वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास )

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rajaarkey
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Re: वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास )

Post by rajaarkey » 12 Sep 2017 12:59

फिर कुछ देर बाद रज़िया बीबी ने आख़िर ज़ाहिद के लंड को अपने मुँह से निकाला .और फर्श पर बैठे बैठे ज़ाहिद के लंड को अपने हाथ में थाम कर अपने बेटे ज़ाहिद की आँखो में देखने लगी.

“अप ऐसे क्यों देख रही हैं मुझे अम्मी” रज़िया बीबी जब थोड़ी देर खामोश रही. तो ज़ाहिद ने अपने कदमों में बैठी अपनी अम्मी को सवालिया नज़रों से देखते हुए पूछा.

“ज़ाहिद महमूद वल्द (फ़तार) रहमत ख़ान किया तुम्हें रज़िया बीबी बेवा रहमत ख़ान अपने निकाह में कबूल है” रज़िया बीबी ने अपने बेटे के मोटे नंगे लंड को अपने हाथ में थामा. और अपने जवान बेटे की आँखों में आँखे डालते हुए ज़ाहिद से पूछा.


रज़िया बीबी से लंड चुस्वाते वक्त ज़ाहिद तो ये समझ रहा था. कि लंड चुसाइ के दोरान सुहाग रात वाली जो बातें उस की अम्मी के मुँह से निकल रही थी. वो शायद उस की अम्मी की चूत की गर्मी का असर था.

मगर अब बाक़ायदा एक निकाह खुआन की तरह अपनी अम्मी को निकाह की रसम अदा करते देख कर ज़ाहिद के हाथों के तो तोते ही उड़ गये.

बाप के मरने के बाद बेटा अपने बाप की जायदाद में हिस्से दार बनते तो ज़ाहिद ने देखा और सुना हुआ ही था.

मगर ज़ाहिद की पूरी ज़िंदगी में आज ये पहला मोका हो गा. जब जायदाद के साथ साथ ज़ाहिद एक बेटे को अपने ही बाप की बेवा में भी हिस्से दार बनने के मुतलक सुन रहा था.और ये बात कहने वाली कोई और नही बल्कि उस की अपनी सग़ी बेवा अम्मी थी.

जो ज़ाहिद को खुद अपने मेरहूम शोहर की चोदि हुई चूत में हिस्से दार बनने की दावत दे रही थी.

ज़ाहिद चूँकि अपनी अम्मी से इस बात की तावक्को नही कर रहा था.

इसीलिए अम्मी के मुँह से ये सुनते ही एक लम्हे के लिए ज़ाहिद को वाकई ही समझ नही आया. कि वो अपनी अम्मी की इस बात का क्या जवाब दे.

मगर फिर दूसरे ही लम्हे ज़ाहिद को जैसे होश आया. तो वो एक दम से अपना मुँह खोल कर चल उठा. “ओह मुझे तुम अपने निकाह में कबूल हो रज़िया बेगम”

अपनी अम्मी को अपने निकाह में क़बूल करते वक्त ज़ाहिद के लंड ने इतना जोश मारा. कि ज़ाहिद के लिए अपने लंड पर काबू रखना मुश्किल हो गया.

और ज़ाहिद के लंड ने किसी आतिश फिशन (वालकानो) की तरह फुट कर अपने लावा अपने कदमो में बैठी हुई अपनी अम्मी के खुले मुँह में ही छोड़ दिया.

ज़ाहिद के लंड से निकलने वाला गरम वीर्य की मिकदर इतनी ज़्यादा थी.
कि जिस की वजह से ना सिर्फ़ रज़िया बीबी का मुँह और होंठ अपने बेटे ज़ाहिद के गरम पानी से भर गये.



बल्कि साथ ही साथ ज़ाहिद के लंड का थिक और गरम पानी रज़िया बीबी के मुँह से बारिश की बूँदों की तरह बह बह कर रज़िया बीबी के मोटे मम्मो को भी भिगोने लगा था.

