वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास )

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rajaarkey
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Re: वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास )

Post by rajaarkey » 30 Aug 2017 19:17

जब कि नीचे से ज़ाहिद का लंड उस की निक्कर में अब पूरी तरह तन कर ऐसे खड़ा हो कर अपनी अम्मी की चूत की तरफ इशारा कर रहा था.

जैसे लंड ना हुआ सड़क (रोड) के किनारे पर लगा हुआ तीर (आरो) का वो निशान हो गया. जो रास्ते में चलने वालों को सीधा या सामने जाने का रास्ता दिखाता है.

“ हाईईईईईईईईई में सदक़े जाऊ अपनी अम्मी के, जो खुद चल कर मेरे साथ सुहाग रात मनाने आई हैंन्नणणन्” ज़ाहिद ने अपनी अम्मी के होंठो पर अपने दाँत काटते हुए कहा

“हां तुम्हारे मोटे सख़्त लंड से एक बार चुद कर तुम्हारी माँ अब इतनी मजबूर हो चुकी है, कि अब मुझे खुद चल कर अपने ही सगे जवान बेटे से अपनी सुहाग रात मनाने के लिए आना पड़ा, मेरे बच्चे” ये कहते हुए रज़िया बीबी ने अपने सामने खड़े ज़ाहिद को एक धक्का दिया. तो ज़ाहिद एक दम अपने पीछे पड़े हुए बिस्तर पर जा बैठा.

ज़ाहिद के बिस्तर पर बैठते ही रज़िया बीबी फिर आगे बढ़ी.और बिस्तर पर बैठे अपने बेटे के सामने खड़े हो ज़ाहिद की सख़्त जवान छाती पर अपना हाथ रखा.



इस के साथ ही रज़िया बीबी फिर दुबारा से अपने बेटे के मुँह में अपना मुँह डाल कर अपने बेटे ज़ाहिद के होंठो से उस का रस पीने लगी.

अपनी अम्मी के गुदाज होंठो को चुसते चुसते ज़ाहिद अपने हाथों को अपनी अम्मी की कमर के पीछे ले गया. और किस्सिंग के दौरान ही ज़ाहिद ने अपनी अम्मी के ब्रेज़ियर की हुक खोल दी.

ज्यों ही ज़ाहिद ने अपनी अम्मी के ब्रेजियर की हुक खोली. तो इस के साथ ही रज़िया बीबी भी अपने हाथों को अपने ब्रेजियर पर लाई. और उस ने एक ही झटके में अपने ब्रेज़ियर को अपने मोटे मम्मो से अलग कर के बिस्तर पर फैंक दिया.

ब्रेजियर की क़ैद से आज़ाद होते ही रज़िया बीबी ज्यों ही थोड़ा आगे को झुकी. तो उस के मोटे और भारी मम्मो के लंबे निपल्स बिस्तर पर बैठे हुए ज़ाहिद की सख़्त छाती से रगड़ खाने लगे.

“हाईईईईईईईईईईईईईई ज़्ाहीद्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्दद्ड” ज्यों ही रज़िया बीबी के निपल्स की टोपियाँ अपने बेटे की छाती से टच हुई. तो रज़िया बीबी के मुँह से बे इकतियार एक सिसकी निकल गई.

रज़िया बीबी तो अपनी बेवगी के बाद से अपने मम्मो के निप्पलो के यूँ किसी मर्द की छाती से टकराने के मज़े को तो भुला ही चुकी थी.

इसीलिए आज जब इतने अरसे बाद रज़िया बीबी के मोटे लंबे निपल्स अपने जवान बेटे के चौड़े सख़्त सीने से छुए.

तो मज़े के मारे रज़िया बीबी के मुँह से सिसकारियाँ फूटने लगीं. और रज़िया बीबी मज़े से बे हाल होते हुए बार बार अपने मम्मो को ज़ाहिद की सख़्त छाती से रगड़ कर स्वाद लेने लगी.

कुछ देर अपनी नंगी छातियों को ज़ाहिद की छाती से रगड़ने के बाद रज़िया बीबी अपने घुटनों (नी) को मोड़ती हुई नीचे को झुकी.

नीचे झुकते ही रज़िया बीबी अपने मुँह को भी नीचे लाई. और नीचे हो कर ज़ाहिद की गर्दन पर अपने होन्ट चिस्पान कर के अपने बेटे की गर्दन को अपने होंठो से चूमने लगी.

“हाईईईईईईईईईई अम्मिईीईईईई आज बहुत प्यार आ रहा है आप को अपने बेटे पर” अपनी अम्मी के प्यार का ये अंदाज़ देख कर ज़ाहिद भी मस्ती से सिसकार उठा.

