घर के रसीले आम मेरे नाम complete

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rajaarkey
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Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby rajaarkey » 06 Jan 2017 13:18

राज मुस्कुरा कर अभी बताता हूँ और रश्मि के पीछे भागता है और रश्मि उसे देख कर भागने लगती है तभी राज पीछे से रश्मि को पकड़ कर दबोच लेता है और उसके हाथ रश्मि के कसे हुए दूध के उपर से उसे पकड़े हुए दूध को कस कर दबोचे रहते है,

राज - मुस्कुराकर अब बोल बताती है कि नही

रश्मि को उसकी बाँहो की कसावट से उसकी चूत फूल जाती है और वह मुस्कुराते हुए नही बताउन्गि

राज - अच्छा तू ऐसे नही बताएगी अभी रुक और फिर राज रश्मि को उसके पैरो में हाथ डाल कर उसे अपनी गोद में उठा लेता है और अचानक उसका हाथ रश्मि की स्कर्ट के अंदर उसकी नंगी गोरी जाँघो पर आ जाता है और वह अपने हाथ से रश्मि की नंगी गोरी जाँघो को पकड़े रश्मि के मोटे-मोटे दूध को अपने सीने से लगाए हुए उसकी आँखो में मुस्कुराकर देखता है और रश्मि भी उसकी आँखो में मुस्कुरा कर देखती रहती है, राज को लगता है कि वह अभी रश्मि के रसीले होंठो को अपने मूह में भर कर उसके रसीले होंठो का रस चूस डाले, और रश्मि की नंगी मोटी जाँघो पर राज के हाथ की पकड़ से रश्मि की चूत पानी-पानी हो जाती है और वह राज की बाँहो में चढ़ि अपने दूध को उसकी छाती से चिपकाए रहती है, दोनो एक दूसरे को खा जाने वाली नज़रो से मुस्कुराते हुए देखते रहते है, राज अपनी बहन को अपने हाथो में खड़ा-खड़ा उठाए रहता है और रश्मि अपने भाई के हाथो के उपर टॅंगी हुई उसकी बाँहो में चिपकी रहती है,

राज - मुस्कुराकर उसकी जाँघो को अपने हाथो से कस कर दबाता हुआ दूसरे हाथ से उसकी पीठ को अपनी ओर दबाते हुए, अब बोल अब कहाँ जाएगी बच कर

रश्मि- मुस्कुराकर मुझे गोद में उठा लिया तो क्या में बता दूँगी,

राज - मुस्कुरा कर उसके रसीले होंठो को देखता हुआ, अच्छा नही बताएगी तो में तेरे गाल को अपने दाँतों से काट लूँगा

रश्मि- मुस्कुराकर में फिर भी नही बताउन्गी

राज - अच्छा तो तू नही मानेगी तो फिर ले और राज अपने मूह को खोल कर रश्मि के गालो को अपने दाँतों के बीच हल्के से दबा लेता है और रश्मि मुस्कुराते हुए अपनी आँखे बंद कर लेती है. राज रश्मि का वजन संभालने के लिए उसे थोड़ा उपर उठा कर जैसे ही अपने हाथो को उचकाता है तो उसके हाथ में रश्मि के नंगे-नंगे मस्त चूतड़ आ जाते है और उसका लंड रश्मि के मोटे-मोटे गुदाज चुतड़ों के स्पर्श से खड़ा हो जाता है और वह रश्मि के भारी चुतड़ों को अपने हाथ के पंजो में भर कर दबोचता हुआ रश्मि के गाल पर अपने दाँतों को ज़ोर से गाड़ने लगता है और रश्मि, अपने हाथ मारती हुई,
रश्मि- आ....आ...भैया प्लीज़ छोड़ दो...आ...आ भैया प्लीज़ अच्छा बाबा में बताती हूँ

राज - उसके गाल को अपने दाँतों से छोड़कर उसके चेहरे को देखता है रश्मि का गाल पूरा लाल हो गया था और राज के दाँतों के निशान उसके गाल पर बन चुके थे और राज के लंड से पानी की बूंदे आने लगी थी, रश्मि मुस्कुराते हुए राज के सीने पर हाथ मारती हुई झूठा गुस्सा दिखा कर

रश्मि- कितनी ज़ोर से काट लिया आपने

राज - मुस्कुराता हुआ रश्मि की गदराई मोटी जाँघो को अपने हाथो से दबा कर, अभी बताएगी कि एक बार और काटू

रश्मि- मुस्कुराकर उसकी छाती में हाथ मारती हुई गुस्सा दिखा कर जाओ नही बताती

राज - उसकी बात सुन कर दुबारा उसके भरे हुए गोरे गालो को अपने मूह में भर लेता है और उसके चुतड़ों के मोटे पाटो को अपने हाथ से दबा कर जब अपनी बहन के गुलाबी भरे हुए गालो को काटता है तो उसका लंड झटके मारने लगता है और रश्मि की चूत से पानी बहने लग जाता है और पहले तो राज उसके गालो को चूस्ता हुआ उसका रस लेता है और रश्मि उसके सीने से अपने दूध को दबा लेती है और फिर राज थोड़ा ज़ोर से रश्मि के गालो को काटने लगता है और

रश्मि- आ....आ....आ भैया प्लीज़ मत काटो भैया में सच्ची इस बार बता दूँगी

राज - अपना मूह हटा कर पहले मेरी कसम खा नही तो में नही छोड़ूँगा और फिर से रश्मि के गालो को अपने मूह में भर कर अपने दाँत से काटने लगता है और

रश्मि- भैया आपकी कसम में बता रही हूँ ना प्लीज़ मत कतो भैयाअ....आ..आ...आ

राज - उसके गालो को छोड़ कर हाँ तो बता

रश्मि- पहले मुझे नीचे तो उतारो, राज नही तेरा भरोसा नही तू फिर से भाग जाएगी ऐसे ही बता दे मुझे तेरा कोई वजन नही लग रहा है.

रश्मि- उसकी गोद में चढ़ि हुई थोड़ा शरमा कर नही भैया में नही भागुंगी प्लीज़ अब मुझे उतार दो

राज - कुछ सोच कर उसको लेकर बेड पर जाकर लिटा देता है और उसके पास बैठ कर हाँ अब बोलो क्या समझ गई आप

रश्मि- उसको उंगली दिखा कर देखो बाद में डाटना नही

राज - मुस्कुराकर नही डान्टुन्गा अब बोलो

रश्मि- अपनी नज़रे इधर उधर मारती हुई, मुझे ऐसा लगता है आपको किसी लड़की से प्यार हो गया है और आप उससे अभी तक इज़हार नही कर पाए है, और राज की आँखो में देखती हुई, अब बोलो यही बात आप मुझसे कहना चाहते थे ना

राज - उसको देख कर मुस्कुराता हुआ उसके गाल को अपने हाथो से खीच कर शैतान कही की कितना तेज चलता है तेरा दिमाग़

रश्मि- मुस्कुराकर अब बोलो ना में ठीक कह रही हूँ ना

राज - मुस्कुरा कर हाँ

रश्मि- कौन है वह लड़की

राज - रश्मि को मुस्कुराते हुए देख कर, में अभी नही बता सकता

रश्मि- क्यो नही बता सकते

राज - बस ऐसे ही

रश्मि- मुझे जानना है

राज - मुस्कुराते हुए अच्छा में सिर्फ़ तुझे यह बता सकता हूँ कि वह कैसी लगती है

रश्मि- हाँ तो यही बता दो वह कैसी लगती है

राज - मुस्कुराकर उसके गालो पर हाथ फेरता हुआ, बिल्कुल तेरे जैसी

रश्मि मुस्कुराकर अपने मन में भैया सीधे-सीधे यह क्यो नही कहते कि वह लड़की में ही हूँ,

रश्मि- क्या वह आपसे प्यार करती है

राज - एक दम से यह तो तुम जानो

रश्मि- मुस्कुराकर भला में कैसे जान सकती हूँ कि वह आपसे प्यार करती है या नही

राज - मेरा मतलब है तू इस बात का भी अंदाज़ा लगा कर बता दे

रश्मि- मुस्कुराते हुए मुझे तो लगता है वह भी आपको चाहती होगी

राज - मुस्कुराते हुए क्यो तुझे ऐसा क्यो लगता है

रश्मि- आप इतने हॅंडसम है वह ज़रूर आपको प्यार करती होगी

राज - क्या में बहुत हॅंडसम हूँ

रश्मि- मुस्कुराकर हाँ

राज - तो क्या तू भी मुझसे प्यार करती है

राज की बात सुन कर रश्मि के चेहरे का रंग उड़ जाता है और वह अपनी नज़रे नीची कर लेती है राज को कुछ अजीब लगता है और वह बात पलटते हुए, रश्मि के गालो पर हाथ फेर कर

राज - रश्मि मेने बहुत ज़ोर से तुझे काट लिया ना

रश्मि- उसको अपनी कामुक नज़रे उठा कर देखती हुई मुस्कुरा कर हाँ

राज - आइ आम सॉरी रश्मि और रश्मि के गालो को राज बड़े प्यार से चूम लेता है और रश्मि का चेहरा फिर से लाल
हो जाता है

राज - रश्मि अब बहुत मस्ती हो गई अब चल थोड़ा सो लेने दे में रात भर ट्रेन में ठीक से सो नही सका

रश्मि- मुस्कुराकर अपने मन में रात भर मेरे दूध दबाते बैठे रहे तो नींद कहाँ से पूरी होगी, और में जानती हूँ अब तो रोज रात को तुम मेरे चक्कर में अपनी नींद खराब करने वाले हो, ले लो मज़े ऐसी बहन दुबारा नही मिलने वाली है. उसके बाद रश्मि और राज सो जाते है और फिर शाम को 5 बजे दोनो बाहर घूमने चल देते है.

रश्मि- भैया अगर यहाँ हमारे पास बाइक होती तो अलग ही मज़ा आता घूमने का

राज - मुस्कुराकर तू फिकर क्यो करती है बस यहाँ 10 मिनट रुक अभी सब इंतज़ाम हो जाएगा,
दोनो कुछ देर वही खड़े रहते है और फिर उनके सामने एक कार आकर रुकती है और ड्राइवर उतर कर राज को कार की चाबी दे कर चला जाता है, राज कार का गेट खोल कर चल रश्मि बैठ जा

रश्मि- भैया ये किसकी कार है

राज - फिलहाल तो हमारी है,

रश्मि- मतलब

राज - अरे मेने किराए की कार ले ली है और अब हम जब तक यहाँ रहेगे हम इस कार का यूज़ करेगे

रश्मि- मुस्कुराकर वाउ भैया यू आर ग्रेट

राज - रश्मि की और मुस्कुराकर तो क्या अपनी बहना रानी को पेदल कश्मीर की सैर कराउन्गा,

राज कार की ड्राइविंग सीट पर बैठ जाता है औट रश्मि को अपने साइड में बैठा कर चल देता है

रश्मि- भैया हम कहाँ जा रहे है

राज - बस कश्मीर की हँसी वादियो में जब तक दिल करेगा घूमते रहेगे

रश्मि- ओके

राज - रश्मि को मुस्कुराकर अब बता तुझे कैसा लग रहा है

रश्मि- बहुत अच्छा

तभी रश्मि का मोबाइल बजता है और

रश्मि-हेलो

कोमल- क्या हो रहा है डार्लिंग

रश्मि- कुछ नही भैया के पास बैठी हूँ

कोमल- जानेमन भैया के पास बैठी है या भैया के मोटे लंड पर बैठी है

रश्मि- अपने भैया को देखती है और राज उसी को देख रहा था, रश्मि अपने भैया की ओर मुस्कुराती हुई, हाँ कोमल बोल कैसे याद किया

कोमल- सच-सच बता क्या कर रही है

रश्मि- अरे में भैया के साथ घूमने जा रही हूँ

कोमल- कहाँ कश्मीर में घूम रही है क्या

रश्मि- हाँ

कोमल- देखना वहाँ ठंड बहुत पड़ती है ठंड के चक्कर में अपने भैया का लंड मत ले लेना

रश्मि- तू हमेशा बकवास के अलावा भी कुछ बोलेगी

कोमल- मुस्कुराकर अच्छा लगता है तेरे भैया तेरे बिल्कुल करीब ही बैठे है, कहीं तेरे दूध तो नही दबा रहे है

रश्मि- चल में तुझसे बाद में बाद करती हूँ

कोमल- अरे मेरी बात तो सुन

रश्मि- बाइ

कोमल- ओके बाबा बाइ

राज - क्या कह रही है कोमल

रश्मि- मुस्कुराकर अपने मन में यही कि अपने भैया से अपनी चूत मरवा ले, कुछ नही भैया उसे तो बकबक करने की आदत है

राज - मुस्कुराकर वैसे तेरी सहेली है मस्त

रश्मि- मुस्कुराकर क्यो आपको पसंद है क्या

राज - हाँ ठीक है

रश्मि- तो फिर उसका क्या होगा जिसे आप प्यार करते हो

राज - मुस्कुराकर रश्मि को देखता हुआ, हा में उससे प्यार तो करता हूँ पर पता नही वह मुझे चाहती है कि नही

रश्मि- मुस्कुराते हुए, आपको तो कोई भी लड़की प्यार करना चाहेगी

राज - रश्मि के सामने ही उसके दूध को देख कर उसकी आँखो में देख कर, क्या तू भी मुझे प्यार करना चाहेगी

रश्मि- अपनी नज़रे नीची कर लेती है

राज - क्या हुआ तूने मेरी बात का जवाब नही दिया

रश्मि- अपनी नज़रे उसकी ओर करके, में कैसे आप से प्यार कर सकती हूँ


राज - क्यो तुझे में अच्छा नही लगता

रश्मि- अपनी नज़रे इधर उधर करते हुए, नही ऐसी बात नही है

राज - तो फिर कैसी बात है

रश्मि- उसकी आँखो में देख कर, आप तो मेरे भाई हो

राज - तो क्या में तुझे अच्छा नही लगता हूँ

रश्मि- अपनी नज़रे नीची करके मुस्कुराती हुई, नही और फिर राज की आँखो में मुस्कुराकर देखने लगती है और

राज - उसके मोटे-मोटे गदराए दूध को उसकी आँखो के सामने देखता है और रश्मि अपने भाई की नज़रो को अपने दूध पर जाते देख अपनी नज़रे झुका लेती है

राज - पर तू तो मुझे बहुत अच्छी लगती है और में तुझसे बहुत प्यार करता हूँ

रश्मि- राज की बात सुन कर सॉक्ड हो जाती है और उसकी आँखो में देखने लगती है

राज - रश्मि को आँख मार कर अब बता तुझे में अच्छा लगता हूँ कि नही

रश्मि- मुस्कुराकर अपनी नज़रे नीचे करके, मुझे नही मालूम

राज - मुस्कुराता हुआ रश्मि अभी मेने तेरी तरफ़ जिस तरह इशारा किया है क्या तू भी मेरी तरफ कर सकती है

रश्मि- राज की पीठ पर हाथ मार कर मुस्कुराती हुई भैया आप बहुत गंदे हो

राज - अच्छा बाबा सॉरी, में तो मज़ाक कर रहा था, तुझे मेरी बात का बुरा तो नही लगा

रश्मि- अपने मन में भैया आप तो मेरी चूत भी अपने मोटे लंड से फाड़ दोगे तो मुझे बुरा नही लगेगा,

राज - बोल ना क्या तुझे मेरी बात का बुरा लगा

रश्मि- नही भैया में जानती हूँ कि आप मज़ाक कर रहे थे

राज - अपने मन में नही मेरी जान तू ग़लत जानती है में मज़ाक नही कर रहा था में सचमुच तुझे बहुत चाहता हूँ, पर मुझे समझ नही आ रहा है कि में तुझसे अपने दिल की बात कैसे कहूँ, में तुझसे कैसे कहूँ कि में तुझे अपनी बाँहो में भर कर चूमना चाहता हूँ, तेरे एक-एक खूबसूरत अंग को प्यार करना चाहता हूँ,




Raj muskura kar abhi batata hu aur Rashmi ke piche bhagta hai aur Rashmi use dekh kar bhagne lagti hai tabhi Raj piche se Rashmi ko pakad kar daboch leta hai aur uske hath Rashmi ke kase huye doodh ke upar se use pakde huye doodh ko kas kar daboche rahte hai,

Raj - muskuraakar ab bol batati hai ki nahi

Rashmi ko uski banho ki kasawat se uski chut phul jati hai aur vah muskurate huye nahi bataaungi

