घर के रसीले आम मेरे नाम

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rajaarkey
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Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby rajaarkey » 02 Jan 2017 09:29

Kautilay wrote:Good wishes for your new story
vnraj wrote:नई कहानी के लिए धन्यवाद दोस्त

shukriya dosto
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rajaarkey
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Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby rajaarkey » 02 Jan 2017 09:36


रश्मि उस फोटो को देख कर सिहर जाती है और उसकी फूली हुई चूत उस मोटे लंड को देख कर कुलबुलाने लगती है.)

कोमल- (मुस्कुरा कर रश्मि के दूध को अपने हाथो से पकड़ कर दबा देती है और..) क्यों डार्लिंग!! कैसा है ये मोटा लंड, तेरी फूली हुई चूत तो इसको देख कर पकड़ने लगी होगी, क्यों है ना?

रश्मि- (उसको देख कर मुस्कुराते हुए..) तू शांति नही रख सकती मुझे अच्छे से देखने तो दे..

(और फिर रश्मि उस आल्बम के हर पेज को पलट-पलट कर देखने लगती है, कोमल रश्मि को मुस्कुराती हुई देखती रहती है और फिर एक फोटो को देख कर..)

कोमल- हे देख रश्मि! कैसा पूरी चूत को फाड़ कर अंदर तक घुसा हुआ है हे कितना मज़ा आ रहा होगा इस लड़की को.

(रश्मि का चेहरा पूरा लाल हो गया था और उसकी साँसे काफ़ी तेज हो गई थी.)
कोमल- अरे इतना घबरा कर क्यो देख रही है आराम से बैठ कर देख.
रश्मि- (कोमल को देख कर मुस्कुराते हुए..) कहाँ से लेकर आई है तू यह आल्बम?

कोमल- अरे बस मत पूछ बड़ी मुश्किल से जुगाड़ लगाया है.

रश्मि- (मुस्कुराते हुए उस आल्बम को अपने बॅग में डाल कर..) अब ये तुझे कल मिलेगी.

कोमल- (मुस्कुराकर) अरे यही देख कर अपनी चूत में उंगली कर ले.
रश्मि- (मुस्कुराकर) नही! मुझे यहाँ देखने में मज़ा नही आ रहा है. में अपने घर पर आराम से देखूँगी.

कोमल- (रश्मि की स्कर्ट में हाथ डाल कर उसकी पेंटी के उपर से उसकी फूली हुई चूत को अपने हाथों में भर कर मसल्ति हुई..) अरे मेरी रानी! इन फोटो को देख-देख कर शांति नही मिलेगी तेरी इस फूली हुई चूत को, किसी मोटे लंड का इंतज़ाम कर ले और जब किसी मोटे लंड से चुदेगि तभी असली मज़ा आएगा.

रश्मि- (कोमल को देख कर..) क्या तूने किसी मोटे लंड को अपनी चूत मे लिया है?

कोमल- अरे मुझे तो किसी के साथ मोका ही नही मिला में तो अपने घर के आस पास के कई लड़को को खूब हंस-हंस कर देखती हूँ, पर कोई लड़का इतनी हिम्मत ही नही दिखाता की वह मुझसे बात भी कर सके.
(तभी रश्मि का मोबाइल बजता है और वह अरे भैया का फोन है दो मिनट चुप हो जा…)

रश्मि- हेलो!

राज- हां! रश्मि एग्ज़ॅम हो गई?

रश्मि- हन भैया!

राज- कैसा रहा पेपर?

रश्मि- बहुत अच्छा गया है भैया..

राज- अच्छा ठीक है! में 10 मिनट में आता हूँ.

रश्मि- ओके भैया!

कोमल- (मुस्कुराते हुए..) क्या हुआ क्या कह रहे थे तेरे भैया?

रश्मि- कुछ नही! वो लेने आ रहे है मुझे

कोमल- बेचारे राज भैया सोचते होंगे कि उनकी प्यारी बहना एग्ज़ॅम दे कर बाहर उनका वेट कर रही होगी. उन्हे क्या मालूम कि उनकी गुड़िया रानी तो मोटे-मोटे लंड के दर्शन करके मस्त हो रही है.

रश्मि- (मुस्कुराते हुए..) चुप कर कमिनि! जब देखो उल्टी बात करती है.
कोमल- रश्मि एक बात कहूँ.

रश्मि- क्या?

कोमल- तेरे भैया भी तो काफ़ी गबरू जवान है उनका लंड भी काफ़ी मोटा होगा.

रश्मि- (अपनी आँखे निकाल कर कोमल को देखती हुई..) तो…

कोमल- अरे मेरी जान मेरे घर में तो में अपने माँ-बाप की एक्लोति बेटी हूँ. पर सच कहूँ अगर तेरे भैया जैसा मेरा भी कोई गबरू जवान भाई होता तो में उसका ही लंड ले लेती, तू अपने भैया को ही क्यो नही फसा लेती? आराम से घर मे ही रोज तुझे चुदने को मिल जाएगा और तेरी फूली चूत जो हमेशा किसी मोटे लंड के लिए तड़पती रहती है उसे बैठे बिठाए एक तगड़े लंड से चुदने का मोका मिल जाएगा.

रश्मि- (कोमल को मारती हुई..) कमिनि! कभी तो सोच समझ कर बोला कर, वह मेरे भैया है. में उनके बारे में ऐसा सोच भी कैसे सकती हूँ?

कोमल- अरे आज कल तो लड़किया सबसे पहले अपने भाई से ही चुदती है, और सारे भाई भी अपनी गंदी नज़रे सबसे पहले अपनी माँ बहनो पर ही मारते हैं.

रश्मि- बेशरम! चुप कर जो देखो वो बोले चली जा रही है.

कोमल- अच्छा तुझे यकीन नही आता ना तो में तुझे कल की ही मेरे बिल्डिंग की एक घटना बताती हूँ.

रश्मि- (उसको देखती हुई..) कौन सी घटना?

कोमल- अरे हम जिस मकान में रहते है उसमे और भी किरायेदार रहते है, और उन्ही मे एक भैया है जो जॉब करते है और एक सिंगल रूम लेकर रहते हैं, उन भैया की उमर 30 साल के लगभग है और अभी दो दिन पहले उनकी ही उमर की एक लड़की उनके घर आई तो मकान मालकिन ने पूछा कि वह कौन है? तो उन भैया ने कहा कि वह उनकी दीदी है.

रश्मि- फिर क्या हुआ?

कोमल- आजकल गर्मी पड़ने लगी है और रात को लाइट भी चली जाती है तो काफ़ी लोग रात को छत पर सोते हैं, परसो रात को उन भैया ने छत पर दूसरे लोगो से थोड़ा दूर दो बिस्तेर लगा दिए और फिर रात को 11 बजे तक वो और उनकी दीदी छत पर आए और अपने-अपने बिस्तेर पर पास-पास सो गये, उसी छत पर मकान मालकिन भी सोई हुई थी और रात को करीब 1 बजे मकान मालकिन को प्यास लगी होगी तो उसकी नींद खुल गई और उसने जब दूसरी ओर लेटे-लेटे देखा तो उसके होश उड़ गये वो भैया अपनी दीदी की मॅक्सी को उपर तक चढ़ा कर उसके उपर लेट कर मस्ती से उसे कस-कस कर चोद रहे थे. पता नही मकान मालकिन ने कब तक उनकी चुदाई देखी और फिर जब सुबह-सुबह वो भैया ऑफीस जा रहे थे तो मकान मालकिन ने उनको बुला कर अपना रूम खाली करने को कह दिया. जब उन भैया ने कारण पूछा तो मकान मालकिन ने कहा कि मेरे घर में और भी लोग रहते हैं और उन्हे ऐसे लोग नही चाहिए अपने मकान मे जो तुम्हारे जैसी घटिया हरकत करते है. वो भैया मकान मालकिन से कुछ बोल नही पाए और आज फिर मकान खाली करके चले गये.

रश्मि- पर तुझे यह सब कैसे पता चला?

