लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

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Ankit
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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 20 Nov 2017 17:33

मेरे मुँह से अपनी बेहन के लिए ऐसे अप-शब्द सुनने की उसे उम्मीद नही थी.. वो दाँत भींचते हुए मेरी तरफ बढ़ते हुए चीखा…उसके साथ उसके चम्चे भी बढ़े…

अब तू जिंदा नही बचेगा हरामजादे…

मेने उसे हाथ के इशारे से रोका… और कहा –

अगर तू असल बाप से पियादा है… तो अकेला लड़ के दिखा…फिर देख कॉन हरामजादा है और कॉन नही…..

उसे मेरी बात लग गयी.. और उसने अपने साथियों से कहा – कोई मेरे साथ नही आएगा… इससे में अकेला ही निपटाउंगा…उसके साथी जहाँ थे वहीं खड़े रह गये…

मेरे चेहरे पर स्माइल आ गयी…और मेने उसे अपनी उंगली का इशारा कर के अपनी तरफ आने को कहा…

मेरे इस तरह इशारा करने से उसकी झान्टे और ज़्यादा सुलग उठी…वो अपने दाँत पीसते हुए मेरी ओर झपटा……….!

मे अपनी टाँगें चौड़ा कर, कमर पर हाथ रखे खड़ा उसका इंतेज़ार कर रहा था… कोई 10 फीट दूर से उसने तेज़ी से मेरे ऊपर झपट्टा मारा, जैसे आम तौर पर गुंडे मार-पीट में करते हैं…..

वो पूरी तरह कॉन्फिडेंट था, कि इस कल के लौन्डे को दो मिनिट में ही धूल चटा देगा…

मेने अपनी रोज़ की एक्सर्साइज़ का दाव अपनाते हुए, मे अपने एक पैर पर बैठ गया.. और दूसरा पैर ज़मीन के पॅरलेल रखा,

चूँकि में साइड में एक पैर पर बैठ चुका था, तो वो सीधा झोंक में मेरे बगल से गुज़रता चला गया, जिधर मेरा दूसरा पैर ज़मीन के समानांतर था, तभी मेने उसी पैर से उसको अड़ंगी मार दी…

वो झोंक में पैर की अड़ंगी लगने से भडाम से मेरे पीछे जाकर मुँह के बल ज़मीन पर गिरा…

मे उसके पीछे जाकर फिर से खड़ा हो गया.., अब वो और गुस्से में आ चुका था… उसका चेहरा गुस्से से तम तमा उठा… मे भी यही चाहता था..

वो उठ कर खड़ा हुआ और पलट कर किसी भैंसे की तरह हुंकारता हुआ फिर से पूरा दम लगाकर मेरे ऊपर झपटा..

मे वहीं के वहीं अपने एक पैर पर घूम गया… वो झोंक में आगे को बढ़ता चला गया… इतने में मेने फिरकी लेते हुए, पीछे से उसकी गान्ड पर किक जमा दी…

वो अपने को संभाल ना सका और फिरसे मुँह के बल जा गिरा…, इस बार वो ज़्यादा तेज़ी से पक्की ज़मीन पर गिरा था, सो इस वजह से उसका होंठ फट गया और उसमें से खून रिसने लगा…

कॉलेज के तमाम लड़के-लड़कियाँ वहाँ जमा हो चुके थे… वो कुछ देर तक पड़ा रहा.. तो मेने उसको ललकारा… उठ… आ.. आजा.. क्या हुआ… निकल गयी तेरी सारी हेकड़ी..

ये कहते हुए मे उसके सर के ऊपर जा खड़ा हुआ.., यहाँ उसने फुर्ती दिखाते हुए मेरे दोनो पैर पकड़ लिए और एक तेज झटका दिया.. मे पीछे को अपनी गान्ड के बल जा गिरा…

इतना ही नही, उसने फुर्ती दिखाते हुए मेरे ऊपर जंप भी लगा दी, और मेरे सीने पर सवार हो गया…

वो मेरे सीने पर बैठकर उसने मेरे गले को कस कर पकड़ लिया और उसे पूरा दम लगाकर दबाने लगा…

दाँत पीसते हुए बोला – तू तो गया लौन्डे, ग़लत आदमी से पंगा ले बैठा तू मादर्चोद….

