बहू नगीना और ससुर कमीना

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pongapandit
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Re: बहू नगीना और ससुर कमीना

Post by pongapandit » 02 Nov 2017 09:08

Hot. ....... Waiting next

Re: बहू नगीना और ससुर कमीना

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Kamini
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Re: बहू नगीना और ससुर कमीना

Post by Kamini » 03 Nov 2017 12:22

mast update

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Smoothdad
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Re: बहू नगीना और ससुर कमीना

Post by Smoothdad » 03 Nov 2017 17:44

xyz wrote:
30 Oct 2017 19:53
mast...............
pongapandit wrote:
02 Nov 2017 09:08
Hot. ....... Waiting next
007 wrote:
31 Oct 2017 12:37
awesome update
Kamini wrote:
03 Nov 2017 12:22
mast update
thanks all

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Smoothdad
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Re: बहू नगीना और ससुर कमीना

Post by Smoothdad » 03 Nov 2017 17:45

उस दिन शिवा के आने तक और कुछ नहीं हुआ। शिवा के आने के बाद सब खाना खाए और फिर ड्रॉइंग रूम में बैठ कर बातें करने लगे। तीनो लड़कियों ने रात के कपड़े पहने थे। मुन्नी और चारु ने टॉप और पाजामा पहना था और मालिनी ने गाउन पहना था। तभी सरला आयी और धम्म से सोफ़े पर बैठ कर बोली: बहुत मुश्किल से सोयी है गुड़िया, थका दिया उसने। वो एक गाउन में थी जिसमें से उसका भरा बदन मस्त उत्तेजक दिख रहा था।

राजीव: मुन्नी अब सोना नहीं है क्या? चलो सुबह स्कूल है ना?

मुन्नी बुरा सा मुँह बनाकर सबको गुड नाइट कहकर चली गयी। सब हँसने लगे और शिवा बोला: लगता है उसको अभी सोना नहीं था। आपने उसे ज़बरदस्ती भेज दिया।

राजीव: वो इसलिए ताकि हम सोच सकें कि कौन किसने साथ सोएगा?

मालिनी: मेरे साथ जो भी सोना चाहे सो सकता है पर चुदाई तो होगी नहीं। इसलिए मैं जा रही हूँ जो चाहे आ कर सो सकता है जब उसकी मर्ज़ी हो।मैं क्यों कबाब में हड्डी बनूँ? यह कह कर वो चली गयी।

राजीव: फिर शिवा क्या कहते हो? कौन किसके साथ सोएगा?

शिवा अपने लंड को हाफ़ पैंट के ऊपर से दबाकर : पापा आप बताइए आप बड़े हैं मैं तो आपके आदेश का पालन करूँगा।

सरला राजीव से : आपने उसे असली बात तो बताई नहीं है कि आप चारु को चोद चुके हो।

शिवा ने देखा कि चारु का चेहरा लाल हो गया। वो शर्मा कर अपना मुँह छिपा ली।

शिवा: वाह ये तो बड़ी मस्त बात हुई। अगर ऐसा है तो पापा हम सब आपके बेडरूम में चलते हैं और वहीं मस्त चुदाई करते हैं । मुझे भी अपनी साली की बुर लेने का मन हो रहा है।

सरला: हाँ हाँ मस्त लौंडिया मिल गयी हैं तो अपनी बूढ़ी सास का क्यों सोचेगा तू?

शिवा: क्या मम्मी क्या बोल रही हो। आप और बूढ़ी? आप तो अभी भी मस्त गदराई हुई रखी हो। आपको चोदने में तो स्वर्ग का मज़ा आता है। फिर वो उठ कर सरला के पास जाकर बैठा और उसके गाल चूमने लगा। तभी राजीव भी उठा और उसकी दूसरी तरफ़ जाकर बैठा और उसके दूसरे गाल को चूमने लगा। चारु हैरानी से देख रही थी किबाप बेटा दोनों उसकी चाची को चूम रहे थे और अब उनके एक एक हाथ उसकी एक एक चूचि को दबाने लगे थे।

राजीव: अरे सरला तुम तो मस्त माल हो, बूढ़ी होगी तुम्हारी दुश्मन। हम बाप बेटा तो तुम्हारे आशिक़ हैं ।

इस पर सरला हँसने लगी और बोली: अरे अच्छा बस करो। वो देखो मेरी भतीजी अपना जवान बदन लेकर बैठी है, उसका भी तो ध्यान रखो।

