथ नजमा की नरम नरम चुचि पे जम से गये थे और वो उन्हे थामे हुए नही थे बल्कि मसल रहे थे
जिससे नजमा के अल्फ़ाज़ मुँह में ही अटक से गये थे

नजमा;छोड़ कमिनाते कोई आ जाएगा अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्मे मेहमान घर पे हैं

सॅम;पहले बोलो कब दोगि

नजमा;कभी नही

सॅम;तो फिर आने दो सब को देखने दो मैं नही छोड़ने वाला

नजमा;उनह चुचि मसल्ने से गरम हो गई थी पर उसका दिमाग़ अभी उसके काबू में था वो सॅम को धीरे से बोलती है पहले छोड़ फिर बोलती हूँ

सॅम;खुश होके नजमा को छोड़ देता है और जैसे ही नजमा सॅम की तरफ घूमती है सॅम का मुस्कुराता हुआ चेहरा सपाट से लाल हो जाता है

एक करारा थप्पड़ उसे होश दिलाता है कि बेटा असल दुनिया में आजा

नजमा;अब पता चल गया कि कब दूँगी

सॅम;नजमा को ज़ोर से पकड़ता हुआ अम्मी देख लेना मेरी मोहब्बत आपके सर चढ़ का बोले गी एक दिन और उस दिन आप के हाथ मेरे गालों पे नही बल्कि होंठ होगे ये मेरा वादा है आपसे

नजमा;उसे घुरती चली जाती है और सॅम रूम से बाहर निकल जाता है

नजमा;दिल में सोचने लगती है आख़िर क्या करूँ में इसका कैसे समझाऊ कि में इसकी अम्मी हूँ माशुका नही जो ये चाहता है वो कभी नही होगा में ऐसा होने नही दूँगी

सॅम;जब अपने रूम में जा रहा था तभी उसे आबिद दिखाई देता है कल उसकी विदाई थी मामू के घर परेशान सा आबिद ललचाई नज़रों से सॅम को देखता है और सॅम के रूम की तरफ बढ़ता है और सॅम जानता था कि ये क्यूँ आ रहा है वो जल्दी से रूम का दरवाज़ा बंद कर देता है

कुछ देर बाद सॅम के डोर पे दस्तक होती है वो आबिद होगा समझ के पहले डोर नही खोलता फिर लगातार दस्तक की वजह से वो गुस्से में दरवाज़ा खोलता है
सामने शबनम खड़ी थी

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jay
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Re: एक राजा और चार रानियाँ

Post by jay » 27 Dec 2016 19:04


शबनम;क्या सो गये थे क्या कब से खट खटा रही हूँ

सॅम;उसे अंदर लेता हुआ बोलो

शबनम;सुनो में ये कह रही थी कि जब तक अम्मी यहाँ हैं तुम मेरे रूम में नही आना वरना

सॅम;शबनम को बाहों में कसते हुए मेरी जान मेरे मुँह को खून लगगया है अब मुझे रोज चाहिए तू कुछ भी कर कैसे भी कर मुझे चाहिए मतलब चाहिए
और सॅम;शबनम की कमर में हाथ डालके उसे अपने से चिपका के उसके होंठ चूसने लगता है गलपप्प्प्प्प्प्प्प गलपप्प्प्प्प गलपप्प्प्प्प्प्प

शबनम;भी गरम थी वो भी सॅम का साथ देने लगती है

सॅम;मौके का फ़ायदा उठाते हुए शबनम की शलवार का नाडा खोल देता है और शलवार नीचे गिर जाती है

शबनम;उनह अभी नही ना कोई भी आसकता है ऊीीईईईईईईई

शबनम;की चूत की गर्मी उसके हाथों को हरकत नही दे पा रही थी वो बोल कुछ रही थी और कर कुछ और रही थी

सॅम;अपना खड़ा लंड बाहर निकाल लेता है और शबनम को घुमा के दीवार से खड़ा कर देता है अहह बस थोड़ी देर

