नए पड़ोसी

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jay
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Re: नए पड़ोसी

Post by jay » 20 Nov 2017 19:25

मित्र आपकी कहानी के 2 लाख व्यूज का पड़ाव पार करने पर

आपको बहुत बहुत बधाई

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(ज़िन्दगी एक सफ़र है बेगाना running.......).
(वक्त का तमाशा running)..
(ज़िद (जो चाहा वो पाया) complete).
(दास्तान ए चुदाई (माँ बेटी बेटा और किरायेदार ) complete) .. (सातवें साल की खुजली complete)
(एक राजा और चार रानियाँ complete).............(माया complete...)-----(तवायफ़ complete).............
(मेरी सेक्सी बहनें compleet)........(दोस्त की माँ नशीली बहन छबीली compleet)............(माँ का आँचल और बहन की लाज़ compleet)..........(दीवानगी compleet )....... (मेरी बर्बादी या आबादी (?) की ओर पहला कदमcompleet)........(मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग)........


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(कोई तो रोक लो)
(ननद की ट्रैनिंग compleet)..............( सियासत और साजिश)..........(सोलहवां सावन)...........(जोरू का गुलाम या जे के जी).........(मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन)........(कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास)........(काले जादू की दुनिया)....................(वो शाम कुछ अजीब थी)

Re: नए पड़ोसी

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Rishu
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Re: नए पड़ोसी

Post by Rishu » 25 Nov 2017 00:13

अगले दिन हम लखनऊ लौट कर आ गए. उसी दिन रात में रेणुका ने मुझे फोन कर दिया की वो लोग ठीक से पहुच गए है और ये भी बताया की राजेश उसके साथ एक शानदार होटल के सुइट में रुका है. उस दिन के बाद न रेणुका का फ़ोन आया न राजेश का. राजेश मेरी बीवी के साथ एक ही होटल में रह सकता था क्योंकि वहाँ उन्हें कोई देखने वाला नहीं था पर मुझे और दिव्या को ये छूट नहीं थी क्योंकि यहाँ मोहल्ले वाले जो थे तो रोज शाम को मैं छत कूद कर राजेश के यहाँ चला जाता और रात भर दिव्या की जबदस्त चुदाई करता और सुबह वापस अपने घर आकर बैंक चला जाता.

हमारे लौटने के बाद काफी दिन यही सिलसिला चलता रहा और दिव्या को मैं जितना चोदता उतनी ही उसे चोदने की ललक बढती जाती पर मेरा ये काम भी गड़बड़ हो गया क्योंकि दिव्या और राजेश की बेटी जो हॉस्टल में रहती थी वो एक हफ्ते की छुट्टियों में घर आ गयी. उसके आने से एक दिन पहले ही दिव्या ने मुझसे कह दिया "देखो मनीष, कल सुरभि घर आ रही है. वो एक हफ्ते रहेगी तो तुम एक हफ्ते तक मेरे पास मत आना."

मुझे लगा की अब एक हफ्ते मैं क्या करूंगा क्योंकि अभी रेणुका और राजेश को वापस आने में १०-१२ दिन बाकी थे तो मैंने रश्मि दीदी को फ़ोन किया. इधर उधर की बात के बाद मैंने कहा "दीदी कितने दिन हो गये तुम यहाँ नहीं आई. कुछ दिनों के लिए आ जाओ न. तुम्हारी बड़ी याद आ रही है." पर दीदी ने मना कर दिया. वो बोली "यार अभी तो नहीं आ सकती. कुछ दिनों बाद कोशिश करती हूँ."

तो अगले एक हफ्ता मुझ पर भारी बीता. कभी दीदी को याद करके मुठ मारी तो कभी दिव्या को और कभी मेरी बीवी राजेश से कैसे चुद रही होगी ये सोच कर. बीच में एक दिन छुट्टी ले ली और जाकर नीलम भौजी को छोड़ आया पर अब वो भी वैसा मजा नहीं देती थी. खैर जैसे तैसे हफ्ता बीता और सुरभि वापस गयी.

उसी दिन शाम को मैं दिव्या की भीषण चुदाई के मूड में उसके घर पंहुचा तो वो किचन में कुछ काम कर रही थी तो मैं उससे इधर उधर की बात करने लगा. मैंने दिव्या से पुछा "वैसे तो सुरभी यहाँ सिर्फ लम्बी छुट्टियों में आती थी इस बार हफ्ते की छुट्टी में कैसे आ गयी."

Rishu
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Re: नए पड़ोसी

Post by Rishu » 25 Nov 2017 00:14

"वो जिस हॉस्टल में रहती है वही पास में मेरे भाई का घर है तो जब छोटी थी तो छुट्टियों में वहीँ चली जाती थी. हम भी अक्सर उससे मिलने वही चले जाते थे पर अब तो १२वी में है, बड़ी हो गयी है, ट्रेन में अकेले चली आती है और भाई भाभी कहीं बाहर गए थे तो वो यहाँ चली आई." दिव्या ने जवाब दिया.

