घर के रसीले आम मेरे नाम complete

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rajaarkey
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Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby rajaarkey » 04 Jan 2017 09:27


अगले दिन राज अपनी बहन को लेकर कश्मीर घूमने के लिए निकल पड़ता है और वो लोग अपनी ट्रेन पकड़ कर चल देते है दोनो का रिज़र्वेशन रहता है और दिन में दोनो आमने सामने की बर्थ पर बैठे हुए खिड़की से बाहर का नज़ारा देखते रहते है, राज खिड़की में देखते हुए रश्मि की ओर अपनी तिरछी नज़रे करके उसको उपर से नीचे तक देखता है, रश्मि ब्लू कलर के जीन्स और येल्लो कलर को टाइट टीशर्ट पहने रहती है, राज रश्मि के मोटे-मोटे बड़े-बड़े कठोर दूध को देख कर मस्त हो जाता है और उसका लंड खड़ा होने लगता है, वह रश्मि के चेहरे की ओर देखता है रश्मि उस समय बहुत ही खूबसूरत नज़रआ रही थी, रश्मि की हाफ बाँह की टीशर्ट उसकी कलाई पर एक घड़ी उसके कंधे तक लेज़र किए हुए बाल, उसके माथे पर एक छोटी सी बिंदी और उसके रसीले होंठो पर हल्की लिपस्टिक उसे बहुत खूबसूरत बना रही थी, राज हसरत भरी निगाहो से उसके रूप सोन्दर्य को देख रहा था, उसका दिल कर रहा था क़ि रश्मि को अपनी गोद में बैठा कर उसके रसीले होंठो को खूब कस के चूमे और उसकी कसी हुई मस्तानी छातियों को अपने सीने से लगा कर उसे अपनी बाँहो में भर ले, उसका लंड अपनी बहन की गदराई जवानी को देख कर पूरी तरह तन चुका था, वह अपने मन में अपने आप से बाते कर रहा था, रश्मि तू कितनी खूबसूरत है, काश एक बार तू मेरी बाँहो में आ जाती तो में तुझे इतना प्यार करता कि तू सारी जिंदगी मेरी बाँहो से दूर होने का नाम नही लेती, तेरी इस कातिल अदाओं ने और मदमस्त कसी हुई जवानी ने मुझे पागल कर दिया है, राज रश्मि के दूध को खा जाने वाली नज़रो से देख रहा था और रश्मि अपना मूह खिड़की की ओर करे हुए बाहर का नज़ारा ले रही थी, फिर एकाएक रश्मि ने अपनी नज़रो को एक पल के लिए राज की ओर किया और राज को बड़े गौर से अपने कसे हुए दूध को देखते हुए पकड़ लिया,

रश्मि ने जैसे ही की आँखो को देखा राज ने भी उसके दूध से नज़रे हटा कर रश्मि की आँखो में देखा और राज थोड़ा घबरा गया लेकिन फिर नॉर्मल होने की कोशिश करता हुआ रश्मि को देख कर थोड़ा सा मुस्कुरा दिया, रश्मि ने भी राज को देख कर एक स्माइल दे दी,राज फिर से खिड़की के बाहर देखने लगा और रश्मि राज को तिरछी नज़रो से देखती हुई अपने मन में खुस होती हुई सोचने लगी, क्या बात है आज तो भैया मेरे तने हुए दूध को कैसी खा जाने वाली नज़रो से देख रहे थे, कहीं ऐसा तो नही कि भैया भी मन ही मन में मुझे चोदना चाहते हो, लगता है भैया को मेरे दूध बहुत अच्छे लगते है और मेरे दूध की मोटाई और कसावट देख कर उनका मन मेरे दूध को अपने हाथ में भर कर दबाने और मसल्ने का कर रहा होगा, पर भैया ने आज से पहले कभी मेरे दूध को इस तरह नही देखा, लगता है आज में बहुत ज़्यादा सेक्सी और खूबसूरत लग रही हू, तभी तो मेरे हुस्न ने मेरे भैया को भी मेरी ओर देखने पर मजबूर कर दिया, अगर भैया मुझे चोदना चाहते होंगे तो एक बार फिर उनकी नज़रे मेरे कसे हुए दूध पर ज़रूर जाएगी तभी राज रश्मि की ओर मूह करता है और उसकी नज़रे सीधे रश्मि के कसे हुए दूध पर जाती है और फिर वह जल्दी से अपनी नज़रे रश्मि के चेहरे की ओर कर लेता है, इतनी देर में रश्मि उसकी नज़रो को समझ जाती है और मुस्कुराकर

रश्मि- भैया में आपके पास उधर खिड़की की तरफ बैठ जाउ

राज - मुस्कुरा कर आ जाओ

रश्मि - सीट से खड़ी होकर राज की ओर अपनी मोटी गान्ड करके झुक कर सीट से अपना बॅग और चादर उठाने लगती है और

राज रश्मि की जींस में कसी हुई मोटी गान्ड को देख कर मस्त हो जाता है और उसका मन होता है कि रश्मि की मोटी गान्ड को उसकी कमर में हाथ डाल कर अपनी गोद में रख ले, तभी रश्मि पलट कर राज की जाँघो में हाथ रखती हुई उसके करीब खिड़की के पास बैठ जाती है, रश्मि के उसके करीब आते ही रश्मि के जिस्म से उड़ती हुई महक राज को मस्त कर देती है और वह बिल्कुल करीब से रश्मि के गुलाबी गालो उसके रसीले होंठो और उसकी बड़ी-बड़ी तनी हुई कठोर चुचियो को देखने लगता है, उसके इतने करीब एक गदराई और खूबसूरत लड़की का अहसास उसे पागल किए रहता है और वह अब बड़ी आसानी से रश्मि के कसे हुए रसीले दूध को देखता रहता है और उसका लंड उसकी पेंट में खड़ा हो जाता है, रश्मि कुछ देर तक खिड़की के बाहर देखती रहती है फिर राज के कंधे पर अपने सर को रख कर उसके हाथ की बाँहो को पकड़ कर बैठ जाती है,

राज अपने हाथ को रश्मि की पीठ के पीछे से लेजा कर उसकी दूसरी साइड की बाँहो को पकड़ कर
राज - क्या हुआ बोरियत हो रही है क्या
रश्मि- मुस्कुराकर नही ऐसी कोई बात नही है
राज - बहुत चुप-चुप है कुछ बोल ना
रश्मि- अपने मन में क्या बोलूं भैया मेरी चूत तो तुम्हारे मोटे लंड को लेने के लिए तड़प रही है, पता नही तुम कब अपनी बहन की फूली हुई चूत को अपने मोटे लंड से फाड़ोगे,
राज - उसकी बाँहे दबाता हुआ, क्या हुआ कुछ बात करो ना
रश्मि- अपना सर उसके कंधे से उठा कर, भैया में इन कपड़ो में कैसी लग रही हूँ
राज - मुस्कुराकर एक दम मस्त
रश्मि- क्या
राज - उसके गोरे गालो को खिचता हुआ, मेरा मतलब है तू बहुत खूबसूरत लग रही है
रश्मि- मुस्कुराकर सच
राज - रश्मि की बाँहो को पकड़ कर अपनी ओर दबाते हुए तू दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की है
रश्मि- अपने उसके कंधे पर फिर से अपना सर रखती हुई, अपने मन में जब में आपको इतनी अच्छी लगती हूँ तो मुझे एक बार अपने मोटे लंड से चोद क्यो नही देते,

