घर के रसीले आम मेरे नाम complete

दोस्तो इस फोरम में आप हिन्दी और रोमन (Roman ) स्क्रिप्ट में नॉवल टाइप की कहानियाँ पढ़ सकते हैं
User avatar
rajaarkey
Super member
Posts: 6266
Joined: 10 Oct 2014 10:09
Contact:

घर के रसीले आम मेरे नाम complete

Postby rajaarkey » 01 Jan 2017 19:03

घर के रसीले आम मेरे नाम

दोस्तो सबसे पहले आप सब को नये साल की शुभकामनाएँ . दोस्तो मैने सोचा है कि साल के पहले दिन की शुरुआत क्यों ना एक ऐसी रसीली कहानी से की जाए जिसे पढ़ कर आप को मज़ा आ जाय




Happy New Year Dosto


Image
(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &;
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj sharma
User avatar
rajaarkey
Super member
Posts: 6266
Joined: 10 Oct 2014 10:09
Contact:

1

Postby rajaarkey » 01 Jan 2017 19:04

ए + ब का व्होल स्क़ायर = ए स्क़ायर + ब स्क़ायर फिर, लो मैं तो फिर भूल गई, फिर से ट्राइ करती हूँ, ए + बी का व्होल स्क़ायर = ए स्क़ायर, फिर क्या था, फिर उसके बाद, याद आ जा याद आ जा, क्या था, क्या था? ओफ्फ हो क्या यार यह मेद्स तो एक दिन मेरी जान लेकर छोड़ेगा. पता नही किस गधे ने यह मेद्स बना दिया रट्टा मारो तो याद नही होता है और समझो तो समझ नही आता है, क्या करूँ? क्या करूँ? एक बार फिर ट्राइ करती हूँ, ए + बी का व्होल स्क़ायर.

रश्मि, ओ रश्मि यह क्या रट्टा लगा रखा है? अपने मन में नही पढ़ सकती क्या? पूरा घर सर पर उठा रखा है.

रश्मि- मम्मी क्या करूँ? कल मैथ का पेपर है और मुझसे यह सब समीकरण याद ही नही होते हैं, मेरी तो जान निकली जा रही है पता नही कहीं फैल हो गई तो…

रजनी- अब समझ मे आ रहा है, जब में कहती थी कि जा अपने भैया से थोड़ा पढ़ ले तब तो तुझे समझ नही आया अब चली है मैथ का रट्टा मरने, अरे पगली कभी मैथ भी रट कर याद होती है क्या?

रश्मि (अपना मूह बना कर)- मुझे नही पढ़ना भैया से, भैया इतने बोर है कि जब मुझे पढ़ाते है तो मुझे नींद आने लगती है, उनसे पढ़ने से अच्छा है में मैथ मे सप्लाइ से ही पास हो जाउ, या फिर कोई भला टीचर मेरी कॉपी चेक करेगा तो शायद ग्रेस्स से ही पास कर दे. क्यो मम्मी किस्मत भी कोई चीज़ है, हो सकता है पास वाला स्टूडेंट मुझे अपनी पूरी कॉपी नकल करने को दे दे, फिर तो में पास भी हो सकती हूँ ना.

रजनी- बस बिना मतलब की बाते ही सोचती रहती है, पढ़ाई मे तो तेरा ध्यान ही नही लगता, पता नही तेरा क्या होगा, फैल हुई तो समझ लेना तेरा भाई तेरी जम कर खबर लेगा.

रश्मि (अपने मन मे बड़ी आई मुझे भैया का डर दिखाने वाली, भैया से डरे मेरी जूती, और वैसे भी पास भी हो गई तो कौन सा तीर मार दूँगी, यहाँ कौन सा राज सिहासन मिल जाएगा, इतने सालो से धक्के खा कर पास होती आई हूँ तो इस साल भी कहीं ना कहीं से तीर मे तुक्का लग ही जाएगा.)- मम्मी मुझे तो नींद आ रही है में तो अब नही पढ़ सकती, सुबह के पेपर का सुबह देखा जाएगा.

रजनी- अच्छा चल सो जा तुझे समझाना मेरे बस की बात नही है, अब जब राज आएगा तो वो ही तुझसे बात करेगा.

रश्मि (अपनी आँखे अपनी मम्मी को दिखाती हुई)- मम्मी अगर भैया से कुछ कहा तो समझ लेना, में भी कभी ना कभी तुमसे बदला ले लूँगी.

रजनी (उसको देख कर गुस्साते हुए) छीनाल रांड़ अपनी मम्मी को धमकी देती है, तू रुक में अभी तेरी टाँगे तोड़ देती हूँ. (और रश्मि की ओर जाती है और रश्मि अपनी मम्मी को देख कर मुस्कुराते हुए अपने रूम से भाग कर राज के रूम में जाकर अंदर से दरवाजा बंद कर लेती है.)

रजनी (उसके पीछे जाकर राज के रूम को बाहर से बंद करते हुए)- दुष्ट कही की अब अंदर ही सडती रह जब तेरा भाई आएगा तो वह ही तेरी खबर लेगा.

रश्मि- हाँ-हाँ कर दो दरवाजा बंद मुझे क्या, में तो आराम से भैया के बेड पर अपनी टाँगे फैला कर सो जाती हूँ, (और अंदर से चिल्ला कर) गुड नाइट मम्मी!

रजनी (पलट कर वापस जाते हुवे बड़बड़ाती हुई) गुड नाइट की बच्ची, यह लड़की जैसे-जैसे बड़ी होती जा रही है इसका बच्पना और भी बढ़ता जा रहा है, पता नही इसका गुज़ारा कैसे होगा, किसी दिन मेरी नाक ज़रूर कटवाएगी.

(लगभग एक घंटे बाद कोई बाहर से दरवाजा खटखटाता है और जब रजनी जाकर दरवाजा खोलती है तो सामने राज को देख कर मुस्कुराते हुए)- आ गया बेटा!

राज- हाँ मम्मी आज तो बहुत थक गया हूँ, बड़ा काम था ऑफीस मे.

रजनी (दरवाजा लगाते हुए)- चल तू जल्दी से हाथ मूह धो ले में तेरे लिए खाना लगा देती हूँ.

राज- ठीक है मम्मी! (और राज अपने रूम की तरफ जाकर जैसे ही दरवाजा खोल कर अंदर की ओर पुश करता है.)

रजनी- अरे बेटा रश्मि ने अंदर से बंद कर के लगता है सो गई है, रश्मि, ओ रश्मि, लगता है सो गई है.

राज- चलो सोने दो मम्मी उसको में यही चेंज कर लेता हूँ आप ज़रा मुझे टॉवेल दे दो.

(रजनी उसे टॉवेल ला कर देती है और राज वही अपनी पेंट उतार कर टॉवेल लगा कर बाथरूम में घुस जाता है और रजनी उसके लिए खाना गरम करने लगती है. खाना खाने के बाद राज वही हॉल में बैठ कर टीवी ऑन कर लेता है और टीवी देखने लगता है.)