मेरे गले की नसें तक फूलने लगी थी, मेने मन ही मन सोचा कि अब अगर जल्दी ही कुछ नही किया, तो ये मेरे ऊपर हाबी हो जाएगा…

ये सोचते ही मेने अपने दोनो टाँगों को फुर्ती से हवा में लहराया, यहाँ तक कि मेरी कमर भी हवा में उठ गयी…और देखते ही देखते मेने अपनी लंबी टाँगों को उसकी गर्दन में केँची की तरह लपेट दिया…

टाँगों में एक जोरदार झटका देकर मेने उसे अपने से दूर उछाल दिया…

इससे पहले कि वो उठ कर मुझ पर अगला वार कर पाता.. मे अपनी साँसों को नियंत्रित कर के फुर्ती से उच्छल कर उठ खड़ा हुआ…

वो भी खड़ा हो चुका था, और उसने मुझे मारने के लिए अपना मुक्का चलाया…, जिसे मेने हवा में ही थाम लिया.. और उसी बाजू को लपेटते हुए, उसके शरीर को अपनी पीठ पर लेकर एक धोबी पछाड़ दे मारा…

धोबी पछाड़ एक ऐसा दाँव है, जिसके बाद अच्छे-अच्छे पहलवान दोबारा उठ नही पाते…

पक्की सड़क पर ज़ोर से वो पीठ के बल पड़ा, ….साले की कमर ही चटक गयी…

अपने बॉस का हश्र देख कर उसके चम्चे आगे बढ़े… तो उनमें से एक को सोनू भाई ने लपक लिया.. और तीन को मेने लात घूँसों पर रख लिया..

फिर वाकी के स्टूडेंट्स को भी लगा.. कि ये ग़लत हो रहा है, तो वो भी हमारी हेल्प के लिए आ गये…

मार-मार कर उन पाँचों का भुर्ता बना दिया… 10 मिनिट में ही वो साले ज़मीन पर पड़े कराह रहे थे… मेने रागिनी के भाई को कॉलर पकड़ कर जबर्जस्ती से खड़ा किया और उसका मुँह दबाकर बोला-

बेटा ! अभी तो ये ट्रेलर था, मुझे अभी अपनी औकात दिखाना वाकी है… आशा करता हूँ.. तेरे भेजे में ये बात आ गयी होगी… कि सब जगह तुम लोगों की दबन्गयि नही चल सकती…!

सच्चाई जाननी हो तो अपनी उस नासमझ बेहन से पुच्छना, कि असल बात क्या थी….!
इतना कहकर मेने उसे पीछे को धक्का दिया और वहाँ से चल दिया…..

पीछे से सभी स्टूडेंट्स तालियाँ बजकर मुझे अप्रीश्षेट कर रहे थे…!

Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

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Ankit
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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 20 Nov 2017 17:34

रात को हम सब खाने की टेबल पर बैठे डिन्नर कर रहे थे.. बाबूजी पहले ही खाना खा लेते थे… क्योंकि उन्हें ट्यूबिवेल पर सोने जाना होता था…

वैसे आजकल उनकी मंझली चाची के साथ अच्छी ट्यूनिंग चल रही थी…, घर का सारा हिसाब किताब तो भाभी के कंधों पर डाल दिया था, जिसमें वो मेरी और दीदी की मदद भी ले लेती थी.

खाना खाते समय मोहिनी भाभी बोली – कामिनी ! तुम कार चला लेती हो ना !

