नए पड़ोसी

दोस्तो इस फोरम में आप हिन्दी और रोमन (Roman ) स्क्रिप्ट में नॉवल टाइप की कहानियाँ पढ़ सकते हैं
Rishu
Silver Member
Posts: 425
Joined: 21 Mar 2016 02:07

Re: नए पड़ोसी

Post by Rishu » 11 Nov 2017 16:41

एक दिन मेरी ब्रांच में मेरे पडोसी राजेश अपनी बीवी के साथ आये. वो मुझे पहचानते तो थे ही तो मुझे देखते ही मेरे पास आ गए और बोले "मनीष जी क्या इसी बैंक में काम करते है."
मैंने कहा "जी हाँ, बताइए क्या बात है."
"दरसल अपना एक करंट अकाउंट और इनका सेविंग अकाउंट खुलवाना है" राजेश ने कहा.
"आप लोग फॉर्म भर दीजिये. एड्रेस प्रूफ, फोटो वगेरह दे दीजिये. मैं खुलवा देता हूँ." मैंने कहा.
"अभी तो हम पेपर्स लाये नहीं है. सिर्फ पूछने आये थे की बिना गारेंटी के अकाउंट खुल जायेगा क्या?" पहली बार दिव्या ने कुछ कहा तो मैंने पाया की उसकी आवाज बहुत मीठी थी. मैंने पहली बार उसकी तरफ गौर से देखा तो पाया की वो काफी सुन्दर है. शायद रंग गेहुआ होने के कारण मैंने कभी उन पर ध्यान नहीं दिया और वैसे भी वो सुबह जल्दी स्कूल चली जाती होगी और जब दोपहर को लौटती होगी तो मैं बैंक में रहता होऊंगा और उसके अलावा को ज्यादा घर से बाहर नहीं आती जाती तो कभी सामना ही नहीं होता जो इतना ध्यान देता. वैसे भी रश्मि दीदी को चोदने के बाद मैंने दूसरी लड़कियों पर ध्यान देना थोडा कम कर दिया था पर बड़ी उम्र की औरतें तो मेरी कमजोरी थी ही. अभी भी कभी कभी मौका मिलने पर नीलम आंटी को चोद ही लेता था. वैसे दिव्या उतनी बड़ी भी नहीं थी. मुझसे करीब १० साल बड़ी होगी. अचानक मुझे महसूस हुआ की मैं ये सब सोचता हुआ दिव्या को कुछ ज्यादा ही घूरे जा रहा था तो मैंने झेप मिटाने के लिए कहा "अरे आप लोगो की गारेंटी के लिए मैं हूँ न. आप लोग कल आ जाइये. मैं सब करवा दूंगा."
"कल मैं तो आ जाऊँगा पर इनका मुश्किल है. आज तो इनके स्कूल की छुट्टी है तो ये आ गयी. अब तो अगली बार जब इनकी छुट्टी होगी तब मैं इन्हें लेकर आ जाऊँगा." राजेश बोला.
मैंने कहा "चलिए उसकी भी कोई जरूरत नहीं. मैं शाम को आपके घर आ जाऊँगा. सब फॉर्मेलिटी पूरी करवा लूँगा और एक दो दिन में अकाउंट खुलवा कर कागज भी आपके घर पर ही दे जाऊँगा. ठीक है."
"सच. आपका बहुत शुक्रिया. दरअसल मेरे स्कूल वालों ने इसी महीने से मेरी सैलरी चेक से देनी शुरू कर दी है और मेरा कहीं भी कोई बैंक अकाउंट नहीं है. अगर आप ये करवा दे तो..." दिव्या ने मेरे कानों में शहद घोला.
"शुक्रिया की क्या बात. आखिर पडोसी पडोसी के काम नहीं आयेगा तो कौन आयेगा. शाम को ७ बजे मिलते है." मैंने राजेश से हाथ मिलाते हुए कहा और वो दोनों चले गए. मुझे दिव्या की खूबसूरती ने इतना इम्प्रेस किया की मैंने सोचा की इनसे तो जान पहचान बढ़ानी ही चाहिए. हो सकता है की कुछ वैसा फायदा हो जाए जो पहले हुआ था तो इसीलिए शाम दीदी से बोलकर मैं उनके घर फॉर्म वगेरह लेकर पहुच गया. दरवाजा दिव्या ने खोला और मुझे अन्दर बुलाया. बहुत साल बाद इस घर में आया था. इन लोगों ने घर में काफी बदलाव करवा लिए थे. दिव्या मुझे ड्राइंग रूम में ले गयी जहा राजेश टीवी देख रहा था. मुझे देखकर राजेश खड़ा हो गया और मुझसे हाथ मिलाया. मैंने उन दोनों से फॉर्म पे साइन करवाए. पेपर्स वगेरह लिए और कहा "तो ठीक है राजेश भाई. मैं चलता हूँ."
"अरे आज पहली बार आप मेरे घर आये हैं मनीष जी ऐसे सूखे सूखे थोड़े ही जाने दूंगा. मैं तो वेट कर रहा था की पहले काम वगेरह हो जाए फिर महफ़िल जमाई जाए. जाओ दिव्या इन्तेजाम करो." राजेश बोला और दिव्या अन्दर चली गयी.
"अरे आप लोग परेशान न हो. घर पर दीदी मेरा वेट कर रही होंगी." मैंने मना किया.

