लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

दोस्तो इस फोरम में आप हिन्दी और रोमन (Roman ) स्क्रिप्ट में नॉवल टाइप की कहानियाँ पढ़ सकते हैं
User avatar
Ankit
Platinum Member
Posts: 1885
Joined: 06 Apr 2016 09:59

Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 21 Nov 2017 09:47

यहाँ तबसे मज़ाक चल रहा है.. उहोने किसी इन्स्ट्रक्टर की तरह कड़क आवाज़ में कहा … चलो चुप चाप गाड़ी स्टार्ट करो.. ऐसा कोई काम है जो इंसान ना कर सके..

बात वो नही थी कि मुझे कोई प्राब्लम हो रही थी…, मेरे लौडे के तो मज़े हो रहे थे, बहुत अच्छा भी लग रहा था… लेकिन मेरे लंड महाराज की उत्तेजना लगातार बढ़ती जा रही थी उसका क्या किया जाए…?

नयी भाभी.. ठीक से अभी तक हसी मज़ाक भी नही हो पाई थी उनके साथ…, ऊपर से एमएलए की बेटी और एसपी की बीवी.., साला कुछ उल्टा-पुल्टा हो गया…., तो इतने जूते पड़ेंगे की गान्ड लाल हो जाएगी… बस ये डर सताए जा रहा था मुझे…!

अब शुरू करो… या सोचते ही रहोगे… ? उनके एक साथ झटके से बोलने पर मेरे हाथ पैर और ज़्यादा फूल गये…, फिर भी काँपते हाथों से मेने गाड़ी स्टार्ट की…

भाभी मेरी स्थिति पर मन ही मन खुश हो रही थी… लेकिन मान-ना पड़ेगा.. कमाल की आक्टिंग थी उनकी…

मज़ाल क्या है…, ज़रा भी फेस पर ऐसा एक्सप्रेशन आने दिया हो कि वो मेरे मज़े ले रहीं हैं…

चलो अब वो सब दोहराओ.. जो पहले कर चुके हैं.. गाड़ी अनकंट्रोल दिखेगी तो ही मे हाथ लगाउन्गी…

मेने क्लच दबा कर गियर डाला.. और धीरे-2 क्लच छोड़ा.. शुरुआत तो सही हुई.. लेकिन लास्ट में झटका लग ही गया.. और वो स्टीरिंग की तरफ झुक गयी…

मे भी झटके से उनकी पीठ से चिपक गया.. झुकने से उनके दशहरी आम एक दम से मेरी नज़रों के सामने आ गये…,

दूसरा सबसे बुरा ये हुआ कि, मेरे सीने के दबाब से वो जैसे ही आगे को हुई, उनकी मखमली गान्ड थोड़ी अधर हो गयी…

लंड महाराज तो इसी ताक में थे, कि कब स्पेस मिले, सॅट्ट से गान्ड के नीचे सरक गये…, और गान्ड की दरार के उपरी भाग पर कब्जा जमा लिया…

खैर.. मेरे पप्पू की तो बल्ले-2 हो रही थी.. लेकिन अपनी तो साली आफ़त में जान अटकी पड़ी थी.., भाभी की गुदगुदी गान्ड के स्पर्श मात्र से ही वो फूल कर कुप्पा हुआ जा रहा था…

भाभी गाड़ी संभालते हुए बोली – कोई बात नही.. ये अच्छा है, कि इस बार गाड़ी बंद नही हुई.. गुड.. अब थोड़ा-2 एग्ज़िलेटर दो…

पैर फिर से थोड़ा ज़्यादा दब गया एग्ज़िलेटर पर, .. और गाड़ी फिर से झटके से आगे बढ़ी.. स्टेआरिंग थोड़ा डिसबॅलेन्स हुई… तो भाभी ने अपने हाथ मेरे हाथों के ऊपर रख कर उसे कंट्रोल कर लिया..

लेकिन उनकी गान्ड और मेरे खूँटे के बीच एक अच्छा सा घिस्सा लग गया…

जब गाड़ी कंट्रोल हुई.. तो उन्होने क्लच दबा कर गियर चेंज करने को कहा.. मेने क्लच तो दबा दी लेकिन एग्ज़िलेटर कम नही किया.. गाड़ी का एंजिन हों..हों.. करने लगा…

भाभी – देवर्जी ! मेने कितनी बार कहा है.. कि जब क्लच दबाओ तो एग्ज़िलेटर नही देना है….. क्या बुलेट भी ऐसे ही चलाते हो..?

