दास्तान ए चुदाई (माँ बेटी बेटा और किरायेदार ) complete

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jay
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दास्तान ए चुदाई (माँ बेटी बेटा और किरायेदार ) complete

Post by jay » 14 Feb 2017 20:06

दास्तान ए चुदाई (माँ बेटी बेटा और किरायेदार )

फ्रेंड्स आपके लिए एक और नई कहानी शुरू कर रहा हूँ मेरी पहली कहानी एक राजा और चार रानियाँ पूर्ण होने वाली है इसीलिए ये कहानी शुरू कर रहा हूँ . दोस्तो ये एक पारवारिक रिश्तों मे चुदाई की कहानी है जिन मित्रो को ऐसी कहानियाँ पढ़ने में अगर अच्छा ना लगता हो वो कृपया इसे ना पढ़े . दोस्तो वैसे भी ये कहानियाँ सिर्फ़ और सिर्फ़ मनोरंजन के लिए होती है वास्तविकता से इसका कोई संबंध नही होता इन कहानियों का उद्देश्य मात्र मनोरंजन करना होता है ये कहानी तुषार ने लिखी है
मैं इसे हिन्दी फ़ॉन्ट में पोस्ट कर रहा हूँ
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(ज़िद (जो चाहा वो पाया) running).
(वक्त का तमाशा running)..
(दास्तान ए चुदाई (माँ बेटी बेटा और किरायेदार ) complete) .. (सातवें साल की खुजली complete)
(एक राजा और चार रानियाँ complete).............(माया complete...)-----(तवायफ़ complete).............
(मेरी सेक्सी बहनें compleet)........(दोस्त की माँ नशीली बहन छबीली compleet)............(माँ का आँचल और बहन की लाज़ compleet)..........(दीवानगी compleet )....... (मेरी बर्बादी या आबादी (?) की ओर पहला कदमcompleet)........(मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग)........


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(कोई तो रोक लो)
(ननद की ट्रैनिंग compleet)..............( सियासत और साजिश)..........(सोलहवां सावन)...........(जोरू का गुलाम या जे के जी).........(मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन)........(कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास)........(काले जादू की दुनिया)....................(वो शाम कुछ अजीब थी)

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jay
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Post by jay » 14 Feb 2017 20:08


हेलो फ्रेंड्स आज में आप सब के सामने एक स्टोरी पेश कर रहा हूँ ये कहानी बिल्कुल काल्पनिक है तो चलें में इस कहानी के किरदारों के बारे में आप को बता दूँ
शोभा: उम्र 37 साल एक विधवा औरत (1995 में)
रेणु: उम्र ***** शोभा की बेटी जो की 12थ क्लास में पढ़ती है
अमन: उम्र***** शोभा का बेटा जो कि 10ह क्लास में है (1995 में)
और दोस्तो इस कहानी के मुख्य किरदार (1995 में)
बबलू: उम्र 18साल एक अनाथ (1995 में)

दोस्तो कुछ किरदारो की उम्र का जिकर में नही किया है आप लोग अपनी फॅंटेसी के अनुसार उसकी उम्र के बारे में सोच सकते हैं

बाकी के सब किरदारों के बारे में समय आने पर बता दिया जाएगा

दोस्तो ये कहानी 1995 की गर्मियों से शुरू होती है शोभा एक विधवा औरत थी जिसके पति का लंबी बीमारी के बाद देहांत हो गया था वो अपने पति के साथ यू-पी के एक छोटे से शहर में रहती थी शोभा का पति एक रेलवे में जॉब करता था और उसने उसी शहर में एक छोटा सा अपना मकान बना लिया था जो कि डबल स्टोरी था पति की मौत के बाद शोभा को अपने बेटे और बेटी के पालन पोषण के लिए काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा इसके लिए उसने लोगो के घरों में भी काम किया आख़िरकार उसने कपड़े सीलने का काम सीख लिया और घर पर ही औरतों के कपड़े सीने लगी सिलाई और पति की पेन्षन से वो अपने घर और बेटे बेटी की पढ़ाई को ठीक से चलाने लगी शोभा के पति के मौत को 6 साल हो चले थे शोभा बहुत ही घरेलू किस्म की औरत थी

37 साल में भी उसका बदन एक दम गठा हुआ था शोभा की हाइट 5,2 थी भरा हुआ बदन 38 साइज़ की चुचियाँ अभी भी कसी हुई थी और रंग सांवला था

29 जून 1995 की सुबह के 9 बज रहे थी शोभा कपड़े सी रही थी उसका बेटा अमन और बेटी रेणु अभी तक उठे नही थे क्यों कि स्कूल में छुट्टियाँ थी दोनो एक महीने से स्कूल नही गये थे और 2 दिन बाद ही उनके स्कूल खुलने वाले थे घर के नीचे वाली पोर्षन के बाहर की बैठक में वो कपड़ों को सिला करती थी शोभा अपने माथे पर आए पसीने को पोछती हुई ऊपेर की तरफ जाने लगी ऊपेर आकर उसने देखा कि उसका बेटा अमन उठ गया था और ब्रश कर रहा था

शोभा: अमन तुम्हारी दीदी उठी कि नही

अमन:जी नही दीदी अभी तक सो रही हैं

शोभा:पता नही आज कल की लड़कियाँ इतनी देर से क्यों उठती है चलो छुट्टियाँ चल रही हैं नही तो स्कूल जाने में भी देर कर देती है शोभा बड़बड़ाते हुए रेणु के कमरे में आती है जहाँ रेणु अभी तक सो रही थी शोभा रेणु के बेड पर आकर बैठ जाती है और गौर से अपनी जवान होती बेटी को देखने लगती है रेणु अपनी माँ के विपरीत एक दम गोरी थी 19 साल की उम्र में उसकी चुचियाँ 32 साइज़ की हो गयी थी और एक दम कसी हुई थी और रेणु की हाइट 5,1 इंच थी शोभा अपनी बेटी के माथे पर से बालों के बड़े प्यार से हटाने लगी

शोभा: उठ जा बेटी देख 9 बज गये है
रेणु:अपनी अध खुली आँखों से ) क्या है माँ सोने दो ना स्कूल तो बंद है ना

शोभा:स्कूल बंद है तो क्या सारा दिन बिस्तर पर ही रहेगी चल जल्दी उठ जा
रेणु अपनी आँखें मल्ती हुई बेड पर उठ कर बैठ गयी और अपनी माँ के गले से लग गयी

शोभा: बेटी की पीठ पर हाथ फेरते हुए) चल जा फ्रेश हो जा में तेरे लिए चाइ ले आती हूँ

रेणु:ठीक है माँ

शोभा उठ कर नीचे आ गयी नीचे आते हुए उसके फेस पर परेशानी के भाव थे उसे अपनी जवान होती बेटी की शादी और बेटे की पढ़ाई के बारे में सोचने लगी पति की पेंशन और सिलाई से वो घर तो ठीक-ठाक चला रही थे पर आगे आने वाले समय के लिए कुछ जोड़ नही पा रही थी वो किचन में आ गयी और चाइ बनाने लगी चाइ बना कर उसने अपने बेटे और बेटी को चाइ दी तभी बाहर से डोर बेल बजी शोभा ने नीचे आकर गेट खोला सामने एक साधारण सा दिखने वाला आदमी खड़ा हुआ था

आदमी: नमस्ते भाभी जी कैसी हैं

शोभा: आदमी की तरफ देखते हुए जबरन अपने होंठो पर मुस्कान लाते हुए) नमस्ते मोहन भाई शाब आप बड़े दिनो बाद आए

मोहन:हां भाभी जी बस काम कुछ ज़्यादा था

शोभा:आइए अंदर आइए (वो आदमी शोभा के पीछे अंदर आ गया और बैठक में चला गया)बैठिए ना भाई शाब कैसे आना हुआ

मोहन शोभा के पति के साथ रेलवे में काम करता था दोनो रेलवे में गॅंग मॅन की नौकरी करते थे

शोभा:भाई साहब बैठें ना में चाइ बनाती हूँ

मोहन:अरे नही भाभी जी में ज़रा जल्दी में हूँ मुझे आप से कुछ बात करनी थी
शोभा:जी हां भाई शाब बोलिए

मोहन: मेरा एक दोस्त था जो रेलवे में इस शहर में नौकरी करता था उसका परिवार लखनऊ में था उसकी मौत कुछ दिन पहले हो गयी वो अपने पीछे एक लड़का छोड़ गया है उसकी जगह उसके बेटे को रेलवे में जॉब मिल गयी है और वो यहाँ रहने के लिए कोई रूम किराए पर ढूँढ रहा है अगर आप को अच्छा लगे तो आप के नीचे के दो रूम खाली हैं तो एक अगर उसे किराए पर मिल जाता तो बहुत अच्छा होता