कोमल- अरे मुझे क्या सारे मोहल्ले को पता है हमारी मकान मालकिन ने दूसरी औरतो को बता दिया और फिर तू तो जानती है औरतो के पेट में बात पचती कहाँ है, इस तरह सभी को पता चल गया.

(तभी रश्मि का फोन फिर बजता है और वह फोन देख कर चल कोमल भैया आ गये और वह फोन उठा कर बस भैया दो मिनट में आ गई और फिर गार्डन से बाहर आ जाते है. सामने राज अपनी बाइक लेकर खड़ा रहता है और..)

कोमल- (रश्मि के साथ चलते-चलते उसका हाथ दबा कर) अरे रश्मि कितने हॅंडसम है तेरे भैया, ज़रा सोच इनका लंड कितना मोटा और मस्त होगा.

रश्मि- (उसको घूर कर देखती हुई..) चुप कर कमिनि!

कोमल- (मुस्कुराकर) देख रश्मि! या तो तू अपने भैया को फसा कर अपनी चूत मरवा ले या फिर अगर तुझे इंटेरेस्ट नही है तो बोल में ट्राइ करती हूँ. तू नही तो में ही तेरे भैया से चुदने को तैयार हूँ.

रश्मि- (कोमल को घूर कर आँखे दिखाती हुई..) खबरदार जो मेरे भैया पर अपनी कमिनि नज़रे मारी तो…

कोमल- तू बड़ी पागल है ना खुद चुदती है और ना मुझे ही चुदने का मोका देती है.

रश्मि- चुप कर कमिनि! भैया सुन लेंगे.. (और फिर…)

कोमल- कैसे हो भैया?

राज- ठीक हूँ कोमल! तुम बताओ तुम कैसी हो और पेपर कैसा रहा आज का?

कोमल- एक दम फर्स्ट क्लास.

राज- (रश्मि को देख कर..) और तेरा..

रश्मि- (मुस्कुराकर) मेरा भी फर्स्ट क्लास.

राज- (रश्मि के गाल पकड़ कर खिचता हुआ मुस्कुराकर..) तेरा फर्स्ट क्लास तो रिज़ल्ट आने पर ही पता चलेगा चल बैठ.

(रश्मि उचक कर अपने मोटे चूतड़ बाइक की सीट पर रखती हुई बाइ कोमल! और कोमल अपना हाथ हिलाकर रश्मि को उसके भाई की ओर मुस्कुराकर इशारा करती हुई बाइ! रश्मि उसको मुस्कुराकर घूर कर देखती हुई मारने का इशारा करती है और राज अपनी बाइक आगे बढ़ा देता है, रश्मि उस आल्बम को पाकर अंदर ही अंदर काफ़ी खुस थी और उसकी चूत बार-बार फूल रही थी और फिर वह कोमल की बातों को याद करते हुए खो गई और उसने अपने हाथ से अपने भैया की कमर को जैसे ही पकड़ा उसकी चूत एक दम से फड़कने लगी और उसे ना जाने क्यों अपने भैया पर प्यार आ गया और उसने अपने सर को अपने भैया की पीठ से टिका कर मुस्कुराते हुए कोमल की बातों को सोचने लगी…)

राज- क्या बात है पेपर अच्छा नही गया क्या?

रश्मि- हूँ!

(राज एक आइस क्रीम के ठेले पर बाइक रोक कर दो आइस क्रीम लेकर एक रश्मि को देता हुआ उसके गोरे गालो पर हाथ फेर कर..)

राज- चल टेन्षन मत कर फैल भी हो गई तो में तुझे कुछ नही कहूँगा.

रश्मि- (मुस्कुराकर) सच!!!!

राज- (उसके गोरे गालो को सहला कर उसे प्यार से देखता हुआ..) मच!!!!
(और फिर दोनो भाई बहन एक दूसरे को देखते हुए आइस क्रीम खाने लगते हैं. रश्मि अपने भाई का चेहरा मंद-मंद मुस्कुराकर देखती है अपने मन में सच मुच भैया लगते तो बहुत स्मार्ट है और इनकी बॉडी भी बहुत कसी हुई है वाकई इनका लंड भी बहुत मोटा होगा!)

राज- क्या देख रही है?

रश्मि- (मुस्कुराकर अपनी नज़रे इधर उधर नचाते हुए..) कुछ नही!

(फिर रश्मि कुछ सोच कर..) भैया आपको मेरी सहेली कोमल कैसी लड़की लगती है?

राज- (रश्मि के इस तरह के सवाल पर उसे गौर से देखता हुआ.. कुछ सोच कर..) अच्छी लड़की है, खूबसूरत है लेकिन तुझसे ज़्यादा खूबसूरत नही है.

रश्मि- (मुस्कुराकर राज को ऐसी नज़रो से देखती है जैसे अभी उसको पकड़ कर चूम लेगी और आगे बढ़ कर अपने भाई के गालो को अपने दाँतों से काट लेगी, लेकिन वह अपनी मस्ती अपनी आइस क्रीम को अपने दाँतों से ज़ोर से काट कर दबा लेती है और राज उसके आइस क्रीम से भीगे हुए होंठो को देख कर मुस्कुराता हुआ..)

राज- तुझे आइस क्रीम बहुत पसंद है ना!

रश्मि- (आइस क्रीम के बाइट को अपने मूह में भर कर) हूँ.

राज- (अपनी आइस क्रीम ख़तम करता हुआ..) और लेगी..?

रश्मि- (मुस्कुराकर) ले लो.

(राज एक और आइस क्रीम लेकर रश्मि को देता है और फिर उसे बाइक पर बैठा कर अपने घर की ओर चल देता है, घर पहुच कर वह रश्मि को उतारता है और फिर ऑफीस के लिए चला जाता है.)

रजनी- आ गई लाडो रानी, कुछ करके भी आई है या कॉपी में कोई फिल्मी स्टोरी लिख कर आ गई.

रश्मि- हां! तू मेरा दुश्मन फिल्म की स्टोरी लिख कर आई हूँ.

रजनी- (मुस्कुराते हुवे..) फिर तो हो गई तू पास!!!

रश्मि- वो तो में हो ही जाउन्गी…!

रजनी- जा जाकर यूनिफॉर्म उतार दे रोज स्कूल से आकर दिन भर पहने रहती है और फिर रोज धोना मुझे पड़ता है.

(रश्मि वही खड़ी-खड़ी अपनी शर्ट उतार कर अपनी मम्मी के मूह पर फेक देती है और अपनी स्कर्ट को भी उतार कर अपनी मम्मी पर फैंकती है और रजनी उसकी स्कर्ट को अपने हाथ से पकड़ते हुए, उसे ब्रा और पेंटी में उसके गदराए बदन को देख कर..)

रजनी- अरे दुष्ट कही की कुछ तो शरम किया कर इतनी बड़ी घोड़ी हो गई है पर हरकत अभी भी बच्चो की तरह है यही खड़ी-खड़ी नंगी हो गई, कहीं अचानक तेरा भाई आ गया तो, घर में जवान भाई है और इस बेशर्म को बिल्कुल भी हया नही है.

रश्मि- (अपनी मम्मी को मुस्कुराकर आँख मारती हुई अपनी गदराई मोटी गान्ड को मटकाते हुए अपने रूम की ओर जाने लगती है और अपने मन मे अपनी मम्मी के बारे में सोचती हुई..) खुद बड़ी सती सावित्री बनती है और खुद को नही देखती कि खुद आधा नंगा पेट दिखाते हुए साड़ी पहनती है और ब्लॉज के उपर के बटन तो लगता है जानबूझ कर तोड़ लेती है आधे से ज़्यादा दूध तो बाहर ही झाँकते रहते है, और उपर से अपनी गदराई मोटी गान्ड मटका-मटका कर घर के बाहर तक जा-जा कर झाड़ू मारते हुए पूरे मोहल्ले के मर्दो को अपनी अध नंगी जवानी दिखाती रहती है. किसी दिन किसी ने पकड़ कर चोद दिया तो फिर सारी गर्मी निकल जाएगी. खुद तो बड़ी-बड़ी घोड़ियो से भी ज़्यादा मस्ता रही है और मुझे जब देखो उपदेश देती रहती है.