रजनी- बेटे में सोने जा रही हूँ, तुझे जब सोना हो तो मेरे ही बेड पर आकर सो जाना, रश्मि तो अब उठने वाली नही है घोड़े बेच कर जो सोती है.

राज- कोई बात नही है मम्मी, में आपके साथ ही सो जाउन्गा. (रजनी राज की बात सुन कर मुस्कुराती हुई अपने रूम में चली जाती है. राज टीवी पर न्यूज़ लगा कर देखने लगता है और दूसरी ओर रजनी की फूली हुई चूत उसको परेशान करने लगती है. रजनी की उमर उस समय 45 साल थी और उसके दो ही बच्चे थे, राज जो कि 25 साल का था और रश्मि जो कि 18 साल की थी, रजनी के पति करीब 3 साल पहले बीमारी की वजह से मर चुके थे, चूँकि उनकी सरकारी नौकरी थी इसलिए अनुकंपा में राज को उनकी जगह जॉब मिल गई थी और वह नगर पालिका में बाबू के पद पर जाय्न हो गया था.

रजनी एक तेज तर्राट महिला थी लेकिन उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी एक ही थी जिसका नाम था लंड, लेकिन छोटी जगह मे रहने के कारण वह अपनी भावनाओ को हमेशा दबाती आई थी और जब भी उसको लंड की ज़्यादा चाह होती तब वह अपने हाथो से ही अपनी फूली हुई चूत को कुचल लेती थी. मोहल्ले के कई मर्द उस पर कामुक निगाहे डालते थे लेकिन वह किसी के हाथ नही आई थी और फिर छोटी जगह होने की वजह से कोई इतनी हिम्मत कर भी नही पाता था कि उसको फसा सके. रजनी का जिस्म बहुत ही गोरा और भरा हुआ था, उसकी आदत हमेशा से अपनी साड़ी को अपने साल खाए हुए पेट और गहरी नाभि के नीचे बाँधती थी, जिसके कारण कोई भी जब उसके गदराए साल खाए पेट और गहरी नाभि को देखता तो उसका लंड खड़ा हुए बिना नही रह सकता था. उसके गदराए पेट और बड़ी सी गहरी नाभि को जब मुहल्ले का कोई भी आदमी बाहर नल पर पानी भरते देखता तो वह ज़रूर अपने लंड को मसल्ने पर मजबूर हो जाता था. रजनी की जांघे खूब मोटी-मोटी और कसी हुई नज़र आती थी और उसके दूध 40 साइज़ के उसके ब्लाउज में समाते ही नही थे इसीलिए उसके ब्लॉज के उपर के दो बटन कितना भी बंद कर दो लेकिन थोड़ी देर बाद अपने आप खुल जाते थे.

और रजनी हरदम अपने मोटे-मोटे कसे हुए दूध की ओर ध्यान नही दे पाती थी. और उसका पल्लू जब उसके दूध से सरक जाता और किसी मनचले की पूरी नज़रे उसके दोनो दूध के बीच की गहराई में समा जाती थी तब रजनी को ध्यान आता और वह अपने पल्लू को अपने दूध पर डाल लेती थी. रजनी का सबसे मादक और कामुक हिस्सा जो था वह थी उसकी मोटी-मोटी फैली हुई गदराई गान्ड, उसकी मोटी गान्ड तो ऐसी थी कि देखने पर लगता था कि कोई उसके चूतड़ के दोनो भारी-भारी पाटो को फैलाए हुए है, मतलब उसकी गान्ड के दोनो पाटो के बीच बहुत ज़्यादा गॅप था और कोई भी जब उसकी मोटी गदराई गान्ड को देखता तो यही सोचता होगा कि उसका लंड सीधे बिना उसकी गान्ड के मोटे-मोटे पाटो को फैलाए ही उसकी गान्ड में घुस जाएगा, कुल मिला कर रजनी 45 की होने के बाद भी पूरी तरह सुडोल और भरी हुई थी.


A + B ka whol squre = a squre + b squre phir, lo men to phir bhul gai, phir se try karti hu, a + b ka whol squre = a squre, phir kya tha, phir uske bad, yad AA JA yad AA ja, kya tha, kya tha? Off ho kya yaar yah maths to ek din meri Jan lekar chhodega. Pata nahi kis gadhe ne yah maths bana diya ratta maro to yad nahi hota hai aur samjho to samajh nahi aata hai, kya karu? Kya karu? Ek bar phir try karti hu, a + b ka whol squre.


Rashmi, o Rashmi yah kya ratta laga rakha hai? Apne man men nahi padh sakti kya? Pura ghar SAR par utha rakha Hai. Rashmi- mummy kya karu? kal maths ka paper hai aur mujhse yah sab samikaran yaad hi nahi hote hain, meri to jan nikli ja rahi hai pata nahi kahi fail ho gai to… Rajni- ab samajh me aa raha hai, jab men kahti thi ki ja apne bhaiya se thoda padh le tab to tujhe samajh nahi aaya ab chali hai maths ka ratta marne, are pagli kabhi maths bhi rat kar yaad hoti hai kya?

Rashmi (apna muh bana kar)- mujhe nahi padhna bhaiya se, bhaiya itne bor hai ki jab mujhe padhate hai to mujhe neend aane lagti hai, unse padhne se achcha hai men maths me supply se hi pas ho jaungi, ya phir koi bhala teacher meri copy check karega to shayad gress se hi pas kar de. kyo mummy kismat bhi koi cheej hai, ho sakta hai pas wala student mujhe apni puri copy nakal karne ko de de, phir to men pas bhi ho sakti hu na.

Rajni- bas bina matlab ki bate hi sochti rahti hai, padhai me to tera dhyan hi nahi lagta, pata nahi tera kya hoga, fail hui to samajh lena tera bhai teri jam kar khabar lega. Rashmi (apne man me badi aai mujhe bhaiya ka dar dikhane wali, bhaiya se dare meri juti, aur vaise bhi pas bhi ho gaee to kaun sa teer mar dungi, yahan kaun sa raj sihasan mil jayega, itne salo se dhakke kha kar pas hoti aai hu to is sal bhi kahi na kahi se teer me tukka lag hi jayega.)- mummy mujhe to neend aa rahi hai men to ab nahi padh sakti, subah ke paper ka subah dekha jayega.

Rajni- achcha chal so ja tujhe samjhana mere bas ki bat nahi hai, ab jab Raj aayega to vo hi tujhse bat karega. Rashmi (apni aankhe apni mummy ko dikhati hui)- mummy agar bhaiya se kuch kaha to samajh lena, men bhi kabhi na kabhi tumse badla le lungi. Rajni (usko dekh kar gussate huye) chinal rand apni mummy KO dhamki deti hai, tu ruk men abhi Teri tange tod deti hoon. (aur Rashmi ki aur jati hai aur Rashmi apni mummy ko dekh kar muskurate huye apne room se bhag kar Raj ke room men jakar andar se darwaja band kar leti hai.)