मेने दूसरा गियर ठीक से चेंज कर के कहा – वो तो मेरी प्रॅक्टीस में आ गयी है.. इसलिए…, अब इन्हें कॉन बताए, की इस सिचुयेशन में जो भी आता है वो भी भूले बैठे हैं…

अब धीरे – 2 मेरा थोड़ा-2 कॉन्फिडॅन्स आने लगा था.. तो वो बोली- गुड ! वैसे उसी एक्सपीरियेन्स से इसको भी कंट्रोल करो…

जब गाड़ी ठीक से चलने लगी… तो मेने कहा भाभी अब तीसरा डालूं…

वो – नही, आज दो तक ही प्रॅक्टीस करो.. यहाँ तक की अच्छी प्रॅक्टीस होने दो..
उनके हाथ अभी भी मेरे हाथो पर ही थे..

Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Sponsor

Sponsor
 


User avatar
Ankit
Platinum Member
Posts: 1885
Joined: 06 Apr 2016 09:59

Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 22 Nov 2017 20:12

Dolly sharma wrote:
21 Nov 2017 10:25
nice update
thanks

User avatar
Ankit
Platinum Member
Posts: 1885
Joined: 06 Apr 2016 09:59

Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 22 Nov 2017 20:13

जब गाड़ी सही से कंट्रोल में आने लगी.. तो मेरा ध्यान भटकने लगा… वो मेरे सीने से अपनी पीठ टिकाए हुए थी… मेरा पप्पू उनकी गान्ड की दरार के साथ शरारत कर रहा था…

उसका मे फिलहाल कुछ कर भी नही सकता था, क्योंकि मेरे पास पीछे हटने के लिए स्पेस भी नही था…

लाख कंट्रोल के बबजूद भी वो, गाहे-बगाहे ठुमके मार ही देता था,

उसकी ठोकर भाभी को भी महसूस हो रही थी… मेरा मुँह उनके कान के बिल्कुल पास था… और नाक से निकलने वाली हवा उनके कान की लौ को सर-सरा रही थी…

ऐसे मादक बदन की महक और जवानी से लवरेज़ यौवन अगर किसी युवक की गोद में हो तो ये कहना बेमानी होगी.. कि वो अपने आप पर कंट्रोल रख पाएगा…

मेने अपना मुँह उनके गाल के पास करलिया.. मेरे होंठों और उनके गाल का फासला ना के बराबर था.. मेरे मुँह की भाप से वो भी उत्तेजित हो रही थी…

ना जाने कब उनके हाथ स्टेआरिंग से हटकर मेरी जांघों पर आ गये और वो धीरे-2 उन्हें सहलाने लगी…

उनकी ज़ुल्फो की खुसबु मेरा नियंत्रण खोने पर मजबूर कर रही थी,.. लंड बुरी तरह उनकी गान्ड पर ठोकरें मार रहा था… जिसका वो अपनी आँखे मूंदकर स्वाद ले रही थी…

मेरे लौडे की हालत लगातार बद से बदतर होती जा रही थी, वो अंडरवेर के अंदर एंथने लगा था…प्री-कम से उसका टोपा गीला होने लगा…

मेरा अपने ऊपर से नियंत्रण हटता जा रहा था, नतीजा ध्यान स्टीरिंग से हट गया और मेरे होंठ उनके गाल से जा टकराए….

गाड़ी ना जाने कब मैदान छोड़ कर बाजू के खेत में चली गयी और रेत में जा फँसी…और हों-हों करने लगी..

हम दोनो ही हड़बड़ा गये.. हों-हों कर के एंजिन बंद हो गया.. हम दोनो की नज़रें मिली तो वो एक नशीली मुस्कराहट देकर गाड़ी का गेट खोल कर नीचे उतर गयी..

फिर उन्होने मुझे भी उतरने का इशारा किया.. और खुद ड्राइविंग सीट पर बैठ कर गाड़ी को बॅक गियर में डाल कर वहाँ से निकाला…

फिर उन्होने मुझे बगल वाली सीट पर बैठने का इशारा करते हुए कहा – अब आज के लिए इतना ही काफ़ी है…, आगे का कल सीखना.. चलो अब घर चलते हैं.. वैसे दूसरे गियर तक आपने अच्छा किया… वेल डन…!

फिरसे उन्होने पीछे सीट पर जाकर कपड़े चेंज किए, मौके का फ़ायदा उठाकर मे थोड़ी दूर झाड़ियों के पीछे जाकर अपनी टंकी रिलीस करने चला गया.