Raj - achcha tu aise nahi batayegi abhi ruk aur phir Raj Rashmi ko uske pero men hath dal kar use apni god men utha leta hai aur achanak uska hath Rashmi ki skirt ke andar uski nangi gori jangho par aa jata hai aur vah apne hath se Rashmi ki nangi gori jangho ko pakde Rashmi ke mote-mote doodh ko apne sine se lagaye huye uski aankho men muskuraakar dekhta hai aur Rashmi bhi uski aankho men muskura kar dekhti rahti hai, Raj ko lagta hai ki vah abhi Rashmi ke rasile hontho ko apne muh men bhar kar uske rasile hontho ka ras chus dale, aur Rashmi ki nangi moti jangho par Raj ke hath ki pakad se Rashmi ki chut pani-pani ho jati hai aur vah Raj ki banho men chadhi apne doodh ko uski chatiye se chipkaye rahti hai, dono ek dusre
ko kha jane wali najro se muskurate huye dekhte rahte hai, Raj apni bahan ko apne hatho men khada-khada uthaye rahta hai aur Rashmi apne bhai ke hatho ke upar tangi hui uski banho men chipki rahti hai,

Raj - muskuraakar uski jangho ko apne hatho se kas kar dabata hua dusre hath se uski pith ko apni aur dabate huye, ab bol ab kaha jayegi bach kar

Rashmi- muskuraakar mujhe god men utha liya to kya men bata dungi,

Raj - muskura kar uske rasile hontho ko dekhta hua, achcha nahi batayegi to men tere gal ko apne danto se kat lunga

Rashmi- muskuraakar men phir bhi nahi bataugi

Raj - achcha to tu nahi manegi to phir le aur Raj apne muh ko khol kar Rashmi ke galo ko apne danto ke beech halke se daba leta hai aur Rashmi muskurate huye apni aankhe band kar leti hai. Raj Rashmi ka vajan sambhalne ke liye use thoda upar utha kar jaise hi apne hatho ko uchkata hai to uske hath men Rashmi ke nange-nange mast chutd aa jate hai aur uska
lund Rashmi ke mote-mote gudaj chutdon ke sparsh se khada ho jata hai aur vah Rashmi ke bhari chutdon ko apne hath ke panjo men bhar kar dabochta hua Rashmi ke gal par apne danto ko jor se gadane lagta hai aur Rashmi, apne hath marti hui,
Rashmi- aa....aa...bhaiya please chod do...aa...aah bhaiya please achcha baba men batati hu

Raj - uske gal ko apne danto se chodkar uske chehre ko dekhta hai Rashmi ka gal pura lal ho gaya tha aur Raj ke danto ke nishan uske gal par ban chuke the aur Raj ke lund se pani ki bunde aane lagi thi, Rashmi muskurate huye Raj ke sine par hath marti hui jhutha gussa dikha kar

Rashmi- kitni jor se kat liya aapne

Raj - muskurata hua Rashmi ki gadaraai moti jangho ko apne hatho se daba kar, abhi batayegi ki ek bar aur katu

Rashmi- muskuraakar uski chati men hath marti hui gussa dikha kar jao nahi batati

Raj - uski bat sun kar dubara uske bhare huye gore galo ko apne muh men bhar leta hai aur uske chutdon ke maote pato ko apne hath se daba kar jab apni bahan ke gulabi bhare huye galo ko katta hai to uska lund jhatke marne lagta hai aur Rashmi ki chut se pani bahne lag jata hai aur pahle to Raj uske galo ko chusta hua uska ras leta hai aur Rashmi uske sine se apne doodh ko daba leti hai aur phir Raj thoda jor se Rashmi ke galo ko katne lagta hai aur

Rashmi- aa....aa....aah bhaiya please mat kato bhaiya men sachci is bar bata dungi

Raj - apna muh hata kar pahle meri kasam kha nahi to men nahi chodunga aur phir se Rashmi ke galo ko apne muh men bhar kar apne dant se katne lagta hai aur

Rashmi- bhaiya aapki kasam men bata rahi hu na please mat kato bhaiyaaa....aa..a...a

Raj - uske galo ko chod kar ha to bata

Rashmi- pahle mujhe niche to utaro, Raj nahi tera bharosa nahi tu phir se bhag jayegi aise hi bata de mujhe tera koi vajan nahi lag raha hai.

Rashmi- uski god men chadhi hui thoda sharma kar nahi bhaiya men nahi bhagugi please ab mujhe utar do

Raj - kuch soch kar usko lekar bed par jakar lita deta hai aur uske pas baith kar ha ab bolo kya samajh gai aap

Rashmi- usko ungli dikha kar dekho bad men datna nahi

Raj - muskuraakar nahi dantunga ab bolo

Rashmi- apni najre idhar udhar marti hui, mujhe aisa lagta hai aapko kisi ladki se pyar ho gaya hai aur aap usse abhi tak ijhar nahi kar paye hai, aur Raj ki aankho men dekhti hui, ab bolo yahi bat aap mujhse kahna chahte the na

Raj - usko dekh kar muskurata hua uske gal ko apne hatho se khich kar shaitan kahi ki kitna tej chalta hai tera dimag

Rashmi- muskuraakar ab bolo na men thik kah rahi hu na

Raj - muskura kar ha

Rashmi- kaun hai vah ladki

Raj - Rashmi ko muskurate huye dekh kar, men abhi nahi bata sakta

Rashmi- kyo nahi bata sakte

Raj - bas aise hi

Rashmi- mujhe janna hai

Raj - muskurate huye achcha men sirf tujhe yah bata sakta hu ki vah kaisi lagti hai

Rashmi- ha to yahi bata do vah kaisi lagti hai

Raj - muskuraakar uske galo par hath pherta hua, bilkul tere jaisi

Rashmi muskuraakar apne man men bhaiya sidhe-sidhe yah kyo nahi kahte ki vah ladki men hi hu,

Rashmi- kya vah aapse pyar karti hai

Raj - ek dam se yah to tum jano

Rashmi- muskuraakar bhala men kaise jan sakti hu ki vah aapse pyar karti hai ya nahi

Raj - mera matlab hai tu is bat ka bhi andaja laga kar bata de

Rashmi- muskurate huye mujhe to lagta hai vah bhi aapko chahti hogi

Raj - muskurate huye kyo tujhe aisa kyo lagta hai

Rashmi- aap itne handsome hai vah jarur aapko pyar karti hogi

Raj - kya men bahut handsome hu

Rashmi- muskuraakar ha

Raj - to kya tu bhi mujhse pyar karti hai

Raj ki bat sun kar Rashmi ke chehre ka rang ud jata hai aur vah apni najre nichi kar leti hai Raj ko kuch ajeeb lagta hai aur vah bat palatte huye, Rashmi ke galo par hath pherkar

Raj - Rashmi mene bahut jor se tujhe kat liya na

Rashmi- usko apni kamuk najre utha kar dekhti hui muskura kar ha

Raj - i am sorry Rashmi aur Rashmi ke galo ko Raj bade pyar se chum leta hai aur Rashmi ka chehra phir se lal
ho jata hai

Raj - Rashmi ab bahut masti ho gai ab chal thoda so lene de men rat bhar train men thik se so nahi saka

Rashmi- muskuraakar apne man men rat bhar mere doodh dabate baithe rahe to neend kaha se puri hogi, aur men janti hu ab to roj rat ko tum mere chakkar men apni neend kharab karne wale ho, le lo maje aisi bahan dubara nahi milne wali hai. uske bad Rashmi aur Raj so jate hai aur phir sham ko 5 baje dono bahar ghumne chal dete hai.

Rashmi- bhaiya agar yaha hamare pas byke hoti to alag hi maza aata ghumne ka

Raj - muskuarakar tu fikar kyo karti hai bas yaha 10 minat ruk abhi sab intjam ho jayega,
dono kuch der vahi khade rahte hai aur phir unke samne ek car aakar rukti hai aur driver utar kar Raj ko car ki chabi de kar chala jata hai, Raj car ka gate khol kar chal Rashmi baith ja

Rashmi- bhaiya ye kiski car hai

Raj - filhal to hamari hai,

Rashmi- matlab

Raj - are mene kiraye ki car le li hai aur ab hum jab tak yaha rahege hum is car ka use karege

Rashmi- muskuraakar wow bhaiya u r great

Raj - Rashmi ki aur muskuraakar to kya apni bahana rani ko pedal kashmeer ki sair karauga,

Raj car ki driving seat par baith jata hai aut Rashmi ko apne side men baitha kar chal deta hai

Rashmi- bhaiya hum kaha ja rahe hai

Raj - bas kashmeer ki hasi wadiyo men jab tak dil karega ghumte rahege

Rashmi- ok

Raj - Rashmi ko muskuraakar ab bata tujhe kaisa lag raha hai

Rashmi- bahut achcha

tabhi Rashmi ka mobile bajta hai aur

Rashmi-hello

Komal- kya ho raha hai darling

Rashmi- kuch nahi bhaiya ke pas baithi hu

Komal- janeman bhaiya ke pas baithi hai ya bhaiya ke mote lund par baithi hai

Rashmi- apne bhaiya ko dekhti hai aur Raj usi ko dekh raha tha, Rashmi apne bhaiya ki aur muskurati hui, ha Komal bol kaise yaad kiya

Komal- sach-sach bata kya kar rahi hai

Rashmi- are men bhaiya ke sath ghumne ja rahi hu

Komal- kaha kashmeer men ghum rahi hai kya

Rashmi- ha

Komal- dekhna vaha thand bahut padti hai thand ke chakkar men apne bhaiya ka lund mat le lena

Rashmi- tu hamesha bakwas ke alawa bhi kuch bolegi

Komal- muskuraakar achcha lagta hai tere bhaiya tere bilkul karib hi baithe hai, kahi tere doodh to nahi daba rahe hai

Rashmi- chal men tujhse bad men bad karti hu

Komal- are meri bat to sun

Rashmi- by

Komal- ok baba by

Raj - kya kah rahi hai Komal

Rashmi- muskuraakar apne man men yahi ki apne bhaiya se apni chut marwa le, kuch nahi bhaiya use to bakbak karne ki aadat hai

Raj - muskuraakar vaise teri saheli hai mast

Rashmi- muskuraakar kyo aapko pasand hai kya

Raj - ha thik hai

Rashmi- to phir uska kya hoga jise aap pyar karte ho

Raj - muskuraakar Rashmi ko dekhta hua, ha men usse pyar to karta hu par pata nahi vah mujhe chahti hai ki nahi

Rashmi- muskurate huye, aapko to koi bhi ladki pyar karna chahegi

Raj - Rashmi ke samne hi uske doodh ko dekh kar uski aankho men dekh kar, kya tu bhi mujhe pyar karna chahegi

Rashmi- apni najre nichi kar leti hai

Raj - kya hua tune meri bat ka jawab nahi diya

Rashmi- apni najre uski aur karke, men kaise aap se pyar kar sakti hu


Raj - kyo tujhe men achcha nahi lagta

Rashmi- apni najre idhar udhar karte huye, nahi aisi bat nahi hai

Raj - to phir kaisi bat hai

Rashmi- uski aankho men dekh kar, aap to mere bhai ho

Raj - to kya men tujhe achcha nahi lagta hu

Rashmi- apni najre nichi karke muskurati hui, nahi aur phir Raj ki aankho men muskuraakar dekhne lagti hai aur

Raj - uske mote-mote gadaraaye doodh ko uski aankho ke samne dekhta hai aur Rashmi apne bhai ki najro ko apne doodh par jate dekh apni najre jhuka leti hai

Raj - par tu to mujhe bahut achchi lagti hai aur men tujhse bahut pyar karta hu

Rashmi- Raj ki bat sun kar socked ho jati hai aur uski aankho men dekhne lagti hai

Raj - Rashmi ko aankh mar kar ab bata tujhe men achcha lagta hu ki nahi

Rashmi- muskuraakar apni najre niche karke, mujhe nahi malum

Raj - muskurata hua Rashmi abhi mene teri tarf jis tarah ishara kiya hai kya tu bhi meri taraf kar sakti hai

Rashmi- Raj ki pith par hath mar kar muskurati hui bhaiya aap bahut gande ho

Raj - achcha baba sorry, men to majak kar raha tha, tujhe meri bat ka bura to nahi laga

Rashmi- apne man men bhaiya aap to meri chut bhi apne mote lund se phad doge to mujhe bura nahi lagega,

Raj - bol na kya tujhe meri bat ka bura laga

Rashmi- nahi bhaiya men janti hu ki aap majak kar rahe the


Raj - apne man men nahi meri jan tu galat janti hai men majak nahi kar raha tha men sachmuch tujhe bahut chahta hu, par mujhe samajh nahi aa raha hai ki men tujhse apne dil ki bat kaise kahu, men tujhse kaise kahu ki men tujhe apni banho men bhar kar chumna chahta hu, tere ek-ek khubsurat ang ko pyar karna chahta hu,
(¨`·.·´¨) Always
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Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby rajaarkey » 07 Jan 2017 14:00

राज – रश्मि

रश्मि- हाँ भैया

राज - रश्मि को हसरत भरी निगाहो से देखता हुआ, क्या में सचमुच तुझे अच्छा नही लगता हूँ

रश्मि- मुस्कुराकर नही भैया में तो उसी तरह मज़ाक कर रही थी जिस तरह आप कर रहे थे

राज - मुस्कुराकर रश्मि की नशीली आँखो में देख कर, मतलब तू यह कहना चाहती है कि में तुझे बहुत अच्छा लगता हूँ.

रश्मि- मुस्कुराकर राज की आँखो में देख कर, मेने ऐसा तो नही कहा

राज - की मुस्कुराहट उसके चेहरे से गायब हो जाती है और तो फिर तू कहना क्या चाहती है

रश्मि- मुस्कुराकर अपने मन में यही भैया कि मेरी चूत को अपने मोटे लंड से फाड़ दो,

राज - बोल ना

रश्मि- शरमाने का नाटक करती हुई, में नही जानती

राज - मुस्कुराकर अच्छा मत बता, में बाद में तुझसे सब पूछ लूँगा और तू बताएगी

रश्मि- राज को हैरत भरी नज़रो से देखती हुई कैसे पूछ लोगे

राज - रश्मि को मुस्कुराकर देखता हुआ, वैसे ही जैसे आज तुझसे होटेल में पूछा था, तेरे गालो को काट कर

रश्मि- मूह फुलाते हुए अपनी आँखे दिखा कर भैया आप बहुत खराब हो और अपने गुलाबी गालो को अपने हाथो से सहलाती हुई, अभी तक मेरे गालो में दर्द है

राज - मुस्कुराते हुए, तो तू बिना अपना गाल कटाए मुझे कुछ बताती भी तो नही है

रश्मि- मूह फुलाकर राज को आँखे दिखाती हुई अगर आप मुझ से बड़े नही होते तो में भी उस बात का बदला ले लेती

राज - वो कैसे

रश्मि- आपके गाल को काट कर

राज - ठीक है तू ले लेना अपना बदला में तुझे कुछ नही कहूँगा

राज - बोल अभी लेगी या बाद में

रश्मि- गुस्सा दिखाती हुई मुझे नही लेना

राज - क्यो मेरे गाल अच्छे नही है क्या, मुझे तो तेरे गाल बहुत अच्छे लगते है, अब में रोज तेरे गाल को अपने मूह में भर कर काटुन्गा

रश्मि- राज की बात सुन कर मुस्कुराते हुए अपने हाथ का अगुठा राज को दिखा कर ठेंगा, में काटने दूँगी तब ना

राज - मुस्कुरा कर ठीक है वह तो होटेल चल कर पता चलेगा

रश्मि- राज को गुस्सा दिखाती हुई, भैया में बताए देती हूँ अबकी बार इतना ज़ोर से काटा तो हाँ

राज - उसको मुस्कुराकर देखता हुआ अच्छा बाबा अब की बार में धीरे से काटुन्गा

रश्मि- मुस्क्राकर राज की पीठ में मारती हुई भैया आप भी ना बहुत शैतान है

काफ़ी देर से उनकी कार सड़क पर दौड़ रही थी और रश्मि को बहुत ज़ोर की पेशाब लगी थी लेकिन राज अपनी बातों में मस्त गाड़ी दौड़ाए जा रह था और रश्मि शर्म के मारे कुछ कह नही पा रही थी लेकिन जब उससे बर्दास्त करना मुश्किल हो गया तो उसके चेहरे पर बैचैनि साफ झलकने लगी और

