लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

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Ankit
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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 13 Nov 2017 20:19

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Ankit
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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 13 Nov 2017 20:19

रामा बेटी… कहाँ हो सब लोग…?

उनकी आवाज़ सुनकर, हम तीनों को जैसे साँप सूंघ गया, जो जिस पोज़िशन में था, वहीं जम गया…

फिर भाभी को जैसे होश आया हो, वो झटपट मेरे मुँह से उठी, और दीदी से बोली –

रामा तुम जल्दी से नीचे चलो, मे दो मिनिट में आती हूँ…

दीदी लपक कर उठी, और गेट खोलकर नीचे भागती हुई चली गयी…

भाभी भूंभुनाते हुए अपनी मेक्सी पहनने लगी – ये बाबूजी को भी अभी आना था, थोड़ी देर बाद नही आ सकते थे…

हम दोनो की हालत हद से ज़्यादा खराब थी, हम ऐसी स्थिति में थे जहाँ से लौट पाना हर किसी के वश में नही होता…

लेकिन मेरे लिए खड़े लंड पे धोका (कलपद) कहो या, भाभी के लिए गीली चूत पे धोका (गक्पद).. हो ही गया था…दीदी तो बेचारी अभी शुरू ही हुई थी.

वो मेक्सी पहन कर थोड़ा अपने बाल वाल सही कर के, मेरे नंगे लंड को चूमकर जो किसी टोपे की तरह अभी भी सीधा खड़ा था बोली..

कोई बात नही बच्चू, तुझे मे बाद में देखती हूँ, और स्माइल कर के वो भी नीचे चली गयी…


आज हमें भैया का गौना करने जाना था.. सुबह से ही घर में चहल-पहल थी… दोनो भाई कल शाम को ही घर आ चुके थे..

दो गाड़ियों से हम भाभी के घर पहुँचे… एमएलए साब ने हम लोगों की खूब खातिरदारी की…

कामिनी भाभी ने जाते ही मेरा गिफ्ट मुझे दे दिया… ये एक बहुत ही वेल नोन ब्रांड का स्मार्ट फोन था जो अभी-2 लॉंच हुआ था…

मेने भाभी के गालों को किस कर के थॅंक्स कहा… तो वो मुस्कराते हुए बोली – ये तो आपका उधार था जो मेने पटाया है.. इसका थॅंक्स में आपसे कैसे ले सकती हूँ..

उसी दिन शाम को हम भाभी को लेकर विदा हो लिए… एमएलए साब ने विदा के तौर पर भैया और भाभी को एक शानदार रेनो फ्लूयेन्स कार गिफ्ट में दी…जिसे अच्छे से डेकरेट कर के नव बधू को विदा किया…

भैया खुद गाड़ी चलके लाए और उनकी दुलहानियाँ उनके आगोश में थी…

बड़े भैया तो दूसरे दिन ही अपनी ड्यूटी पर निकल गये…, छोटे भैया भी दो दिन अपनी दुल्हन को भरपूर प्यार देकर अपनी ड्यूटी लौट गये…

वो अब एसपी प्रोमोट हो चुके थे…, तो लाज़िमी है, ज़िम्मेदारियाँ भी बढ़ गयी थी.. इसलिए वो ज़्यादा समय नही दे पाए अपनी नव व्यहता पत्नी को…

लेकिन उनका प्लान था.. कि कुछ दिनो के बाद वो भाभी को साथ रखने वाले थे… इसमें घर पर भी किसी को एतराज नही था…!

इधर कॉलेज में रागिनी मुझसे हर संभव मिलने का मौका ढूढ़ती रहती…

मुझे नही पता कि उसके मन में क्या चल रहा था… लेकिन कुछ तो था जो मेरी समझ से परे था…

छोटी चाची की प्रेग्नेन्सी को भी पूरा समय हो चुका था… जिससे मोहिनी भाभी ज़्यादातर उनके पास ही रहती थी…

आक्शर मे भी उनके पास चला जाता, उनकी खैर खबर लेने, या कोई बाज़ार का अर्जेंट काम हो तो, ये सब जानने के लिए.

लेकिन शायद इतना काफ़ी नही था, कोई तो एक ऐसी अनुभवी औरत चाहिए थी, जो अब 24 घंटे उनके पास रह सके…

सो चाचा अपनी ससुराल जाकर अपने छोटे साले की पत्नी (सलहज) को ले आए…जो चाची की उमर की ही थी…

30 वर्षीया सरला मामी, भरे पूरे बदन की मस्त माल थी, खास कर उनकी गान्ड देख कर किसी का भी लंड ठुमके लगाने पर मजबूर हो जाए..

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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 13 Nov 2017 20:20

हल्के से साँवले रंग की 2 बच्चों की माँ सरला मामी, 36-32-38 का उनका कूर्वी गद्दार बदन बड़ा ही जान मारु था. कुछ-2 इस तरह का…

मे शाम को जब चाची के यहाँ पहुँचा तो मामी को उनके पास बैठा देख कर सर्प्राइज़ हो गया, मेने पहले उन्हें कभी देखा नही था.. सो चाची से पुच्छ लिया..