राजीव: तुमने चारु को अब तक नहीं चोदा है ना। चलो उसको गोद में उठाके बिस्तर पर ले चलो । हम अभी आते है। वो सरला को अपनी गोद में खींचकर बोला।

शिवा उठा और चारु को किसी फूल की तरह उठाकर अपनी गोद में लेकर राजीव के बेडरूम में चला गया।

उधर राजीव सरला को चूमकर बोला: जानू तुमसे एक बात करनी थी।

सरला: हाँ बोलिए।

राजीव: वो क्या है ना मुन्नी भी अब जवान हो चली है। पर अभी उसकी सील टूटी नहीं है। ओरल सेक्स तो मस्ती से करती है और करवाती है। क्या अब उसकी सील भी तोड़ देनी चाहिए?

सरला: मैं क्या बताऊँ? क्या वो तय्यार है?

राजीव: यही तो पता करना है। मैं चाहता हूँ कि तुम ये पता करो। वैसे भी वो अभी जाग रही होगी। तुम्हारा क्या ख़याल है मेरा लंड ले लेगी वो?

सरला: अरे आजकल तो इससे भी छोटी लड़कियाँ मज़े से चुदवा रहीं हैं तो भला ये तो ओरल कर ही रही है। आप चोद डालो उसे।


राजीव: नहीं एक बार तुम थोड़ा चेक कर लो कि वो अभी तय्यार हुई है या नहीं?

सरला: अच्छा तो क्या अभी ये करना है?

राजीव: हाँ मैं चाहता हूँ कि अभी शिवा एक राउंड चारु को चोद ले तभी हम उस कमरे में जाएँ। तुम मुन्नी से बात करो और अगर लगे तो मुझे बुला लेना।

सरला हँसकर उसका लंड दबायी और उठ कर मुन्नी के कमरे में गयी। वहाँ मुन्नी एक किताब पढ़ रही थी। वो चाची को देखकर चौंक गयी।

वो: चाची आप? कुछ चाहिए क्या?

सरला मुस्कुरा कर उसके पास बिस्तर में बैठी और बोली: नहीं बस ऐसे ही, सोचा तेरा हाल चाल पूछ लूँ। कैसी है? मन लग गया? स्कूल कैसा है?

मुन्नी: हाँ चाची सब ठीक है। मन भी लग गया है। स्कूल भी अच्छा है।

सरला: स्कूल में लड़के तंग तो नहीं करते? ख़ास कर तेरे अमरूद इतने बड़े हो गए हैं ना? इसलिए पूछ रही हूँ। वह हाथ बढ़ाकर उसके एक अमरूद को सहला दी।

मुन्नी लाल होकर: आह चाची क्या बोल रही हो? आऽऽऽऽह छोड़ो ना। गुदगुदी होती है। वैसे मेरे इतने भी बड़े नहीं हैं। कई लड़कियों के तो मेरे से भी बहुत बड़े हैं । ज़्यादा लड़के उन्ही लड़कियों के पीछे भागते हैं । वह सरला का हाथ अपनी चूची से हटा कर बोली।

सरला: अरे तेरे भी जल्दी ही बड़े हो जाएँगे। शिवा और उसके पापा दबा तो रहे ही हैं ना। उसने अंधेरे में तीर मारा।

मुन्नी चौंक कर: नहीं तो आपको किसने कहा?

सरला: अरे दोनों बाप बेटा ही बोले। मस्त दबवाती है मुन्नी और चूसती भी है और ये भी चूसवाती है। सरला उसकी बुर को पजामा के ऊपर से दबा कर बोली।

मुन्नी: आऽऽऽऽह बड़े गंदे हैं दोनों। आपको सब बता दिया?

सरला: कहाँ तक पहुँची? सील टूट गयी क्या?

मुन्नी शर्मा कर नहीं में सिर हिलाई।

सरला: अच्छा कौन ज़्यादा मज़ा देता है? शिवा या उसके पापा?

मुन्नी शर्माकर: उफ़्फ़्फ़्फ चाची क्या क्या पूछ रही हैं आप?
मुझे दोनों अच्छे लगते हैं पर जीजू ज़्यादा पसंद हैं । वो बड़े प्यार से मज़ा देते हैं। वो जवान भी है ना।

सरला: तो किससे सील तुड़वाएगी ? जीजू से ?

मुन्नी शर्मा कर : जी ।

सरला: तो कब तुड़वाएगी? आज या बाद में?