Rashmi us photo ko dekh kar sihar jati hai aur uski phuli huee chut us mote lund ko dekh kar kulbulane lagti hai.)

Komal- (muskura kar Rashmi ke doodh ko apne hatho se pakad kar daba deti hai aur..) kyon darling!! kaisa hai ye mota lund, teri phuli hui chut to isko dekh kar padkne lagi hogi, kyon hai na?

Rashmi- (usko dekh kar muskurate huye..) tu shanti nahi rakh sakti mujhe achche se dekhne to de..

(aur phir Rashmi us album ke har page ko palat-palat kar dekhne lagti hai, Komal Rashmi ko muskurati hui dekhti rahti hai aur phir ek photo ko dekh kar..)

Komal- hey dekh Rashmi! kaisa puri chut ko phad kar andar tak ghusa hua hai hay kitna maza aa raha hoga is ladki ko.

(Rashmi ka chehra pura lal ho gaya tha aur uski sanse kaphi tej ho gai thi.)
Komal- are itna ghabra kar kyo dekh rahi hai aaram se baith kar dekh.
Rashmi- (Komal ko dekh kar muskurate huye..) kahan se lekar aai hai tu yah Album?

Komal- are bas mat puch badi mushkil se jugad lagaya hai.

Rashmi- (muskurate huye us album ko apne bag men dal kar..) ab ye tujhe kal milegi.

Komal- (muskuraakar) are yahi dekh kar apni chut men ungli kar le.
Rashmi- (muskuraakar) nahi! mujhe yaha dekhne men maza nahi aa raha hai. men apne ghar par aaram se dekhungi.

Komal- (Rashmi ki skirt men hath dal kar uski penty ke upar se uski phuli hui chut ko apne hantho men bhar kar masalti hui..) are meri rani! in photo ko dekh-dekh kar shanti nahi milegi teri is phuli hui chut ko, kisi mote lund ka intjam kar le aur jab kisi mote lund se chudegi tabhi asli maza aayega.

Rashmi- (Komal ko dekh kar..) kya tune kisi mote lund ko apni chut me liya hai?

Komal- are mujhe to kisi ke sath moka hi nahi mila men to apne ghar ke aas pas ke kai ladko ko khub has-has kar dekhti hoon, par koee ladka itni himmat hi nahi dikhata ki vah mujhse bat bhi kar sake.
(tabhi Rashmi ka mobile bajta hai aur vah are bhaiya ka phone hai do minat chup ho ja…)

Rashmi- hello!

Raj- haan! Rashmi exam ho gai?

Rashmi- haan bhaiya!

Raj- kaisa raha paper?

Rashmi- bahut achcha gaya hai bhaiya..

Raj- achcha thik hai! men 10 minat mein aata hoon.

Rashmi- ok bhaiya!

Komal- (muskurate huye..) kya hua kya kah rahe the tere bhaiya?

Rashmi- kuch nahi! vo lene aa rahe hai mujhe

Komal- bechare Raj bhaiya sochte honge ki unki pyari bahna exam de kar bahar unka wait kar rahi hogi. unhe kya malum ki unki gudiya rani to mote-mote lund ke darshan karke mast ho rahi hai.

Rashmi- (muskurate huye..) chup kar kamini! jab dekho ulti bat karti hai.
Komal- Rashmi ek bat kahun.

Rashmi- kya?

Komal- tere bhaiya bhi to kaphi gabru jawan hai unka lund bhi kaphi mota hoga.

Rashmi- (apni aankhe nikal kar Komal ko dekhti hui..) to…

Komal- are meri jan mere ghar mein to men apne ma-bap ki ekloti beti hoon. par sach kahu agar tere bhaiya jaisa mera bhi koi gabru jawan bhai hota to men uska hi lund le leti, tu apne bhaiya ko hi kyo nahi phasa leti? aaram se ghar me hi roj tujhe chudane ko mil jayega aur teri phuli chut jo hamesha kisi mote lund ke liye tadpti rahti hai use baithe bithaye ek tagde lund se chudane ka moka mil jayega.

Rashmi- (Komal ko marti huee..) kamini! kabhi to soch samajh kar bola kar, vah mere bhaiya hai. men unke bare men aisa soch bhi kaise sakti hoon?
Komal- are aaj kal to ladkiya sabse pahle apne bhai se hi chudatee hai, aur sare bhai bhi apni gaanDi najre sabse pahle apni ma bahno par hi marte hain.

Rashmi- besharam! chup kar jo dekho vo bole chali ja rahi hai.

Komal- achcha tujhe yakin nahi aata na to men tujhe kal ki hi mere building ki ek ghatna batati hoon.

Rashmi- (usko dekhti huee..) kaun si ghatna?

Komal- are ham jis makan mein rahte hai usme aur bhi kirayedar rahte hai, aur unhi me ek bhaiya hai jo job karte hai aur ek single room lekar rahte hain, un bhaiya ki umar 30 sal ke lagbhag hai aur abhi do din pahle unki hi umar ki ek ladki unke ghar aaee to makan malkin ne pucha ki vah kaun hai? to un bhaiya ne kaha ki vah unki didi hai.

Rashmi- phir kya hua?

Komal- aajkal garmi padne lagi hai aur rat ko light bhi chali jati hai to kaphi log rat ko chhat par sote hain, parso raat ko un bhaiya ne chhat par dusre logo se thoda dur do bister laga diye aur phir rat ko 11 baje tak vo aur unki didi chhat par aaye aur apne-apne bister par pas-pas so gaye, usi chhat par makan malkin bhi soi hui thi aur rat ko karib 1 baje makan malkin ko pyas lagi hogi to uski neend khul gai aur usne jab dusri aur lete-lete dekha to uske hosh ud gaye vo bhaiya apni didi ki maxi ko upar tak chadha kar uske upar let kar masti se use kas-kas kar chod rahe the. pata nahi makan malkin ne kab tak unki chudai dekhi aur phir jab subah-subah vo bhaiya office ja rahe the to makan malkin ne unko bula kar apna room khali karne ko kah diya. jab un bhaiya ne karan pucha to makan malkin ne kaha ki mere ghar men aur bhi log rahte hain aur unhe aise log nahi chahiye apne makan me jo tumhare jaisi ghatiya harkat karte hai. vo bhaiya makan malkin se kuch bol nahi paye aur aaj phir makan khali karke chale gaye.

Rashmi- par tujhe yah sab kaise pata chala?

Komal- are mujhe kya sare mohalle ko pata hai hamari makan malkin ne dusri aurto ko bata diya aur phir tu to janti hai aurto ke pet men bat pachti kaha hai, is tarah sabhi ko pata chal gaya.
(tabhi Rashmi ka phone phir bajta hai aur vah phone dekh kar chal Komal bhaiya aa gaye aur vah phone utha kar bas bhaiya do minat men aa gai aur phir garden se bahar aa jate hai. samne Raj apni byke lekar khada rahta hai aur..)

Komal- (Rashmi ke sath chalte-chalte uska hath daba kar) are Rashmi kitne handsome hai tere bhaiya, jara soch inka lund kitna mota aur mast hoga.
Rashmi- (usko ghur kar dekhti huee..) chup kar kamini!

Komal- (muskuraakar) dekh Rashmi! ya to tu apne bhaiya ko phasa kar apni chut marwa le ya phir agar tujhe interest nahi hai to bol men try karti Hoon. tu nahi to men hi tere bhaiya se chudane ko taiyar hoon.

Rashmi- (Komal ko ghur kar aankhe dikhati huee..) khabardar jo mere bhaiya par apni kamini najre mari to…

Komal- tu bari pagal hai na khud chudatee hai aur na mujhe hi chudane ka moka deti hai.

