चुदाई घर बार की complete

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Jemsbond
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चुदाई घर बार की complete

Post by Jemsbond » 17 Nov 2016 22:59

चुदाई घर बार की

फ्रेंड्स ये कहानी आपके लिए शुरू कर रहा हूँ किसी और ने लिखी है मैं सिर्फ़ इस साइट पर पोस्ट कर रहा हूँ
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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
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चुदाई घर बार की complete

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Jemsbond
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Re: चुदाई घर बार की

Post by Jemsbond » 17 Nov 2016 23:14

अबू...असलम शाह उम्र 48 है एक सेहत मंद और मज़बूत जिस्म के मलिक जो की सारा दिन खेती बड़ी मैं लगे रहते हैं और बड़े ही खुले ज़हन के मालिक जिस से हम लोग काफ़ी फाइयदा भी उठाया करते

अम्मी रहना उम्र 42.... रंग गोरा और बिल्कुल फिट और बहार को निकली हुयी गांड की मलिक जो की अम्मी को और भी ज़्यादा खूबसूरत और सेक्सी बनाती है

फरिहा .... (पर सब लोग उसकी फरी कहते हैं) मेरी बड़ी बहिन... उम्र 22... अभी शादी नहीं हुयी, बाजी का साइज़.... 34... 30 36 है जो की जान निकल दे किसी भी जवान और बूढ़े की

फ़रीदा बाजी. उम्र 20 है उन की भी शादी नहीं, हुयी अभी तक और वो भी फरिहा बाजी की तरह घर का काम संभालती हैं और अम्मी अबू के साथ खेत संभालती हैं और बाजी की तरह गोरी और सेक्सी जिस्म की मलिक

फ़रज़ाना...19 की है सब से ज़्यादा घर भर मैं मुँहफट और सेक्सी जिस्म की मलिक जिसे देखते ही किसी का भी लण्ड खड़ा हो जाए

मैं....जैसा की आप को पहले ही बता चुका हूँ क मेरा नाम वक़ास (विकी) है और मेरी उम्र 18 है और मैं अब गावँ से शहर आ चुका हूँ पढ़ने क लिए जहाँ मैं पढ़ने के साथ जिम भी जाता हूँ आपनी बॉडी बनाने क लिए मेरी हाइट 6 foot है और सीना चौड़ा गोरी रंगत के साथ मेरी सब से बड़ी कमज़ोरी ये है की मैं जितना हॅंडसम दिखता हूँ उतना ही संकोची, मैं किसी भी लड़की से बात नहीं कर पता पता

तब तक तो सब ठीक था जुब तक मैं गावँ मैं रहके पढ़ता था लेकिन 10 तक बाद गावँ मैं आगे की पढ़ाई के लिए कोई चान्स नहीं था तो मुझे अबू ने मजबूरी मैं मुझे आगे पढ़ने के लिए गावँ से शहर भेज दिया जहाँ मुझे एक बॉयस हॉस्टिल मैं रहना और करीब ही कॉलेज मैं पढ़ने जाना होता था मेरे आलावा घर मैं कोई भी शहर तक पढ़ने नहीं गया था तो कुछ इस लिए भी घरवाले , जुब मैं घर आता तो मेरा बड़ा ख्याल करते मेरी मेरी बाहरने १० से आगे नहीं पढ़ी थी और सब से छोटी फ़रज़ाना जो की डाइजेस्ट और नॉवेलस की दीवानी थी मैं जुब भी घर आता तो उसक लिए ढेर सारे डाइजेस्ट और नॉवेल लाया करता जिस की वजह से फ़रज़ाना की मेरे साथ काफ़ी जमती भी थी

हॉस्टिल मैं मेरे कई फरन्डस भी बन चुके थे जिन मैं सलीम मेरा सब से ज़्यादा करीबी दोस्त था क्योंकि वो भी मेरे ही गावँ का था लेकिन था एक नंबर का रंडी बाज़ और हर वक़्त मुझे भी इन सब चीज़ों मैं अपने साथ ही घसीटे रखता जिस मैं मुझे भी मज़ा आता लेकिन जुब भी सलीम मुझे किसी लड़की से मिलवाता तो मेरी फटने लगती और बोलती बंद हो जाती

ये नहीं था की मैने कभी कुछ किया नहीं सलीम क साथ मिल के मैं अक्सर ब्लू फिल्म भी देखता और मूठ भी मारता और 2 3 बार सलीम के साथ उसक एक दोस्त के घर जाके और पैसे मिलाक बाज़ार से रंडी लाते और चुदाई भी कर लिया करते थे लेकिन उस मैं भी मेरी जान निकली जा रही होती

इसी तरह दिन गुज़र रहे थे की हुमारी गर्मियों की छुट्टियां करीब आ गईं और कॉलेज बंद होने वाले थे 40-50 दिन तक के एक दिन सलीम ने मुझे कहा की शहज़ादे क्या ख्याल है गावँ जाने से पहले कुछ मज़ा ना कर लिया जाए किसी के साथ फिर तो गावँ मैं ही किसी को पकड़ेंगे

मैं.... यार तुम तो जानते ही हो की मुझे से नहीं होता ये सब और ऊपर से गावँ मैं तो कभी भी नहीं वहाँ अगर किसी क साथ छेड़छाड़ की तो लोग मार मार कर गांड फाड़ देंगे अपनी

सलीम.... साले तो क्या समझता है की ये सब यहाँ शहर मैं ही होता है नहीं जानी अपना गावँ इस से भी आगे है इन कामों मैं मैं... चल यार बेकार की बात नहीं करता है मैं , मैं भी तो तेरे साथ ही वहाँ गावँ मैं रहा हूँ मुझे तो कुछ भी पता नहीं चला क वहाँ भी ऐसा कुछ होता हो

सलीम... साले तेरे घर वालों ने तुझे भी लड़की बना के रखा हुआ था बस स्कूल और उसके बाद सीधा घर बहार भी नहीं निकालने देते और स्कूल मैं भी तेरे लिए सब से अलग बैठने की जगह और किसी से बात करने और दोस्ती की इजाज़त नहीं होती थी फिर तुझे पता कैसे चलता

मैं... हाँ यार ये तो है लेकिन फिर भी गावँ मैं इस से ज़्यादा क्या होता होगा जो यहाँ कर सकते हैं

सलीम... विकी क्या तूने ने कभी सोचा है की तेरे घरवाले तुमको बहार किसी से मिलने और दोस्ती करने कयूं नहीं देते मैं... यार बस इसलिए की मैं उन का एक ही लड़का हूँ और वो नहीं चाहते की मैं बिगड़ जाओं
सलीम चल, इस बार गावँ जाने के बाद तो अगर कोशिश करके बहार निकल सके तो मेरे पास आ जाना मैं तुम्हे ऐसा काम भी अपने गावँ का बतऊँगा और दिखूंगा की तू तो यक़ीन ही नहीं करेगा
उसके बाद सलीम मेरे पास से उठ के चला गया और मुझे सोच मैं पढ़ गया की आख़िर गावँ मैं ऐसा क्या है जो सलीम मुझे दिखना और बताना चाहता है लेकिन इसके साथ मुझे जो कभी कभार चूत मिल जाती थी पैसों से ही सही अब 2-3महीने तक नहीं मिलेगी, और गावँ में मुठ मरूँगा