कामिनी – हां दीदी ! मे तो बहुत पहले से ही चलाना सीख गयी थी…

भाभी – तो फिर ये इतनी बड़ी गाड़ी दरवाजे पर खड़ी क्यों है… देवर जी भी ले नही गये, और शायद फिलहाल उनका कोई इरादा भी नही है.. तो ये भी कुछ थोड़ी बहुत चलनी तो चाहिए ना…, वरना खड़े-2 बेकार ही हो जाएगी…!

कामिनी – हां दीदी ! बात तो आपकी सही है, लेकिन यहाँ ज़रूरत भी तो नही पड़ती कहीं आने जाने की…

भाभी – वही तो ! अब कोई चलाना जाने तो ज़रूरत पड़ने पर ले तो जा सकते हैं.. क्यों ना तुम लल्ला जी को गाड़ी चलना सिखा दो…, वो सीख गये तो ज़रूरत पड़ने पर काम तो आएगी…

कामिनी – लेकिन दीदी ! यहाँ गाँव में कहाँ है जगह सीखने लायक… ले देके एक सिंगल पुराना सा रोड है… उसपे तो वैसे ही चलना मुश्किल होता है, सीखने की तो बात ही अलग है…

भाभी – लल्ला.. ! अपने गाँव से थोड़ा दूर पर एक उसर पड़ी बहुत सारी ज़मीन थी ना..! वहाँ जाके सीख सकते हो ना..!

मे – हां भाभी ! वो बहुत बड़ी ज़मीन है… और समतल भी… क्रिकेट के टूर्नमेंट भी लोग करते हैं वहाँ..कभी-2…

कामिनी – अच्छा ! फिर तो बात बन सकती है.. एक काम करते हैं… कल हम सब लोग चल्लेन्गे.. एक बार देख लेते हैं उसे.. फिर मे देवर जी को सिखा दूँगी.. उसमें कोई बहुत बड़ी बात नही है..

मे कार सीखने की बात से बहुत एक्शिटेड था… जैसे-तैसे रात काटी, और सुबह ही नाश्ता पानी निबटा के हम चारों गाड़ी लेकर चल दिए मैदान देखने…

ये गाँव से कोई 2-ढाई किमी दूर था.. जाकर देखा तो कामिनी भाभी खुश हो गयी.. और बोली –

एक दम परफेक्ट ग्राउंड है... अब देखना देवर जी, मे आपको एक हफ्ते में ही कार चलाना सिखा दूँगी…

तो भाभी बोली – शुभ काम में देरी क्यों ? शुरू करदो आज से ही…,तो कामिनी भाभी बोली – आप लोगों के साथ थोड़ा रिस्क रहेगा…

भाभी – तो हमें किसी पेड़ के नीचे उतार दो.. घंटा, आधा घंटा बैठे रहेंगे.. क्यों रामा ? ठीक है ना.. !

रामा – हां भाभी ! हम लोग दूर से ही देखते रहेंगे… आप लोग शुरू करो..

मैदान के पास से ही एक नहर (केनाल) निकलती है.. तो उसके किनारे एक पेड़ के नीचे वो दोनो बैठ गयी.. और कामिनी भाभी ने फिर एक बार गाड़ी को मैदान में लाकर एक जगह खड़ी कर दी…

वो मुझे समझते हुए बोली – देखो देवर जी, अब जो मे आपको बताने जा रही हूँ, उसे ध्यान से देखना और अपने दिमाग़ में अच्छे से सारी बातें बिठा लेना…

फिर उन्होने सारे मेकॅनिसम को बताया, ये गियर हैं… और इस तरह से डाले जाते हैं.. और उन्होने फिज़िकली डलवा कर भी बताए..