“ओह मुझे ययययययययययी बहुत अफ़सोस है कि में आप के मुँह में ही फारिग हो गया” ज़ाहिद ने जब अपने लंड के पानी को अपनी टाँगों के दरमियाँ बैठी हुई रज़िया बीबी के मुँह पर गिरते देखा. तो वो डर गया कि अब उस की अम्मी उसे गुस्से में आ कर बहुत डान्टेगि जी. इसीलिए ज़ाहिद फॉरन अपनी अम्मी से मज़रत करने लगा.

“अफ़सोस कि कोई बात नही, में तो खुद तुम्हारे लंड का पानी पी कर अपनी नई ज़िंदगी का आगाज़ करना चाहती हूँ, इसीलिए मेरे मूह में पानी छोड़ कर पहले मेरे मूह की प्यास भुजाओ, और फिर अपना लंड अंदर डाल कर मेरी चूत की मेरे बेटे ” रज़िया बीबी ने ज़ाहिद को जवाब दिया. और खुद मुँह खोल कर “शर्प शर्प” करती ज़ाहिद का गरम और लैस दार पानी अपने मुँह में निगलने लगी.

आज से पहले तक रज़िया बीबी ने अपनी पूरी शादी शुदा ज़िंदगी में लंड को सक करने के मुतलक कभी सोचा तक नही था.

मगर अब तक लंड चुसाइ के काम को “गंदा” और बुरा समझने वाली रज़िया बीबी ना सिर्फ़ अपने बेटे के लंड को चूस चूस कर उसे अपने लंड का पानी निकलने पर मजबूर कर चुकी थी.

बल्कि अब वो बहुत शौक से अपने बेटे के लंड के पानी को “रूफ अफज़ा” शरबत समझ कर पीने में भी मगन हो चुकी थी.

“आप की एक बात मुझे पसंद नही आई” अपनी अम्मी को दीवाना वार अपने लंड का चुसाइ लगाते देख कर ज़ाहिद बोला.

“वो क्या बेटा” रज़िया बीबी ने अपना मुँह ज़ाहिद के लंड की टोपी से हटाते हुए पूछा.

“आप मुझ से निकाह भी करती हैं, मेरे साथ सुहाग रात भी मनाती हैं,मगर इस के बावजूद मुझे बेटा ही कह कर मुकतिब कर रही हैं” ज़ाहिद ने अपनी अम्मी से शिकवा किया.

“तो अब तुम क्या चाहते हो कि में तुम्हें क्या कह कर बुलाया करूँ ज़ाहिद” रज़िया बीबी ने ज़ाहिद के लंड को हाथ में थामा और अपनी नज़रें उठा कर अपने बेटे से पूछा.

“वो ही जो एक मियाँ बीवी प्यार भरे अंदाज़ में एक दूसरे को कहते हैं” अपनी अम्मी की बात के जवाब में ज़ाहिद ने मुस्कराते हुए कहा.

“ओह नही मुझ से ऐसा नही हो सके गा बेटा” ज़ाहिद से अपने जिन्सी ताल्लुक़ात कायम करने के बावजूद रज़िया बीबी अपने बेटे की फरमाइश पर शर्म महसूस करते हुए बोली.

“अच्छा अगर ये बात है तो छोड़ो मेरा लंड, जाओ में आप से नही बोलता” अपनी अम्मी का जवाब सुन कर ज़ाहिद ने नकली गुस्सा किया. और अपने लंड को अपनी अम्मी के हाथ से छुड़वाने लगा.

“हाईईईईईईईईईईई में सदके जऊऊऊऊ, ठीक है में कोशिश करूँगी कि जैसा तुम चाहते हो, वैसे ही में तुम को मुताबिक करूँ” अपने बेटे के नकली गुस्से के आगे हार मानते हुए रज़िया बीबी फॉरन बोल पड़ी.