दोनो भाई बहन बैठे-बैठे एक दूसरे के बारे में बस कल्पना करते रहते है और ट्रेन अपनी रफ़्तार से दौड़ती रहती है, जब रात हो जाती है तो उनके आस पास की बर्थ खाली ही रहती है और राज रश्मि को उसकी बर्थ पर जाकर सोने के लिए कहता है तो रश्मि उसे कहती है, नही भैया में तो आपके पास ही बैठूँगी
राज - क्यो तुझे नींद नही आ रही है क्या
रश्मि- नही अभी तो नही आ रही है और आएगी तो में आपके कंधे पर सर रख कर सो जाउन्गी, पर अगर आपको लेटना हो तो में अपनी सीट पर चली जाती हूँ
राज - नही-नही बैठी रहो में भी अभी नही सोना चाहता हूँ
खिड़की से ठंडी हवा उनके बदन पर पड़ती रहती है और रश्मि अपने भैया से चिपकी हुई उसके कंधे पर अपना सर रखे बैठी रहती है, राज रश्मि के पीछे से हाथ डाले उसकी दूसरी साइड की बाँहो पर अपने हाथ को हल्के -हल्के फेरता रहता है, वह कभी उसके बालो में उंगलिया चलता है कभी उसकी बाँहो को सहलाता रहता है, रात को लगभग 11 बज चुके होते है और दोनो चिपके हुए बैठे रहते है रश्मि अपनी आँखे बंद किए राज के कंधे पर सर रख कर बैठी रहती है,
राज - रश्मि के सर पर अपना मूह फेरता हुआ, रश्मि सो गई क्या
रश्मि- जागती रहती है पर कोई जवाब नही देती है
राज - रश्मि, ओ रश्मि, सो गई क्या
रश्मि- जब दुबारा कोई जवाब नही देती है तो राज अपने होंठो को उसके गुलाबी गालो से चिपका लेता है और धीरे-धीरे अपनी बहन के गोरे-गोरे गालो को चूमने लगता है, रश्मि राज की इस हरकत से सिहर जाती है और उसकी चूत फूलने लगती है, राज उसके गालो को चूमता हुआ धीरे से कहता है रश्मि तू बहुत खूबसूरत है,

रश्मि- अपनी आँखे बंद किए हुए अपने मन में खूबसूरत हूँ तो अपने मोटे लंड से मुझे चोद क्यो नही देते भैया
राज - धीरे से रश्मि के गालो को अपने होंठो से सहलाता हुआ, मेरी गुड़िया कितनी बड़ी हो गई है मुझे तो अहसास भी नही था
रश्मि- अपने मन में, एक बार अपनी गुड़िया को पूरी नंगी करके उसकी चूत देख लो तब पता चलेगा आपको कि आपकी गुड़िया कितनी बड़ी हो गई है, आपके मोटे लंड को अपनी चूत में पूरा एक बार में ही भर लेगी

राज - रश्मि, ओ रश्मि, ऑफ हो मम्मी सच कहती है यह लड़की तो सचमुच घोड़े बेच कर सोती है चाहे कोई कहीं भी हाथ लगा दे,

रश्मि- अपने मन में भैया में तो सोने का नाटक ही इसलिए कर रही हूँ ताकि तुम कहीं तो मुझे हाथ लगाओ, इतना क्यो डरते हो भैया एक बार मेरे कसे हुए दूध ही दबा दो

राज सोचता है कि बेचारी बैठी-बैठी सो गई में एक काम करता हूँ में खिड़की की तरफ बैठ जाता हूँ और इसका सर अपनी गोद में रख कर इसे सुला देता हूँ यह कब तक ऐसे ही बैठी-बैठी सोएगी और फिर राज धीरे से उठ कर रश्मि को थोड़ा खीच कर बर्थ पर लिटा देता है और उसके सर के पास आकर खुद खिड़की के पास बैठ कर रश्मि के सर को अपनी जाँघो पर रख लेता है और धीरे-धीरे अपने हाथो से रश्मि के सर पर अपना हाथ फेरते हुए उसे देखने लगता है, रश्मि अपने मन में भैया सर क्या सहला रहे हो अपनी बहन के कसे हुए दूध सहलाओ ना,

राज धीरे से रश्मि के गोरे-गोरे गालो पर हाथ फेरता है और उसके मुलायम गालो के स्पर्श से उसका लंड टनटना जाता है, वह धीरे से रश्मि के रसीले होंठो पर अपने हाथ की उंगलिया फेर कर देखता है और अपने मन में हाई रश्मि कितने कोमल होंठ है तेरे, काश में इन रसीले होंठो का रस पी पाता, तभी राज की नज़र रश्मि की तनी हुई कसी चुचियो पर जाती है और वह अपनी आँखो के सामने इतनी बड़ी-बड़ी कठोर चुचियो को देख कर सिहर जाता है और उसका दिल उन तनी हुई कसी चुचियो को छूने का करने लगता है, वह इधर उधर देखता है उस कॉमपार्टमेंट में एक्का दुक्का लोग होते है और वह भी घोड़े बेच कर सो रहे होते है, रश्मि अपनी आँखे बंद किए पड़ी रहती है और उसकी चूत पूरी तरह गीली रहती है और वह अपने भैया के कुछ करने की राह देखती रहती है,

राज जब रश्मि की छातियो को अपने हाथ में भरने का सोचता है तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगता है और वह उस कॉमपार्टमेंट की लाइट बंद कर देता है और फिर हिम्मत करके रश्मि के एक दूध पर अपने हाथ को धीरे से रख देता है, रश्मि को इतना यकीन नही था कि राज वाकई उसके दूध पर अपने हाथ रख देगा और रश्मि राज की इस हरकत से एक दम से सिहर जाती है और उसका दिल बहुत जोरो से धड़कने लगता है और उसकी साँसे तेज हो जाती है, उधर राज जब रश्मि की गदराए दूध के गुदाज और भरे-भरे माँस का स्पर्स अपने हाथो से महसूस करता है तो उसका दिल धड़क जाता है और उसका लंड पूरी तरह तन कर खड़ा हो जाता है, दोनों भाई बहन की दिलो की धड़कन बहुत तेज हो जाती है और राज का हाथ अपनी बहन के गुदाज कसे हुए दूध पर रखा-रखा काँपने लगता है, पर राज उस अहसास को पाकर मस्त हो जाता है उसने आज तक किसी भी लड़की के दूध को अपने हाथो से नही छुआ था इसलिए उसके मोटे दूध का गुदाज अहसास उसे पागल कर देता है,

रश्मि अपने मन में, ओह भैया बहुत अच्छा लग रहा है पर इतना क्या दर रहे हो थोड़ा कस-कस कर मेरे दूध दबा दो में कुछ नही कहुगी ऐसे कब तक हाथ रखे रहोगे,

राज जैसे रश्मि के मन की बात जान गया हो और वह धीरे से रश्मि के दूध को हल्के-हल्के दबा-दबा कर देखने लगता है, वह जैसे-जैसे रश्मि के दूध दबाता जाता है उसका मन करता है कि और कस कर दबाए और वह थोड़ा ज़ोर लगा कर रश्मि के दूध को मसल देता है और उसकी इस हरकत से रश्मि की जान निकल जाती है, रश्मि की साँसे पूरी रफ़्तार से चलने लगती है और उसकी चूत फूल-फूल कर बुरी तरह फड़कने लगती है

राज की हिम्मत थोड़ी बढ़ती है और वह रश्मि के दूध को कभी धीरे-धीरे और कभी थोड़ा ज़ोर से अपने हाथों में भरने लगता है, रश्मि अपने भैया पर मर मिटती है और अपने मन में हे भैया आज तुमने अपनी बहन का दिल जीत लिया है अब तो में चाहे जैसे भी हो तुम्हारे ही मोटे लंड से अपनी चूत फडवाउंगी, अब तो में तुमसे ज़रूर अपनी चूत मरवाउन्गी भैया, तुम बहुत अच्छे हो भैया, आज तो लगता है मेरी जान ले लोगे, ऐसे ही दबाते रहो भैया, ऐसे ही थोड़ा
कस कर दबाओ भैया बिना किसी डर के मस्लो अपनी बहन के मोटे-मोटे दूध को,