शबनम;उनह कोई आ गया तो प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज

सॅम;थोड़ी गान्ड पीछे कर

शबनम;अपनी कमर पीछे की तरफ करती है

सॅम;अपना मुस्सल लंड शबनम की चूत में डालने ही वाला था कि बाहर से ज़ेबा की आवाज़ आती है

ज़ेबा;अरे शबनम बेटा ज़रा यहाँ आना तो

शबनम;घबराते हुए शलवार पहन लेती है और बाहर भागने लगती है

तभी सॅम उसका हाथ पकड़ लेता है

सॅम;सुन रात में दरवाज़ा खुला रखना वरना याद रखना वो हाल करूँगा कि

शबनम;ह्म्म्म्म मममम कहती हुए वहाँ से भाग जाती है

शबनम;के जाने बाद सॅम अपने रूम से बाहर निकलता है वो महक के रूम के सामने से गुज़र रहा था तभी उसे महक की आवाज़ सुनाई दी वो शायद अपनी फ्रेंड से बात कर रही थी

महक;फोन पे
अर्रे यार तू 6 से 9 की टिकेट्स बुक करना अम्मी जाने नही देगी रात में और अब तो वो कद्दू भी आ गया है उसके होते हुए कैसे आ सकती हूँ..
वो अपनी फ्रेंड से रात में पिक्चर देखने की प्लानिंग बना रही थी

सॅम;महक के रूम में चला जाता है और महक के सामने खड़ा हो जाता है

महक;मैं तुझे बाद में कॉल करती हूँ बाइ
क्या है तू इस वक़्त यहाँ

सॅम;किस से बात कर रही थी

महक;इतराते हुए तुझ से मतलब जा अपना काम कर कद्दू कहीं के

सॅम;को लगा ये तो साला अपनी इज़्ज़त का फालूदा बना रही है पहले खुद कहती थी और अब अपनी फ्रेंड्स के सामने भी मुझे कद्दू कह रही है

देख मोटी थोड़ी शराफ़त सीख ले कल को तुझे अपने घर जाना है समझी

महक;सॅम को घूर के देखने लगती है क्या कहा तूने अपने घर तो ये या मेरा घर नही है

सॅम;हाहाहा अर्रे जा मॉटली ये तेरा नही मेरा और आबिद का घर है तू तो किसी कबाड़ी के यहाँ जाएगी झाड़ू मारने हाहहः

महक;सॅम के पेट में एक घूँसा जड़ देती है पर उस गुस्से का सॅम पे कोई असर नही होता एक हॅटा कटा जवान पे भला चिंटी के चलने का क्या असर

पर सॅम अपना पेट पकड़ लेता है जैसे उसे बहुत ज़ोर की लगी वो दर्द से करहाने की आक्टिंग करने लगता है अहह मर गया अहह

महक;अपने छोटे छोटे मसल सॅम को दिखाती है आगे से पंगा लेगा ना तो ये मसल देखा मसल के रख दूँगी

सॅम;महक की गर्दन एक हाथ से पकड़ लेता है और दूसरे हाथ से उसकी जीन्स पॅंट पार लगा बेल्ट और उसे थोड़ा उपर उठा देता है जिससे महक के पैर उपर हवा में उठ जाते है

सॅम;हलवा है क्या जो खा लेगी मोटी भैंस अब बोल

महक;का गला थोड़ा ज़ोर से दब गया था
वो चिल्लाति है अहह छोड़ कमिनाते मार देगा क्या अहहहहहहहः

सॅम;अब बोल कौन किसको मसलेगा

महक;सॅम प्लीज़ नीचे तो उतार बोलती हूँ

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jay
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Re: एक राजा और चार रानियाँ

Post by jay » 29 Dec 2016 15:29


जैसे ही सॅम महक को नीचे उतारता है महक अपने घुटने से सॅम के पैरों के बीच में उसका लंड पे मारने की कोशिश करती है पर उसका वॉर सॅम बच के उसे घुमा देता है और पीछे से उसे पकड़ लेता है

ये महक की बचपन की आदत थी जब उसे कोई उससे ज़्यादा मज़बूत लगने लगता तो वो अपना आखरी हथियार इस्तेमाल करती थी