“कोशिश नही बल्कि आज से आप तेन्हाई में मुझे बेटे की बजाय मेरे सरताज ज़ाहिद कह कर बुलाया करो गी” ज़ाहिद ने रज़िया बीबी को ताकीद करते हुए कहा.

“अच्छा और इस के जवाब में तुम मुझे क्या पुकारोगे ” अपनी बेटे की बात सुन कर रज़िया बीबी के होंठो पर एक मुस्कराहट फेली.

में आप को बेगम और जान कह कर पुकारूँगा, मेरी बेगम रज़ैईईईईईईईईईईईईईईई जनणनिईीईईईईईईईईईई” अपनी अम्मी के साथ निकाह के बंधन में बँधते ही ज़ाहिद ने ज़िंदगी में पहली बार रज़िया बीबी को अम्मी कहने की बजाय “बेगम” और “जान” कह कर पुकारा.

तो अपने बेटे के मुँह से ये इलफ़ाज़ सुन कर रज़िया बीबी की चूत में लगी आग की शिद्दत पहले से बढ़ गई. और उस ने मज़ीद जोश में आते हुए ज़ाहिद के लंड से निकलने वाली पानी के आखरी क़तरे को भी लंड की टोपी से चाट चाट कर सॉफ कर दिया.
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Re: वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास )

Post by Kamini » 12 Sep 2017 19:14

mast update

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Re: वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास )

Post by Ankit » 13 Sep 2017 19:28

superb update

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Re: वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास )

Post by rajaarkey » 16 Sep 2017 20:41

में आप को बेगम और जान कह कर पुकारूँगा, मेरी बेगम रज़ैईईईईईईईईईईईईईईई जनणनिईीईईईईईईईईईई” अपनी अम्मी के साथ निकाह के बंधन में बँधते ही ज़ाहिद ने ज़िंदगी में पहली बार रज़िया बीबी को अम्मी कहने की बजाय “बेगम” और “जान” कह कर पुकारा.

तो अपने बेटे के मुँह से ये इलफ़ाज़ सुन कर रज़िया बीबी की चूत में लगी आग की शिद्दत पहले से बढ़ गई. और उस ने मज़ीद जोश में आते हुए ज़ाहिद के लंड से निकलने वाली पानी के आखरी क़तरे को भी लंड की टोपी से चाट चाट कर सॉफ कर दिया.

अपने शोहर बेटे के लंड के वीर्य को पहली बार अपने हलक़ में उतारने के बाद रज़िया बीबी फर्श से उठ कर ज़ाहिद के सामने खड़ी हो गई.

ज़ाहिद के सामने खड़े हो कर दोनो मियाँ बीवी की नज़रें आपस में चार हुईं.

तो अपनी बीवी माँ के होंठो को अपने लंड के सफेद पानी से तर देख कर ज़ाहिद का ढीला पड़ते लंड में फिर से सख्ती आने लगी.

“उफफफफफफफफफ्फ़ आप ने मेरे लंड की मनी खा कर ये साबित कर दिया है, कि आज आप मुझ से चुदवाने नही, बल्कि मुझे चोदने आई हैं बेगम” ज़ाहिद अपनी अम्मी के होंठो पर लगा हुआ अपने लंड का पानी देख कर पागल हो गया.

ज़ाहिद ने फॉरन आगे बढ़ कर अपनी अम्मी के नंगे वजूद को अपनी बाहों में भरा. और अपनी नई नवेली दुल्हन के होंठो पर अपने होंठ रख कर रज़िया बीबी के मुँह पर लगे हुए अपने ही लंड का वीर्य को अपनी ज़ुबान से चाटने लगा.

कुछ देर दोनो माँ बेटे एक दूसरे का वजूद को अपनी बाहों में कस कर एक दूसरे के जिस्मों पर अपने हाथ घुमाते हुए एक दूसरे की ज़ुबान से ज़ुबान लड़ाते रहे.