कॉलेज के छुट्टियां गो गई तो मैं और सलीम एक ही गांव के रहने वाले थे इसलिए एक साथ ही हॉस्टिल से निकले और बस स्टॉप की तरफ चल पड़े जहाँ से हुमारे गावँ की बस मिलना थी

जब हम बस स्टॉप पहुंचे तो पता चला क अभी बस आने मैं थोडा टाइम बाकी है

और स्टॉप पर भी कोई 2 3 लोग ही बैठे थे बस के इंतज़ार मैं तो हम दोनो भी वहाँ बैठे लोगों से ज़रा हट के बैठ गये और बस का इंतजार करने लगे की तभी सलीम बोला यार विकी अगर हो सके तो शाम को मेरी तरफ आ जाना

मैं....कहा भाई कोई ख़ास बात है जो तो अभी नहीं बता रहा और शाम मैं आने को बोल रहा है

सलीम... हाँ यार मैं सोच रहा हूँ की आज की शाम थोडा अंधेरा होते ही तुझे भी अपने गावँ की चुत का रस चखा ही दूँ

मैं... थोडा हैरानी से सलीम की तरफ देख के बोला क्या मतलब् मैं समझा नहीं,क्या तूने ने पहले ही से किसी को पटा रखा है

सलीम.... यार पटाई तो कई हैं लेकिन आज जिस के साथ तुझे ऐश करवाऊंगा वो कुछ खास है

और उसके साथ करने से तुझे दुनिया मैं होने वाली कई घटनाओ के बारे भी पता चल जाएगा,समझा

मैं... यार ऐसी क्या बात है उस मैं, क्या वो कोई टीचर है जो मुझे चुदाई का ज्ञान सीखने वाली है

सलीम... ऐसा ही समझ ले लेकिन याद से आ जाना कहीं बाद मैं ये ना हो की तेरा बाप तुझे निकालने ही ना दे घर से

मैं... सलीम की बात सुनके चुप हो गया और बोला तो उस ने सच ही था की अबू मुझे फज़ूल बाहिर जाने से मना किया करते थे खैर मैने मन मार के कहा नहीं यार तू फिकर ना कर मैं शाम से भी पहले ही आ जाऊंगा तेरे पास और तेरी टेचर को भी तो देखना है

सलीम... मेरी बात सुनके हंस पड़ा और बोला चल ठीक है लेकिन आते वक़्त 500 पॉककीट मैं दाल के आना कहीं ये ना हो की तेरे सामने आने से भी मना कर दे साली ऐसी ही है

मैने सलीम की बात के जवाब मैं अपना सर हन मैं हिला दिया और फिर उसके बाद हमारे बीच कोई बात के नहीं हुयी और हम बस आने क बाद बस मैं बैठे और गावँ की तरफ चल पड़े और गावँ मैं पहुच के सलीम ने बस इतना कहा विकी याद से आ जाना शाम को मेरी तरफ और अपने घर की तरफ निकल गया और मैं वहाँ से अपने घर की तरफ चल दिया

मैं जैसे ही घर मैं दाखिल हुआ तो 11 बाज रहे थे दिन के और मुझे घर मैं कोई भी नज़र नही आया तो जैसे ही मैं थोडा सा आगे हुआ तो

मुझे फ़रज़ाना नज़र आ गई जो की बैठी बर्तन धो रही थी और जैसे ही उस की नज़र मेरे पर पड़ी वो बर्तन छोड़ के चिल्लाती हुयी मेरे तरफ लपकी और भाई आ गया की आवाज़ भी निकलती मेरे सीने से लगगई

काफ़ी ज़ोर से फ़रज़ाना के यूँ सीने से लगने की वजा से उसके चूची जो की बिना ब्रा के ही थे (जो मुझे लगा ) मेरे सीने से पर टच हो रहे थे और फिर फ़रज़ाना ने मुझे पूरी तरह से अपने गले लगा लिया तो मने ने भी अपनी बहिन के गले मैं अपने बाज़ू लपेट लिए.

जिस से फ़रज़ाना की चूचियां पुरो तरह मेरे सीने से रगड़ खाने लगी

कुछ तो सारे रास्ते सलीम की बातों ने और आज मिलने वाली चूत ने पागल किया रखा था ऊपर से जब फ़रज़ाना इस तरह से मेरे सीने से लगी तो मेरा लण्ड जो की खड़ा होने के लिए बस इशारा ही माँग रहा था खड़ा होने लगा

और जैसे ही मेरे लण्ड ने अपना सर उठाके ,फ़रज़ाना मेरी बहिन की जांघों को छुआ तो, मैने झटके से फ़रज़ाना को खुद से अलग किया और बोला की बताओ चुड़ैल बाकी घरवाले कहाँ हैं

तो तभी मुझे फरीह बाजी रूम से बहार आती दिखाई दी और मुझे देख के बोली आ गया मेरा भाई चल आ जा अंदर कब तक यहाँ बहार धूप मैं खड़ा रहेगा

बाजी की बात सुन के मैं आगे बढ़ा तो फ़रज़ाना, जो की मेरे पास ही खड़ी थी झट से मेरे हाथ से बैग पकड़ते हो बोली लाओ भाई ये मुझे पकड़ा दो आप काफ़ी तक गये होगे

बाजी.... विकी पकड़ा दे इसे अपना बेग नहीं तो ये फाड़ देगी. इसमैं इसके डाइजेस्ट और नॉवल हैं जिनके लिए पागल हो रही है

मैं... हाँ बाजी ये तो है और इतना बोलते ही अपना बेग फ़रज़ाना को पकड़ा दिया और खुद बाजी और फ़रज़ाना के साथ रूम मैं आ गया
रूम मैं आते ही मैं चारपाई पे बैठ गया तो फ़रज़ाना ने मेरा बेग. दूसरी चारपाई पे रख दिया और खुद बेग पे झुक गई और खोलने लगी तो तब पहली बार मेरी नज़र फ़रज़ाना की गांड पे गई जिस पे से क़मीज़ हटी हुई थी और उस की सलवार की आस उसकी गांड की लाइन मैं फाँसी हुयी थी
जिसका फ़रज़ाना को भी होश नहीं था कि वो जब बर्तन धोने बैठी होगी तो उस ने अपनी क़मीज़ को साइड मैं कर दिया और सलवार मैं अटका दिया होगा की नीचे गिर के खराब ना हो कयुँकि घर मैं 3नो बहनो के अलावा और तो कोई था नहीं
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Jemsbond
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Re: चुदाई घर बार की

