वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास )

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Dolly sharma
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Re: वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास )

Post by Dolly sharma » 07 Nov 2017 13:58

Mast story h please update

Re: वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास )

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xyz
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Re: वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास )

Post by xyz » 07 Nov 2017 22:17

nice update

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Ankit
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Re: वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास )

Post by Ankit » 08 Nov 2017 09:44

superb update

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rajaarkey
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Re: वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास )

Post by rajaarkey » 09 Nov 2017 18:29

Dolly sharma wrote:
07 Nov 2017 13:58
Mast story h please update
xyz wrote:
07 Nov 2017 22:17
nice update
Ankit wrote:
08 Nov 2017 09:44
superb update
shukriya dosto
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Re: वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास )

Post by rajaarkey » 09 Nov 2017 18:30


हॉस्पिटल में आ कर शाज़िया और नीलोफर ने एक साथ एक ही दिन अपने अपने भाइयों के बच्चो को अपनी कोख से जनम दिया.

जमशेद और नीलोफर के लिए बेटा होने की खबर तो बहुत ही अच्छी थी. जिसे सुन कर जमशेद और नीलोफर दोनो बहन भाई के जिस्म-ओ-जान में खुशी की एक लहर दौड़ गई.

मगर नीलोफर और जमशेद से ज़्यादा हैरान कन और खुशी की खबर शाज़िया और ज़ाहिद की मुंतज़ीर थी.

शाज़िया और ज़ाहिद ने चूँकि अल्ट्रा साउंड के ज़रिए इस बात का पहले पता नही लगाया था. कि उन का होने वाला बच्चा, लड़का हो गा या लड़की.

इसी लिए डेलिवरी के बाद शाज़िया के यहाँ जब ट्विन बच्चो,एक लड़का और एक लड़की ने एक साथ जनम लिया.

तो शाज़िया,ज़ाहिद और रज़िया बीबी के साथ साथ नीलोफर और जमशेद की खुशी की कोई इंतिहा ना रही.

अपने जुड़वाँ बच्चो का सुन कर ज़ाहिद तो खुशी के आलम में झूम उठा. और ज्यों ही डेलिवरी रूम से हॉस्पिटल के कमरे में शाज़िया की वापसी हुई.

तो ज़ाहिद ने सब घर वालों को कमरे से बाहर निकाल कर अपनी बहन शाज़िया के चेहरे,होंठो और दूध बड़े मम्मो पर अपने होंठो से अपने प्यार की बरसात कर दी.

“ओह तुम ने मुझे इतनी बड़ी खुशी दी है, मुझे समझ नही आ रहा कि में किस मुँह से तुम्हारा शुक्रिया अदा करूँ माइ जान” ज़ाहिद ने जोशे जज़्बात में दीवाना वार अपनी बेगम बहन के जिस्म पर अपने गरम होन्ट रगड़ते हुए कहा.

“एक औरत उस वक्त तक मुकम्मल औरत नही बनती, जब तक वो बच्चा नही पेदा कर लेती,इसीलिए आप को नही.बल्कि मुझे आप का शूकर गुज़ार होना चाहिए, कि आप ने अपने लंड का बीज डाल कर, मुझे एक मुकम्मल औरत का दर्जा दिया है मेरे सरताज” अपने भाई शोहर के वलिहाना प्यार को पा कर शाज़िया भी खुशी से खिल उठी. और ज़ाहिद के गरम होंठो में अपनी लंबी ज़ुबान फेरती हुए बोली.

फिर एक दिन हॉस्पिटल में रहने के बाद और शाज़िया अपने अपने घर वापिस आ गईं.

शाज़िया ने घर आ कर देखा कि ज़ाहिद ने बच्चो के कमरे को टाय्स से पूरा भर दिया था.

अपने खाविंद भाई का अपने बच्चों से ये प्यार देख कर शाज़िया की फुद्दि में आग लग गई.

शाज़िया का दिल तो चाहा की अपनी शलवार खोल कर अपने भाई का मोटा लौडा अपनी फुद्दि में दिलवा ले.

मगर ताज़ा ताज़ा एक नही दो दो बच्चो को अपनी तंग चूत से बाहर निकालने की वजह से शाज़िया की चूत अभी इस हालत में नही थी. कि वो अभी अपने भाई ज़ाहिद के मोटे लंड को अपने अंदर ले सके.

इसीलिए ज़ाहिद की तरह शाज़िया के लिए भी अब सबर करने के सिवा को चारा नही था.

दिन गुज़रते गये और शाज़िया की तरह ज़ाहिद भी अब उस वक्त के इंतिज़ार में दिन अपनी उंगलियों पर गिन रहा था.

जब उस की बहन/बीवी शाज़िया चिली से नहा कर पाक सॉफ हो गी. और वो पहले की तरह एक बार फिर जोश और जज़्बे के साथ अपनी बहन शाज़िया की चूत को अपने मोटे लंड से चोद सके गा.

नीलोफर और शाज़िया की डेलिवरी के बाद रज़िया बीबी ने ना सिर्फ़ नीलोफर और शाज़िया के बच्चो की काफ़ी टेक केर की.

बल्कि साथ ही साथ ज़ाहिद के मना करने के बावजूद हर रोज़ उन सब के लिए अपने हाथ से खाना वगेरा भी पकाती रही.

रज़िया बीबी चूँकि ज़ाहिद और शाज़िया समेत इस से पहले भी 5 बच्चो की माँ बन चुकी थी.

इसीलिए शाज़िया और नीलोफर के मुक़ाबले में रज़िया बीबी माँ बनने के मामले में अब एक एक्सपर्ट का दर्जा रखती थी.

ये ही वजह थी.कि खुद प्रेगेनेंट होने के बावजूद रज़िया बीबी ने नीलोफर और अपनी बेटी शाज़िया की घर वापसी के बाद काफ़ी तामिर दारी की.

शाज़िया को माँ बनने अब एक महीने से कुछ ज़्यादा टाइम होने गया था. और इस दोरान उस के पेट पर लगने वाला डेलिवरी का कट भी ठीक हो चुका था.

“आज क्यों न ज़ाहिद के घर वापिस आने से पहले ही में गुसल (शवर) कर के पाक हो जाऊ,और काम से लोटने पर अपने जानू को सर्प्राइज़ दूं” अपने बिस्तर पर लेट कर अपने बच्चो को अपने भारी मोटे मम्मो से अपना दूध पिलाने के बाद शाज़िया ने अपनी गरम चूत पर हाथ रखते हुए सोचा.

ये सोच जेहन में आते ही शाज़िया ने अपनी अम्मी को आवाज़ दी “अम्मी आ कर मेरे हाथों और पैरों को थोड़ी मेहन्दी तो लगा दो प्लीज़”.

“क्यों ख़ैरियत तो है,आज मेहन्दी क्यों लगवा रही हो शाज़िया” रज़िया बीबी शाज़िया की आवाज़ पर उस के कमरे में आई. और हैरान हो कर अपनी बेटी की तरफ देखते हुआ पूछा.

“कोई खास बात नही, वैसे आज एक अरसे के बाद फिर से अपने आप को सवारने का शौक चढ़ गया है मुझे ” शाज़िया ने अपनी अम्मी को भी असल बात नही बताई.


और फिर उधर ही बैठ कर अपनी अम्मी से अपने हाथों और पैरो पर मेहन्दी लगवाने लगी.
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