वतन तेरे हम लाडले complete

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rajsharma
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Re: वतन तेरे हम लाडले

Post by rajsharma » 10 Nov 2017 18:36

वास्तव में समीरा जब बॉम्बे पहुचने वाली थी तो उसने फग़ान के बेटे शाह मीर को एक छोटे से होटल में कमरा लेकर उसी में ठहरा दिया था जबकि खुद वह एयरपोर्ट चली गई थी क्योंकि मेजर राज ने उसे भी अपने भारत आगमन के बारे में बताया था और वह जानती थी कि मेजर राज एयरपोर्ट पर ही आएगा। उसने अपनी रक्षा हेतु एक छोटी पिस्टल भी अपने साथ रख ली थी जो उसने अपने पास मौजूद छोटे हैंडबैग में छुपा ली थी। एयर पोर्ट पर पहुँच कर वह राज को ढूंढने लगी मगर वहां उसकी नज़र कर्नल इरफ़ान पर पड़ी जो आम कपड़ों में साना जावेद के साथ एक कार में बैठ रहा था, समीरा ने वहीं से टैक्सी में कर्नल इरफ़ान का पीछा शुरू किया जो साना जावेद को एक होटल में ठहरा कर खुद मेजर राज के घर की ओर जा रहा था। समीरा के लिए सबसे बड़ी बात यह थी कि कर्नल इरफ़ान उसे पहचानता नहीं था, वह इतना तो जानता था कि मेजर राज के साथ कोई समीरा नाम की लड़की भी है, लेकिन वह अभी तक उसको देख नहीं पाया था इसलिए जब कर्नल इरफ़ान मेजर राज घर के पास मौजूद एक शॉपिंग मॉल में गया तो उसने भी बिना हिचक वहां प्रवेश कर लिया और वह 2, 3 बार उसके सामने से भी गुजरी। कर्नल इरफ़ान बार बार अपने फोन पर किसी लड़की की तस्वीर देख रहा था एक बार समीरा ने उसके पास से गुजरते हुए उसकी ओर देखा तो वह अभी भी एक लड़की की तस्वीर देख रहा था, और फिर कुछ ही आगे जाकर समीरा को एक दुकान में वही लड़की दिखी जिसकी तस्वीर कर्नल इरफ़ान के मोबाइल में थी। यह लड़की रश्मि थी जो कुछ दिन पहले ही डॉक्टर के पास होकर आई थी और उसे मालूम हुआ था कि वह मां बनने वाली है, और इसी खुशी में वह अपने होने वाले बच्चे की छोटी छोटी चीजें देखने मॉल में मौजूद थी।

कर्नल इरफ़ान साना जावेद को छोड़ने के बाद मेजर राज की पत्नी का अपहरण करने आया था और यहाँ मौजूद उसके लोगों ने कर्नल को सूचना दी थी कि मेजर की पत्नी रश्मि अभी एक शॉपिंग मॉल में मौजूद है। समीरा अभी रश्मि से मिली नहीं थी वह दूर खड़ी उसे देख रही थी, वह नहीं जानती थी कि यह कौन है। फिर उसे कर्नल इरफ़ान दिखाई दिया जो रश्मि की ओर ही बढ़ रहा था। समीरा दूर खड़ी रश्मि और कर्नल इरफ़ान को देख रही थी, उसका विचार था कि यह वास्तव में कर्नल इरफ़ान की साथी होगी जो उसकी यहाँ मदद करती होगी। इतने में कर्नल इरफ़ान रश्मि के पास जाकर बोला हाय रश्मि मेडम कैसी हैं आप ????


रश्मि ने कर्नल इरफ़ान को देखा और आश्चर्य से उसकी ओर देखते हुए बोली सॉरी मैं आपको पहचाना नहीं ....

कर्नल इरफ़ान ने कहा आप मेजर राज की पत्नी हैं ना ???

इस पर रश्मि ने कहा हां .... मगर आप कौन ???