मोहन की बात सुन शोभा सोचा में पड़ गयी कि अगर वो उसे रूम किराए पर दे दे तो कुछ एक्सट्रा इनकम भी हो जाएगी

शोभा: ठीक है भाई शाब आप उसे ले आइए

मोहन: में उसे रूम का रेंट कितना बताऊ

शोभा: जो आप ठीक समझे

मोहन : 1000 रुपया महीने का ठीक रहेगा

शोभा: जी ठीक है

मोहन : बेचारा अकेला है अगर आप उसे खाना वाघेरा भी दें और उसके बाकी के काम भी कर दें न तो वो 3000 रुपये महीने के भी देने के लिए तैयार है

शोभा:ठीक है भाई शाब उसके खाने पीने और बाकी काम का इंतज़ाम भी हो जाएगा

मोहन:तो ठीक है में आज शाम को उसे अपने साथ ले आउन्गा और आप उसे बात कर लेना उसके पास कुछ ज़्यादा सम्मान भी नही है बस कुछ चीज़े हैं

ये कह कर मोहन वापिस चला गया और शोभा अपने काम में लग गयी शोना ने नाश्ता बनाया और बच्चों के साथ नाश्ता करने लगी
अमन:माँ मुझे नये वीडियोगेम चाहिए पुरानी वाली खराब हो गयी है

शोभा:ठीक है नये ले लेना अब तो चुप-चाप नाश्ता कर और तीनो नाश्ता करने लगे दोपहर के 2 बज रहे थे गर्मी बहुत ज़्यादा था गली एक दम सुनसान थी अमन और रेणु सो रहे थे और शोभा नीचे कपड़ों की सिलाई कर रही थी तभी डोर बेल बजी शोभा ने उठ कर गेट खोला तो सामने मोहन खड़ा था उसके साथ एक 19 साल का लड़का खड़ा था इससे पहले कि शोभा कुछ बोलती
मोहन: बहनजी में इसे के बारे में बात कर रहा था
शोभा:आएँ अंदर आएँ
दोनो शोभा के साथ बैठक में आ गये शोभा ने उन्हे सामने पड़ी चेयर्स पर बैठा दिया
मोहन:ली जाए भाभी जी अब आप को जो कुछ पूछना है पूछ लीजिए
शोभा: तुम्हारा नाम किया है बेटा
लड़का: जी बबलू
शोभा:देखो बबलू में तुम्हें अपना रूम रेंट पर दे रही हूँ पर तुम्हें कुछ रूल को मानने पड़ेंगे
बबलू:जी
शोभा:एक तो घर पर टाइम से आना होगा और अपने काम से मतलब रखना होगा
बबलू:जी
शोभा:हर महीने के 3000 रुपये देने पड़ेंगे
बबलू:मुझे कोई परेशानी नही
शोभा:क्या तुम शराब तो नही पीते
बबलू:जी कभी-2 कभार पी लेता हूँ लेकिन आप को कभी कोई परेशानी नही होगी
शोभा:मुझे ख़ुसी है कि तुमने सच बोला ठीक है मोहन भाई शाब ये यहाँ रहने के लिए आ सकता है
मोहन: (बबलू के साथ खड़े होते हुए ) ठीक है बहन जी ये शाम को अपना समान लेकर आ जाएगा
शोभा:जी ठीक है
और दोनो चले गये उनके जाने के बाद शोभा ऊपेर आ गयी और दोपहर के लिए खाना बनाने लगी अमन और रेणु उठ चुके थे खाना बनाने के बाद शोभा ने खाना लगा दिया और तीनो खाना खाने लगे
रेणु:माँ आज कहीं घूमने चले
शोभा:नही आज नही आज घर पर नीचे के रूम में किरायदार आने वाले हैं
रेणु; क्या माँ तुम मेरी कोई बात नही मानती हो अमन की हर जिद्द पूरी करती हो तुम मुझे प्यार नही करती
शोभा: नही ऐसे कोई बात नही आज वो किरायदार आने वाला है कल ले चलूंगी
रेंणु चुप बैठी रही शाम के 4 बजे शोभा नीचे बैठक में अपना काम कर रही थी तभी डोर बेल बजी
शोभा: अपने आप से) लगता है बबलू हो गा
शोभा ने गेट खोला तो बाहर बबलू हाथों में दो बॅग लिए खड़ा था
शोभा:आओ अंदर आओ
अभी भी बाहर बहुत गर्मी थी बबलू का फेस एक दम लाल हो चुका था और पसीने से भीगा हुआ था अंदर आते ही शोभा ने उसे बैठक में बैठा दिया और खुद उसके लिए पानी लाने के लिए चली गयी थोड़ी देर बाद शोभा वापिस आई उसके हाथ में एक पानी का ग्लास था
बबलू: शोभा के हाथ से ग्लास लेते हुए) थॅंक्स
शोभा: तो तुम्हरा ड्यूटी टाइम क्या है
बबलू: जी सुबह 9 बजे से
शोभा: और रात को कितने बजे आते हो
बबलू:जी कभी –2 10 भी बज जाते हैं अगर में कभी लेट हो गया तो वहीं स्टेशन पर ही सो जाया करूँगा
शोभा:कोई बात नही 10 बजे तक हमे कोई प्राब्लम नही है
बबलू:जी अप बहुत अच्छे है मुझे ऐसे ही मालिक मकान चाहिए थे
शोभा:तुम्हारी एज कितनी है
बबलू:जी 19 साल
शोभा:तुम्हारे माता पिता के बारे में सुन कर दुख हुआ इतनी सी उम्र में अकेले रहना बहुत मुस्किल है
बबलू:अब तो आदत से पड़ गयी है
शोभा:चलो में तुम्हें तुम्हारा कमरा दिखा दूं मेने उसे सॉफ कर दिया था
बबलू:जी चलिए
और बबलू शोभा के पीछे बैठक के साथ वाले रूम में आ गया
शोभा:ये है तुम्हारा कमरा
बबलू:जी अच्छा है
शोभा:तुम अपन समान जमा लो और आराम कर लो में जाती हूँ जब रात का खाना बन जाएगा में तुम्हें बता दूँगी

बबलू: जी ठीक है (और शोभा के जाने के बाद बबलू अपना समान जमाने लग गया)

दोस्तो बबलू एक 19 साल का बिगड़ा हुआ लड़का था उसके पिता रेलवे में अच्छी पोस्ट पर थे और रेलवे में आक्सिडेंट के दौरान उनकी मौत हो गयी थी बबलू जब 15 साल का था तब उसकी माँ का देहांत हुआ था बिना माँ के बबलू ग़लत संगत में पड़ गया वो घर देर से आता था और खूब दारू सिगरेट पीने लगा गया था बबलू के पिता की गाओं में काफ़ी ज़मीन ज़्यादाद थी जो उन्होने ठेके पर दे रखी थी लिहाजा पैसे की कोई कमी नही थी अब पिता के मरने के बाद बबलू बिल्कुल आज़ाद हो चुका था बबलू समान सेट करने के बाद बेड पर लेट गया और उसकी आँख लग गयी उधर रात के 8 बज चुके थे शोभा खाना तैयार कर चुकी थी खाना तैयार करने के बाद वो नीचे आए और बबलू के रूम के डोर को नॉक किया बबलू आवाज़ सुन कर जागा और डोर खोला
बबलू: जी वो मुझे नींद आ गयी थी
शोभा:कोई बात नही खाना बन गया है तुम फ्रेश हो कर नीचे आ जाओ
बबलू:आप चलिए में आता हूँ
शोभा के जाने के बाद वो नीचे बने बाथरूम में घुस गया और फ्रेश होकर ऊपेर आ गया
ऊपेर रेणु और अमन दोनो डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए थे और शोभा खाना परोस रही थी
शोभा: अरे आओ बबलू बैठो में खाना ही डाल रही थी बच्चो ये बबलू भैया हैं ये नीचे किराए पर आए हैं चलो दोनो नमस्ते करो
रेणु: (बबलू को कनखियों से देखते हुए) नमस्ते
बबलू:नमस्ते
अमन: (मुस्करते हुए) नमस्ते भैया
बबलू सर हिलाते हुए नमस्ते बेटा
उसके बाद चारो खाना खाने लगे रेणु बार –2 कनखियो से बबलू को देख रही थे बबलू एक स्मार्ट हॅंडसम लड़का था रंग एक दम गोरा पर बबलू का ध्यान खाने में था
रेणु मन में सोचते हुए अपनी आप को बहुत हॅंडसम समझता है कितनी अकड़ दिखा रहा है
चारों ने खाना ख़तम किया और शोभा बर्तन उठाने लगी
बबलू:अच्छा आंटी जी में चलता हूँ
शोभा: सुनो नीचे बहुत गर्मी होती है हम सब ऊपेर छत पर खुले में कूलर चला कर सोते हैं अगर तुम चाहो तो अपना बिस्तर ऊपेर ले के आ सकते हो
बबलू:जी आप ठीक कह रही है नीचे तो बहुत गर्मी है में छत पर ही सोउंगा
ये कह कर बबलू नीचे चला गया शोभा बर्तन सॉफ करने लगे रेणु और अमन टीवी देख रहे थे काम ख़तम करने के बाद शोभा छत पर बिस्तर लगाने के लिए चली गयी तभी बबलू भी ऊपेर आ गया और अपना बिस्तर लगा लिया