Re: नए पड़ोसी

Sponsor

Sponsor
 

Rishu
Silver Member
Posts: 425
Joined: 21 Mar 2016 02:07

Re: नए पड़ोसी

Post by Rishu » 11 Nov 2017 16:42

"अरे अभी कौन सा रात के १२ बज गए है. दो दो पेग हो जाए फिर चले जाइएगा आप." राजेश ने कहा तब तक दिव्या एक ट्रे में काजू, गिलास, सोडा और स्कॉच की बोतल लेकर आ गयी. वैसे तो मैंने पहले भी दोस्तों के साथ पी है. लाला ओम मयंक वगेरह के साथ भी पर कभी स्कॉच नहीं पी और इधर तो कई महीनो से शराब नहीं पी थी.स्कॉच देख कर मैंने सोचा की थोड़ी देर बैठ ही लेते है. मैंने कहा "एक शर्त पर बैठूंगा."
"कैसी शर्त मनीष जी?" राजेश ने पुछा.
"यही की आप लोग मुझे जी और आप नहीं बुलाएँगे. आप मुझसे उम्र में करीब १७ साल बड़े है." मैंने कहा.
"मंजूर है यार अब तो बैठो. पर तुम्हे कैसे पता की मैं तुमसे कितना बड़ा हूँ." राजेश ने हँसते हुए पुछा.
"अभी तो इस फार्म में आप दोनों ने अपनी उम्र भरी है. आप मुझसे १७ साल और भाभी से ७ साल बड़े है." मैंने कहा तो दिव्या ने हँसते हुए कहा "ये तो बड़ी गड़बड़ हो गयी जो तुमको मेरी उम्र पता चल गयी." और हम दोनों के लिए पेग बनाकर वो किचन में चली गयी.
मैं करीब २ घंटे उनके यहाँ रुका और खा पीकर घर आया. मैंने महसूस किया की मैं करीब ४ साल से दीदी को रोज चोद रहा था और अब थोडा थोडा बोर हो गया था पर आज पीकर जब मैंने दीदी को चोदा तो एक ताजगी का एहसास हुआ. दीदी भी बोली "आज बहुत दिनों बाद काफी जोश में थे? क्या हुआ? क्या बगल वाली भाभी समझ कर चोद रहे थे."
मैंने कहा "वैसे आज तो नहीं सोच रहा था पर कल हम लोग रोल प्ले करेंगे. तुम दिव्या बनना. बड़ा मजा आयेगा." और सच में अगले दिन दीदी दिव्या बनी और मैं राजेश और हम दोनों को बड़ा मजा आया. इस तरह मेरी और दीदी की सेक्स लाइफ जो सूख रही थी उसमे फिर से रस धार बह निकली. कुछ दिन बाद मैं फिर से राजेश के घर उनकी पासबुक वगेरह देने पंहुचा तो राजेश उस दिन भी पी रहे थे. उन्होंने फिर से मुझे साथ बिठा लिया. उस दिन मुझे पता चला की वो नियम से रोज ही पीते है. उस दिन भी मैंने ३ पेग लगाये और घर लौट कर दीदी को जबरदस्त चोदा. करीब ६ महीने में ही मैं भी राजेश की तरह रोज पीने वाला हो गया और राजेश मेरा रोज का साथी. कभी मैं उसके घर चला जाता तो कभी वो मेरे घर. राजेश खुले दिल का आदमी था. मेरे घर तो कोई ज्यादा आता जाता नहीं था पर राजेश के यहाँ काफी लोग आते रहते. मैंने देखा की हर २-३ हफ्ते में उसका कोई रिश्तेदार या दोस्त वीकेंड में उसके घर पर रहने आ ही जाता था तब हम लोग साथ बैठ कर नहीं पी पाते. मैंने कई बार कोशिश की कि दीदी मेरा साथ देने लगे पर दीदी कभी कभी चख जरूर लेती थी पर इससे ज्यादा नहीं.

