मेरी माँ का और मेरा सेक्स एडवेंचर

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Re: मेरी माँ का और मेरा सेक्स एडवेंचर

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pongapandit
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Re: मेरी माँ का और मेरा सेक्स एडवेंचर

Post by pongapandit » 10 Dec 2017 16:04

thanks sabhi mitro ka

pongapandit
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Re: मेरी माँ का और मेरा सेक्स एडवेंचर

Post by pongapandit » 10 Dec 2017 16:05

उसकी फाइल ट्रांसफर हो रही थी और उस टाइम वो फोटोस देख रहा था। मैं अपनी और मोम की पिक्स और वीडियो हाइड नहीं करती लेकिन ऐसी जगह रखती हूँ जहाँ पे कोई इमेजिज और वीडियोस नहीं खोलता, इसलिए कोई टेन्षन नहीं थी। वो लास्ट टाइम की मेरी अपने दोस्तों के साथ जयपुर ट्रिप की पिक्स देख रहा था जिसमें मैं और शगुफ्ता बाइक पे बैठी थीं।
मैं- “बात तो तेरी सही थी, अगर तू वो सब नहीं बोलता ना तो कुछ भी नहीं होता, तुम दोनों क्या पहले से फाइट करते हुए आ रहे थे?” अगले फोटो में मोम, भाई और मैं भीगे हुए थे और हँस रहे थे। मुझे याद आया की ये लास्ट कान की फर्स्ट बारिश में भीगने वाले दिन की है।
भाई ने उस फोटो से नजर हटाकर कहा- “नहीं, मुझे लगता है… …” कहकर वो रुक गया।
मैंने कहा- “क्या?”
भाई ने कहा- “आई थिंक मोम नोज अबाउट अस…”
मैं टीशर्ट पहन कर रुक गई- “मतलब?” फिर मैंने दराज से पैंटी निकालकर पहनी।
तब भाई बोला- “मोम को देखकर कभी-कभी ऐसा लगता है की वो जानती हैं, और कल मोम आपको देखकर समझ गई की हमने सेक्स किया था…”
मैं शॉर्ट्स पहन के भाई के पास बैठी- “ऐसा नहीं है, तूने कल मुझे नंगी देखा तो मोम…”
भाई बोला- “फिर मोम इतना हंगामा कैसे कर रही थी? आई थिंक वी शुड स्टाप दिस…”
मैं- “य-युवर राइट, मोम टोटली अनप्रिडिक्टीबल हैं…”
भाई- “ह्हम्म… कुछ करता हूँ इस बारे में…”
बात और ना बढ़े इसलिए हमने साथ बैठकर डिनर किया, पर किसी ने भी एक दूसरे से बात नहीं की। भाई मोम से गुस्सा था, लेकिन मोम ने भी उसको सॉरी नहीं बोला। डिनर के बाद मैं मोम से बात करने गई, पर मोम मेरी बात समझने को तैयार नहीं थी, और तो और मोम ने मुझे ही डाँट दिया। हमें धीमी आवाज़ में बात करनी पड़ रही थी लेकिन मन तो चिल्ला-चिल्ला के बोलने का था।
उनको मैंने कहा- “डिनर के बाद मुझे नींद आ गई थी, जानबूझ के तो नहीं किया मैंने, मुझे ये तो बताओ इसमें बड़ी बात क्या है?”
मोम- “तुझे मैं बता चुकी हूँ पर तु समझती कहां है, तुम दोनों ने फ्रीडम का ज्यादा ही फ़ायदा उठा लिया है…”
मैं- “लेकिन मोम इस सब में भाई की क्या गलती है? आपको उसपे चिल्लाना नहीं चाहिए था…”