सॅम;इस बात से अच्छी तरह वाकिफ़ था
वो महक को पकड़ लेता है और उसके कान में धीरे से कहता है
तुझे कितनी बार बोला मेने डेलिकेट डेलिकेट ऑर्गन पे नही मारने का
और फिर सॅम कुछ ऐसा करता है जिससे महक के तन बदन में झुरझुराहट सी पैदा हो जाती है

सॅम;अपना पूरा हाथ का पंजा महक की जाँघ पे ज़ोर से मारता है जैसे कोई किसी की कमर पे थप्पड़ मारता है ना उसी तरह सॅम ने महक की चूत पे थप्पड़ मारा था

महक;ऊऊचह के लिए ये एक ऐसी चीज़ थी जिसने उसे एहसास दिलाया कि वो लड़की है
वो सॅम की आँखों में देखने लगती है जैसे पूछ रही हो ये तूने क्या किया ज़ालिम

वो थप्पड़ महक के सोए हुए क्लाइटॉरिस को गहरी नींद में से जगा देता है

महक;सॅम के पकड़ में से निकल के चुप चाप वहाँ से बाहर निकल जाती है

सॅम;अर्रे महक मैने तो मज़ाक किया था सॉरी यरर्र्र्र्ररर

महक;कोई जवाब नही देती और बाथरूम में जाके अपनी पैंटी नीचे करने के बाद अपनी चूत पे हाथ फेरती है
अहह एक अजीब सी गुदगुदी एक अजीब एहसास उसके दिल में कहीं हुआ था ये क्या हो रहा है महक तुझे वो तेरा सगा जुड़वा भाई है

और वो अपना सर झटक के बाहर निकल जाती है

रात 10पी एम;

रात का खाना सभी खा चुके थे शबनम और ज़ेबा दोनो रूम में बैठी बातें कर रही थी
इधर आबिद कल जाने की तैयारी कर रहा था महक उसकी मदद कर रही थी
महक को आबिद से एक खास लगाव था वो आबिद का चेहरा बिल्कुल लड़कियों जैसा था और महक को उसके चेहरे पे बहुत प्यार आता था ..सॅम तो महक का बचपन से जानी दुश्मन था उनके बीच कभी भाई बहेन का रिश्ता था ही नही..पर आज नज़ाने महक थोड़ी गुम्सुम सी थी पता नही उसे क्या हो गया था आबिद उसे पूछ लेता है
पर वो एक बहाना बना के उसकी बात झटक देती है

नजमा;अपने रूम में बेड पे बैठी कुछ ऑफीस की फाइल्स देख रही थी तभी सॅम वहाँ आजाता है

सॅम;अम्मी में कुछ हेल्प करूँ

नजमा;नो

सम;अम्मी में कुछ करूँ

नजमा'उसे घुरत देख कब सुधरेगा तू सॅम जब से तू आया है देख रही हूँ तेरा बिहेवियर ऐसा ही है
बेटा मैं तेरी अम्मी हूँ क्यूँ कर रहा है तू ऐसा मेरा साथ

सॅम;ब्कोज़ आइ लव यू सिंपल

नजमा;कुछ नही बोलती और अपनी फाइल्स में देखने लगती है

सॅम;अम्मी आपकी गर्दन पे कुछ है

नजमा;गर्दन पे हाथ फेरती हुए कहाँ क्या है

सॅम;एक मिनट रूको और सॅम नजमा के पीछे जाके उसके बाल गर्दन पे से हटा देता है और जल्दी से अपने लिप्स उसकी गर्दन पे रख के किस कर देता हैमुह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

नजमा;सॅम की चाल समझ जाती है दूर हट बेशरम

सॅम;मुस्कुराता हुआ सच कहूँ अम्मी आप बहुत खूबसूरत हो आप जैसी लेडी मैने अपनी लाइफ में नही देखा यूके में भी आप जैसी हसीन जमील लेडी नही देखी मुझे यू आर आ मास्टर पीस अम्मी