Rajni (uske piche jakar Raj ke room ko bahar se band karte huye)- dusht kahi ki ab andar hi sadti rah jab tera bhai aayega to vah hi teri khabar lega. Rashmi- ha-ha kar do darwaja band mujhe kya, men to aaram se bhaiya ke bed par apni tange phaila kar so jati hu, (aur andar se chilla kar) good night mummy!

Rajni (palat kar vapas jate huwe badbadati hui) good night ki bachchi, yah ladki jaise-jaise badi hoti ja rahi hai iska bachpana aur bhi badhta ja raha hai, pata nahi iska gujara kaise hoga, kisi din meri nak jarur katwayegi. (lagbhag ek ghante bad koi bahar se darwaja khatkhatata hai aur jab Rajni jakar darwaja kholti hai to samne Raj ko dekh kar muskurate huye)- aa gaya beta! Raj- haan mummy aaj to bahut thak gaya hu, bada kam tha office me.
Rajni (darwaja lagate huye)- chal tu jaldi se hath muh dho le men tere liye khana laga deti hoon. Raj- thik hai mummy! (aur Raj apne room ki jakar jaise hi darwaja khol kar andar ki aur push karta hai.) Rajni- are beta Rashmi ne andar se band kar ke lagta hai so gai hai, Rashmi, o Rashmi, lagta hai so gai hai. Raj- chalo sone do mummy usko men yahi change kar leta hu aap jara mujhe tawel de do. (Rajni use tawel la kar deti hai aur Raj vahi apni pent utar kar tawel laga kar bathroom men ghus jata hai aur Rajni uske liye khana garam karne lagti hai. khana khane ke bad Raj vahi hall men baith kar tv on kar leta hai aur tv dekhne lagta hai.)

Rajni- bete men sone ja rahi hu, tujhe jab sona ho to mere hi bed par aakar so jana, Rashmi to ab uthne wali nahi hai ghode bech kar jo soti hai. Raj- koi bat nahi hai mummy, men aapke sath hi so jaunga. (Rajni Raj ki bat sun kar muskurati hui apne room men chali jati hai. Raj tv par news laga kar dekhne lagta hai aur dusri aur Rajni ki phuli hui chut usko pareshan karne lagti hai. Rajni ki umar us samay 45 sal thi aur uske do hi bachche the, Raj jo ki 25 sal ka tha aur Rashmi jo ki 18 sal ki thi, Rajni ke pati karib 3 sal pahle bimari ki vajah se mar chuke the, chunki unki sarkari naukri thi isliye anukampa men Raj ko unki jagah job mil gai thi aur vah nagar palika men babu ke pad par join ho gaya tha.

Rajni ek tej tarrat mahila thi lekin uski sabse badi kamjori ek hi thi jiska nam tha lund, lekin choti jagah me rahne ke karan vah apni bhavnao ko hamesha dabati aaee thi aur jab bhi usko lund ki jyada chah hoti tab vah apne hantho se hi apni phuli hui chut ko kuchal leti thi. mohalle ke kai mard us par kamuk nigahe dalte the lekin vah kisi ke hath nahi aai thi aur phir choti jagah hone ki vajah se koi itni himmat kar bhi nahi pata tha ki usko phasa sake. Rajni ka jism bahut hi gora aur bhara hua tha, uski aadat hamesha se apni sadi ko apne sal khaye huye pet aur gahri nabhi ke niche bandhti thi, jiske karan koi bhi jab uske gadaraaye sal khaye pet aur gahri nabhi ko dekhta to uska lund khada huye bina nahi rah sakta tha. Uske gadaraaye pet aur badi si gahri nabhi ko jab muhalle ka koi bhi aadmi bahar nal par pani bharte dekhta to vah jarur apne lund ko masalne par majboor ho jata tha. Rajni ki janghe khub mpti-moti aur kasi hui najar aati thi aur uske doodh 40 size ke uske baluj men samate hi nahi the isiliye uske blauj ke upar ke do batan kitna bhi band kar do lekin thodi der bad apne aap khul jate the.

Aur Rajni hardam apne mote-mote kase huye doodh ki aur dhyan nahi de pati thi. aur uska pallu jab uske doodh se sarak jata aur kisi manchale ki puri najre uske dono doodh ke beech ki gahrai men sama jati thi tab Rajni ko dhyan aata aur vah apne pallu ko apne doodh par dal leti thi. Rajni ka sabse madak aur kamuk hissa jo tha vah thi uski moti-moti phaili hui gadaraai gaanD, uski moti gaanD to aisi thi ki dekhne par lagta tha ki koi uske chutd ke dono bhari-bhari pato ko phailaye huye hai, matlab uski gaanD ke dono pato ke beech bahut jyada gap tha aur koi bhi jab uski moti gadaraai gaanD ko dekhta to yahi sochta hoga ki uska lund sidhe bina uski gaanD ke mote-mote pato ko phailaye hi uski gaanD men ghus jayega, kul mila kar Rajni 45 ki hone ke bad bhi puri tarah sudol aur bhari hui thi.




(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &;
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj sharma
User avatar
rajaarkey
Super member
Posts: 6266
Joined: 10 Oct 2014 10:09
Contact:

2

Postby rajaarkey » 01 Jan 2017 19:06

उसकी फूली हुई चूत और गदराई मोटी गान्ड की कल्पना करके कई लोग रोज अपना लंड हिलाते होंगे, वह अक्सर बाहर के नल से पानी भरने जाती थी और वहाँ आस पास के लोग बस उसको भारी बाल्टी उठाने के लिए झुकने का ही इंतजार करते थे ताकि उसके मोटे-मोटे चुतड़ों का पूरी तरह से दीदार हो जाए. रजनी को बेड पर लेटे हुए लंड लेने की खूब इच्छा हो रही थी और वह सीधे लेटे हुए अपने पेट की तरफ से अपनी साड़ी के अंदर हाथ डाल कर अपनी फूली हुई चूत को धीरे-धीरे सहला रही थी. और अपने मन में अपनी चूत को सहलाते हुए)- कितनी जल्दी झान्टे बढ़ जाती है अभी एक हफ्ते पहले ही तो बनाई थी, जब झांट बना कर अपनी फूली हुई चूत पर हाथ फेरो तो बड़ा अच्छा लगता है. पर अपने नसीब में बस खुद के हाथो से ही अपनी चूत को सहलाना लिखा है. अभी तो उंगली भी नही कर सकती कहीं राज ना आ जाए.. (और रजनी अपनी कल्पना में मोटे-मोटे लंड को सोच-सोच कर गरम हो रही थी और उसकी आँखो में नींद नही थी, करीब 1 घंटे बाद राज अंदर आता है और अपनी मम्मी के साइड में लेट जाता है, ज़्यादा थके होने के कारण उसकी जल्दी ही नींद लग जाती है.