Rishu
Silver Member
Posts: 425
Joined: 21 Mar 2016 02:07

Re: नए पड़ोसी

Post by Rishu » 11 Nov 2017 16:42

अब मेरे रिश्तेदार हमारे ऊपर दबाव डालने लगे की अब मैं दीदी की शादी कर दूं. दीदी तो मना कर देती पर मैं क्या करता. आखिर मामा ने दिल्ली में ही एक लड़का फाइनल करके मुझसे कह दिया की अब मैं देर न करूं और दीदी की सगाई कर दूं. अब हम मामला ज्यादा टाल नहीं सकते थे. दीदी की पढाई भी पूरी हो गयी थी और लड़के वालों ने कोई डिमांड भी नहीं की. लड़का देखने में भी अच्छा था. बढ़िया नौकरी, अच्छा खानदान मतलब हमारे पास कोई बहाना नहीं बचा तो आखिरकार दीदी की सगाई हो ही गयी और 2 महीने बाद शादी भी. दीदी हनीमून के लिए गोवा गयी और जब वो वापस लौट कर आई तो उन्होंने मुझे फोन किया. थोड़ी देर तक हलचल लेने के बाद दीदी ने बताया "मनीष, जब मैं गोवा से वापस दिल्ली आ रही थी तो हम ३ दिन बोम्बे में रुके थे. जिस होटल में हम रुके थे न मुझे वही रुची मिली."
"रुची? वो वहां क्या कर रही थी" मैंने पुछा.
"वो उस होटल में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी कर रही है. उसने बताया की लाला उसको लेकर बॉम्बे गया था और कुछ दिन मज़े करने के बाद छोड़ कर भाग गया तो उसका टाइम शुरू में काफी ख़राब निकला. तरह तरह के काम किया उसने और अब उस होटल में नौकरी करती अहि और मयंक के साथ रहती है. मयंक भी बॉम्बे में ही रहता है वही नौकरी करता है. अंकल आंटी को सब पता है और अब वो उसकी शादी करने वाले है. वो चाहती थी की मैं एक बार मयंक से मिलूँ पर एक तो ये २४ घंटे मेरे साथ थे और दुसरे मेरा खुद का भी कुछ मन नहीं हुआ की कहीं कुछ लफड़ा न हो जाए." दीदी ने कहा.
"चलो अच्छा ही हुआ." मैंने कहा.
दीदी के दिल्ली जाने के बाद मेरा राजेश के यहाँ जाना और बढ़ गया. अक्सर मैं ऑफिस के बाद सीधे राजेश के घर पहुच जाता और खा पीकर ही वापस आता था पर जब उसके दोस्त वगेरह आ जाते तो मुझे दिक्कत होती थी. दिव्या के लिए मेरे दिल में अभी भी आग थी पर वो कभी कोई सिग्नल ही नहीं देती और इतने दिनों में मुझे ये भी समझ में आ गया की दोनों पति पत्नी आपस में बहुत प्यार भी करते है. ६-८ महीने और निकल गए और एक दिन मामा जी मुझसे मिलने आ गए. घर की हालत देख कर उन्होंने कहा की अब तुम भी कुछ सोचो शादी के बारे में. वैसे भी दीदी ने मेरी बीवी बन के ऐसी आदत डाल दी थी की अब मुझे बहुत दिक्कत हो रही थी. पेट की भूख तो जैसे तैसे मिट जाती थी पर जिस्म की भूख का कोई इंतज़ाम नहीं हुआ था. दिव्या के यहाँ भी कुछ नहीं हो पाया और मेरी नौकरी के चक्कर में कभी कभी दोपहर को जो नीलम आंटी की मिल जाती थी वो काम भी बंद हो गया तो मैंने सीधे सीधे मामा से कहा "सोच तो रहा हूँ मामा."
"कोई लड़की देखी है क्या?" मामा ने पुछा.
"नहीं फिलहाल तो नहीं." मैंने जवाब दिया.
"तो इसको देखो." मामा ने पॉकेट से एक फ़ोटो निकाल कर मुझे दिखाई. उफ्फ क्या फोटो थी. बहुत ही सुन्दर. बस समझ लीजिये की टेनिस प्लेयर मारिया शारापोवा की कार्बन कॉपी. मैंने पुछा "ये किसकी फोटो है."