“हाईईईईईई मेरेयययी सर्र्र्र्ररर…”अपनी मोटी टाँगों के दरमियाँ से अपनी पानी छोड़ती चूत के मुँह पर रगड़ खाते ज़ाहिद के बड़े लंड को महसूस कर के रज़िया बीबी सिसकी तो सही.

मगर चाहने के बावजूद रज़िया बीबी अपने बेटे ज़ाहिद को अपना सरताज ना कह पाई और एक दम हकलाने लगी.

बचपन से ले कर जवानी तक ज़ाहिद को बेटा कह कर पुकारने की वजह से रज़िया बीबी के लिए अब ज़ाहिद को अब एक दम से अपना ख्वाविंद कह कर बुलाने में थोड़ी दिक्कत और हिचकिचाट महसूस हो रही थी.

मगर अपनी अम्मी के विपरीत ज़ाहिद तो अब अपनी अम्मी को अपनी दूसरी बीवी के रूप में कबूल करते हुए रज़िया बीबी को बेगम, जान और जानू जैसे इलफ़ाज़ से पुकारने लग गया था.

इस की वजह शायद ये रही कि अपनी सग़ी बहन शाज़िया को अपनी बीवी बनाने के बाद ज़ाहिद शाज़िया को बहन की बजाय जानू और ज़ोज़ा वगेरा कह कर बुलाने की आदत पहले ही पड़ चुकी थी.

इसी लिए अब अपनी सग़ी अम्मी को माँ की बजाय बीवी की तरह बुलाना ज़ाहिद को ज़्यादा दूस्वार नही लग रहा था.

ये वजह थी कि ज्यों ही रज़िया बीबी के भारी मम्मे ज़ाहिद की नंगी छाती के साथ चिपके. तो ज़ाहिद ने एक दम से अपनी अम्मी के मोटे मम्मे को हाथ में कसते हुए कहा “उफफफफफफफफफ्फ़ मेरी बेगम के ये बड़े बड़े मम्मे तो बहुत ही जान लेवा है ”.

“अब आ बिस्तर पर लेट जाए ज़ाहिद्द्द्द्द्द्द्द्द्द्दद्ड” कुछ देर अपने बेटे ज़ाहिद से अपने मम्मे दबवाने और ज़ाहिद के मुँह में उस के अपने लंड का पानी मुन्तिक़ल करने के बाद रज़िया बीबी अपने बेटे से अलग हुई.

और एक गहरी साँस ले कर ज़ाहिद से यूँ मुकतिब हुई. जैसे एक बीवी अपने शोहर से मुकतिब होती है.

“मुझे बिस्तर पर लिटा कर क्या करने का इरादा है तुम मेरी जान” अपनी अम्मी का उसे यूँ एक शोहर की तरह पुकारने का अंदाज़ ज़ाहिद के दिल को भा गया.

इसी लिए ज़ाहिद भी अब अपनी अम्मी के नक्शे कदम पर चलते हुए अपने आप को आहिस्ता आहिस्ता अपनी ही अम्मी के शोहर के रूप में ढालने लगा था.और इस नये रूप को इख्तियार करने के दोरान ज़ाहिद को एक अजीब सी खुशी और मज़ा मिल रहा था.

“में आप को बिस्तर पर लिटा कर ना सिर्फ़ आप का लंड दुबारा चूसना चाहती हूँ, बल्कि इस के साथ साथ अब अपनी चूत भी आप से चटवाना चाहती हूँ, जानुउऊुउउ” इस बार रज़िया बीबी ने ज़ाहिद के दिल और लंड पर मज़ीद अँगारे बरसाते हुए एक अदा के साथ अपने शोहर बेटे से ये बात कही.