Post by Jemsbond » 17 Nov 2016 23:15

मुझे इस तरह फ़रज़ाना की गांड को घूरता, बाजी ने भी देख लिया और फ़रज़ाना से बोली चल फ़रज़ाना जा यहाँ से और बाकी का काम ख़तम कर तब तक मैं तेरे डाइजेस्ट निकल के रखती हूँ बाद मैं ले लेना

फ़रज़ाना बाजी की बात सुनके बुरे बुरे मुँह बनाती रूम से निकल गई तो बाजी मुझे बड़ी गहरी नज़र से देखती हुए बोली लगता है हमारे भाई को शहर वालों ने काफ़ी ज़्यादा जवान कर दिया है

मैं बाजी की बात सुन क थोडा घबरा गया और बोला ज..जीए बाजी क्या मतलब मैं समझा नहीं कुछ

बाजी मेरी बोखलाहट से थोडा लुत्फ़ लेते हो बोली यार मेरा मतलब था की शहर से काफ़ी हॅंडसम (सोहना ) होके आया है और हहेहेहेहेहहे कर के हँसने लगी और फिर मेरे सामने चारपाई पे बैठ गई और बेग मैं से समान निकालने लगी जो की मैं लाया था अपने साथ

मैने बाजी की तरफ डरते हो देखा (की मुझे लग रहा था की बाजी ने मुझे फ़रज़ाना की गांड को घूरता देख लिया है) और बोला बाजी फ़रीदा कहाँ हैं नज़र नहीं आ रही कहीं

बाजी ने सर उठा के देखा और बोली की कोई खास काम है फ़रीदा के साथ वैसे वो साथ वालों के घर गई है अभी आ जाएगी


मैं बाजी से नज़र नहीं मिला पा रहा था इस लिए उठा और बाजी को बोला के आप देखो सामान,

मैं ज़रा नहा के आता हूँ और रूम से निकल गया और बात रूम मैं जा घुसा और नहाने लगा

जब मैं नहा के आया तो फ़रीदा बाजी भी आ चुकी थी और जैसे ही मैं वापिस रूम मैं आया तो फ़रीदा बाजी भी मुझे लिपेट गई और साथ ही मेरे गालों पे किस भी कर दी (एक बहिन की तरह )

फरी बाजी जो की ये सब देख रही थी बड़े अजीब से अंदाज़ मैं हँसने लगी जिस की मुझे कुछ खास समझ तो नहीं आयी लेकिन मैने जल्दी से बाजी फ़रीदा को खुद से अलग किया और चारपाई पे बैठ के उनसे बात करने लगा .

दोपहर को खाने के समय अम्मी भी घर आ गई और फिर उनसे मिल के मैने खाना खाया और सोने के लिए लेट गया कोई 4.30 पे उठा तो तब तक मेरी बहने भी जाग चुकी थी मैने भी फिर से नहा के कपड़े बदले किए और खेतों की तरफ चल दिया
मैं अभी तक अपने अबू से नहीं मिला था उन से भी मिलना था और साथ ही थोडा टाइम भी पास हो जाता

खेतों मैं जाके मैं अबू से मिला और उनके हाल चाल लिया उसके बाद खेतों मैं घुमा फिरा,काफ़ी टाइम के बाद मैं अपने गांव मैं आया था

इसलिए और फिर वहाँ से शाम क 5.30 पे वापिस निकालने लगा तो अबू से डरते हो कहा अबू अगर आप इजाज़त दें तो मैं थोड़ी देर गांव मैं घूम फिर के आऊं . उसके बाद घर चला आ जाऊंगा

अबू ने मुस्कुराते हो मेरी तरफ देखा और बोले ठीक है बेटा लेकिन गांव मैं किसी क साथ ज़्यादा बोलने की या दोस्ती की ज़रूरत नहीं है

मैने हाँ मैं सर हिला दिया और खेतों से निकल के सलीम के घर की तरफ चल दिया और जब मैं उस क घर पहुंच तो देखा की वहाँ ताला लगा हुआ था और घर मैं कोई भी नहीं था

मैं जब वहाँ से वापिस निकालने लगा तो साथ की दुकान वाले ने कहा क्या तुम सलीम से मिलने आए थे तो मैने हाँ मैं सर हिला दिया तो वो बोला की तुम ऐसा करो खेतों मैं चले जाओ वो मुझे बोल गया था की उसका की दोस्त आये तो खेतों मैं भेज देना और फिर से अपने काम मैं लग गया

दुकान वाले की बात सुनके मैं सलीम के खेतों की तरफ चल दिया जो की हमारे खेतों से नज़दीक ही थे और जब मैं वहाँ पहुंच तो सलीम किसी के साथ बतिया रहा था .

मुझे आता देख के सलीम खड़ा हो गया और मेरे नज़दीक आते ही बोला क्या बात है आ गया तो वैसे मुझे उमीद नहीं थी की तेरे घर वाले तुझे घर से निकालने देंग चल आ जा बैठ यहाँ

मैं आगे बढ़के चारपाई पे ही बैठ गया तो सलीम ने अपना हाथ मेरी जांघ पे रख के हल्का सा दबा दिया और बोला इस से मिल ये भी अपना यार है और आज का मज़ा भी ये ही ही करवाईएगा

मैने साथ की चारपाई पे बैठे 22 23 साल के लड़के की तरफ देखा और अपना हाथ उस की तरफ बडा दिया मिलने के लिए तो उस ने जल्दी से मेरा हाथ थाम लिया और बोला जी बड़ी खुशी हुयी आप से मिल कर

मैं थोडा सा घबरा भी रहा था उस वक़्त इस लिए कुछ नहीं बोला तो सलीम जो की मेरी हालत को समझ रहा था बोला यार विकी ये नॉमी है अपने ही गावँ का है लेकिन है एक नम्बर का हरामी साला अपनी बहिन को खुद भी चोदता है और धंदा भी करवाता है ये हरामी

सलीम की बात सुनते ही जैसे मुझे झटका सा लगा और मैने अपना सर घुमाके एक बार नॉमी और फिर सलीम की तरफ देखा तो सलीम हंस पड़ा और नॉमी की तरफ देख के बोला चल जा अब मेरा यार आ गया है जल्दी से लेके आजा अपनी बहिन को
फिर मेरी तरफ देख के बोला चल विकी इसे 5,00 दे दे

मैने कोई बात नही की और खामोशी से नॉमी को 5,00 पकड़ा दिए तो वो खड़ा हो गया और बोला बस 15 मिनट मैं ले के आता हूँ आप लोग यहाँ ही बैठो और जल्दी से वहाँ से खिसक गया

नॉमी के जाते ही मैने सलीम की तरफ देखा और बोला यार ये अभी तो क्या बोल रहा था की ये अपनी ही बहिन से..................