राज रश्मि के मोटे-मोटे दूध दबा-दबा कर मस्त हो गया था और फिर उसने थोड़ी और हिम्मत दिखाते हुए रश्मि के दूसरे दूध को भी अपने हाथों में भर कर हल्के-हल्के दबाने लगा और बीच-बीच में कभी-कभी थोड़ा ज़्यादा ज़ोर से भी रश्मि के कसे हुए गुदाज दूध को मसल्ने लगा था, रश्मि अपनी मोटी जाँघो के बीच अपनी चूत दबाए करवट लेकर राज की जाँघो में अपना सर रखे हुए लेटी थी, राज अब कभी रश्मि के एक दूध कभी एक साथ दोनो दूध को हल्के- हल्के दबाते हुए उनके गदराए पन को महसूस कर रहा था और उसका मन रश्मि के रसीले होंठो को चूसने का बहुत करने लगा और वह चाह रहा था कि रश्मि के मूह को वह अपने मूह से खूब चूमे और अपनी प्यारी बहन को अपने होंठो से खूब चूम-चूम कर प्यार करे लेकिन सिचुयेशन कुछ ऐसी थी कि वह खुल कर रश्मि के साथ कुछ कर भी नही सकता था और फिर उसे रश्मि के जागने का भी डर लग रहा था, फिर भी राज ने रश्मि को थोड़ा ताक़त लगाकर सीधा लिटा दिया जिससे रश्मि के होंठ पूरी तरह उसके सामने आ गये और फिर वह धीरे से रश्मि के उपर झुक कर उसके रसीले होंठो पर अपने होंठ रख कर एक गहरा चुंबन ले लेता है, राज रश्मि के चेहरे से आती मादक सुगंध से पागल हो जाता है और रश्मि अपने भैया द्वारा अपने रसीले होठ चूमने से एक दम मस्त हो जाती है और उसकी चूत उसकी पेंटी को पूरी गीली कर देती है,



agle din Raj apni bahan ko lekar kashmir ghumne ke liye nikal padta hai aur vo log apni train pakad kar chal dete hai dono ka reservation rahta hai aur din men dono aamne samne ki birth par baithe huye khidki se bahar ka najara dekhte rahte hai, Raj khidki men dekhte huye Rashmi ki aur apni tirchi najre karke usko upar se niche tak dekhta hai, Rashmi blue color ke jeans aur yellow color ko tite tshirt pahne rahti hai, Raj Rashmi ke mote-mote bade-bade kathor doodh ko dekh kar mast ho jata hai aur uska lund khada hone lagta hai, vah Rashmi ke chehre ki aur dekhta hai Rashmi us samay bahut hi khubsurat najar aa rahi thi, Rashmi ki half bah ki tshirt uski kalai par ek ghadi uske kandhe tak laser kiye huye bal, uske mathe par ek choti si bindi aur uske rasile hontho par halki lipstic use bahut khubsurat bana rahi thi, Raj hasrat bhari nigaho se uske roop sondarya ko dekh raha tha, uska dil kar raha tha ki Rashmi ko apni god men baitha kar uske rasile hontho ko khub kas ke chume aur uski kasi hui mastani hatiyo ko apne sine se laga kar use apni banho men bhar le, uska lund apni bahan ki gadaraai jawani ko dekh kar puri tarah tan chuka tha, vah apne man men apne aap se bate kar raha tha, Rashmi tu kitni ubsurat hai, kash ek bar tu meri banho men aa jati to men tujhe itna pyar karta ki tu sari jindagi meri banho se dur hone ka nam nahi leti, teri is katil adao ne aur madmast kasi hui jawani ne mujhe pagal kar diya hai, Raj Rashmi ke doodh ko kha jane wali najro se dekh raha tha aur Rashmi apna muh khidki ki aur kare huye bahar ka najara le rahi thi, phir ekaek Rashmi ne apni najro ko ek pal ke liye Raj ki aur kiya aur Raj ko bade gaur se apne kase huye doodh ko dekhte huye pakad liya, Rashmi ne jaise hi vikcy ki aankho ko dekha
Raj ne bhi uske doodh se najre hata kar Rashmi ki aankho men dekha aur Raj thoda ghabra gaya lekin phir normal hone ki koshish karta hua Rashmi ko dekh kar thoda sa muskura diya, Rashmi ne bhi Raj ko dekh kar ek smile de di,Raj phir se khidki ke bahar dekhne laga aur Rashmi Raj ko tirchi najro se dekhti hui apne man men khus hoti hui sochne lagi, kya bat hai aaj to bhaiya mere tane huye doodh ko kaisi kha jane wali najro se dekh rahe the, kahi aisa to nahi ki bhaiya bhi man hi man men mujhe chodana chahte ho, lagta hai bhaiya ko mere doodh bahut achche lagte hai aur mere doodh ki motai aur kasawat dekh kar unka man mere doodh ko apne hath men bhar kar dabane aur masalne ka kar raha hoga, par bhaiya ne aaj se pahle kabhi mere doodh ko is tarah nahi dekha, lagta hai aaj men bahut jyada sexy aur khubsurat lag rahi hu, tabhi to mere husn ne mere bhaiya ko bhi meri aur dekhne par majboor kar diya, agar bhaiya mujhe chodana chahte honge to ek bar phir unki najre mere kase huye doodh par jarur jayegi tabhi Raj Rashmi ki aur muh karta hai aur uski najre sidhe Rashmi ke kase huye doodh par jati hai aur phir vah jaldi se apni najre Rashmi ke chehre ki aur kar leta hai, itni der men Rashmi uski najro ko samajh jati hai aur muskuraakar Rashmi- bhaiya men aapke pas udhar khidki ki taraf baith jau

Raj - muskura kar aa jao

Rashmi - seat se khadi hokar Raj ki aur apni moti gaanD karke jhuk kar seat se apna bag aur chadar uthane lagti hai aur

Raj Rashmi ki jeanse men kasi hui moti gaanD ko dekh kar mast ho jata hai aur uska man hota hi ki Rashmi ki moti gaanD ko uski kamar men hath dal kar apni god men rakh le, tabhi Rashmi palat kar Raj ki jangho men hath rakhti hui uske karib khidki ke pas baith jati hai, Rashmi ke uske karib aate hi Rashmi ke jism se udti hui mahak Raj ko mast kar deti hai aur vah bilkul karib se Rashmi ke gulabi galo uske rasile hontho aur uski badi-badi tani hui kathor chuchiyo ko dekhne lagta hai, uske itne karib ek gadaraai aur khubsurat ladki ka ahasaas use pagal kiye rahta hai aur vah ab badi asani se Rashmi ke kase huye rasile doodh ko dekhta rahta hai aur uska lund uski pent men khada ho jata hai, Rashmi kuch der tak khidki ke bahar dekhti rahti hai phir Raj ke kandhe par apne sar ko rakh kar uske hath ki banho ko pakad kar baith jati hai,

Raj apne hath ko Rashmi ki peeth ke piche se lejakar uski dusri side ki banho ko pakad kar
Raj - kya hua boriyat ho rahi hai kya
Rashmi- muskuraakar nahi aisi koi bat nahi hai
Raj - bahut chup-chup hai kuch bol na
Rashmi- apne man men kya bolu bhaiya meri chut to tumhare mote lund ko lene ke liye tadap rahi hai, pata nahi tum kab apni bahan ki phuli hui chut ko apne mote lund se phadoge,
Raj - uski banhe dabata hua, kya hua kuch bat karo na
Rashmi- apna sar uske kandhe se utha kar, bhaiya men in kapdo men kaisi lag rahi hu
Raj - muskuraakar ek dam mast
Rashmi- kya
Raj - uske gore galo ko khichta hua, mera matlab hai tu bahut khubsurat lag rahi hai
Rashmi- muskuraakar sach
Raj - Rashmi ki banho ko pakad kar apni aur dabate huye tu duniya ki sabse khubsurat ladki hai
Rashmi- apne uske kandhe par phir se apna sar rakhti hui, apne man men jab men aapko itni achchi lagti hu to mujhe ek bar apne mote lund se chod kyo nahi dete,