जिस की वजह से ज़ाहिद के लिए इनकार मुमकिन ही ना रहा. और किसी फर्माबर्दार शोहर की तरह अपनी बीवी का हुकम मानते हुए ज़ाहिद फॉरन बिस्तर पर जा लेटा.

ज़ाहिद के बिस्तर पर लेटते ही रज़िया बीबी भी बिस्तर पर चढ़ गई.

बिस्तर पर आते ही रज़िया बीबी ने अपनी दोनो टांगे चौड़ी कर के बिस्तर पर लेटे ज़ाहिद के जिस्म के दोनो ओर रखीं.

तो रज़िया बीबी अपने जवान बेटे के जिस्म पर इस अंदाज़ में आ गई. कि रज़िया बीबी की गान्ड का रुख़ तो ज़ाहिद के मुँह की तरफ था.जब कि रज़िया बीबी का मुँह अपने बेटे ज़ाहिद के पेट पर सुस्त (लेज़ी) पड़े हुए उस के लंड की तरफ था.

ज़ाहिद के जिस्म के उपर इस अंदाज़ में बैठ कर रज़िया बीबी ने अपने भारी जिस्म को नीचे झुकाया.

तो रज़िया बीबी की मोटी फुद्दि का मुँह बिस्तर पर लेटे ज़ाहिद के मुँह के बिल्कुल आन उपर आ गया.

रज़िया बीबी की चूत अपने जवान बेटे के मुँह के इतने करीब हुई.

तो रज़िया बीबी की पानी छोड़ती फुद्दि से उस की चूत का नमकीन पानी बारिश के पहले क़तरे की तरह टपक कर ज़ाहिद के खुले मुँह से उस के हलक़ में उतर गया.

“हाईईईईईईईईईईई शाज़िया की तरह आप की फुद्दि के पानी का ज़ायक़ा भी बहुत मज़े दार है बेगम” अपनी अम्मी की चूत को बिना छुए ही फुद्दि के पानी का स्वाद चाख कर ज़ाहिद मस्त हुआ. और अपने मुँह को अपनी अम्मी की चूत के मज़ीद पास ला कर अपनी अम्मी की बिना बालों वाली,फूली हुई चूत की महक को अपने नथुनो से सूंघते हुए कहने लगा.

ज़ाहिद इस पोज़िशन में बिस्तर पर लेट कर नीलोफर और अपनी बहन शाज़िया की चूत को कई दफ़ा चाट चुका था.

और चूत चाटने के इस अंदाज में तो ज़ाहिद को अब इतनी महारत हासिल हो चुकी थी. कि ज़ाहिद इस महारत की वजह से उसे पाकिस्तान के “सितारही इम्तियाज़” (प्राइड ऑफ पर्फॉर्मेन्स) अवॉर्ड के लिए नामज़द किया जा सकता था.

इसी लिए ज्यों ही ज़ाहिद के मुँह के उपर झुकी हुई रज़िया बीबी की चूत के लब अपने बेटे के मुँह के नज़दीक हुए.

तो अपनी अम्मी की फुद्दि से निकलने वाली खुसबू को नाक के रास्ते अपने जिस्म में उतारते हुए ज़ाहिद ने अपने हाथ उपर बढ़ा कर सब से पहले अपनी अम्मी के मोटे और भारी मम्मो को अपने हाथों में थामा.


और फिर नीचे से अपने मुँह को पूरा खोल कर अपनी अम्मी की चूत की फूली हुई पंखुड़ियों को अपने मुँह में भर लिया.

हाला के शाज़िया अपनी अम्मी की चूत को चाट कर रज़िया बीबी को चूत चटाई के स्वाद से पहले ही रोशनास करवा चुकी थी.

मगर इस के बावजूद ज़ाहिद ने ज्यों ही आज पहली बार अपनी अम्मी के मोटे फुद्दे को अपने गरम मुँह में भरा.