सलीम... मेरी जांघ पे ज़रा ज़ोर से हाथ मारते हुए बोला मेरे भोले बादशाह तू कौन से ज़माने मैं जी रहा है आज कल तो हर लड़की अपने घर मैं ही लण्ड का मज़ा लेने की कोशिश करती है और उसके बाद बाहर की तरफ निकलती है फिर घर वालों का डर ख़तम हो जाता है

मैं... नहीं यार सलीम ऐसा भला कैसे हो सकता है की एक भाई अपनी ही सग़ी बहिन के साथ (ये सब बोलते वक़्त मुझे फ़रज़ाना की गांड का जो नज़ारा मिला था आज भले ही सलवार मैं ही उसकी याद आ गई और मेरा लण्ड खड़ा होने लगा) जिसे सलीम भी महसोस कर चुका था

सलीम.... देख यार मेरा तो ये मानना है की लड़की चाहे बहिन हो या बेटी जब जवान हो जाए तो उसे अपने ही लण्ड का मज़ा देना चाहिए अगर हम नहीं चोदेंगे तो वो बहार से चुदवागी और हमारा लण्ड खरा कर के चली जायेगी बाकी दुनिया की माँ की आँख

मैं... लेकिन फिर भी यार सलीम भला कौन इतनी हिम्मत कर सकता है की अपनी बहिन के साथ नहीं यार मैं नहीं मान सकता

सलीम... छोड़ यार किन बातों मैं लग गया तू भी नॉमी आ जाता है तो खुद ही देख लेना किस तरह वो अपनी बहिन को नंगा करके हम से अपने सामने चुदवायेगा.

उसके बाद हम दोनो ने कोई बात नहीं की, नॉमी के आ जाने तक और जब नॉमी आया तो उसके साथ एक २१ शाल की लड़की भी थी(मेरा अंदाज़ा) जिस का फेस काफ़ी हद तक नॉमी से मिलता था जिस से मुझे यक़ीन होने लगा की ये दोनो सच मैं बहिन भाई ही हैं और मैं इस बात से काफ़ी हेरान भी हो रहा था

नॉमी हमारे पास आते ही अपनी बहिन को बाज़ू से पकड़ के हमारी तरफ ढकेल दिया

बोला चल रीदा आज तुम ने मेरे इन दोस्तों को खुश करना है रीदा.....

जो की नॉमी की बहिन थी आराम से हम दोनो के पास आ क खड़ी हो गई
मेरी तरफ देख के बोली अरे आप विकी भाई हो ना फरी बाजी के छोटे भाई जो शहर मैं पढ़ते हो

मैने हाँ मैं सर हिला दिया लेकिन बोला कुछ नहीं वसे तो मैं डर गया की अबकहीं घर पे पता ना चाल जाय तो सलीम शायद समझ गया तो सलीम ने रीदा को बाज़ू से पकड़ क अपनी तरफ खींचा और सीधा उसके चूची को पकड़ लिया और बोला साली ये जान पहचान का वक़्त नहीं है अभी

जल्दी से अपने कपड़े उतार और चुदवाने ले लिए तैयार हो जा जल्दी से

सलीम की बात सुनके जहाँ नॉमी आगे बढ़ा रीदा की तरफ और उस की क़मीज़ उतरने लगा

वहीं मेरा लण्ड जो की ८ इंच का था फुल टाइट हो के झटके खाने लगा और सलीम भी बड़े आराम से अपने कपड़े उतरने लगा और मुझे भी कपड़े उतार क नंगा हो जाने के लिए बोला

मैने भी जल्दी से अपने कपड़े उतार दिए और नंगा हो गया तब तक रीदा को भी उस के भाई ने नंगा कर दिया था और अब साइड की चारपाई पे बैठ चुका था और सलीम भी नंगा हो चुका था

अब रीदा हम दोनो क बीच खड़ी हुमारी तरफ देख रही थी और नॉमी उस का भाई साइड मैं बैठा हम 3नो की तरफ ही देख रहा था की तभी सलीम ने रीदा को बोलों से पकड़ के नीचे की तरफ झुका दिया और बोला चल साली हमारे यार का लण्ड अपने मुँह मैं भर के चूस सलीम के झुकाने से रीदा नीचे बैठ गई और फिर बड़े प्यार से मेरे लण्ड को अपने हाथ मैं पकड़ के बोली .

आह कितना बड़ा लण्ड है, ऐसा तो गांव मैं किसी का नहीं है भाईजान और अपने होंठ मेरे लण्ड के सुपाड़े पे रखी और हल्की सी किस कर दी, उसकी एस बात से उसका भाई हंस दियाऔर मेरे लंड लो तरफ देखने लगा

रीदा के ऐसा करते ही मेरे सारे जिस्म मैं झुरजुरी सी होने लगी और मैं मज़े से बहाल होने लगा .
मैने आज तक जिस किसी औरत के साथ भी किया था उस ने कभी मेरे लण्ड को इस तरह प्यार नहीं किया था

मुझे इस तरह मचलता देख के रीदा ने अपना मुँह खोला और आहिस्ता से मेरा लण्ड अपने मुँह मैं भर लिया जो की बस सुपाड़े से थोडा ज़्यादा ही उस के मह मैं जा सका होगा और वो उसे ही बड़े आराम और प्यार से इन आउट करने लगीथोड़ी देर तक रीदा मेरे लण्ड को इन आउट करती रही और फिर मेरे लण्ड को छोड़ के सलीम के लण्ड को जो की मेरे लण्ड से से थोडा छोटा लेकिन काफ़ी पतला था मुँह मैं ले के चूसने लगी
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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
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Re: चुदाई घर बार की

Post by Jemsbond » 17 Nov 2016 23:15

थोड़ी देर के बाद सलीम ने उसे बलों से पकड़ के खड़ा किया और चारपाई पे धक्का दिया तो वो चारपाई पे गिर गई तो सलीम ने कहा चल यार पहले तेरी बारी है इस की चूत मरने की

मैने सलीम की बात सुन के रीदा की तरफ देखा जो की अपनी टाँगे फेला के मेरी तरफ ही देख रही थी तो मैं थोडा आगे हुआ और रीदा की टाँगों को पकड़ के ज़रा सा और खोल दिया और

फिर अपना लण्ड रीदा की चूत के सोराख पे रख के आहिस्ता से अंदर घुसने लगा तो रीदा आआहह विकी जी ए झटके से पूरा घुसा डालो अपना लण्ड मेरी चूत मैं बहुत मोटा और तगड़ा लंड है आपका

हेहेहे मज़ा आ जायेगा आज एस लंड से चुदने मैं..