शोभा:अच्छा किया जो तुम ऊपेर आ गये नीचे तो सच में बहुत गर्मी है शोभा बिस्तर लगाने के बाद नीचे चली गयी और बबलू बिस्तर बिछा कर लेट गया थोड़ी देर में उसकी आँख लग गयी रात के 12 बजे जब उसकी आँख खुली तो उसने देखा कि उसके साथ वाले बिस्तर पर खाली था और उसके आगे वाले बिस्तर पर रेणु और अमन सो रहे थे बबलू ने नज़र घुमा कर दूसरी तरफ देखा तो शोभा पास ही एक कोने में पैरों के बल बैठी हुई थी उसने अपनी पेटीकोटे को कमर तक उठा रखा था ये देख बबलू के लंड में हलचल होने लगी सुउ सू के मूतने की आवाज़ बबलू को और पागल बनाने लगी शोभा की मोटी गान्ड देख बबलू का लंड खड़ा हो गया चाँद की रोशनी में शोभा की बड़ी गान्ड सॉफ दिख रही थी मूतने के बाद जैसे ही शोभा उठी तो बबलू को शोभा की हल्की झान्टो के दर्शन हो गये बबलू की हालत और खराब हो गयी शोभा खड़ी हो गयी


Hello friends aaj mein aap sab ke samne ek story pesh kar raha hoon ye kahani bilkul kalpnik hai to chale mein is kahani ke kirdaron ke bare mein aap ko bata doon
Shobha: umr 37 saal ek widhwa aurat (1995 mein)
Renu: umr ***** shobha ki beti jo ki 12th class mein padti hai
Aman: umr***** shobha ka beta jo ki 10h class mein hai (1995 mein)
Aur dosto is khanai ke mukhey kirdar (1995 mein)
Bablu: umr 18saal ek anath (1995 mein)
Dosto kuch kirdaro ke umr ka jikar mein nahi kiya hai aap log apni fantasy ke anusar uski umr ke bare mein soch sakte hain

Baki ke sab kirdaron ke bare mein samey ane par bata diya jayega
Dosto ye kahani 1995 ki garmiyon se shuru hoti hai shobha ek widhwa aurat the jiske pati ka lambi bimari ke baad dehant ho gaya tha wo apni pati ke sath u-p ke ek chote se shahar mein rahti thee shobha ka pati ek railway mein job karta tha aur usne usi shahar mein ek chota sa apna makan bana liya tha jo ki double story tha pati kee mout ke baad shobha par apne bete aur beti ke palan poshan ke liye kafi mushkilon ka samna karna pada iske liye usne logo ke gharon mein bhee kaam kiya akhirkaar usne kapde sine ka kaam sikh liya aur ghar par hee aurton ke kapde seene lagi silaai aur pati ki pension ki se wo apne ghar aur bete beti ki padaai ko theek se chalani lagi shobha ke pati ke mout ko 6 saal ho chale the shobha bahut hee ghareloo kism ke aurat thee

37 saal mein bhee uska badan ek dam gaThaa hua tha shobha kee hieght 5,2 thee bhara hua badan 38 size ki chuchiyaan abhee bhee kasi hui thee aur rang sanwala tha

29 june 1995 ki subah ke 9 baj rahe thee shobha kapde see rahi the uska beta aman aur beti Renu abhee tak uthe nahi the kyon ki school mein chuttiyaan thee dono ek mahine se school nahi gaye the aur 2 din baad hee unke school khulane wale the ghar ke neeche wali portion ke bahar kee baithak mein wo kapdon ko sila karti thee shobha apne mathe par aye paseene ko pochti hui oopar ke taraf jane lagi oopar aakar usne dekha ki uska beta aman uth gaya tha aur brush kar raha tha

shobha: aman tumhari didi uthi ke nahi

aman:jee nahi didi abhee tak so rahi hain

shobha:pata nahi aaj kal ki ladkiyan itni der se kyon uthati hai chalo chuttiyaan chal rahi hain nahi to school jane mein bhee der kar deti hai shobha badbadaate hue Renu ke kamre mein ati hai jahan Renu abhee tak so rahi thee shobha Renu ke bed par aakar baith jati hai aur gor se apni jawan hoti beti ko dekhane lagati hai Renu apni maa ke vipreet ek dam gori thee 19 saal ki umr mein uski chuchiyaan 32 size kee ho gayee thee aur ek dam kasi hui thee aur Renu ki hieght 5,1 inch the shobha apnee beti ke mathe par se balon ke bade payar se hatane lagi

shobha: uth ja beti dekh 9 baj gaye hai
Renu:apni adh khuli ankhon se ) kya hai maa sone do naa school to band hai na

shobha:school band hai to kya sara din bistar par hee rahegi chal jaldi uth ja
Renu apni ankhen malti hui bed par uth kar baith gayee aur apni maa ke gale se lag gayee

shobha: beti kee peeth par hath pherte hue) chal ja fresh ho ja mein tere liye chai le ati hun

Renu:theek hai maa

shobha uth kar neeche aa gayee neeche ate hue uske face par pareshaani ke bhaav the use apni jawan hoti beti ki shadi aur bete kee padaai ke bare mein sochane lagi pati kee penison aur silaai se wo ghar to theek-thaak chala rahi the par age ane wale samay ke liye kuch jod nahi pa rahi thee wo kitchen mein aa gayee aur chai banane lagi chai bana kar usne apne bete aur beti ko chai dee tabhi bahar se door bell baji shobha ne neeche aakar gate khola samne ek saadhaaran sa dikhane wala adami khada hua tha

adami: namste bhabhi jee kaisee hain

shobha: adami kee taraf dekhate hue jabran apne hontho par muskan let hue) namste munh bhai shab aap bade dino baad aaye

munh:haan bhabhi jee bus kaam kuch jyada tha

shobha:aaiye andar aaiye (wo adami shobha ke peeche andar aa gaya aur baithak mein chala gaya)baithiyee na bhai shab kaise aana hua

munh shobha ke pati ke sath railway mein kaam karta tha dono railway mein gang man kee naukari karte the

shobha:bhai sahab baithen na mein chai banati hun

munh:are nahi bhabhi jee mein jara jaldi mein hoon mujhe aap se kuch baat karni thee
shobha:jee haan bhai shab bole

munh: mera ek dost tha jo railway mein is shahar mein naukari karta tha uska pariwar lukhnow mein tha uski mout kuch din pahle ho gayee wo apne peeche ek ladaka chod gaya hai uski jagah uske bete jo railway mein job mil gayee hai aur wo yahan rehane ke liye koi room kiraaye par dhoondh raha hai agar aap ko achha lage to aap ke neeche ke do room khali hain to ek agar use kiraye par mil jata to bahut achha hota

munh kee baat sun shobha socha mein pad gayee ki agar wo use room kiraye par de de to kuch extra income bhee ho jayegee

