चुदाई घर बार की complete

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Jemsbond
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Re: चुदाई घर बार की

Post by Jemsbond » 21 Nov 2016 18:20

खैर खाना खाने के बाद अम्मी ने बर्तन उठाये और घर को चली गई तो अबू ने मेरी तरफ देखा और बोले विक्की बेटा मेरा ख्याल है की हुमारे दरमियाँ अब जैसा की कोई परदा नहीं बचा है तो हम दोनो को हर बात एक दूसरे के साथ ज़रा खुल के कर लेनी चाहिए क्या ख्याल है

मैने बाजी की तरफ देखा और उस के बाद अबू की तरफ देख के हाँ मैं सर हिला दिया और बोला जी अबू जैसा आप मुनासिब समझाईं

अबू... फरी की तरफ देखते हो बोले बेटी तुम ज़रा भेंसों को देख आओ और उन्हें पानी भी पीला के आना

फरी...जी अच्छा अबू कहते हो वहाँ से उठी और भेंसों की तरफ चली गई

अबू... विक्की अभी तुम्हारी अम्मी जब खाना ले के आयी थी तो उस ने मुझे अलग साइड मैं कर के जो बात की है वो मैं तुम्हारे साथ साझा करना चाहता हूँ क्यूंकि अब हमें जो भी करना है सोच समझ के करना है

मैं... क्या मतलब अबू मैं समझा नहीं आप की बात अम्मी ने क्या बात की है आप के साथ

अबू...बेटा तुम्हारी अम्मी को हम पे यक़ीन की हद तक शक है के मैं तुम और फरी का आपपीस मैं कोई ना कोई चक्कर है और जिस तरह तुम्हारी मा ने मेरे साथ बात की है मुझे लगता है के उसे हुमारे इस तालूक़ पे कोई भी प्राब्लम नहीं है बल्कि वो कुछ और ही चाहती है

मैं... अबू अब जब के हम लोग खुल के बात कर रहे हैं तो मेरा ख्याल है की आप पूरी बात करो इशारों मैं नहीं

अबू.... ठंडी साँस लेते हो बोले बेटा हुमलोग जो कुछ कर रहे हैं उस का तुम्हारी अम्मी को पता चल चुका है और ये बात उन्हें बिल्लो से ही पता चली है और जिस अंदाज़ से तुम्हारी अम्मी ने बात की है मुझे लगता है की वो भी इस खेल मैं हुमारे साथ मिलना चाहती है और तुम्हारे मोटे लंबे लंड से चुदना चाहती है वो जो उसकी बरसो की तमना है

मैं... हेरनी से अबू की तरफ देखते हो बोला लेकिन अबू ये किस तरह हो सकता है

आख़िर वो मेरी अम्मी है उन के सामने या उन के साथ मैं ये सब किस तरह कर सकता हूँ

नहीं अबू पल्ल्ल्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ ये नहीं हो सकता

अबू... देखो बेटा पहली बात तो ये है के जब तुम ने फरी को मेरी तरफ मायल किया था चुदाई के लिए तो क्या तुम नहीं जानते थे की मैं उस का बाप हूँ और

अगर मैं बाप हो के अपनी ही सग़ी बेटी को चोद सकता हूँ तो तुम्हें क्या मसाला है और फिर जब तुम खुद भी अपनी अम्मी के बूबस और गांड को घूरते रहते हो तो तुम्हें तो खुश होना चाहिए

मैं... हेरनी से अबू की तरफ देखते हो बोला वो सब तो ठीक है अबू लेकिन मैने फरी बाजी को आप के साथ सेक्स के लिए नहीं बोला था बल्कि ये उन की अपनी मर्ज़ी थी बस मैने बाजी को मना नहीं किया था

अबू... अच्छा चलो छोडो क्या हुआ था या क्या नहीं अब बात ये है के तुम्हारी अम्मी भी अब हुमारे साथ मिल के मज़ा करना चाहती है तो अब तुम बताओ क्या करना है क्यूंकि इस मैं मेरे और फरी के साथ तुम्हारा भी फाइयदा है सोच लो