उसके बाद, क्लच, एक्शीलाटोर सबकी नालेज दी… वाकई फंक्षन सब जैसा आप बाइक चलाते हो वैसा ही रहेगा ओके…

मेने समझने वाले अंदाज में अपनी मुन्डी हलाई,

इतना सब कुछ समझा कर उन्होने मुझे ड्राइविंग सीट पर बिठा दिया और खुद साइड सीट पर आ गयी… मेने चाबी घुमा कर गाड़ी स्टार्ट की… स्टार्ट होते ही मेरे शरीर में कंप-कपि सी होने लगी…

भाभी ने कहा.. डरो नही अब क्लच को पैर से दबाकर फर्स्ट गियर डालो… और धीरे-2 से क्लच को छोड़ो…

गियर डालकर मेने धीरे से क्लच से पैर का दबाब कम किया लेकिन गाड़ी नही बढ़ी…तो और दबाब कम किया, फिर भी नही बढ़ी, फिर एक साथ ज़्यादा पैर ऊपर हो गया और गाड़ी एक झटके के साथ आगे बढ़ी..

झटका थोड़ा ज़्यादा था, तो मेरा चेस्ट स्टीरिंग से जा टकराया… मेरा ध्यान क्लच की तरफ था, तो स्टीरिंग लहराने लगी..

भाभी भी डर गयी.. और उन्होने झट से स्टर्रिंग को एक हाथ से संभाला और बोली – देवर जी ध्यान स्टीरिंग पर रखो और उसे सीधा रखने की कोशिश करो.

वो स्टर्रिंग को संभालने की कोशिश कर रही थी.. और मे उसे सीध रखने की.. बात बिगड़ गयी और गाड़ी एक तरफ को भागने लगी…

भाभी चिल्लाई – क्या कर रहे हो ? स्टीरिंग छोड़ो.. और एग्ज़िलेटर से अपना पैर हटाकर उसे ब्रेक पर रखो..

मेने स्टीरिंग छोड़ कर एग्ज़िलेटर से पैर हटा कर जैसे ही ब्रेक पर रखा, वो एकदम से डूब गया और गाड़ी झटके खाकर बंद हो गयी…

भाभी – उफफफफफ्फ़… आपको सिखाना थोड़ा मुश्किल होगा.. आप थोडा इधर आके बैठो और मे जैसा करती हूँ, उसे पहले ध्यान से देखो..

हम एक बार फिरसे बदल गये.. भाभी गाड़ी समझाते हुए चलाने लगी.. और बोली – देखो कितना आसान है.. इसमें क्या है..?

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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by jay » 20 Nov 2017 19:15

धमाकेदार कहानी है भाई

अगले अपडेट का इंतजार रहेगा
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(ज़िन्दगी एक सफ़र है बेगाना running.......).
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(कोई तो रोक लो)
(ननद की ट्रैनिंग compleet)..............( सियासत और साजिश)..........(सोलहवां सावन)...........(जोरू का गुलाम या जे के जी).........(मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन)........(कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास)........(काले जादू की दुनिया)....................(वो शाम कुछ अजीब थी)

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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 21 Nov 2017 09:44

हम फिर से अदला बदली कर के बैठ गये और फिर कोशिश की… नतीजा ढाक के तीन पात….! फिरसे वही ग़लती हो गयी, और गाड़ी झटके खाकर फिरसे बंद हो गयी…

कामिनी भाभी बोली – इतना आसान काम भी आपसे नही हो पा रहा,

मेने कहा – ये आपके लिए आसान होगा भाभी, क्योंकि आप जानती हैं, लेकिन मेरे लिए तो ये अभी बहुत मुश्किल लग रहा है…

मेरी बात समझते हुए वो बोली – सही कह रहे हो, अब आपको सिखाने का एक ही तरीक़ा है..,

मेने पूछा – क्या ?

तो वो थोड़ा मुस्कराते हुए बोली – कल ही बताउन्गी, अब चलो चलते हैं यहाँ से.., अब कल से ही शुरू करेंगे…,

फिर हमने उन दोनो को भी वहाँ से पिक किया और घर वापस लौट लिए…
दूसरे दिन मंडे था, मे सुबह-2 कॉलेज चला गया… अपने पीरियड अटेंड किए..

