लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

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Ankit
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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 31 Aug 2017 14:38

अब तो उसके धैर्य की सीमा ही ख़तम होती जारही थी, जिसके चलते उसने एक बूँद अपने रस की सॅंपल के तौर पर उसको पेश करदी…

सफेद मोटी जैसी बूँद को देख कर दीदी ने उसे अपनी उंगली के पोरे पर रख लिया और उसे देखने लगी…

मे – क्या देख रही हो, जैसे मेने तुम्हारे रस को पीया है अमृत समझ कर वैसे ही ये तुम्हारे लिए अमृत है, चख कर देखो…

उसने झेन्प्ते हुए उसे अपनी जीभ से टच किया.. और उसका स्वाद लेने की कोशिश करती रही… फिर उसने अपनी पूरी उंगली को मूह में ले लिया..

मे – कैसा है… ? तो उसने आँखों के इशारे से ही हामी भरी और फिर अपनी उंगली मूह से निकाल कर बोली – टेस्टी है..

तो मेने कहा.. फिर देख क्या रही हो इसे मूह में लेकर प्यार करो… चूसो इसे.. जिससे ये तुम्हारी राम दुलारी को अच्छे से प्यार दे सके..

मेरी बात मान मुस्कुराते हुए उसने मेरे गरम सुपाडे को अपने होठों में क़ैद कर लिया और चूसने लगी.. और फिर धीरे-2 उसने उसे आधी लंबाई तक अपने मूह में कर लिया..

मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी… लंड एकदम कड़क हो चुका था, उसकी नसें फूलने लगी.. मेने उसका मूह अपने लंड से अलग हटाया तो वो मुझे नाराज़गी वाले भाव लाकर देखने लगी…

मेने कहा, अब इसको अपनी प्यारी-2 मुनिया में लेने का समय आ गया है.. और उसको वहीं हरी-हरी घास पर लिटा कर उसके घुटनो को मोड़ कर उसके पेट से लगा दिया,

मेने अपने घुटने ज़मीन पर टिकाए… फिर उसके कुल्हों को अपनी जांघों के उपर रखा…

अब उसकी छोटी सी कुँवारी चूत उपर को उभर आई, जिसे मेने एक बार फिरसे अपनी जीभ से चाट लिया, और उसकी मुनिया के होठ खोलकर अपना मोटा टमाटर जैसा सुपाडा उसके छोटे से छेद पर भिड़ा दिया…

मेरे सुपाडे से उसकी छोटी सी चूत एकदम ढक सी गयी थी… मेने अपनी कमर को हल्का सा पुश किया, जिससे वो उसकी गीली चूत में सेट होगया…

इतने से ही दीदी के शरीर में झुरजुरी सी दौड़ गयी और उसने अपनी आँखें कस कर बंद कर ली..

मेने एक हल्का सा धक्का अपनी कमर को लगाया.. तो मेरा सुपाडा आधे से थोड़ा ज़्यादा अंदर समा गया और वो किसी दीवार जैसी परत पर जाकर अटक गया.. जो शायद उसकी झिल्ली थी..

रामा के मूह से एक हल्की सी चीख निकल गयी…. और उसकी आँखों में पानी आगया…

मेने दीदी को एनकरेज करते हुए कहा – दीदी थोड़ा मॅनेज करना पड़ेगा… और फिर एक लंबी साँस लेकर एक जोरदार धक्का लगा दिया….

आआयययययययययययीीईईईईईई……..माआआआअ…………मररर्र्र्ररर………गाइिईईईईईईईईई……….रीईईईईईईईई……..आआआआअहह…….

एक फ़च की आवाज़ के साथ उसकी झिल्ली फट गयी.. और एक खून की धार मेरे लंड की साइड से निकली….

मेरा लंड भी दर्द करने लगा था… शायद उसकी चूत की झिल्ली से वो भी रगड़ गया था…

5-7 मिनिट मे यूँ ही पड़ा रहा… उसके उपर, और इस दौरान मे उसके आँसू पोंछता रहा, उसको ढाढ़स देता रहा…

फिर उसको चुप कराकर.. उसके होंठो को चूसा… उसकी चुचियों को सहलाया… तब जाकर वो नॉर्मल हुई… और मेरा भी दर्द कम हुआ..

कुच्छ देर बाद मेने उसको पुछा – दीदी अब दर्द तो नही है.. तो उसने ना में सर हिलाया और बोली – पूरा चला गया कि नही…

मे – हां ! लगभग… बस थोड़ा और वाकी है.. जबकि अभी मेरा आधा लंड ही गया था..,

अब मेने आधे लंड को थोड़ा बाहर को निकाला… लंड के साथ उसकी चूत की अन्द्रुनि परत भी बाहर तक आई…और साथ ही उसकी कराह भी निकल गयी…

मे थोड़ा रुका और फिर से उतना अंदर कर दिया… तो वो फिर कराही… ऐसे ही बड़े ध्यान से… आराम से मेने अपने आधे लंड को अंदर-बाहर किया..