करीब 10 मिनट बाद रजनी अपने बेटे की ओर करवट लेकर अपनी आँखे खोल कर अपने बेटे को देखने लगती है. पहले तो उसे राज को देख कर प्यार आता है और वह मुस्कुराकर राज के सर के बालो में अपनी उंगलिया फसा कर उसके सर को सहलाने लगती है, और फ्लॅशबॅक में जाकर अपने बीते हुए दिनो को याद करती हुए..) अगर राज ना होता तो इसके पापा के मरने के बाद हम माँ बेटियो का क्या होता? (और राज को देख कर उसे उस पर प्यार आता है और वह राज के गाल को अपने मूह से चूम लेती है, तभी राज एक दम से करवट लेकर सीधा होकर सो जाता है और अचानक उसका टॉवेल उसकी कमर से अलग हो जाता है. रजनी की निगाहे राज के अंडरवेर में समाए मोटे लंड पर पड़ती है तो उसके चेहरे का रंग एक दम से फीका पड़ जाता है और वह एक टक राज के मोटे लंड जो कि सोया हुआ भी काफ़ी मोटा लग रहा था को घूर-घूर कर देखने लगती है.

उसकी चूत मे एक दम से चिकनाहट अपने आप बढ़ जाती है और जब वह राज के चेहरे को देखती है तो उसे अपने बेटे मे छुपा एक कसीला जवान मर्द नज़र आने लगता है और वह राज को प्यार से देखती है और उसका हाथ अपने आप ही अपने बेटे के गाल को छूने के लिए चला जाता है और आज वह पहली बार अपने बेटे के गालो को किसी मर्द के गाल समझ कर हाथ लगा रही थी. कुच्छ देर तक रजनी राज के चेहरे और कभी बीच-बीच में उसके मोटे लंड को देखती है और फिर मुस्कुराकर राज के सर के बालो में अपनी उंगलिया फसा कर उसके सर को सहलाने लगती है और अपने मन मे सोचती है..) अब राज भी बड़ा हो गया है और शादी लायक नज़र आने लगा है, पर इसके लंड का साइज़ तो काफ़ी बड़ा नज़र आ रहा है, क्या इसने कभी किसी को चोदा होगा? अरे नही! यह तो बड़ा ही सीधा लड़का है यह ऐसी हरकत नही कर सकता है. पर इसका लंड कितना बड़ा है, जब खड़ा होता होगा तो कितना बड़ा हो जाता होगा? रजनी की चूत काफ़ी गीली हो गई थी और वह अपने हाथों से अपनी चूत को सहलाती हुई राज के बारे में सोचती हुई सो जाती है.

सुबह-सुबह 4 बजे करीब, राज अचानक नींद में करवट लेकर अपनी एक टाँग अपनी मम्मी रजनी के मोटे-मोटे गदराए चुतड़ों पर रख लेता है और उसका मोटा लंड विकराल रूप धारण किए खड़ा रहता है और वह सीधा उसकी मम्मी की मोटी गदराई गान्ड की दरार में साड़ी के उपर से ही घुसा रहता है. रजनी की नींद जब खुलती है तो अपनी गदराई मोटी गान्ड में कुछ महसूस करती है और अपने हाथ को पीछे ले जाती है उसके हाथ में अपने बेटे का मस्त तना हुआ लंड आ जाता है और रजनी के होश उड़ जाते है! वह धीरे से करवट लेती है लेकिन राज की टाँग उसके उपर से हटती नही है और राज का घुटना सीधे उसकी फूली हुई चूत के उपर आ जाता है और रजनी के मूह से एक हल्की सी सिसकी निकल जाती है. जब वह गर्दन घुमा कर राज की ओर मूह करती है तो राज मस्त खर्राटे लेकर सोया हुआ रहता है, रजनी की फूली हुई चूत में राज के घुटनो का भारी वजन उसकी चूत को और फूलने पर मजबूर कर देता है और उसका चेहरा लाल हो जाता है.

रजनी को अपनी फूली हुई चूत पर राज के पेर के घुटनो का वजन बहुत अच्छा लगता है और वह अपने हाथ को राज के घुटनो के उपर रख कर हल्के से अपनी फूली हुई चूत पर दबाती है तो उसकी चूत से पानी आ जाता है और वह आआअहह करके अपनी दोनो टाँगो को थोड़ा और फैला लेती है और उसके ऐसा करने से राज के पेर के घुटने का सीधा वजन उसकी फूली हुई चूत के तने हुए भज्नाशे पर पड़ जाता है और रजनी अपने दाँतों से अपने होंठ को कस कर दबा लेती है.

चूँकि रजनी पेंटी नही पहनती थी इसलिए उसकी साड़ी और पेटिकोट के पतले कपड़े के उपर से उसकी मस्तानी फूली हुई चूत पूरी उभरी हुई नज़र आ रही थी और उससे रहा नही जा रहा था और वह राज के घुटनो को हल्के से अपनी फूली हुई चूत पर दबा रही थी. तभी राज नींद में अपने हाथ को अपनी मम्मी के मोटे-मोटे दूध पर रख कर उससे सट जाता है और उसका मोटा लंड जो सुबह-सुबह कुछ ज़्यादा ही तना हुआ था उसकी मम्मी की मोटी जाँघो में चुभने लगता है और रजनी की फूली हुई चूत से पानी बह कर उसकी गदराई गान्ड के छेद तक पहुच जाता है. रजनी एक तरह से अपने बेटे की बाँहो में जकड़ी सीधी लेटी हुई थी और उसके बेटे के पैर का घुटना उसकी फूली हुई चूत में रखा हुआ था और उसका मोटा लंड उसकी मम्मी की मोटी जाँघ में साइड से धसा हुआ था.

रजनी से रहा नही जाता है और वह अपने बेटे के लंड को उसके अंडरवेर के उपर से धीरे से पकड़ कर जब उसकी लंबाई और मोटाई का अनुभव करती है तो उसकी चूत का खड़ा हुआ मोटा दाना कूदने लगता है और वह अपनी चूत मराने के लिए तड़पने लगती है. आज उसे बहुत दिनो बाद असहनीय पीड़ा अपनी चूत में महसूस होने लगती है वह बहुत संभाल-संभाल कर अपने बेटे के मोटे लंड को अपने हाथो से दबा-दबा कर उसकी मस्त मोटाई और लंबाई का जयजा लेती है और अपने मन में बस यही सोचती रहती है कि हे भगवान राज का लंड कितना बड़ा और कितना मोटा है.. उसकी फूली हुई चूत इस कदर खुजलाने लगती है कि वह अपने बेटे के लंड को अपने हाथों में कस्ति हुई उसकी मोटाई की कल्पना करते हुए अपनी आँखे बंद किए हुई मस्ती मे डूबी रहती है.

तभी अचानक राज करवट लेकर अपनी टाँगे अपनी मम्मी की चूत से हटा कर सीधा लेट जाता है और रजनी हड़बड़ा कर उसके लंड को छोड़ देती है, और जब राज की ओर देखती है तभी उसकी नज़र राज के लंड की ओर पड़ती है और उसके मोटे लंड को जो कि उसके अंडरवेर को छत की ओर उठाए सीधा तना हुआ था को देख कर उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती है और जहाँ उसकी चूत गीली हो जाती है वही उसका गला सूखने लगता है.