फिर जैसे ही घर निकलने लगा… तो कुछ दोस्तों ने मुझे रोक लिया… और उस दिन हुई घटना के बारे में चर्चा करने लगे…

मेने उन सबको साथ देने के लिए थॅंक्स बोला,… उनमें से कुछ ने प्रॉमिस किया.. कि वो हमेशा उसके साथ रहेंगे…

ज़्यादातर का विचार था कि रागिनी और उसका भाई ग़लत हैं.. और उन्हें जो सज़ा मिली है वो एकदम सही है..

उसके बाद मे घर आया, खाना- वाना ख़ाके.. थोड़ा लेक्चरर रिव्यू किए.., कोई 3 बजे कामिनी भाभी मेरे पास आई और गाड़ी सीखने जाने के लिए कहा..

वो आज भी साड़ी- ब्लाउज में ही थी.. जो एक गाँव में ससुराल के चलन के हिसाब से अवाय्ड नही किया जा सकता था.. पहनना मजबूरी थी..

फेब्रुवरी का एंड था, ज़्यादा ठंड भी नही थी तो मेने भी एक ट्रॅक सूट पहन लिया और चल दिए गाड़ी सीखने…

ग्राउंड में पहुँच कर भाभी ने गाड़ी खड़ी की और मुझे कहा – देवर्जी.. ज़रा बाहर जाकर खड़े हो जाओ…

मेने कहा – क्यों भाभी..?

वो – अरे बस थोड़ी देर के लिए… जाओ तो सही… मे बाहर उतर गया.. वो भी बाहर आ गयी और बोली – गाड़ी के पीछे खड़े होकर देखो, कोई इधर-उधर है तो नही..

मे पीछे जाकर चारों तरफ नज़र दौड़ा कर देखने लगा.. भाभी पीछे की सीट पर गयी, वहाँ जाकर उन्होने अपनी साड़ी और ब्लाउज निकालकर एक टीशर्ट पहन ली….

नीचे वो पेटिकोट की जगह एक स्लेकक जैसी पहने हुए थी, जो बहुत ही सॉफ्ट और हल्की एकदम फिट.., साड़ी मोटे कपड़े की होने की वजह से पता नही चला कि वो पेटिकोट पहने थी या नही..

वो फिर से बाहर आकर साइड वाली सीट पर बैठ गयी और मुझे आवाज़ दी कि अब आ जाओ..

मेने जैसे ही उन्हें देखा… मेरा तो मुँह खुला का खुला रह गया… गाढ़े लाल रंग की टीशर्ट और ब्लू स्लेकक जो दोनो ही इतने टाइट फिट की उनके शरीर का एक एक कटाव साफ-साफ दिख रहा था,.. इन कपड़ों में वो एकदम माल लग रही थी..

ऐसे क्या देख रहे हो…? भाभी ने जब मुझसे कहा… तब मेरी तंद्रा टूटी….

मेने अपना सर झटक कर कहा – ये आपने इतनी जल्दी चेंज कर लिया… ? पर भाभी आपको यहाँ किसी ने इन कपड़ों में देख लिया तो..?

वो – यहाँ कॉन जानता है कि हम कॉन हैं..? वैसे साड़ी में आपको ड्राइविंग सिखाना मुश्किल पड़ता इसलिए मेने कल नही सिखाया ..

अब चलो गाड़ी स्टार्ट करो, देखें कितना तक कर पाते हो…

मे ड्राइविंग सीट पर बैठा, और गाड़ी स्टार्ट की, फिर वो जैसे-2 बताती गयी… क्लच दबाया, फिर फर्स्ट गियर डाला, और गाड़ी आगे बढ़ाई कि वो साली फिरसे झटका खाकर बंद हो गयी…

भाभी बोली – अभी आपके बस का नही है… अब मुझे ही बैठना पड़ेगा आपके पास.. तभी कुछ हो पाएगा..

फिर वो उतर कर मेरी तरफ आई, गेट खोल कर बोली.. चलो खिस्को उधर....