Rashmi- chup kar kamini! bhaiya sun lenge.. (aur phir…)

Komal- kaise ho bhaiya?

Raj- thik hoon Komal! tum batao tum kaisi ho aur paper kaisa raha aaj Ka?

Komal- ek dam first class.

Raj- (Rashmi ko dekh kar..) aur tera..

Rashmi- (muskuraakar) mera bhi first class.

Raj- (Rashmi ke gal pakad kar khichta hua muskuraakar..) tera first class to result aane par hi pata chalega chal baith.

(Rashmi uchak kar apne mote chutd bike ki seat par rakhti huee bye Komal! aur Komal apna hath hilakar Rashmi ko uske bhai ki aur muskuraakar ishara karti hui bye! Rashmi usko muskuraakar ghur kar dekhti hui marne ka ishara karti hai aur Raj apni bike aage badha deta hai, Rashmi us album ko pakar andar hi andar kaphi khus thi aur uski chut bar-bar phul rahi thi aur phir vah Komal ki bato ko yaad karte huye kho gaee aur usne apne hath se apne bhaiya ki kamar ko jaise hi pakda uski chut ek dam se padkne lagi aur use na jane kyon apne bhaiya par pyar aa gaya aur usne apne sar ko apne bhaiya ki peeth se tika kar muskurate huye Komal ki bato ko sochne lagi…)
Raj- kya bat hai paper achcha nahi gaya kya?

Rashmi- hoon!

(Raj ek Ice Cream ke thele par bike rok kar do Ice Cream lekar ek Rashmi ko deta hua uske gore galo par hath pher kar..)

Raj- chal tention mat kar fail bhi ho gaee to men tujhe kuch nahi kahunga.

Rashmi- (muskuraakar) sach!!!!

Raj- (uske gore galo ko sahlakar use pyar se dekhta huwe..) much!!!!
(aur phir dono bhai bahan ek dusre ko dekhte huwe ice cream khane lagte hain. Rashmi apne bhai ka chehra mand-mand muskuraakar dekhti hai apne man men sach much bhaiya lagte to bahut smart hai aur inki body bhi bahut kasi hui hai vakaee inka lund bhi bahut mota hoga!)
Raj- kya dekh rahi hai?

Rashmi- (muskuraakar apni najre idhar udhar nachate huwe..) kuch nahi!

(phir Rashmi kuch soch kar..) bhaiya aapko meri saheli Komal kaisi ladki lagti hai?

Raj- (Rashmi ke is tarah ke sawal par use gaur se dekhta huwe.. kuch soch kar..) achchi ladki hai, khubsurat hai lekin tujhse jyada khubsurat nahi hai.

Rashmi- (muskuraakar Raj ko aisi najro se dekhti hai jaise abhi usko pakad kar chum legi aur aage badh kar apne bhai ke galo ko apne danto se kat legi, lekin vah apni masti apni Ice Cream ko apne danto se jor se kat kar daba leti hai aur Raj uske Ice Cream se bhige huwe hontho ko dekh kar muskurata hua..)

Raj- tujhe Ice Cream bahut pasand hai na!

Rashmi- (Ice Cream ke byte ko apne muh men bhar kar) hoon.

Raj- (apni Ice Cream khatam karta hua..) aur legi..?

Rashmi- (muskuraakar) le lo.

(Raj ek aur Ice Cream lekar Rashmi ko deta hai aur phir use bike par baitha kar apne ghar ki aur chal deta hai, ghar pahuch kar vah Rashmi ko utarta hai aur phir office ke liye chala jata hai.)

Rajni- aa gai lado rani, kuch karke bhi aaee hai ya copy mein koi filmi story likh kar aa gaee.

Rashmi- haan! tu mera dushman film ki story likh kar aai hoon.

Rajni- (muskurate huwe..) phir to ho gaee tu pass!!!

Rashmi- vo to men ho hi jaugi…!

Rajni- ja jakar uniform utar de roj school se aakar din bhar pahne rahti hai aur phir roj dhona mujhe padta hai.

(Rashmi vahi khadi-khadi apni shirt utar kar apni mummy ke muh par phek deti hai aur apni skirt ko bhi utar kar apni mummy par phekti hai aur Rajni uski skirt ko apne hath se pakdte huwe, use bra aur penty men uske gadaraaye badan ko dekh kar..)

Rajni- are dusht kahi ki kuch to sharam kiya kar itni badi ghodi ho gaee hai par harkat abhi bhi bachcho ki tarah hai yahi khadi-khadi nangi ho gaee, kahi achanak tera bhai aa gaya to, ghar men jawan bhai hai aur is besharm ko bilkul bhi haya nahi hai.

Rashmi- (apni mummy ko muskuraakar aankh marti hui apni gadaraai moti gaanD ko matkate huwe apne room ki aur jane lagti hai aur apne man me apni mummy ke bare men sochti huee..) khud badi sati savitri banti hai aur khud ko nahi dekhti ki khud aadha nanga pet dikhate huwe sadi pahnti hai aur blauj ke upar ke batan to lagta hai janbujh kar tod leti hai aadhe se jyada doodh to bahar hi jhankte rahte hai, aur upar se apni gadaraai moti gaanD matka-matka kar ghar ke bahar tak ja-ja kar jhadu marte huwe pure mohalle ke mardo ko apni adh nangi jawani dikhati rahti hai. kisi din kisi ne pakad kar chod diya to phir sari garmi nikal jayegi. khud to badi-badi ghodiyo se bhi jyada masta rahi hai aur mujhe jab dekho updesh deti rahti hai.
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Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby rajaarkey » 02 Jan 2017 09:37


(रात को रजनी और रश्मि बैठी रहती है और दोनो अपनी-अपनी सोच मे डूबी हुई एक दूसरे को खा जाने वाली नज़रो से देखती रहती है और एक दूसरे से कोई बात नही करती है. रश्मि अपने मन में सोचती है उस सेक्सी फोटो के आल्बम को देखने का मज़ा तो रात को लेट कर ही आएगा पर क्या करूँ मुझे तो मम्मी के साथ सोना पड़ेगा. अगर आल्बम कल मिल गई होती तो आराम से भैया के रूम में सो कर देखती पर अब मम्मी के सामने कैसे देखूँगी? क्या करूँ? क्या करूँ?

उधर रजनी अपने मन में सोचती है. आज तो इस दुष्ट के साथ सोना पड़ेगा, अगर आज भी राज के रूम में सो जाती तो राज के मोटे लंड को छूने का मोका मिल जाता हे कितना मोटा लंड है मेरे बेटे का और रश्मि को खा जाने वाली नज़रो से देखती हुई कमिनि जा के राज के रूम में नही सो जाती है यहाँ मेरा मूह देखते बैठी है.

रश्मि मन में सोचती है कि चुपचाप जाकर भैया के रूम में लेट जाती हूँ और जब भैया आ जाएगे तो में सोने का बहाना कर के नही उठुन्गी और फिर भैया को मजबूरन मम्मी के साथ सोना पड़ेगा, हाँ यह ठीक रहेगा, और फिर रश्मि चुप चाप उठ कर अपने मोटे चूतड़ मटकाती हुई राज के रूम में जाने लगती है.

रजनी उसको देख कर मुस्कुराते हुए अरे मेरी प्यारी बेटी मेरे मन की बात पढ़ गई क्या, काश ये वही सो जाए. थोड़ी देर बाद राज घर आ जाता है और रोज की तरह रजनी उसको खाना लगा कर दे देती है और फिर चुप चाप बैठ कर उसे देखने लगती है.

राज- क्या हुआ मम्मी रश्मि सो गई क्या?

रजनी- हां! लगता है आज फिर तेरे ही कमरे में सो गई है.

राज अपना खाना ख़तम करके अपने रूम मे जाता है उसकी आहट सुनकर रश्मि अपनी आँखे बंद कर लेती है और सोने का नाटक करने लगती है, राज उसके पास जा कर बैठ जाता है और प्यार से उसके गाल सहलाता हुआ रश्मि, ओ रश्मि, सो गई क्या?? रश्मि उसकी बात का कोई जवाब नही देती है, तभी रजनी रूम में आती है.

