लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

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Ankit
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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 04 Sep 2017 18:57

वो – मे भी यही चाहती हूँ… इसलिए तो कह रही हूँ… बोलो ! दोगे ना उन्हें ये खुशी…

मे – मेरी भाभी का हुकुम सर आँखों पर… फिर मेने उनको अपनी बाहों में कस लिया और बोला –

पहले अपनी डार्लिंग भाभी को तो खुशी दे दूं, ये बोलकर उनके होठ चूसने लगा……!

फिर हम दोनो ही अपना आपा खोते चले गये, दीं दुनिया से बेख़बर एक दूसरे में समाते चले गये..… !

दूसरे दिन मे अपनी बुलेट से कॉलेज पहुँचा… कॉलेज की नयी बिल्डिंग भी हमारे पुराने स्कूल से ही सटी हुई थी… बस गेट ही अलग था…

कॉलेज का ये पहला ही साल था… और ज़्यादातर हमारे स्कूल से पास हुए बच्चे ही थे.. तो सभी जानते ही थे…

मुझे बुलेट पर देख कर सारे फ्रेंड्स ने मुझे घेर लिया, और गाड़ी की खुशी में पार्टी माँगने लगे.. तो मुझे सभी को चाय नाश्ता कराना पड़ा…

अभी भी अड्मिशन चल ही रहे थे.. कॉलेज के प्रिन्सिपल मेरे पिताजी के मित्र थे.. और उपर से मे अपने स्कूल का टॉपर था…

तो उन्होने मुझे अपने ऑफीस में बुलाया और मुझसे थोड़ा कॉलेज के कामों में मदद करते रहने के लिए कहा..

क्लास तो अभी लगने नही थे, तो टीचर्स के साथ इंटरॅक्षन वग़ैरह कर-करके मे जल्दी ही वापस घर लौट आया….

अभी गाड़ी स्टॅंड की ही थी, कि भाभी बोली – लल्लाजी.. थोड़ा छोटी चाची के यहाँ चले जाओ.. उनको कुच्छ काम है.. शायद बाज़ार जाना है उनको..

मे उल्टे पैर चाची के घर पहुँचा… वो नहा धोकर तैयार हो रही थी.. थोड़ा सा मेक-अप भी किया हुआ था, जैसा गाओं में नॉर्मली औरतें करती हैं..

जैसे क्रीम, पाउडर.. हल्की सी लाली होठों पर, बारीक आँखों में काजल..

इतने में ही चाची चमक रही थी, साड़ी भी थोड़ा कसकर लपेटे हुई थी, जिसमें उनके उभरे हुए कूल्हे कुच्छ ज़्यादा ही मादक लग रहे थे.

मेने जाकर चाची को आवाज़ दी, तो वो अपने कमरे से बाहर आई.. सीने पर साड़ी का पल्लू कस कर कंधे पर पिन किया हुया था.. मेरी नज़र में वो एकदम माल लग रही थी, जिसे अगर मिल जाए तो कोई भी चोदने को तैयार हो जाए..

वो – आगये लल्ला…

मे – जी चाची ! क्या काम था.. बोलिए…?

वो – मुझे थोड़ा बाज़ार जाना था, अब तुम्हारे चाचा तो समय देते नही हैं.. सुबह स्कूल, फिर खेत….

हो सके तो मेरे साथ थोड़ा बाज़ार तक चलो ना..! इसी बहाने तुम्हारी बुलेट रानी पर बैठने का मौका मिल जाएगा मुझे भी… इतना कह कर वो हँसने लगी..

मे – अरे क्यों नही चाची..! वैसे लगता है आप बाज़ार में आज बिजलियाँ गिराने वाली हो… क्या लग रही हो…, मेने अपने उंगली और अंगूठे को मिलाकर टंच माल का इशारा किया.