मे थोड़ा गियर साइड को खिसक गया.. और आधी सीट उनके लिए खाली कर दी…
वो मेरे साथ सॅट कर बैठ गयी… मेरी तो सिट्टी-पिटी गुम हो गयी यार…

क्या अहसास था उनकी मांसल जाघ के टच होने का मेरी जाँघ के साथ… ऊपर से ना जाने कॉन्सा पर्फ्यूम लगाया था उन्होने…

उनके टच और बदन की मादक खुश्बू से मेरा शरीर झनझणा गया… उनकी खनकती आवाज़ से मे होश में लौटा..

वो बोली – अब गाड़ी स्टार्ट करो…देवर्जी ! या ऐसे ही बैठके मुझे देखते रहोगे..
अपनी तो साली इज़्ज़त की वाट लग गयी.. और मेरी स्थिति पर वो मन ही मन खुश हो रही थी..

मेने गाड़ी स्टार्ट की.., उन्होने कहा अपना लेफ्ट पैर क्लच पर रखो… मेने रख लिया.. फिर उन्होने राइट पैर को एग्ज़िलेटर पर रखने को कहा…और मुझे स्टीरिंग पकड़ा दी…

फिर उन्होने मेरे पैरों के ऊपर से अपना भी एक पैर भी रख लिया और क्लच दबा कर गियर डालने को कहा....

मेने ठीक वैसा ही किया… फिर वो बोली.. देखो एग्ज़िलेटर जब तक में ना कहूँ दबाना मत और क्लच से जैसे – जैसे में आपके पैर के ऊपर से अपने पैर का दबाब कम करूँ, आप भी उतना ही उसको छोड़ते जाना… ठीक है…

मेने हां में सर हिलाया.. लेकिन मेरा दिमाग़ आधा उनके रूप लावण्य और टाइट फिट कपड़ों से उभरते हुए यौवन पर ही अटका पड़ा था…

फिर उन्होने जैसे-2 अपने पैर का दबाब हटाया.. मे भी अपना पैर ऊपर करता गया..

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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 21 Nov 2017 09:45

उन्होने झिड़कते हुए कहा.. पूरा पैर क्यों उठाते हो…खाली पंजे का दबाब कम करना है.. हील गाड़ी के फ्लोर पर ही टिकी रहनी चाहिए…

फिर मेने वैसे ही किया.., अब गाड़ी बिना एंजिन बंद हुए आगे को बढ़ने लगी…

वो बोली – यस ! अब स्टीरिंग को जस्ट देखो… और गाड़ी तुम्हारे हिसाब से दूसरी तरफ जाती हुई दिखे तभी उसे हल्के से दिशा देना है… अब थोड़ा-2 एग्ज़िलेटर पर दबाब डालो..

मेने जैसे ही पैर दबाया.. वो थोड़ा ज़्यादा दब गया और गाड़ी झटके के साथ आगे बढ़ने लगी.. हड़बड़ी में मे स्टीरिंग संभालना भी भूल गया..

देखते-2 गाड़ी मैदान से बाहर की तरफ जाने लगी… भाभी एकदम से चिल्लाई.. सम्भालो.. और उन्होने झटके से अपने हाथ स्टीरिंग पर लगाए तो उनकी मांसल गोरी-2 नंगी बाहें मेरे सीने से रगड़ने लगी..

गाड़ी तो कंट्रोल हो गयी.. लेकिन अब भाभी का शरीर मेरे शरीर से और ज़्यादा सॅट गया.. मुझे कंपकपि सी होने लगी…

अभी में अपने होश इकट्ठा करने की कोशिश में ही था… कि तभी वो बोली – देवर जी.. देखो गाड़ी के एंजिन की आवाज़ ज़्यादा है.. इसका मतलव अब तुम्हें दूसरा गियर डालना पड़ेगा..

और उन्होने मेरे क्लच वाले पैर को दबा दिया.. जब क्लच दब गयी तो वो बोली – अब एग्ज़िलेटर कम करो… और दूसरा गियर डालो..