खड़े लंड से मूत भी रुक-रुक कर आ रहा था, जिससे बहुत देर तक में मुतते रहा, आख़िर जब टंकी रिलीस हुई, तब जाकर कुछ राहत महसूस हुई.


रास्ते में हमने ज़्यादा कोई बात नही की.. बस कुछ एक दो ड्राइविंग से ही रिलेटेड कुछ बातें…!

घर आते-2 शाम हो चुकी थी…. तो मे थोड़ी देर के लिए चाची के पास चला गया.. बच्चे को गोद में लेकर खेलता रहा.. चाची अपने काम काज में लगी रही…

रात का खाना खा-पीकर मोहिनी भाभी ने मुझे अपने कमरे में आने का इशारा किया…

मेरे पहुँचते ही वो बोली – हां तो आज कितना तक सीखा..?

तो मेने उन्हें बताया कि आज दूसरे गियर तक ही सीखा है.. लगता है हफ्ते-दस दिन में आजाएगी…!

वो – थोड़ा डीटेल में बताओ.. कैसे शुरुआत की क्या-2 प्राब्लम हुई.. ?

मे – अरे ! इन सबको जान कर आपको क्या लेना देना..?

वो – मेरा भी मन किया तो मे तुमसे सीख लूँगी ना.. वो थोड़ा शोख अंदाज में बोली…

मे उनके कहने का मतलव समझ गया… और वैसे भी मे भाभी से कोई बात छिपा भी नही पाता था… पता नही वो कैसे मेरे मन के चोर को भाँप लेती थी..

सो मेने सब डीटेल उन्हें बता दिया… वो कुछ देर तक मुस्करती रही…

मेने पूछा – आप मुस्करा क्यों रही हो .. ?

वो – बस ऐसे ही.. अब तुम मन लगा कर ऐसे ही सीखते रहो…अब जाओ आराम करो.. कल कॉलेज भी जाना है..

मे अपने कमरे में चला आया और कुछ देर किताब निकाल कर पढ़ता रहा.. और फिर सो गया..

दूसरे दिन मे और सोनू कॉलेज गये…लेक्चर अटेंड किए..

तीसरे पीरियड में पीयान ने आकर कहा – अंकुश शर्मा..! आपको प्रिन्सिपल साब बुला रहे हैं..

मे जब उनके ऑफीस में पहुँचा.. ! देखा कि उनके सामने एक अधेड़ व्यक्ति मध्यम हाइट.. गोरा लाल चेहरा.. जिसपर बड़ी-2 ठाकुरयती मुन्छे फक्क सफेद कुर्ता और धोती.. ऊपर से एक नेहरू कट जकेट पहने बैठे हुए थे.

मेने ऑफीस के गेट से ही अंदर जाने की पर्मिशन ली … प्रिन्सिपल साब मुझे देखते ही बोले –

आओ अंकुश.. हम तुम्हारा ही इंतेज़ार कर रहे थे… इनसे मिलो.. ठाकुर सुर्य प्रताप सिंग.. यहाँ के ज़मींदार… साब..

और ठाकुर साब यही है.. अंकुश.. बहुत ही नेक और मेहनती लड़का है.. अपनी पढ़ाई के अलावा वाकी से इसको कोई मतलव नही… सभी स्टूडेंट्स इसे बहुत मानते हैं..

मेने उनको नमस्ते किया.. तो उन्होने अपनी बगल वाली कुर्सी पर बैठने के लिए कहा…

मेने कहा – मे ऐसे ठीक हूँ.. ठाकुर साब.. फिर उन्होने बात शुरू की…

बेटे तुम *** गाँव के मास्टर सुंदर लाल शर्मा के बेटे हो ना.. ?
मेने कहा – जी..

वो बोले – बड़े ही भले आदमी हैं मास्टर जी, मेरे ख्याल से सबसे ज़्यादा पढ़ा लिखा परिवार है तुम्हारा… एक भाई प्रोफेसर है,.. और दूसरा भाई एसपी है..

मे सही कह रहा हूँ ना..

तो मेने कहा जी बिल्कुल…

और एसपी साब की शादी अपने एमएलए की बेटी से हुई है.. है ना.. !

देखो बेटे… मे यहाँ अपनी बेटी और लड़के की हरकतों के लिए तुम्हारे पिताजी से माफी माँगने जाने वाला था.. फिर सोचा उससे पहले तुम से मिल लूँ..!