dono bhai bahan baithe-baithe ek dusre ke bare men bas kalpna karte rahte hai aur train apni raftar se dodti rahti hai, jab rat ho jati hai to unke aas pas ki birth khali hi rahti hai aur Raj Rashmi ko uski birth par jakar sone ke liye kahta hai to Rashmi use kahti hai, nahi bhaiya men to aapke pas hi bathungi
Raj - kyo tujhe neend nahi aa rahi hai kya
Rashmi- nahi abhi to nahi aa rahi hai aur aayegi to men aapke kandhe par sar rakh kar so jaugi, par agar aapko letna ho to men apni seat par chali jati hu
Raj - nahi-nahi baithi raho men bhi abhi nahi sona chahta hu
khidki se thandi hawa unke badan par padti rahti hai aur Rashmi apne bhaiya se chipki hui uske kandhe par apna sar rakhe baithi rahti hai, Raj Rashmi ke piche se hath dale uski dusri side ki banho par apne hath ko halke -halke pherta rahta hai, vah kabhi uske balo men ungliya chalata hai kabhi uski banho ko sahlata rahta hai, rat ko lagbhag 11 baj chuke hote hai aur dono chipke huye baithe rahte hai Rashmi apni aankhe band kiye Raj ke kandhe par sar rakh kar baithi rahti hai,
Raj - Rashmi ke sar par apna muh pherta hua, Rashmi so gai kya
Rashmi- jagti rahti hai par koi jawab nahi deti hai
Raj - Rashmi, o Rashmi, so gai kya
Rashmi- jab dubara koi jawab nahi deti hai to Raj apne hontho ko uske gulabi galo se chipka leta hai aur dhire-dhire apni bahan ke gore-gore galo ko chumne lagta hai, Rashmi Raj ki is harkat se sihar jati hai aur uski chut phulne lagti hai, Raj uske galo ko chumta hua dhire se kahta hai Rashmi tu bahut khubsurat hai,

Rashmi- apni aankhe band kiye huye apne man men khubsurat hu to apne mote lund se mujhe chod kyo nahi dete bhaiya
Raj - dhire se Rashmi ke galo ko apne hontho se sahlata hua, meri gudiya kitni badi ho gai hai mujhe to ahasaas bhi nahi tha
Rashmi- apne man men, ek bar apni gudiya ko puri nangi karke uski chut dekh lo tab pata chalega aapko ki aapki gudiya kitni badi ho gai hai, aapke mote lund ko apni chut men pura ek bar men hi bhar legi

Raj - Rashmi, o Rashmi, off ho mummy sach kahti hai yah ladki to sachmuch ghode bech kar soti hai chahe koi kahi bhi hath laga de,
Rashmi- apne man men bhaiya men to sone ka natak hi isliye kar rahi hu taki tum kahi to mujhe hath lagao, itna kyo darte ho bhaiya ek bar mere kase huye doodh hi daba do
Raj sochta hai ki bechari baithi-baithi so gai men ek kam karta hu men khidki ki taraf baith jata hu aur iska sar apne god men rakh kar ise sula deta hu yah kab tak aise hi baithi-baithi soyegi aur phir Raj dhire se uth kar Rashmi ko thoda khich kar birth par lita deta hai aur uske sar ke pas aakar khud khidki ke pas baith kar Rashmi ke sar ko apni jangho par rakh leta hai aur dhire-dhire apne hatho se Rashmi ke sar par apna hath pherte huye use dekhne lagta hai, Rashmi apne man men bhaiya sar kya sahla rahe ho apni bahan ke kase huye doodh sahlao na,

Raj dhire se Rashmi ke gore-gore galo par hath pherta hai aur uske mulayam galo ke sparsh se uska lund tantana jata hai, vah dhire se Rashmi ke rasile hontho par apne hath ki ungliya pher kar dekhta hai aur apne man men hay Rashmi kitne komal honth hai tere, kash men in rasile hontho ka ras pi pata, tabhi Raj ki najar Rashmi ki tani hui kasi chuchiyo par jati hai aur vah apni aankho ke samne itni badi-badi kathor chuchiyo ko dekh kar sihar jata hai aur uska dil un tani hui kasi chuchiyo ko chune ka karne lagta hai, vah idhar udhar dekhta hai us compartment men ekka dukka log hote hai aur vah bhi ghode bech kar so rahe hote hai, Rashmi apni aankhe band kiye padi rahti hai aur uski chut puri tarah gili rahti hai aur vah apne bhaiya ke kuch karne ki rah dekhti rahti hai,

Raj jab Rashmi ki chatiyo ko apne hath men bharne ka sochta hai to uska dil joro se dhadkne lagta hai aur vah us compartment ki light band kar deta hai aur phir himmat karke Rashmi ke ek doodh par apne hath ko dhire se rakh deta hai, Rashmi ko itna yakin nahi tha ki Raj vakai uske doodh par apne hath rakh dega aur Rashmi Raj ki is harkat se ek dam se sihar jati hai aur uska dil bahut joro se dhadakne lagta hai aur uski sanse tej ho jati hai, udhar Raj jab Rashmi ki gadaraaye
doodh ke gudaj aur bhare-bhare mans ka spars apne hatho se mehsus karta hai to uska dil dhadak jata hai aur uska lund puri tarah tan kar khada ho jata hai, dodno bhai bahan ki dilo ki dhadkan bahut tej ho jati hai aur Raj ka hath apni bahan ke gudaj kase huye doodh par rakha-rakha kanpne lagta hai, par Raj us ahasaas ko pakar mast ho jata hai usne aaj tak kisi bhi ladki ke doodh ko apne hatho se nahi chua tha isliye uske mote doodh ka gudaj ahasaas use pagal kar deta hai,

Rashmi apne man men, oh bhaiya bahut achcha lag raha hai par itna kya dar rahe ho thoda kas-kas kar mere doodh daba do men kuch nahi kahugi aise kab tak hath rakhe rahoge,

Raj jaise Rashmi ki man ki bat jan gaya ho aur vah dhire se Rashmi ke doodh ko halke-halke daba-daba kar dekhne lagta hai, vah jaise-jaise Rashmi ke doodh dabata jata hai uska man karta hai ki aur kas kar dabaye aur vah thoda jor laga kar Rashmi ke doodh ko masal deta hai aur uski is harkat se Rashmi ki jan nikal jati hai, Rashmi ki sanse puri raftar se chalne lagti hai aur uski chut phul-phul kar buri tarah phadakne lagti hai

Raj ki himmat thodi badhti hai aur vah Rashmi ke doodh ko kabhi dhire-dhire aur kabhi thoda jor se apne hantho men bharne lagta hai, Rashmi apne bhaiya par mar mitti hai aur apne man men hay bhaiya aaj tumne apni bahan ka dil jeet liya hai ab to men chahe jaise bhi ho tumhare hi mote lund se apni chut phadwaugi, ab to men tumse jarur apni chut marwaugi bhaiya, tum bahut achche ho bhaiya, aaj to lagta hai meri jan le loge, aise hi dabate raho bhaiya, aise hi thoda
kas kar dabao bhaiya bina kisi dar ke maslo apni bahan ke mote-mote doodh ko,

Raj Rashmi ke mote-mote doodh daba-daba kar mast ho gaya tha aur phir usne thodi aur himmat dikahte huye Rashmi ke dusre doodh ko bhi apne hantho men bhar kar halke-halke dabane laga aur beech-beech men kabhi-kabhi thoda jyada jor se bhi Rashmi ke kase huye gudaj doodh ko masalne laga tha, Rashmi apni moti jangho ke beech apni chut dabaye karwat lekar Raj ki jangho men apna sar rakhe huye leti thi, Raj ab kabhi Rashmi ke ek doodh kabhi ek sath dono doodh ko halke-
hakle dabate huye unke gadaraaye pan ko mehsus kar raha tha aur uska man Rashmi ke rasile hontho ko chusne ka bahut karne laga aur vah chah raha tha ki Rashmi ke muh ko vah apne muh se khub chume aur apni pyari bahan ko apne hontho se khub chum-chum kar pyar kare lekin situation kuch aisi thi ki vah khul kar Rashmi ke sath kuch kar bhi nahi sakta tha aur phir use Rashmi ke jagne ka bhi dar lag raha tha, phir bhi Raj ne Rashmi ko thoda takat lagakar sidha lita diya jisse Rashmi
ke honth puri tarah uske samne aa gaye aur phir vah dhire se Rashmi ke upar jhuk kar uske rasile hontho par apne honth rakh kar ek gahra chumban le leta hai, Raj Rashmi ke chehre se aati madak sugaanDh se pagal ho jata hai aur Rashmi apne bhaiya dwara apne rasile hoth chumne se ek dam mast ho jati hai aur uski chut uski penty ko puri gili kar deti hai,
(¨`·.·´¨) Always
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Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby vnraj » 04 Jan 2017 23:02