कर्नल ने बेहद खुश होकर कहा कर्नल हूँ, कर्नल मुश्ताक, राज से आपके बारे में बहुत सुना था, आपकी फोटो भी देखी थी, आज आपसे मुलाकात हो ही गई। फिर रश्मि की खैरियत पूछ कर्नल इरफ़ान वापस शॉपिंग मॉल से वापस चला गया और अपनी कार में बैठकर रश्मि का इंतजार करने लगा। समीरा अब सोच ही रही थी कि उसे क्या करना चाहिए उसने देखा कि रश्मि भी शॉपिंग कर शॉपिंग मॉल से बाहर जा रही थी, समीरा भी उसके पीछे पीछे जाने लगी कि अचानक उसने देखा रश्मि एक काली कार के पास से गुज़री तो गाड़ी का दरवाजा खुला और अंदर एक हाथ निकला जिसने रश्मि कार के अंदर खींच लिया। और कार फर्राटे भर्ती शहर से दूर जाने लगी।

समीरा नहीं जानती थी कि वह लड़की कौन है, वो तो बस कर्नल इरफ़ान से अपनी दुखियारी माँ का बदला लेना चाहती थी। इसीलिए वो कर्नल इरफ़ान पीछा कर रही थी। वह फिर से एक टैक्सी में बैठकर उस कार के पीछे शहर से दूर एक मकान पर पहुँच गई थी जहां दूर काली गाड़ी रुक चुकी थी और एक आदमी रश्मि को गोद में उठाए एक मकान के अंदर ले गया था, जबकि कार सीधी निकल गई थी। रश्मि ने टैक्सी उस घर से दूर रुकवाई और कार वाले को पैसे दिए और घर की ओर चल पड़ी। इस आबादी में आसपास कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था उस ने घर की चारों ओर से समीक्षा की और फिर एक छोटी दीवार को देखकर इंतिहाई कौशल के साथ दीवार पर चढ़ घर के अंदर छलांग लगा दी। छलांग लगाते हुए उसने इस बात का ध्यान रखा कि आवाज पैदा न हो और वह इसमें काफी हद तक सफल भी हुई थी, कराटे की ट्रेनिंग तो वह पहले ही ले चुकी थी जब वह पाकिस्तान में थी और अमजद के साथ भी इस तरह के काम उसकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थे।


घर के अंदर जाकर वह बड़ी सावधानी के साथ आगे बढ़ने लगी और उसने अपनी पिस्टल निकाल कर अपने हाथ में पकड़ कर उसे लोड भी कर लिया था और सेफ्टी लॉक भी हटा चुकी थी। तभी उसे एक कमरे के सामने कुछ हलचल दिखाई दी, दरवाजा बाहर खुला था और उसके नीचे से आने वाली रोशनी से अनुमान हो रहा था कि दरवाजे के दूसरी ओर कोई मौजूद है, समीरा बहुत सावधानी के साथ उस कमरे के पास गई तो अंदर कर्नल इरफ़ान के ठहाके सुनाई दिया, और फिर उसे रश्मि की आवाज सुनाई दी जो मेजर राज को फोन पर हौसला दे रही थी और देश की खातिर अपनी पत्नी और होने वाले बच्चे की चिंता न करने की हिदायत कर रही थी। समीरा अपना सिर पकड़ कर बैठ गई। ये तो मेजर राज की पत्नी थी और उम्मीद से थी। उसके पेट में मेजर राज का बच्चा था। और दुराचारी कर्नल इरफ़ान उसे मारने के लिए तैयार बैठा था।

समीरा ने कुछ देर इंतजार किया फिर दबे कदमों के साथ दरवाजे की ओट लेकर अंदर का दृश्य देखने लगी, जहां कर्नल इरफ़ान मेजर राज को समझा रहा था कि लोकाटी का वीडियो न चलाए तो उसकी पत्नी की जान बच जाएगी। समीरा अब अपनी माँ का बदला भूल चुकी थी, उसके पास अब एक देश के लाड़ले सिपाही की पत्नी और उसके होने वाले बच्चे का जीवन था जिनकी परवाह किए बिना वो सैनिक अपने देश को बचाने की आखिरी कोशिश कर रहा था। फिर जब कर्नल इरफ़ान को फोन पर लोकाटी की वीडियो की सीडी चलने की आवाज आई तो उसने मेजर राज को ललकारा कि तू नहीं माना यह ले तेरे पत्नी और बच्चे गए, फिर कर्नल इरफ़ान ने रश्मि की तरफ अपनी बंदूक का रुख किया और गोली चलने आवाज आई तो रश्मि की एक जोरदार चीख निकली।


यह गोली कर्नल इरफ़ान ने नहीं बल्कि समीरा की पिस्टल से निकली थी जो सीधी कर्नल इरफ़ान के दाहिने कंधे में जाकर लगी थी, रश्मि ने यही समझा कि यह गोली उसके ऊपर चली है जिसकी वजह से उसकी चीख निकल गई थी जबकि कर्नल इरफ़ान के हाथ से रिवॉल्वर गिर गया और दूर जा गिरा, उसने दर्द की तीव्रता से अपना कंधा पकड़ लिया और पीछे मुड़कर देखा जहां एक युवा लड़की उस पर पिस्टल ताने खड़ी थी। कर्नल की आंखों में अब डर था। उसने धीरे धीरे अपनी गिरी हुई बंदूक की तरफ जाना शुरू किया और समीरा से पूछा तुम कौन हो ???