मेने एग्ज़िलेटर कम कर के दूसरा गियर डाला तो वो नही पड़ा.. क्योंकि मे उसे न्यूट्रल स्लॉट में लाना भूल गया था…

वो – अरे.. क्या करते हो देवर जी.. डालो ना.. मेने कहा – पड़ ही नही रहा भाभी..मे क्या करूँ..?

तो फिर उन्होने अपना हाथ लंबा कर के गियर डालने के लिए बढ़ाया.. जिससे उनकी एल्बो…आहह….मेरे लंड को दबा दिया… मेरे मुँह से अह्ह्ह्ह… निकल गयी…
गियर तो पड़ गया… और उन्होने अपनी एल्बो का दबाब भी कम कर दिया.. लेकिन

लेकिन मेरे नाग को जगा दिया… जिसको अब यहाँ मनाने का कोई इलाज़ संभव नही था…

मेरी आह… सुन कर उन्होने एक नज़र मेरी ओर देखा और मुस्करा उठी…

अब लगभग गाड़ी का सारा कंट्रोल तो उनके हाथ में ही था.. तो दूसरे गियर में भी गाड़ी अच्छे से चल रही थी, लेकिन ऐसे हम दोनो को ही बड़ी दिक्कत हो रही थी.

कुछ देर के बाद उन्होने गाड़ी रोक दी और गेट खोल कर बाहर निकल गयी…

उतरो.. उन्होने आदेश सा दिया… मे बाहर आ गया.. तो उन्होने सीट का लीवर उठाकर सीट को थोड़ा और पीछे को कर दिया..

अब बैठिए… वो बोली .. मे सीधा तन्कर बैठ गया..

वो बोली - अरे आराम से पीठ टिका कर बैठिए… जब मे उनके हिसाब से बैठ गया.. तो वो फिर बोली -

अपनी टाँगें चौड़ी करिए…, मेने अपनी टाँगें चौड़ी करदी.., अब मेरे आगे काफ़ी जगह बन गयी थी,

मे अभी ये सोच ही रहा था, कि आख़िर इनका आइडिया है क्या, तभी वो मेरे आगे की जगह पर आकर बैठ गयी…

सत्यानाश हो सिचुयेशन का……वैसे भी साला शरीर में गर्मी बढ़ने लगी थी..

अब ये गुदगूदे रूई जैसे सॉफ्ट कूल्हे एकदम मेरे खुन्टे के सामने रखे थे, वो भी एकदम सट कर,

उनके कपड़े तो वैसे भी इतने सॉफ्ट और टाइट फिट थे, कि उनका होना ना होना एक बराबर था…

ऊपर से उनकी टाइट टीशर्ट से झँकते आमों के उभर और उनका दूध जैसा गोरा सफेद चित्त क्लीवेज मेरी आँखों के ठीक सामने था,

सोने पे सुहागा… उनके बदन से उठती मादक सुगंध….,

कुल मिलकर मेरे लॉड की माM-बेहन एक होने लगी…., वो मेरे शॉर्ट के अंदर किसी ग़ुस्सेल नाग की तरह फुफ्कार मारने लगा…!

ऊपर से मुशिबत ये, कि दोनो के बीच इतनी जगह भी नही थी, कि अपना हाथ डालकर उसे अड्जस्ट भी कर सकूँ… साला एक्दाM खूँटे की तरह खड़ा होकर उनकी कमर में ठोकरें मारने लगा…


आख़िर में मेने हथियार डालते हुए कहा… भाभी छोड़िए.., अब घर चलते हैं, ये गाड़ी चलाना मेरे बस का नही है……!

उन्होने तिर्छि नज़र कर के मेरी तरफ देखा… अब उनके कंधे का दबाब भी मेरे सीने पर था, और नज़रों का तीखापन देख कर… मेरी रही सही हिम्मत की माँ चुद गयी…

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