राज - क्या बात है रश्मि कुछ परेशानी है क्या

रश्मि- राज की आँखो में देख कर फिर अपनी नज़रे नीची कर लेती है

राज - अरे भाई कुछ तो बोल क्या हुआ

रश्मि- राज को देख कर भैया थोड़ा गाड़ी रोको ना

राज - उसकी बात को समझ गया और बाथरूम जाना है क्या

रश्मि- अपनी नज़रे नीचे किए हुए अपनी गर्दन को हाँ में हिला देती है और राज उसके शर्म से लाल चेहरे को देख कर मुस्कुराता हुआ गाड़ी साइड में लगा देता है और खुद कार में बैठा हुआ जाओ जल्दी से करके आओ

रश्मि- का चेहरा पूरा लाल हो चुका था और वह जल्दी से उतरती है और चारो तरफ देखती है दूर-दूर तक सन्नाटा था लेकिन कोई पेड़ भी पास में नही था, फिर रश्मि कुछ सोच कर कार के पीछे थोड़ा सा दूर जाकर अपनी मोटी गदराई गान्ड को कार की ओर करके अपने जीन्स को उतारने लगती है, राज अपने जेब से कंघा निकाल कर सीटी बजाता हुआ अपने बाल सवारने लगता है तभी उसकी नज़र बॅक मिरर पर पड़ती है और रश्मि अपनी जींस को पेंटी सहित नीचे सरका देती है और राज की आँखे फटी की फटी रह जाती है और उसके मूह से निकलता है बाप रे कितनी मोटी और गदराई गान्ड है रश्मि की, उसके देखते ही देखते रश्मि मूतने के लिए बैठ जाती है और राज उसके पूरे नंगे भारी-भरकम चुतड़ों को गौर से देखने लगता है, करीब 1 मिनट तक रश्मि मुतती रहती है उसके बाद वह खड़ी होकर जल्दी से अपनी पेंटी और फिर जीन्स को चढ़ा लेती है और फिर पलट कर वापस आकर गाड़ी में बैठ जाती है,


राज रश्मि के चेहरे को एक टक निहारने लगता है और रश्मि उसको इस तरह घूरते देख अपनी नज़रे नीचे कर लेती है उस समय उन दोनो के चेहरे से हसी गायब हो जाती है और राज अपनी नज़रे उस पर से हटा कर गाड़ी आगे बढ़ा देता है, काफ़ी देर तक दोनो के होंठ बंद रहते है और सिर्फ़ उनके दिमाग़ एक दूसरे के बारे में सोचते हुए गति करते रहते है, कुछ देर बाद उनकी गाड़ी एक छोटे से कस्बे में पहुचती है और वहाँ गाड़ी रोक कर राज रश्मि की ओर देख कर

राज - कुछ खाना है

रश्मि- उसकी ओर देख कर सिर्फ़ मुस्कुरा देती है

राज - गाड़ी से उतर कर दूसरी ओर जाकर रश्मि के साइड वाला गेट खोल देता है और रश्मि बाहर आ जाती है, सामने एक छोटा सा रेस्टौरेंट था दोनो उसके बाहर लगी चेयर पर बैठ जाते है और फिर राज खाने के लिए ऑर्डर कर देता है,

राज - रश्मि का मुरझाया चेहरा देख कर, क्या बात है नाराज़ है मुझसे

रश्मि- मुस्कुराकर नही तो

राज - तो फिर कुछ बोल क्यो नही रही है

रश्मि- मुस्कुराकर क्या बोलूं

राज - उसकी आँखो में देख कर अपने मन में आइ लव यू बोलो और क्या

रश्मि- उसकी नज़रो को देखती हुई जैसे उसकी बात को समझ गई हो और अपने मन में भैया जो तुम चाह रहे हो वह तो तुम्हे ही बोलना पड़ेगा, मेरी इतनी हिम्मत नही और अगर होती तो में तो कब से तुमसे चुद गई होती

राज - क्या मेरी कोई बात तुझे बुरी लगी है

रश्मि- मुस्कुराकर आपकी भला कोई बात मुझे बुरी लग सकती है क्या

राज - मुस्कुराते हुए, चाहे में तुझसे कुछ भी कह दूं

रश्मि- मुस्कुराकर अपनी नज़रे नीचे करके, हाँ

रश्मि राज को देख कर मंद-मंद मुस्कुराती है और अपने मन में, भैया अपनी बहन को पटाने की पूरी कोशिश कर रहे हो पर पटा नही पा रहे हो, मुझे तो तुम पर तरस आने लगा है

राज - क्यो मुस्कुरा रही है

रश्मि- कुछ नही बस ऐसे ही

राज - ज़रूर मेरे बारे में कुछ उल्टा सोच रही है

रश्मि- मुस्कुरा कर, भैया आप बहुत सीधे हो

राज - अच्छा, में तुझे किस आंगल से सीधा नज़र आता हूँ

रश्मि- इसलिए की आप अपनी उस दोस्त से आज तक इज़हार नही कर पाए

राज - कुछ सीरीयस होकर, क्या है ना रश्मि मुझे डर लगता है कि कहीं वह मेरी बात सुन कर नाराज़ ना हो जाए

रश्मि- भैया हिम्मत करके तो देखिए, क्या पता वह भी आपको बहुत चाहती हो

राज - कुछ सोच कर अच्छा रश्मि में ऐसा क्या करूँ कि मुझे पता चल जाए कि वह भी मुझे चाहती है

रश्मि- मुस्कुराकर मुझे क्या पता

राज - नही में तुमसे इसलिए पूछ रहा हूँ कि तुम भी एक लड़की हो और लड़किया ऐसे मॅटर पर क्या सोचती है

रश्मि- भैया एक काम कीजिए आप उसके करीब जाने की कोशिश कीजिए हो सकता है वह भी आपको रेस्पॉन्स दे

राज - मुस्कुराकर करीब जाने से तेरा क्या मतलब है

रश्मि- मुस्कुराकर अपनी नज़रे नीची करती हुई मुझे नही पता

राज - अरे यह क्या बात हुई अभी तो तू ही कह रही थी कि करीब जाओ और अब तू ही कह रही है कि करीब जाने का क्या मतलब है तुझे नही पता, बता ना तेरा क्या मतलब था

रश्मि- शरमाने का नाटक करती हुई, मेने कहा ना मुझे नही पता

राज - कहीं तू यह तो नही कहना चाहती है कि में उसे अपनी बाँहो में भर लूँ

रश्मि- अपनी नज़रे उठा कर उसकी आँखो में देख कर मुस्कुराती हुई, क्या भैया आप भी ना

राज - मुस्कुराता हुआ, भाई करीब जाने का तो यही मतलब होता है, वैसे में उसके करीब जाना चाहता हूँ

रश्मि- क्यों

राज - क्यो क्या वह मुझे अच्छी लगती है इसलिए

राज और रश्मि इसी तरह बाते करते हुए वहाँ से खा पीकर वापस गाड़ी में आकर बैठ जाते है और

राज - रश्मि अब वापस चलते है शाम होने वाली है

रश्मि- ठीक है भैया

और फिर दोनो वापस अपने होटेल में आ जाते है, रात को खाना खाने के बाद राज फोन पर किसी से बाते करता हुआ बालकनी में टहलता रहता है और रश्मि बेड पर लेटी-लेटी राज को देखती हुई मंद-मंद मुस्कुराती रहती है, तभी राज फोन डिसकनेक्ट करके रश्मि के पास आकर बेड पर बैठ जाता है

राज - क्या सोच रही है मेरी गुड़िया रानी

रश्मि- कुछ नही भैया

राज - में भी तेरे पास लेट जाउ क्या

रश्मि- मुस्कुराकर अपने मन में, मेरे पास क्यो भैया मेरे उपर लेट जाओ

राज - रश्मि के पास उसकी ओर करवट ले कर लेट जाता है और फिर दोनो एक दूसरे को मंद-मंद मुस्कुराते हुए देखने लगते है,

राज - रश्मि एक बात कहूँ

रश्मि- क्या

राज - उसके मस्ताने चेहरे को देख कर तू बहुत खूबसूरत है

रश्मि- उसकी बात सुन कर अपनी नज़रे इधर उधर करती हुई, क्या बात है आज मेरी बड़ी तारीफ कर रहे हो

राज - रश्मि मेरा मन कर रहा है कि

रश्मि- उसकी बात सुन कर अपनी नज़रो से उसे कामुक अंदाज में देखती हुई क्या मन कर रहा है

राज - मुस्कुराता हुआ, यही कि में तेरे गालो को काट लूँ

रश्मि- अपनी उंगली उसको दिखाते हुए मुस्कुराकर देखो भैया मुझसे दूर रहना मेरे गालो में अभी तक दर्द है

राज - मुस्कुराते हुए रश्मि एक बार काट लेने दे ना

रश्मि- नही भैया देखो में आपको मार दूँगी

राज - अच्छा में बहुत धीरे से काटुन्गा

रश्मि- अपने हाथो से अपने गाल को छुपाते हुई नही में नही काटने दूँगी

राज - रश्मि के सर के पीछे अपने हाथ को ले जाकर रश्मि बस एक बार में बहुत धीरे से काटुन्गा, अगर में ज़ोर से काटू तो मुझसे कभी बात मत करना

रश्मि- मुस्कुराती हुई अपने हाथ को हटा कर, देखो भैया ज़ोर से काटा तो में बताए देती हूँ हाँ,

राज - अपने होंठो को रश्मि के गुलाबी गाल पर ले जाता है और उसके गाल को अपने दाँतों से हल्के से दबाता है और रश्मि की फूली हुई चूत में पानी आ जाता है और राज का लंड अपनी बहन के खूबसूरत चेहरे को अपने मूह से लगाने पर खड़ा हो जाता है, राज जब अपना मूह हटाता है तो रश्मि का चेहरा लाल हो जाता है और वह मुस्कुराती हुई राज को देखने लगती है, राज अपने हाथो से उसके गाल को पोछता हुआ उसके सर में अपना हाथ लेजा कर उसके बालो के बीच अपनी उंगलिया घूमाते हुए उसे देखने लगता है और रश्मि मुस्कुराते हुए उसकी आँखो में देखने लगती है

रश्मि- राज को घूर कर देखती हुई अपने मन में भैया कुछ करो बार-बार मेरी चूत भर गीली कर देते हो और कुछ करते नही, इतना क्या डरते हो मुझसे, पकड़ कर कस कर मसल क्यो नही देते, मुझे तो लगता है अब मुझे ही कुछ करना पड़ेगा तुम तो ज़रा भी आगे नही बढ़ रहे हो और में तुम्हारे मोटे लंड को अपनी फूली हुई चूत में लेने के लिए तड़प रही हूँ,

उधर राज अपने आप से बाते करते हुए, रश्मि तू कितनी खूबसूरत है में तुझे अपनी बाँहो में भर कर चूमना चाहता हूँ, पर समझ में नही आता में कैसे आगे बढू,

रश्मि- भैया मुझे तो नींद आ रही है, में सो जाउ

राज - उसके बालो में हाथ फेरते हुए ठीक है

रश्मि- सीधे लेट कर अपनी आँखे बंद कर लेती है और राज उसकी उठी हुई मोटी-मोटी चुचियो को देखने लगता है और उसका लंड खड़ा हो जाता है, काफ़ी देर तक रश्मि अपनी सांसो को थामे हुए चुपचाप अपनी आँखे बंद किए पड़ी रहती है और राज उसकी कसी हुई गदराई चुचियो को देखता रहता है, जब लगभग एक घंटा हो जाता है तो राज धीरे से सरक कर रश्मि के गदराए बदन से चिपक जाता है और अपने हाथ को रश्मि के गुदाज पेट पर रख कर अपने मूह को उसके गोरे गालो से सटा कर उसके हुस्न की खुसबू लेते हुए धीरे-धीरे उसके पेट पर अपना हाथ फेरने लगता है और रश्मि की दिल की धड़कन तेज हो जाती है, राज धीरे-धीरे रश्मि के गालो को अपने होंठो से सहलाता हुआ उसके गुलाबी गालो को चूमते हुए धीरे-धीरे उसके पेट को दबा-दबा कर महसूस करते हुए धीरे से रश्मि के कान में

राज - रश्मि, ओ रश्मि

रश्मि उसकी बात का कोई रिप्लाइ नही देती है और चुपचाप आँखे बंद किए हुए मस्ती में पड़ी रहती है और उसकी सांसो को कंट्रोल करने की कोशिश करती है, राज जब महसूस करता है कि रश्मि सो चुकी है तो वह हिम्मत करके अपने हाथ को उसके पेट से उठा कर उसकी गदराए हुए मोटे-मोटे कसे हुए दूध पर रख देता है और उसके दूध का नरम-नरम गुदाज अहसास उसे पागल कर देता है, रश्मि उसकी हरकत से मस्ती में भर जाती है, राज अपने हाथ को रश्मि के गदराए दूध पर धीरे-धीरे दबाते हुए अपनी उंगलियो को समेट कर उसके पूरे दूध को अपने पंजो में भर कर उसके दूध को धीरे- धीरे दबाने लगता है और रश्मि की चूत फूलने लगती है और पानी उसकी चूत से धीरे-धीरे रिसने लगता है, राज से बर्दास्त करना मुस्किल हो जाता है और वह रश्मि के मोटे-मोटे दूध को दबाता हुआ उसके पूरे चेहरे को अपने होंठो से पागलो की तरह चूमने लगता है, रश्मि का दिल करता है कि वह राज के सीने से कस कर चिपक जाए लेकिन वह हिम्मत बाँधे पड़ी रहती है,

राज उसके कभी एक कभी दूसरे दूध को हल्के -हल्के मसल्ते हुए रश्मि के गले को चूमने लगता है और फिर वह अपने हाथ को रश्मि की कमर और कमर के बाद उसकी गदराई मोटी जाँघो पर फेरते हुए उसकी मोटी-मोटी गदराई जाँघो को धीरे -धीरे अपने हाथों से दबोचता हुआ उसकी जाँघो की मोटाई को महसूस करने लगता है उसका लंड उसका पेंट फाड़ने को तैयार हो जाता है, वह रश्मि की बाँहो में हाथ डाल कर उसे अपनी और पलटा लेता है और फिर अपने हाथ को रश्मि की गुदाज गदराई हुई मोटी गान्ड पर लेजा कर उसके भारी-भारी उठे हुए चुतड़ों को अपने हाथो में भर-भर कर दबोचने लगता है, रश्मि के कसे हुए चुतड़ों को वह खूब ज़ोर-ज़ोर से दबाता है



Raj – Rashmi

Rashmi- ha bhaiya

Raj - Rashmi ko hasrat bhari nigaho se dekhta hua, kya men sachmuch tujhe achcha nahi lagta hu

Rashmi- muskuraakar nahi bhaiya men to usi tarah majak kar rahi thi jis tarah aap kar rahe the

Raj - muskuraakar Rashmi ki nashili aankho men dekh kar, matlab tu yah kahna chahti hai ki men tujhe bahut achcha lagta hu.