नजमा;एक औरत थी भला कौनसी औरत को अपनी तारीफ अच्छी नही लगती और सॅम ने तो मुँह भर के कर दिया था जिससे नजमा को रुखसारों पे लाल रंग आजाता है
चल हट बेशरम अपनी अम्मी को कुछ भी कहता है

सॅम;उफफफफफफफ्फ़ हो अम्मी सच में ये देखो आपकी नाक कितनी प्यारी है आपकी गर्दन एकदम सुराही की तरह आपके कान सो स्वीट आपके होंठ

जो सॅम की तारीफ से लरजने लगे थे उनमें कप कपाहट सी पैदा होने लगी थी
लाल गुलाबी होंठ अपनी तारीफ सुनना चाहते थे पर सॅम ने उनकी तारीफ लफ़्ज़ों से ना कहते हुए अपने होंठों से कहना बेहतर समझा

नजमा;इससे पहले कुछ कर पाती सॅम उसके होंठो को चूम चुका था



नजमा;गुस्से से तिलमिला जाती है और सॅम को घूँसा मारना चाहती है पर सॅम अपने मज़बूत हाथ से नजमा के दोनो हाथों की कलाई पकड़ के पीछे मोड़ देता है

सॅम;अपनी हद से आगे बढ़ना चाहता था वो नजमा की कलाई छोड़ के उसकी कमर में हाथ डालना चाहता है नजमा रीफ्लेक्स आक्षन देखती है और एक ज़ोर दार कर्रारा थप्पड़ सॅम की सुनने की शक्ति कुछ देर के लिए जैसे ख़तम कर देता है

नजमा;चिल्ला भी नही सकती थी घर में मेहमान आई हुई थी और वो क्या करती एक ही तो हथियार था उसके पास थप्पड़
पर अब इस थप्पड़ का भी सॅम पे कुछ ज़्यादा असर नही होता था

सॅम;अपने गाल को मल्ता हुआ नजमा के रूम से बाहर निकलने ही वाला था कि नजमा उसका हाथ पकड़ के फिर से अपनी तरफ मोड़ देती है और रूम का डोर बंद कर देती है

नजमा;पलट के सॅम के करीब जाती है
सॅम;का गाल लाल हो चुका था और चेहरे पे एक खामोशी थी शायद उसे नजमा का ये थप्पड़ चेहरे पे नही बल्कि दिल पे कहीं लगा था

नजमा;धीमी आवाज़ में क्यूँ कर रहा है तू बेटा ऐसा मेरे साथ अर्रे मैं तेरी अम्मी हूँ सॅम तुझे मेने पैदा किया है और तू इस बूढ़ी औरत को इस उमर में इस तरह पढ़ाना कर रहा है शरम नही आती तुझे ऐसा करते हुए
अगर तू कहे तो बेटा में तेरे लिए कहीं रिश्ते की बात करूँ

सॅम;अम्मी खबर दार जो अपने खुद को बूढ़ी औरत कहा तो और एक और बात मैने अपने लिए एक खूबसूरत लड़की देख ली है और वो में आपको बता भी चुका हूँ..सम ने जान बुझ के औरत की बजाय लड़की लफ्ज़ इस्तेमाल किया ताकि नजमा पे गहरा असर पड़े उसकी बात का

नजमा;फिर से भन्ना जाती है और अपनी उंगली उसके चेहरे के सामने करते हुए
देख सॅम अब बहुत हुआ अगर तू मेरी बात नही सुनेगा तो मैं तुझे अपने मामा के वहाँ भिजवा दूँगी में तुझे सही रास्ते पे लाना चाहती हूँ और एक तू है कि वही गंदे बेहूदा रास्ते पे चला जा रहा है अगर ............
वो और कुछ बोलना चाहती थी पर सॅम की एक हरकत उस के तन बदन में चिंगारियाँ पैदा कर देती है

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Re: एक राजा और चार रानियाँ

Post by jay » 29 Dec 2016 15:31


सॅम;अपने मुँह में नजमा की वो उंगली लेलेता है जिसे वो सॅम को दिखा के धमका रही थी
उसके उंगली चूसने का अंदाज ऐसा था जैसे कोई औरत लंड मुँह में लेके चुस्ती है