रजनी- क्या हुआ बेटे सो गई ना..

राज- हां मम्मी! लेकिन कोई दिक्कत नही है आप आराम से सो जाओ में यही इसके पास सो जाता हूँ.

(राज की बात सुन कर दोनो माँ-बेटी की साँसे उपर नीचे होने लगती है और दोनो मे से कोई कुछ नही कह पाता है.)

राज- (अपनी मम्मी को देख कर) क्या हुआ मम्मी क्या सोच रही हो?

रजनी- कुछ नही बेटे, तो क्या तू यही सोएगा?

राज- हां मम्मी! बड़ा बेड है कोई दिक्कत नही है में आराम से सो जाउन्गा.

(रजनी का चेहरा राज की बात सुन कर मुरझा जाता है और वह पलट कर अपने रूम में चली जाती है. राज वही बैठा हुआ रश्मि के चेहरे को देखता रहता है और रश्मि की साँसे जैसे रुक जाएगी, वह बिल्कुल सावधानी से सोने की आक्टिंग करके लेटी हुई थी और अपने दिल को बहुत कंट्रोल कर रही थी लेकिन फिर भी उसका दिल बड़े जोरो से धड़क रहा था. राज उसके पास से उठ कर अपनी अलमारी से कोई बुक उठा लेता है और वही रश्मि के बगल में लेट कर पढ़ने लगता है और रश्मि अपनी आँखे धीरे से खोल कर राज को देखने लगती है, काफ़ी देर तक रश्मि अपनी किस्मत को कोस्ती रहती है और फिर उसकी नींद लग जाती है. लेकिन रश्मि यह भूल जाती है कि वह फोटो आल्बम को अपने बॅग से निकाल कर अपने भैया के बेड के नीचे रख कर लेटी हुई थी ताकि रात को देख सके, राज थोड़ी देर तक बुक पढ़ता है फिर ना जाने क्या ढूढ़ने के लिए वह अपने बेड के गद्दे को उठा कर जैसे ही देखता है उसको वह फोटो आल्बम नज़र आ जाती है, और वह जब उस आल्बम को खोल कर देखता है तो उसके होश उड़ जाते है. वह आल्बम के सारे फोटो को बारी-बारी से देखता हुआ बीच-बीच में रश्मि के चेहरे की ओर देखता जाता है.

राज अपने मन में सोचता है हे भगवान इतनी सेक्सी आल्बम किसकी है इसे कौन लाया होगा, उसके घर में उसकी मम्मी या रश्मि दो ही लोग है तो फिर या तो यह मम्मी कहीं से लेकर आई है या फिर रश्मि, लेकिन रश्मि तो बच्ची है यह स्कूल में पढ़ती है यह भला कहाँ से लेकर आई होगी, इस तरह की आल्बम तो इतनी आसानी से मिल नही सकती है, क्या रश्मि कहीं से लेकर आई है मगर इस छोटी सी लड़की, बस इतना सोच कर राज की नज़र पहली बार रश्मि के जवान गदराए जिस्म पर पड़ती है और वह रश्मि के एक-एक अंग को बड़े गौर से देखने लगता है. रश्मि का चेहरा उसे किसी हुश्न की परी जैसा नज़र आने लगता है और जब वह अपनी निगाहे रश्मि की टी-शर्ट मे तने हुए उसके बड़े-बड़े दूध पर डालता है तो उसके मन में वासना की लहरे दौड़ जाती है. वह उस आल्बम को देख कर पहले ही उत्तेजित हो गया था, लेकिन जब अपनी कमसिन बहन के गदराए तने हुवे बड़े-बड़े दूध को गौर से देखता है तो उसका मोटा लंड झटके मारने लगता है.

राज अपनी नज़रो को धीरे से रश्मि की स्कर्ट में समाई मोटी गदराई गान्ड पर ले जाता है और उसकी मोटी गान्ड को देख कर पागल हो जाता है. और जब उसकी नज़रे और नीचे रश्मि की गोरी-गोरी टाँगो की पिंदलियो पर पड़ती है तो अपनी बहन की गदराई जवानी उसे पागल कर देती है और वह रश्मि की गोरी-गोरी पिंदलियो पर अपने हाथ को रखने से नही रोक पाता है. और धीरे-धीरे अपनी बहन की नंगी टाँगो को सहलाने लगता है, राज का टावल हट जाता है और उसका लंड उसकी अंडरवेर फाड़ने की कोशिश करने लगता है. राज रश्मि के चेहरे को गौर से देखता है और अपनी बहन के गुलाबी गालो और रसीले होंठो को देख कर एक पल तो उसे ऐसा लगता है कि वह उसके चेहरे को अपने हाथो में भर कर उसके रसीले होंठो को खूब कस कर चूस ले.

वह बड़े ही प्यार से अपनी बहन के भरे हुए गुलाबी गालो पर अपने हाथ को फेरता हुआ उसके मुलायम स्पर्श को महसूस करता है, फिर अचानक कुछ सोच कर वह उस आल्बम को फिर से उसी जगह रख देता है और रश्मि के साइड में लेट कर फिर से उसी सोच में डूब जाता है.

रश्मि कितनी बड़ी हो गई है मुझे तो आज तक अहसास ही नही हुआ. और फिर से रश्मि को उपर से नीचे तक देखता है. उसकी ओर करवट लेकर रश्मि के गोरे गुलाबी गालो को अपने हाथों से सहलाता हुवा. कितनी खूबसूरत है यह लड़की और रश्मि के गुलाबी गालो को अपने होंठो से चूम लेता है. रश्मि के जिस्म से उठती खुश्बू जब उसकी नाक में जाती है तो राज पागल हो जाता है और अपने आप को रोक नही पाता है और रश्मि के जिस्म से अपने जिस्म को सटा कर लेट जाता है. रश्मि का नरम-नरम मखमली गदराए बदन का अहसास राज को पागल कर देता है और वह रश्मि एक बार तो कस कर अपनी बाँहो से चिपका लेता है और अपने होंठो से रश्मि के होंठो को चूम लेता है, तभी रश्मि थोड़ा कसमसाती है और राज एक दम से उससे दूर हो जाता है.

रश्मि करवट लेकर दूसरी ओर मूह कर लेती है, राज चुपचाप लेटा हुआ रश्मि की मोटी गदराई गान्ड के उठाव को देखता है और अपना हाथ लेजा कर उसकी मोटी-मोटी गदराई गान्ड पर फेरते हुवे अपने हाथ से हल्के हल्के रश्मि की गान्ड के भरे हुए पाटो को दबा-दबा कर उसके गुदाज चुतड़ों का साइज़ महसूस करने लगता है. फिर राज अपना हाथ हटाकर अपनी अंडरवेर में अपना हाथ डाल कर उसे मसल्ते हुवे सोचने लगता है, ये भी तो हो सकता है कि यह आल्बम मम्मी की हो! तो क्या मम्मी ऐसी आल्बम देखती है? हो भी सकता है. आख़िर मम्मी भी तो अच्छि ख़ासी जवान नज़र आती है. और फिर राज के दिमाग़ में अपनी मम्मी का गदराया हुवा बदन घूमने लगता है, ऐसा लगता है मम्मी लंड के लिए बहुत तरसती होगी, जब से पापा मरे हैं उसकी चूत को लंड भी तो नसीब नही हुआ है. ऐसी आल्बम मम्मी ही कहीं से लाई होगी. लगता है मम्मी अपनी चूत मराने के लिए बहुत ज़्यादा तड़प रही है.

तभी उसे ना जाने क्या सूझता है और वह चुपचाप अपने बेड से उठ कर बाहर निकल जाता है और अपनी मम्मी के रूम की ओर जाता है और धीरे से दरवाजा बजाता है.)

रजनी- कौन है राज?

राज- हां! मम्मी में ही हूँ.