मैने रीदा की बात सुनते ही अपने लण्ड को जो की 3,इंच से ज़्यादा ही रीदा की चूत मैं घुस चुका था झटके से बाहर खींचा और पूरी ताक़त से रीदा की चूत मैं घुसा दिया

लंड के घुसते ही रीदा के मुँह से आआहह की आवाज़ निकली और साथ ही उस ने मुझे अपने साथ लिपटा लिया और मेरे कान के पास आहिस्ता से बोली विकी मुझे से बाद मैं मिलना बात करनी है तुम्हारे साथ

उनम्म्मह मेरी जानं ननणणन् फाड़ डालो मेरी चूत को क्या लण्ड है ज़ालिम तेरा ऊऊओह हान्ंनणणन्
बस इसी तरह छोड़ूऊऊऊऊ की आवाज़ क साथ अपनी गांड को भी नीचे से मेरे लण्ड की तरफ उछालने लगी

मुझे ज़िंदगी मैं पहली बार चुदाई का इतना मज़ा आ रहा था जिस की वजह से मैं ज़्यादा देर अपने आप को कंट्रोल नहीं कर पाया और ८-१० मिनट मैं ही रीदा की चूत को अपने लण्ड से निकले पानी से भर दिया और फिर साइड मैं बैठे रीदा के भाई के पास जा के लेट गया और लंबी साँस लेने लगा

मेरे बाद सलीम ने रीदा की चूत मारी और फिर हम ने अपने कपड़े पहन लिए और सब लोग घरों की तरफ चल दिए


सलीम और मैं एक साथ ही खेतों से घर की तरफ निकले
नॉमी अपनी बहिन के साथ अलग चला गया तो सलीम ने मुझे चुप चलते और कुछ सोचते हो देखा तो मेरे कंधे पे अपना बाज़ू रख दिया और बोला यार क्या सोच रहा है कुछ तो बात कर ना यार

मैने सर घुमा के सलीम की तरफ देखा और बोला यार मुझे अभी तक यक़ीन हो रहा कि कोई बहिन भाई ऐसे भी हो सकते हैं दुनिया मैं जो इस तरह का रीलेशन भी रखते हूँ आपस मैं .

सलीम ने मुझे थोडा सा अपनी तरफ खींचा और बोला यार तू कितनो की फ़िक्र करता है जो जहाँ है उसे वहीं रहने दे तो बस चूत मार और मज़ा कर तुझे क्या लेना का .चूत किस की है और वो किस किस से चुदवाती है

सलीम की बात सुन के

मैने हाँ मैं सर हिला दिया

उस के बाद घर तक हमारे बीच कोई बात ना हुयी और फिर गावँ मैं आते ही मैं अपने घर की तरफ चल दिया .

रात के 8 से ऊपर का समय हो रहे था और अभी तक मैं घर नहीं पहुंचा था

कभी ज़्यादा देर तक घर से बाहर नहीं रहा था तो अभी थोडा डर भी लग रहा था की पता नहीं घरवाले कितना परेशान हो रहे होंगे

मैं घर पहुंचा तो अबू जो की अक्सर खेतों मैं ही रहा करते थे वो भी घर पे ही थे

और मुझे देखते ही बोले आ गया मेरा बचा कहाँ रह गया था इतनी देर तक घर नहीं आया.

मैं भी अबू के पास ही जाके बैठ गया और बोला वो अबू ज़रा सलीम के साथ उस के खेतों की तरफ चला गया था

वहाँ ही थोड़ी देर लग गई मुझे मैं अब कोशिश करूँगा की ज़्यादा देर घर से बाहर ना रहा करूँ

मेरी बात सुन के अबू ने कहा देखो बेटा बात ये नहीं है की ,तुम पे भरोसा नहीं है या कुछ और बस बेटा

तुम तो जानते ही हो की हमारा इस गांव मैं या दुनिया मैं कोई भी अपना नहीं है और ऊपर से तुम हमारे एक ही बेटे हो जिस की वजाह से हम घबराते हैं की कहीं तुमको कुछ हो ही ना जाए

अम्मी जो की अबू के पास ही बैठी थी उठी और मेरे पास आ के बैठ गई और मेरे सर पे हाथ फेरते हो बोली देखो बेटा तुम ही तो हमारा सब कुछ हो अगर तुम्हे किसी भी चीज़ की ज़रूरत है तो हमें बताया करो

हम तुम्हे दिया करेंगे लेकिन बाहर लड़कों से दूर रहो

मैने हंस के सर हिला दिया और चुप बिठा गया

लेकिन उस वक़्त मैने दिल मैं पक्का इरादा कर लिया था की अब मैं कभी सलीम क पास नहीं जाया करूँगा

जिससे मेरे अम्मी और अब्बू को परेशानी हो और अब अपने घर पे या खेतों मैं अबू के पास ही रहा करूँगा

उसके बाद सब ने मिल के खाना खाया

मेरे इंतज़ार मैं अभी तक घर मैं किसी ने भी खाना नहीं खाया था उसके बाद थोड़ी देर तक बैठे गप सप करने के बाद सब सोने को चल दिए

सारा दिन सफ़र और शाम को चुदाई से भी थोड़ी थकावट हुयी थी तो मैं बड़ी गहरी नींद सोया,

कयुँकि मैं रूम मैं सोता हूँ तो जब मेरी आँख खुली तो देखा की 7.30 हो चुके थे

मैं जल्दी से उठा और नहाने के लिए बाहर गुसलखाने मैं जा घुसा और जब नहाके बाहर आया तो देखा की घर मैं बाजी फरी और फरीदा ही थी

अम्मी अबू के साथ खेतों पे जा चुकी थी और फ़रज़ाना अपने डाइजेस्ट ले के साथ मैं सहेली के घर जा चुकी थी

मेरे नहाके आते ही बाजी फरी ने कहा विकी तुम चलो रूम मैं बैठो

ज़रा मैं अभी नाश्ता ले के आती हूँ और जब बाजी मेरा नाश्ता ले के आयी तो बाजी ने दुपटा नहीं लिया हुआ था और बाजी मेरे लिए नाश्ते मैं देसी घी के परौठे और अंडा बना के लाई थी साथ मैं गढ़ा मलाई वाला दूध भी था जो की पहले कभी इस टाइम नहीं मिला करता था मुझे

मैने सर उठा के देखा तो मुझे बाजी की क़मीज़ जो की काफ़ी पतली थी उन मैं से बाजी की बूबस की निपेलस हल्के से नज़र आ रही थी जो की खुद मेरे लिए एक झटका था कयुँकि बाजी ने कभी घर मैं मेरे सामने बिना दुपते के नहीं घुमा था और आज तो कपड़े भी इतने पतले फिर ब्रा भी नहीं पहना हुआ वा था (मुझे लगा) और मेरे सामने बैठ गयी और मेरी तरफ ही देखे जा रही थी

कुछ देर तक जब मैं बाजी के बूबस को घूरता रहा तो बाजी ने अजीब की आवाज़ निकली और बोली कहाँ गुम हो भाई नाश्ता नहीं करना क्या जो इतना गुम सूम बैठे हो

मैने अपना सर झटका और बाजी की तरफ देखा तो वहाँ मुझे कोई गुस्सा नही नज़र आया बलके बाजी हल्का सा मुस्कुरा रही थी मेरी तरफ देख के

मैने शर्मिंदगी से सर झुका लिया और खामोशी से नाश्ता करने लगा .