बेटा ! मेरे बच्चों से अंजाने में जो ग़लती हुई है… उसे तो मे सुधार नही सकता.. लेकिन आगे के लिए विश्वास दिलाता हूँ कि ऐसा फिर कभी नही होगा..

मे – मुझे आपकी बात पर भरोसा है ठाकुर साब…!

वो – अब मे तुम्हारे पिताजी के पास जा रहा हूँ… क्या तुम मेरे साथ चलना चाहोगे..?

मे – बिल्कुल चलिए.. मेरे घर पर आपका स्वागत है… ये कह कर वो उठ गये.. और प्रिन्सिपल साब को नमस्ते बोल कर हम बाहर आ गये…
वो अपनी गाड़ी में थे… मे आगे-2 अपनी बुलेट पर आ रहा था, हम घर की तरफ चल दिए…….

User avatar
Ankit
Platinum Member
Posts: 1885
Joined: 06 Apr 2016 09:59

Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 22 Nov 2017 20:14

ठाकुर सूर्य प्रताप ने बाबूजी से मिलकर सबसे पहले हाथ जोड़कर अपने बेटे के व्यवहार के लिए माफी माँगी, .. एक दूसरे से बड़े अपनेपन से मिले..

घर - परिवार की चर्चा की.. और भविश्य में आपस में संबंध अच्छे रहें इस बात का आश्वासन दिया, और कुछ देर बैठकर चाइ नाश्ता लेकर वो चले गये…

उनके जाने के बाद बाबूजी ने मुझे अपने पास बुलाया, और उनके साथ जो भी बात-चीत हुई, वो सब उन्होने बताते हुए कहा..

बेटा ! ठाकुर साब ने कहा है, कि अब इस बात को यहीं ख़तम करो, तो मे चाहता हूँ, तुम अपनी तरफ से उनके बच्चों के प्रति कोई बैर मत रखना..

मेने हां में अपनी सहमति जताई, और अपने कमरे में आकर कुछ देर के लिए सो गया…

3 बजते ही मे और कामिनी भाभी गाड़ी लेकर चल दिए ग्राउंड की ओर.. मेरे मन में उथल-पुथल मची हुई थी…,

भाभी की कल की हरकतों ने मुझे मेरे लंड तक हिला दिया था, ना जाने आज क्या होने वाला था…?

कल का वाक़या याद करते ही मेरा लौडा खड़ा होने लगा.. और उसने पाजामे के अंदर तंबू बनाना शुरू कर दिया…!

जान बूझकर मेने आज काफ़ी पुराना पड़ा हुआ अंडरवेर पहना था, जिससे उसका कपड़ा काफ़ी लूस हो गया था, उसमें मेरे मूसल महाराज आज कुछ कंफर्टबल फील कर रहे थे,

उसकी लंबाई आज ऊपर से पाजामे के बबजूद भी कुछ ज़्यादा ही लग रही थी.

भाभी गाड़ी चलाते हुए बीच-2 में मेरी तरफ मुँह कर के बातें भी करती जा रही थी… लाख छुपाने के बबजूद भी उनकी नज़र मेरे तंबू पर पड़ गयी..,
जिसे देखकर उनके चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान तैर गयी…

मैदान में पहुँचकर कल की तरह अपने उन्होने अपने कपड़े चेंज किए… और मुझे ट्राइयल देने को कहा…

कई बार की कोशिशों के बाद भी में गाड़ी को ठीक से उठा नही पाया.. हर बार झटके मार कर बंद हो जाती…!

भाभी ने कहा – देवर्जी क्या बात है, अभी भी आपका क्लच के ऊपर पैर का कंट्रोल सही नही आ रहा.. !

खैर कोई बात नही धीरे-2 आ जाएगा… चलो कल की तरह ही चलाते हैं…!

आज भाभी के कपड़े कल से भी ज़्यादा टाइट थे… उनके दशहरी आम आज टाइट टॉप की वजह से थोड़े दबे हुए से लगे, जिसकी वजह से उनकी बगलें ज़्यादा मासल दिख रही थी…, और ऊपर से कुछ ज़्यादा ही दर्शन हो रहे थे…

नीचे तो कहने ही क्या, एक बहुत ही सॉफ्ट कपड़े की लोवर में उनकी पेंटी का आकर भी साफ-साफ पता चल रहा था…!

मुझे लगा जैसे उनकी पेंटी गान्ड की तरफ तो ना के बराबर ही रही होगी… दोनो कलश एकदम गोल मटोल… एकदुसरे से जुड़े-जुड़े.. मानो दो बॉल फेविकोल से चिपका दिए हों..