वो शर्मा कर सर झुककर मुस्कराते हुए बोली – क्या लल्ला तुम भी कैसी मज़ाक करते हो.. मे ऐसी भी सुंदर नही लग रही…

मे – नही.. चाची सच में आज आप एकदम मस्त माल लग रही हो…

वो – हाए दियाय्ाआ…. लल्ला ! अपनी चाची को ही माल बोल रहे हो… बहुत बिगड़ते जा रहे हो…. लगता है जेठ जी को बोल कर जल्दी ही फेरे करवाने पड़ेंगे तुम्हारे…

मे – अब यहीं खड़े-2 फेरे करवाएँगी मेरे, या बाज़ार भी चलना है….

वो – हां चलो… मे तो एकदम रेडी हूँ… तुम अपनी फट-फटी तो लाओ…

चाची मेरे पीछे एक तरफ को दोनो पैर करके बैठ गयी, और बोली- लल्ला ये तुम्हारी हथिनी जैसी गाड़ी है, थोड़ा संभाल कर च्लना... मुझे तो डर लगता है..

मे – आप चिंता ना करो.. बस आप मुझे पकड़े रहना.. तो उन्होने अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रख दिया. और थोड़ी तिर्छि सी होकर बैठ गयी…, मेने गाड़ी बाज़ार की तरफ बढ़ा दी…

अभी गाओं से निकले ही थे, चौथा गियर डाला ही था, कि एक गाय सामने आगयि.., मुझे एक साथ ब्रेक लगाने पड़े, और चाची का वजन मेरे उपर…

उनकी 36” की चुचि जो अभी तक कोई बच्चा ना होने की वजह से अभी भी मस्त ठोस बनी हुई थी मेरी पीठ से दब गयी….

चाची एक साथ डर गयी… और बोली – हाए लल्ला… लगता है मारोगे मुझे आज.. मेने तुम्हारे साथ आकर ग़लती करदी ..

मे – चाची आप डरती बहुत हो… अब ये साइकल तो है नही जो धीरे -2 चलेगी.. ब्रेक तो लगाने ही पड़ते हैं.. आप एक काम करो, मेरी कमर पकड़ लो कस्के..

तो उन्होने मेरी कमर में अपनी बाजू लपेट दी,., और सट कर बैठ गयी.. उनकी चुचियों की चुभन मे अपनी पीठ पर महसूस कर रहा था, जिससे मेरा मूसल चन्द पॅंट में खड़ा होने लगा.

कस्बे का बाज़ार थोड़ी दूर ही था, सो 10 मिनिट में ही बाज़ार पहुँच गये…

चाची अपना समान खरीदने लगी.. सारा समान लेने के बाद वो अंडर गारमेंट की एक छोटी सी दुकान पर पहुँची. चाची की ही उमर का दुकानदार देखते ही बोला..

आइए .. आइए बेहन जी इस बार तो आप काफ़ी दिनों के बाद आई हैं… बोलिए क्या दिखाऊ..?

चाची ने अपनी पुरानी ब्रा बॅग से निकाली… और बोली – भैया मुझे अपने लिए अंगिया और कच्छि लेनी थी…ये अंगिया छोटी हो गयी है, इससे बड़ा साइज़ का दीजिए..

Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

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Ankit
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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 04 Sep 2017 18:58

दुकानदार ने एक बार मेरी ओर देखा, और बोला – अब बहनजी ऐसे अंदाज़े से तो कैसे पता लगेगा.. आप अपना नंबर तो बताइए..

ये पुरानी तो 34 की है… और इसके उपर 36 की ही आती अब वो अगर ढीली, टाइट हुई तो…?

चाची – नही होगी वोही दे दो आप… , एक बार उसने चाची के पल्लू से ढके पपीतों पर नज़र डालते हुए बोला – ठीक है, मुझे क्या है.. मे दे देता हूँ 36 नंबर की ब्रा..