रजनी पागलो के तरह अपने बेटे के खड़े लंड को लेटी-लेटी घुरती रहती है और अपने हाथ को अपनी साड़ी के अंदर डाल कर अपनी फूली हुई चूत को सहलाती रहती है. जब उससे रहा नही जाता है तो वह हिम्मत करके डरते हुए राज के लंड को धीरे से अपने हाथ में पकड़ कर हल्के से उसके लंड को दबाती है और उसकी चूत पानी-पानी हो जाती है और वह जैसे ही राज के लंड को थोड़ा ज़ोर से अपने हाथ से पकड़ कर दबाती है राज एक दम से दूसरी ओर करवट ले लेता है. और उसकी पीठ उसकी मम्मी की तरफ हो जाती है और रजनी का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगता है तभी सुबह के 6 बजे का अलार्म बज उठता है और रजनी एक दम हड़बड़ा कर उठ जाती है.

रजनी राज के उपर एक चादर डाल कर धीरे से रूम के बाहर चली जाती है और फिर राज के रूम का दरवाजा बजा कर रश्मि को उठाती है. रश्मि तैयार हो जाती है और कुछ देर बाद राज भी अपनी बाइक की चाबी लेकर रश्मि को बैठाता है और उसे उसके स्कूल के सामने ले जाकर उतारते हुए…)

राज- आराम से सोच समझ कर पेपर लिखना और कोशिश करना कि कोई भी प्रश्न छूटना नही चाहिए.

रश्मि (अपने दोनो हाथों से अपने भाई के हाथ को पकड़ कर..)- उहुउऊ भैया मुझे तो बहुत डर लग रहा है.

राज (मुस्कुराता हुआ उसके गाल पर हाथ फेर कर..)- अरे पागल! डरती क्यों है जा आराम से पेपर करना तू पास हो जाएगी.

रश्मि (मुस्कुराकर) भैया क्या मेरी जगह तुम एग्ज़ॅम नही दे सकते..?

राज (मुस्कुराकर उसके गाल पर चपत लगाते हुए..)- अब जाती है या दूं एक रख कर…!

रश्मि (मुस्कुराते हुए..)- जाती हूँ जाती हूँ बिगड़ते क्यो हो? अच्छा भैया बाइ!

राज (मुस्कुराकर)- चल बेस्ट ऑफ लक!!! (रश्मि मुस्कुराते हुए एग्ज़ॅम हॉल की ओर चल देती है और राज वापस घर आकर ऑफीस जाने की तैयारी करने लगता है, आज रजनी की नज़रे अपने बेटे के लिए बदली हुई नज़र आ रही थी, जब राज अपने कपड़े पहन रहा था तो रजनी उसको बड़ी हसरत भरी निगाहो से देख रही थी.

उसकी फूली हुई चूत उसे रात भर से परेशान कर रही थी, उसे अब उसका बेटा कामदेव का अवतार नज़र आने लगा था. राज अंडरवेर और बनियान पहने खड़ा हुआ ड्रेसिंग टेबल के सामने अपने बाल जमा रहा था और रजनी उसके कसिले बदन को बड़ी चाहत से घूर रही थी. तभी शीशे में देखता हुआ कुछ गुनगुनाते हुए अपने बाल सवार रहा था तभी उसकी नज़र अपनी मम्मी पर पड़ती है और अपनी मम्मी की कातिल निगाहो को जब वह अपने बदन को घूरते हुए पाता है तो एक पल के लिए उसकी नज़र अपनी मम्मी की नज़र के उपर ठहर जाती है.


फिर कुछ सोच कर वह मुस्कुराता हुआ फिर से अपने बाल सवारने लगता है और) राज- मम्मी चाइ तो पिला दो..!

रजनी (मुस्कुराकर)- बेटे चाइ के बजे दूध पिया कर..

राज- सॉरी!

रजनी- कुछ नही! अभी लेकर आती हूँ. (और फिर रजनी किचन की और अपनी मोटी गदराई गान्ड को हिलाते हुए जाने लगती है और राज पलट कर अपनी मम्मी को एक नज़र उपर से नीचे टक मारते हुए देखता है और फिर ना जाने क्या सोच कर मुस्कुरा देता है. कुछ देर बाद रजनी चाइ लेकर आती है और राज चाइ पीने लगता है लेकिन जैसे ही वह अपनी नज़रे अपनी मम्मी की ओर करता है, रजनी उसे ही देखती रहती है.)


Uski phuli hui chut aur gadaraai moti gaanD ki kalpna karke kai log roj apna lund hilate honge, vah aksar bahar ke nal se pani bharne jati
thi aur vaha aas pas ke log bas usko bhari balti uthane ke liye jhukne ka hi intjar karte the taki uske mote-mote chutdon ka puri tarah se didar ho jaye. Rajni ko bed par lete huye lund lene ki khub ichcha ho rahi thi aur vah sidhe lete huye apne pet ki taraf se apni sadi ke andar hath dal kar apni phuli hui chut ko dhire-dhire sahla rahi thi. aur apne man men apni chut ko sahlate huye)- kitni jaldi jhanthe badh jati hai abhi ek hafte pahle hi to banai thi, jab jhanth bana kar apni phuli hui chut par hath pero to bada achcha lagta hai. par apne naseeb men bas khud ke hatho se hi apni chut ko sahlana likha hai. abhi to ungli bhi nahi kar sakti kahi Raj na aa jaye.. (aur Rajni apni kalpana men mote-mote lund ko soch-soch kar garam ho rahi thi aur suki ankho men neend nahi thi, karib 1 ghante bad Raj andar aata hai aur apni mummy ke side men let jata hai, jyada thake hone ke karan uski jaldi hi neend lag jati hai.

Karib 10 minat bad Rajni apne bete ki aur karwat lekar apni aankhe khol kar apne bete ko dekhne lagti hai. pahle to use Raj ko dekh kar pyar aata hai aur vah muskuraakar Raj ke sar ke balo men apni ungliya phasa kar uske sar ko sahlane lagti hai, aur flashback men jakar apne bite huye dino ko yaad karti huwe..) Agar Raj na hota to iske papa ke marne ke bad ham ma betiyo ka kya hota? (aur Raj ko dekh kar use us par pyar aata hai aur vah Raj ke gal ko apne muh se chum leti hai, tabhi Raj ek dam se karwat lekar sidha hokar so jata hai aur achanak uska tawel uski kamar se alag ho jata hai. Rajni ki nigahe Raj ke underwear men samaye mote lund par padti hai to uske chehre ka rang ek dam se phika pad jata hai aur vah ek tak Raj ke mote lund jo ki soya hua bhi kaphi mota lag raha tha ko ghur-ghur kar dekhne lagti hai.