मुन्नी: आऽऽज? नहीं चाची परसों छुट्टी है। कल तुड़वा लूँगी। क्योंकि एक दिन तो सही तरीक़े से चल नहीं पाऊँगी ना।

सरला: अच्छा कौन बताया तुमको कि ऐसा होगा?

मुन्नी: चाची मेरी सभी सहेलियाँ चुदवा चुकी हैं । वो ही बतायीं थीं।और वैसे भी दोनों बाप बेटा बहुत बड़ा हथियार लेकर घूम रहे हैं।

सरला: ठीक है कल चुदवा लेना। जैसी तुम्हारी मर्ज़ी। मैं शिवा को बोलूँगी कल तुम्हारी सील तोड़ देगा। अभी राजीव अंकल को बुलाऊँ थोड़ा सा ओरल कर लेना।

मुन्नी: वो कहाँ है?

सरला: बाहर इंतज़ार कर रहे हैं। बुलाऊँ?

मुन्नी ने शर्मा कर हाँ में सिर हिला दिया।

सरला उठकर बाहर आयी और राजीव को बोली: वो शिवा से भी मज़े ले रही है। जैसे आपसे ले रही है।

राजीव: ओह ऐसा क्या है? मस्त माल है गरम गरम।

सरला: वह बोली है कि वो शिवा से चुदवाएगी और वो भी कल। अभी आपको ओरल देने के लिए तय्यार है।

राजीव: चलो ये अच्छा ही है कि वो शिवा से सील तुड़वाएगी । वैसे भी चारु की सील तोड़ने में मुझे थोड़ा दिक़्क़त हुई थी। शिवा जवान है वही तोड़ेगा तो सही रहेगा।

सरला: जाओ आप अपना लौड़ा चूसवा लो आप। मैं यहाँ आपका इंतज़ार करती हूँ।

राजीव: अरे ऐसा थोड़े होगा तुम भी चलो ना अंदर । वह सरला का हाथ पकड़ा और अंदर ले गया। मुन्नी वहाँ बिस्तर पर बैठी थी। राजीव और सरला अंदर आए। राजीव मुस्कुराकर अपनी लूँगी खोल दिया। उसका लम्बा लौड़ा अभी नरम था और लटक रहा था। वो बिस्तर पर बैठा और मुन्नी को अपनी गोद में खींच लिया और उसे चूमने लगा। मुन्नी भी शर्मा कर उसकी छाती में मुँह छिपा ली। उसे सरला के सामने शर्म आ रही थी।

राजीव: सरला इसे तुम्हारे सामने शर्म आ रही है। इसकी झिझक दूर कर दो। वह सरला को अपने लंड की ओर इशारा करके बोला।

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Smoothdad
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Re: बहू नगीना और ससुर कमीना

Post by Smoothdad » 03 Nov 2017 17:45



सरला मुस्कुराई और बिस्तर पर आकर बैठ गयी। अब राजीव ने मुन्नी को गोद से उतारा और बग़ल में बिठा दिया। मुन्नी की सांसें तेज़ चल रही थी। राजीव ने उसका टॉप उतारा और ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियाँ दबाने लगा। उसका लौड़ा अब खड़ा होने लगा था। सरला ने उसे बड़े प्यार से पकड़ा और उसे मुठियाने लगी। फिर वो झुक कर उसके लौड़े को चूमने लगी। पूरी लम्बाई में चूमने के बाद वो उसके बड़े बड़े आंड भी चूम कर चाटने लगी। अब मुन्नी की झिझक भी कम होने लगी। वो अब राजीव के चुंबनों का जवाब देने लगी। राजीव के हाथ उसके ब्रा के अंदर जाकर उसके सख़्त अमरूदों का मज़ा ले रहे थे।

अब सरला बोली: लो मुन्नी अब तुम चूस लो।

मुन्नी अब बिना झिझके उठी और राजीव के पैरों के बीच आकर उसका लौड़ा हाथ में लेकर सहलाई और सरला की तरह ही उसे चूसने लगी। सरला ने उसकी ब्रा का हुक खोला और राजीव उसके सख़्त अमरूदों को दबाकर मस्ती से भर कर अपनी कमर उछालकर उसके मुँह को मानो चोदने लगा। सरला भी गरम हो कर राजीव के होंठ चूसने लगी। जल्दी ही राजीव एक हाथ से सरला के गाउन का ज़िपर नीचे किया और उसकी एक चूचि दबाने लगा और दूसरे हाथ से मुन्नी की चूचि बारी बारी से दबा रहा था।