जब वो अपनी एक टाँग अंदर डाल कर मेरी गोद में बैठने को हुई, तो उनकी गान्ड का दूसरा भाग, किसी फुटबॉल की तरह और ज़्यादा पीछे की तरफ उभर गया..

सीन देखते ही मेरे लौडे ने एक जोरदार झटका खाया, और वो एकदम से अंडरवेर में तन गया…

बीच की दरार एकदम से क्लियर ही दिखाई दे रही थी…, कपड़े का जैसे कोई उसे ही नही दिख रहा था…

आज भाभी शायद ये ठान के आई थी, की मेरा पानी निकलवा कर ही रहेंगी…

भाभी आज कुछ आगे को झुक कर बैठ गयी मेरी गोद में… जिससे उनकी गान्ड की दरार का ऊपरी भाग मेरे पप्पू के ठीक सामने आ गया…

मेरा लॉडा तो वैसे भी बिगड़ैल भेंसे की तरह अंडरवेर के अंदर फडफडा रहा था, ऊपर से अंडरवेर का कपड़ा भी आज उसे कंट्रोल में रख पाने में असमर्थ लग रहा था,

उनके पिच्छवाड़े के एलिवेशन को देखकर तो सारी हदें तोड़ने पर आमादा होने की कोशिश करने लगा…

बेचारा अंडरवेर जैसे-तैसे कर के उसे संभाले हुए था…
बैठने के समय उन्होने हल्का सा गॅप बनाके रखा था, … मेने गाड़ी स्टार्ट की और उनके पैर के गाइडेन्स से क्लच छोड़ने से आगे बढ़ गयी…

गाड़ी के आगे बढ़ते ही आज उन्होने अपना पैर मेरे पैर से हटा लिया… कुछ देर बाद उन्होने मुझे गियर चेंज करने को कहा… मेने क्लच दबा कर दूसरा गियर डाला..

क्लच छोड़ने में फिरसे थोड़ा झटका सा लगा.. जिससे भाभी की तशरीफ़ पीछे को खिसक गयी, और हमारे बीच का गॅप ख़तम हो गया… अब लंड महाशय को उनकी फ़ेवरेट जगह मिल चुकी थी…!

आज मेरा स्टेआरिंग पर कंट्रोल कल के मुक़ाबले अच्छा था… हम 20-25 की स्पीड तक गाड़ी को कुछ देर चलाते रहे… भाभी की दरार में मेरे पप्पू की उच्छल कूद जारी थी…

कुछ देर बाद भाभी के कहने पर मेने 3र्ड गियर भी डाल दिया… अब गाड़ी तेज चलने लगी…लेकिन मुझे कुछ डर सा लगने लगा… तो मेने कहा –

ओह.. भाभी ! ये तो बिना एग्ज़िलेटर के ही इतनी तेज भाग रही है…

वो हँसते हुए बोली – भागने दो ना .. ! 3र्ड गियर में है.. भगेगी ही.. आप बस स्टेआरिंग को संभाले रखो.. अगर ज़रूरत हो तो बस ब्रेक मार देना.. हल्के से…

बातों-2 में भाभी ने अपने कुल्हों को थोड़ा सा और पीछे को दबा दिया… मेरा लॉडा कड़क होने लगा…, उसकी हार्डनेस फील करते ही भाभी बोली—

ओउच… देवेर जी मेरे पीछे कुछ चुभ सा रहा है… ?

मेने कहा – आप थोड़ा सा आगे खिसक जाओ…, तो वो स्माइल करते हुए बोली – नही चलेगा.. आगे होने से मेरे पैरों को मूव्मेंट नही मिलेगी…आपको तो कोई प्राब्लम नही है ना..?

मेने कहा… मुझे तो कोई प्राब्लम नही है, वो आपको कुछ चुबा था इसलिए मे बोला.., इतना सुनते ही उन्होने अपनी पीठ भी मेरे सीने से सटा दी…

उनकी बगलों की मांसलता मेरी बाजुओं को छु रही थी.., मेरी साँसें उनके गाल को सहलाने लगी… भाभी के ऊपर मदहोशी सी छाने लगी.. और उन्होने अपनी गान्ड को मेरे लंड के ऊपर और ज़्यादा दबाया…

भाभी ने अपनी बाजुओं को मेरी बाजुओं के ऊपर से बाहर की साइड से लाकर स्टेआरिंग पर रख लिया…

अब उनके उभारों की गुंडाज़ बग्लें मेरी बाजुओं पर फील हो रही थी…!

Post Reply