नजमा;अपनी उंगली उसके मुँह में से खींचते हुए
कमिनाते इंसान निकल जा मेरी नज़रों के सामने से तुझे डॉक्टर की ज़रूरत है

सॅम;मुझे आपकी ज़रूरत है अम्मी
और ये कहता हुआ सॅम नजमा के रूम से बाहर निकल जाता है

नजमा;कुछ हैरान कुछ परेशान सी उसे जाता देखती रह जाती है
जब भी वो सॅम को कुछ समझाना चाहती सॅम कुछ ऐसी हरकत कर देता कि नजमा कांप के रह जाती

रात 1एएम;;सभी अपने अपने रूम्स में सोचुके थे
पर सॅम को कहाँ नींद आने वाली थी उसे तो मसके का चस्का लगगया था वो मस्का जो शबनम की जाँघ पे लगा हुआ था

सॅम;सभी के रूम्स चेक करके शबनम के रूम के पास पहुँचता है
और जैसे ही वो रूम में दाखिल होता है उसका दिल ज़ोरों से धड़कने लगता है

एक किंग साइज़ बेड पे एक कोने में शबनम की माँ ज़ेबा सोई हुए थी और दूसरी तरफ शबनम.
सॅम;डोर लॉक कर देता है

सॅम;शबनम के पास जाके बेड पे बैठ जाता है और हल्के से शबनम के चेहरे पे हाथ फेरता है
शबनम;शायद अभी अभी लेटी थी वो अपनी आँखे खोल देती है और अपने पास सॅम को देख घबरा जाती है

शबनम;एक दम धीमी आवाज़ में..सॅम जाओ अम्मी अभी अभी सोई है

सॅम;अपनी गर्दन नही में हिलाता है और शबनम पे झुकता है

शबनम;उसे रोकने की कोशिश करती है पर तब तक सॅम शबनम के उपर चढ़ चुका था

सॅम;अपने दोनो हाथों से शबनम की ब्रेस्ट मसल्ने लगता है

शबनम;बहुत ज़्यादा घबराई हुए थी उसे समझ नही आ रहा था कि सॅम को कैसे रोके
पर सॅम की हरकतें उसकी जाँघ के बीच में कुछ और ही हलचल मचा रही थी
शबनम;ने एक नाइटी पहनी हुए थी जिसे निकालने में सॅम को कोई परेशानी नही हुई और शबनम के भरे हुए ब्रेस्ट सॅम के सामने आ गये बस एक ब्रा का परदा था

सॅम;शबनम के लिप्स को चूमने लगता है और अपने दोनो हाथ पीछे लेजाके उसकी ब्रा का हुक खोल देता है

शबनम;चाहती थी कि सम यहाँ वो सब ना करे क्यूंकी उसे डर था कि कहीं ज़ेबा जाग गयी तो कयामत आजाएगी
पर सॅम तो शायद यही चाह रहा था कि ज़ेबा जाग जाए उसे पता था कि शबनम से ज़्यादा सेक्सी माल ज़ेबा है

शबनम;एक दम खामोश हो जाती है

सम;उसे टॉपलेस कर देता है और शबनम के गुलाबी निपल्स को चूमने लगता है

शबनम;मचल सी जाती है वो भी अब यह भूल चुकी थी कि वो कहाँ है
शबनम;अपने हाथ नीचे बढ़ा के सॅम की पॅंट खोल देती है और बिना अंडर वेअर की वजह से सॅम का नाग झट से फॅन फैलाता हुआ शबनम के हाथ में आजाता है

शबनम;की आँखे मारे खुशी और जोश के चमक उठती है

वो जल्द से जल्द सॅम के लंड को अपनी चूत की गहराइयों में लेना चाहती थी ये भूल के कि किसी भी वक़्त ज़ेबा जाग सकती है और उन्हे रंगे हाथों पकड़ सकती है