अब मुझ मैं इतनी हिमत नहीं थी हो रही थी की मैं सर उठा के बाजी से बात कर सकूँ या आँख मिला सकूँ की

तभी बाजी ने कहा भाई एक बात पुछों

मैं .... हल्की आवाज़ मैं जी बाजी पूछो ( लेकिन सर नहीं उठाया)

बाजी... वो तुम्हारे उठने से पहले ही कोई मिलने आया था तुम से

मैं... कौन आया था बाजी ( हैरानी से कि आज तक तो मुझे मिलने घर तक कोई भी नहीं आया था)

बाजी... रीदा एक थी अपने ही गांव की है और मेरी खास सहेली है(ख़ाश पे पूरा ज़ोर देते है )

मैं...रीदा के नाम बाजी के मुँह से सुन के घबरा गया और बोला ..वो ब्ल्यू..वो.... क्यों आईईईई त.त्ीईिइ बा...बाजी

बाजी... तुझे नहीं पता की मिलने कयूं आयी थी अभी कल ही तो घर आया है और गावँ की लड़कियाँ तुझे मिलने आने लगी हैं अब ये तो तुम्हे ही पता होगा की क्या काम है तुम्हारे साथ

उसे वैसे मैने उस से पूछ लिया था लेकिन उस ने ठीक से बताया नहीं


मुझे और बोली अपने भाई से ही पूछ लूँ

मैं...न...नहीं ब..बाजी ऐसी तो क...कोई बात नहीं है बस कल सलीम के साथ था ना जब तो ...तो

नॉमी और रीदा दोनो बहिन भाई से मिला था तो रीदा ने कहा विकी भाई मैं आपके घर आ के मिलूंगी बस..

बाजी... चलो ठीक से नाश्ता तो करो तुम

और सुन ये दूध ज़रूर पी लेना मैने खास तुम्हारे लिए लाई हूँ की मेरा भाई गावँ आते ही मेहनत करने जो लग गया है


और हहेहेहहे कर के हँसती हुयी मेरे रूम से निकल गई

बाजी की आख़िरी बात ने मेरे रोंगटे खड़े कर दिए और मैं समझ गया की शायद रीदा ने बाजी को सब कुछ बता दिया है और इस सोच क साथ ही मेरी गांड फिर से फटने लगी

फिर नाश्ता कहाँ से करता

और ये दूध जो की बाजी दे गई थी वैसे ही छोड़ दिया और उठके खेतों की तरफ चल दिया

जैसे ही मैं रूम से निकल के बहार दरवाजे तक गया तो पीछे से बाजी की आवाज़ सुनाई दी जो की नाश्ते का पूछ रही थी की कर लिया या नहीं

तो मैं , जी कर लिया बोल के..... जल्दी , घर से निकल गया

मैं जब खेतों मैं पंहुचा तो अबू हॉल चला रहे थे

और अम्मी भेंसों को नहला रही थी मुझे देखते ही अम्मी ने कहा की आओ

बेटा आज इतनी जल्दी खेतों मैं आ गये

खैर तो है ना ,

मैं अम्मी को जो की भेंसों को नहलाते हुयी खुद भी गीली हो चुकी थी और उनके कपड़े उन की बॉडी के साथ चिपके हुए थे उनका हर बॉडी पार्ट बड़ी वज़हत से दिख रहा था को घूरते हुयी बोला

वो अम्मी घर मैं नींद खुल गई और घर पे मन नहीं लग रहा था इस लिए यहाँ आ गया हूँ मैं

अम्मी... चल फिर आजा यहाँ मेरे साथ मिल क भेंसों को नहला तो ज़रा हमारे बाद तुमने ही तो ये सब करना है

मैं... जी आया अम्मी बोलता हुआ
मैं अम्मी के पास ही चला गया जो की ट्यूब वेल की तलब (जहाँ ट्यूब वेल का पानी गिरता है) मैं खड़ी भैंसों को नहला रही थी और जैसे ही मैं अपनी क़मीज़ उतार के अम्मी के पास तलब मैं जा घुसा .
अम्मी...अम्मी ने एक डिब्बा पानी का भर के मेरे ऊपर ही फेंक दिया और मेरी बॉडी को देखते हो बोली

क्या बात है बेटा मुझे लगता है तुमको शहर काफ़ी रास आ गया है

मैं .... वो कैसे अम्मी
अम्मी... बेटा ज़रा अपना सीना तो देखो ज़रा कितना चौड़ा हो गया है
मैं... वो अम्मी वहाँ शहर मैं जिम जाता हूँ ना इस लिए मेरा सीना ऐसा हो गया है

उसके बाद मैने अम्मी के साथ मिल के भेंसों को नहलाया
...और अम्मी के गीले जिस्म को देख देख के मज़ा भी लिया और फिर अम्मी के तलब से निकलते ही

मैं पानी मैं बैठ गया कयुँकि की मेरा लण्ड फुल टाइट हो चुका था
इतनी देर तक ये नज़ारा देखने से फिर मैं नहाके तब बाहर निकला जब अम्मी भेंसों के साथ दूसरी तरफ चली गई
बहार आके क़मीज़ पहनी और घर की तरफ चल दिया
घर आया तो आते ही मेरा सामना फरी बाजी से हो गया

जिन्हों ने मुझे देखते ही कहा कि ओं विकी तुम ने सुबह ठीक से नाशत नहीं किया और ना ही दूध पिया था और बहार निकल गये

मैं.... वो..... ब...बाजी बस भूख नहीं थी मुझे

बाजी.... आओ भाई दूध अच्छा नहीं लगा अपनी बहिन का......लाया हुआ या फिर रीदा का ही पसंद है तैयार किया हुआ दूध

मैं...(बाजी की बात सुन के थोडा बोखला गया और )

हकलाते हो बोला ब...बाजी मैं समझा नहीं म..मैने कब रीदा के हाथ से दूध पिया है

बाजी... अच्छा नहीं पिया तो चल कोई बात नहीं
मैं उसे बोल दूंगी वो मना मना नहीं करेगी तुम्हे और हहेहेहेहेहहे कर के हँसने लगी तो मैं वहाँ से हट के