Rishu
Silver Member
Posts: 425
Joined: 21 Mar 2016 02:07

Re: नए पड़ोसी

Post by Rishu » 11 Nov 2017 16:43

"अरे दिल्ली में मैं जिस घर में रहता हूँ ये उस मकान के मालिक की बेटी है रेणुका. शकल सूरत तुम देख लो. सीरत तो मैं इतने दिन से देख ही रहा हूँ. तुम्हारी और इसकी जोड़ी खूब रहेगी. आकर एक बार इससे मिल लो. अगर पसंद होगी तो बात पक्की कर लेंगे." मामा ने कहा. मैं तो फ़ोटो देखते ही फ्लैट हो गया था. अगले ही हफ्ते मैं दिल्ली पहुच गया और रश्मि दीदी की ससुराल में जाकर रुक गया. दीदी और जीजा जी अलखनंदा में रहते थे और मामा ग्रेटरकैलाश में. अगले दिन जीजा जी ऑफिस निकल गए और मैं और दीदी रेणुका से मिलने dlf माल चले गए. मुझे तो रेणुका फ़ोटो में ही पसंद आ गयी थी सामने से वो और भी सुन्दर थी. दीदी ने भी उसको अप्प्रूव कर दिया और हम लोग वापस लौट आये. घर लौट कर दीदी ने कहा "किस्मत खुल गयी तेरी. बहुत सही माल से शादी कर रहा है. मजा आ जायेगा जा रोज लेगा इसकी."
मैंने दीदी को किस करते हुए कहा "दीदी वो मजा कोई नहीं दे सकती जो तुमने दिया है. एक साल होने को है. अब और न तडपाओ जल्दी से बेडरूम में चलो. शाम को तो मामा रेणुका के घर वालो को लेकर आ जायेंगे. फिर जीजा जी भी वापस आ जायेंगे और कल मैं वापस चला जाऊँगा." दीदी मुस्कुराई और अपनी कमर मटकाते हुए बेडरूम की तरफ चल दी. मैंने गौर से देखा की शादी के बाद दीदी की गांड थोड़ी और बड़ी हो गयी थी.
बेडरूम में जाकर मैंने दीदी के साड़ी ब्लाउज और पेटीकोट उतार दिया. अब दीदी लाल रंग की ब्रा पैंटी में खड़ी थी. अब मैं रुक गया और गौर से उनकी तरफ देखने लगा. दीदी ने पुछा "क्या देख रहा है?"
मैंने बोला "दीदी शादी के बाद तो तुम एक हुस्न की परी बन गयी हो". मेरी बात सुनकर दीदी हंसने लगी. उन्होंने बोला "मनीष तू ज्यादा मक्खन मत लगा. अगर मैं तुम्हें इतनी ज्यादा अच्छी लगती थी तो मेरी शादी ही क्यों की. मैं तेरी ही वाइफ बन जाती." मैंने कहा "मेरी वाइफ तो तुम कई सालो से हो ही दीदी." और मैंने उनकी लाल ब्रा को उतारा और दीदी की चुंचिया को सहलाने लगा. फिर मैंने दीदी की पैंटी को उतारा और उनकी सुनहरी चूत को चाटने लगा. बहुत दिनों बाद आज दीदी की चूत के दर्शन हुए थे. मैं उनकी चूत को किसी कुत्ते की तरह बड़ी तेजी से चाटने लगा. दीदी को भी मजा आने लगा था. दीदी बोली जल्दी जल्दी कर भैया. जयादा टाइम नहीं है. फिर मैं उनकी चूत में मुंह में डाल कर चाटने लगा और दीदी आह्ह ईई ओऊ ईई अह्ह्ह अय्य्य अह्ह्ह आवाज करने लगी. मैं और तेज करने लगा, मैं तब तक चाटता रखा जब तक उनका पूरा पानी मेरे मुंह में नहीं आ गया.
फिर मैंने दीदी को अपनी गोद में उठाकर बेड़ पर लेटा दिया और किसी भूखे शेर की तरह उन पर झपट पड़ा. बहुत तेजी से मुंह में जीभ डाल कर किस करता रहा. फिर दीदी ने कहा "अरे बहनचोद जल्दी कर न."