समीरा ने कहा, मैं भी मेजर राज की तरह इस देश की बेटी हूँ। मेरा नाम समीरा है ...

समीरा नाम सुनकर कर्नल इरफ़ान तुरंत समझ गया कि यह अमजद की साथी है। कर्नल इरफ़ान ने कहा मगर तुम्हारे भाई को तो मुक्त कर चुका हूँ तुम अब यहाँ क्या लेने आई हो ???

तो समीरा ने कहा कि इस लड़की को बचाने आई हूँ, यह इस देश के सैनिक का सम्मान है, और तुझ जैसा हैवान इंसान उसकी तरफ बुरी नजर से देखे या उसको नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे, ऐसा होने नहीं दूँगी। इस दौरान कर्नल इरफ़ान अपनी रिवॉल्वर के करीब पहुंच चुका था, उसने झुक कर अपनी रिवॉल्वर उठानी चाहिए तो समीरा की पिस्टल से एक गोली निकली जो कर्नल इरफ़ान के पैर में लगी और कर्नल इरफ़ान लड़खड़ा गया और जमीन पर आ गिरा और समीरा ने जल्दी से आगे बढ़कर कर्नल इरफ़ान से कुछ दूरी पर पड़ी रिवॉल्वर को अपने पांवों से दूर कर दिया और फिर कर्नल इरफ़ान की तरफ रिवॉल्वर तान कर खड़ी हो गई।

कर्नल इरफ़ान अब जमीन पर लेटा दर्द से कराह रहा था, उसको इस बात की तकलीफ थी कि उसे मारने वाला कोई भारतीय सेना का जवान नहीं बल्कि एक साधारण लड़की है। यह दुख उसे अंदर ही अंदर खाए जा रहा था, उसकी मौत उसकी आँखों के सामने थी, वह हमेशा से युद्धक्षेत्र में अपनी टक्कर के आदमी से गोली खाकर मरना चाहता था मगर यहां चूहे की तरह एक मामूली और मासूम लड़की के हाथों मौत उसे किसी स्थिति को स्वीकार नहीं थी . वह पूरे जीवन लड़ा था, मगर उसने यह कभी नहीं सोचा था कि वह एक लड़की के हाथों कुत्ते की मौत मारा जाएगा।

अब समीरा ने कर्नल इरफ़ान को कहा, केवल लड़की को बचाने ही नहीं बल्कि मैं अपनी माँ का बदला लेने भी आई हूँ, आज से 10 साल पहले तूने आज़ादकश्मीर के एक गांव में मेरे पिता और मेरी माँ को मेरी आँखों के सामने मार दिया था, और तुझ जैसे बेगैरत आदमी ने मेरी माँ को मारने से पहले उसकी इज्जत भी तार-तार कर दी थी, तब मैं एक छोटी 10 साल की बच्ची थी जो अपनी माँ के लिए कुछ नहीं कर सकती थी, तब से मैं अमजद के साथ हूँ, एक ही कारण से, कि अपनी दुखियारी माँ का बदला ले सकूँ और तुझे मौत के घाट उतार कर हजारों मासूम महिलाओं की इज्जत बचा सकूँ .. आज तू मिल ही गया आखिरकार आज तो तुझे मैं नही छोड़ूँगी, यह कह कर समीरा ने एक और गोली चलाई जो कर्नल के हाथ में लगी थी।