मोम- “हम तो ओफिस में भी एक दूसरे पे खूब चिल्लाते हैं, तो क्या हर टाइम सारी बोलती फिरू…”
मैं- “मुझे पता नहीं की ओफिस में आप कैसे रहते हो? और ये मामला ओफिस का है भी नहीं। हर बार आप ही बखेड़ा करती हो और ये वाला भी आप ही ने खड़ा किया है…”
मोम- “अच्छा? वो कैसे? ज़रा मैं भी तो सुनूँ?”
मैं- “आपको नहीं पता? मुझे ना, कुछ समझ में नहीं आता। एक तो इतनी सी बात के लिए आप झगड़ बैठी, जबकि दिन को खुद भाई से चुदाने की बात कर रही थी। फिर उसका हमें नंगी देखना तो बहुत ही छोटी बात नहीं लगती आपको?”
फिर मोम ने कहा- “सिर्फ़ बात की थी, और उससे कुछ नहीं होता…”
मैं- “पर आपने उसको ब्लो-जोब तो दिया था ना? और कई बार उसका वीर्य भी आप पी चुकी हो, अब ये बड़ी बातें नहीं क्या आपके लिए?”
मोम के पास अब जवाब नहीं था।
फिर मैंने कहा- “अगर नग्नता से इतनी प्राब्लम है तो ये बाकी चीज़ें भी करना छोड़ दो, क्योंकी आपका गुस्सा भी ढोंग लग रहा है…”
मोम ने मुझे ऐसे देखा की वो अभी एक रखकर देंगी, पर मुझे भी डर नहीं था। मोम अपना सिर पकड़कर बेड पे बैठ गई और कुछ सोचने लगी, शायद वो कुछ बताना चाह रही हों, और शब्द ना मिलने पे बताना कैंसल कर दिया। फिर उन्होंने कहा- “मोना, मैं अब इस बारे में बात नहीं करना चाहती, तू अब जा यहां से…”
फिर मैं भी रुकी नहीं और अपने रूम में चली गई।
मोम की वजह से मेरा मन बाहर जाने को होने लगा, और मैं कामया को काल करके उसके वहां जाने के लिए तैयार होकर घर से निकल गई। रास्ते में मेरी रिंग बजी, तो मुझे लगा की भाई ने काल किया होगा। लेकिन वो काल तिलक का था जिससे में आज ही मिली थी। उसने मुझे कल मिलने के लिए काल किया था लेकिन , 15 मिनट बाद मैं तिलक के प्लेस पे पहुँच गई।
मैं और तिलक कुछ देर बातें करने लगे और फिर रहा नहीं गया। उसने मेरी तरह पैशनेट और अग्रेलसवली किस करते हुए मुझे नंगी कर दिया और खुद को भी। उसकी सेक्सी रिप्ड़ बाडी मेरी हाट कर्वी बाडी से लिपटी हुई थी। हम एक दूसरे को इस तरह किस कर रहे थे जैसे नन्मों बाद मिले हों, और इसके बाद फिर हम मर जाएँगे।
उसने मेरे टिट्स को काटा और जोर से चुचियों को हथेलियों में भर के दबोचा। मैं उसकी बैक को खरोंच रही थी, फिर मैं उसके कड़क लण्ड को पकड़कर जोश में चूसने लगी। तिलक का होश उड़ा हुआ था, और मुझे हैरानी से और अपने भाग्य पे बिलीव ना करते हुए मुझे उसके लण्ड को पूरा मुँह में लेते हुए देख रहा था।