Uski chut me ek dam se chiknahat apne aap badh jati hai aur jab vah Raj ke chehre ko dekhti hai to use apne bete me chupa ek kasila jawan mard najar aane lagta hai aur vah Raj ko pyar se dekhti hai aur uska hath apne aap hi apne bete ke gal ko chune ke liye chala jata hai aur aaj vah pahli bar apne bete ke galo ko kisi mard ke gal samajh kar hath laga rahi thi. kuchh der tak Rajni Raj ke chehre aur kabhi beech-beech men uske mote lund ko dekhti hai aur phir muskuraakar Raj ke sar ke balo men apni ungliya phasa kar uske sar ko sahlane lagti hai aur apne man me sochti hai..) ab Raj bhi bada ho gaya hai aur shadi layak najar aane laga hai, par iske lund ka size to kaphi bada najar aa raha hai, kya isne kabhi kisi ko choda hoga? Are nahi! yah to bada hi sidha ladka hai yah aisi harkat nahi kar sakta hai. par iska lund kitna bada hai, jab khada hota hoga to kitna bada ho jata hoga? Rajni ki chut kaphi gili ho gai thi aur vah apne hantho se apni chut ko sahleti hui Raj ke bare men sochti hui so jati hai.

Subah-subah 4 baje karib, Raj achanak neend men karwat lekar apni ek tang apni mummy Rajni ke mote-mote gadaraaye chutdon par lad leta hai aur uska mota lund vikral rup dharan kiye khada rahta hai aur vah sidha uski mummy ki moti gadaraai gaanD ki darar men sadi ke upar se hi ghusa rahta hai. Rajni ki neend jab khulti hai to apni gadaraai moti gaanD men kuch mehsus karti hai aur apne hath ko piche lejati hai uske hath men apne bete ka mast tana hua lund aa jata hai aur Rajni ke hosh ud jate hai! vah dhire se karwat leti hai lekin Raj ki tang uske upar se hatti nahi hai aur Raj ka ghutna sidhe uski phuli hui chut ke upar aa jata hai aur Rajni ke muh se ek halki si siski nikal jati hai. jab vah gardan ghuma kar Raj ki aur muh karti hai to Raj mast kharrate lekar soya hua rahta hai, Rajni ki phuli hui chut men Raj ke ghutno ka bhari vajan uski chut ko aur phulne par majboor kar deta hai aur uska chehra lal ho jata hai.

Rajni ko apni phuli hui chut par Raj ke per ke ghutno ka vajan bahut achcha lagta hai aur vah apne hath ko Raj ke ghutno ke upar rakh kar halke se apni phuli hui chut par dabati hai to uski chut se pani aa jata hai aur vah aaaaahhhhhh karke apni dono tango ko thoda aur phaila leti hai aur uske aisa karne se Raj ke per ke ghutno ka sidha vajan uski phuli hui chut ke tane huye bhagnashe par pad jata hai aur Rajni apne danto se apne honth ko kas kar daba leti hai.

Chunki Rajni penty nahi pahanti thi isliye uski sadi aur petikot ke patle kapde ke upar se uski mastani phuli hui chut puri ubhari hui najar aa rahi thi aur usse raha nahi ja raha tha aur vah Raj ke ghutno ko halke se apni phuli hui chut par daba rahi thi. Tabhi Raj neend men apne hath ko apni mummy ke mote-mote doodh par rakh kar usse sat jata hai aur uska mota lund jo subah-subah kuch jyada hi tana hua tha uski mummy ki moti jangho men chubhne lagta hai aur Rajni ki phuli hui chut se pani bah kar uski gadaraai gaanD ke ched tak pahuch jata hai. Rajni ek tarah se apne bete ki banho men jakdi sidhi leti hui thi aur uske bete ke pairo ko ghutna uski phuli hui chut men rakha hua tha aur uska mota lund uski mummy ki moti jangh mein side se dhasa hua tha.

Rajni se raha nahi jata hai aur vah apne bete ke lund ko uske underwear ke upar se dhire se pakad kar jab uski lambai aur motai ka anubhav karti hai to uski chut ka khada hua mota dana kudne lagta hai aur vah apni chut marane ke liye tadapne lagti hai. Aaj use bahut dino bad asahneey pida apni chut men mehsus hone lagti hai vah bahut sambhal-sambhal kar apne bete ke mote lund ko apne hatho se daba-daba kar uski mast motaaee aur lambai ka jayja leti hai aur apne man men bas yahi sochti rahti hai ki he bhagwan Raj ka lund kitna bada aur kitna mota hai.. uski phuli hui chut is kadar khujlane lagti hai ki vah apne bete ke lund ko apne hantho men kasti hui uski motaaee ki kalpna karte huye apni aankhe band kiye hui masti me dubi rahti hai.

Tabhi achanak Raj karwat lekar apni tange apni mummy ki chut se hata kar sidha let jata hai aur Rajni hadbada kar uske lund ko chod deti hai, aur jab Raj ki aur dekhti hai tabhi uski najar Raj ke lund ki aur padti hai aur uske mote lund ko jo ki uske underwear ko chhat ki aur uthaye sidha tana hua tha ko dekh kar uski aankhe phati ki phati rah jati hai aur jaha uski chut gili ho jati hai vahi uska gala sukhne lagta hai.

Rajni paglo ke tarah apne bete ke khade lund ko leti-leti ghurti rahti hai aur apne hath ko apni sadi ke andar dal kar apni phuli huee chut ko sahlati rahti hai. jab usse raha nahi jata hai to vah himmat karke darte hue Raj ke lund ko dhire se apne hath mein pakad kar halke se uske lund ko dabati hai aur uski chut pani-pani ho jati hai aur vah jaise hi Raj ke lund ko thoda jor se apne hath se pakad kar dabati hai Raj ek dam se dusri aur karwat le leta hai. aur uski peeth uski mummy ki taraf ho jati hai aur Rajni ka dil jor-jor se dhadkne lagta hai tabhi subah ke 6 baje ka alarm baj uthta hai aur Rajni ek dam hadbada kar uth jati hai.

Rajni Raj ke upar ek chadar dal kar dhire se room ke bahar chali jati hai aur phir Raj ke room ka darwaja baja kar Rashmi ko uthati hai. Rashmi taiyar ho jati hai aur kuch der bad Raj bhi apni byke ki chabi lekar Rashmi ko baithata hai aur use uske school ke samne le jakar utarte huye…)
Raj- aaram se soch samajh kar papar likhna aur koshish karna ki koi bhi prashn chutna nahi chahiye. Rashmi (apne dono hantho se apne bhai ke hath ko pakad kar..)- uhuuu bhaiya mujhe to bahut dar lag raha hai. Raj (muskurata hua uske gal par hath pher kar..)- are pagal! darti kyo hai ja aaram se paper karna tu pas ho jayegi. Rashmi (muskuraakar) bhaiya kya meri jagah tum exam nahi de sakte..? Raj (muskuraakar uske gal par chapat lagate huye..)- ab jati hai ya du ek rakh kar…! Rashmi (muskurate huye..)- jati hu jati hu bigadte kyo ho? achcha bhaiya bye! Raj (muskuraakar)- chal best of luck!!! (Rashmi muskurate huye exam hall ki aur chal deti hai aur Raj vapas ghar aakar office jane ki taiyari karne lagta hai, aaj Rajni ki najre apne bete ke liye badli hui najar aa rahi thi, jab Raj apne kapde pahan raha tha to Rajni usko badi hasrat bhari nigaho se dekh rahi thi.