Rishu
Silver Member
Posts: 425
Joined: 21 Mar 2016 02:07

Re: नए पड़ोसी

Post by Rishu » 11 Nov 2017 16:45

फिर मैंने उन्हें बेड से उठाकर सोफे पर बैठने को कहा फिर मैंने उनके दोनों पैरों को उठाया और फिर धीरे से अपना लंड चूत में डालने लगा. मैंने भी एक धक्का दिया. एक झटके में ही लंड दीदी की चूत में घुस गया. मैंने दीदी से पुछा "और दीदी जीजा जी ठीक से तो चोदते है न या फिर यहाँ भी और आशिक बना लिए है." दीदी सिसकारी लेते हुए बोली "जो कुछ करना था शादी से पहले कर लिया और अब तेरी दीदी की चुत पर सिर्फ तुम्हारा और तुम्हारे जीजा का हक है. वैसे ये भी चुदाई में ठीक है पर खुल कर नहीं करते समझा. अब जल्दी जल्दी घक्के मार न." दीदी ने कहा. मैं दीदी को तेजी से चोदने लगा, वह भी पूरा मजा लेने लगी. करीब २० मिनट ताबड़तोड़ धक्के मारने के बाद मैंने कहा "दीदी मैं झड़ने वाला हूँ कहाँ निकालू. मुह में या?"
"अन्दर ही निकाल दे मैं गोलिया लेती हूँ." दीदी ने कहा और मैंने अपना पूरा माल दीदी की चूत में ही निकाल दिया. थोड़ी देर हमने रेस्ट किया और फिर कपडे पहनने लगे. हमारी टाइमिंग बिलकुल सही थी. कपडे पहनते ही मामा रेणुका के मम्मी पापा को लेकर आ गये. उन लोगो ने मुझे पसंद किया और हमारा चट मंगनी पट ब्याह हो गया. मैं रेणुका को लेकर शिमला हनीमून के लिए गया. वापस आ कर भी मैं ज्यादातर रेणुका में ही लगा रहता तो मेरा राजेश और दिव्या से मिलना भी बेहद कम हो गया. बस एक बार उन दोनों ने शादी के बाद मुझे डिनर पर बुलाया और कभी कभी बैंक के काम से वो मेरे घर या बैंक आ जाते तो मुलाकात हो जाती. फिलहाल पीना वीना भी बंद हो गया. वैसे तो ज़िन्दगी सही ही चल रही थी पर रेणुका के साथ मैं वैसे सेक्स नहीं कर पाता था जैसा रश्मि दीदी, रुची या फिर दोनों आंटियों के साथ करता था क्योंकि रेणुका सेक्स के मामले में ज्यादा खुलती ही नहीं थी. हम लोगो की चुदाई सिर्फ मिशनरी पोजीशन तक ही सिमट कर रह गयी थी.
मुझे लगा था की धीरे धीरे रेणुका को मैं अपने जैसा बना लूँगा पर मेरी सारी कोशिशे बेकार हो गयी और शादी के 2 साल बाद भी रेणुका वैसे की वैसे ही रही. अँधेरा करके मिशनरी पोजीशन पर मैं क्या कर सकता था. इसका नतीजा ये हुआ की जहा मैं रश्मि दीदी को चोदते हुए मैं 4 साल तक बोर नहीं हुआ था रेणुका से 2 साल में ही हो गया. अब तो मैं उसे रोज चोदता भी नहीं था बस हफ्ते में एक दो बार.
ऐसे में ही एक दिन राजेश किसी काम से मेरे बैंक आया और हम लोगों की इधर उधर की बातें होने लगी. राजेश बोला "यार पहले तो हम लोग रोज ही मिलते थे. तुम्हारी शादी के बाद तो अब सिर्फ काम पड़ाने पर मुलाकात होती है." मैंने कहा "ऐसी तो कोई बात नहीं राजेश भाई."
"तो ठीक है आ आ जाओ घर पे सात बजे, मन हो तो रेणुका को भी लेते आना" राजेश ने कहा. और उस दिन से फिर से मेरा राजेश के साथ बैठ कर पीना शुरू हो गया.

Post Reply