तो अपने जवान शोहर की गरम ज़ुबान को अपनी सुहागन फुद्दि के साथ पहली बार टकराता हुए महसूस कर के रज़िया बीबी के जिस्म में एक सनसनी सी दौड़ गई.और मज़े और स्वाद की शिद्दत की वजह से रज़िया बीबी का मुँह खुला गया था.

रज़िया बीबी ने अपनी फुल्ती सांसो के साथ अपने दोनो हाथों से अपने बेटे के सर को थामा. और अपनी फूली हुई चूत के गुदाज होंठो को ज़ाहिद के होंठो पर तेज़ी के साथ रगड़ा.

अपनी चूत के लिप्स को अपने जवान बेटे के होंठो पर फेरते ही रज़िया बीबी सिसक उठी. और उस के मुँह से बे इकतियार निकल गया “आआआअहह”.
इधर दूसरी तरफ बे शक ज़ाहिद इस से पहले कई बार नीलोफर और अपनी बहन शाज़िया की चूत को चाट कर उन दोनो गरम फुद्दियो के पानी का स्वाद ले चुका था.

मगर इस के बावजूद अपनी अम्मी रज़िया बीबी की तरह ज़ाहिद के लिए भी ये पहला मोका था. जब वो ज़िंदगी में पहली बार अपनी अम्मी के उस मोटे मोटे फुद्दे को अपने मुँह में भर कर प्यार कर रहा था.

जो ज़ाहिद की जनम भूमि होने के साथ साथ अब उस की बीवी का दर्जा भी पा चुकी थी.



इसीलिए जिन्सी हवस की गर्मी में मदहोश हो कर ज़ाहिद अपने मुँह को खोल कर अपनी अम्मी की चिकनी, गरम और रस टपकाती हुई चूत पर अपनी जीभ चलाने लगा.



ज़ाहिद की नुकीली ज़ुबान की टिप ज्यों ही रज़िया बीबी की चूत की दीवारों को चीर कर उस की प्यासी फुद्दि के अंदर गुसी.

तो अपने बेटे की ज़ुबान की गर्मी को अपनी चूत की गहराई में महसूस कर के रज़िया भी मज़े से चिल्लाई, "उफफफफफफफफफफ्फ़ आआआआआआअहह ज़ाहिद्द्द्दद्ड बहुत प्यारा लग रहा है, चाटो और चाटो म्म्म्म मममममम बहुत मज़ा आ रहा है मुझे मेरी जानंनननणणन्”



ज़ाहिद की ज़ुबान की गरमी के हाथों बे हाल होते हुए रज़िया बीबी आजे को झुकी. और ज़ाहिद के ढीले लंड को अपने हाथ में पकड़ कर अपने बेटे के लंड की मूठ लगाने लगी.
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Re: वक्त ने बदले रिश्ते ( माँ बनी सास )

Post by rajaarkey » 16 Sep 2017 20:42


ज़ाहिद की ज़ुबान की गरमी के हाथों बे हाल होते हुए रज़िया बीबी आजे को झुकी. और ज़ाहिद के ढीले लंड को अपने हाथ में पकड़ कर अपने बेटे के लंड की मूठ लगाने लगी.

कुछ देर ज़ाहिद के मुरझाए हुए लंड को अपने हाथ से मसल्ने के बाद रज़िया बीबी मज़ीद आगे को झुक गई. और अपने बेटे के लंड को दुबारा अपने मुँह में भर लिया.

अपने पतले गुलाबी होंटो के दरमियाँ ज़ाहिद के मोटे बड़े लंड को दबोच कर जैसे ही रज़िया बीबी ने अपने बेटे के लंड की चुसाइ शुरू की.



तो ज़ाहिद के ढीले लंड में फिर से सख्ती आने लगी. और चन्द की सेकेंड में ज़ाहिद का लंड दोबारा से खड़ा हो कर साँप की तरह फूंकारने लगा.