Uski phuli hui chut use rat bhar se pareshan kar rahi thi, use ab uska beta kamdev ka avtar najar aane laga tha. Raj underwear aur baniyan pahne khada hua dressing table ke samne apne bal jama raha tha aur Rajni uske kasile badan ko badi chahat se ghur rahi thi. Tavi shishe men dekhta hua kuch gungunate huye apne bal sawar raha tha tabhi uski najar apni mummy par padti hai aur apni mummy ki katil nigaho ko jab vah apne badan ko ghurte huye pata hai to ek pal ke liye uski najar apni mummy ki najar ke upar thahar jati hai.


Phir kuch soch kar vah muskurata hua phir se apne bal sawarne lagta hai aur) Raj- mummy chai to pila do..! Rajni (muskuraakar)- bete chai ke bajay doodh piya kar.. Raj- sorry! Rajni- kuch nahi! Abhi lekar aati hoon. (aur phir Rajni kichan ki aur apni moti gadaraai gaanD ko hilate huye jane lagti hai aur Raj palat kar apni mummy ko ek najar upar se niche tak marte huye dekhta hai aur phir na jane kya soch kar muskura deta hai. kuch der bad Rajni Chai lekar aati hai aur Raj chai pine lagta hai lekin jaise hi vah apni najre apni mummy ki aur karta hai, Rajni use hi dekhti rahti hai.)Raj (muskuraakar)- kya bat hai mummy? aise kyo dekh rahi ho? Rajni (muskuraakar)- dekh rahi hu mera beta kitna handsome aur jawan ho gaya hai, ab lagta hai teri shadi karne ka waqt aa gaya hai. Raj- are mummy! abhi se mujhe shadi karke kya karna hai? Rajni- beta teri har tarah se dekhbhal ke liye tere liye bibi to lana hi padegi na. Raj (muskurate hoowe apni mummy ko dekh kar)- mummy aap se behtar dekhbhal meri aur kaun kar sakti hai? Rajni- (muskurate huye..) par bete bibi aur mummy men bahut phark hota hai.

Raj (muskuraakar apni mummy ke khubsurat chehre ki aur dekhta hai aur phir…) to thik hai mummy aap hi dekh lo mere liye koi ladki, lekin apne jaisi hi bibi lana mere liye dhoondh kar. Rajni (muskura kar uske gal ko khichti huee..) pagle mere jaisi bibi kya karega? mere jaisi bhari bibi mil gai to tu sambhal nahi payega use? Raj- are aap fikar mat karo mummy men sab sambhal lunga, aur vaise bhi mujhe to aap jaisi personality ki aurte hi achchi lagti hai. Rajni (muskuraakar)- kya bat hai? bada dekhne laga hai aaj kal tu aurto ko… Raj (muskuraakar) are nahi mummy! men to majak kar raha tha!!! Rajni- kahi tera kisi ladki ya aurat se koi chakkar to nahi chal raha hai. Raj- are kya bat karti ho mummy? bhala mujhse kaun aurat phasegi? Rajni- kyon? achcha bhala to hai, dhyan rakhna aaj kal ki aurte bahut chalak hoti hai kab jawan ladke ko phasa le kuch pata nahi chal pata hai. Raj- are nahi mummy men to aurto se dur hi rahta hu aur vaise bhi mujhe mere office se hi phursat nahi milti te phir in sab kamo ke liye waqt hi kaha hai?

(aur Raj apna bag lekar jaise hi roj ki tarah apni mummy ke gale lagta hai, Rajni aaj kuch alag hi andaj men apne bete ko apni banho men bhar leti hai aur uske gal ko apne rasile hontho se chum leti hai, Raj ko roj ki jhappi se kuch alag ahasaas hota hai aur roj se kuch jyada der tak uski mummy usse chipki rahti hai aur phir Raj jab apni mummy se alag hokar uske chehre ki aur dekhta hai to aaj use uski mummy ka chehra kaphi surkh lal najar aata hai aur vah apni mummy ke chehre ko dekhte huye kuch sochne lagta hai, tabhi Rajni uske galo par hath pherti huee..)

Rajni- Achcha bye bete! Raj- (ek dam se muskuraakar) bye mummy!! (aur phir Raj apne office ki aur nikal jata hai.!)

(Rashmi exam hall se bahar apna muh latkaye bahar nikalti hai aur uski najar Komal par padti hai Komal uski khas saheli thi jo ki uski hi class men padhti thi.)

Komal- Hey Rashmi! kya hua? kaisa gaya tera paper?

Rashmi- (apna muh bana kar..) yaar hal to mene pura kar diya hai par ab copy check karne wale ke upar hai ki vah pass karta hai ya nahi vaise mera paper to hamesha achcha hi jata hai par pata nahi no. kyon kam aate hain.

Komal- (muskuraakar Rashmi ki moti gaanD par apna hath marte huye..) ja ek bar copy check karne wale ko apni moti gaanD nangi karke dikha de phir dekhna tu sidhe merit men aayegi.

Rashmi- (usko ghur kar dekhti huee..) tera muh kabhi band nahi rah sakta hai, yahan men tention me hoon aur tujhe majak sujh rahi hai.

Komal- (uski Gaal khich kar) are janeman chalo men tumhari tention abhi dur kar deti hoon.

Rashmi- (usko dekh kar) vo kaise?

Komal- are men tere liye ek bahut hi mast photo album le kar aai hoon, usme bahut hi mast chudai ke photo hai aur bilkul jaisa lund tujhe achcha lagta hai bilkul vaise hi mote-mote lund ke bade hi colorfull photo hai. tu jab dekhegi to teri chut ek dam mast ho jayegi.

Rashmi- (Komal ki bat sun kar idhar udhar apni najre dodati huee..) kaha hai bata na?

Komal- are pagal ab yahi dekhegi kya chal ham log piche wale garden men kahi ek taraf baith kar aaram se dekhege.

Rashmi- (muskurate Huye..) chal!

(aur phir dono garden ki aur jane lagte hai Komal garden men baithte apne Bag ko khol kar apni book ke andar se ek badi si album nikalti hai aur jaise hi usko kholte huye pahla photo Rashmi ko dikhati hai, Rashmi ki aankhe khuli ki khuli rah jati hai, us photo men ke ladki ek ladke ke mote lund ko apne hatho me kase huye uske lund ke top ko apna muh khol kar muh me lene ki taiyari ke pos men rahti hai.