रज़िया बीबी ने अपने बेटे की बात का जवाब देने की बजाय अपने जिस्म को थोड़ा और झुकाया.

इस तरह झुकने से रज़िया बीबी अब ज़ाहिद के बिल्कुल सामने अपने घुटनों के बल फर्श पर बैठ गई. और ज़ाहिद की गर्दन से होती हुई अपनी गरम ज़ुबान को अपने बेटे के जवान सीने पर ले गई.

ज़ाहिद के चौड़े सख़्त सीने पर अपनी गरम ज़ुबान को फेरते हुए रज़िया बीबी अपने मुँह को अपने बेटे की जवान छाती के निपल के करीब लाई.

और ज़ाहिद की छाती पर “खड़े” हुए अपने बेटे के छोटे से निपल को अपने मुँह में भर कर रज़िया बीबी ने ज़ाहिद की छाती के निपल को अपने दाँतों से काटा.

“हाईईईईईईईईईईईईई दर्द होता है अम्मिईीईईईईईई” अपनी अम्मी के दाँतों को अपने निपल पर जमे हुए पा कर ज़ाहिद दर्द और मज़े की शिद्दत से चीखा.

“अपनी अम्मी से हम बिस्तरी करनी है,तो फिर इस किस्म के दर्द तो बर्दास्त करने पड़ेगे बएटााआआआअ” ज़ाहिद की चीख सुन कर रज़िया बीबी बोली.

अपने बेटे की मज़े और दर्द भरी इस चीख ने रज़िया बीबी को मज़ीद गरमा दिया था.

इसीलिए रज़िया बीबी ने ज़ाहिद की चीख की परवाह ना करते हुए अपने मुँह को मज़ीद खोला. और अपने बेटे की छाती के निपल पर अपनी गरम ज़ुबान घुमाते हुए ज़ाहिद के निपल को प्यार से सक करने लगी.

कुछ देर ज़ाहिद की छाती के दो निपल को चूसने और काटने के बाद रज़िया बीबी ने ये ही अमल अपने बेटे की छाती के बाईं निपल पर दोहराया. तो मज़े की शिद्दत से ज़ाहिद बे हाल हो गया.

“हाईईईईईईईईईईई अम्मिईीईईईईई आज तो आप एक माशूका की तरह अपने आशिक़ को प्यार कर रही हैं” अपनी अम्मी के गरम होंठ अपनी गर्दन और छाती के निप्पलो पर महसूस करते ही ज़ाहिद मचल उठा.

आज से पहले तक तो ज़ाहिद ही हमेशा औरतों के निप्पलो को यूँ अपने मुँह में भर कर चूस्ता रहा था.

मगर आज ज़ाहिद की ज़िंदगी में ये पहला मोका था. जब कोई आम औरत नही बल्कि उस की अपनी सग़ी अम्मी उस के अपने निपल्स को यूँ अपने मुँह में भर कर सक कर रही थी.

बे शक ज़ाहिद कोई गान्डु शख्स नही था. लेकिन इस के बावजूद उसे आज अपनी छाती के निपल्स को अपनी अम्मी से चुसवाने में बहुत ही मज़ा आ रहा था.

अपनी अम्मी के प्यार करने का ये अंदाज़ और स्टाइल देख देख कर ज़ाहिद बहुत हैरान हो रहा था.

ज़ाहिद को यकीन ही नही हो रहा था. कि ये वाकई ही उस की अपनी सग़ी अम्मी हैं.

जो इस वक्त बहुत वलिहाना अंदाज़ में अपने बेटे के जिस्म को प्यार किए जा रही हैं.
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Re: वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास )

Post by Kamini » 30 Aug 2017 19:31

mast update

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Re: वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास )

Post by VKG » 30 Aug 2017 19:31

मस्त है भाई
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Re: वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास )

Post by rajaarkey » 01 Sep 2017 20:20

Kamini wrote:
30 Aug 2017 19:31
mast update
VKG wrote:
30 Aug 2017 19:31
मस्त है भाई
shukriya dosto
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Re: वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास )

Post by rajaarkey » 01 Sep 2017 20:20

ज़ाहिद को यकीन ही नही हो रहा था. कि ये वाकई ही उस की अपनी सग़ी अम्मी हैं.

जो इस वक्त बहुत वलिहाना अंदाज़ में अपने बेटे के जिस्म को प्यार किए जा रही हैं.

ज़ाहिद ने अपनी जवानी के आगाज़ से ले कर अपनी बहन से शादी तक, बहुत सी औरतों के साथ हम बिस्तरी की थी.

मगर शाज़िया के बाद आज उस की अपनी सग़ी अम्मी ही वो दूसरी औरत थी. जिस के प्यार के इज़हार का अंदाज़ देख कर ज़ाहिद को दिली मज़ा आ रहा था.