Rashmi- muskuraakar Raj ki aankho men dekh kar, mene aisa to nahi kaha

Raj - ki muskurahat uske chehre se gayab ho jati hai aur to phir tu kahna kya chahti hai

Rashmi- muskuraakar apne man men yahi bhaiya ki meri chut ko apne mote lund se phad do,

Raj - bol na

Rashmi- sharmane ka natak karti hui, men nahi janti

Raj - muskuraakar achcha mat bata, men bad men tujhse sab puch lunga aur tu batayegi

Rashmi- Raj ko hairat bhari najro se dekhti hui kaise puch loge

Raj - Rashmi ko muskuraakar dekhta hua, vaise hi jaise aaj tujhse hotel men pucha tha, tere galo ko kat kar

Rashmi- muh phulate huye apni aankhe dikha kar bhaiya aap bahut kharab ho aur apne gulabi galo ko apne hatho se sahlati hui, abhi tak mere galo men dard hai

Raj - muskurate huye, to tu bina apna gal kataye mujhe kuch batati bhi to nahi hai

Rashmi- muh phulakar Raj ko aankhe dikhati hui agar aap mujh se bade nahi hote to men bhi us bat ka badla le leti

Raj - vo kaise

Rashmi- aapke gal ko kat kar

Raj - thik hai tu le lena apna badla men tujhe kuch nahi kahuga

Raj - bol abhi legi ya bad men

Rashmi- gussa dikhati hui mujhe nahi lena

Raj - kyo mere gal achche nahi hai kya, mujhe to tere gal bahut achche lagte hai, ab men roj tere gal ko apne muh men bhar kar katunga

Rashmi- Raj ki bat sun kar muskurate huye apne hath ka agutha Raj ko dikha kar thenga, men katne dungi tab na

Raj - muskura kar thik hai vah to hotel chal kar pata chalega

Rashmi- Raj ko gussa dikahti hui, bahiya men bataye deti hu abki bar itna jor se kata to ha

Raj - usko muskuraakar dekhta hua achcha baba ab ki bar men dhire se katunga

Rashmi- muskrakar Raj ki pith men marti hui bhaiya aap bhi na bahut shaitan hai

kaphi der se unki car sadak par daud rahi thi aur Rashmi ko bahut jor ki peshab lagi thi lekin Raj apni bato men mast gadi daudaye ja rah tha aur Rashmi sharm ke mare kuch kah nahi pa rahi thi lekin jab usse bardast karna mushkil ho gaya to uske chehre par baichaini saf jhalakne lagi aur

Raj - kya bat hai Rashmi kuch pareshani hai kya

Rashmi- Raj ki aankho men dekh kar phir apni najre nichi kar leti hai

Raj - are bhai kuch to bol kya hua

Rashmi- Raj ko dekh kar bhaiya thoda gadi roko na

Raj - uski bat ko samajh gaya aur bathroom jana hai kya

Rashmi- apni najre niche kiye huye apni gardan ko ha men hila deti hai aur Raj uske sharm se lal chechre ko dekh kar muskurata hua gadi side men laga deta hai aur khud car men baitha hua jao jaldi se karke aao
Rashmi- ka chehra pura lal ho chuka tha aur vah jaldi se utarti hai aur charo taraf dekhti hai dur-dur tak sannata tha lekin koi ped bhi pas men nahi tha, phir Rashmi kuch soch kar car ke piche thoda sa dur jakar apni moti gadaraai gaanD ko car ki aur karke apne jeans ko utarne lagti hai, Raj apne jeb se kangha nikal kar seeti bajata hua apne bal sawarne lagta hai tabhi uski najar back mirror par padti hai aur Rashmi apni jeanse ko penty sahit niche sarka deti hai aur Raj ki aankhe phati ki phati rah jati hai aur uske muh se nikalta hai bap re kitni moti aur gadaraai gaanD hai Rashmi ki, uske dekhte hi dekhte Rashmi mutne ke liye baith jati hai aur Raj uske pure nange bhari-bharkam chutdon ko gaur se dekhne lagta hai, karib 1 minat tak Rashmi mutti rahti hai uske bad vah khadi hokar jaldi se apni penty aur phir jeans ko chadha leti hai aur phir
palat kar vapas aakar gadi men baith jati hai,


Raj Rashmi ke chehre ko ek tak niharne lagta hai aur Rashmi usko is tarah ghurte dekh apni najre niche kar leti hai us samay un dono ke chehre se hasi gayab ho jati hai aur Raj apni najre us par se hata kar gadi aage badha deta hai, kaphi der tak dono ke honth band rahte hai aur sirf unke dimag ek dusre ke bare men sochte huye gati karte rahte hai, kuch der bad unki gadi ek chote se kasbe men pahuchti hai aur vaha gadi rok kar Raj Rashmi ki aur dekh kar

Raj - kuch khana hai

Rashmi- uski aur dekh kar sirf muskura deti hai

Raj - gadi se utar kar dusri aur jakar Rashmi ke side wala gate khol deta hai aur Rashmi bahar aa jati hai, samne ek chota sa restaurent tha dono uske bahar lagi chair par baith jate hai aur phir Raj khane ke liye order kar deta hai,

Raj - Rashmi ka murjhaya chehra dekh kar, kya bat hai naraj hai mujhse

Rashmi- muskuraakar nahi to

Raj - to phir kuch bol kyo nahi rahi hai

Rashmi- muskuraakar kya bolu

Raj - uski aankho men dekh kar apne man men i love u bolo aur kya

Rashmi- uski najro ko dekhti hui jaise uski bat ko samajh gai ho aur apne man men bhaiya jo tum chah rahe ho vah to tumhe hi bolna padega, meri itni himmat nahi aur agar hoti to men to kab se tumse chud gai hoti

Raj - kya meri koi bat tujhe buri lagi hai

Rashmi- muskuraakar aapki bhala koi bat mujhe buri lag sakti hai kya

Raj - muskurate huye, chahe men tujhse kuch bhi kah du

Rashmi- muskuraakar apni najre niche karke, ha

Rashmi Raj ko dekh kar mand-mand muskurati hai aur apne man men, bhaiya apni bahan ko patane ki puri koshish kar rahe ho par pata nahi pa rahe ho, mujhe to tum par taras aane laga hai

Raj - kyo muskura rahi hai

Rashmi- kuch nahi bas aise hi

Raj - jarur mere bare men kuch ulta soch rahi hai

Rashmi- muskura kar, bhaiya aap bahut sidhe ho

Raj - achcha, men tujhe kis angal se sidha najar aata hu

Rashmi- isliye ki aap apni us dost se aaj tak ijhar nahi kar paye

Raj - kuch serious hokar, kya hai na Rashmi mujhe dar lagta hai ki kahi vah meri bat sun kar naraj na ho jaye

Rashmi- bhaiya himmat karke to dekhiye, kya pata vah bhi aapko bahut chahti ho

Raj - kuch soch kar achcha Rashmi men aisa kya karu ki mujhe pata chal jaye ki vah bhi mujhe chahti hai
Rashmi- muskuraakar mujhe kya pata

Raj - nahi men tumse isliye puch raha hu ki tum bhi ek ladki ho aur ladkiya aise matter par kya sochti hai

Rashmi- bhaiya ek kam kijiye aap uske karib jane ki koshish kijiye ho sakta hai vah bhi aapko response de

Raj - muskuraakar karib jane se tera kya matlab hai

Rashmi- muskuraakar apni najre nichi karti hui mujhe nahi pata

Raj - are yah kya bat hui abhi to tu hi kah rahi thi ki karib jao aur ab tu hi kah rahi hai ki karib jane ka kya matlab hai tujhe nahi pata, bata na tera kya matlab tha

Rashmi- sharmane ka natak karti hui, mene kaha na mujhe nahi pata

Raj - kahi tu yah to nahi kahna chahti hai ki men use apni banho men bhar lu

Rashmi- apni najre utha kar uski aankho men dekh kar muskurati hui, kya bhaiya aap bhi na

Raj - muskurata hua, bhai karib jane ka to yahi matlab hota hai, vaise men uske karib jana chahta hu
Rashmi- kyo

Raj - kyo kya vah mujhe achchi lagti hai isliye

Raj aur Rashmi isi tarah bate karte huye vaha se kha pikar vapas gadi men akar baith jate hai aur

Raj - Rashmi ab vapas chalte hai sham hone wali hai

Rashmi- thik hai bhaiya

aur phir dono vapas apne hotel men aa jate hai, rat ko khana khane ke bad Raj phone par kisi se bate karta hua balkani men tahlta rahta hai aur Rashmi bed par leti-leti Raj ko dekhti hui mand-mand muskurati rahti hai, tabhi Raj phone disconnect karke Rashmi ke pas aakar bed par baith jata hai

Raj - kya soch rahi hai meri gudiya rani

Rashmi- kuch nahi bhaiya

Raj - men bhi tere pas let jau kya

Rashmi- muskuraakar apne man men, mere pas kyo bhaiya mere upar let jao

Raj - Rashmi ke pas uski aur karwat le kar let jata hai aur phir dono ek dusre ko mand-mand muskurate huye dekhne lagte hai,

Raj - Rashmi ek bat kahu

Rashmi- kya

Raj - uske mastane chehre ko dekh kar tu bahut khubsurat hai

Rashmi- uski bat sun kar apni najre idhar udhar karti hui, kya bat hai aaj meri badi tarif kar rahe ho

Raj - Rashmi mera man kar raha hai ki

Rashmi- uski bat sun kar apni najro se use kamuk andaj men dekhti hui kya man kar raha hai

Raj - muskurata hua, yahi ki men tere galo ko kat lu

Rashmi- apni ungli usko dekhate huye muskuraakar dekho bahiya mujhse dur rahna mere galo men abhi tak dard hai

Raj - muskurate huye Rashmi ek bar kat lene de na

Rashmi- nahi bhaiya dekho men aapko mar dungi

Raj - achcha men bahut dhire se katunga

Rashmi- apne hatho se apne gal ko chupati hui nahi men nahi katne dungi

Raj - Rashmi ke sar ke piche apne hath ko le jakar Rashmi bas ek bar men bahut dhire se katunga, agar men jor se katu to mujhse kabhi bat mat karna

Rashmi- muskurati hui apne hath ko hata kar, dekho bhaiya jor se kata to men bataye deti hu ha,

Raj - apne hontho ko Rashmi ke gulabi gal par le jata hai aur uske gal ko apne danto se halke se dabata hai aur Rashmi ki phuli hui chut men pani aa jata hai aur Raj ka lund apni bahan ke khubsurat chehre ko apne muh se lagane par khada ho jata hai, Raj jab apna muh hatata hai to Rashmi ka chehra lal ho jata hai aur vah muskurati hui Raj ko dekhne lagti hai, Raj apne hatho se uske gal ko pochta hua uske sar men apna hath lejakar uske balo ke beech apni ungliya ghumate huye use dekhne lagta hai aur Rashmi muskurate huye uski aankho men dekhne lagti hai

Rashmi- Raj ko ghur kar dekhti hui apne man men bhaiya kuch karo bar-bar meri chut bhar gili kar dete ho aur kuch karte nahi, itna kya darte ho mujhse, pakad kar kas kar masal kyo nahi dete, mujhe to lagta hai ab mujhe hi kuch karna padega tum to jara bhi aage nahi badh rahe ho aur men tumhare mote lund ko apni phuli hui chut men lene ke liye tadap rahi hu,

udhar Raj apne aap se bate karte huye, Rashmi tu kitni khubsurat hai men tujhe apni banho men bhar kar chumna chahta hu, par samajh men nahi aata men kaise aage badhu,

Rashmi- bhaiya mujhe to neend aa rahi hai, men so jau

Raj - uske balo men hath pherte huye thik hai

Rashmi- sidhe lat kar apni aankhe band kar leti hai aur Raj uski uthi hui moti-moti chuchiyo ko dekhne lagta hai aur uska lund khada ho jata hai, kaphi der tak Rashmi apni sanso ko thame huye chupchap apni aankhe band kiye padi rahti hai aur Raj uski kasi hui gadaraai chuchiyo ko dekhta rahta hai, jab lagbhag ek ghanta ho jata hai to Raj dhire se sarak kar Rashmi ke gadaraaye badan se chipak jata hai aur apne hath ko Rashmi ke gudaj pet par rakh kar apne muh ko uske gore galo se sata kar uske husn ki khusboo lete huye dhire-dhire uske pet par apna hath pherne lagta hai aur Rashmi ki dil ki dhadkan tej ho jati hai, Raj dhire-dhire Rashmi ke galo ko apne hontho se sahlata hua uske gulabi galo ko chumte huye dhire-dhire uske
pet ko daba-daba kar mehsus karte huye dhire se Rashmi ke kan men

Raj - Rashmi, o Rashmi

Rashmi uski bat ka koi reply nahi deti hai aur chupchap aankhe band kiye huye masti men padi rahti hai aur uski sanso ko control karne ki koshish karti hai, Raj jab mehsus karta hai ki Rashmi so chuki hai to vah himmat karke apne hath ko uske pet se utha kar uski gadaraaye huye mote-mote kase huye doodh par rakh deta hai aur uske doodh ka naram-naram gudaj ahasaas use pagal kar deta hai, Rashmi uski harkat se masti men bhar jati hai, Raj apne hath ko Rashmi ke gadaraaye doodh par dhire-dhire dabate huye apni ungliyo ko samet kar uske pure doodh ko apne panjo men bhar kar uske doodh ko dhire- dhire dabane lagta hai aur Rashmi ki chut phulne lagti hai aur pani uski chut se dhire-dhire risne lagta hai, Raj se bardast karna muskil ho jata hai aur vah Rashmi ke mote-mote doodh ko dabata hua uske pure chehre ko apne hontho se paglo ki tarah chumne lagta hai, Rashmi ka dil karta hai ki vah Raj ke sine se kas kar chipak jaye lekin vah himmat bandhe padi rahti hai,

Raj uske kabhi ek kabhi dusre doodh ko halke -halke masalte huye Rashmi ke gale ko chumne lagta hai aur phir vah apne hath ko Rashmi ki kamar aur kamar ke bad uski gadaraai moti jangho par pherte huye uski moti-moti gadaraai jangho ko dhire -dhire apne hantho se dabochta hua uski jangho ki motai ko mehsus karne lagta hai uska lund uska pent phadne ko taiyar ho jata hai, vah Rashmi ki banho men hath dal kar use apni aur palta leta hai aur phir apne hath ko Rashmi ki gudaj gadaraai hui moti gaanD par lejakar uske bhari-bhari uthe huye chutd ko apne hatho men bhar-bhar kar dabochne lagta hai, Rashmi ke kase huye chutdon ko vah khub jor-jor se dabata hai

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Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby rajaarkey » 07 Jan 2017 14:02

राज का लंड झटके पर झटके मारने लगता है और रश्मि की फूली हुई चूत पानी-पानी हो जाती है, राज से रहा नही जाता है और वह रश्मि के होंठो को चूमते हुए उसकी कसी हुई मस्त चुचियो को दबा-दबा कर मसल्ने लगता है, रश्मि को लगता है कि उसके मूह से कभी भी एक जोरदार सिसकी निकल जाएगी उससे बर्दास्त करना मुश्किल हो जाता है और चाहती है कि राज सीधा लेट कर उसे कस कर अपने सीने से चिपका ले, राज शायद उसके दिल की बात को समझ लेता है और राज का मन होता है कि वह अपनी बहन को लेट कर अपने सीने से चिपका कर उसके रसीले होंठो को धीरे-धीरे पिए और वह रश्मि के साइड में लेट जाता है और रश्मि को कस कर अपने सीने से चिपका कर उसके रसीले होंठो को धीरे-धीरे पीने लगता है, रश्मि के जिस्म से उठती महक उसे पागल बना देती है, वह लगातार कभी रश्मि के मोटे-मोटे दूध कभी उसका पेट कभी उसकी कमर कभी उसकी मोटी गदराई गान्ड कभी उसकी मासल जाँघो को सहलाता हुआ लगातार रश्मि के होंठो को पीता रहता है, और फिर राज जो हरकत करता है उससे रश्मि की जान निकलते-निकलते रह जाती है,

राज अपने लंड को बाहर निकाल कर रश्मि का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख लेता है और अपने हाथो को रश्मि के हाथो के पीछे ले जाकर रश्मि की मुट्ठी को अपने लंड पर कस लेता है, रश्मि की सांस एक दम रुक जाती है और अपने भैया के मोटे लंड की मोटाई को महसूस करके रश्मि पागल हो जाती है और एक पल के लिए तो उसे ऐसा लगता है कि अपने भैया के मोटे लंड को अपने हाथों में कस कर दबा ले उसकी आँखो की पलके खुलने के लिए तरसने लगती है, वह अपने भैया के लंड की मोटाई को आँखे बंद किए हुए अपने हाथ से महसूस करती है और उसकी सांसो की रफ़्तार इतनी तेज हो जाती है कि उसको ऐसा लगता है जैसे उसके मूह से एक दम से शब्द निकल पड़ेंगे, राज रश्मि के हाथ के पीछे अपना हाथ को लगाए हुए अपने लंड को धीरे-धीरे सहलाने लगता है और रश्मि की प्यासी चूत पानी छोड़ने लगती है,

कुछ देर बाद राज वापस अपने लंड को अंदर करके फिर से रश्मि से कस कर चिपक जाता है और उसकी हरकतों में कुछ विराम हो जाता है

राज और रश्मि सारी रात ठीक से सो नही पाते है राज लगातार रश्मि के बदन को सहलाता हुआ उसे चूमता रहता है और अपने मन में सोचता है कि अब बर्दास्त करना मुस्किल है मुझे रश्मि से अपने प्यार का इज़हार करना ही होगा, में रश्मि के बिना नही रह सकता हूँ, मुझे बस रश्मि चाहिए चाहे जैसे भी, में अपनी प्यारी बहना को पूरी नंगी करके अपने जिस्म से चिपकाना चाहता हूँ, में रश्मि को रात भर नंगी करके खूब कस-कस कर चोदना चाहता हूँ, में रश्मि के बिना नही रह सकता हू,

मुझे कैसे भी करके रश्मि को बताना होगा कि में उसे कितना चाहता हूँ, राज सोने की कोशिश करता है लेकिन नींद उसे आती नही है और वह पूरी रात रश्मि को जहाँ मर्ज़ी होती है सहलाता है और उसके रसीले होंठो का रस पीता है,

रश्मि हिम्मत किए चुपचाप पड़ी रहती है और वह अपने मन में सोचती है अब बहुत हो गया, मुझे अब अपने भैया का मोटा लंड किसी भी हालत में चाहिए में अब अपने भैया से अपनी चूत मरवाए बिना नही रह सकती,

दोनो अपनी-अपनी सोच के साथ एक दूसरे के जिस्म से चिपके हुए पड़े रहते है, जब सुबह के 7 बज जाते है तब रश्मि थोड़ा कसमसाती है और राज एक दम से उससे थोड़ा दूर होकर अपनी आँखे बंद कर के लेट जाता है, रश्मि उठ कर बैठ जाती है और राज को आँखे बंद किए हुए देख कर थोड़ा मुस्कुराती है और फिर उठ कर बाथरूम में घुस जाती है, जब वह बाहर आती है तो

रश्मि- भैया, ओ भैया उठो सुबह हो गई

राज - उठने का नाटक करता हुआ अपनी आँखे मसलता हुआ, कितना बज गया
रश्मि- 10 बज गये

राज - जल्दी से उठ कर घड़ी देखता है और रश्मि की ओर देखता है और वह मुस्कुराती हुई अपने कान पकड़ कर सॉरी बाबा अभी 8 बजा है आप और सोना चाहो तो सो जाओ,

राज - नही अब नही सोउंगा, रत भर तो सो लिया

रश्मि- मुस्कुराते हुए अपने मन में, वो तो में जानती हूँ कि आप रात भर किस तरह सोए हो

राज उठ कर सीधे बाथरूम में घुस जाता है, और रश्मि जल्दी से रेडी होकर अपने भैया का वेट करने लगती है और फिर दोनो रेडी होकर चाइ पीने के लिए बाहर निकल जाते है,

राज - आज काफ़ी सीरीयस लग रहा था और वह अब रश्मि को पाए बिना नही रहना चाहता था, उसका दिमाग़ बस उसी उधेड़ बुन में लगा हुआ था कि कैसे वह रश्मि से बात करे.