मुन्नी अब ज़ोर ज़ोर से मुँह ऊपर नीचे करके उसका लौड़ा चूस रही थी। अब उसकी जीभ सुपाडे पर साथ ही घूम रही थी। अचानक राजीव आऽऽऽऽऽह करके अपना रस उसके मुँह में छोड़ने लगा जिसे वो मादक कमसिन पीते चली गयी। एक बूँद भी उसने नहीं छोड़ा और पूरा लौड़ा चाटकर साफ़ कर दी।

अब राजीव उसको लिटाया और उसके पाजामा को पैंटी के साथ उतार दिया। अब उसकी मासूम सी बुर को सरला को दिखाकर बोला: देखो क्या मस्त बुर है? ये ले लेगी शिवा का मूसल?

सरला ने उसकी बुर सहलाई और उसकी पूत्तियों को फैलायी और एक अंगुली डाल कर अंदर बाहर की। मुन्नी उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कर उठी। सरला: हाँ ले लेगी शिवा का मूसल, पर पहली बार का दर्द तो बर्दाश्त करना ही पड़ेगा। जैसे हम सबने बर्दाश्त किया था।

अब राजीव ने उसका हाथ हटाया और झुककर उसकी बुर पूरी लम्बाई में चाटा और फिर दोनों पैर उठाकर फैलाया और उसकी फाँकों को भी अलग करके अपनी जीभ और होंठ उसकी बुर के गुलाबी छेद में डाला और उसकी बुर की मस्त चुसाई करने लगा। अब कमरे में मुन्नी की आहें गूँजने लगीं। सरला ने भी उसके सख़्त अमरूदों को दबाया और उसके निपल्ज़ को मसला और मुन्नी उइइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽ कर के अपनी गाँड़ उछालकर अपनी बुर को चूसवाने लगी। उसने राजीव का सिर पकड़ा और उसे अपनी बुर पर दबाने लगी। अब वो उंन्न्न्न्न्न उन्न्न्न्न्न करके झड़ने लगी। राजीव उसका फ़ौवारे का मज़ा लेने लगा और उसका पूरा पानी पी गया। अब मुन्नी लस्त होकर बिस्तर पर पड़ी थी। राजीव और सरला ने उसे चूमा और उसके नंगे बदन पर चादर डाल दिया और सरला बोली: चलो अब तुम सो जाओ। गुड नाइट । राजीव भी उसे प्यार करके सरला के साथ बाहर ड्रॉइंग रूम में आकर बोला: चलो चारु की चुदाई देखते हैं ।

सरला: आप बैठो मैं देखती हूँ क्या चल रहा है।बेचारे आपके आने से झिझक ना जाएँ।

राजीव वहाँ बैठते हुए हँसकर बोला: चलो ठीक है तुम देख आओ।

सरला वहाँ जाकर दरवाज़ा खोली —

उधर शिवा चारु को लेकर कमरे में पहुँचा और उसको बिस्तर पर लिटा दिया और ख़ुद भी बिस्तर पर आकर लेट गया। फिर उसे चूमते हुए बोला: यार चारु तुम तो मस्त खिलाड़ी निकली । मैं तो तुमको कुँवारी मान रहा था पर तुम तो पापा से चुदवा चुकी हो।

चारु शर्मा कर: वो क्या है ना पापा मुझे बहुत उत्तेजित कर देते थे तो जब वो मुझे चोदना चाहे तो मैं मना नहीं कर सकी। वैसे भी कोलेज में मेरी सभी सहेलियाँ चुदवा चुकी है। इसलिए मैंने भी सोचा कि मैं भी क्यों इस मज़े से वंचित रहूँ। और फिर ये तो घर की ही बात है। कोई बदनामी का भी डर नहीं है।

इस पर शिवा बोला: सच में तुम बहुत समझदार हो जो कि पापा से ही चुदवा ली। पापा तो मज़े से और धीरे से चोदें होंगे ना। बाहर वाला होता तो बिना तुम्हारे दर्द का ख़याल किए तुम्हारी बुर चीथड़े कर देता।

चारु: हाँ पापा ने बड़े आराम से किया और मुझे ज़्यादा दर्द नहीं हुआ। अब सिर्फ़ बातें ही करोगे प्यारे जीजू या कुछ मज़ा भी दोगे । वो उसके होंठ पर अपने होंठ रखकर बोली।