shobha: theek hai bhai shab aap use le aaiye

munh: mein use room ka rent kitna bataaoo

shobha: jo aap theek samjhe

munh : 1000 rs mahine ka theek rahega

shobha: jee theek hai

munh : bechara akela hai agar aap use khana waghera bhee de aur uske baki ke kaam bhee kar de n to wo 3000 rs mahine ke bhee dene ke liye taiyaar hai
shobha:theek hai bhai shab uske khane peene aur baki kaam ka intjaam bhee ho jayega
munh:to theek hai mein aaj sham ko use apne sath le anuga aur aap use baat kar lena uske pass kuch jyada samman bhee nahi hai bus kuch cheeze hain
ye keh kar munh wapis chala gaya aur shobha apne kaam mein lag gaye shona ne nasta banaya aur bachon ke sath nasta karne lagi
aman:maa mujhe naye videgame chahe purani wali kharab ho gaye hai
shobha:theek hai naye le lena ab to chup-chap nasta kar aur teeno nasta karne lage dopahar ke 2 baj rahe the garmi bahut jyada tha gali ek dam sunsaan the aman aur Renu so rahe the aur shobha neeche kapdon ki silai kar rahi thee tabhi door bel baji shobha ne uth kar gate khol to samne munh khada tha uske sath ek 19 saal ka ladaka khada tha ise pahle ki shobha kuch bolti
munh: bahanjee mein ise ke bare mein baat kar raha tha
shobha:aye andar aye
dono shobha ke sath baithak mein aa gaye shobha ne unhe samne padi chairs par baitha diya
munh:lee jaye bhabhi jee ab aap ko jo kuch poochana hai pooch lee jaye
shobha: tumhara naam kiya hai beta
ladka: jee bablu
shobha:dekhu bablu mein tumhen apna room rent par de rahi hoon par tumhen kuch rule ko manna pade ga
bablu:jee
shobha:ek to ghar par time se anna hoga aur apne kaam se matlab rakhna
bablu:jee
shobha:har mahine ke 3000 rs dene pade gen
bablu:mujhe koi parsahni nahi
shobha:kiya tum sharab to nahi pite
bablu:jee kabhi-2 kabhar pee leta hun lekin aap ko kabhi koi parshani naho hogi
shobha:mujhe khusi hai ke tumne sach bola theek hai munh bhai shab ye yahan rahen ke liye aa sakta hai
munh: (bablu ke sath khade hote hue ) theek hai bhan jee ye sham ko apna samman lekar aa jayega
shobha:jee theek hai
aur dono chale gaye unke jane ke baad shobha oopar aa gaye aur dopahar ke liye khana banane lagi aman aur Renu uth chuke the khana banane ke baad shobha ne khana laga diya aur teeno khana khane lage
Renu:maa aaj kahin ghoomne chale
shobha:nahi aaj nahi aaj ghar par neeche ke room mein kiraydar ane wale hain
Renu; kiya maa tum meri koi baat nahi manti ho aman ke har jidd poori karti ho tum mujhe payar nahi karti
shobha: nahi aise koi baat nahi aaj wo kiraydar ane wala hai kal le chalungee
rennu chup baithi rahi sham ke 4 baje shobha neeche baithak mein apna kaam kar rahi thee tabhi door bel baji
shobha: apne aap se) lagta hai bablu ho ga
shobha ne gate khola to bahar bablu hathon mein do bag liye khada tha
shobha:aao andar ao
abhee bhee bahar bahut garmi thee bablu ka face ek dam lal ho chuka tha aur paseene se bheega hua tha andar ate hee shobha ne use baithak mein baitha diya aur khud uske liye pani lane ke liye chali gaye thodi der baad shobha wapis aye uske hath mein ek pani ka glass tha
bablu: shobha ke hath se glass lete hue) thanks
shobha: to tumhra duty time kiya hai
bablu: jee subah 9 baje se
shobha: aur raat ko kitne baje ate ho
bablu:jee kabhi –2 10 bhee baj jate hain agar mein kabhee let ho gaya to wahin station par hee so jaya karoonga
shobha:koi baat nahi 10 baje tak hamen koi problem nahi hai
bablu:jee aap bahut achhe hai mujhe aise hee malik makkan chahae the
shobha:tumhari age kitni hai
bablu:jee 19 saal
shobha:tumhare mata pita ke bare mein sun kar dukh hua itni si umr mein akele rehana bahut muskil hi
bablu:ab to addat se pad gaye hai
shobha:chalo mein tumhen tumhara kamran dikha doon maine use saaf kar diya tha
bablu:jee chale
aur bablu shobha ke peeche baithak ke sath wale room mein aa gaya
shobha:ye hai tumhara kamran ye
bablu:jee achha hai
shobha:tum apan samman jama lo aur aram kar lo mein jati hoon jab raat ka khana ban jayega mein tumhen bata doongee
bablu: jee theek hai (aur shobha ke jane ke baad bablu apna samman jamen lag gaya)
dosto bablu ek 19 saal ka bigda hua ladka tha uske pita ke railway mein achhe post par the aur railway mein accident ke douran unki mout ho gaye the bablu jab 25 saal ka tha tab uski maa ka dehant hua tha bina maa ke bablu galat sangat mein pad gaya wo ghar der se ata tha aur khoob daru cigrate peene laga gaya tha bablu ke pita ke gaon mein kafi jameen jyadad thee jo unhone theke par de rakhi thee lihaja paise ki koi kami nahi the ab pita ke marne ke baad bablu bilkul azaad ho chuka tha bablu saman set karne ke baad bed par let gaya aur uski ankh lag gaye udhar raat ke 8 baj chuke the shobha khana taiyaar kar chuki thee khana taiyaar karne ke baad wo neeche aye aur bablu ke room ke door ko knock kiya bablu awaz sun kar jaga aur door khola
bablu: jee wo mujhe neend aa gaye the
shobha:koi baat nahi khana ban gaye hai tum fresh ho kar neeche aa jao
bablu:aap chale mein ata hoon
shobha ke jane ke baad wo neeche bane bathroom mein ghus gaya aur fresh hokar oopar aa gaya
oopar Renu aur aman dono dinning table par baithe hue the aur shobha khana paros rahi thee
shobha: are ao bablu baitho mein khana hee daal rahi thee bacho ye bablu bhaiya hain ye neeche kiraye par aye hai chalo dono namste karo
Renu: (bablu ke kankhon se dekhate hue) namste
bablu:namste
aman: (muskarte hue) namste bhaiya
bablu sar hilet hue nasmte beta
uske baad charo khana khane lage Renu baar –2 khankhyon se bablu ke dekh rahi the bablu ek samrt handsome ladka tha rang ek dam gora par bablu ka dhayn khane mein tha
Renu man mein socte hue apni aap ko bahut handsome samjta hai kitni akad dikha raha hai
charon ne khana khatam kiya aur shobha bartan uthane lagi
bablu:achha aunty jee mein chalta hun
shobha: suno neeche bahut garmi hoti hai hum sab oopar chhat par khule mein cooler chala kar sote hain agar tum chaho to apna bistar oopar le ke aa sakte ho
bablu:jee aap theek kah rahi hai neeche to bahut garmi hai mein chhat par hee sounga
ye kah kar bablu neeche chala gaya shobha bartan saaf karne lage Renu aur aman tv dekh rahe the kaam khatam karne ke baad shobha chaat par bistar lagane ke le chali gaye tabhi bablu bhee oopar aa gaya aur apna bistar laga liya
shobha:achha kiya jo tum oopar aa gaye neeche to sach mein bahut garmi hai shobha bistar lagane ke baad neeche chali gaye aur bablu bistar bicha kar let gaya thodi der mein uski ankh lag gaye raat ke 12 baje jab uski ankh khule to usne dekha ki uske sath wale bistar par khali tha aur uske age wale bistar par Renu aur aman so rahe the bablu ne nazar ghuma kar doosri taraf dekha to shobha pass hee ek kone mein pairon ke bal baithi hui thee usne apni peticote ko kamar tak utha rakha tha ye dekh bablu ke lund mein halchal hone lagi suu su ke mutne ki awaz bablu ko aur pagal banane lagi shobha ke moti gaanD dekh bablu ka lund khada ho gaya chand ke roshani mein shobha ke badhi gaanD saaf dikh rahi thee mutne ke baad jaise hee shobha uthi to bablu ko shobha ke halki jhanton ke darshan ho gaye bablu ki halat aur kharab ho gaye shobha khadi ho gaye

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(ज़िद (जो चाहा वो पाया) running).
(वक्त का तमाशा running)..
(दास्तान ए चुदाई (माँ बेटी बेटा और किरायेदार ) complete) .. (सातवें साल की खुजली complete)
(एक राजा और चार रानियाँ complete).............(माया complete...)-----(तवायफ़ complete).............
(मेरी सेक्सी बहनें compleet)........(दोस्त की माँ नशीली बहन छबीली compleet)............(माँ का आँचल और बहन की लाज़ compleet)..........(दीवानगी compleet )....... (मेरी बर्बादी या आबादी (?) की ओर पहला कदमcompleet)........(मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग)........