रश्मि- राज की हालत को अच्छी तरह महसूस कर रही थी लेकिन वह भी कुछ कर नही सकती थी.

दोनो चाइ पीते हुए आमने सामने बैठे-बैठे एक दूसरे को देख रहे थे पर दोनो में से कोई कुछ कह नही पा रहा था दोनो की ही आँखे सुर्ख लाल थी, राज बीच-बीच में रश्मि के दूध की ओर अपनी नज़र ले जाता था और रश्मि उसकी नज़रो को
देख लेती थी,

रश्मि- अपने मन में, क्या बात है भैया बहुत गौर से मेरे दूध देख रहे हो लगता है यह सोच रहे हो कि दो दिन से रोज रात को रश्मि के दूध दबा रहा हूँ कुछ बड़े हुए कि नही, तुम्हे क्या मालूम अपने दूध खोल कर तुम्हे दिखाऊ तो पता चलेगा की तुमने रात भर मेरे कसे हुए दूध को दबा-दबा कर कितना लाल कर दिया है, में जानती हूँ तुम अपनी बहन को पूरी नंगी देखने के लिए तरस रहे हो, पर भैया मानना पड़ेगा तुम्हारा लंड तो गजब का मोटा है, जब मेरी फूली हुई चूत में डालोगे तो वह तो सचमुच पूरी फॅट जाएगी, कब फड़ोगे भैया अपनी बहन की चूत, अब तो मुझसे भी रहा नही जा रहा है, जल्दी से कुछ हिम्मत दिखाओ और मेरी मस्तानी चूत को अपने मोटे लंड से एक बार में ही फाड़ कर रख दो भैया, इस तरह मेरे दूध देखने भर से कुछ होने वाला नही है.


रश्मि अपनी सोच में डूबी हुई थी, तभी अचानक राज उससे पूछता है कि रश्मि क्या सोच रही है और रश्मि को ध्यान नही रहता है और वह कह देती है, भैया में यह सोच रही हूँ कि आप कुछ करते क्यो नही

राज - उसको देखते हुए, क्या करूँ में

रश्मि को एक दम से अपनी ग़लती का अहसास होता है और वह,

रश्मि- मेरा मतलब है मुझे कहीं घुमाने क्यो नही ले जाते

राज - रश्मि हम शाम को कहीं घूमने चलेगे ओके

रश्मि- मुस्कुराकर ठीक है भैया

राज उसकी आँखो में देखता हुआ, चल रश्मि रूम में चल कर बात करेगे

रश्मि- खड़े होते हुए चलो

दोनो उठ कर रूम में आ जाते है और बेड पर लेट जाते है और एक दूसरे की ओर मूह करके मुस्कुराते हुए देखने लगते है.

राज - रश्मि में तुझसे कुछ कहना चाहता हूँ

रश्मि- गुस्सा दिखाते हुए, भैया आप कल भी कुछ कहने के लिए कह रहे थे और आज फिर कुछ कहना चाहते है पर कहते तो कुछ नही, आख़िर बात क्या है, साफ-साफ कहते क्यो नही

राज - मुझे डर लगता है

रश्मि- किससे

राज – तुझसे

रश्मि- ज़ोर से हँसते हुए आप को डर लगता है वह भी मुझसे

राज - सीरीयस होता हुआ, हाँ तुझसे

रश्मि- ओह भैया आप भी ना, अब कहो भी क्या कहना है

राज - मुझे समझ नही आ रहा में तुझसे कैसे कहूँ

रश्मि- अपनी नशीली आँखो को अपने भैया की आँखो से मिलाती हुई, क्यो ऐसा क्या कहना चाहते हो अपनी बहन से

राज - रश्मि की नशीली आँखो के सामने ही उसके मोटे-मोटे खरबूजो जैसे दूध को देख कर, क्या तू बिना कहे मेरी बात नही समझ सकती, तू इतनी तो समझदार है, अब तू छोटी बच्ची तो नही है ना

रश्मि- राज की बात सुन कर अपनी नज़रे नीचे करती हुई, मुझे क्या पता आप मुझसे क्या कहना चाहते हो

राज - रश्मि तू मुझे बहुत अच्छी लगती है, में तुझसे बहुत प्यार करता हूँ, आइ लव यू रश्मि और राज रश्मि को अपनी बाँहो में भर लेता है, रश्मि उसको दूर करती हुई उसके कंधे को अपने हाथो से धकेल कर मारती हुई,

रश्मि- भैया आपकी हिम्मत कैसे हुई मुझसे इतनी घटिया बात कहने की

राज - अपना हाथ बढ़ा कर रश्मि का हाथ पकड़ता हुआ प्लीज़ रश्मि मेरी बात तो सुन

रश्मि- अपना हाथ राज के हाथ पर मारती हुई, भैया ओ भैया कहाँ खोए हुए हो आपकी चाइ ठंडी हो रही है, क्या हो गया है आपको यहाँ चाइ पीने आए हो या सोने, कब से एक तक उस चेयर की ओर देख कर ना जाने कहाँ खोए हुए हो राज को एक दम अहसास होता है कि वह सचमुच कहाँ खो गया था और कैसे उसने ख्यालो में खोए हुए रश्मि से अपने प्यार का इज़हार कर दिया था,

राज - उफ्फ में भी इस लड़की के चक्कर में पागल हो गया हूँ, जागते हुए भी ख्वाब देख रहा हूँ

रश्मि- चलो हम रूम में बैठ कर बाते करेगे

राज - अपने मन में इससे इस तरह अचानक इज़हार करना ख़तरनाक साबित हो सकता है, यह ख्यालो में ही नाराज़ हो कर मुझे मारने लगी थी, अगर असलियत में मेने इससे यह कह दिया कि में इससे प्यार करता हूँ तो ना जाने क्या करेगी, है तो मुझसे कितनी छोटी लेकिन में इससे कितना डरने लगा हूँ, वाकई प्यार इंसान को झुका देता है, अभी कुछ समय पहले तक तो में इसकी किसी भी हरकत पर इसको डरा देता था पर अब जब से इससे प्यार कर बैठा हूँ में खुद इससे डरने लगा हूँ, वाह रे मोहब्बत अच्छोँ-अच्छों को झुकना सीखा देती है तू, इसीलिए तो लोगो ने कहा है कि आने वाले समय में औरते ही दुनिया पर राज करेगी और मर्द उनकी सेवा में सर झुकाए खड़े रहेगे,

रश्मि- राज का हाथ पकड़ के उठाते हुए, चलो उठो तुम फिर कहीं खो गये हो, वर्तमान में रहो भैया, बार-बार कहाँ खो जाते हो. रश्मि राज का हाथ पकड़ के चल देती है और राज उसके इशारे पर उसके पीछे-पीछे चलने लगता है और उसके दिल से बस एक ही आवाज़ आती है

"कैसे इश्क़ से सज गई राहें,
जब से देखी है तेरी निगाहे,
या खुदा में तो तेरा हो गया"

रूम में जाकर राज गुम्सुम सा बेड पर बैठ जाता है और रश्मि उसकी हालत को समझ जाती है और उसके अंदर क्या चल रहा है और वह बार-बार उससे क्या कहना चाहता है और कह नही पाता है वह सब रश्मि अच्छी तरह जानती है और उससे भी उसकी बेचैनी देखी नही जाती है और वह भी कैसे भी अपने भैया की बाँहो में जाकर अपने भाई को सुकून पहुचाना चाहती है और फिर एक गंभीर सोच में डूब जाती है कि आख़िर वह क्या करे, बहुत सोचने के बाद उसे एक आइडिया आता है और वह राज के पास जाकर भैया में 5 मिनट में बाहर से आती हूँ

राज - कहाँ जा रही है

रश्मि- बस बाहर तक

राज - तुझे कुछ चाहिए तो में जाकर ले आता हूँ

रश्मि- नही मुझे कुछ नही चाहिए में बस 5 मिनट में आई

राज - ज़्यादा दूर नही जाना

रश्मि- नही में तो बस होटेल के सामने से आती हूँ

राज - जल्दी आना

रश्मि-ओके

रश्मि बाहर आकर अपना मोबाइल निकालती है और कोमल को फोन करती है, कोमल उसका फोन आटेंड करती है और फिर

रश्मि- देख कोमल जो बात में तुझे बताने जा रही हूँ, वह बात तेरे और मेरे सिवा कभी किसी के पास नही जानी चाहिए चाहे हमारे रीलेशन आज की तरह कल ना भी रहे तब भी

कोमल- तूने मुझ पर भरोशा किया है तो फिर बिना किसी बात के जो भी कहना है कह दे यह समझ ले कि तू कोमल से नही खुद से ही वह बात बता रही है

रश्मि कोमल की बात सुन कर उसे अपने और राज के बीच हुई हर बात के बारे में साफ-साफ सब बता देती है

कोमल- अरे तो अब प्राब्लम क्या है तू तेरे भैया को चाहती है वह तुझे चाहता है तो अब प्राब्लम कहाँ है

रश्मि- कोमल तू समझती नही है वह मेरा भाई है और उसी तरह वह भी यही सोचता है कि में उसकी बहन हूँ और हम दोनो एक दूसरे से कैसे अपने दिल की बात कह सकते है

कोमल- अरे पगली जब तुम दोनो में से कोई भी नही कहेगा तो फिर तुम दोनो ही जलते रहोगे और तुम्हारी कहानी कभी आगे नही बढ़ पाएगी

रश्मि- अरे यार तो मेने तुझे यह सब क्यो बताया है, मुझे कुछ ऐसा आइडिया दे कि ना मुझे कुछ कहना पड़े और ना भैया को कुछ कहना पड़े और हम दोनो ....

कोमल- कुछ सोच कर अरे इसका तो बहुत ही आसान सा उपाय है,

रश्मि- वह क्या

कोमल- तू एक काम कर, तूने बताया ना दो दिन से तेरे भैया तुझे सोया समझ कर तुझसे प्यार करते है पर ज़्यादा आगे नही बढ़ते, आज रात तू जीन्स वग़ैरह मत पहनना और सिर्फ़ स्कर्ट और शर्ट पहन कर सोना और अंदर ब्रा और पेंटी भी नही पहनना, फिर देख तेरे भैया तुझे जब रात को नंगी देखेगे तो तेरी फूली हुई चूत को देख कर तुझे चोदे बिना नही रह पाएगे, और जब वह तेरी फूली हुई गदराई चूत को देखेगे तो उसे चूमे बिना नही रह पाएगे, और जब वह तेरी फूली हुई चूत को अपने मूह से चूमने लगे तो उन्हे रंगे हाथो पकड़ लेना और फिर आगे वक़्त पर छोड़ दे उसके बाद क्या होगा वह खुद समय ही बता पाएगा, फिर मुझे बताना क्या होता है, उसके बाद भी अगर बात नही बनी तो फिर में कुछ और
आइडिया तुझे दूँगी समझी

रश्मि- उसके आइडिया को सुन कर पर कोमल में बिना पेंटी के अपने भैया के साथ कैसे सोउंगी

कोमल- अब देख यार अगर अपने भैया के मोटे लंड से अपनी चूत मराना चाहती है तो इतना रिस्क तो लेना पड़ेगा, तू डरती क्यों है सब आराम से हो जाएगा बस जैसा मेने कहा है वैसा ही कर समझी

रश्मि- मुस्कुराकर कोमल तो वाकई बहुत कमीनी है

कोमल- मुस्कुराते हुए चल अब ज़्यादा तारीफ मत कर मेरी और जा तेरे भैया का मोटा लंड सहला जाकर बेचारे तेरी चूत चाटने के लिए मरे जा रहे होंगे

रश्मि- मुस्कुराकर चल बाइ
कोमल- ओके बाइ-बाइ

रत को खाना खाने के बाद राज और रश्मि दोनो बेड पर लेटे थे राज फॅन की ओर देखता हुआ

राज - तेरे नैना, तेरे नैना, तेरे नैना रे, नैनो की बात है....................

रश्मि- मुस्कुराते हुए क्या बात है भैया बहुत गाना गा रहे हो आज

राज - तुझे कौन सा गाना सबसे पसंद है

रश्मि- कुछ सोचते हुए, भैया मुझे तो बहुत सारे गाने पसंद है

राज - फिर भी कोई एक जो सबसे ज़्यादा अच्छा लगता हो

रश्मि- कुछ सोचते हुए, ओ मन क्यो बहका रे बहका आधी रात को.......................

राज - मुस्कुराते हुए, नाइस चाय्स

रश्मि- और आपका ?