अब शिवा भी उसके होंठ चूसने लगा। दोनों जवानी की मस्ती में भीगने लगे। थोड़ी देर बाद शिवा उसके कपड़े निकालने लगा और चारु भी उसके कपड़े खोलने लगी। जल्दी ही दोनों नंगे हो गए और शिवा उसको मस्त चूचियों पर टूट पड़ा। वो मस्ती में भरकर मज़ा लेने लगी। जब शिवा के हाथ उसकी गाँड़ पर पहुँचे तो वो उनको दबाकर उसकी पिछवाड़े में एक ऊँगली डाला।

चारु चीहुंक उठी और उसके मुँह से निकल गया: आऽऽऽऽह आप तो बिलकुल शकील अंकल की तरह कर रहे हो।

शिवा चौंक और बोला: ये शकील अंकल वही ना जो टेलर है? क्या तुम उससे भी चुदवा चुकी हो?

चारु : आऽऽऽह हाँ । पापा ने उनकी पोती को चोदा था और अंकल ने मुझे। वो भी पीछे ऐसे ही ऊँगली कर रहे थे।

शिवा सोचा कि ये मैंने उनसे तो ही सीखा है क्योंकि जब मॉ को शकील अंकल चोदते थे तो ऐसे ही एक ऊँगली उनकी गाँड़ में डालते थे। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ उसे सब याद आ रहा था। वो छिप कर सब देखता था।

अब शिवा बोला: ओह ऐसा तो पापा ने और किस किस से चुदवा दिया तुमको?

चारु: और कोई नहीं बस पापा और शकील अंकल से ही करवाई हूँ।

अब शिवा उसकी चूचियाँ चूसने लगा और फिर उसके साथ ६९ की पोज़ीशन में आ गया। दोनों अब करवट लेकर एक दूसरे के सामने थे पर उलटे थे। शिवा ने चारु की एक टाँग उठायी और उसकी कोमल मस्त बुर को सूँघने लगा। फिर बोला: उफ़्फ़्फ क्या मस्त गंध है तुम्हारी बुर की। फिर वो नीचे जाकर उसकी गाँड़ के छेद को भी सूँघा और मस्ती में आकर उसकी भूरि गाँड़ के कुँवारे छेद को अपनी जीभ से चाटने और कुरेदने लगा। उसकी एक ऊँगली उसकी बुर के अंदर बाहर होने लगी थी। अब चारु भी मस्ती में आकर उसका लौड़ा चूसने और चाटने लगी। वो उसके आंड भी चूस रही थी। चारु के हाथ शिवा के चूतरों पर थे और वो उनको दबाकर अपने मुँह की ओर खींच रही थी मानो कह रही हो मेरे मुँह को ज़ोर से चोदो। शिवा की कमर हिलने लगी और चारु भी अपनी कमर हिलाकर मस्ती से अपनी बुर चटवाने लगी। शिवा उसकी बुर चाटकर मस्ती से भर गया और उसके लौड़े ने प्रीकम छोड़ना शुरू किया जिसे चारु मज़े से उसे चाटकर पी गयी।

अब शिवा से नहीं रुका गया और वो उठा और चारु की टाँगो के बीच में आकर उसकी बुर में ख़ूब सा थूक लगाया और अपने लौड़े पर भी थूक मला । फिर उसने अपना सुपाड़ा उसके बुर के छेद में फँसाया और एक हल्का सा धक्का मारा और अपना आधा लौड़ा उसकी तंग बुर में पेल दिया। चारु आऽऽऽऽऽहह कर उठी।

फिर से शिवा ने एक धक्का मारा और पूरा लौड़ा अंदर डालकर उसके ऊपर छा सा गया। अब उसके मस्त मम्मों को दबाकर वो उसे काफ़ी मस्त किया और फिर अपने लौड़े को हिलाकर उसे चोदने लगा। पलंग ज़ोर ज़ोर से चूँ चूँ कर रहा था और बुर से फ़च फ़च की आवाज़ आ रही थी।

तभी हल्का सा दरवाज़ा खुला और सरला अंदर झाँकी और उसे चारु पर सवार शिवा दिखाई दिया जो पूरी शिद्दत से उसे चोद रहा था। चारु ने सरला को देखा तो वह शर्मा कर मुँह फेर ली। सरला चुपचाप वापस आयी और आकर राजीव के पास बैठी और बोली: उफ़्फ़क मस्त पलंग तोड़ चुदाई चल रही है अंदर आपके कमरे में।