कोई 20-25 बार में ही उसकी चूत फिरसे गीली होने लगी और उसको दर्द होना बंद हो गया..

अब वो भी मेरे साथ सहयोग देने लगी.. उसकी चूत से लाल लाल रस निकल रहा था.. मेने मौका देख एक और भरपूर धक्का मार दिया और पूरा लंड उसकी चूत में डालकर रुक गया…

ऊ…माआ…मार दलाअ… रीए.. भेह्न्चोद… साले… और कितना डालेगा… तेरा ये खूँटा मेरे पेट तक तो पहुँच गया…

मे – बस ये एंड होगया.. दीदी.. अब तेरी चूत ही इतनी छोटी है.. तो इसमें बेचारे मेरे खूँटे का क्या दोष..

और उसकी चुचियों को मसल्ते हुए उसके होठों को चूम लिया…

थोड़ी देर के बाद मेने फिरसे धीरे-2 धक्के लगाना शुरू कर दिया.. कोई 5 मिनिट बाद ही दीदी भी नीचे से अपनी कमर उचकाने लगी और मेरे धक्कों का साथ देना शुरू कर दिया…

आहह… छोटुऊ…जल्दी-जल्दी कर.. बहुत मज़ाअ.. आरहाआ.. है..सस्सिईईईई…हान्न्न…और ज़ॉर्सईए….हाईए…रीए…कितनाअ…मज़ाअ..आट्टाअ…चूड़नीई..मीईंन….शाबास और..टीज़्जज……उफफफ्फ़.. मे..गाइिईईईई…रीई….ओह…गोद्ड़द्ड…

वो जोरेसे मेरी कमर में अपने पैर लपेट कर चिपक गयी.. और इतनी ज़ोर्से झड़ी… कि.. तमाम गाढ़ा-गाढ़ा रस मेरे लंड की साइड से बहने लगा…

मेरे धक्कों की गति धीमी पड़ गयी थी क्योंकि उसने मुझे ज़ोर्से कस रखा था…. लेकिन मेरा होना अभी वाकी था तो धक्के लगाता रहा…

जब वो थोड़ा होश में आई तो बोली- भाई.. घास से मेरी पीठ छिल्ने लगी है.. तो मे उसे लेकर खड़ा हो गया,

मेरा डंडा इस समय 60 डिग्री खड़ा था, जो अकड़कर किसी शख्त रोड की तरह लग रहा था.

मेने उसकी जाँघो के नीचे से हाथ डाल कर उठा लिया, और अपने सुपाडे को उसकी ताज़ी फटी चूत के छेद पर फिट कर दिया.


उसने अपनी बाहें मेरे गले में लपेट ली थी, जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत में सेट हुआ,

मेने उसके शरीर के भार को नीचे की ओर आने दिया… नतीजा… धीरे-2 पूरा लंड उसकी चूत में समा गया...

दीदी एक बार फिर दर्द से बिलबिला उठी, क्योंकि अभी कुच्छ पल पहले ही उसकी मुनिया घायल हुई थी.. और अब एक साथ मेरा पूरा मूसल एक ही साथ समाकर उसके पेट तक ठोकर मारने लगा था.

हम दोनो के प्रयास से वो दो-चार बार आराम से उपर नीचे हुई, लंड किसी पिस्टन की तरह अंदर जाता, बाहर आता.. जिसे वो अपनी खुली आँखों से देख भी रही थी.

वो फिरसे गरम होने लगी और मेरे लंड पर कूदने लगी.. मिझे इतना मज़ा आरहा था जिसे शब्दों में बयान नही किया जा सकता…

10 मिनिट खड़े –खड़े चोदने के बाद हम दोनो एक साथ झड़ने लगे, वो मेरे सीने से ऐसी चिपक गयी, जैसे कि कभी अलग ही ना होना हो…

हम दोनो एक बार फिर झील में उतार कर नहाए, एक दूसरे के बदन को साफ किया…
और फिर बाहर आकर अपने अपने कपड़े पहने, बुलेट में किक लगाई और अपने घर को चल दिए…

रास्ते मे मेने उसे पुछा – दीदी अब तो खुश हो ना ! ये सुनते ही उसने मुझे पीछे से अपनी बाहों में कस लिया और मेरी गर्दन को चूमते हुए बोली –

थॅंक्स भाई… आज तूने मेरा वर्षों का सपना पूरा कर दिया…

मे – तो क्या तुम वर्षों से मेरे साथ ये सब करने का सोच रही थी..?