ये चूत और लंड की आग थी ये ना जगह देखती है और ना रिश्ते

सॅम;का बुरा हॉल हो रहा था शबनम उसका आंडो के साथ साथ उसके लंड को भी मरोड़ रही थी

ये सारा खेल एकदम चुपके से बिना आवाज़ किए शुरू था साइड में ज़ेबा एक दम खामोश पड़ी थी

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Re: एक राजा और चार रानियाँ

Post by jay » 29 Dec 2016 15:32


शबनम और सॅम की साँसें फूलने लगती है

सॅम;शबनम के पैर चौड़े कर देता है और अपना लंड उसकी चूत पे घिसने लगता है

शबनम;सॅम की आँखों में देखती है उस नाइट लॅंप की रोशनी में भी सॅम आसानी से शबनम की आँखों में ये देख सकता था कि शबनम उसे क्या कह रही है
और सॅम ;बिना देर किए अपना लंड को शबनम की चूत की गहराईयो मे पेलता चला जाता है

शबनम;हल्के से अहह ऊइईई अम्मी गगगगगगगग उन्न्ह अहह

तभी ज़ेबा करवट बदलती है
सॅम और शबनम की जान हलक में आके जैसे अटक जाती है
दोनो धड़कते दिल से ज़ेबा की आँखों की तरफ देखते है
ज़ेबा;की आँखे बंद थी ऐसे लग रहा था जैसे वो गहरी नींद में सोई हुई है

कुछ सेकेंड बाद सॅम की कमर नीचे उपर होने लगती है
शबनम;उसे देखती है और फिर दोनो के होंठ आपस में मिलते चले जाते है
और फॅक फॅक की आवाज़ के साथ सॅम अपने लंड को शबनम की चूत में डालते चला जाता है

शबनम;धीरे से अहह सॅम अहह धीरे उन्ह्ह्ह्ह्ह अम्मी उठ जाएँगी बेड के हिलने से अहहहहहहः आराम से नाआआआआआ

सॅम;कुछ नही होगा भाभी अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह में क्या करूँ आपकी चूत है ही ऐसी कि उन्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आराम से नहियीईईईई छोड़ सकता

रात के उस अंधेरे में दो जिस्म एक जान बने हुए थे ये एक दिलकश नज़ारा था अपनी अम्मी के पास लेट के एक बेटी अपने देवर से आराम आराम से चुद रही थी

शबनम;अपने दोनो पैर सॅम की कमर से लपेट लेती है
और सॅम ;दना दन अपना लंड को शबनम की चूत में बच्चे दानी से टकराता चला जाता है अहहहहहहहहहः

शबनम;उस मुकाम पे पहुँच चुकी थी जहाँ एक औरत से रुकना ना मुमकिन हो जाता है वो सॅम को ज़ोर से चोदने के लिए कहती है

शबनम;अहह उन्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अंदर तक हन्ंणणन् ऐसे ही सॅम अहह में मर जाउन्गी उह्न्ह्न्ह्न्ह्न्ह्न्ह्न्ह्न ऊउउउउउउउउ

सॅम;के धक्के बेड को हिला रहे थे पर अब ना वो ज़ेबा को देख रहे थे और ना उन्हे उसकी परवाह था

शबनम;उन्ह्ह्ह्ह्ह्ह ज़ोर से अहह सम्म्म्मममममम

सॅम;अपनी गर्दन ज़ेबा की तरफ करता है और उसे एक झटका लगता है ज़ेबा की आँखे खुले हुई थी

सॅम;एक पल के लिए रुका और फिर शबनम के ज़ोर से कहने पे एक ज़ोर दार झटका अंदर देते हुए अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

तेरी माँ कू चोदु शबनम अहहहहहहहहहः
ये लफ़्ज सॅम ने ज़ेबा की आँखों में आँखे डालके कहे थे

ज़ेबा;के चेहरे पे एक हल्की सी मुस्कान आजाती है

शबनम;सॅम को चिपकाते हुए झड्ने लगती है उसे पता ही नही था कि ज़ेबा सब कुछ देख चुकी है

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