चाची ये कॉन हैं…? चाची ने बताया, कि ये मेरी छोटी भाभी हैं, तुम्हारी मामी…

मेने उन्हें नमस्ते किया, तो उन्होने अपनी कजरारी आँखें मेरे ऊपर गढ़ा दी, और बड़ी ही कामुक नज़र से देखते हुए मेरी नमस्ते का जबाब दिया…

चाची - भाभी, ये मेरे बड़े जेठ जी के सबसे छोटे लल्ला हैं, अंकुश नाम है इनका… कॉलेज में पढ़ते हैं…

मामी बोली – बड़े ही प्यारे लल्ला हैं दीदी आपके… ! इनसे तो मेल-जोल बढ़ाना पड़ेगा…

मे – क्यों नही मामी, आप जैसी नमकीन मामी से कॉन उल्लू का पट्ठा दूर रह सकता है.. मेरी बात पर वो दोनो खिल-खिलाकर हँसने लगी…

फिर चाची आँखें तिर्छि कर के बोली – हैं…लल्ला ! आते ही मामी पर लाइन मारने लगे…!

मामी – अरे दीदी ! हमारी ऐसी किस्मेत कहाँ ? इनके जैसा सुन्दर सजीला नौजवान, मुझ जैसी 2 बच्चों की माँ पर भला क्यों लाइन मारने लगा…

मेने ब्लश करते हुए कहा – अरे मामी, आप इशारा तो करिए… लाइन तो क्या.., और भी बहुत कुछ मिल जाएगा आपको…

और रही बात दो बच्चों की, तो उससे क्या फरक पड़ता है… ज़मीन उपजाऊ होगी तो फसल तो उगनी ही है…

मामी – हाए दैयाआ….दीदी ! ये लल्ला तो बड़ी पहुँची हुई चीज़ मालूम होते हैं… इनसे तो बचके रहना पड़ेगा…

चाची – अरे भाभी, अब मामी से मज़ाक नही करेंगे तो और किससे करेंगे.. वैसे मेने तो आज पहली बार इन्हें ऐसी मज़ाक करते देखा है…

ऐसी ही हसी मज़ाक के बाद चाची बोली – अरे भाभी, ज़रा लल्ला के लिए चाय तो बना दो, हम भी थोड़ी सी पी लेंगे…

जब वो चाय बनाने किचिन में चली गयी, तो चाची बोली – हाए लल्ला, मुझे नही पता था, कि तुम ऐसे भी खुलकर मज़ाक कर सकते हो…

मे – अरे चाची, जब वो ऐसी मज़ाक कर रही थी, तो मे क्यों पीछे रहता, और वैसे भी मामी के साथ तो खुलकर मज़ाक कर ही सकते हैं ना…

वो – हां सो तो है, खैर ये बताओ – कैसी लगी मामी…?

मे – क्या कड़क माल है चाची… सच में, देखना कहीं चाचा लाइन मारना शुरू ना करदें…

चाची – अरे लल्ला ! वो क्या लाइन मारेंगे, तुम अपनी कहो… मज़े करने हों तो जाओ कोशिश कर के देखलो, शायद हाथ रखने दे…

मे – क्या चाची आप भी, मे तो बस ऐसे ही मज़ाक कर रहा था…

चाची – जैसी तुम्हारी मर्ज़ी, मे तो बस तुम्हें खुश देखना चाहती थी…

मे – ठीक है चाची, आप कहती हैं तो ट्राइ मारके देखता हूँ… ये कह कर मे चाची को किस कर के, उनके आमों को तोड़ा सहलाया, और किचन की तरफ बढ़ गया.

मामी स्लॅब के पास खड़ी होकर चाय बना रहीं थी… कसे हुए सारी के पल्लू की वजह से उनकी गान्ड के उभार किन्ही दो बड़े तरबूज जैसे बाहर को उठे हुए मुझे अपनी ओर खींचने लगे…

मे चुप चाप से मामी के एक दम पीछे जाकर खड़ा हो गया… और उनके कान के पास मुँह ले जाकर बोला – मामी, बन गयी चाय…?

अपने कान के इतने पास मेरी आवाज़ सुनकर मामी, एकदम से चोंक गयी, और पलटने के लिए जैसे ही वो पीछे को हटी, उनकी गान्ड मेरी जांघों से सट गयी….

आहह… क्या मखमली अहसास था उनकी गद्देदार गान्ड का, ऐसा लगा जैसे दो डनलॉप की गद्दियाँ मेरी जांघों पर आ टिकी हों…

इतने से ही मेरा बब्बर शेर अंगड़ाई लेने लगा…, फिर उन्होने जैसे ही पलट कर मेरी तरफ मुँह किया, उनके मस्त दो पके हुए हयदेराबादी बादाम आम, मेरे सीने से रगड़ गये…!

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