वो – सच कहूँ तो हां !... हर लड़की अपने जीवन में इस दिन का बड़ी बेसब्री से इंतेज़ार करती है, जब वो एक कली से फूल बनना चाहती है.., वो एक लड़की से औरत बनती है…

लेकिन मुझे पता नही क्यों बाहर के लड़कों पर कभी भरोसा नही हुआ.. इसलिए मे तेरे साथ वो सब करती रहती थी कि शायद तू मेरी फीलिंग्स को समझे..

लेकिन बहुत कोशिशों के बाद भी तू मेरी भावनाओं को, मेरे इशारों को नही समझा, तब मेने तेरे उपर नज़र रखना शुरू कर दिया,

और मुझे तेरे और भाभी के बारे में कुच्छ-2 शक़ होने लगा…

जब भाभी तेरी मालिस करती थीं, तो छुप-2 कर मे वो सब देखा करती थी… वो भी जिस दिन भाभी ने पहली बार तेरा कॉक मूह में लिया था…

मे उसकी बातें सुन कर झटका खा गया… फिर संभलते हुए बोला…

मे – तो क्या तुम्हें भाभी और मेरे संबंध से एतराज है…

वो – बिल्कुल नही…! सच कहूँ तो भाभी को उनका हक़ मिला है.. उन्होने ही तुझे ऐसा बनाया है, तुझे सवारने में अपने इतने साल गँवाए हैं…

तेरी हर तकलीफ़ उन्होने अपने उपर झेली है…, तो तेरे उपर पहला हक़ तो उनका ही है..

सच कहूँ तो मे उनके लिए बहुत खुश हूँ.

और अब तो तूने मुझे भी उस खुशी में शामिल कर लिया है…इसके लिए मे हमेशा तेरी अहसानमंद रहूंगी मेरे प्यारे भाई…

ये कहते हुए उसने उचक कर मेरे गाल को चूम लिया…

रामा की भावनाए आज खुलकर सामने आ गयी थी…और उसने जो चाहा वो आज उसे मिल भी गया था..

बुलेट की आवाज़ सुनकर आस-पास के भी लोग हमारे दरवाजे पर आगये थे, मेरी पर्सनॅलिटी के हिसाब से बुलेट एकदम मेरे लिए सही बाइक थी, जो शायद भाभी का ही सपना हो मुझे बुलेट चलाते देखना…

मेने अपने दरवाजे पर पहुँचकर जैसे ही बाइक खड़ी की, भाभी दौड़ कर बाहर आगयि, उनके हाथ में आरती की थाली थी,

मे उतरने को हुआ तो उन्होने हाथ के इशारे से रुकने को कहा और मेरे सीट पर बैठे-2 ही मेरी आरती उतारी, अपने दोनो हाथों को मेरे सर के दोनो ओर से उवार कर मेरी बालायें ली, फिर मेरे माथे को चूमकर बोली- अब आ जाओ…

ये सब बाबूजी दूर बैठे देख रहे थे, उनकी आँखों में पानी था… फिर वो हमारे पास चले आए,

भाभी ने जैसे ही उनके पैर छुये, वो गद गद होगये और उन्हें ढेरों आशीर्वाद दिए.

दीदी मेरे पीछे से उतर कर बॅग हाथ में लिए घर के अंदर जा रही थी, उसकी चाल कुच्छ बदली-2 सी देख भाभी को कुच्छ शक़ हुआ लेकिन उन्होने कुच्छ कहा नही..

Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

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kunal
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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by kunal » 31 Aug 2017 17:08

nice update
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Kamini
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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Kamini » 01 Sep 2017 14:01

mast update

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Ankit
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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 01 Sep 2017 20:45

kunal wrote:
31 Aug 2017 17:08
nice update
Kamini wrote:
01 Sep 2017 14:01
mast update
thanks

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Ankit
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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 01 Sep 2017 20:45

दीदी मेरे पीछे से उतर कर बॅग हाथ में लिए घर के अंदर जा रही थी, उसकी चाल कुच्छ बदली-2 सी देख भाभी को कुच्छ शक़ हुआ लेकिन उन्होने कुच्छ कहा नही..

हमें घर पहुँचते-2 शाम के 4 बज गये थे, तो भाभी ने हमें चाय नाश्ता दिया, क्योंकि खाने का तो ये समय ही नही था..