राज - उसके चेहरे को प्यार से देख कर उसकी आँखो में देखते हुए,
रग-रग में इस तरह तू सामने लगी
जैसे मुझी को मुझसे चुराने लगी,

रश्मि- उसकी और मुस्कुराकर, भैया चलो हम कॉफी पीकर आते है

राज - चल ठीक है और फिर दोनो कॉफी पीने के लिए बाहर निकल जाते है रश्मि राज के आगे-आगे चल रही थी और राज अपनी बहन के जीन्स में समाए मस्ताने चुतड़ों की थिरकन को देख-देख कर चलते-चलते अपने लंड को मसल रहा था उसका दिल कर रहा थी कि अभी जाकर रश्मि की मोटी गदराई गान्ड में अपना लंड फसा दे, बीच-बीच में रश्मि पीछे मुड़कर मुस्कुराती हुई जल्दी चलो ना भैया, राज रश्मि के मोटे-मोटे गदराए चुतड़ों को खा जाने वाली नज़रो से देखता हुआ ओके बाबा आ तो रहा हूँ और फिर दोनो रेस्टोरेंट के बाहर लगी चेयर पर बैठ जाते है और कॉफी का ऑर्डर कर देते है

रश्मि- अपना हाथ रगड़ती हुई भैया कितनी सर्दी लग रही है ना

राज - हाँ और ऐसी सर्दी में गरमा गरम कॉफी पीने में भी मज़ा आ जाएगा

रश्मि- मुस्कुराते हुए अपने मन में भैया मज़ा तो तुम्हे तब आएगा जब ऐसी सर्दी में अपनी बहन की गरमा गरम चूत आज पियोगे, आज तुम मेरी फूली हुई चूत को जब देख लोगे ना तो फिर तुम अपने मोटे लंड से मेरी चूत को फाडे बिना नही रह पाओगे, तुम नही जानते भैया कि तुम्हारी बहन की चूत कितनी फूल गई है,




Raj ka lund jhatke par jhatke marne lagta hai aur Rashmi ki phuli hui chut pani-pani ho jati hai, Raj se raha nahi jata hai aur vah Rashmi ke hontho ko chumte huye uski kasi hui mast chuchiyo ko daba-daba kar masalne lagta hai, Rashmi ko lagta hai ki uske muh se kabhi bhi ek jordar siski nikal jayegi usse bardast karna mushkil ho jata hai aur chahti hai ki Raj sidha let kar use kas kar apne sine se chipka le, Raj shayad uske dil ki bat ko samajh leta hai aur Raj ka man hota hai ki vah apni bahan ko let kar apne sine se chipka kar uske rasile hontho ko dhire-dhire piye aur vah Rashmi ke side men let jata hai aur Rashmi ko kas kar apne sine se chipka kar uske rasile hontho ko dhire-dhire pine lagta hai, Rashmi ke jism se uthti mahak use pagal bana deti hai, vah lagatar kabhi Rashmi ke mote-mote doodh kabhi uska pet kabhi uski kamar kabhi uski moti gadaraai gaanD kabhi uski masal jangho ko sahlata hua lagatar Rashmi ke hontho ko pita rahta hai, aur phir Raj jo harkat karta hai usse Rashmi ki jan nikalte-nikalte rah jati hai,

Raj apne lund ko bahar nikal kar Rashmi ka hath pakad kar apne lund par rakh leta hai aur apne hatho ko Rashmi ke hatho ke piche le jakar Rashmi ki mutthiyo ko apne lund par kas leta hai, Rashmi ki sans ek dam ruk jati hai aur apne bhaiya ke mote lund ki motai ko mehsus karke Rashmi pagal ho jati hai aur ek pal ke liye to use aisa lagta hai ki apne bhaiya ke mote lund ko apne hantho men kas kar daba le uski aankho ki palke khulne ke liye tarasne lagti hai, vah apne bhaiya ke lund ki motai ko aankhe band kiye huye apne hath se mehsus karti hai aur uski sanso ki raftar itni tej ho jati hai ki usko aisa lagta hai jaise uske muh se ek dam se shabd nikal padege, Raj Rashmi ke hantho ke piche apne hath ko lagaye huye apne lund ko dhire-dhire sahlane lagta hai aur Rashmi ki pyasi chut pani chodane lagti hai,

kuch der bad Raj vapas apne lund ko andar karke phir se Rashmi se kas kar chipak jata hai aur uski harkato men kuch viram ho jata hai

Raj aur Rashmi sari rat thik se so nahi pate hai Raj lagatar Rashmi ke badan ko sahlata hua use chumta rahta hai aur apne man men sochta hai ki ab bardast karna muskil hai mujhe Rashmi se apne pyar ka ijhar karna hi hoga, men Rashmi ke bina nahi rah sakta hu, mujhe bas Rashmi chahiye chahe jaise bhi, men apni pyari bahna ko puri nangi karke apne jism se chipkana chahta hu, men Rashmi ko rat bhar nangi karke khub kas-kas kar chodana chahta hu, men Rashmi ke bina nahi rah sakta hu,

mujhe kaise bhi karke Rashmi ko batana hoga ki men use kitna chahta hu, Raj sone ki koshish karta hai lekin neend use aati nahi hai aur vah puri rat Rashmi ko jaha marji hoti hai sahlata hai aur uske rasile hontho ka ras pita hai,

Rashmi himmat kiye chupchap padi rahti hai aur vah apne man men sochti hai ab bahut ho gaya, mujhe ab apne bhaiya ka mota lund kisi bhi halat men chahiye men ab apne bhaiya se apni chut marwaye bina nahi rah sakti,

dono apni-apni soch ke sath ek dusre ke jism se chipke huye pade rahte hai, jab subah ke 7 baj jate hai tab Rashmi thoda kasmasati hai aur Raj ek dam se usse thoda dur hokar apni aankhe band kar ke let jata hai, Rashmi uth kar baith jati hai aur Raj ko aankhe band kiye huye dekh kar thoda muskurati hai aur phir uth kar bathroom men ghus jati hai, jab vah bahar aati hai to

Rashmi- bhaiya, o bhaiya utho subah ho gai

Raj - uthne ka natak karta hua apni aankhe masalta hua, kitna baj gaya
Rashmi- 10

Raj - jaldi se uth kar ghadi dekhta hai aur Rashmi ki aur dekhta hai aur vah muskurati hui apne kan pakad kar sorry baba abhi 8 baja hai aap aur sona chaho to so jao,

Raj - nahi ab nahi sounga, rat bhar to so liya

Rashmi- muskurate huye apne man men, vo to men janti hu ki aap rat bhar kis tarah soye ho
Raj uth kar sidhe bathroom men ghus jata hai, aur Rashmi jaldi se reddy hokar apne bhaiya ka wait karne lagti hai aur phir dono reddy hokar chai pine ke liye bahar nikal jate hai,

Raj - aaj kaphi serious lag raha tha aur vah ab Rashmi ko paye bina nahi rahna chahta tha, uska dimag bas usi udhed bun men laga hua tha ki kaise vah Rashmi se bat kare.

Rashmi- Raj ki halat ko achchi tarah mehsus kar rahi thi lekin vah bhi kuch kar nahi sakti thi.
dono chai pite huye aamne samne baithe-baithe ek dusre ko dekh rahe the par dono men se koi kuch kah nahi pa raha tha dono ki hi aankhe surkh lal thi, Raj beech-beech men Rashmi ke doodh ki aur apni najar le jata tha aur Rashmi uski najro ko
dekh leti thi,
Rashmi- apne man men, kya bat hai bhaiya bahut gaur se mere doodh dekh rahe ho lagta hai yah soch rahe ho ki do din se roj rat ko Rashmi ke doodh daba raha hu kuch bade huye ki nahi, tumhe kya malum apne doodh khol kar tumhe dikhau to pata chalega ki tumne rat bhar mere kase huye doodh ko daba-daba kar kitna lal kar diya hai, men janti hu tum apni bahan ko puri nangi dekhne ke liye taras rahe ho, par bhaiya manna padega tumhara lund to gajab ka mota hai, jab meri phuli hui chut men daloge to vah to sachmuch puri phat jayegi, kab phadoge bhaiya apni bahan ki chut, ab to mujhse bhi
raha nahi ja raha hai, jaldi se kuch himmat dikhao aur meri mastani chut ko apne mote lund se ek bar men hi phad kar rakh do bhaiya, is tarah mere doodh dekhne bhar se kuch hone wala nahi hai.
Rashmi apni soch men dubi hui thi, tabhi achanak Raj usse puchta hai ki Rashmi kya soch rahi hai aur Rashmi ko dhyan nahi rahta hai aur vah kah deti hai, bhaiya men yah soch rahi hu ki aap kuch karte kyo nahi

Raj - usko dekhte huye, kya karu men

Rashmi ko ek dam se apni galti ka ahasaas hota hai aur vah,

Rashmi- mera matlab hai mujhe kahi ghumane kyo nahi le jate

Raj - Rashmi hum sham ko kahi ghumne chalege ok

Rashmi- muskuraakar thik hai bhaiya

Raj uski aankho men dekhta hua, chal Rashmi room men chal kar bat karege

Rashmi- khade hote huye chalo

dono uth kar room men aa jate hai aur bed par let jate hai aur ek dusre ki aur muh karke muskurate huye dekhne lagte hai.

Raj - Rashmi men tujhse kuch kahna chahta hu

Rashmi- gussa dikhate huye, bhaiya aap kal bhi kuch kahne ke liye kah rahe the aur aaj phir kuch kahna chahte hai par kahte to kuch nahi, aakhir bat kya hai, saf-saf kahte kyo nahi

Raj - mujhe dar lagta hai

Rashmi- kisse

Raj – tujhse

Rashmi- jor se haste huye aap ko dar lagta hai vah bhi mujhse

Raj - serious hota hua, ha tujhse

Rashmi- oh bhaiya aap bhi na, ab kaho bhi kya kahna hai

Raj - mujhe samajh nahi aa raha men tujhse kaise kahu

Rashmi- apni nashili aankho ko apne bhaiya ki aankho se milati hui, kyo aisa kya kahna chahte ho apni bahan se

Raj - Rashmi ki nashili aankho ke samne hi uske mote-mote kharbujo jaise doodh ko dekh kar, kya tu bina kahe meri bat nahi samajh sakti, tu itni to samajhdar hai, ab tu choti bachchi to nahi hai na

Rashmi- Raj ki bat sun kar apni najre niche karti hui, mujhe kya pata aap mujhse kya kahna chahte ho

Raj - Rashmi tu mujhe bahut achchi lagti hai, men tujhse bahut pyar karta hu, i love u Rashmi aur Raj Rashmi ko apni banho men bhar leta hai, Rashmi usko dur karti hui uske kandhe ko apne hatho se dhakel kar marti hui,

Rashmi- bhaiya aapki himmat kaise hui mujhse itni ghatiya bat kahne ki

Raj - apna hath badha kar Rashmi ka hath pakadta hua please Rashmi meri bat to sun

Rashmi- apna hath Raj ke hath par marti hui, bhaiya o bhaiya kaha khoye huye ho aapki chai thandi ho rahi hai, kya ho gaya hai aapko yaha chai pine aaye ho ya sone, kab se ek tak us chair ki aur dekh kar na jane kaha khoye huye ho Raj ko ek dam ahasaas hota hai ki vah sachmuch kaha kho gaya tha aur kaise usne khyalo men khoye huye Rashmi se apne pyar ka ijhar kar diya tha,

Raj - uff men bhi is ladki ke chakkar men pagal ho gaya hu, jagte huye bhi khwab dekh raha hu

Rashmi- chalo hum room men baith kar bate karege

Raj - apne man men isse is tarah achanak ijhar karna khatarnak sabit ho sakta hai, yah khalo men hi naraj ho kar mujhe marne lagi thi, agar asliyat men mene isse yah kah diya ki men isse pyar karta hu to na jane kya karegi, hai to mujhse kitni choti lekin men isse kitna darne laga hu, vakai pyar insan ko jhuka deta hai, abhi kuch samay pahle tak to men iski kisi bhi harkat par isko dara deta tha par ab jab se isse pyar kar baitha hu men khud isse darne laga hu, wah re mohabbat achcho-achcho ko jhukna sikha deti hai tu, isiliye to logo ne kaha hai ki aane wale samay men aurte hi duniya par raj
karegi aur mard unki sewa men sar jhukaye khade rahege,

Rashmi- Raj ka hath pakad ke uthate huye, chalo utho tum phir kahi kho gaye ho, vartman men raho bhaiya, bar-bar kaha kho jate ho. Rashmi Raj ka hath pakad ke chal deti hai aur Raj uske ishare par uske piche-piche chalne lagta hai aur uske dil se bas ek hi aawaj aati hai

"kaise ishq se saj gai rahe, jab se dekhi hai teri nigahe, ya khuda men to tera ho gaya"

room men jakar Raj gumsum sa bed par baith jata hai aur Rashmi uski halat ko samajh jati hai aur uske andar kya chal raha hai aur vah bar-bar usse kya kahna chahta hai aur kah nahi pata hai vah sab Rashmi achchi tarah janti hai aur usse bhi uski bechaini dekhi nahi jati hai aur vah bhi kaise bhi apne bhaiya ki banho men jakar apne bhai ko sukun pahuchana chahti hai aur phir ek gambhir soch men dub jati hai ki aakhir vah kya kare, bahut sochne ke bad use ek idea aata hai aur vah Raj ke pas jakar bhaiya men 5 minat men bahar se aati hu

Raj - kaha ja rahi hai

Rashmi- bas bahar tak

Raj - tujhe kuch chahiye to men jakar le aata hu
Rashmi- nahi mujhe kuch nahi chahiye men bas 5 minat men aai
Raj - jyada dur nahi jana

Rashmi- nahi men to bas hotel ke samne se aati hu

Raj - jaldi aana

Rashmi-ok

Rashmi bahar aakar apna mobile nikalti hai aur Komal ko phone karti hai, Komal uska phone aattend karti hai aur phir

Rashmi- dekh Komal jo bat men tujhe batane ja rahi hu, vah bat tere aur mere siva kabhi kisi ke pas nahi jana chahiye chahe hamare relation aaj ki tarah kal na bhi rahe tab bhi

Komal- tune mujh par bharosha kiya hai to phir bina kisi bat ke jo bhi kahna hai kah de yah samajh le ki tu Komal se nahi khud se hi vah bat bata rahi hai

Rashmi Komal ki bat sun kar use apne aur Raj ke beech hui har bat ke bare men saf-saf sab bata deti hai

Komal- are to ab problem kya hai tu tere bhaiya ko chahti hai vah tujhe chahta hai to ab problem kaha hai

Rashmi- Komal tu samajhti nahi hai vah mera bhai hai aur usi tarah vah bhi yahi sochta hai ki men uski bahan hu aur hum dono ek dusre se kaise apne dil ki bat kah sakte hai

Komal- are pagli jab tum dono men se koi bhi nahi kahega to phir tum dono hi jalte rahoge aur tumhari kahani kabhi aage nahi badh payegi

Rashmi- are yaar to mene tujhe yah sab kyo bataya hai, mujhe kuch aisa idea de ki na mujhe kuch kahna pade aur na bhaiya ko kuch kahna pade aur hum dono ....

Komal- kuch soch kar are iska to bahut hi aasan sa upay hai,

Rashmi- vah kya

Komal- tu ek kam kar, tune bataya na do din se tere bhaiya tujhe soya samajh kar tujhse pyar karte hai par jyada aage nahi badhte, aaj rat tu jeans vagairah mat pahnna aur sirf skirt aur shirt pahan kar sona aur andar bra aur penty bhi nahi pahanna, phir dekh tere bhaiya tujhe jab rat ko nangi dekhege to teri phuli hui chut ko dekh kar tujhe chode bina nahi rah payege, aur jab vah teri phuli hui gadaraai chut ko dekhege to use chume bina nahi rah payege, aur jab vah teri phuli hui chut ko apne muh se chumne lage to unhe range hatho pakad lena aur phir aage waqt par chod de uske bad kya hoga vah khud samay hi bata payega, phir mujhe batana kya hota hai, uske bad bhi agar bat nahi bani to phir men kuch aur
idea tujhe dungi samjhi

Rashmi- uske idea ko sun kar par Komal men bina penty ke apne bhaiya ke sath kaise soungi

Komal- ab dekh yaar agar apne bhaiya ke mote lund se apni chut marana chahti hai to itna risk to lena padega, tu darti kyo hai sab aaram se ho jayega bas jaisa mene kaha hai vaisa hi kar samjhi

Rashmi- muskuraakar Komal to vakai bahut kamini hai

Komal- muskurate huye chal ab jyada tarif mat kar meri aur ja tere bhaiya ka mota lund sahla jakar bechare teri chut chatne ke liye mare ja rahe honge

Rashmi- muskuraakar chal bye
Komal- ok bye-bye

rat ko khana khane ke bad Raj aur Rashmi dono bed par lete the Raj fan ki aur dekhta hua

Raj - tere naina, tere naina, tere naina re, naino ki bat hai....................

Rashmi- muskurate huye kya bat hai bhaiya bahut gana ga rahe ho aaj

Raj - tujhe kaun sa gana sabse pasand hai

Rashmi- kuch sochte huye, bhaiya mujhe to bahut sare gane pasand hai

Raj - phir bhi koi ek jo sabse jyada achcha lagta ho

Rashmi- kuch sochte huye, o man kyo bahka re bahka aadhi rat ko.......................

Raj - muskurate huye, nice choice

Rashmi- aur aapka ?