मैं... कैसा फाइयदा अबू

अबू... यार सोचो अगर तुम्हारी अम्मी भी हुमारी पार्ट्नर बन गई तो हम किसी भी वक़्त और किसी भी जगह मज़ा कर सकते हैं कोई दर नहीं कोई टेन्सन नहीं बस मज़े ही मज़े होंगे

मैं... सर झुका के बैठ गया और सोचने लगा के क्या मेरा अपनी मा के साथ ऐसा करना ठीक होगा

वो मा जिस की कोख से मैं पैदा हुआ था जिस ने मुझे पाला पोसा था और जवान किया था तो तभी मेरे अंदर से दिल की आवाज़ आयी क हाँ मुझे अपनी मा की खुशी को पूरा करना चाहिए

उसे मोटे और जवान लंड की जरूरत है. जैसा की अब्बू ने कहा, और अब्बू का लंड तो बहुत छोटा सा है .

और ये सोच आते ही मन मैं सकून हो गया था

वहीं मेरा ध्यान अपने लंड की तरफ गया जो की अम्मी की चुत का सोच के ही पागल हो के मचल रहा था

अबू मेरे फेस से ही समझ गये के अब मुझे इस पे कोई ऐतराज़ नहीं है तो अबू ने कहा के ऐसा करो तुम आज रात खाना खा के अपनी अम्मी के साथ यहाँ आ जाना और रात को पानी लगाने के बहाने यहीं रुक जाना ठीक है

मैने अब भी सर नहीं उठाया और खामोश बैठा रहा तो अबू हल्का सा हंस दिए और बोले यार क्या बात है तुम तो ऐसे चुप बैठे हो जैसे मूह मैं ज़ुबान ही नहीं है तुम्हारे

मुझे देखो मैं भी खुश हूँ जिस की बीवी की आज रात तुम ठुकाई करोगे और

तुम्हारी अम्मी भी तुम्हारे मोटे लंड से चुद के खुश हो जाएगी...... कब तक मेरे मतले लंड से चुदती राहगी और हाहाहा कर के हंस दिए

अबू की बात सुनके के मुझे थोडा होसला हुआ और मैने अबू की तरफ देखते हुए कहा लेकिन अबू मैं अम्मी के साथ ये सब किस तरह कर सकोंगा नहीं अबू

पल्ल्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ कुछ और सोचिये मैं आप को मना नहीं कर रहा लेकिन फिर भी आप खुद ही सोचिये के मैं किस तरह ये सब

अबू ने ने हंसते हो कहा यार परेशान क्यूं हो रहे हो सब ठीक हो जाएगा

कोई परेशानी की बात नहीं है बाकी मैं खुद समझा दूँगा तुम्हारी अम्मी को कोई मसाला नहीं होगा वो ही ...करेगी ....

उस के बाद हम दोनो वहाँ से उठे और मैं चारपाई पे जा के लेट गया और रात के बारे मैं सोचने लगा और अबू जा के अपने काम मैं लग गये और मैं इन सब सोचों मैं ही गुम सो गया और कब मेरी आँख लगी कोई पता नहीं चला और जब आँख खुली तो शाम हो चुकी थी मैं उठा और नहा के बाजी और अबू के साथ ही घर की तरफ चल दिया और घर आ के थोड़ी देर सब ने गुप शुप की और फिर खाना खाया और

उस के बाद अम्मी के साथ मैं फिर से खेतों की तरफ चल दिया

खेतों मैं पहुँच के अम्मी ने पहली बार मेरी तरफ देखा और बोली विक्की कहाँ है तु

यहाँ बाहर ही बिस्तेर . दूँगा या फिर रूम मैं ही बिस्तेर लगाऊ तुम्हारे लिए

मैने अम्मी की तरफ देखा और अम्मी को . देख के बोला जहाँ आप का दिल चाहे लगा दें बिस्तेर ही तो है जहाँ भी जगह मिलेगी सो लूँगा