फिर समीरा ने रश्मि की ओर बढ़ कर उसके हाथों से रस्सी खोल दी और उसकी टांगों को भी आज़ाद कर दिया, इस दौरान वह पूरी तरह चौकान्नी थी कि कर्नल इरफ़ान अपनी जगह से हिलने न पाए, वह जानती थी कि 3 गोलियां लगने के बावजूद कर्नल किसी भी समय जवाबी हमला कर सकता था, दुश्मन को कमजोर न समझना उसने राज से सीखा था। रश्मि को मुक्त करवाने के बाद समीरा ने कमरे में नज़रें दौड़ाई तो वहाँ उसे एक लोहे का रॉड नजर आया, समीरा ने पहले कर्नल इरफ़ान की गन अपने कब्जे में ली फिर लोहे की रॉड उठाकर कर्नल इरफ़ान की ओर बढ़ी और कर्नल इरफ़ान के दोनों पैरों के बीच समीरा ने एक जोरदार वार किया, लोहे का रॉड सीधा कर्नल के लंड पर जाकर लगा जिससे उसकी दिलख़राश चीखें पूरे कमरे में गूंजने लगीं, फिर समीरा ने उसी स्थान पर एक और वार किया, फिर दूसरा फिर तीसरा ....


लगातार वार कर करके समीरा ने कर्नल की हालत खराब कर दी थी, 3 गोलियां खाने के बाद भी शायद कर्नल इरफ़ान उठकर जवाबी हमला कर सकता था मगर अब जिस जगह पर समीरा ने हमले किए थे अब सवाल ही पैदा नहीं होता था कि कर्नल इरफ़ान उठने की हिम्मत कर सके। फिर समीरा ने रिवॉल्वर उठाई और बोली तू राफिया का बदला इस मासूम से लेना चाहता था न तो सुन मेजर राज एक कर्तव्यनिष्ठ जागरूक सिपाही है, उसने तेरी बेटी को एक खराश तक नहीं पहुंचाई, बस तुझे धमकी दी कि तू हमारे साथियों को छोड़ दे, आज भी तेरी बेटी अपने घर बैठी मेजर राज का इंतजार कर रही होगी, वह तो मेजर से प्यार करने लग गई है, यहाँ का सिपाही हमारे वतन गया तो वहां की बेटी हमारे सिपाही के प्यार में डूब गई और आज भी मेजर को याद करती है और तुझ जैसा बेगैरत व्यक्ति जो पुरुषों की तरह लड़ने की हिम्मत नहीं रखता यहाँ के सिपाहियों की इज्जत पर हाथ डालने चला था ??? मगर यह भूल गया कि राज की साथी भी और यहाँ की बेटी भी किसी सिपाही से कम नहीं, तुझ जैसे पाकिस्तानी चूहों को तो हम अपने पांव तले रौंद देंगी।

यह कह कर समीरा ने कर्नल इरफ़ान के लंड का लक्ष्य लेकर एक और गोली चलाई जिससे कर्नल की चीखें कमरे में गूंजने लगीं। कुछ ही देर में यह चीखें खत्म हो गई थीं कर्नल बेहोश हो चुका था, दर्द की तीव्रता से वह अपने होश और हवास खो चुका था। समीरा कर्नल के लंड पर इसलिए हमला कर रही थी कि इसी लंड ने समीरा की मां की इज्जत लूटी थी। समीरा ने लंड का सिरे से ही सफाया कर दिया था कर्नल को बेहोश हालत में छोड़कर समीरा रश्मि को लेकर उस स्थान से बाहर आ गई, मगर अपनी पिस्टल में एक गोली वह कर्नल के लिए छोड़ आई थी। कर्नल को जब होश आया और उसने देखा कि वह अब नपुंसक हो चुका है, तो उसने पास पड़ी पिस्टल से खुद ही अपने सिर में गोली मार कर अपने जीवन का अंत कर लिया था। एक कायर की तरह आत्महत्या कर कर्नल इरफ़ान ने अपने आपको उस अपमान से तो बचा लिया था जो विफलता की कालिख मुंह पर लिए और ना मरदी का ग़म दिल में लिए वो जीवित अपने देश वापस जाता , मगर एक कायर की तरह आत्महत्या करने का अपमान रहती दुनिया तक उसके लिए बदनामी का कारण बन गया था .

रश्मि को खैरियत से घर पहुंचाने के बाद समीरा जाने लगी तो रश्मि ने उसे रोक लिया और मेजर राज के आने तक रुकने को कहा, समीरा मेजर के आने से पहले पहले चली जाना चाहती थी मगर ऐसा न हो सका रश्मि को वह इनकार ना कर सकी । फिर मेजर मिनी भी वहीं आ गई तो समीरा ने मेजर मिनी को कर्नल इरफ़ान की हालत के बारे में बताया, मेजर मिनी ने सेना के कुछ जवान भेजकर कर्नल इरफ़ान की मौत की पुष्टि करवाई और फिर उसकी लाश का उपहार सीमा पर भिजवा दिया उसकी लाश से निराशा स्पष्ट दिख रही थी और उसकी कनपटी में गोली का निशान इस बात का सबूत था कि इतने बड़े कर्नल ने आत्महत्या कर ली, जो पाकिस्तानी सेना के लिए एक ज़िल्लत से कम नहीं थी।