Raj - uske chehre ko pyar se dekh kar uski aankho men dekhte huye, rag-rag men is tarah tu samane lagi jaise mujhi ko mujhse churane lagi,

Rashmi- uski aur muskuraakar, bhaiya chalo hum coffee pikar aate hai

Raj - chal thik hai aur phir dono coffee pine ke liye bahar nikal jate hai Rashmi Raj ke aage-aage chal rahi thi aur Raj apni bahan ke jeans men samaye mastane chutdon ki thirkan ko dekh-dekh kar chalte-chalte apne lund ko masal raha tha uska dil kar raha thi ki abhi jakar Rashmi ki moti gadaraai gaanD men apna lund phasa de, beech-beech men Rashmi piche mudkar muskurati hui jaldi chalo na bhaiya, Raj Rashmi ke mote-mote gadaraaye chutdon ko kha jane wali najro se dekhta hua ok baba aa to raha hu aur phir dono restaurant ke bahar lagi chair par baith jate hai aur coffee ka order kar dete hai

Rashmi- apna hath ragadti hui bhaiya kitni sardi lag rahi hai na

Raj - ha aur aisi sardi men garma garam coffee pine men bhi maja aa jayega

Rashmi- muskurate huye apne man men bhaiya maja to tumhe tab aayega jab aisi sardi men apni bahan ki garma garam chut aaj piyoge, aaj tum meri phuli hui chut ko jab dekh loge na to phir tum apne mote lund se meri chut ko phade bina nahi rah paoge, tum nahi jante bhaiya ki tumhari bahan ki chut kitni phul gai hai,
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Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby vnraj » 07 Jan 2017 18:13

छेड़छाड़ और चूहलबाजी मे कहानी पढने का आनंद और बढ़ जाता है
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Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby rajaarkey » 09 Jan 2017 18:10

vnraj wrote:छेड़छाड़ और चूहलबाजी मे कहानी पढने का आनंद और बढ़ जाता है


shukriya dost
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Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby rajaarkey » 09 Jan 2017 18:12

राज रश्मि के खूबसूरत होंठो को देखता हुआ अपने मन में रश्मि आज में तेरे इन रसीले होंठो का रस सारी रत पीना चाहता हूँ, तेरे मोटे-मोटे दूध को जब कल मेने कस-कस कर दबोचा था तो सच में इतना मज़ा आया था कि क्या बताऊ तू बहुत ही खूबसूरत और सेक्सी है जिस दिन तू मुझसे पूरी नंगी होकर चिपकेगी उस दिन तो मुझे जन्नत का अहसास हो जाएगा

दोनो एक दूसरे को देखते हुए अपने ही ख्यालो में खोए हुए थे और फिर उनके सामने कॉफी आ गई और दोनो एक दूसरे को मुस्कुराकर देखते हुए कॉफी पीने लगे, कॉफी पीते हुए रश्मि मुस्कुराते हुए भैया ऐसे एक टक क्या देख रहो हो आप

राज - मुस्कुराते हुए देख रहा हूँ कि मेरी प्यारी बहना कितनी खूबसूरत हो गई है

रश्मि- मुस्कुराकर कहाँ भैया में कहाँ इतनी खूबसूरत हूँ आप तो बस हमेशा मज़ाक ही करते रहते है

राज - नही रश्मि में सच कह रहा हूँ तू मुझे बहुत खूबसूरत लगती है, अगर तू मेरी बहन ना होती तो,

रश्मि- राज की आँखो में देख कर, अगर में आपकी बहन ना होती तो क्या भैया

राज - मुस्कुराकर उसके सामने उसके दूध को देखने लगता है और रश्मि को उसकी प्यासी नज़रो को देख कर थोड़ी शर्म आ जाती है और वह अपने सर को नीचे कर लेती है

राज – रश्मि

रश्मि- उसकी ओर देखती है

राज - कुछ नही

रश्मि- फिर से अपनी नज़रे नीचे करके बची हुई कॉफी पीकर ख़तम कर देती है और फिर राज की ओर देख कर

रश्मि- चले भैया
राज – ओके

रश्मि अपने मन में आँखो से तो दिन रात अपनी बहन को चोदते हो कभी अपने मोटे लंड से भी चोदो ना तभी तो असली मज़ा आएगा,

राज और रश्मि दोनो धीरे-धीरे टहलते हुए चल देते है और राज जाकर बेड पर लेट जाता है और रश्मि अपने बॅग को खोल कर उसमे से स्कर्ट और टीशर्ट निकालती है तभी वह राज की ओर देखती है जो उसी की ओर देख रहा था, और मुस्कुराते हुए

रश्मि- भैया में अभी चेंज करके आई जीन्स में मुझे ठीक से नींद नही आती है

राज - मुस्कुराकर ओके

रश्मि सीधे बाथरूम में जाती है और अपनी शर्ट उतार देती है फिर अपनी ब्रा भी उतार देती है और उसके मोटे-मोटे कसे हुए दूध पूरे नंगे हो जाते है रश्मि अपने दूध पर हल्के से हाथ फेरती है और उसके दूध के निप्पल एक दम से कड़क हो जाते है तभी रश्मि अपने जीन्स को उतार देती है और फिर जब अपनी पेंटी उतारती है तो केवल यह सोच कर कि आज उसकी फूली हुई चूत पर उसके भैया ज़रूर अपना मूह रखेगे तो वह मस्त हो जाती है और उसकी चूत पानी छोड़ने लगती है, रश्मि जल्दी से अपने बदन पर सिर्फ़ अपनी पतली सी टीशर्ट और छोटी सी स्कर्ट पहन लेती है और अंदर ना ब्रा और ना ही पेंटी पहनती है और फिर बाथरूम से बाहर आ जाती है, रवि की नज़र सीधे उसकी गोरी-गोरी पिंदलियो पर पड़ती है और वह जब अपनी नज़रो को अपनी बहन के छातियों पर ले जाता है तो उसके पूरे दूध ऐसा लग रहा था कि टीशर्ट को फाड़ देंगे,


राज रश्मि के मस्ताने जिस्म को पूरा नंगा सोच कर कल्पना करते उसे देखने लगता है और रश्मि धीरे-धीरे उसके पास आकर बैठ जाती है,

राज करवट लेकर लेटा रहता है और रश्मि उसके साइड में अपने पेर नीचे लटका कर बैठी रहती है, रश्मि का गला सुख रहा था और वह काफ़ी डर रही थी और सोच रही थी कि कैसे अपने भाई के साथ इस छोटी सी स्कर्ट में बिना पेंटी पहने सोएगी, स्कर्ट तो ज़रा सा इधर उधर होने पर ही उपर चढ़ जाएगी और फिर थोड़ा खुस होते हुए आज तो भैया की इच्छा पूरी हो जाएगी ना जाने कब से भैया मेरी चूत को देखने का सोच रहे होंगे, रश्मि अपनी सोच में डूबी हुई थी और राज उसके कसे हुए मोटे-मोटे दूध को देख रहा था, तभी रश्मि उसकी ओर देखती है और राज उसके चेहरे को देख कर मुस्कुराता हुआ

राज - रश्मि तू कभी लिपस्टिक नही लगाती है क्या,

रश्मि- मुस्कुराकर नही ऐसी बात नही है भैया में जब किसी शादी में जाती हूँ तभी मेकप करती हूँ और लिपस्टिक लगाती हूँ

राज - पर मेने तो तुझे आज तक लिपस्टिक लगाए हुए नही देखा, क्या तेरे पास नही है

रश्मि- है ना भैया मेरे बॅग में सब समान है

राज - तो एक बार लगा कर दिखा ना

रश्मि- मुस्कुराते हुए, अभी

राज – हाँ

रश्मि- भैया अभी तो सोना है कौन सा कहीं जाना है में सुबह लगाकर आपको दिखा दूँगी

राज - अरे नही अभी लगा कर दिखा ना में देखना चाहता हूँ कि तू लिपस्टिक लगाने पर कैसी लगती है,

रश्मि- मुस्कुराते हुए, अच्छा लगाती हूँ, रश्मि अपने मन में वाह भैया काफ़ी रसीला मिज़ाज हो रहा है आपका आज अपनी बहन के होंठो की लिपस्टिक चाटने का मन लग रहा है आपका, आज तो लगता है मेरे होंठो की खेर नही, आज आप सारी रात अपनी बहन के होंठ पीने के मूड में लग रहे हो, और फिर रश्मि अपने बॅग से लिपस्टिक निकाल कर ड्रेसिंग टेबल की और जाने लगती है

राज - कहाँ जा रही है

रश्मि- पलट कर मिरर में देख कर लगाना पड़ेगा ना

राज - यहीं बैठ कर लगा ना

रश्मि- पर भैया बिना मिरर में देखे कैसे लगाउन्गी

राज - एक काम कर यहाँ आ ला में लगा देता हूँ

रश्मि- मुस्कुराते हुए आप लगाओगे, आप से बन जाएगा

राज - क्यो इसमे कौन सी बड़ी बात है

रश्मि- मुस्कुराते हुए राज के पास आकर बैठ जाती है और लिपस्टिक उसकी ओर बढ़ा देती है

राज -रश्मि के हाथो से लिपस्टिक ले कर उठ कर उसके सामने बैठ जाता है और उसकी चिन को अपने हाथों से उपर कर देता है और रश्मि अपने भैया को मुस्कुराते हुए देखने लगती है उसका मूह थोड़ा उठा हुआ राज की ओर रहता है और वह उस पोज़ में रहती है जैसे राज को कह रही हो कि लो भैया मेरे रसीले होंठो का रस पी लो राज अपनी बहन की खूबसूरती और उसके रसीले लरजते होंठो को देखता हुआ अपने एक हाथ को उसके सर के पीछे लेजा कर उसके सर को थाम लेता है और अपने दूसरे हाथ के अगुठे से एक बार रश्मि के रसीले होंठो को हल्के से रगड़ता है और फिर रश्मि के बिल्कुल करीब आकर उसके रसीले होंठो पर लिपस्टिक लगाने लगता है और राज का लंड खड़ा हो जाता है और रश्मि की फूली हुई चूत से पानी आने लगता है,

राज बड़े प्यार से अपनी बहन के होंठो पर धीरे-धीरे लिपस्टिक फेरने लगता है और उसके होंठ और भी खूबसूरत होते जाते है, राज अपनी बहन के रसीले होंठो की खूबसूरती को देख-देख कर पागल होने लगता है और उसे लगता है कि अभी अपनी बहन के रस भरे लबों को पी ले, रश्मि को खुद ये लगने लगता है कि राज उसके रसीले होंठो को अपने मूह में भर कर खूब कस कर चूस ले, जब राज अच्छी तरह से अपनी बहन के रस भरे होंठो पर लिपस्टिक लगा चुका होता है, तब वह गौर से रश्मि के चेहरे को देखता है और रश्मि अपने भैया के चेहरे को देखती है दोनो के चेहरे से हँसी गायब हो चुकी थी और उनकी आँखे जब एक दूसरे की आँखो से मिली तो जहाँ राज का लंड अपनी बहन के कामुक चेहरे और नशीली आँखो को देख कर खड़ा हो जाता है वही रश्मि भी अपने भाई के हाथो के स्पर्श से बहने लगी थी,

राज - हल्का सा मुस्कुरा कर रश्मि के चेहरे पर अपना हाथ फेरते हुए, ब्यूटी, रश्मि तुझ से सुंदर इस पूरी दुनिया में कोई लड़की नही होगी

रश्मि- मुस्कुराते हुए शरमाने का नाटक करती हुई, आप भी ना भैया

राज - सचमुच रश्मि तू कयामत लग रही है, ला में तेरा एक फोटो खिच कर तुझे दिखाता हूँ और फिर राज अपने मोबाइल से रश्मि का फोटो खींच लेता है और फिर रश्मि को दिखाते हुए देख मेने लिपस्टिक बराबर लगाई है ना,

रश्मि- अपने फोटो को देख कर मुस्कुराते हुए आपको तो लड़कियो के होंठो पर लिपस्टिक लगाने का बड़ा एक्सपीरियेन्स लगता है इतनी अच्छी लाइन तो में भी नही बना पाती हूँ, पर आपने इतनी डार्क लिपस्टिक क्यो लगाई है,

राज - क्योंकि तेरे होंठो पर डार्क लिपस्टिक बहुत अच्छी लगती है,

रश्मि- मुस्कुराते हुए अपने मन में लगता है भैया आज अपनी बहना को पूरा पी जाने के मूड में हो, कहीं आज ही मेरी फूली चूत को अपने लंड से फाड़ तो नही दोगे, और फिर थोड़ा ज़्यादा मुस्कुराते हुए अपने मन में लाओ भैया में तुम्हारे मोटे लंड पर अपने होंठो से लिपस्टिक लगा दूं

राज - क्यो हंस रही है

रश्मि- कुछ नही

राज - उसकी गोरी पिंडली को अपने हाथ से पकड़ कर दबाता हुआ बता ना

रश्मि- कुछ नही भैया में तो यह सोच रही थी कि पहले तो कभी आपको में इतनी अच्छी नही लगी पर कुछ दिनो से पता नही क्यो में आपको बहुत अच्छी लगने लगी हूँ,

राज - नही रश्मि ऐसी बात नही है खूबसूरत तो तू पहले से ही है लेकिन मेने तुझ पर ध्यान अब जाकर दिया है

रश्मि- तो अचानक अब कैसे मेरे उपर आपका ध्यान चला गया

राज - उसके गदराए दूध को उसकी आँखो के सामने ही देखता हुआ, इसलिए कि अब तू बड़ी हो गई है

रश्मि- राज की बातों का मतलब समझते हुए, इधर उधर देखती हुई, चलो भैया मुझे नींद आ रही है मुझे सोने दो

राज - ओके चल आजा मेरे साइड में

रश्मि- अपने मन में साइड में कि उपर

राज - रश्मि तू आराम से सो जा में तेरे बालो में हाथ फेर देता हूँ

रश्मि- उसकी ओर करवट लेकर नही भैया में ऐसे ही सो जाउन्गी आप क्यो परेशान होते हो आप भी सो जाओ ना

राज - नही रश्मि, अभी मुझे नींद नही आ रही है और फिर जब में तेरे बालो में हाथ फेरता हुआ तुझे सुलाता हूँ तो मुझे बड़ा अच्छा लगता है, कल भी तो में तेरे बालो में हाथ फेर रहा था और तू सो गई थी

रश्मि- मुस्कुराकर अपने मन में वो तो में जानती हूँ भैया की किस तरह आपने रात भर मेरे जिस्म के एक-एक अंग को दबोच-दबोच कर कैसे हाथ फेरा था और रश्मि अपनी आँखे बंद कर लेती है और भैया मुझे तो बहुत तेज नींद आ रही है आप मेरे सर के बालो पर अपनी उंगलिया फेरीए ना मुझे भी बड़ा अच्छा लगता है,

राज - रश्मि के बालो में अपनी उंगलिया चलाने लगता है और रश्मि अपनी आँखे बंद करके चुपचाप लेटी रहती है और उसकी फूली हुई चूत यह सोच-सोच कर और फूलने लगती है कि आज भैया उसकी फूली हुई चूत को ज़रूर अपने हाथों से छुएगे या फिर यह भी हो सकता है कि वह अपने होंठो से उसकी फूली हुई चूत को चूम ले, राज सबसे पहले रश्मि के गदराए हुस्न को देखता है फिर उसके कसे हुई मोटे-मोटे दूध जो कि उसकी टीशर्ट में बहुत बड़ी और नुकीली शॅप बनाए हुए थे को घूर कर देखता है और उसके मूह में पानी आ जाता है और वह अपनी जवान बहन की गदराई जवानी को देख कर पागल हो उठता है, वह भूल जाता है कि रश्मि ने अभी-अभी अपनी आँखे बंद की है और वह रश्मि के बालो की बजाय उसके गदराए हुए गुलाबी गालो को अपने हाथों से सहलाने लगता है,

जब वह रश्मि के गदराए गालो को अपने हाथों से सहलाता है तो उसका लंड झटके मारने लगता है उसकी नज़रे रश्मि की कसी हुई गुदज चुचियो पर टिकी रहती है, रश्मि अपनी आँखे बंद किए चुपचाप अपने भाई के हाथो का मज़ा लेती रहती है और उसकी चूत का तना हुआ दाना फुदकने लगता है और उसका मज़ा डबल हो जाता है,

करीब 15 मिनट तक राज उसके गालो को सहलाता है और फिर वह धीरे से कहता है

राज - रश्मि, ओ रश्मि, सो गई क्या

रश्मि- अपनी सांसो को थामे हुए चुपचाप पड़ी रहती है, जब रश्मि कोई रिप्लाइ नही करती तब राज धीरे से अपने जिस्म को रश्मि के और करीब लाकर चिपक जाता है और रश्मि की साँसे एक दम से बहुत तेज हो जाती है और उसे डर लगने लगता है कि कहीं भैया को पता ना चल जाए कि वह जाग रही है वह अपनी सांसो की रफ़्तार को कम करने की कोशिश करती है और जब उसके खुद के होंठो पर राज की साँसे पड़ती है तो वह और भी गरम हो जाती है क्योकि उसे यह अहसास हो जाता है कि राज के होंठ उसके होंठो से सिर्फ़ एक-दो इंच की दूरी पर है, राज अपने हाथ को रश्मि की कमर के उपर रख कर धीरे-धीरे उसकी कमर को उसकी स्कर्ट के उपर से सहलाता हुआ अपनी नाक से रश्मि के चेहरे की महक को लेने लगता है और फिर धीरे से एक बार और रश्मि को आवाज़ देता है लेकिन रश्मि कोई जवाब नही देती है.