अम्मी ने कहा हाँ ये भी ठीक है लेकिन मेरा ख्याल है की हमें रात को रूम मैं ही ..... चाहिए बाहर नहीं

मैने सर झुका के बस इतना ही कहा जी अम्मी जैसे आप की मर्ज़ी तो अम्मी भी और कोई बात किए बिना रूम मैं चली गई और जल्दी ही वापिस आ के बोली बेटा जाओ मैने बिस्तेर बिछा दिया है जा के लेट जाओ मैं थोडा काम है वो . कर के आती हूँ

मैं चुप कर के रूम मैं चला गया जहाँ अम्मी ने . बिस्तेर नीचे ही एक चटाई पे . बिछा के रखा था

मैं एक पे अपने सर के नीचे रख और अपनी क़मीज़ उतार के लेट गया और सोचने लगा की आख़िर मैं किस तरह अम्मी के साथ कर सकूंगा क्यूंकि मैं जितना मर्ज़ी हिम्मत कर लेता अम्मी के साथ नहीं कर सकता था

खैर अम्मी भी कोई 30 मिनट बाद वापिस आयी और मुझे लेटा देख के मेरे पास ही बिस्तेर पे बैठ गई और बोली बेटा मैने अपना बिस्तेर भी यहाँ तुम्हारे साथ ही लगा लिया है तुम्हें कोई ऐतराज़ तो नहीं

मैने अम्मी की तरफ देखा और बोला अम्मी आप ऐसे क्यूं बोल रही हो आप का जहाँ दिल चाहता है आप लेट जाओ अगर आप यहाँ मेरे साथ . चाहती हैं तो भी आप सो जाओ मैं क्यूं मना करू गा

अम्मी मेरे साथ ही लेट गई और थोड़ी देर तक चुप रही और फिर मेरी तरफ . बदल के बोली बेटा क्या तुम्हारी कोई शहर मैं भी किसी लड़की के साथ . हुयी थी या अभी तक कोई . ही नहीं

मैं समझ गया के ये बातें अम्मी बात को आगे . के लिए कर रही हैं तो मैं भी अम्मी की तरफ . बदल कर लेट गया और बोला कहाँ अम्मी भला मैं इतना . थोडा ही हूँ क कोई लड़की मेरे साथ . करती

अम्मी मेरी बात . ही मुस्कुरा दी और मेरी आँखों मैं देख के बोली क्यूं इतना . तो है मेरा बेटा क्या शहर की लड़कियाँ . हैं जो उन्हें मेरा बेटा . ही नहीं . आता
अब मैं क्या . सकता हूँ अम्मी के उन्हें मैं कैसा नज़र आता हूँ ये तो वो लड़कियाँ ही बता सकती हैं

अम्मी ने अपना एक हाथ मेरे ऊपर रखा और साथ ही मुझे अपनी तरफ खींच लिया जिस से अम्मी के बूबस मेरे साथ . होने लगे तो अम्मी ने मेरे सर को थोडा झुका दिया और मेरे . पे एक किस की और फिर मेरा सर उठा के मेरी आँखों मैं देखते हो बोली चल छोड दिल . ना कर मैं हूँ ना . . उन लड़कियों को जो . साथ . करना . नहीं .

मैं भी अम्मी की आँखों मैं देखते हो थोडा . अंदाज़ मैं बोला अम्मी मैं भला आप को अपनी . . कैसे समझ सकता हूँ आप तो मेरी अम्मी हो कोई लड़की थोडा ही हो अम्मी भी मेरी तरफ देखते हुए बोली

क्यूं मैं तुम्हारी माँ होने के साथ साथ तुम्हारी . . नहीं बन सकती जबकि फरी तो तुम्हारी बड़ी बहन भी है और . . .......भी है

मैं अम्मी की बात सुनके के खामोश हो गया और कुछ नहीं बोला तो अम्मी ने अचानक अपने होठोंस मेरे होंठो पे रख दिए