फिर वो दो टाइप की ब्रा निकाल के लाया… एक जो बड़े कप वाली, जिससे चुचियों का अधिकतर हिस्सा ढक सके, और एक ऐसी जिसमें से चुचकों के साथ-साथ उनका निचला हिस्सा ही ढक पाता…

चाची ने बड़े कप वाली ब्रा सेलेक्ट कर ली… जब वो दुकानदार पेंटी लेने अंदर गया.. तो मेने चाची के कान में फुसफुसा कर कहा…

चाची ये दूसरी वाली ब्रा आपको ज़्यादा अच्छी लगेगी… चाची ने मुझे गहरी नज़र से घूरा.. और स्माइल करते हुए बोली – च्चिि.. लल्ला ! इसमें तो कुच्छ ढकेगा ही नही.. उल्टा दिखेगा ज़्यादा..

मे – अरे चाची ! थोड़ा मॉर्डन बनके चाचा के सामने जाओंगी तो उन्हें ज़्यादा अच्छा लगेगा और आपको ज़्यादा प्यार करेंगे ना!

चाची – अरे लल्ला ! उन्हें तो मे बिना कपड़ों के भी…… इतना फ्लो में बोल तो दिया.. फिर शर्मा कर चुप हो गयी.., फिर ना जाने क्या सोच कर उन्होने एक छोटे कप वाली ब्रा भी ले ली…

अबतक दुकानदार दो-तीन तरह की पैंटी लेकर आया, और मेरे इशारे पर उन्होने एक माइक्रो पेंटी भी लेली…

लौटते में चाची ने मुझसे पुछा – लल्ला तुमने किसी को पहले ऐसी कच्छी और अंगिया पहने देखा है..?

चाची का सवाल सुनकर मुझे झटका सा लगा--- मेने हड़बड़ा कर कहा..न.न.नही तो चाची.. मेने तो किसी को नही देखा..

वो – तो फिर तुम्हें कैसे पता कि वो मुझपर अच्छी लगेगी…?

मे –व.वऊू..तो बस ऐसे ही कहा था… छोटे कपड़ों में शरीर ज़्यादा सेक्सी लगता ही है…

उन्होने मेरी पीठ पर हौले से एक थप्पड़ लगाया.. और शायद हँसते हुए… हूंम्म.. करके चुप हो गयी..

मेने उन्हें उनके घर उतारा…जब मे चलने लगा तो वो बोली – लल्ला ! थोड़ा रूको.. कुच्छ खा-पीक चले जाना…

मे – अरे नही चाची.. मे अब घर जाके खाना ही खा लूँगा.. !

वो – हां भाई ! अब घर में इतनी लाड करने वाली भाभी हो तो चाची के हाथ का खाना क्यों अच्छा लगेगा…

मे – ऐसी बात नही है चाची… अच्छा ठीक है, आप चलो.. मे कपड़े चेंज करके 10 मिनिट में आता हूँ, फिर देखता हूँ आप क्या खिलाती हैं.. मुझे..

वो हँसते हुए अपने घर के अंदर चली गयी, और मे अपने घर की तरफ…

घर आकर मेने अपने कपड़े चेंज किए और एक हल्की से टीशर्ट और बिना अंडरवेर के एक हल्का सा होजेरी का लोवर पहन लिया, जिससे गर्मियों की चिप-चिप में थोड़ा कंफर्टबल फील हो..

टाइट जीन्स में सुबह से ही मेरा घोड़ा जो कयि बार टाइट हुआ था उसको भी राहत हुई, और वो अब खुला-खुला फील कर रहा था.

भाभी ने खाने के लिए बोला, क्योंकि अभी लंच का समय था.. मेने कहा मे चाची के यहाँ जा रहा हूँ, उन्होने खाने के लिए बुलाया है.. अब देखते हैं क्या खिलाती हैं..?

भाभी ने मुझे गहरी नज़र से देखा.. लेकिन मेरे चेहरे से उन्हें ऐसा-वैसा कुच्छ नज़र नही आया.. तो फिर हँसती हुई बोली..ठ.हीककक…है, जाओ… आज अपनी चाची का लाड भी देख लो…

मे उनको एक स्माइल देकर घर से निकल आया और चाची के यहाँ पहुँचा…!