अपडेट कुछ जल्द ही खतम हो गया
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rajaarkey
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Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby rajaarkey » 05 Jan 2017 19:43

vnraj wrote:अपडेट कुछ जल्द ही खतम हो गया


Koyi baat nahi dost dusra update hazir hai
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Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby rajaarkey » 05 Jan 2017 19:44



राज को रश्मि के होंठो का स्पर्श बहुत अच्छा लगता है और वह एक बार और झुक कर रश्मि के होंठो पर फिर से गहरा चुंबन दे देता है और उसका लंड झटके मारने लगता है, राज फिर से रश्मि के दोनो कसे हुए दूध पर अपने हाथ फेरता हुआ उन्हे बड़े प्यार से सहलाता है और रश्मि अपने भैया के सहलाने से मस्त हो जाती है और अपने भैया को ना जाने कितनी बार आइ लव यू कह चुकी होती है और शायद राज के दिल तक उसके आइ लव यू की आवाज़ चली जाती है इसलिए राज जब देखता है कि कोई बड़ा स्टेशन आ रहा है तो वह एक बार जल्दी से रश्मि के रसीले होंठो को खूब कस कर अपने होंठो से चूस्ता है और उसके मोटे-मोटे दूध को अपने हाथो से इस बार थोड़ा तेज दबा कर आइ लव यू रश्मि कह कर उसके होंठ को एक बार और चूम कर फिर सीधा बैठ जाता है और फिर ट्रेन की खिड़की से चाइ वाला, पकोडे वाला, आलुबाड़ा गरम, समोसा गरम की आवाज़ आने लगती है और राज रश्मि के सर पर हाथ फेरता हुआ रश्मि को जागता है, कुछ देर बाद रश्मि करवट लेकर जागने का नाटक करती हुई

रश्मि- भैया मुझे पानी पीना है और उठ कर बैठ जाती है

राज उसे पानी की बोटेल देता हुआ, चाइ पीना है क्या

रश्मि- हूँ

राज - खिड़की से दो कप चाइ ले लेता है और फिर दोनो भाई बहन चाइ पीने लगते है, तभी उनके कॉमपार्टमेंट में एक और फॅमिली आ जाती है और फिर वो लोग आते ही सोने की तैयारी करने लगते है, राज की एक एल बर्थ और एक एम बर्थ होती है और वह रश्मि को बीच वाली सीट पर चढ़ा कर सुला देता है और खुद नीचे वाली सीट पर सो जाता है,


अगले दिन वह दोनो जम्मू पहुचते है और वहाँ एक होटेल में एक रूम बुक कर लेते है, रूम के अंदर जाकर रश्मि सीधे बेड पर जाकर गिर जाती है और राज को देखते हुए

रश्मि- ओह भैया में तो बहुत थक गई हू पूरा बदन टूट रहा है

राज - मुस्कुराकर ठीक है तुम आराम कर लो तब तक में नहा कर फ्रेश हो जाता हूँ और फिर राज अपनी शर्ट उतारता है और बनियान भी उतार देता है, रश्मि उसकी कसी हुई बॉडी अपनी आँखे फाड़-फाड़ कर देखने लगती है, फिर राज जैसे ही अपनी पेंट उतारता है रश्मि सीधे उसके अंडरवेर के उठे हुए भाग को घूर कर देखती है और तभी राज रश्मि की ओर देखता है तो रश्मि इधर उधर अपनी नज़रे मारने लगती है राज जल्दी से पेंट उतार कर मुस्कुराता हुआ टॉवेल पहन कर अटैच बाथरूम में घुस जाता है और रश्मि अपने मन में कितना भी छुपा लो भैया अपने मोटे लंड को लेकिन एक दिन तुम्हारा मोटा लंड मेरी फूली हुई चूत को ज़रूर फाड़ेगा और फिर रश्मि मुस्कुराती हुई लेट जाती है, थोड़ी देर बाद राज नहा कर बाहर आता है और रश्मि उसके चिकने बदन को बड़े प्यार से देखती हुई लेटी रहती है और जब

राज उसको देखता है तो उसकी नज़रे रश्मि की नज़रो से मिलती है और

राज - ऐसे क्या देख रही है

रश्मि- मुस्कुरा कर कुछ नही

राज - तू नही नहाएगी, जा जाकर नहा ले सारी थकान उतर जाएगी

रश्मि- मुस्कुराती हुई अपने मन में, भैया आज तो तुम ही नहला दो ना मुझे पूरी नंगी करके, एक बार मुझे नंगी देख लोगे तो अपनी बहन को चोदने के लिए पागल हो जाओगे, और फिर मुस्कुराकर चलो अच्छा है कल रात तुमने यह तो बता दिया कि तुम भी मुझे चोदने के लिए मरे जा रहे हो, फिकर मत करो तुम्हारी गुड़िया रानी तुम्हारी बाँहो में जल्दी ही पूरी नंगी हो कर आएगी,

राज - मुस्कुराकर क्या बात है आज बहुत मुस्कुरा रही है

रश्मि- मुस्कुराते हुए कहाँ मुस्कुरा रही हूँ

राज - मुस्कुराकर, तो फिर ये क्या है

रश्मि- वो तो में यहाँ आकर बहुत खुस हूँ इसलिए

राज - चल ठीक है ऐसे ही मुस्कुराती रहा कर मसूकुराते हुए तू बहुत अच्छी लगती है

रश्मि- मुस्कुराकर अपने मन में, और जब पूरी नंगी देख लोगे ना तो कहोगे कि रश्मि तू पूरी नंगी बहुत अच्छी लगती है,

राज - रश्मि तू जाकर नहा ले में खाना ऑर्डर कर देता हूँ फिर हम दोनो 2-3 घंटे आराम से सोएगे उसके बाद शाम को कहीं घूमने चलेगे

रश्मि- उठते हुए ठीक है भैया और फिर रश्मि गाना गुनगुनाते हुए "चढ़ती जवानी मेरी चाल मस्तानी" और बाथरूम की ओर अपने भारी-भारी चूतड़ मटकाते हुए चल देती है और राज मुस्कुराता हुआ उसके मटकते चुतड़ों को देखने लगता है और रश्मि बाथरूम में घुस जाती है, राज रेडी होकर खाने का ऑर्डर कर देता है और फिर आकर बेड पर बैठ जाता है, थोड़ी देर बाद रश्मि बाथरूम से आवाज़ देती है

रश्मि- भैया

राज - क्या हुआ

रश्मि- भैया प्लीज़ मेरे बॅग से मेरे कपड़े दे दो

राज - अच्छा देता हूँ

राज रश्मि के बॅग को खोल कर उसमे से कई सारी ड्रेस बाहर निकाल कर, रश्मि कौन सी ड्रेस दूं

रश्मि- बाथरूम में मुस्कुराते हुए धीरे से अरे पहले तो मेरी ब्रा और पेंटी दे दो,

रश्मि- अरे भैया कोई भी दे दो

राज - अच्छा-अच्छा लाया, राज उसके सारे कपड़े देखने लगता है और तभी उसकी नज़र रश्मि की रेड कलर की मुलायम सी पेंटी पर पढ़ती है और वह उस पेंटी को उठा कर देखने लगता है और ना जाने उसे क्या होता है और वह रश्मि की पेंटी को अपने होंठो से चूमते हुए उसकी खुश्बू सूंघने लगता है और उसका लंड एक दम से खड़ा हो जात है, वह थोड़ी देर तक रश्मि की पेंटी को चूमता हुआ सूँघता है फिर सोचता है रश्मि तो कोई भी कपड़ा अंदर ले कर नही गई है तो क्या उसे पेंटी भी दूं, फिर कुछ सोच कर नही-नही पता नही वह क्या सोचेगी और राज उसको एक स्कर्ट और टीशर्ट ले जाकर दे देता है, रश्मि थोड़ा सा दरवाजा खोल कर अपने कपड़े ले लेती है और स्कर्ट और टीशर्ट को देख कर