मैने भी अम्मी के मुह मैं अपनी ज़ुबान घुसा के किस करने लगा और अम्मी के होंतों को चूसने लगा तो तभी अम्मी ने मेरा एक हाथ पकड़ के अपने सॉफ्ट बूबस पे रख दिया

मैने भी अम्मी के बूबस को मसलना और सहलाना शरू कर दिया और अम्मी मुझे अपने साथ भिंचे हो किस करने लगी रही

थोड़ी देर तक किस करने के बाद अम्मी ने मुझे अपने से थोडा सा पीछे किया और मेरी आँखों मैं देखते हो बोली क्यों बेटा बनोगे अपनी अम्मी को अपनी गर्ल फरन्ड तो अम्मी की बात सुनते ही मैने फिर से अम्मी को अपनी तरफ खींचा और किस करने लगा और बूबस को दबाने लगा


थोड़ी देर के बाद अम्मी ने अपना एक हाथ जो क मेरे बलों को सहला रहा था हटाया और नीचे ले जा के मेरी सलवार का नडा खोल दिया और हाथ मेरी सलवार मैं घुसा के सीधा मेरे लूँद पे रख दिया और मेरे लूँद को अपनी मुति मैं जाकड़ के सहलाने लगी

आह बेटा कितना मोटा और तगड़ा है यह लंड.. एस लंड से चौदने को मै तरस रही थी...तेरे अब्बू का..तो बस.... सच तभी सब दीवाने है तेरे एस लंड के.... ऐसा लंड पूरी गांव मै नहीं है... और मेरे लंड को मुठियाने लगी
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Jemsbond
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Re: चुदाई घर बार की

Post by Jemsbond » 23 Nov 2016 10:09

थोड़ी देर तक हम मा बेटा इसी तरह एक दोसरे से चिपके किस करते रहे और मैं अम्मी के बूबस और अम्मी मेरे लूँद को हाथ से सहलाती रही फिर

अम्मी ने मुझे सीधा लिटा दिया और खुद बैठ के मेरे फुल हार्ड लूँ,द को देखने लगी और फिर अचानक अम्मी झुकी और मेरे लूँद को कॅप आइस क्रीम की तरह चाटने और सहलाने लगी बड़े ही प्यार से

अम्मी इतने प्यार से मेरे लूँद को चूस रही थी और प्यार कर रही थी के मज़े के मारे मेरे मुह से सिसकियाँ निकालने लगी और

मैं आअहह अम्मिईीईईईईई उनम्म्मह की आवाज़ करने लगाथोड़ी देर तक अम्मी मेरे लूँद को चुस्ती और चाटती रही
फिर अम्मी ने मेरे लूँद को छोड दिया और सीधी हो के बैठ गई और मेरी सलवार जो के मेरे घतनों तक पहले ही उतरी होई थी उतार दी और उस के बाद मेरी तरफ देखते हो अपने कपड़े निकल के इधर उधर फैंक दिए

अम्मी के नंगा होते ही मैने अम्मी को अपनी जगा लेटने को बोला तो
अम्मी को सीधा किया और खुद अम्मी के बूबस को अपने हाथों से सहलाने लगा

और फिर मुह मैं भर के चूसने लगा और उस के बाद मैं उठा और अपनी मा के दोनो तरफ अपनी टाँगों को फैला के बूबस के पास जा के बैठ गया जिस से मेरा लूँद अम्मी के मुह के पास हो गया

अम्मी ने अब और ज़्यादा देर ना करते हो मेरे लूँद को अपने मुह मैं भर लिया और चूसने लगी

अम्मी के मुह मैं अपना लूँद घुसाए चुस्वता रहा और फिर मैं अम्मी के ऊपर से हट गया और खुद अम्मी की टाँगों मैं आ गया और अम्मी की रनो को पूरी तरह खोल दिया
मेने अम्मी की चुत पे जेसे ही अपनी जवान रखी अम्मी मचलने लगी...फिर मेने अम्मी की चुत जिससे मै निकला था चूसना और चाटना चालू कर दिया ...ओह अम्मी... मचल गई.. और बेटा ...किसी ने पहली बार.....ओह याआआआ फली बार छाती है मेरी चुत....ओह्ह्ह्ह बेटा तेरे अब्बू..ने आज तक नहीं..चाटी...
और अम्मी मेरे चुत चाटने की वजह से ...जन्नत मैं पहुंच गई ...