सीधा अपने रूम मैं जा घुसा

बाजी से जो थोड़ी देर तक बात होई थी अभी
उस ने मुझे पसीने से भर दिया था और मेरा साँस भी फूल गया था और अब मैं रूम मैं बैठा ये ही सोच रहा था की

मैने ये क्या कर दिया और किस के साथ जिसने लगता है बाजी को सब कुछ बता दिया है जो की मुझे परेशान किए जा रहा था

मैं दुपेहर के खाने तक रूम मैं लेता रहा और बाहर नहीं निकला

तो फ़रीदा बाजी , मेरे रूम मैं आ गई और बोली क्या बात है भाई इस तरह रूम मैं कयूं घुसे बैठे हो तुम चलो उठो खाना तैयार है मिलके खाते हैं
मैने फ़रीदा बाजी से कहा नहीं बाजी बस आप ऐसा करो मेरा खाना यहाँ ही ले आना

मेरे सर मैं दर्द हो रहा है

बाजी रूम से बाहर गई और थोड़ी ही देर मैं मेरे लिए खाना ले के आ गई

जिसे मैंने खामोशी से खाया और बाजी के बर्तन ले जाने के बाद

अभी मैं लेटने ही लगा था की फरी बाजी हाथ मैं तेल की बॉटले लिए रूम मैं आ गई और बोली भाई अगर सर मैं दर्द था तो बता देते

मैं पहले ही सर की मालिश कर देती तो अब तक सारा दर्द ख़तम हो जाता तुम्हारा

मैं जो लेटने जा रहा था जल्दी से उठ बैठा और घबराते हो बोला नहीं बाजी

अभी ठीक है आप जाओ आराम करो

लेकिन बाजी नहीं मानी और मेरे पीछे से आके चारपाई पे बैठ गई

और 2 3 तकिये अपने नीचे रख लिए जिस से वो आराम से मेरे सर की मालिश कर सकती थी और फिर मेरा सर पकड़ के पीछे की तरफ खींच लिया

जिस से मेरा सर बाजी की बिना ब्रा के बूबस के दरमियाँ मैं आ गया तो बाजी ने कहा आराम से बैठे रहो

मैं अभी मालिश करूँगी तो ठीक हो जाओगे तुम
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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

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यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

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Re: चुदाई घर बार की

Post by Jemsbond » 17 Nov 2016 23:16

मेरी कुछ समझ मैं नहीं आ रहा था की बाजी आख़िर ये सब कयूं कर रही हैं और किस लिए
लेकिन मैं चुप बैठा अपने सर के दोनो तरफ अपनी बड़ी बहिन की चूचियों को महसूस करता रहा

और जब बाजी मेरे सर पे तेल लगा के मालिश करने लगी तो जैसे जैसे बाजी मेरे सर पे हाथ चलती वैसे वैसे नीचे उनकी चूची मेरी गर्दन पे टच होते बारी बारी जिस से मैं मज़े मैं गुम सा होने लगा

बाजी ने मेरी मालिश करते हुए मेरी गर्दन और कंधों से खूब अपनी चुचिओं को रगड़ा और प्रेस किया

जिस से मेरा लण्ड भी चड्डी पूरा खड़ा हो गया था लेकिन मैं फिर भी आराम से बैठा रहा तो बाजी ने थोड़ी देर और मालिश की और बोली कि भाई अगर मेरी मालिश से मज़ा नहीं आ रहा तो बोलो

मैं रीदा को बुलवा लूँ वो तुम्हारी मालिश कर देगी

मैने बाजी को अब मना किया और साथ ही बाजी के आगे से हट गया

और मूडके जब बाजी की तरफ देखा तो उन का जिस्म पसीने से भीग रहा था और साथ ही उन की आँखें भी लाल हो रही थी और

उनमैं मुझे जो भूख नज़र आ रही थी उसे देख के मैं पूरी तरह से हिल गया


बाजी की आँखों मैं भूखी हवस देख के जहाँ मैं हैरान हुया

वहीं एक बार मेरे दिल मैं आया की.......

मैं अभी बाजी को गिरा के खूब अच्छे से अपनी बड़ी बहिन की भूक को ठंडा करूँ

लेकिन मैं ऐसा सोच ही सकता था लेकिन...

कर नहीं सकता था कयूं की जो भी था लेकिन थे तो हम बहिन भाई ही

फिर मैं चारपाई से उठा और सर झुका के रूम से बाहर निकल गया और सीधा गुसलखाने मैं जा घुसा

पानी भर के नहाने लगा और अपने जिस्म को साबुन लगाने के बाद लण्ड की मूठ भी लिगाई

जिस से इतनी मानी निकली की मैं बयान नहीं कर सकता और जैसे ही मेरे लण्ड से पानी निकलना बंद हुआ तो देखा कि मैं खड़ा हुआ था

तो मेरी टाँगे काँपने लगी और अगर मैं न बैठ जाता तो शायद गिर ही जाता फिर .

मैं नहाके बाहर निकला और जब रूम मैं आया तो देखा की बाजी अब वहाँ नहीं थी और ना ही तेल की बॉटले थी

मैं रूम मैं चारपाई पे लेट गया और बाजी के बारे मैं सोचने लगा की...............

तभी मुझे बाहर किसी की हँसने बोलने की आवाज़ सुनाई दी तो मैं उठ कर बाहर निकला तो देखा की बाजी फरी और रीदा खड़ी बात कर रही .

तभी मुझे देखते ही बाजी के फेस पे.......... अजीब से सिकन और मुस्कान दौड़ गई और बाजी रीदा से कुछ बात करने लगी तो

मैं वापिस रूम मैं ही आ गया

कुछ ही देर गुज़री थी की बाजी रीदा को ले कर मेरे रूम मैं ही आ गई और बोली

भाई अगर हम यहाँ बैठ जाऊं तो तुम्हे कोई मसाला तो नहीं होगाना कयुँकि दूसरे रूम मैं फ़रीदा और फ़रज़ाना सो रही हैं

मैं मरता क्या ना करता,
मेने हाँ मैं सर हिला के लेता रहा तो बाजी ने रीदा से कहा तो बैठ
यहाँ मैं तेरे लिए ठंडा पानी लाती हूँ और रूम से बाहर निकल गई

तो रीदा मेरे साथ अकेली रह गई

बाजी के जाते ही मैने रीदा से कहा यार क्या तुम ने बाजी को सब कुछ बता तो नहीं दिया कहीं

रीदा हल्का सा हंस पड़ी और बोली विकी जी आप की बहिन और मैं बेस्ट फरन्ड हैं

हम एक दोसरे से कुछ भी नहीं छुपाते हैं और अगर तुम बुरा ना मानो तो एक बात कहों तुम से

मैने हाँ मैं सर हिलाया तो

रीदा ने कहा तुम्हारी बहिन बहुत प्यासी है बेहतर है की तुम खुद उसके लिए कुछ सोच लो वरना बाद

मैं नहीं बोलना की अगर तुम्हे पता होता तो तुम कुछ कर लेते

मैं हेरनी से रीदा की तरफ देखते हो बोला क्या मतलब मैं समझा नहीं , तुम कहना क्या चाहती हो

रीदा मेरी तरफ देख के मुस्कुरई और बोली की

अगर तुम अपनी बहिन को खुद ही ठंडा कर दो तो मेरा ख्याल है की वो बहार कहीं मुँह नहीं मारेगी .