रज़िया बीबी के मुँह की गर्मी से दुबारा ज़िदगी पाते ही ज़ाहिद के लंड में जोश आया. और वो नीचे से झटका मारते हुए अपनी अम्मी के मुँह में फँसे हुए लंड को मज़ीद रज़िया बीबी के हलक में ठूंसते हुए सिसकार कर बोलने लगा "हाईईईईईईईईई चूस लो चूस, लो ओहूऊओ अम्मिईीईईईईई चूऊस लो, मेरा लंडन्न्नन्न्नन्नन्न्न"

अब कमरे में ये आलम था. कि दोनो माँ बेटे के नंगे जिस्म पलंग पर मचल रहे थे.

ज़ाहिद की ज़ुबान अपनी अम्मी की चूत के छोले को चाटती हुई चूत की पूरी गहराई तक चली जाती और अपनी अम्मी की चूत के रस को चाट लेती.

ज़ाहिद ने अपनी अम्मी के चूतड़ जकड रखे थे. और अपनी अम्मी की चूत को चाटने के दोरान एक आध बार उस की नुकीली ज़ुबान उस की अम्मी की गान्ड की मोरी को भी छू गई.

मगर ना जाने क्यो ज़ाहिद ने अभी अपनी अम्मी की गान्ड को चाटना मुनासिब ना समझा.

जब कि ज़ाहिद के जिस्म के ऊपर लेटी रज़िया बीबी अपने जवान बेटे के लंड को अपने मुँह में भर कर बहुत गरम जोशी के साथ ज़ाहिद के लंड को सक करने में मसरूफ़ थी.

ज़ाहिद के लंड को चूसने के दौरान रज़िया बीबी अपनी चूत को तेज़ी के साथ अपने बेटे के मुँह पर फेर रही थी.

रज़िया बीबी की इस हरकत की वजह से उस की चूत से रस टपक रहा था.और रज़िया बीबी की फुद्दि के इस नमकीन पानी को उस का बेटा ज़ाहिद अपने मुँह में भर कर मज़े मज़े ले कर चाटने में मसगूल था.

“हाईईईईईईईईईईईई इस से पहले के ज़ाहिद अपने लंड का पानी फिर से मेरे हलक़ में उडेल दे मुझे फॉरन अपने जानू का लंड अपनी चूत में ले कर अपनी सुहाग रात मना लेनी चाहिए” ज़ाहिद के मुँह पर ज़ोर ज़ोर से अपनी फुद्दि मारते हुए रज़िया बीबी को ख्याल आया.

असल में ज़ाहिद की चूत चटाइ ने रज़िया बीबी की फुद्दि को अब इतना गरम कर दिया था. कि रज़िया की फुद्दि में अब अपने बेटे के जवान लंड को अपने अंदर समिटने की शदीद तमन्ना जाग उठी थी.

“बसस्स्सस्स करो मेरे सरताज, क्या यूँ ही मेरी फुद्दि को खा खा कर मेरी चूत का पानी निकाल दो गे आज” इसीलिए ये ख्याल आते ही रज़िया बीबी ने ज़ाहिद के लंड को अपने मुँह से निकालते हुए अपने शोहर बेटे से कहा.

और फिर अपनी चूत को ज़ाहिद के मुँह से उठा कर अपने जिस्म को अपने जवान बेटे के पेट के उपर से सरकाती हुई ज़ाहिद के लंड के ऐन उपर आ गई.

इस स्टाइल में रज़िया बीबी की गान्ड बदस्तूर ज़ाहिद के मुँह की तरफ थी. जब कि ज़ाहिद के जिस्म के उपर बैठी रज़िया बीबी का मुँह अब भी बिस्तर पर लेटे हुए अपने बेटे के पैरों की तरफ था.

अपने बेटे ज़ाहिद के लंड के ऊपर आ कर रज़िया बीबी ने अपने भारी जिस्म को थोड़ा नीचे की तरफ किया.