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(कोई तो रोक लो)
(ननद की ट्रैनिंग compleet)..............( सियासत और साजिश)..........(सोलहवां सावन)...........(जोरू का गुलाम या जे के जी).........(मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन)........(कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास)........(काले जादू की दुनिया)....................(वो शाम कुछ अजीब थी)

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Post by jay » 14 Feb 2017 20:09

बबलू ने देखा उसने पैंटी नही पहनी हुई थी शोभा ने अपना पेटिकॉट ठीक किया और अपने बिस्तर पर आकर लेट गयी बबलू लेटे हुए शोभा को देख रहा था पर शोभा को पता नही था बबलू जगा हुआ है 5 मिनट बीत गये शोभा सोए नही थी और बबलू ये बात जानता था बबलू उठा और छत के उसी कोने की तरफ जाकर खड़ा हो गया जहाँ शोभा ने कुछ देर पहले मूता था बबलू ने अपने पयज़ामे को घुटनो के नीचे तक कर दिया शोभा ये सब देख रही थी बबलू उससे कुछ 5-6 फुट की दूरी पर था शोभा की आँखें बबलू के लंड पर अटक गयी शोभा ने आज कई सालों बाद किसी मर्द के लंड को देख रही थी और जो लंड उसने 7 साल पहले अपनी पति का देखा था बबलू का लंड उससे काफ़ी बड़ा और मोटा था शोभा का दिल जोरो से धड़कने लगा बबलू ने पेशाब करने के बाद जान बुझ कर अपने लंड को हाथ से तीन चार बार आगे पीछे किया गोरे लंड पर जैसे बबलू के हाथ चल रहे थे लंड की चमड़ी पीछे होती और गुलाबी सुपाडा शोभा के सामने आ गया आज कई सालों बाद सुधा की चूत में हलचल होने लगी बबलू ने अपना पाजामा पहना और वापिस अपने बिस्तर पर आकर लेट गया पयज़ामा लंड की जगह पर उभरा हुआ था शोभा करवट के बल लेटी हुई थी और बबलू पीठ के बल और शोभा की नज़र उभरे हुए लंड पर गढ़ी हुई थी कुछ देर बाद दोनो नींद के आगोश में समा गये सुबह जब बबलू की आँख खुली तो सब नीचे जा चुके थे बबलू ने अपना बिस्तर इकट्ठा किया और नीचे आ गया और फ्रेश होने के लिए चला गया जब बबलू नहा कर बाथरूम से निकल कर अपने कमरे के तरफ जा रहा था तब शोभा उसे नाश्ते के लिए ऊपेर बुलाने के लिए नीचे आई उस समय बबलू ने सिर्फ़ अंडरवेर पहना हुआ था बबलू का गोरा और गठीला बदन देख एक बार फिर से शोभा का दिल जोरों से धड़कने लगा उसकी आँखें बबलू के अंडरवेर के उभरे हुए उभार पर जम गयी बबलू ने इस बात को नोटीस किया

शोभा:नाश्ता तैयार है जल्दी ऊपर आ जाना
और जवाब सुने बिना ही शोभा वापिस चली गयी ऊपेर किचन में आकर शोभा सोचने लगी ये मुझे क्या हो गया है मुझे ऐसा नही सोचना चाहिए ये ग़लत बात है उसके बाद बबलू ऊपेर आकर नाश्ता करने लगा नाश्ता करने के बाद बबलू ने अपना पर्स निकाला और उसमे से 3000 रुपये निकाल कर शोभा को देते हुए बोला ये आप का अड्वान्स रेंट शोभा ने बबलू से पैसे ले लिए

बबलू:मैं आज शाम को लेट हो जाउन्गा आप मेरा खाना मेरे रूम में रख देना में 10 बजे तक आ जाउन्गा
और ये कह कर बबलू घर से निकल पड़ा स्टेशन पर सारा दिन उसके दिमाग़ में शोभा का गठीला बदन घूमता रहा काम कुछ ज़्यादा था 9 बजे काम ख़तम कर बबलू शराब के ठेके पर पहुँचा और एक हाफ लेकर पीने लगा जब बबलू घर पहुँचा तो रात के 10 बज चुके थे गेट बंद था उसने डोर बेल बजाई तो शोभा ने गेट खोला बबलू अंदर आके अपने रूम में चला गया शोभा ने गेट बंद किया और बबलू के रूम में आई
शोभा:में खाना गर्म करके लाती हूँ

बबलू:मैने आप से कहा था आप मेरा खाना मेरे रूम में रख दें आप तकलीफ़ क्यों करती है

शोभा:कोई बात नही

शोभा ऊपेर चली गयी जब वो वापिस आई उसके हाथ में खाने की थाली थी बबलू बेड पर बैठा हुआ था शोभा ने सामने रखे टेबल पर खाना रखा जैसे ही वो खाना रखने के लिए झुकी उसकी साड़ी का पल्लू का नीचे गिर गया और उसकी बड़ी-2 चुचियाँ बाहर आने को बेताब थी बबलू को एक और झटका लगा शोभा ने जल्दी से अपना पल्लू ठीक किया

शोभा:खाना खा कर अपना बिस्तर लेकर ऊपेर आ जाना
और शोभा वापिस चली गयी जब बबलू खाना खा कर ऊपेर गया तो सब सो चुके थी बबलू ने अपना बिस्तर लगाया और लेट गया बबलू को नींद नही आ रही थी शराब का नशा और अभी –2 हुए शोभा की चुचियों के दर्शन बबलू की नींद उड़ा चुके थे

बबलू ने दूसरी तरफ करवट बदल ली ताकि वो सो सके पर बार शोभा की गान्ड और चुचियाँ उसके जहन में आ रही थी तभी उसे पीछे से कुछ आहट हुई बबलू बिना हिले पड़ा रहा शोभा उठ कर फिर छत के कोने की तरफ जा रही थी जो बबलू से सिर्फ़ 4-5 फुट दूर था शोभा अपनी साड़ी उतार कर पेटिकोट और ब्लाउस में सोती थी शोभा ने कोने के पास जाकर अपने पेटिकोट को ऊपर कमर तक कर दिया उसकी बड़ी गान्ड एक बार फिर से बबलू के सामने थी और शोभा मूतने के लिए बैठ गयी मूतने की आवाज़ बबलू को और पागल बना रही थी उसका लंड एक दम खड़ा हो चुका था बबलू मन में सोच रहा था कि कहीं शोभा ये सब जान बुझ कर तो नही कर रही शोभा मूतने के बाद खड़ी हुई और अपने पेटिकोट को कमर से पकड़े रखा ताकि वो नीचे ना गिरे और उसने अपनी टाँगों को थोड़ा सा फैलाया और पेटिकोट के नीचले हिस्से से अपनी चूत को सॉफ करने लगी फिर उसने पेटिकोट को छोड़ दिया और पेटिकोट नीचे आ गया और शोभा वापिस बिस्तर पर आकर लेट गयी बबलू का बुरा हाल था


बबलू: मन में)साली दिन में शरीफ बनती है और अब अपनी गान्ड दिखा कर मेरे लंड को खड़ा कर रही है अब ज़रा में भी इसे अपने लंड के दर्शन करा दूं

बबलू उठ कर उसी कोने में चला गया और अपना पाजामा नीचे घुटनों तक कर लिया उसके बड़ा तना हुआ लंड हवा में झटके खाने लगा शोभा ये सब देख रही थी इसबार भी बबलू ने पेशाब करने के बाद अपने लंड को 4-5 बार हिलाया और वापिस अपने बिस्तर पर लेट गया बबलू चाहता था कि शोभा पहल करे ताकि उसके ऊपर कोई बात ना आए पर कुछ नही हुआ ऐसे ही अगला दिन भी बीत गया बबलू को कुछ समझ में नही आ रहा था इसलिए उसे इन्सब से बचने के लिए वहाँ से ध्यान हटा दिया


एक दिन बबलू को घर आते हुए रात के 10:30 बज गये जब शोभा ने गेट खोला तो बबलू शराब के नशे में धुत्त था बबलू अंदर आ गया और अपने कमरे में चला गया शोभा गेट बंद करके वापिस उसके रूम में आई

शोभा:इतनी देर क्यों लगा दी आज और कितनी शराब पी रखी है तुमने आगे से लेट मत आना
और शोभा खाना लाने चली गयी खाना देकर शोभा वापिस चली गयी बबलू ने खाना खाया और वहीं सो गया और सुबह नाश्ता किए बिना ही अपने काम पर चला गया उस दिन रेणु और अमर का स्कूल स्टार्ट हो चुका था 3 दिन ऐसे ही चलता रहा बबलू रोज रात को लेट आता शोभा उसे बहुत समझाती पर वो कोई बात ना मानता एक दिन रात को बबलू दारू पीकर वहीं स्टेशन पर ही सो गया अगले दिन जब उठा तो उसका काम में मन नही लग रहा था उधर शोभा बबलू के लिए परेशान थी

बबलू अपने इंचार्ज से छुट्टी लेकर घर आ गया जब शोभा ने गेट खोला तो वो उसपर बरस पड़ी