इधर दूसरी तरफ रज़िया बीबी भी आज अपने दिल में ये तय कर के आई थी. कि जिस तरह एक अरसे के बाद आज दोपहर को उस के अपने सगे बेटे ज़ाहिद ने उस की प्यासी चूत में अपना मोटा लंड डाल कर अपनी अम्मी की गरम चूत को सकून पहुँचाया है.

उसी तरह आज वो भी कुछ ऐसा करे गी. कि जिस के करने से उस के जवान बेटे ज़ाहिद को भी मज़ा आए.

और फिर ज़ाहिद अपनी अम्मी का भी उसी तरह आशिक़ और दीवाना बन जाए. जिस तरह वो अपनी बहन का आशिक़ बन चुका है.

अपनी इसी सोच पर अमल करते हुए रज़िया बीबी कुछ देर यून अपने बेटे की छाती पर अपनी गरम ज़ुबान रगड़ कर खुद भी मज़ा लेती रही. और साथ ही साथ अपने बेटे ज़ाहिद को भी मज़े की नई मंज़लों से रोशनास करवाती रही.

जब ज़ाहिद की छाती को चाट चाट कर रज़िया बीबी का दिल भर गया. तो वो अपने मुँह को ज़ाहिद के जिस्म पर पकड़े हुए अपने होंठ अपने बेटे के पेट पर ले आई.

ज़ाहिद के पेट पर अपना मुँह लाते ही रज़िया बीबी ज़ाहिद की मोटी दुहनी (नेवेल) को अपनी गरम ज़ुबान से चाटने और प्यार करने लगी.

“हाईईईईईईईईई गुदगुदी होती हाईईईईईईईईईईईईईईईईई अम्मिईीईईईईईईईईईईई” अपनी अम्मी की लंभी और नोकेलि ज़ुबान को अपनी दुहनी पर महसूस करते ही ज़ाहिद को गुदगुदी हुई. और उस ने अपने हाथ के साथ अपनी अम्मी के मुँह को अपने जिस्म से अलग करने की कोशिश की.

रज़िया बीबी को शायद ज़ाहिद के इस रिक्षन का अंदाज़ था.

इसीलिए उस ने अपने हाथों को ज़ाहिद की कमर के गिर्द जकड कर अपने मुँह को मज़बूती से अपने बेटे के पेट पर जमा लिया.

जिस की वजह से ज़ाहिद अपनी कोशिश के बावजूद अपनी वालिदा को अपने आप से अलग ना कर पाया.

रज़िया बीबी ने अपने मुँह को उसी तरह अपने बेटे के पेट से चिस्पान करते हुए अपनी लंबी ज़ुबान को ज़ाहिद की दुहनी के अंदर फेरा. तो ज़ाहिद को ऐसे लगा जैसे किसी ने उस के लंड के अंदर एक आग सी भर दी हो.

ज़ाहिद को एक दम जोश आया. और उस ने बिस्तर पर बैठे बैठे अपने जिस्म को एक झटका दिया.

तो ज़ाहिद की शॉर्ट्स में खड़ा हुआ उस का लंड उस की अपनी अम्मी रज़िया बीबी के लटकते हुए मोटे मम्मो के दरमियाँ रगड़ खाने लगा.

ज़ाहिद की निक्कर में खड़े हुए अपने बेटे के लंड को यूँ अपनी मोटी छातियों के दरमियाँ टच होते देख कर रज़िया बीबी के ज़हन में यका यॅक एक ख्याल आया.

इस ख्याल के ज़हन में आते ही रज़िया बीबी एक दम से नीचे हो कर फर्श पर बैठ गई.

फर्श पर इस तरह बैठने से अब रज़िया बीबी का मुँह बिस्तर पर बैठे हुए अपने बेटे ज़ाहिद की टाँगों के दरमियाँ में उस की निक्कर के अंदर खड़े हुए लंड के बिल्कुल सामने आ गया था.

फर्श पर बैठे बैठे रज़िया बीबी ने ज़ाहिद की कमर के गिर्द अपने हाथ डाले. और अपने बेटे की निक्कर को अपने दोनो हाथों से पकड़ कर उतारने लगी.

ज्यों ही रज़िया बीबी ने अपने बेटे की निक्कर को हाथों में पकड़ कर खैंचा.

तो ज़ाहिद ने भी बिस्तर से अपनी गान्ड को हल्का सा उपर उठा कर अपनी अम्मी की मदद की. और यूँ रज़िया बीबी ने कई सालों बाद अपने बेटे ज़ाहिद को उस की जवानी में फिर से अपने हाथों नंगा कर दिया था.
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