अब मुझे लगने लगा सच मै बहुत प्यासी है मेरी अम्मी ..........बस अब्बू ने चोदा ही था अम्मी को.....
ज्यादा मज़ा नहीं दिया था...... अब मेरा फ़र्ज़ था अपमी अम्मी को खुश करने का..... उसको जिंदगी की चुदाई का मज़े देने का....

मेरी से चुत चुसवाने की वजह से अम्मी जल्दी की...फ़ारिग होने के करीब पहंच गई.... अपना बदन कड़ा करके ...अपनी चुत का पानी मेरे मुह मै दे दिया ....जिसे मैंने चाट चाट के साफ़ कर दिया

मेरा लंड अब फूल टाइट हो गया था ...अम्मी बिस्तर पे लेती हुयी थी आखें बंद कर के ..अपनी चुत चुसाई का मज़ा ले रही थी

तभी मेने अपने लूँद को अपनी सग़ी मा की चुत पे रख के हल्का सा अंदर घुसा दिया

जैसे ही मेरे लूँद की कॅप अम्मी की चुत मैं घुसी अम्मी के मुह से सस्सीईए की हल्की सी आवाज़ निकली और फिर अम्मी ने अपनी टाँगों से मेरी कमर पे आँकड़ा सा बनाया और मुझे अपनी चुत की तरफ दबाया तो

मैने पूरी ताक़त से अपना बाकी का लूँद जो के अभी तक अम्मी की चुत से बाहर था अम्मी की चुत मैं घुसा दिया और झटके मारने लगा

जैसे ही मेरा पूरा लूँद अम्मी की चुत मैं पूरा गया अम्मी के मुह से आअहह विक्की बेटा आराम से ऊऊहह उनम्म्मह क्या लूँद है बेटा तेरा उूउउफफफफफफफ्फ़ मैं मर जाउंगी ... आराम से...

बस यह चुत तेरे अब्बू के छोटे लंड से चुस्दी.... ओह बेटा इतना बडा लंड ...,,,,,,हे.. हाय बेटा की आवाज़ करने लगी और साथ ही नीचे से अपनी गांद को भी मेरे लूँ,द की तरफ उछालने लगी

कोई 3 4 मिनट के बाद मैने अपना लूँद अम्मी की चुत से बाहर निकल लिया और और अम्मी को खड़ा कर के खुद अम्मी की जगा लेट गया और अम्मी को अपने लूँद पे बैठने का इशारा किया तो

अम्मी मेरे दोनो तरफ अपनी टांगे को फैला के खड़ी हो गई और फिर थोडा नीचे झुकी और मेरे लूँद को अपने हाथ से पकड़ के चुत पे सेट किया और पूरी तरह नीचे बैठ गई झटके से जिस से मेरा लूँद अपनी अम्मी की चुत मैं पूरा जा घुसा तो

मेरे मुह से आआहह की आवाज़ निकल गई तो
अम्मी मुस्कुराते हो बोली क्यों बेटा क्या हुआ और साथ ही अपनी गांद को ऊपर से नीचे हिलने लगी
जिस से मेरा लूँ,द अम्मी की चुत मैं थोडा इन आउट होने लगाम्मी अपनी गांद को थोडा सा उठा के फिर से मेरे लूँ,द की तरफ दबा देती और साथ ही कुछ इस तरह से अम्मी अपनी गांद को मेरे लूँ,द पे दबा के रगड़ती के मुझे लगता के अम्मी ने अगर 2 3 बार और ऐसा किया तो मेरा पानी निकल जाए गा तो मैं भी नीचे से अम्मी की चुत की तरफ झटके लगाने लगा और साथ ही आआहह अम्मिईीईईईईई मेरा होने वाला हाईईईईईईईईईईईईईईई उनम्म्मह आमम्म्मिईीईईईईईईईईईईईईईईईई