शोभा: कहाँ था तू कल आया क्यों नही शराब पी कर कहीं गिर गया था ऐसे यहाँ नही चले गा अपनी उम्र तो देखो क्या हालत बना रखी है घर पर कोई नही था रेणु और अमर स्कूल गये हुए थे शोभा ने उस वक्त सफेद रंग का ब्लाउस और पेटिकोट पहन रखा था उसकी चुचियाँ काफ़ी हद तक बबलू को नज़र आ रही थी शोभा की बातों को अनसुना करते हुए वो सीधा अपने रूम में आ गया और पंखे का स्विच ऑन किया पर लाइट नही थी शोभा उसके पीछे आई
शोभा:मेरी बात का जवाब नही दिया देख कैसी हालत बना रखी है

बबलू: आप यहाँ से जाए मेरा मूड ठीक नही है
और ये कह कर बबलू छत पर आ गया बादल आसमान पर छाए हुए थी अचानक तेज बारिश शुरू हो गयी शोभा उसके पीछे आ गयी दोनो छत पर भीग गये

शोभा:कुछ बात है तो बता ना कहाँ था कल

बबलू: अभी भी दोनो बारिश मे खड़े थे और पूरी तरह भीग चुके थे ) तुम्हे इन्सब से क्या मतलब तुम जाओ यहाँ से

शोभा: ऐसे कैसे जाऊ कल मुझे तुम्हारी बहुत फिकर हो रही थी आख़िर बात क्या है
शोभा का ब्लाउस और पेटिकोट भीग कर उसके बदन से चिपके हुए थे उसकी चुचियाँ और निपल्स सॉफ दिखाई दे रहे थे

बबलू से बर्दास्त करना मुस्किल हो रहा था बबलू दूसरी तरफ घूम गया शोभा ने उसको बाजू से पकड़ कर झटके से सीधा किया
शोभा; चुप क्यों है

बबलू: बबलू से अब बर्दास्त नही हो रहा था दोनो छत पर बने स्टोर रूम के साथ खड़े थे बबलू ने अपने बाजू को झटकते हुए उससे अपना हाथ छुड़ा लिया और शोभा को धक्का देकर स्टोर रूम की दीवार से सटा दिया

बबलू:तू क्या मेरी बीवी है साली जो मुझसे इतने सवाल जवाब कर रही है

शोभा;क्या कहा तुमने (और शोभा ने उसे एक चाँटा झाड़ दिया)

बबलू गुस्से से लाल हो गया और उसने आगे बढ़ कर शोभा के कंधों से पकड़ कर दीवार से सटा दिया और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए शोभा ने उसे ज़ोर लगा कर धक्का दिया और एक चाँटा बबलू के गाल पर झाड़ दिया

बबलू की नज़रें शोभा की चुचियों पर गढ़ी हुई थी जो सॉफ दिख रही थी जब शोभा को अपनी हालत का पता चला तो उसने सर झुका लिया और स्टोर रूम के अंदर आ गयी बबलू भी उसके पीछे अंदर आ गया शोभा ने अपने दोनो हाथों से अपनी चुचियों को ढक रहा था और बबलू उसके पीछे खड़ा था शोभा ने सोचा अगर उसकी चुचियाँ सॉफ दिखाई दे रही है तो उसका पेटिकॉट भी बहुत पतला है और उसने नीचे पैंटी भी नही पहन रखी है ये सोच कर उसका दिल जोरों से धड़कने लगा बबलू शोभा के करीब आने लगा

शोभा:वहीं रुक जाओ ये ठीक नही है मुझसे बुरा कोई नही होगा अगर एक कदम भी
और शोभा वहीं बोलते-2 रुक गयी क्योंकि बबलू उसके साथ एक दम सट गया था उसे अपने चुतड़ों की दर्रार में कोई सख़्त चीज़ की चुभन महसूस हो रही थी और शोभा जानती थी कि ये गरम अहसास बबलू के लंड का है बबलू ने शोभा को दोनो हाथों से कंधो से पकड़ लिया शोभा एक दम घबरा कर आगे हो गयी और वो स्टोर रूम के अंदर की दीवार के बिल्कुल पास थी और ना ही आगे बढ़ने की जगह थी

शोभा: देखो तुम जाओ यहाँ से ये ठीक नही में शोर मचा दूँगी

थोड़ी देर तक कोई हरकत नही हुई शोभा का दिल जोरों से धड़क रहा था उसके दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया था शोभा ने डरते हुए पीछे देखा जैसे ही उसने पीछे देखा तो वो मंज़र देख शोभा का दिल और जोरों से धक-2 करने लगा पीछे बबलू अपना 8 इंच का लंड हाथ में लिए खड़ा था जिसकी नसें एक दम फूली हुई थी शोभा ने अपनी नज़रें आगे कर ली

इससे पहले के शोभा कुछ बोलती बबलू फिर से उसके पीछे आ गया अब शोभा के आगे बढ़ने के जगह नही थी बबलू उसके पीछे से उसके साथ चिपक गया और अपने दोनो हाथ उसकी कमर से आगे करते हुए उसके पेट पर रख दिए और पीछे से ब्लाउस के ऊपेर की खुली पीठ पर अपने होंठ रख दिए और चूमने लगा


शोभा:अहह क्या कर रहे हो छोड़ दूओ उंह

शोभा ने विरोध किया लेकिन बबलू ने उसे कस के पकड़ा हुआ था शोभा जितना आगे हो सकती थी वो आगे सरक गयी अब वो दीवार के साथ सट गयी थी बबलू अपने हाथों को ऊपेर की और लेजाने लगा पर शोभा ने अपनी चुचियों को हाथों से ढक रखा था बबलू की नज़र पेटिकोट के बाहर लटक रहे नाडे पर पड़ी बबलू ने बिजली की गति से नाडे को पकड़ कर खींच दिया इससे पहले कि शोभा अपने हाथों से पेटिकोट को पकड़ती बबलू ने शोभा के दोनो हाथों को पकड़ लिया और ढीला होते ही पेटिकोट सरकता हुआ नीचे गिर गया अब शोभा नीचे से बिल्कुल नंगी थी बबलू ने एक हाथ से शोभा के हाथ को छोड़ दिया और उसे दीवार के साथ सटा दिया अब शोभा बबलू और दीवार के बीच में धँस गयी थी बबलू ने एक हाथ से अपने लंड को पकड़ा और थोड़ा सा नीचे झुक कर शोभा की चूत में घुसाने के लिए आगे करने लगा पर शोभा ने अपनी टाँगों को भींच रखा था जिससे बबलू अपने लंड को उसकी चूत के पास नही ले जा पा रहा था शोभा अब भी विरोध कर रही थी बबलू ने अपने लंड को शोभा की गान्ड की दरार में रगड़ने लगा और हाथ से पकड़ लंड के सुपाडे को शोभा की गान्ड के छेद पर टिका दिया


शोभा:ओह अहह शोभा के बदन ने झटका लिया उसके बदन में बिजली दौड़ गयी अपनी गान्ड के छेद पर गर्म लंड के सुपाडे को महसूस करके उसके अंदर हल चल होने लगी बबलू साथ में उसकी पीठ को चाट रहा था करीब 5 मिनट तक बबलू अपने लंड के सुपाडे को शोभा की गान्ड के छेद पर रगड़ता रहा शोभा से अब बर्दास्त नही हो रहा था उसकी टाँगें ढीली पड़ने लगी और खुद ब खुद खुलने लगी बबलू ने मोका देखते हुए नीचे झुक कर लंड को पकड़ कर शोभा की चूत के छेद पर टिका दिया और धीरे –2 अंदर करने लगा जैसे ही बबलू का लंड शोभा की चूत के छेद पर लगा उसके बदन में करेंट दौड़ गया एक ज़ोर के झटके के साथ उसका बदन काँप गया और जिससे उसके बदन ने झटका खाया बबलू के लंड का सुपाडा शोभा की चूत की फांकों को फैलाता हुआ अंदर घुस गया

शोभा: अहह नही बब्बब्ब यीयीईयी उम्ह्ह्ह्ह्ह

इससे पहले कि शोभा और कुछ बोलती बबलू ने दोनो हाथों से शोभा के चुतड़ों को पकड़ कर एक और ज़ोर दार झटका मारा लंड चूत की दीवारों को फैलाता हुआ अंदर घुस गया और सीधा बच्चेदानी से जा टकराया