तो नीचे से ज़ाहिद का सख़्त लंड उस की अम्मी रज़िया बीबी की प्यासी चूत के फूले हुए होंठो के ऐन दरमियाँ आ कर फँस गया.

अपने बेटे के जवान सख़्त लंड पर अपनी मोटी फुद्दि को रख कर रज़िया बीबी ने अपनी गान्ड को हल्के से हिला कर अपनी गरम फुद्दि को अपने नये ख्वाविंद के लंड पर रगड़ा.

रज़िया बीबी की पानी छोड़ती चूत की रगड़ ज़ाहिद के जवान लंड से लगते ही दोनो नये शादी शुदा जोड़े के जिस्मो में एक मीठी किस्म का करंट पैदा हुआ.

इस के बावजूद दोनो माँ बेटा दोपहर वाली चुदाई की वजह से एक दूसरे के जिस्मो के नाज़ुक हिस्सो से पहले ही रोशनास हो चुके थे.

मगर इस के बावजूद जब रज़िया बीबी और ज़ाहिद का लंड और चूत एक बार फिर आपस में मिले.

तो दोनो गरम जिस्मो के मिलाप से खारिज होने वाले इस करंट ने दोनो माँ बेटे के वजूद को हिला कर रख दिया.

जिस की वजह से ज़ाहिद और रज़िया बीबी के मुँह से एक साथ निकला” हाआआऐययईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई”

अपनी अम्मी से पहली बार अपना लंड सक करवाने और फिर अपनी अम्मी के मोटे फुद्दे में भी पहली बार अपनी लंबी ज़ुबान डालने के बाद रज़िया बीबी की तरह ज़ाहिद के लिए भी अब अपनी अम्मी से दूर रहना मुश्किल हो रहा था.

ज़ाहिद की भी अब कोशिश थी. कि उस की नई नवेली दुल्हन जल्द आज़ जल्द अपने जवान शोहर के लंड को अपनी ममता भरी चूत में ले कर अपने आप को फिर से सुहागन बना ले.

इसीलिए जैसे ही रज़िया बीबी की गरम चूत ज़ाहिद के तने हुए लंड से टकराई. तो ज़ाहिद सिसकियाँ भरते हुए बडबडाने लगा.” ओह डालूऊऊऊओ अपनी फुद्दि में मेरा लंड, मेरिइईईई ज़ोज़ाआाआ मोहतर्मा (बीवी साहिबा)”

“हाईईईईईईईईईईईईई कनीज़ तो बस आप के हुकम की मुंतीज़र थी, हज़ूर वाला” ज़ाहिद की बात सुन कर रज़िया बीबी ने अपने बेटे को ऐसे जवाब दिया. जैसे ज़ाहिद उस का बेटा ना हो बल्कि शहज़ादा सलीम हो. और रज़िया बीबी ज़ाहिद की अम्मी की बजाय अनारकली हो.

रज़िया बीबी तो आज ये ही सोच कर अपने बेटे के कमरे में आई थी. कि वो उस वक्त तक ज़ाहिद का लंड अपनी चूत में नही लेगी. जब तक उस का बेटा खुद गरम हो कर अपने मुँह से अपनी अम्मी को उस का लंड अपनी चूत में लेने की इल्तिजा नही कर देगा.

इसीलिए ज्यों ही ज़ाहिद की सिसकी भरी फरियाद रज़िया बीबी के कानो में गूँजी.

तो अपने बेटे के मोटे लंबे लंड पर ऊपर नीचे होती रज़िया बीबी की चूत सिहर गई.

ज़ाहिद की आवाज़ सुन कर रज़िया बीबी को भी अंदाज़ा हो गया था. कि जिस तरह उस की चूत को अपने जवान बेटे के लंड की तलब हो रही है. बिल्कुल उसी तरह ज़ाहिद का लंड भी अब अपनी अम्मी की फुद्दि के लिए मचल रहा है.
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