रश्मि- अपने मन में मुस्कुराकर क्या भैया मेरी ब्रा और पेंटी तो आपने दी ही नही अब क्या स्कर्ट के नीचे मुझे नंगी ही रखने का इरादा है और फिर मुस्कुराती हुई पूरी नंगी खड़ी होकर अपने गदराए जिस्म को टवल से पोछती है और फिर बिना ब्रा के टीशर्ट पहन लेती है जिसमे उसके मोटे-मोटे दूध पूरी तरह तन कर टीशर्ट से अपनी गोलाई को साफ-साफ दिखाने लगते है और फिर रश्मि अपने दूध को अपने हाथो में भर कर वाह भैया एक ही रात में तुमने तो अपनी बहन के दूध दबा-दबा कर कितने बड़े-बड़े कर दिए है आज तो मेरी टीशर्ट में नही समा रहे है लगता है टीशर्ट को फाड़ कर बाहर आ जाएगे और फिर रश्मि अपनी फूली हुई चूत पर हाथ फेरती हुई अपनी चूत से बात करती हुई चूत को सहला कर तू फिकर मत कर मेरी रानी एक दिन मेरे भैया तुझे भी खूब अपने मूह से चूम-चूम कर तुझे खूब सहलाएगे और फिर अपना मोटा लंड डाल कर तुझे एक ही बार में फाड़ कर रख देंगे, और फिर रश्मि जल्दी से अपनी छोटी सी स्कर्ट जो उसके घुटनो के थोड़ा उपर तक आती थी को पहन कर अपने गीले बालो में टॉवेल बाँध कर बाहर आ जाती है, रश्मि जैसे ही नहा कर बाहर आती है राज उसके लाजवाब हुस्न को देखता ही रह जाता है और उसका दिल करता है अभी जाकर रश्मि को अपनी गोद में उठा कर खूब प्यार करे, रश्मि राज को देख कर मुस्कुराते हुए

रश्मि- भैया यह ड्रेस अच्छी तो लग रही है ना


राज - सीधा उसके तने हुए कसे-कसे टीशर्ट में समाए दूधो को देख कर हाँ रश्मि तू इस ड्रेस में बहुत खूबसूरत लग रही है,

रश्मि- सच्ची

राज - मुस्कुराकर मुच्चि और फिर दोनो हँसने लगते है

थोड़ी देर बाद उनका खाना आ जाता है और दोनो खाना खा कर बेड पर एक दूसरे की ओर करवट ले कर लेट जाते है रश्मि अपने मन में भैया शायद नही जानते है कि में स्कर्ट के अंदर पूरी नंगी हूँ और

राज - अपने मन में मेने रश्मि को पेंटी और ब्रा नही दी थी इसके दूध तो ऐसे ही लग रहे है जैसे टी-शर्ट के अंदर इसने कुछ नही पहना है पर शायद यह स्कर्ट के अंदर भी नंगी है, बेचारी शर्म के कारण मुझसे पेंटी माँग नही सकी और फिर इसे बाद में मेरे रहते पहनने का मोका भी नही लगा,

राज - रश्मि के गाल को अपने हाथो से खिचता हुआ आज बहुत ज़्यादा ही मुस्कुरा रही है ज़रूर कोई बात है

रश्मि- अपनी मुस्कुराहट को छुपाने की कोशिश करती हुई, नही-नही भैया कोई बात नही है

राज - उसके माथे पर हाथ फेर कर सहलाते हुए तू बहुत खुश है ना यहाँ आकर

रश्मि- हूँ

राज - उसके मोटे-मोटे दूध को देखने लगता है और रश्मि उसकी नज़रो को अपने दूध पर पड़ते देख लेती है और जैसे ही राज उसकी आँखो में देखता है रश्मि अपनी नज़रे नीचे कर लेती है, दोनो के चेहरे की हँसी गायब हो जाती है और रश्मि जब फिर से राज को नज़रे उठा कर देखती है तो राज उसके खूबसूरत चेहरे को ही देखता रहता है, और जब वह फिर से रश्मि के सामने ही उसके मोटे-मोटे कसे हुए दूध को देखता है तो रश्मि का चेहरा एक दम सीरीयस हो जाता है और वह फिर से अपनी नज़रे नीचे कर लेती है और अपने मन में खुश होती हुई लगता है भैया मेरे दूध को पीने के लिए बिल्कुल पागल हुए जा रहे है,

राज – रश्मि

रश्मि- अपनी नज़रे उठा कर राज को देखती है

राज - रश्मि में तुझसे कुछ कहना चाहता हूँ

रश्मि- राज की बात सुन कर थोड़ा घबरा जाती है और उसके मूह की ओर देखने लगती है लेकिन राज फिर चुप हो जाता है और उसका चेहरा एक दम गंभीर हो जाता है, रश्मि अब तक उसके आगे बोलने का इंतजार करती है, जब राज कुछ नही कहता है तब

रश्मि- बोलो ना भैया क्या कहना चाहते हो

राज - कुछ नही बाद में बताउन्गा

रश्मि- क्या कुछ खास बात है

राज - हाँ बात तो खास है पर में समझ नही पा रहा हूँ कि तुझसे कैसे कहूँ

रश्मि- मुस्कुराकर भैया इतना क्या सोच रहे हो जो कहना है कह दो ना

राज - रश्मि के चेहरे को देख कर मुस्कुराता हुआ, नही में नही कह पाउन्गा

रश्मि- कुछ सोच कर, भैया ऐसी क्या बात है जो आप नही कह पा रहे है

राज - रश्मि में पहले सोचूँगा उसके बाद मुझे ठीक लगेगा तो में कहूँगा

रश्मि- भैया कुछ टेन्षन वाली बात तो नही है ना

राज - मुस्कुराकर पता नही टेन्षन भी हो सकती है या फिर सारे जहाँ की खुशी भी मिल सकती है

रश्मि- भैया मुझे तो आप की बात समझ ही नही आ रही है

राज - इसीलिए में कह रहा हूँ ना कि पहले में अच्छे से सोचूँगा फिर अगर मुझे ठीक लगा तो में कहूँगा चल अब थोड़ा सा सो कर आराम कर ले फिर शाम को हम घूमने चलेगे

रश्मि- ओके भैया और फिर अपनी आँखे बंद कर के अपने मन में सोचने लगती है, कहीं भैया मुझे डाइरेक्ट्ली यह तो नही कहेगे कि रश्मि में तुझे चोदना चाहता हूँ, अगर उन्होने मुझसे ऐसा कहा तो में क्या जवाब दूँगी, बाप रे भैया तो बहुत ही ख़तरनाक है ना जाने उनके मन में क्या चल रहा है, पर एक बात तो तय है कि वो मुझे चोदने के लिए मरे जा रहे है, पर में उनकी बहन हूँ इसलिए अपने दिल की बात मुझसे कह नही पा रहे है, शायद वह सोचते होंगे कि अगर उन्होने मुझसे ऐसी बात कही तो में बहुत गुस्सा हो जाउन्गी, कही ऐसा तो नही कि भैया मुझसे सचमुच प्यार करने लगे हो और मुझसे आइ लव यू कहने का सोच रहे है और कह नही पा रहे है, हाँ-हाँ यही बात है, पर में कैसे पता करूँ कि यही बात है, एक काम करती हूँ अंधेरे में तीर चलाती हूँ देखती हूँ कि निशाना लगता है कि नही और पलट कर