दीदी नाश्ता करके अपने कमरे में आराम करने चली गयी… वो बहुत थकान महसूस कर रही थी…

अब मे और भाभी ही रह गये तो वो मुझे अपने कमरे में ले गयी, और हम दोनो पलंग पर लेटे-लेटे बात करने लगे…

भाभी – और सूनाओ लल्ला… कैसा रहा तुम्हारा शहर का सफ़र… बड़े देवर्जी ने कुच्छ खातिर-वातिर की अपने छोटे भाई बेहन की या ऐसे ही टरका दिया…

मे – अरे भाभी ! पुछो मत ! क्या रूतवा है भैया का… पोलीस वाले उनके आगे-पीछे घूमते हैं…

और फिर मेने वहाँ भैया के साथ जो-जो खरीदारी की वो सब बताया, फिर दूसरे दिन मूवी देखी..

भाभी – अच्छा लल्लाजी ! अब मे जो पुच्छू.. उसका सच-सच जबाब दोगे..?

मे – क्या भाभी ! आपको लगता है कि मे आपसे कभी झूठ भी बोल सकता हूँ..?

वो – नही ! ऐसा अब तक तो नही हुआ है… पर ये सवाल ही ऐसा है कि शायद इसका तुम जबाब ही ना देना चाहो…!

मे – आप निश्चिंत रहो भाभी.. मेरे जीवन में आपसे बढ़कर ऐसी कोई बात नही है जो मे आपसे शेयर ना कर पाउ…आप पुछिये क्या पुच्छना है…

वो – मुझे शक़ है कि तुम्हारे और रामा के बीच ऐसा कुच्छ हुआ है, जो मुझे पता नही है…

आज जब वो बाइक से उतरकर अंदर आ रही थी, तो उसकी चाल कुच्छ बदली-2 सी लग रही थी… ये कहकर वो मुझे स्वालिया नज़रों से घूर्ने लगी..

मे कुच्छ देर चुप रहा और फिर नज़रें नीची करके बोला - सॉरी भाभी ! आज से पहले तो ऐसा कुच्छ नही था हम दोनो के बीच पर आज ही………..

वो – हां बोलो ! आज ही क्या…? बताओ मुझे.. वो मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर बोली…

मे – आज से पहले हम दोनो के बीच बस कुच्छ बराबर के लड़को-लड़कियों जैसी थोड़ी बहुत छेड़-छाड़ होती रहती थी, जो मेरे लिए तो बस एक नॉर्मल भाई-बेहन वाली ही छेड़-छाड़ जैसी थी, लेकिन दीदी की भावना कुच्छ अलग ही थी मेरे लिए…

कल जब हम मूवी देख रहे थे तब….और फिर मेने जो भी हम दोनो के बीच हुआ, और फिर दीदी ने जो बताया वो सब मेने भाभी को बता दिया… जिसे सुनकर वो एकदम सकते में आ गयी….

फिर मेने आज जो कुच्छ हम दोनो के बीच हुआ वो भी सब बता दिया…उसके बाद रास्ते में जो हमारी बातें हुई वो भी बता दी…. तब जाकर उनको थोड़ा तसल्ली हुई..

मे – अब आप ही बताओ भाभी इसमें मेने कुच्छ ग़लत किया…?

कुच्छ देर वो चुप-चाप मेरे चेहरे को देखती रही… फिर कुच्छ सोच कर बोली – वैसे एक तरह से देखा जाए, तो रामा भी अपनी जगह सही है…

आख़िर उसकी भी उम्र ये सब करने की है ही, और ज़्यादातर लड़के लड़कियाँ इस उम्र में बहक कर ग़लत-सलत कदम उठा लेते हैं.. जिससे कभी-2 बदनामी का भी डर पैदा हो जाता है..

लेकिन अब तुम दोनो एक लिमिट में रह कर ही ये सब आगे करना, वैसे मे उससे भी बात करूँगी… पर तुम भी ये बात ध्यान रखना… कि अब अपना वीर्य उसके अंदर कभी मत छोड़ना… ठीक है..

फिर उन्होने मेरे होठों पर एक किस करके कहा – अब तुम थोड़ा अपने कॉलेज पर ध्यान दो, कल से रेग्युलर क्लास अटेंड करना…

फिर थोड़ा स्माइल करते हुए बोली - और हां ! समय निकाल कर थोड़ा छोटी चाची के पास चले जाया करो..

मे – क्यों ? उनको मुझसे क्या काम है.. मेने आपको बताया था ना, उनके बारे में..

वो – इसी लिए तो कह रही हूँ… मेरे अनाड़ी बलम… उन्हें तुम्हारी ज़रूरत है..शादी के इतने सालों बाद भी वो माँ नही बन पाई.. बेचारी अधूरी सी हैं…तो तुम थोड़ा कोशिश करो…प्लीज़… उन्हें भी खुशी होगी.

मे – क्या आप भी यही चाहती हैं..?

वो – मे भी यही चाहती हूँ… इसलिए तो कह रही हूँ… बोलो ! दोगे ना उन्हें ये खुशी…

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