राजीव उसकी जाँघ सहलाकर बोला: अरे दोनों जवान है मज़ा तो लूटेंगे ही।

उधर चारु बोली: उइइइइइइइइ चाची आयीं थीं झाँक कर वापस चलीं गयीं हैं।

शिवा हाँफते हुए: ह्म्म्म्म हम्म यहीं रुक कर चुदाई देख लेती। ह्न्न्न्न्न्न्न ।

चारु: उन्नन उन्नन आऽऽऽऽह हाऽऽऽय्यय । मैं गयीइइइइइइइइइइ।

शिवा जल्दी जल्दी धक्के मारता हुआ बोला: मैं भीईईईईई।


अब दोनों शांत नंगे पड़े हुए साँस क़ाबू में कर रहे थे। चारु को अपनी बुर में शिवा का गीला मसाला बहुत अच्छा अहसास दे रहा था । वो बोली: उफ़्फ़्फ़्फ आप कितना माल डाल दिए हो अंदर? पापा का इतना नहीं निकालता।

शिवा : हाँ जवान आदमी का माल ज़्यादा होता है ना। पापा अब मेरे से २६ साल तो बड़े हैं ना। वैसे पापा पिल्ज़ तो दिए होंगे ना खाने के लिये वरना कहीं परेगनेंट ना हो जाओ।

चारु: हाँ दिए हैं और समझा दिया है कि कैसे खाना है।

फिर पता नहीं क्या हुआ शिवा को, कि वो ज़ोर से आवाज़ दिया: मम्मी ज़रा आइए ना।

चारु उठने लगी। तो वो उसे पकड़कर नीचे लिटा दिया।

अब सरला और राजीव अंदर आए और नंगेबदन लेटे हुए जोड़े को देखकर मुस्कुराए। चारु शर्मा रही थी पर शिवा बेशर्म सा अपना लम्बा लौड़ा एक तरफ़ को लटकाकर लेटा हुआ था। चारु ने अपनी जाँघें जोड़ ली थी।

शिवा: मम्मी चारु की बुर में मेरा माल पड़ा है उसे साफ़ कर दीजिए ना प्लीज़।

सरला मुस्कुराई और आकर चारु की जाँघें फैलायीं और उसके बीच बुर से बाहर आते हुए शिवा के वीर्य को देखकर बोली: आऽऽऽऽह क्या माल गिराया है बेटा तुमने? वो हाथ बढ़ाकर ऊँगली से उसका माल छुई और ऊँगली को मुँह में लेकर बोली: उम्म्म्म्म्म मस्त है।

फिर वो झुकी और उसकी बुर चाटने लगी । वो जीभ निकालकर एक एक बूँद चाट ली।

राजीव पास ही खड़ा सरला की हरकत को देख रहा था। जैसे ही चारु की बुर साफ़ करके सरला उठी वो बोला: अरे और शिवा का ये गीला लौड़ा कौन साफ़ करेगा?

सरला भी मुस्कुराई और अब खिसक कर शिवा के टांगों के पास आकर उसका नरम लौड़ा चाट कर साफ़ करने लगी और उसमें लगा रस साफ़ कर दी। फिर चटकारा लेकर बोली: म्म्म्म्म्म मस्त मज़ा आ गया। बड़ा स्वाद रस है तुम्हारा बेटा।

अब चारु उठकर बाथरूम को भागी और शिवा ने सरला को अपने ऊपर खिंचा और उसके होंठ चूसने लगा। राजीव अभी भी बिस्तर के पास खड़ा मुस्कुरा रहा था। वो हाथ बढ़ाकर सरला की मोटी गाँड़ दबा दिया। तभी चारु बाहर आइ और अपने कपड़े की तरफ़ हाथ बधाई। राजीव उसे पकड़ लिया और बोला: बेटी अभी से कपड़े पहन रही हो। तो इसका क्या होगा? वो अपनी लूँगी निकाल कर अपना लौड़ा हिलाकर बोला। फिर वो उसे अपने पास खींचा और उसका हाथ अपने लौड़े पर रख दिया। कमसिन जवानी गरम लौड़े को छूते ही मस्त होने लगी। राजीव बोला: शिवा ज़रा खिसक ना। मैं भी चारु की लूँगा अभी।

शिवा हँसकर सरला के साथ लिपटा हुआ दो बार करवट लेकर बिस्तर के दूसरे कोने में चला गया और राजीव चारु को लेकर बिस्तर पर आ गया।

अब बिचारा पलंग दो दो जोड़ों की चुदाई झेलने वाला था। ———

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