शोभा:उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अहह शोभा की आँखें बंद हो गयी उसने अपने दोनो हाथों की हथेलियों को दीवार से टिका दिया बबलू ने धीरे से अपने लंड को सुपाडे तक बाहर निकाला और फिर से धीरे –2 अंदर करने लगा शोभा की चूत में पानी आने लगा लंड फिसलता हुआ अंदर चला गया बबलू ने फिर से अपने लंड को सुपाडे तक बाहर निकाला पर इसबार उसने वापिस धक्का नही मारा लंड का सुपाडा चूत के अंदर था शोभा पूरी तरह गरम हो चुकी थी बबलू ने शोभा की नेक पर पीछे चूमना शुरू कर दिया शोभा की चूत बबलू के लंड को अपनी गहराइयों तक अंदर लेने के लिए मचल रही थे इसलिए शोभा मस्ती में आकर धीरे अपनी गान्ड को पीछे की तरफ करने लगी लंड फिर से अंदर जाने लगा जैसे ही लंड फिर से अंदर चला गया शोभा ने अपने होंठो को दाँतों में भींच लिया और उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह की आवाज़ उसकी मस्ती को बयान कर गयी बबलू को पता चल चुका था कि अब शोभा पूरी तरह गरम हो चुकी है बबलू ने अपने दोनो हाथ आगे करके शोभा की 38 साइज़ की चुचियों को पकड़ लिया और उन्हे मसलने लगा शोभा अब बिल्कुल चुप खड़ी थी उसका विरोध ख़तम हो चुका था बबलू ने धीरे-2 शोभा के ब्लाउस के हुक्स खोलने चालू कर दिए कुछ ही पलों में शोभा की चुचियाँ ब्लाउस से बाहर आ गयी 38 साइज़ की चुचियों पर काले निपल्स एक दम मोटे-2 और तने हुए थी बबलू शोभा के निपल को उंगलियों के बीच में मसलने लगा



शोभा की मस्ती का कोई ठिकाना नही था बबलू ने धीरे-2 धक्के लगाने शुरू कर दिए लंड शोभा की चूत के अंदर बाहर होने लगा बबलू की रफ़्तार धीरे-2 बढ़ने लगी शोभा हल्की आह आह की आवाज़ निकालने लगी पूरे कमरे में फतच-2 की आवाज़ गूँज रही थी बाहर बहुत तेज बारिश हो रही थी शोभा अब झड़ने के बिल्कुल करीब थी शोभा ने अपने पैरो को खोल लिया और बबलू तबडतोड़ धक्के मारने लगा शोभा का बदन ऐंठने लगा और वो अहह अहह करती हुई झड गयी कुछ ही धक्को के बाद बबलू ने शोभा की चूत को अपने वीर्य से भर दिया शोभा आज कई सालों बाद झड़ी थी उसके चहरे के भाव उसकी संतुष्टि को बयान कर रहे थी बबलू ने लंड को चूत से बाहर निकाला जो पूरी तरह से भीगा हुआ था और बिना देर किए बबलू ने पेंट पहनी और नीचे चला गया शोभा कुछ देर वैसे ही खड़ी रही फिर वो सीधी हुई और अपनी जाँघो को फैला कर देखने लगी उसकी चूत से पानी निकल कर उसकी जाँघो तक फैला हुआ था उसकी चूत के होंठ अभी भी खुले हुए थे शोभा ने वहाँ पड़े एक पुराने कपड़े के टुकड़े को उठाया और अपनी जाँघो को फैला कर अपनी चूत और जांघे सॉफ की फिर उसने पेटिकोट और ब्लाउस पहना और नीचे आ गयी और नीचे आने के बाद बाथरूम में घुस गयी और कपड़े उतार कर नहाने लगी नहाने के बाद उसने दूसरी साड़ी पहन ली और बेड पर लेट गयी