रश्मि- भैया में समझ गई कि आप क्या बात मुझे बताना चाह रहे थे

राज - आश्चर्य से रश्मि का मूह देखता हुआ, क्या समझ गई

रश्मि- मुस्कुराकर पर मुझे शरम आती है,

राज - के होश उड़ गये रश्मि की बात सुन कर क्योकि वह ग़लत ही अंदाज़ा लगा रहा था फिर भी पॅशन रखते हुए, क्या शरम आ रही है, अपने भैया से भी कोई शरमाती है क्या, चल बता क्या समझ गई तू,

रश्मि- मुस्कुराकर आप डांटोगे

राज - थोड़ा खुस होता हुआ, अरे पगली में कभी तुझे डाँट सकता हूँ क्या, तू तो मुझे इतनी प्यारी लगती है कि में तेरी हर ग़लती माफ़ कर सकता हूँ चाहे वह कितनी ही बड़ी क्यो ना हो, चल अब बता भी दे,

रश्मि- नही में नही बताउन्गी और दूसरी और मूह करके राज की ओर अपनी पीठ कर लेती है,

राज - उसको पकड़ कर अपनी और खीच कर अपनी ओर घुमा कर, मुस्कुराते हुए बताती है कि नही

रश्मि- राज से छूटने की कोशिश करती है और राज उसको पूरी तरह खीच कर अपने सीने से लगा कर चल जल्दी बता दे नही तो में नही छोड़ूँगा

रश्मि- मुस्कुराते हुए अच्छा बाबा बताती हूँ पहले मुझे छोड़ो तो सही

राज - उसको छोड़ कर हाँ अब बता

रश्मि- वो में यह समझ गई कि और रश्मि एक दम से बेड से उठ कर दूर खड़ी होकर अपनी जीभ दिखा कर उसे चिड़ाती हुई जाओ नही बताती क्या कर लोगे



Raj ko Rashmi ke hontho ka sparsh bahut achcha lagta hai aur vah ek bar aur jhuk kar Rashmi ke hontho par phir se gahra chumban de deta hai aur uska lund jhatke marne lagta hai, Raj phir se Rashmi ke dono kase huye doodh par apne hath pherta hua unhe bade pyar se sahlata hai aur Rashmi apne bhaiya ke sahlane se mast ho jati hai aur apne bhaiya ko na jane kitni bar i love u kah chuki hoti hai aur shayad Raj ke dil tak uske i love u ki aawaj chali jati hai isliye Raj jab dekhta hai ki koi bada station aa raha hai to vah ek bar jaldi se Rashmi ke rasile hontho ko khub kas kar apne hontho se chusta hai aur uske mote-mote doodh ko apne hatho se is bar thoda tej daba kar i love u Rashmi kah kar uske honth ko ek bar aur chum kar phir sidha baith jata hai aur phir train ki khidki se chai wala, pakode wala, aalubada garam, samosa garam ki
aawaj aane lagti hai aur Raj Rashmi ke sar par hath pherta hua Rashmi, o Rashmi, kuch der bad Rashmi karwat lekar jagne ka natak karti hui

Rashmi- bhaiya mujhe pani pina hai aur uth kar baith jati hai

Raj use pani ki botel deta hua, chai pina hai kya

Rashmi- hu

Raj - khidki se do cup chai le leta hai aur phir dono bhai bahan chai pine lagte hai, tabhi unke compartment men ek aur family aa jati hai aur phir vo log aate hi sone ki taiyari karne lagte hai, Raj ki ek L birth aur ek M birth hoti hai aur vah Rashmi ko beech wali seat par chadha kar sula deta hai aur khud niche wali seat par so jata hai,


agle din vah dono jammu pahuchte hai aur vaha ek hotel men ek room book kar lete hai, room ke andar jakar Rashmi sidhe bed par jakar gir jati hai aur Raj ko dekhte huye

Rashmi- oh bhaiya men to bahut thak gai hu pura badan tute raha hai

Raj - muskuraakar thik hai tum aaram kar lo tab tak men naha kar fresh ho jata hu aur phir Raj apni shirt utarta hai aur baniyan bhi utar deta hai, Rashmi uski kasi hui body apni aankhe phad-phad kar dekhne lagti hai, phir Raj jaise hi apni pent utarta hai Rashmi sidhe uske underwear ke uthe huye bhag ko ghur kar dekhti hai aur tabhi Raj Rashmi ki aur dekhta hai to Rashmi idhar udhar apni najre marne lagti hai Raj jaldi se pent utar kar muskurata hua tawel pahan kar aatach bathroom men ghus jata hai aur Rashmi apne man men kitna bhi chupa lo bhaiya apne mote lund ko lekin ek din tumhara mota lund meri phuli hui chut ko jarur phadega aur phir Rashmi muskurati hui let jati hai, thodi der bad Raj nahakar bahar aata hai aur Rashmi uske chikne badan ko bade pyar se dekhti hui leti rahti hai aur jab

Raj usko dekkta hai to uski najre Rashmi ki najro se milti hai aur

Raj - aise kya dekh rahi hai

Rashmi- msukurakar kuch nahi

Raj - tu nahi nahayegi, ja jakar naha le sari thakan utar jayegi

Rashmi- muskurati hui apne man men, bhaiya aaj to tum hi nahala do na mujhe puri nangi karke, ek bar mujhe nangi dekh loge to apni bahan ko chodane ke liye pagal ho jaoge, aur phir muskuraakar chalo achcha hai kal rat tumne yah to bata diya ki tum bhi mujhe chodane ke liye mare ja rahe ho, phikar mat karo tumhari gudiya rani tumhari banho men jaldi hi puri nangi ho kar aayegi,

Raj - muskuraakar kya bat hai aaj bahut muskura rahi hai

Rashmi- muskurate huye kaha muskura rahi hu

Raj - muskuraakar, to phir ye kya hai

Rashmi- vo to men yaha aakar bahut khus hu isliye

Raj - chal thik hai aise hi muskurati raha kar msukurate huye tu bahut achchi lagti hai

Rashmi- muskuraakar apne man men, aur jab puri nangi dekh loge na to kahoge ki Rashmi tu puri nangi bahut achchi lagti hai,

Raj - Rashmi tu jakar naha le men khana order kar deta hu phir hum dono 2-3 ghante aaram se soyege uske bad sham ko kahi ghumne chalege

Rashmi- uthte huye thik hai bhaiya aur phir Rashmi gana gungunate huye "chadhti jawani meri chal mastani" aur bathroom ki aur apne bhari-bhari chutd matkate huye chal deti hai aur Raj muskurata hua uske matkte chutdon ko dekhne lagta hai aur Rashmi bathroom men ghus jati hai, Raj reddy hokar khane ka order kar deta hai aur phir aakar bed par baith jata hai, thodi der bad Rashmi bathroom se aawaj deti hai

Rashmi- bhaiya

Raj - kya hua

Rashmi- bhaiya please mere bag se mere kapde de do

Raj - achcha deta hu

Raj Rashmi ke bag ko khol kar usme se kai sari dress bahar nikal kar, Rashmi kaun si dress du

Rashmi- bathroom men muskurate huye dhire se are pahle to meri bra aur penty de do,

Rashmi- are bhaiya koi bhi de do

Raj - achcha-achcha laya, Raj uske sare kapde dekhne lagta hai aur tabhi uski najar Rashmi ki red color ki mulayam si penty par padhti hai aur vah us penty ko utha kar dekhne lagta hai aur na jane use kya hota hai aur vah Rashmi ki penty ko apne hontho se chumte huye uski khushboo sunghne lagta hai aur uska lund ek dam se khada ho jat hai, vah thodi der tak Rashmi ki penty ko chumta hua sunghta hai phir sochta hai Rashmi to koi bhi kapda andar le kar nahi gai hai to kya use penty bhi du, phir kuch soch kar nahi-nahi pata nahi vah kya sochegi aur Raj usko ek skirt aur tshirt le jakar de deta hai, tuna thoda sa darwaja khol kar apne kapde le leti hai aur skirt aur tshirt ko dekh kar