रजनी- रुक बेटा! आती हूँ… (और आकर दरवाजा खोल कर राज को देखने लगती है.)

राज- वो क्या है ना मम्मी! मुझे नींद नही आ रही थी तो सोचा शायद आप जाग रही होगी तो थोड़ी देर आपसे ही बाते करता हूँ.

रजनी- (मुस्कुराकर) आ जा अंदर आ जा..

(और रजनी अपने भारी-भारी गदराए चुतड़ों को मटकाती हुई बेड की ओर जाने लगती है और राज जिस लिए वहाँ आया था उसकी नज़रे वही काम करने लगती है, राज आज पहली बार अपनी मम्मी की गदराई जवानी को अपनी आँखो से पी रहा था, वह बड़ी ही हसरत भरी निगाहो से अपनी मम्मी के मोटे-मोटे गदराए हुए मटकते चुतड़ों को देख रहा था और उसका दिल जोरो से धड़क रहा था. राज अपने मन में अपनी मम्मी की मोटी गदराई गान्ड को देख कर सोचने लगा… हे भगवान कितने मोटे-मोटे और खूबसूरत चूतड़ है मेरी मम्मी के? जब साड़ी के उपर से इतने मस्त नज़र आ रहे है तो मम्मी के चूतड़ पूरे नंगे कैसे नज़र आते होंगे? पूरी नंगी कैसी गदराई और मस्त नज़र आती होगी? इतने मोटे-मोटे चुतड़ों को नंगा करके चूमते हुए कैसा लगता होगा? राज का मोटा लंड उसकी अंडरवेर में पूरी तरह तन चुका था और वह उसे अड्जस्ट करने लगा तभी…)

रजनी- क्या हुवा बेटे? वहाँ क्यो रुक गया आ बेड पर आकर लेट जा!

राज- जी मम्मी!

(और राज अपनी मम्मी को देखता हुआ उसके पास आकर लेट जाता है और रजनी भी उसकी ओर करवट लेकर लेट जाती है और उसके गदराए बड़े दूध से उसका पल्लू हट जाता है और राज की नज़र सीधे अपनी मम्मी के गदराए हुए बड़े-बड़े दूध पर पड़ जाती है. तभी राज अपनी मम्मी को देखता है और दोनो की नज़रे मिल जाती है और रजनी को आज पहली बार उसकी नज़रे कुछ बदली हुई नज़र आती है और वह अपने बेटे की ऐसी नज़रो को देख कर मन ही मन मुस्कुराते हुए..)

रजनी- क्या बात है? कुच्छ परेशानी तो नही है ना तुझे?

राज- (मुस्कुराकर) नही मम्मी! ऐसी कोई बात नही है बस लेटा हुआ था लेकिन आज पता नही नींद नही आ रही थी तो सोचा आपसे ही जाकर बाते करता हूँ.

रजनी- (राज के गाल पर हाथ फेरती हुई..) अच्छा किया! अब एक काम कर यही सो जा में तेरे बालो में हाथ फेर देती हूँ तुझे जल्दी नींद आ जाएगी.

राज- (मुस्कुराकर) ठीक है!

(और अपनी आँखे बंद कर लेता है और रजनी उसके बालो में अपना हाथ फेरने लगती है, राज का मूह थोड़ा नीचे था जिसके कारण उसने जब अपनी आँखे खोल कर देखा तो उसे उसकी मम्मी का नंगा उठा हुआ गदराया पेट और गहरी नाभि नज़र आने लगी और उसका मोटा लंड अपनी मम्मी की गदराई जवानी को देख कर फिर से पूरी तरह तन गया था, उसके लंड की खाल उसके टोपे पर चढ़ि हुई थी और उसकी इच्छा हो रही थी कि वह अंडरवेर के अंदर हाथ डाल कर अपने लंड की खाल को नीचे करके अपने टोपे को बाहर कर दे. लेकिन वह ऐसा नही कर सकता था क्योकि उसकी मम्मी उसकी हरकत को देख सकती थी. कुच्छ देर तक रजनी उसके बालो को सहलाती रही और राज अपने मूह को अपनी मम्मी के मोटे-मोटे दूध से सटाये हुवे उसके बदन की खुसबू लेता हुवा लेटा था.राज नही जानता था कि उसकी मम्मी उसके सोने का इंतजार कर रही है. और रजनी जब भी राज को धीरे से आवाज़ लगा कर पुछि..)

रजनी- राज आ रही है नींद…

राज- हां मम्मी!

(रजनी उसके सर को सहला-सहला कर थक गई, तब राज ने अपनी मम्मी को देख कर मम्मी अब आप भी सो जाओ बहुत रात हो गई है.)

रजनी- ठीक है बेटे!

(और रजनी अपनी आँखे बंद कर लेती है और राज अपनी मम्मी के भरे हुए चेहरे को बड़ी गौर से देखने लगता है उसके भरे हुए गाल और बड़े-बड़े रसीले होंठ देख कर राज का लंड झटके मारने लगता है और वह अपनी मम्मी के रसीले होंठो को अपने मूह में भर कर पीने के लिए तड़पने लगता है. और फिर वह अपनी मम्मी के भरे हुए भारी भरकम जिस्म को उपर से नीचे तक देखता हुआ अपने मन में सोचता है… हे कितनी गदराई हुई है मेरी मम्मी, पूरी नंगी करके चिपकने पर कितना अच्छा लगता होगा? और राज अपने लंड को सहलाता हुआ कभी अपनी मम्मी के उठे हुवे गदराए पेट कभी उसकी मोटी-मोटी गान्ड और कभी उसकी मोटी-मोटी चुचियो को देख-देख कर पागल हो जाता है. वह अपनी मम्मी के चेहरे को देख कर ही काफ़ी उत्तेजित हो चुका था और उससे बर्दास्त करना मुस्किल हो रहा था. लेकिन वह चुपचाप अपने मोटे लंड को अपने हाथों में थामे पड़ा रहता है और फिर उसकी नींद लग जाती है. उधर रजनी भी अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड के अहसास को याद करके पानी-पानी हो रही थी लेकिन जब उसे भी कोई आशा नज़र नही आती है तो वह भी अपनी मोटी गदराई जाँघो के बीच अपनी फूली हुई पनियाई चूत को दबाए हुए सो जाती है.)

(नेक्स्ट डे रश्मि आराम से सोती है क्योंकि उसका नेक्स्ट पेपर एक दिन बाद था, और राज रोज की तरह उठ कर रेडी हो जाता है और फिर न्यूज़ पेपर पढ़ने लगता है, तभी रश्मि उठ कर वहाँ आती है और राज के सामने आ कर…)


रश्मि- गुड मॉर्ंनिंग भैया!

राज- (रश्मि को देख कर मुस्कुराते हुवे..) गुड मॉर्निंग रश्मि!

रश्मि- भैया सॉरी! हां में रात को आपके बेड पर फिर सो गई थी.

राज- (रश्मि की गदराई जवानी पर एक नज़र मारता हुआ..) तो क्या हुआ? तेरा जब जहाँ मन करे सो जाया कर. इस घर में तेरा-मेरा वाली कोई चीज़ नही है, सब तेरी ही है समझी.

रश्मि- (मुस्कुरा कर) समझ गई. भैया एक पेज मुझे भी दो ना.

(राज उसे न्यूज़ पेपर का एक पेज निकाल कर दे देता है और रश्मि उसको अपनी जाँघो पर रख कर पढ़ने लगती है. राज रश्मि की गदराई मोटी-मोटी चुचियो को देखने लगता है और उसका लंड खड़ा हो जाता है. तभी उसके खूबसूरत चेहरे को देखता है और उसका मन करता है कि रश्मि को अपनी गोद में बैठा कर खूब चूमे उसके गदराए बदन को अपने हाथो में भर-भर कर खूब सहलाए. रश्मि बीच-बीच में राज को देख लेती है तब राज जल्दी से अपनी नज़रे पेपर पर लगा देता है.