"कितने साल की हो गयी सुरभि" मैंने पुछा.

"उसके बारे में कुछ गन्दा मत सोचो." दिव्या ने मुझे टोका.

"कैसी बात करती हो. मैं तो ऐसे हो पुछ रहा था. वैसे यार काफी दिन हो गए रेणुका ने भी फ़ोन नहीं किया और न ही राजेश ने. ये लोग जब पहुचे थे तब फोन किया था फिर कोई खबर ही नही दी." मैंने बात बदलते हुए कहा.

"अरे राजेश को तो नयी चूत मिली है. वो अभी कम से कम ६ महीने उसी में डूबा रहेगा और रही बात रेणुका की तो उसे भी तो खुल कर चुदाने का मौका पहली बार मिला है. तुमने देखा नहीं पर राजेश जब मूड में होता है तो औरत को एकदम रंडी बना कर चोदता है, गाली देता है, पेशाब पीना पिलाना, कोई लिमिट नहीं रखता. उस सेक्स में अपना ही एक मजा होता है. तुम तो वैसा कभी करते नहीं तो तुम्हे क्या पता होगा पर मैं जानती हूँ की रेणुका तो मस्त हो गयी होगी अब उनको हमारी याद क्या आयेगी." दिव्या ने कहा.

"मुझे पता है. ऐसा नहीं है की डर्टी सेक्स मैंने नहीं किया है." मैंने दिव्या से कहा.

"क्या रेणुका के साथ कभी किया है?" दिव्या ने पुछा.

"नहीं रेणुका के साथ तो नहीं पर अपनी बहन के साथ किया है. हम एक दुसरे से बहुत प्यार करते है. सिर्फ वही है जिसका मैंने पेशाब भी पिया है." मैंने दिव्या से कहा.

"अच्छा. वैसे देखने में तो रश्मि बड़ी सीधी लगती थी." दिव्या ने कहा.

"तुम भी तो बहुत सीधी लगती हो मेरी जान. बच्चो के स्कूल की इस टीचर को कोई चुदते वक़्त देखे." मैंने कहा और हम दोनों हसने लगे. दिव्या बोली "आज तुम भी राजेश की तरह मुझे रंडी बनाकर चोदना. गालियाँ दे देकर."

Rishu
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Re: नए पड़ोसी

Post by Rishu » 25 Nov 2017 00:16

तभी दरवाजे की बेल बजी. मैंने दिव्या से कहा "मैं छत पर चला जाता हूँ तब तुम दरवाजा खोलना."

दिव्या बोली "नहीं. तुम बाथरूम में चले जाओ. कोई भी होगा मैं उसको टाल दूँगी."

मैं जल्दी से बाथरूम में चला गया और देखने लगा की कौन आया है. मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब मैंने देखा की दरवाजे पर रश्मि दीदी खड़ी है. दीदी दिव्या से बोली "भाभी जी मैं आपके पडोसी मनीष की बहन हूँ. उसको बर्थडे सरप्राइज देना था तो बताया नहीं की मैं आने वाली हूँ पर मुझे ही सरप्राइज मिल गया. मनीष के घर पर कोई नहीं है. काफी देर से बेल बजा रही हूँ पर कोई दरवाजा नहीं खोल रहा."

"अरे रश्मि मैं तुम्हे पहचानती हूँ. अच्छा हुआ जो मेरे घर आ गयी. मनीष यही है."दिव्या ने रश्मि दीदी को बोला और घर के अन्दर ले आई.

"कहाँ है मनीष और रेणुका." दीदी ने अन्दर आकर पुछा.

"मनीष तो बाथरूम में है पर रेणुका यहाँ नहीं है" दिव्या बोली.

" रेणुका नहीं है तो मनीष यहाँ क्या कर रहा है? " दीदी ने पुछा.

"रेणुका तो बैंकाक गयी है तो मनीष मेरे पास खाना खाने आता है." दिव्या बोली.

मुझे लगा की दीदी को सब बात मुझे ही बतानी चाहिए तो आगे कुछ बात हो इससे पहले ही मैं बाथरूम से निकल आया. आते ही मैंने रश्मि को गले लगाया और पुछा "अरे दीदी तुम अचानक बिना बताये."

"अरे तेरे जीजा कुछ दिनों के लिए बाहर गए है तो मैं बोर हो रही थी. सोचा की कुछ दिन तेरे और रेणुका के साथ गुजारू और कल तेरा बर्थडे भी तो है इसीलिए चली आई पर रेणुका किसके साथ गयी तूने मुझे बताया नहीं." दीदी ने पुछा.

"चलो पहले घर चलो बाकी बात वहीँ करते है." मैंने दीदी से कहा.

"पर खाना" दिव्या ने पुछा.
"

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