Rashmi- apne man men muskuraakar kya bhaiya meri bra aur penty to aapne di hi nahi ab kya skirt ke niche mujhe nangi hi rakhne ka irada hai aur phir muskurati hui puri nangi khadi hokar apne gadaraaye jism ko towel se pochti hai aur phir bina bra ke tshirt pahan leti hai jisme uske mote-mote doodh puri tarah tan kar tshirt se apni golai ko saf-saf dikhane lagte hai aur phir Rashmi apne doodh ko apne hatho men bhar kar wah bhaiya ek hi rat men tumne to apni bahan ke doodh daba-daba kar kitne bade-bade kar diye hai aaj to meri tshirt men nahi sama rahe hai lagta hai tshirt ko phad kar bahar aa jayege aur phir Rashmi apni phuli hui chut par hath pherti hui apni chut se bat karti hui chut ko sahlakar tu fikar mat kar meri rani ek din mere bhiya tujhe bhi khub apne muh se chum-chum kar tujhe khub sahlayege aur phir apna mota lund dal kar tujhe ek hi bar men phad kar rakh denge, aur phir Rashmi jaldi se apni choti si skirt jo uske ghutno ke thoda upar tak aati thi ko pahan kar apne gile balo men tawel banth kar bahar aa jati hai, Rashmi jaise hi naha kar bahar aati hai Raj uske lajwab husn ko dekhta hi rah jata hai aur uska dil karta hai abhi jakar Rashmi ko apni god men utha kar khub pyar kare, Rashmi Raj ko dekh kar muskurate huye

Rashmi- bhaiya yah dress achchi to lag rahi hai na


Raj - sidha uske tane huye kase-kase tshirt men samaye doodh ko dekh kar ha Rashmi tu is dress men bahut khubsurat lag rahi hai,

Rashmi- sachchi

Raj - muskuraakar muchchi aur phir dono hasne lagte hai

thodi der bad unka khana aa jata hai aur dono khana kha kar bed par ek dusre ki aur karwat le kar let jate hai Rashmi apne man men bhaiya shayad nahi jante hai ki men skirt ke andar puri nangi hu aur

Raj - apne man men mene Rashmi ko penty aur bra nahi di thi iske doodh to aise hi lag rahe hai jaise t-shirt ke nadar isne kuch nahi pahna hai par shayad yah skirt ke andar bhi nangi hai, bechari sharm ke karan mujhse penty mang nahi saki aur phir ise bad men mere rahte pahnne ka moka bhi nahi laga,

Raj - Rashmi ke gal ko apne hatho se khichta hua aaj bahut jyada hi muskura rahi hai jarur koi bat hai

Rashmi- apni muskurahat ko chupane ki koshish karti hui, nahi-nahi bhaiya koi bat nahi hai

Raj - uske mathe par hath pher kar sahlate huye tu bahut khus hai na yaha aakar

Rashmi- hu

Raj - uske mote-mote doodh ko dekhne lagta hai aur Rashmi uski najro ko apne doodh par padte dekh leti hai aur jaise hi Raj uski aankho men dekhta hai Rashmi apni najre niche kar leti hai, dono ke chehre ki hasi gayab ho jati hai aur Rashmi jab phir se Raj ko najre utha kar dekhti hai to Raj uske khubsurat chehre ko hi dekhta rahta hai, aur jab vah phir se Rashmi ke samne hi uske mote-mote kase huye doodh ko dekhta hai to Rashmi ka chehra ek dam serious ho jata hai aur vah phir se apni najre niche kar leti hai aur apne man men khush hoti hui lagta hai bhaiya mere doodh ko pine ke liye bilkul pagal huye ja rahe hai,

Raj – Rashmi

Rashmi- apni najre utha kar Raj ko dekhti hai

Raj - Rashmi men tujhse kuch kahna chahta hu

Rashmi- Raj ki bat sun kar thoda ghabra jati hai aur uske muh ki aur dekhne lagti hai lekin Raj phir chup ho jata hai aur uska chehra ek dam gambhir ho jata hai, Rashmi ab tak uske aage bolne ka intjar karti hai, jab Raj kuch nahi kahta hai tab

Rashmi- bolo na bhaiya kya kahna chahte ho

Raj - kuch nahi bad men batauga

Rashmi- kya kuch khas bat hai

Raj - ha bat to khas hai par men samajh nahi pa raha hu ki tujhse kaise kahu

Rashmi- muskuraakar bhaiya itna kya soch rahe ho jo kahna hai kah do na

Raj - Rashmi ke chehre ko dekh kar muskurata hua, nahi men nahi kah paunga

Rashmi- kuch soch kar, bhaiya aisi kya bat hai jo aap nahi kah pa rahe hai

Raj - Rashmi men pahle sochunga uske bad mujhe thik lagega to men kahunga

Rashmi- bhaiya kuch tention wali bat to nahi hai na

Raj - muskuraakar pata nahi tention bhi ho sakti hai ya phir sare jaha ki khushi bhi mil sakti hai

Rashmi- bhaiya mujhe to aap ki bat samajh hi nahi aa rahi hai

Raj - isiliye men kah raha hu na ki pahle men achche se sochunga phir agar mujhe thik laga to men kahunga chal ab thoda sa so kar aaram kar le phir sham ko hum ghumne chalege

Rashmi- ok bhaiya aur phir apni aankhe band kar ke apne man men sochne lagti hai, kahi bhaiya mujhe directly yah to nahi kahege ki Rashmi men tujhe chodana chahta hu, agar unhone mujhse aisa kaha to men kya jawab dungi, bap re bhaiya to bahut hi khatarnak hai na jane unke man men kya chal raha hai, par ek bat to tay hai ki vo mujhe chodane ke liye mare ja rahe hai, par men unki bahan hu isliye apne dil ki bat mujhse kah nahi pa rahe hai, shayad vah sochte honge ki agar unhone mujhse aisi bat kahi to men bahut gussa ho jaungi, kahi aisa to nahi ki bhaiya mujhse sachmuch pyar karne lage ho aur mujhse i love u kahne ka soch rahe hai aur kah nahi pa rahe hai, ha-ha yahi bat hai, par men kaise pata karu ki yahi bat hai, ek kam karti hu andhere men teer chalati hu dekhti hu ki nishana lagta hai ki nahi aur palat kar

Rashmi- bhaiya men samajh gai ki aap kya bat mujhe batana chah rahe the

Raj - ashcharya se Rashmi ka muh dekhta hua, kya samajh gai

Rashmi- muskuraakar par mujhe sharam aati hai,

Raj - ke hosh ud gaye Rashmi ki bat sun kar kyoki vah galat hi andaja laga raha tha phir bhi passion rakhte huye, kya sharam aa rahi hai, apne bhaiya se bhi koi sharmati hai kya, chal bata kya samajh gai tu,
Rashmi- muskuraakar aap dantoge

Raj - thoda khus hota hua, are pagli men kabhi tujhe dant sakta hu kya, tu to mujhe itni pyari lagti hai ki men teri har galti maf kar sakta hu chahe vah kitni hi badi kyo na ho, chal ab bata bhi de,

Rashmi- nahi men nahi bataugi aur dusri aur muh karke Raj ki aur apni pith kar leti hai,

Raj - usko pakad kar apni aur khich kar apni aur ghuma kar, muskurate huye batati hai ki nahi

Rashmi- Raj se chutne ki koshish karti hai aur Raj usko puri tarah khich kar apne sine se laga kar chal jaldi bata de nahi to men nahi chodunga

Rashmi- muskurate huye achcha baba batati hu pahle mujhe chodo to sahi

Raj - usko chod kar ha ab bata

Rashmi- vo men yah samajh gai ki aur Rashmi ek dam se bed se uth kar dur kahdi hokar apni jeebh dikha kar use chidati hui jao nahi batati kya kar loge
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Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby vnraj » 05 Jan 2017 23:30

आम के लालच मे कुछ बोलने मे भी नही बन रहा है
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Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby rajaarkey » 06 Jan 2017 13:10

vnraj wrote:आम के लालच मे कुछ बोलने मे भी नही बन रहा है


दोस्त यूँ दिल छोटा ना करो बस पके हुए आम चुसवाने के लिए बिल्कुल तैयार हैं
(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &;
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj sharma

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