जिस तुम्हारे और तुम्हारे घर की इज़त बच जाएगी

मैने फटी आँखों से रीदा की तरफ देखा और हकलाते हो बोला त...तुम्हारा मतलब ..ह..है क बाजी का बाहर के क..किसी क साथ कोई सी.. सी.. चक्कर हाईईईईईईई


रीदा ने कहा नहीं अभी तक तुम्हारी बहिन का कोई चक्कर नहीं है लेकिन अगर उसका जल्दी कोई इंतज़ाम ना हुआ तो मुझे लगता है की 3 4 दिन मैं ही वो किसी ना किसी से चुदवा लेगी

चुदवा शब्द पे रीदा ने बहुत जोर दिया

रीदा इतना बोल के चुप हो गई

और मेरी तो ये हालत थी की मुझ से कुछ भी बोला नहीं जा रहा था ....

तभी बाजी पानी ले के आ गई और रीदा से बोली क्या बातें हो रही हैं मेरे भाई के साथ

रीदा ने कहा कुछ नहीं

यार बस शहर का ही पूछ रही थी मैं की वहाँ क्या कुछ होता है वाघेरा और क्या बातें करुँगी

उस के बाद बाजी रीदा के पास बैठ गई

वो लोग इधर उधर की बताईं करने लगी और कोई 15 20 मिनट के बाद रीदा ने कहा अच्छा यार

मैं अब चलती हूँ काफ़ी देर हो गई तो

बाजी भी उसके साथ ही उठ के बाहर निकल गई
रीदा और बाजी के जाते ही मैं सोच मैं पड़ गया की आख़िर करूँ तो क्या करूँ और साथ ही ये भी समझ रहा था

अभी जो रीदा ने मेरे साथ बात की है वो उस ने बाजी के कहने से ही की थी खुद से नहीं

और ये बात ही मुझे परेशान कर रही थी लेकिन समझ मैं नहीं आ रहा था की करूँ तो काया करूँ
खैर बाकी का दिन भी गुज़र गया और रात को अम्मी भी घर आ गई तो
मैने कहा अम्मी अबू नहीं आए आपके साथ

अम्मी ने कहा नहीं
बेटा तुम्हारे अबू को पानी लगाना था आज खेतों को और सुबह शहर भी जाना है खाद लाने के लिए तो वो आज घर नहीं आएंगे

उसके बाद सब ने खाना खाया और सब अपनी अपनी जगह पे सोने को चले गये

मैं दिन मैं भी काफ़ी सोया था तो मुझे नींद नहीं आ रही थी

मैं ऐसे ही लेटा था अपनी सोचों मैं गुम था और कितनी रात गुज़री पता ही नहीं चला और फिर नींद आ गई तो मैं सो गया और जब आँख खुली तो काफ़ी दिन निकल आया था और अबू भी घर आ चुके थे

मैं उठा और नहाके वापिस आया तो फ़रज़ाना ने मुझे नाश्ता ला के दिया और

मैं बैठ कर नाश्ता करने लगा तो

अबू ने कहा बेटा ऐसा करो आज तुम अपनी बहिन फरी के साथ खेतों पे चले जाना वहाँ कोई खास काम तो नहीं है

लेकिन फिर भी जानवरों का ध्यान कर लेना कयुँकि मैं और तुम्हारी अम्मी शहर जा रहे हैं तो पीछे जानवरों को भी देखना होगा

अबू की बात सुन के मैने बड़ी मुश्किल से हाँ मैं सर हिलाया और नाश्ता करके बाजी के साथ खेतों की तरफ चल दिया

बाजी ने आज जो लिबास पहना हुआ था वो काफ़ी पतला था

लेकिन ऊपर से एक बड़ी सी चादर भी ओढ़ रखी थी की बाहर के लोग उसे ग़लत नज़र से ना देख सकैं

खेतों मैं पहुँच के बाजी ने चारपाई बिछा दी और वहाँ से चली गई और जब वापिस आयी

तो बाजी के पास एक बड़ा सा तरबूज़ (वातर्मिलों) पकड़ा हुआ था

जिसे बाजी ने ट्यूबवेल के पानी मैं रख दिया ठंडा होने क लिए उस के बाद बाजी मेरे पास आके बैठ गई और बोली

भाई एक बात पुछों बुरा तो नहीं मानोगे

मैं... हाँ बाजी पूछो क्या पूछना है

बाजी.... भाई मैने सुना है तुम जिस कॉलेज मैं पढ़ते हो वहाँ लड़कियाँ भी पढ़ती हैं

हैं क्या ये सच है

मैं... हाँ बाजी ये सच है लेकिन

यह आप कयूं पूछ रही हो (लेकिन बाजी की बात से मेरी धड़कन भी तेज़ होने लगी कयुँकि बात उसी तरफ जा रही थी जिस से मैं बचना चाहता था)

बाजी... भाई क्या तुम ने वहाँ किसी लड़की के साथ दोस्ती नहीं की

मैं...नहीं बाजी आप को तो पता है की मैं किसी लड़की से ठीक से बात नहीं पता

तो दोस्ती क्या करूँगा

बाजी... अच्छा जी मुझे तो पता ही नहीं था की मेरा भाई इतना बुज़दिल है की किसी लड़की से बात करते हो भी डरता है

मैं बाजी की बात की जवाब मैं कुछ नहीं बोला तो
बाजी ने कहा भाई क्या ख्याल है नहाया जाय तो

मैने ना चाहते हो भी हाँ मैं सर हिला दिया तो बाजी ने

कहा तुम ऐसा करो ट्यूबवेल चला के ये तलब भर लो फिर नहाते हैं हम दोनो मिल कर

मैं उठा और ट्यूब वेल चला दिया और तलब भरने के बाद बंद कर दिया

तो बाजी भी जो की रूम मैं चली गई थी

वापिस आ गई तो

मैं बाजी को देखता ही रह गया कयुँकि बाजी ने दुपटा उतार दिया था और अब बिना दुपते के मेरे सामने खड़ी थी

और बाजी के कपड़े इतने पतले थे की

मुझे सूखे कपड़ों मैं से ही बाजी की गोल गोल चूची सॉफ नज़र आ रही थी

और जब बाजी मेरे साथ पानी मैं भीगेगी तो............. फिर तो कपड़े होना ना होना बराबर ही था
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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
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