चाचा भी स्कूल से आ गये थे, और खाना खा रहे थे, चाची ने मुझे भी बिताया और खाना दे दिया.. हम दोनो ने साथ-साथ खाना खाया..

कुच्छ देर इधर-उधर की बातें हुई.. फिर चाचा अपने खेतों की ओर चले गये..


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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 13 Sep 2017 19:29

SUNITASBS wrote:
11 Sep 2017 09:52
update plz
ok

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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 13 Sep 2017 19:29

चाचा भी स्कूल से आ गये थे, और खाना खा रहे थे, चाची ने मुझे भी बिताया और खाना दे दिया.. हम दोनो ने साथ-साथ खाना खाया..

कुच्छ देर इधर-उधर की बातें हुई.. फिर चाचा अपने खेतों की ओर चले गये..


तब तक चाची भी खाना खा चुकी थी.. चाचा के जाने के बाद मेने भी चाची से कहा – चाची मे भी निकलता हूँ.. तो वो बोली –

तुम रूको तुमसे अभी एक ज़रूरी काम है…

मे फिर से उनके पलंग पर बैठ गया…और बोला- हां चाची बताइए, क्या काम है…?

वो मेरे पास बैठ गयी.. और कुच्छ देर मेरी ओर देखती रही…फिर उनकी नज़र नीचे को हो गयी और अपनी सारी के पल्लू को अपनी उंगली में लपेटे हुए बोली..

वो – लल्ला मे वो ना ! वो जो कपड़े तुमने पसंद किए थे ना ! उनके बारे में बात करनी थी तुमसे…

मे – उनके बारे में मुझसे क्या बात करनी है चाची..?

वो – अब ऐसे कपड़े मेने कभी लिए तो नही थे, ना जाने कैसे लगेंगे.. ?

मे – अरे तो इसमें क्या है, एक बार पहन कर देख लीजिए ना ! पता चल जाएगा..

वो – लेकिन मे खुद कैसे देख पाउन्गि..?

मे – पहन कर शीशे के सामने खड़ी होकर देख लेना और कैसे…

वो – इतना बड़ा शीशा होना भी तो चाहिए ना… और मेरे पास मोहिनी बहू जैसी वो क्या कहते हैं, हां वो.. दर.दर्शन्णन्न् टेबल तो है नही..

मे – ओह ! ड्रेसिंग टेबल….

वो – हां ! वही… ! तो अब कैसे देखूं..? क्या तुम मुझे देखकर बता दोगे..?

मे ? मे…मे कैसे देख सकता हूँ.. आपको उन कपड़ों में..? आप एक काम करिए, भाभी या रामा दीदी को दिखा दीजिए… वो आपको बता देंगी कैसे लगते हैं आप पर…

वो – कैसी बातें करते हो लल्ला… मे भला ऐसे कपड़ों को मोहिनी बहू या रामा बिटिया को कैसे दिखा सकती हूँ..?

वो क्या सोचेंगी मेरे बारे में..? की देखो चाची को इस उमर में ऐसे कपड़ों की क्या ज़रूरत पड़ गयी…

सच में तुमने तो मुझे फँसा दिया लल्ला…! अब तुम्हें ही देखकर बताना पड़ेगा हां ! और वैसे भी तुम हमारे घर में सबसे छोटे हो, उपर से तुमने एक दिन मुझे वैसी हालत में देख भी लिया था.. तो तुम्हारे सामने मुझे झिझक थोड़ी कम होगी….!

मे – ओह चाची ! तो आप चाचा को ही क्यों नही दिखा देती…

वो – वो तो देखते ही मारखाने बैल्ल की तरह भड़क उठेंगे, .. छूटते ही कहेंगे ये क्या रंडियों जैसे कपड़े ले आई हो..