(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &;
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj sharma
User avatar
rajaarkey
Super member
Posts: 6266
Joined: 10 Oct 2014 10:09
Contact:

3

Postby rajaarkey » 01 Jan 2017 19:07

राज (मुस्कुराकर)- क्या बात है मम्मी? ऐसे क्यो देख रही हो?

रजनी (मुस्कुराकर)- देख रही हूँ मेरा बेटा कितना हॅंडसम और जवान हो गया है, अब लगता है तेरी शादी करने का वक़्त आ गया है.

राज- अरे मम्मी! अभी से मुझे शादी करके क्या करना है?

रजनी- बेटा तेरी हर तरह से देखभाल के लिए तेरे लिए बीबी तो लाना ही पड़ेगी ना.

राज (मुस्कुराते हुए अपनी मम्मी को देख कर)- मम्मी आप से बेहतर देखभाल मेरी और कौन कर सकती है?

रजनी- (मुस्कुराते हुए..) पर बेटे बीबी और मम्मी में बहुत फ़र्क होता है.

राज (मुस्कुराकर अपनी मम्मी के खूबसूरत चेहरे की ओर देखता है और फिर…) तो ठीक है मम्मी आप ही देख लो मेरे लिए कोई लड़की, लेकिन अपने जैसी ही बीबी लाना मेरे लिए ढूँढ कर.

रजनी (मुस्कुरा कर उसके गाल को खिचती हुई..) पगले मेरे जैसी बीबी क्या करेगा? मेरे जैसी भारी बीबी मिल गई तो तू संभाल नही पाएगा उसे?

राज- अरे आप फिकर मत करो मम्मी में सब संभाल लूँगा, और वैसे भी मुझे तो आप जैसी पर्सनॅलिटी की औरते ही अच्छी लगती है.

रजनी (मुस्कुराकर)- क्या बात है? बड़ा देखने लगा है आज कल तू औरतो को…

राज (मुस्कुराकर) अरे नही मम्मी! में तो मज़ाक कर रहा था!!!

रजनी- कहीं तेरा किसी लड़की या औरत से कोई चक्कर तो नही चल रहा है.

राज- अरे क्या बात करती हो मम्मी? भला मुझसे कौन औरत फसेगि?

रजनी- क्यों? अच्छा भला तो है, ध्यान रखना आज कल की औरते बहुत चालाक होती है कब जवान लड़के को फसा ले कुछ पता नही चल पाता है.

राज- अरे नही मम्मी में तो औरतो से दूर ही रहता हूँ और वैसे भी मुझे मेरे ऑफीस से ही फ़ुर्सत नही मिलती तो फिर इन सब कामो के लिए वक़्त ही कहाँ है?

(और राज अपना बॅग लेकर जैसे ही रोज की तरह अपनी मम्मी के गले लगता है, रजनी आज कुछ अलग ही अंदाज में अपने बेटे को अपनी बाँहो में भर लेती है और उसके गाल को अपने रसीले होंठो से चूम लेती है, राज को रोज की झप्पी से कुछ अलग अहसास होता है और रोज से कुछ ज़्यादा देर तक उसकी मम्मी उससे चिपकी रहती है और फिर राज जब अपनी मम्मी से अलग होकर उसके चेहरे की ओर देखता है तो आज उसे उसकी मम्मी का चेहरा काफ़ी सुर्ख लाल नज़र आता है और वह अपनी मम्मी के चेहरे को देखते हुए कुछ सोचने लगता है, तभी रजनी उसके गालो पर हाथ फेरती हुई..)

रजनी- अच्छा बाइ बेटे!

राज- (एक दम से मुस्कुराकर) बाइ मम्मी!! (और फिर राज अपने ऑफीस की ओर निकल जाता है.!)

(रश्मि एग्ज़ॅम हॉल से बाहर अपना मूह लटकाए बाहर निकलती है और उसकी नज़र कोमल पर पड़ती है कोमल उसकी खास सहेली थी जो कि उसकी ही क्लास में पढ़ती थी.)

कोमल- हे रश्मि! क्या हुआ? कैसा गया तेरा पेपर?

रश्मि- (अपना मूह बना कर..) यार हल तो मेने पूरा कर दिया है पर अब कॉपी चेक करने वाले के उपर है कि वह पास करता है या नही वैसे मेरा पेपर तो हमेशा अच्छा ही जाता है पर पता नही नंबर. क्यों कम आते हैं.

कोमल- (मुस्कुराकर रश्मि की मोटी गान्ड पर अपना हाथ मारते हुए..) जा एक बार कॉपी चेक करने वाले को अपनी मोटी गान्ड नंगी करके दिखा दे फिर देखना तू सीधे मेरिट में आएगी.

रश्मि- (उसको घूर कर देखती हुई..) तेरा मूह कभी बंद नही रह सकता है, यहाँ में टेन्षन मे हूँ और तुझे मज़ाक सूझ रही है.

कोमल- (उसकी गाल खीच कर) अरे जानेमन चलो में तुम्हारी टेन्षन अभी दूर कर देती हूँ.

रश्मि- (उसको देख कर) वो कैसे?

कोमल- अरे में तेरे लिए एक बहुत ही मस्त फोटो आल्बम ले कर आई हूँ, उसमे बहुत ही मस्त चुदाई के फोटो है और बिल्कुल जैसा लंड तुझे अच्छा लगता है बिल्कुल वैसे ही मोटे-मोटे लंड के बड़े ही कलरफुल फोटो है. तू जब देखेगी तो तेरी चूत एक दम मस्त हो जाएगी.

रश्मि- (कोमल की बात सुन कर इधर उधर अपनी नज़रे दौड़ाती हुई..) कहाँ है बता ना?

कोमल- अरे पागल अब यहीं देखेगी क्या चल हम लोग पीछे वाले गार्डेन में कहीं एक तरफ बैठ कर आराम से देखेगे.

रश्मि- (मुस्कुराते हुए..) चल!

(और फिर दोनो गार्डेन की ओर जाने लगते है कोमल गार्डेन में बैठते अपने बॅग को खोल कर अपनी बुक के अंदर से एक बड़ी सी आल्बम निकालती है और जैसे ही उसको खोलते हुए पहला फोटो रश्मि को दिखाती है, रश्मि की आँखे खुली की खुली रह जाती है, उस फोटो में एक लड़की एक लड़के के मोटे लंड को अपने हाथो मे कसे हुए उसके लंड के टॉप को अपना मूह खोल कर मूह मे लेने की तैयारी के पॉज़ में रहती है.

(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &;
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj sharma
User avatar
Kautilay
Novice User
Posts: 69
Joined: 26 Jun 2016 09:43
Contact:

Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby Kautilay » 01 Jan 2017 21:53

Good wishes for your new story
vnraj
Novice User
Posts: 70
Joined: 01 Aug 2016 21:16
Contact:

Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby vnraj » 02 Jan 2017 00:39

नई कहानी के लिए धन्यवाद दोस्त

Return to “Hindi ( हिन्दी )”

Who is online

Users browsing this forum: No registered users and 88 guests