मैं गया की तेज़ आवाज़ैईन करने लगा

मेरी इन आवाज़ों को सुन के अम्मी भी अपनी आँखों को बंद किए अपनी चुत को ज़रा ज़ोर से मेरे लूँद पे उछालने लगी और आअहह व्क्किईईईईईईईईईईईई मेरे बचे मैं भी आने वालिइीईईईईईईईईईईई हूँ उनम्म्मह आअहह विक्कीईईईईईईईईई की तेज़ आवाज़ के साथ ही मेरे लूँद पे अम्मी की चुत का गरम पानी गिरता महसोस हुआ तो साथ ही मेरे लूँद ने भी पानी छोड दिया तो

अम्मी मेरे ऊपर ही निढाल हो के गिर गई और हम दोनो हांपने लगे

उस रात मैने अम्मी की तीन बार और चुत मारी और फिर हम दोनो मा बेटा नंगे ही एक दोसरे से चिपक के सो गए .

सुबह जुब मेरी आँख खुली तो मैने देखा के मैं अब भी नंगा ही लेटा हुआ था लेकिन अम्मी मेरे पास नहीं थी मैं उठा और साइड मैं पड़ी अपनी सलवार उठा के पहन ली और बाहर निकल आया तो देखा के काफ़ी दिन निकल आया हुआ था और

अबू भी खेतों मैं आ चुके थे मैने इधर उधर देखा लेकिन मुझे अबू के इलावा कोई नज़र नहीं आया तो अबू मुझे इस तरह इधर उधर देखता पा के हल्का सा हंस दिए और बोले क्या बात है बेटा किसे ढूंड रहे हो

मैं... नहीं अबू मैं तो किसी को नहीं

अबू... हाहहहहा यार अब तो तुम मेरे रक़ीब बन चुके हो जिसे मैने खुद ही अपना रक़ीब बनाया है तो इतना क्यूं शर्मा रहे हो

मैं ... अबू की बात सुन के हंस दिया और बोला नहीं अबू बस अम्मी को ही देख रहा था ककहाँ गई

अबू... यार उसे घर मैं भी कुछ काम है इस लिए वो घर चली गई है
आज तेरी अम्मी बहुत खुश होक गयी बेटा.. तुमने रात को उसको बहुत खुश कर दिया.... आज उसके चेहरे पे बहुत सकून था. ......

तुम नहा लो फिर घर जा के नाश्ता भी कर लेना

मैने ट्यूबवेल चला के नाहया और फिर तैयार हो के घर की तरफ चल दिया और जा के सीधा अपने रूम मैं जा घुसा और अपने बिस्तेर पे बैठ के नाश्ते का इन्तजार करने लगा क्यों की मुझे घर मैं इन होता सब ही देख चुके थे

मुझे रूम मैं बेते अभी कुछ ही देर होई थी के अम्मी मेरे लिए नाश्ता ले के आ गई और मेरे सामने नाश्ता लगा दिया तो मैने सर उठा के अम्मी की तरफ देखा तो मुझे उन के फेस पे बड़ी प्यारी सी मुस्कान नज़र आिइ और उन का फेस भी खिला खिला सा नज़र आ रहा था

अम्मी ने भी नाश्ता रख के मेरी तरफ देखा और मुझे अपनी तरफ ही देखता पा के सर झुका गई और उन के फेस पे लाली सी दौड़ गई और अम्मी साइड पे रखी चारपाई पे सर झुका के बैठ गई लेकिन बात कोई नहीं की