फिर वो मेरे हाथ अपने हाथों में लेकर बोली – अब अगर तुम भी नही देखना चाहते तो कल उन कपड़ों को वापस कर देना, जब कॉलेज जाओ तब…

मे - ओह चाची ! अच्छा चलो अब !.. ठीक है आप पहनो मे देख लेता हूँ कि आप कैसी लगती हो उन कपड़ों में…

वो – तुम एक काम करो.. दो मिनिट बाहर चले जाओ, मे तब तक वो पहन लेती हूँ, फिर तुम्हें आवाज़ दे लूँगी..

मे उठकर बाहर उनके आँगन में चला गया… फिर कोई 10-15 मिनिट के बाद चाची ने मुझे आवाज़ देकर अंदर बुलाया…

वो गले तक एक चादर ओढ़े हुए पलंग के पास खड़ी थी.. मुझे देखते ही उन्होने नज़रें झुका ली.. मेने पुचछा – हां चाची वो कपड़े पहने या नही…दिखाओ..!

तो उन्होने झेन्प्ते हुए.. धीरे-2 अपने बदन से चादर अलग की और अपनी नज़रें नीची किए पैर के अंगूठे से फर्श को कुरेदने लगी….....

एक मिनी ब्रा और छोटी सी पेंटी में कसे उनके मादक गदराए.. गोरे बदन की सुंदरता में मे तो खो सा गया.. वो इन कपड़ों में मियाँ खलीफा को भी मात दे रही थी…

बड़े-बड़े पपीते जैसे उनके कठोरे वक्ष, जो अब भी अपनी कठोरता बरकरार रखे हुए थे, जिनका निपल से उपर का पूरा हिस्सा खुला हुआ था,

ब्रा के कप की चौड़ाई भी मात्र 3” से ज़्यादा नही थी, जिससे दोनो चुचियों की पुश्टता एकदम साफ-2 दिखाई दे रही थी.

30 की उमर में भी उनका पेट ज़रा भी बाहर नही निकला था, हां हल्की सी मासलता ज़रूर थी, जो उनके हुश्न में और चार चाँद लगा रही थी,

खूब गहरी नाभि, जो थोड़ी सी नीचे की तरफ झुकी हुई… उनकी सेक्स अपील को डरसा रही थी.

मांसल केले के तने जैसी जांघों के बीच, दुनिया का अनमोल खजाना.. माइक्रो बिकनी में सही से ढक भी नही रहा था, साइड से उनकी झान्टो के बाल निकल कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे, शायद महीने भर से साफ नही किए होंगे..

कसी हुई पेंटी में उनकी रसीली के होंठ अपनी पुश्टता दिखाने से बाज़ नही आए.. और उनका उठान, फिर उनके बीच की दरार साफ-साफ अपना इंप्रेशन दे रही थी.

जब बहुत देर तक मेने कुच्छ नही कहा, बस यूँ ही खड़ा उनके रूप लावण्य में खोया रहा, तो चाची ने अपनी नज़र उठाकर एक बार मेरी ओर देखा, और मुझे अपने बदन को निहारते पाकर, एक बार फिरसे उनकी नज़र शर्म से झुक गयी…

बताओ ना लल्ला..! कैसी लग रही हूँ मे इन कपड़ों में…?

आंनन्ज्ग…हां…! मे जैसे नींद से जागा… थोड़ा पलटना चाची… मे एक बार पीछे से भी तो देख लूँ.. तब बताउन्गा…!

वो जब पलटी तो….तो…उनके कुल्हों की पुश्टता देखकर मेरा मूह खुला का खुला रह गया…उनके 38” की गान्ड पर वो छोटी सी पेंटी की पट्टी सिर्फ़ उनकी दरार को ही ढक पा रही थी…

ढक भी नही पारही थी, बस उसमें फँसाने से अपने आप को किसी तरह बचाए हुए थी..


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