राज से बर्दास्त नही होता है और वह धीरे से अपने लबों को अपनी बहन के रसीले होंठो पर रख देता है और धीरे-धीरे डरते हुए रश्मि के होंठो को अपने होंठो से सहलाने लगता है और वह अपनी बहन के रसीले होंठो की महक से पागल हो जाता है और रश्मि के मोटे-मोटे गदराए दूध को अपने हाथो में में भर कर धीरे-धीरे अपनी बहन के रसीले होंठो को चूस्ता हुआ उसके मोटे-मोटे दूध को उसकी पतली सी टीशर्ट के उपर से दबाने लगता है अपनी बहन के मोटे-मोटे दूध के अहसास से राज पागल हो जाता है और धीरे से रश्मि के होंठो के पास अपने मूह को लगा कर कहता है रश्मि तेरे दूध कितने कसे हुए है और फिर से रश्मि के रस भरे होंठो का रस पीने लगता है,

रश्मि की फूली हुई चूत पानी-पानी हो जाती है लेकिन वह अपनी साँसे थामे हुए पड़ी रहती है, राज धीरे से रश्मि की टीशर्ट को उसकी कमर के पास से पकड़ कर उपर करता है और रश्मि का चिकना गुदाज पेट उसे नंगा नज़र आने लगता है और वह रश्मि के पेट पर हाथ फेरता हुआ उसकी टीशर्ट के अंदर धीरे से अपना हाथ डाल कर जब वह रश्मि के कलमी आमों की तरह तने हुए गदराए दूध को अपने हाथ में पकड़ता है तो उसका खून उसकी रगों में एक दम से रुकने लगता है रश्मि के मोटे-मोटे कसे हुए नंगे दूध का गरम अहसास उसे पागल कर देता है और वह धीरे-धीरे अपने काँपते हाथो से रश्मि के दूध को दबोचता हुआ उसके रसीले होंठो को पूरा अपने मूह में भर कर चूसने लगता है और रश्मि को लगता है कि उसकी सांस अभी के अभी रुक जाएगी,




Raj Rashmi ke khubasurat hontho ko dekhta hua apne man men Rashmi aaj men tere in rasile hontho ka ras sari rat pina chahta hu, tere mote-mote doodh ko jab kal mene kas-kas kar dabocha tha to sach men itna maja aaya tha ki kya batau tu bahut hi khubsurat aur sexy hai jis din tu mujhse puri nangi hokar chipkegi us din to mujhe jannat ka ahasaas ho jayega

dono ek dusre ko dekhte huye apne hi khyalo men khoye huye the aur phir unke samne coffee aa gai aur dono ek dusre ko muskuraakar dekhte huye coffee pine lage, coffee pite huye Rashmi muskurate huye bhaiya aise ek tak kya dekh raho ho aap

Raj - muskurate huye dekh raha hu ki meri pyari bahna kitni khubsurat ho gai hai

Rashmi- muskuraakar kaha bhaiya men kaha itni khubsurat hu aap to bas hamesha majak hi karte rahte hai

Raj - nahi Rashmi men sach kah raha hu tu mujhe bahut khubsurat lagti hai, agar tu meri bahan na hoti to,

Rashmi- Raj ki aankho men dekh kar, agar men aapki bahan na hoti to kya bhaiya

Raj - muskuraakar uske samne uske doodh ko dekhne lagta hai aur Rashmi ko uski pyasi najro ko dekh kar thodi sharm aa jati hai aur vah apne sar ko niche kar leti hai

Raj – Rashmi

Rashmi- uski aur dekhti hai

Raj - kuch nahi

Rashmi- phir se apni najre niche karke bachi hui coffee pikar khatam kar deti hai aur phir Raj ki aur dekh kar

Rashmi- chale bhaiya
Raj – ok

Rashmi apne man men aankho se to din rat apni bahan ko chodte ho kabhi apne mote lund se bhi chodo na tabhi to asli maza aayega,

Raj aur Rashmi dono dhire-dhire tahalte huye chal dete hai aur Raj jakar bed par let jata hai aur Rashmi apne bag ko khol kar usme se skirt aur tshirt nikalti hai tabhi vah Raj ki aur dekhti hai jo usi ki aur dekh raha tha, aur muskurate huye

Rashmi- bhaiya men abhi change karke aai jeans men mujhe thik se neend nahi aati hai

Raj - muskuraakar ok

Rashmi sidhe bathroom men jati hai aur apni shirt utar deti hai phir apni bra bhi utar deti hai aur uske mote-mote kase huye doodh pure nange ho jate hai Rashmi apne doodh par halke se hath pherti hai aur uske doodh ke nippal ek dam se kadak ho jate hai tabhi Rashmi apne jeans ko utar deti hai aur phir jab apni penty utarti hai to keval yah soch kar ki aaj uski phuli hui chut par uske bhaiya jarur apna muh rakhege to vah mast ho jati hai aur uski chut pani chodane lagti hai, Rashmi jaldi se apne badan par sirf apni patli si tshirt aur chhoti si skirt pahan leti hai aur andar na bra aur na hi penty pahanti hai aur phir bathroom se bahar aa jati hai, ravi ki najar sidhe uski gori-gori pindliyo par padti hai aur vah jab apni najro ko apni
bahan ke chhatiyo par le jata hai to uske pure doodh aisa lag raha tha ki tshirt ko phad denge, Raj Rashmi ke mastane jism ko pura nanga soch kar kalpna karte use dekhne lagta hai aur Rashmi dhire-dhire uske pas aakar baith jati hai,
Raj karwat lekar leta rahta hai aur Rashmi uske side men apne per niche latka kar baithi rahti hai, Rashmi ka gala sukh raha tha aur vah kaphi dar rahi thi aur soch rahi thi ki kaise apne bhai ke sath is chhoti si skirt men bina penty pahne soungi, skirt to jara sa idhar udhar hone par hi upar chadh jayegi aur phir thoda khus hote huye aaj to bhaiya ki ichcha puri ho jayegi na jane kab se bhaiya meri chut ko dekhne ka soch rahe honge, Rashmi apni soch men dubi hui thi aur Raj uske kase huye mote-mote doodh ko dekh raha tha, tabhi Rashmi uski aur dekhti hai aur Raj uske chehre ko dekh kar muskurata hua

Raj - Rashmi tu kabhi lipstic nahi lagati hai kya,

Rashmi- muskuraakar nahi aisi bat nahi hai bhaiya men jab kisi shadi men jati hu tabhi makup karti hu aur lipstic lagati hu

Raj - par mene to tujhe aaj tak lipstic lagaye huye nahi dekha, kya tere pas nahi hai

Rashmi- hai na bhaiya mere bag men sab saman hai

Raj - to ek bar laga kar dikha na

Rashmi- muskurate huye, abhi

Raj – ha

Rashmi- bhaiya abhi to sona hai kaun sa kahi jana hai men subah lagakar aapko dikha dungi

Raj - are nahi abhi laga kar dikha na men dekhna chahta hu ki tu lipstic lagane par kaisi lagti hai,

Rashmi- muskurate huye, achcha lagati hu, Rashmi apne man men wah bhaiya kaphi rasila mijaj ho raha hai aapka aaj apni bahan ke hontho ki lipstic chatne ka man lag raha hai aapka, aaj to lagta hai mere hontho ki kher nahi, aaj aap sari rat apni bahan ke honth pine ke mood men lag rahe ho, aur phir Rashmi apne bag se lipstic nikal kar dressing table ki aur jane lagti hai

Raj - kaha ja rahi hai

Rashmi- palat kar mirror men dekh kar lagana padega na

Raj - yahi baith kar laga na

Rashmi- par bhaiya bina mirror men dekhe kaise lagaugi

Raj - ek kam kar yaha aa la men laga deta hu

Rashmi- muskurate huye aap lagaoge, aap se ban jayega

Raj - kyo isme kaun si badi bat hai

Rashmi- muskurate huye Raj ke pas aakar baith jati hai aur lipstic uski aur badha deti hai

Raj -Rashmi ke hatho se lipstic le kar uth kar uske samne baith jata hai aur uski thodi ko apne hantho se upar kar deta hai aur Rashmi apne bhaiya ko muskurate huye dekhne lagti hai uska muh thoda utha hua Raj ki aur rahta hai aur vah us pose men rahti hai jaise Raj ko kah rahi ho ki lo bhaiya mere rasile hontho ka ras pi lo Raj apni bahan ki khubsurti aur uske rasile larajte hontho ko dekhta hua apne ek hath ko uske sar ke piche lejakar uske sar ko tham leta hai aur apne dusre hath ke aguthe se ek bar Rashmi ke rasile hontho ko halke se ragdta hai aur phir Rashmi ke bilkul karib aakar uske rasile hontho par lipstic lagane lagta hai aur Raj ko lund khada ho jata hai aur Rashmi ki phuli hui chut se pani aane lagta hai,

Raj bade pyar se apni bahan ke hontho par dhire-dhire lipstic pherne lagta hai aur uske honth aur bhi khubsurat hote jate hai, Raj apni bahan ke rasile hontho ki khubsurti ko dekh-dekh kar pagal hone lagta hai aur use lagta hai ki abhi apni bahan ke ras bhare labo ko pi le, Rashmi ko khud ye lagne lagta hai ki Raj uske rasile hontho ko apne muh men bhar kar khub kas kar chus le, jab Raj achchi tarah se apni bahan ke ras bhare hontho par lipstic laga chuka hota hai, tab vah gaur se Rashmi ke chehre ko dekhta hai aur Rashmi apne bhaiya ke chehre ko dekhti hai dono ke chehre se hasi gayab ho chuki thi aur unki aankhe jab ek dusre ki aankho se mili to jaha Raj ka lund apni bahan ke kamuk chehre aur nashili aankho ko dekh kar khada ho jata hai vahi Rashmi bhi apne bhai ke hatho ke sparshh se bahne lagi thi,

Raj - halka sa muskura kar Rashmi ke chehre par apna hath pherte huye, beuty, Rashmi tujh se sundar is puri duniya men koi ladki nahi hogi

Rashmi- muskurate huye sharmane ka natak karti hui, aap bhi na bhaiya

Raj - sachmuch Rashmi tu kayamat lag rahi hai, la men tera ek photo khich kar tujhe dikhata hu aur phir Raj apne mobile se Rashmi ka photo khinch leta hai aur phir Rashmi ko dikhate huye dekh mene lipstic barabar lagai hai na,

Rashmi- apne photo ko dekh kar muskurate huye aapko to ladkiyo ke hontho par lipstic lagane ka bada experience lagta hai itni achchi line to men bhi nahi bana pati hu, par aapne itni dark lipstic kyo lagai hai,

Raj - kayoki tere hontho par dark lipstic bahut achchi lagti hai,

Rashmi- muskurate huye apne man men lagta hai bhaiya aaj apni bahna ko pura pi jane ke mood men ho, kahi aaj hi meri phuli chut ko apne lund se phad to nahi doge, aur phir thoda jyada muskurate huye apne man men lao bhaiya men tumhare mote lund par apne hontho se lipstic laga du

Raj - kyo has rahi hai

Rashmi- kuch nahi

Raj - uski gori pindali ko apne hath se pakad kar dabata hua bata na

Rashmi- kuch nahi bhaiya men to yah soch rahi thi ki pahle to kabhi aapko men itni achchi nahi lagi par kuch dino se pata nahi kyo men aapko bahut achchi lagne lagi hu,

Raj - nahi Rashmi aisi bat nahi hai khubsurat to tu pahle se hi hai lekin mene tujh par dhyan ab jakar diya hai

Rashmi- to achanak ab kaise mere upar aapka dhyan chala gaya

Raj - uske gadaraaye doodh ko uski aankho ke samne hi dekhta hua, isliye ki ab tu badi ho gai hai
Rashmi- Raj ki bato ka matlab samajhte huye, idhar udhar dekhti hui, chalo bhaiya mujhe neend aa rahi hai mujhe sone do

Raj - ok chal aaja mere side men

Rashmi- apne man men side men ki upar

Raj - Rashmi tu aaram se so ja men tere balo men hath pher deta hu

Rashmi- uski aur karwat lekar nahi bhaiya men aise hi so jaungi aap kyo pareshan hote ho aap bhi so jao na

Raj - nahi Rashmi, abhi mujhe neend nahi aa rahi hai aur phir jab men tere balo men hath pherta hua tujhe sulata hu to mujhe bada achcha lagta hai, kal bhi to men tere balo men hath pher raha tha aur tu so gai thi

Rashmi- muskuraakar apne man men vo to men janti hu bhaiya ki kis tarah aapne rat bhar mere jism ke ek-ek ang ko daboch-daboch kar kaise hath phera tha aur Rashmi apni aankhe band kar leti hai aur bhaiya mujhe to bahut tej neend aa rahi hai aap mere sar ke balo par apni ungliya pheriye na mujhe bhi bada achcha lagta hai,

Raj - Rashmi ke balo men apni ungliya chalane lagta hai aur Rashmi apni aankhe band karke chupchap leti rahti hai aur uski phuli hui chut yah soch-soch kar aur phulne lagti hai ki aaj bhaiya uski phuli hui chut ko jarur apne hantho se chuyege ya phir yah bhi ho sakta hai ki vah apne hontho se uski phuli hui chut ko chum le, Raj sabse pahle Rashmi ke gadaraaye husn ko dekhta hai phir uske kase hui mote-mote doodh jo ki uski tshirt men bahut bada aur nikila shap banaye hua tha ko ghur kar dekhta hai aur uske muh men pani aa jata hai aur vah apni jawan bahan ki gadaraai jawani ko dekh kar pagal ho uthta hai, vah bhul jata hai ki Rashmi ne abhi-abhi apni aankhe band ki hai aur vah Rashmi ke balo ke bajay uske gadaraaye hule gulabi
galo ko apne hantho se sahlane lagta hai, jab vah Rashmi ke gadaraaye galo ko apne hantho se sahlata hai to uska lund jhatke marne lagta hai uski najre Rashmi ki kasi hui gudaj chuchiyo par tiki rahti hai, Rashmi apni aankhe band kiye chupchap apne bhai ke hatho ka maza leti rahti hai aur uski chut ka tana hua dana phudkne lagta hai aur uska maza double ho jata hai,

karib 15 minat tak Raj uske galo ko sahlata hai aur phir vah dhire se kahta hai

Raj - Rashmi, o Rashmi, so gai kya

Rashmi- apni sanso ko thame huye chupchap padi rahti hai, jab Rashmi koi reply nahi karti tab Raj dhire se apne jism ko Rashmi ke aur karib lakar chipak jata hai aur Rashmi ki sanse ek dam se bahut tej ho jati hai aur use dar lagne lagta hai ki kahi bhaiya ko pata na chal jaye ki vah jag rahi hai vah apni sanso ki raftar ko kam karne ki koshish karti hai aur jab uske khud ke hontho par Raj ki sanse padti hai to vah aur phi garam ho jati hai kyoki use yah ahasaas ho jata hai ki Raj ke honth uske hontho se sirf ek-do inch ki duri par hai, Raj apne hath ko Rashmi ki kamar ke upar rakh kar dhire-dhire uski kamar ko uski skirt ke upar se sahlata hua apni nak se Rashmi ke chehre ki mahak ko lene lagta hai aur phir dhire se ek bar aur Rashmi ko aawaj deta hai lekin Rashmi koi jawab nahi deti hai.

Raj se bardast nahi hota hai aur vah dhire se apne labo ko apni bahan ke rasile hontho par rakh deta hai aur dhire-dhire darte huye Rashmi ke hontho ko apne hontho se sahlane lagta hai aur vah apni bahan ke rasile hontho ki mahak se pagal ho jata hai aur Rashmi ke mote-mote gadaraaye doodh ko apne hatho men men bhar kar dhire-dhire apni bahan ke rasile hontho ko chusta hua uske mote-mote doodh ko uski patli si tshirt ke upar se dabane lagta hai apni bahan ke mote-mote doodh ke ahasaas se Raj pagal ho jata hai aur dhire se Rashmi ke hontho ke pas apne muh ko laga kar kahta hai Rashmi tere doodh kitne kase huye hai aur phir se Rashmi ke ras bhare hontho ka ras pine lagta hai, Rashmi ki phuli hui chut pani-pani ho jati hai lekin vah apni sanse thame huye padi rahti hai, Raj dhire se Rashmi ki tshirt ko uski kamar ke pas se pakad kar
upar karta hai aur Rashmi ka chikna gudaj pet use nanga najar aane lagta hai aur vah Rashmi ke pet par hath pherta hua uski tshirt ke andar dhire se apna hath dal kar jab vah Rashmi ke kalmi aamo ki tarah tane huye gadaraaye doodh ko apne hath men pakadta hai to uska khun uski rago men ek dam se rukne lagta hai Rashmi ke mote-mote kase huye nange doodh ka garam ahasaas use pagal kar deta hai aur vah dhire-dhire apne kanpte hatho se Rashmi ke doodh ko dabochta hua uske rasile hontho ko pura apne muh men bhar kar chusne lagta hai aur Rashmi ko lagta hai ki uski sans abhi ke abhi ruk jayegi,

(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &;
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj sharma

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