मैने भी कोई बात नहीं की अम्मी से और सर झुका के नाश्ते मैं लग गया जो के आम तौर से काफ़ी हावी किस्म का था जिस मैं दूध प्रते एग माखन भी था जो के मैं खामोशी से छत कर गया क्यों रात की मेहनत के बाद इस वक़्त मुझे काफ़ी भुख लग रही थी

नाश्ते के बाद अम्मी ने बिना कोई बात किए बर्तन उठाए और रूम से निकल गई तो अम्मी के जाते ही फरी बाजी रूम मैं आ घुसी और आते ही नौघट्य से अंदाज़ मैं बोली हूउऊन्न्ं भाई क्या बात है

आज तो अम्मी खुद तुम्हारे लिए नाश्ता बना के लाई थी और वो भी इतना ज़बरदस्त

मैं... यार तुम क्यों जल रही हो अगर अम्मी मेरा कुछ ख्याल रखने लगी हैं तो आख़िर मैं बेटा हूँ उन का

बाजी.... कामीने बेटा तो तो अभी बोल रहा है रात को तो मेरी जान ऊओह जानू बोल रहा होगा

मैं... यार बाजी जुब तुम्हें सब पता हो तो क्यों तंग कर रही हो मुझे बाजी........

अच्छा भाई एक बात तो बताओ रात तुम अम्मी को जानजी कह के बुला रहे थे या रहना जान बुलाते रहे

मैं... यार एक बात तो ये है के रात को मुझे इतनी हिम्मत ही नहीं होई के मैं अम्मी से कोई बात भी कर पता क्यों के शरम के मारे मेरी तो गांद ही फटी जा रही थी तो बोलता क्या

बाजी.... हहेहेहेहहहे बेचारा मेरा भाई कितना शर्मिला है बाहर की किसी लड़की को कभी आँख उठा के भी नहीं देखता बस अपने ही घर मैं अपनी मा और बहनों की चुत मैं घुसा रहता है

मैं... यार बाजी कुछ तो शरम करो फ़रीदा या फरजाना मैं से अगर किसी ने सुन लिया तो क्या होगा

बाजी.... यार ज़्यादा से ज़्यादा अबू को या अम्मी को बता देगी तो क्या हुआ डर किस बात का है

मैं... फिर भी बाजी ये ठीक नहीं है हमनें कुछ तो ख्याल करना ही चाहिए बाजी मेरी बात सुन के हंस पड़ी और बोली भाई फरीदा का भी कुछ सोचा है तुम ने या नहीं तो मैने कहा क्यों क्या हुआ उसे

बाजी हंसते हए बोली यार जवान हो चुकी है और जुब कोई लड़की जवान हो जाती है तो उस की चुत मैं खुजली बढ़ जाती है कुछ तो सोचो उस का भी बेचारी को भी एंजाय करने का हक़ है

मैने हेरनी से बाजी की तरफ देखा और बोला यार बाजी आप चाहती क्या हो क्या आप पुरे घर को चुदाई घर तो नहीं बनाना चाहती सोचो तो भाई के कितना मज़ा आएगा

अगर सब ही घर वाले इस खेल मैं शामिल हो जायं तो किसी का भी डर नहीं होगा जिस का जुब दिल चाहे जिस से दिल चाहे अपनी अग को ठंडा करे
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Re: चुदाई घर बार की

Post by student » 23 Nov 2016 14:09

bhai khub maja ayega sabse jyada maja to aap ko ayega

casanova0025
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Re: चुदाई घर बार की

Post by casanova0025 » 25 Nov 2016 15:33

जबरदस्त जा रहे हो, जैसा स्टोरी पढ़ना चाह रहा था बिल्कुल वैसा ही है।

Jemsbond
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Re: चुदाई घर बार की

Post by Jemsbond » 14 Dec 2016 19:46

student wrote:bhai khub maja ayega sabse jyada maja to aap ko ayega
casanova0025 wrote:जबरदस्त जा रहे हो, जैसा स्टोरी पढ़ना चाह रहा था बिल्कुल वैसा ही है।
thanks both of you
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