(Raat ko Rajni aur Rashmi baithi rahti hai aur dono apni-apni soch me dubi hui ek dusre ko kha jane wali najro se dekhti rahti hai aur ek dusre se koi bat nahi karti hai. Rashmi apne man men sochti hai us sexy photo ke album ko dekhne ka maza to rat ko let kar hi aayega par kya karu mujhe to mummy ke sath sona padega. agar album kal mil gaee hoti to aaram se bhaiya ke room men so kar dekhti par ab mummy ke samne kaise dekhungi? kya karu? kya karu?

Udhar Rajni apne man men sochti hai. Aaj to is dusht ke sath sona padega, agar aaj bhi yah Raj ke room mein so jati to Raj ke mote lund ko chune ka moka mil jata hay kitna mota lund hai mere bete ka aur Rashmi ko kha jane wali najro se dekhti hui kamini ja ke Raj ke room men nahi so jati hai yaha mera muh dekhte baithi hai.

Rashmi man men sochti hai ki chupchap jakar bhaiya ke room men let jati hu aur jab bhaiya aa jayege to men sone ka bahana kar ke nahi uthungi aur phir bhaiya ko majburan mummy ke sath sona padega, ha yah thik rahega, aur phir Rashmi chup chap uth kar apne mote chutd matkati hui Raj ke room men jane lagti hai.

Rajni usko dekh kar muskurate huwe are meri pyari beti mere man ki bat padh gai kya, kash ye vahi so jaye. thodi der bad Raj ghar aa jata hai aur roj ki tarah Rajni usko khana laga kar de deti hai aur phir chup chap baith kar use dekhne lagti hai.

Raj- kya hua mummy Rashmi so gai kya?

Rajni- haan! lagta hai aaj phir tere hi kamre men so gai hai.

Raj apna khana khatam karke apne room me jata hai uski aahat sunkar Rashmi apni ankhe band kar leti hai aur sone ka natak karne lagti hai, Raj uske pas ja kar baith jata hai aur pyar se uske gal sahlata hua Rashmi, o Rashmi, so gaee kya?? Rashmi uski bat ka koi jawab nahi deti hai, tabhi Rajni room men aati hai.

Rajni- kya hua bete so gai naa..

Raj- haan mummy! lekin koee dikkat nahi hai aap aaram se so jao men yahi iske pas so jata hoon.

(Raj ki bat sun kar dono ma-beti ki sanse upar niche hone lagti hai aur dono me se koee kuch nahi kah pata hai.)

Raj- (apni mummy ko dekh kar) kya hua mummy kya soch rahi ho?
Rajni- kuch nahi bete, to kya tu yahi soyega?

Raj- haan mummy! bada bed hai koee dikkat nahi hai men aaram se so jauga.

(Rajni ka chehra Raj ki bat sun kar murjha jata hai aur vah palat kar apne room men chali jati hai. Raj vahi baitha hua Rashmi ke chehre ko dekhta rahta hai aur Rashmi ki sanse jaise ruk jayegi, vah bilkul sawdhani se sone ki acting karke leti hui thi aur apne dil ko bahut control kar rahi thi lekin phir bhi uska dil bade joro se dhadak raha tha. Raj uske pas se uth kar apni almari se koi book utha leta hai aur vahi Rashmi ke bagal men let kar padhne lagta hai aur Rashmi apni aankhe dhire se khol kar Raj ko dekhne lagti hai, kaphi der tak Rashmi apni kismat ko kosti rahti hai aur phir uski neend lag jati hai. lekin Rashmi yah bhul jati hai ki vah photo album ko apne bag se nikal kar apne bhaiya ke bed ke niche rakh kar leti hui thi taki rat ko dekh sake, Raj thodi der tak book padhta hai phir na jane kya dhudhne ke liye vah apne bed ki gadi ko utha kar jaise hi dekhta hai usko vah photo album najar aa jati hai, aur vah jab us album ko khol kar dekhta hai to uske hosh ud jate hai. Vah album ke sare photo ko bari-bari se dekhta hua beech-beech men Rashmi ke chehre ki aur dekhta jata hai.

Raj apne man men sochta hai hay bhagwan itni sexy album kiski hai ise kaun laya hoga, uske ghar men uski mummy ya Rashmi do hi log hai to phir ya to yah mummy kahi se lekar aai hai ya phir Rashmi, lekin Rashmi to bachchi hai yah school men padhti hai yah bhala kaha se lekar aai hogi, is tarah ki album to itni aasani se mil nahi sakti hai, kya Rashmi kahi se lakar aaee hai magar is chhoti si ladki, bas itna soch kar Raj ki najar pahli bar Rashmi ke jawan gadaraaye jism par padti hai aur vah Rashmi ke ek-ek ang ko bade gaur se dekhne lagta hai. Rashmi ka chehra use kisi husn ki pari jaisa najar aane lagta hai aur jab vah apni nigahe Rashmi ki t-shirt me tane huwe uske Bade-Bade doodh par dalta hai to uske man mein vasna ki lahre daud jati hai. Vah us album ko dekh kar pahle hi uttejit ho gaya tha, lekin jab apni kamsin bahan ke gadaraaye tane huwe bade-bade doodh ko gaur se dekhta hai to uska mota lund jhatke marne lagta hai.

Raj apni najro ko dhire se Rashmi ki skirt mein samaaee moti gadaraai gaanD par le jata hai aur uski moti gaanD ko dekh kar pagal ho jata hai. aur jab uski najre aur niche Rashmi ki gori-gori tango ki pindliyo par padti hai to apni bahan ki gadaraai jawani use pagal kar deti hai aur vah Rashmi ki gori-gori pindliyo par apne hath ko rakhne se nahi rok pata hai. Aur dhire-dhire apni bahan ki nangi tango KO sahlane lagta hai, Raj ka tawel hat jata hai aur uska lund uski underwear phadne ki koshish karne lagta hai. Raj Rashmi ke chehre ko gaur se dekhta hai aur apni bahan ke gulabi galo aur rasile hontho ko dekh kar ek pal to use aisa lagta hai ki vah uske chehre ko apne hantho men bhar kar uske rasile hontho ko khub kas kar chus le.

Vah bade hi pyar se apni bahan ke bhare huwe gulabi galo par apne hath ko pherta hua uske mulayam sparsh ko mehsus karta hai, phir achanak kuch soch kar vah us album ko phir se usi jagah rakh deta hai aur Rashmi ke side men let kar phir se usi soch men dub jata hai.

Rashmi kitni badi ho gaee hai mujhe to aaj tak ahasaas hi nahi huwa. aur phir se Rashmi KO upar se niche tak dekhta hai. Uski aur karwat lekar Rashmi ke gore gulabi galo KO apne hantho se sahlata huwa. Kitni khubsurat hai yah ladki aur Rashmi ke gulabi galo KO apne hontho se chum leta hai. Rashmi ke jism se uthti khushboo jab uske nak mein jati hai to Raj pagal ho jata hai aur apne aap KO rok nahi pata hai aur Rashmi ke jism se apne jism KO sata kar let jata hai. Rashmi ka naram-naram makhmali gadaraaye badan ka ahasaas Raj ko pagal kar deta hai aur vah Rashmi ek bar to kas kar apni banho se chipka leta hai aur apne hontho se Rashmi ke hontho ko chum leta hai, tabhi Rashmi thoda kasmasati hai aur Raj ek dam se usse dur ho jata hai.

Rashmi karwat lekar dusri aur muh kar leti hai, Raj chupchap leta huwa Rashmi ki moti gadaraai gaanD ke uthav ko dekhta hai aur apna hath lejakar uski moti-moti gadraaee gaanD par pherte huwe apne hath se halke halke Rashmi ki gaanD ke bhare huwe pato ko daba-daba kar uske gudaj chutdon ka size mehsus karne lagta hai. Phir Raj apna hath hatakar apni underwear mein apna hath dal kar use masalte huwe sochne lagta hai, ye bhi to ho sakta hai ki yah album mummy ki ho! to kya mummy aisi album dekhti hai? Ho bhi sakta hai. Aakhir mummy bhi to achchhi khasi jawan najar aati hai. aur phir Raj ke dimag mein apni mummy ka gadraya huwa badan ghumne lagta hai, aisa lagta hai mummy lund ke liye bahut tarasti hogi, jab se papa mare hain uski chut ko lund bhi to naseeb nahi hua hai. Aisi album mummy hi kahi se lai hogi. Lagta hai mummy apni chut marane ke liye bahut jyada tadap rahi hai.