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shobha:nasta taiyaar hai jaldi oopar aa jana
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bablu:mein aaj sham ko let ho jaonga aap mera khana mere room mein rakh dena mein 10 baje tak aonga
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shobha:mein khana garm karke lati hun
bablu:maine aap se kaha tha aap mera khaana mere room mein rakh de aap takleef kyon karte hai
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shobha oopar chali gaye jab wo wapis aye uske hath mein khane ke thali thee bablu bed par baitha hua tha shobha ne samne rakhe table par khana rakha jaise hee wo khana rakhen ke liye jhuki uski saree ka palu ka neeche gir gaya aur uski badi-2 chuchiyaan bahar ane ko betab thee bablu ko ek aur jhataka laga shobha ne jaldi se apna palu theek kiya
shobha:khana kha kar apna bistar lekar oopar aa jana
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bablu: man mein)saali din mein sharif banti hai aur ab apni gaanD dikha kar mere lund ko khada kar rahi hai ab jara mein bhee ise apne lund ke darshan kara doon
bablu uth kar use kone mein chala gaya aur apna payjam neeche ghunto tak kar leya uske bada tana hua lund hawa mein jhatke khane laga shobha ye sab dekh rahi thee isbaar bhee bablu ne peshab karne ke baad apne lund ko 4-5 baar hiliya aur wapis apne bistar par let gaya bablu chatha tha ki shobha pahal karne tanki uske oopar koi baat na aye par kuch nahi hua asie hee agla din bhee beet gaya bablu ko kuch samaj mein nahi aa raha tha isliye use insab se bachane ke liye wahan se dhayan hatha diya ek din bablu ko ghar ate hue
raat ke 10:30 baj gaye jab shobha ne gate khola to bablu sharab ke nashe mein dhut tha bablu andar aa gaya aur apne kamre mein chala gaya shobha gate band karke wapis uske room mein aye
shobha:itni der kyon laga dee aaj aur kitni sharab pee rakhi hai tumne age se let mat anna
aur shobha khana lane chali gaye khana dekar shobha wapis chali gaye bablu ne khana khaya aur wahin so gaya aur subah nasta kiye bina hee ape kaam par chala gaya us din Renu aur amar ka school start ho chuka tha 3 din aise hee chalta raha bablu roj raat ko let ata shobha use bahut samjati par wo koi baat na manta ek d4 din raat ko bablu daru peekar wahin station par hee so gaya agle din jab utha to uska kaam mein man nahi laga raha tha udhar shobha bablu ke liye pareshan thee bablu ne apne incharge se chuti lekar ghar aa gaya jab shobha ne gate khola to wo uspar baras padi
shobha: kahan tha tun kal aya kyon nahi sharab pee kar kahin gir gaya aise yahan nahi chale ga apni umr to dekho kiya halat bana rakhi hai ghar par koi nahi tha Renu aur amar school gaye hue thee shobha ne us wqt safed rang ka blouse aur peticote pehan rakha tha uski chuchiyaan kafi had tak bablu ko nazar aa rahi thee shobha ke baton ko ansuna karte hue wo seedha aapne room mein aa gaya aur pankhe ka switch on kiya parlight nahi thee shobha uske peeche aye
shobha:meri baat ka jawab nahi diya dekh kaise halat bana rakhi hai
bablu: aap yahan se jaye mera mood theek nahi hai
aur ye keh kar bablu chhat par aa gaya badal assamn par chae hue thee achank tej barish shuru ho gaye shobha uske peeche aa gaye dono chhat par bheeg gaye
shobha:kuch baat hai to bata na kahan tha kal
bablu: abhee bhee dono barish meinkhade the aur poori tarah bheeg chuke thee ) tumehn insab se kiya matlab tum jao jahan se
shobha: aise kasie jaon kal mujhe tumhari bahut fikar ho rahi thee akhir baat kiya hai
shobha ka blouse aur peticote bheeg kar uske badan se chipke hue the uske chuchiyaan aur nipples saaf dikahe de rahe the bablu se bardaast karna muskil ho raha tha bablu doosri taraf ghoom gaya shobha ne uski baju se pakad kar jhatke se seedha kiya
shobha; chup kyon hai
bablu: bablu se ab bardaast nahi ho raha tha dono chhat par bane store room ke sath khade the bablu ne apne baju ke jahtakte hue use apna hath chura liya aur shobha ko dhakka dekar store room ki diwar se sata diya
bablu:tun kiya meri biwi hai saali jo mujhse itne sawal jawab kar rahi hai
shobha;kiya kaha tumen (aur shobha ne use ek chaanta jhad diya)
bablu gusse se lal ho gya aur usne age pad kar shobha ke kandhon se pakad kar diwar se sata diya aur uske hontho par apne honth rakh diya shobha ne use jor laga kar dhakka diya aur ek channta bablu ke gaal par jhad diya
bablu ke nazren shobha ke chuchiyon par gadhi hui thee jo saaf dikh rahi thee jab shobha ko apni haalt ka pata chala to usne sar jhuka liya aur store room ke andar aa gaye bablu bhee uske peeche andar aa gaye shobha ne apne dono hathon se apne chuchiyon ko dhak raha tha aur bablu uske peeche khada tha shobha ne socha agar uski chuchiyaan saaf dikhai de rahi ha to uska peticote bhee bahut patla hai aur usne neeche painty bhee nahi pahan rakhi hai ye soch kar uska dil joron se dhadakne laaga bablu shobha ke kareeb ane laga
shobha:wahin ruk jao ye theek nahi hai mujhe bura koi nahi hoga agar ek kadam bhee
aur shobha wahin bolte-2 ruk gaye kyonki bablu uske sath ek dam sat gaya tha use apne chutron ke daraar mein koi sakht cheez ki chuban mahsoos ho rahi thee aur shobha janti thee ki ye garam ahsaas bablu ke lund ka hai bablu ne shobha ko dono hathon se kandho se pakad liya shobha ek dam ghbra kar age ho gaye aur wo store room ke andar ki diwar ke bilkul pass thee aur na hee agee badhane ki jagah thee
shobha: dekho tum jao yahan se ye theek nahi mein shor macha doongi
thodi der tak koi harkat nahi hui shobha ka dil joron se dhadak raha tha uska dimag ne kaam karna band kar diya tha shobha ne darte hue peeche dekha jaise hee usne peeche dekha to wo manzar dekh shobha ka dil aur joron se dhak-2 karne laga peeche bablu apna 8 inch ka lund haath mein liye khada tha jiski nasen ek dam phulli hui thee shobha ne apni nazren age kar lee isse pahle ke shobha kuch bolti bablu phir se uske peeche aa gaya ab shobha ke age badhane ke jagah nahi thee bablu uske peeche se uske sath chipak gaya aur apne dono hath uski kamar se aage karte hue uske pet par rakh diye aur peeche se blouse ke oopar ke khule peeth par apne honth rakh diye aur choomne laga
shobha:ahhhhhhh kiyaa kar rahe ho chod dooo umhhhhhh
shobha ne virodh kiya lekin bablu ne use kas ke pakada hua tha shobha jitna age ho sakti thee wo age sarak gaye ab wo diwar ke sath sat gye thee bablu ne apne hathon ko oopar ke aur lejane laga par shobha ne apni chuchiyon ko hathon se dhak rakha tha bablu ki nazar peticote ke bahar latak rahe nadhe par padi bablu ne bijli ki gati se nadhe ko pakad kar kheench diya ise pahle ke shobha apne hathon se peticote ko pakadti bablu ne shobha ke dono hathon ka pakad liya aur dheela hote hee peticote sarkta hua neeche gir gaya ab shobha neeche se bilkul nangi thee bablu ne ek hath se shobha ke hath ko chod diya aur use diwar ke sath sata diya ab shobha bablu aur diwar ke beech mein dhans gaye thee bablu ne ek hath se apne lund ko pakada aur thoda sa neeche jhuk kar shobha ke choot mein ghusane ke liye age karne laga par shobha ne apni tangon ko beench rakha tha jise bablu apne lund ko uski choot ke pass nahi le ja pa rha tha shobha ab bhee virodh kar rahi thee bablu ne apne lund ko shobha ke gaanD ki daraar mein ragadne lga aur hath se pakad lund ke supaaDaa ko shobha ke gaanD ke ched par tika diya
shobha:ohhhhh ahhhhhhhhhh shobha ke badan ne jhatka liya uske badan mein bijali daud gaye apni gaanD ke ched par garm lund ke supaaDaa ko mahsoos karke uske andar hal chal hone lagi bablu sath mein uski peeth ke chaat raha tha kareeb 5 min tak bablu apne lund ke supaaDaa ko shobha kee gaanD ke ched par ragadta raha shobha se ab bardaast nahi ho raha tha uski tangen dheele padane lagi aur khud ba khud khulane lagi bablu ne moka dekhate hhue neeche jhuk kar lund ko pakad kar shobha ke choot ke ched par tika diya aur dheere –2 andar karne laga jaise hee bablu ka lund shobha ki choot ke ched par laga uska badan mein current doud gaya ek jor ke jhatke ke sath uska badan kaanp gaya aur jise uske badan ne jhataka khaya bablu ke lund ka supaaDaa shobha ke choot ke phankon ko phailta hua andar ghus gaya
shobha: ahhhhhhhhh nahi babbb yeeeeeee umhhhhh
isse pahle ki shobha aur kuch bolti bablu ne dono hathon se shobha ke chutron ko pakad kar ek aur jor dar jhatka mara lund choot ki diwaron ko phailata hua andar ghus gaya aur seedha bachhedani se ja takrya
shobha:umhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhhhhhh shobha ki ankhen band ho gaye usne apni dono hathon ke hathelyon ko diwar se tika diya bablu ne dheere se apna lund ko supaaDaa tak bahar nikala aur phir se dheere –2 andar karne laga shobha ke choot mein pani aane laga lund phislata hua andar chala gaya bablu ne phir se apne lund ko supaaDaa tak bahar nikala par isbaar usne wapis dhakka nahi mara lund ka supaaDaa choot ke andar tha shobha poori tarah garam ho chuki thee bablu ne shobha ke neck par peeche choomna shuru kar diya shobha ke choot bablu ke lund ko apni gaharaaiyon tak andar lene ke liye machal rahi thee isliye shobha masti mein aakar dheere apni gaanD ko peeche ke taraf karne lagi lund phir se andar jane laga jaise hee lund phir se andar chala gaya shobha ne apne hontho ko danton mein bheench liya aur umhhhhhhhhhh ki awaz uski masti ko bayan kar gayee bablu ko pata chal chuka tha ki ab shobha poori tarah garam ho chuki hai bablu ne apne dono hath age karke shobha ke 38 size ki chuchiyon ko pakad liya aur use maslane laga shobha ab bilkul chup khadi thee uska virodh khatam ho chuka tha bablu ne dheere-2 shobha ke blouse ke hooks kholane chalu kar diye kuch hee palon mein shobha ke chuchiyon blouse se bahar aa gaye 38 size ke chuchiyaan par kale nipples ek dam mote-2 aur tane hue thee bablu shobha ke nipple ko ungliyon ke beeche mein maslane laga shobha ke masti ka koi tikana nahi tha bablu ne dheere-2 dhakken lagane shuru kar diye lund shobha ke choot ke andar bahar hone laga bablu ke raftar dheere-2 badhane lage shobha halki ahhh ahhh ki awaz nikaalne lagi poore kamre mein fatch-2 ki awaz gunj rahi thee bahar bahut tej barish ho rahi thee shobha ab jhadne ke bilkul kareeb thee shobha ne apne parion ko khol liya aur bablu taabaD tod dhakke maare laga shobha ka badan ainthne laga aur wo ahhhhhhhhh ahhhhhhhhhh karti hui jhad gaye kuch hee dhakon ke baad bablu ne shobha ke choot ko apne veery se bhar diya shobha aaj kai saalon baad jhadi thee uske chahre ke bhaav uski santushti ko bayan kar rahe thee bablu ne lund ko choot se bahar nikala jo poori tarah se bheega hua tha aur bina der kiye bablu ne pent pehani aur neeche chala gaya shobha kuch der waise hee khadi rahi phir wo seedhe hui aur apni jaangho ko phaila kar dekhane lagi uski choot se pani nikal kar uski jaangho tak phaila hua tha uski choot ke honth abhee bhee khule hue the shobha ne wahan pade ek purane kapde ke tukde ko uthaayaa aur apni jaangho ko phaila kar apni choot aur jaanghe saaf kee phir usne peticote aur blouse pehana aur neeche aa gaye aur neeche ane ke baad bathroom mein ghus gaye aur kapde utar kar nahane lagi nahane ke baad usne doosre saree pehan lee aur bed par let gaye

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(ज़िद (जो चाहा वो पाया) running).
(वक्त का तमाशा running)..
(दास्तान ए चुदाई (माँ बेटी बेटा और किरायेदार ) complete) .. (सातवें साल की खुजली complete)
(एक राजा और चार रानियाँ complete).............(माया complete...)-----(तवायफ़ complete).............
(मेरी सेक्सी बहनें compleet)........(दोस्त की माँ नशीली बहन छबीली compleet)............(माँ का आँचल और बहन की लाज़ compleet)..........(दीवानगी compleet )....... (मेरी बर्बादी या आबादी (?) की ओर पहला कदमcompleet)........(मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग)........


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(कोई तो रोक लो)
(ननद की ट्रैनिंग compleet)..............( सियासत और साजिश)..........(सोलहवां सावन)...........(जोरू का गुलाम या जे के जी).........(मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन)........(कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास)........(काले जादू की दुनिया)....................(वो शाम कुछ अजीब थी)

vnraj
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Re: दास्तान ए चुदाई (माँ बेटी बेटा और किरायेदार )

Post by vnraj » 15 Feb 2017 20:09

नई कहानी के लिए धन्यवाद दोस्त

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jay
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Re: दास्तान ए चुदाई (माँ बेटी बेटा और किरायेदार )

Post by jay » 15 Feb 2017 22:08

vnraj wrote:नई कहानी के लिए धन्यवाद दोस्त

thanks bro

keep reading
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