मेजर राज को यह सब पता चला तो उसने एक बार फिर समीरा का बहुत बहुत धन्यवाद किया और फिर धन्यवाद करने के बाद अपने कमरे में चला गया।

समीरा एक दिन मेजर राज के घर ही रही, तो अगले दिन मेजर राज की पदोन्नति समारोह में भाग लेने के बाद रश्मि और राज ने अपने अधूरे हनीमून को पूरा करने का कार्यक्रम बनाया, लेकिन ये कार्यक्रम अभी घर पर नहीं बल्कि आज़ाद कश्मीर जा कर बनाना था। रश्मि और राज समीरा को साथ लिए आज़ाद कश्मीर चले गए थे जहां लेफ्टिनेंट कर्नल राज ने समीरा को अमजद को सौंप दिया था, अमजद भी लेफ्टिनेंट कर्नल राज को देखकर और उसके कारनामे और रुतबा सुनकर बहुत खुश हुआ साथ ही अपना वादा निभाया और समीरा को सही सलामत वापस उसके घर पहुंचाने में वो लेफ्टिनेंट कर्नल राज का बहुत आभारी था। वापसी से पहले अमजद ने राज को अपनी और समीरा की सेवाओं की पेशकश करते हुए कहा आगे कभी भी तुम्हारे वतन को हमारी जरूरत पड़े तो हमें ज़रूर बताना, तुम्हारे वतन की खातिर जान देनी पड़ी तो हम कभी पीछे नहीं हटेंगे। यह कह कर अमजद लेफ्टिनेंट कर्नल राज से गले मिली और अपनी बहन समीरा को लेकर वापस चला गया, जबकि राज अपनी नई नवेली दुल्हन, जिसके साथ उसने महज 2 से 3 घंटे ही सुहाग रात पर बिताए थे, लेकर आर्मी के हट में चला गया जो उसने स्पेशल अपने अधूरे हनीमून को पूरा करने के लिए बुक करवाया था। अपने कमरे में जाते ही रश्मि बाथरूम में गई, और जब बाहर निकली तो उसके बदन पर एक सेक्सी नाइटी थी जिसको देखकर लेफ्टिनेंट साहब का 8 इंच लंड अपनी पैंट में सिर उठा चुका था। थोड़ी देर बाद ही वह 8 इंच लंड रश्मि के मुँह में था जिसे वह बहुत मज़े से चूस रही थी और राज सोच रहा था कि जो मज़ा अपनी पत्नी के साथ सेक्स करने में है वह किसी और के साथ सेक्स करने में नहीं। भौतिक सुख तो शायद कोई और औरत भी दे दे, लेकिन आत्मा को संतोष तभी मिलता है जब प्यार करने वाली पत्नी के साथ सेक्स किया जाए।

आगे लेफ्टिनेंट कर्नल राज ने अपनी पत्नी को कैसे चोदा, कब चोदा, किस किस स्थिति में चोदा, यह बताने की जरूरत यहाँ नहीं है ...

उम्मीद है सभी दोस्तो को मेरी यह कोशिश पसंद आई होगी जिसमें सेक्स के साथ साथ मैं वतन की मोहब्बत को उजागर करने की भी एक नाकाम सी कोशिश की है। अगर पसंद आए तो एक बार जोर से नारे जरूर लगाइयेगा:

जय हिंद .......


<<<<<<<<<<<<<<<<<<< समाप्त >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>

साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj sharma

Re: वतन तेरे हम लाडले

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Kamini
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Re: वतन तेरे हम लाडले complete

Post by Kamini » 10 Nov 2017 22:20

Jay hind Jay hind Jay hind Jay hind Jay hind

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jay
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Re: वतन तेरे हम लाडले complete

Post by jay » 11 Nov 2017 08:40

superb end Raj bhai
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Dolly sharma
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Re: वतन तेरे हम लाडले complete

Post by Dolly sharma » 12 Nov 2017 19:00

superb.................story .................superb ..................end

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Kamini
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Re: वतन तेरे हम लाडले complete

Post by Kamini » 12 Nov 2017 23:15

New story kab la rahe hain

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