Tabhi use na jane kya sujhta hai aur vah chupchap apne bed se uth kar bahar nikal jata hai aur apni mummy ke room ki aur jata hai aur dhire se darwaja bajata hai.)

Rajni- kaun hai Raj?

Raj- Haan! Mummy men hi hoon.

Rajni- Ruk beta! Aati hoon… (Aur aakar darwaja khol kar Raj KO dekhne lagti hai.)

Raj- WO kya hai na mummy! Mujhe neend nahi aa rahi thi to socha shayad aap jag rahi hogi to thodi der aapse hi bate karta hoon.

Rajni- (muskuraakar) aa ja andar aa ja..

(aur Rajni apne bhari-bhari gadaraaye chutdon ko matkati huee bed ki aur jane lagti hai aur Raj jis liye vaha aaya tha uski najre vah kam karne lagti hai, Raj aaj pahli bar apni mummy ki gadaraai jawani ko apni aankho se pi raha tha, vah badi hi hasrat bhari nigaho se apni mummy ke mote-mote gadaraaye huwe matkte chutdon ko dekh raha tha aur uska dil joro se dhadak raha tha. Raj apne man mein apni mummy ki moti gadaraai gaanD ko dekh kar sochne laga… hey bhagwan kitne mote-mote aur khubsurat chutd hai meri mummy ke? Jab saree ke upar se itne mast najar AA rahe hai to mummy ke chutd pure nange kaise najar aate honge? Puri nangi kaisi gadaraai aur mast najar aati hogi? Itne mote-mote chutdon KO nanga karke chumte huwe kaisa lagta hoga? Raj ka mota lund uski underwear men puri tarah tan chuka tha aur vah use adjust karne laga tabhi…)

Rajni- kya huwa bête? vahan kyo ruk gaya aa bed par aakar let ja!

Raj- ji mummy!

(Aur Raj apni mummy ko dekhta huwa uske pas aakar let jata hai aur Rajni bhi uski aur karwat lekar let jati hai aur uske gadaraaye Bade doodh se uska pallu hat jata hai aur Raj ki najar sidhe apni mummy ke gadaraaye huwe bade-bade doodh par pad jati hai. tabhi Raj apni mummy ko dekhta hai aur dono ki najre mil jati hai aur Rajni ko aaj pahli bar uski najre kuch badli huee najar aati hai aur vah apne bete ki aisi najro ko dekh kar man hi man muskurate huwe..)

Rajni- kya bat hai? Kuchh pareshani to nahi hai na tujhe?

Raj- (muskuraakar) nahi mummy! aisi koee bat nahi hai bas leta hua tha lekin aaj pata nahi neend nahi aa rahi thi to socha aapse hi jakar bate karta hoon.

Rajni- (Raj ke gal par hath pherti huee..) achcha kiya! Ab ek kam kar yahi so ja men tere balo mein hath pher deti hoon tujhe jaldi neend aa jayegi.

Raj- (muskuraakar) thik hai!

(aur apni aankhe band kar leta hai aur Rajni uske balo men apna hath pherne lagti hai, Raj ka muh thoda niche tha jiske karan usne jab apni aankhe khol kar dekha to use uski mummy ka nanga utha hua gadraya pet aur gahri nabhi najar aane lagi aur uska mota lund apni mummy ki gadaraai jawani ko dekh kar phir se puri tarah tan gaya tha, uske lund ki khal uske tope par chadhi huee thi aur uski ichcha ho rahi thi ki vah underwear ke andar hath dal kar apne lund ki khal ko niche karke apne tope ko bahar kar de. lekin vah aisa nahi kar sakta tha kyoki uski mummy uski harkat ko dekh sakti thi. kuchh der tak Rajni uske balo ko sahlati rahi aur Raj apne muh ko apni mummy ke mote-mote doodh se sataye huwe uske badan ki khusboo leta huwa leta tha.Raj nahi janta tha ki uski mummy uske sone ka intjar kar rahi hai. aur Rajni jab bhi Raj ko dhire se aawaj laga kar puchhi..)

Rajni- Raj aa rahi hai neend…

Raj- haan mummy!

(Rajni uske sar ko sahla-sahla kar thak gaee, tab Raj ne apni mummy ko dekh kar mummy ab aap bhi so jao bahut rat ho gaee hai.)

Rajni- thik hai bete!

(aur Rajni apni aankhe band kar leti hai aur Raj apni mummy ke bhare huwe chehre ko badi gaur se dekhne lagta hai uske bhare huwe gal aur bade-bade rasile honth dekh kar Raj ka lund jhatke marne lagta hai aur vah apni mummy ke rasile hontho ko apne muh mein bhar kar pine ke liye tadapne lagta hai. aur phir vah apni mummy ke bhare huwe bhari bharkam jism ko upar se niche tak dekhta hua apne man men sochta hai… hay kitni gadraaee huee hai meri mummy, puri nangi karke chipakne par kitna achcha lagta hoga? aur Raj apne lund ko sahlata huwa kabhi apni mummy ke uthe huwe gadaraaye pet kabhi uski moti-moti gaanD aur kabhi uski moti-moti chuchiyo ko dekh-dekh kar pagal ho jata hai. vah apni mummy ke chehre ko dekh kar hi kaphi uttejit ho chuka tha aur usse bardast karna muskil ho raha tha. lekin vah chupchap apne mote lund ko pane hantho mein thame pada rahta hai aur phir uski neend lag jati hai. udhar Rajni bhi apne bete ke mote tagde lund ke ahasaas ko yaad karke pani-pani ho rahi thi lekin jab use bhi koee asha najar nahi aati hai to vah bhi apni moti gadraaee jangho ke beech apni phuli huee paniyaee chut ko dabaye huwe so jati hai.)

(Next day Rashmi aaram se soti hai kyonki uska next paper ek din bad tha, aur Raj roj ki tarah uth kar reddy ho jata hai aur phir news paper read karne lagta hai, tabhi Rashmi uth kar vahaan aati hai aur Raj ke samne aa kar…)


Rashmi- good mornning bhaiya!

Raj- (Rashmi ko dekh kar muskurate huwe..) good morning Rashmi!

Rashmi- bhaiya sorry! haan men rat ko aapke bed par phir so gaee thi.

Raj- (Rashmi ki Gadraee Jawani par ek najar marta Huwe..) to kya hua? tera jab jaha man kare so jaya kar. Iss ghar mein tera-mera wali koi cheej nahi hai, sab teri hi hai samajhi.

Rashmi- (muskura kar) samajh gaee. bhaiya ek page mujhe bhi do na.

(Raj use news paper ka ek page nikal kar de deta hai aur Rashmi usko apni jangho par rakh kar read karne lagti hai. Raj Rashmi ki Gadraee moti-moti chuchiyo ko dekhne lagta hai aur uska lund khada ho jata hai. tabhi uske khubsurat chehre ko dekhta hai aur uska man karta hai ki Rashmi ko apni god mein baitha kar khub chume uske gadaraaye badan ko apne hatho mein bhar-bhar kar khub sahlaye. Rashmi beech-beech mein Raj ko dekh leti hai tab Raj jaldi se apni najre paper par laga deta hai.

(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &;
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj sharma
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Ankit
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Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby Ankit » 02 Jan 2017 19:25

Happy New Year Friends



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vnraj
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Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby vnraj » 02 Jan 2017 22:35

मस्त है
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Re: घर के रसीले आम मेरे नाम

Postby Phantom » 03 Jan 2017 08:12

Update please..........

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