उसने मेरा चेहरा अपने हाथों में लिया और मस्ताने अंदाज में जी भर के चूम लिया, चूमते -चूमते वो सही जगह पहुँच गया और मेरी चूत जिसे बस लण्ड चाहिए था, उसमें अपनी जीभ डालने लगा। मैं शानदार चुदाई का इंतजार कर रही थी, पर मैंने उसको मेरी चूत को फाड़ने से पहले चेक कर लेने दिया। उसके बाद वो मुझे उठाकर बेडरूम में ले गया। आँखों में देखते हुए मैंने अपनी खुली चूत में उसका मोटा लण्ड महसूस किया, ओह्हह गोड… मैंने उसके बाल पकड़ लिए और उसने मेरे।
मैं- “आह्हह… आह्हह… आह्हह… आह्हह… एसस्स…” कहते हुये मैं पलट गई।
और उसने मेरी गाण्ड पकड़कर डागी पोज़ में मेरी चूत फाड़ने लगा। वो तूफ़ानी चुदाई कर रहा था और मैं भी लहरों के जैसे हिल रही थी। चूत में बिजलियाँ धमाके कर रही थी।
मैं- “ओह्हह… फक…” मैं चिल्ला पड़ी और मेरी चूत से समुंदर उमड़ के बाहर आ गया। उसका लण्ड पलक झपकते ही मेरे अंदर वो कमाल की गर्मी बढ़ाने लगा जिसकी वजह से मैं यहाँ आई थी।
तिलक मुझपे झुका हुआ- “आऽ आऽ आऽ…” वो पूरी ताकत से मेरी चूत मारते हुए- “आऽ आह्हह… आह्हह…” मुझे देख रहा था, लेकिन उसकी आँखों में देखते हुए भी मैं सिर्फ़ उस बदन को याद कर रही थी जिसने मुझे अपने जैसा बनाया।
जिसने मुझे बनाया- “आह्हह… फक मी…” हाँ वो भी यही कहती- “एस एस हार्डर…” उसको भी ये पसंद है, क्या सच में उसको ये पसंद है? अंजान लोगों से चुदा लेना, जो बस उससे यही चाहते हैं, और उनका क्या जो उसको सच में चाहते हैं? मेरा क्या? आदी का क्या? तुम हमसे छुपती क्यों हो? प्लीज़्ज़… कम आंड शो यौरसेल्फ़, फ़ॉर अस प्लीज़… मैं और आदी, वी बोथ लव यू …”
“आई लव यू , हाँ हाँ आई लव यू मोनिका…” एक मर्द की आवाज़ दरवाजा से कहीं सुनाई दी।
मेरी पलक झपकी, और देखा कि वो जाना पहचाना चेहरा मुझे देख रहा था, फिर मेरे बदन में गर्मी बहती हुई बाहर निकल गई।
“ओह्हह… फक…” तिलक ने कहते हुए अपना मोटा लण्ड मेरी भीगी चूत से निकाल लिया।
तिलक से विदा लेकर मैंने कामया को काल करके मना कर दिया की मैं नहीं आ रही, क्योंकी अब मैं वहीं रहना चाहती थी जहाँ मोम थी। नो वॅन्स मी। कल तो सब नॉर्मल हो जाएगा, ये सोचकर मैं अपने बेडरूम में सो गई।
भाई तो चलो मोम के साथ काम भी करता था इसलिए उनके बीच नॉर्मल जैसा ही था। लेकिन अगले कुछ दिनों तक भी मोम का मुझ पर से गुस्सा कम नहीं हुआ। बस एक दूसरे को चीज़ें देने, ज़रूरी काम करने को कहने के अलावा हमने बात नहीं की। मैं एक्सरसाइज़ रूम गई नहीं लेकिन भाई ने मुझसे कहा की वो अकेला ही एक्सरसाइज़ कर रहा है और हम नहीं। मैंने घर पे भी आउटडोर आउटकिट पहन, ताकी मोम को कोई बात कहने का मौका ना मिले।

pongapandit
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Re: मेरी माँ का और मेरा सेक्स एडवेंचर

Post by pongapandit » 10 Dec 2017 16:21


लेकिन मोम ने अपने इनडोर लुक में चेन्जिज नहीं किए, जिसमें वो सेक्सी लगती थी और गुस्से में तो सुपर-हाट, पर इस सबका हम पे असर नहीं हुआ। दिन को मोम ओफिस नहीं गई थी, और लंच से पहले ही मोम तैयार होकर, वन सडर टाप और जींस में, एक हाट आइटम बनकर चली गई।
जब वो थकी हुई शाम में आई। पहले तो मुझे गुस्सा आया, पर मेरा गुस्सा बाद में शांत हो गया क्योंकी, मोम अकरम के काम की वजह से गई थीं, जिसको स्किप करना मुश्किल होता था। मोम ने मुझसे कहा नहीं, पर मैंने उनको काफ़ी बनाकर दी और अपने रूम में चली आई।
अगले दिन डिसाइड करके मैं एक्सरसाइज़ रूम गई। मेरे रूम में आने के 10 मिनट बाद मोम आई, लेकिन मुझे देखकर वापस चली गई। मैं बस रुक सी गई, फिर मैं खड़ी होकर अपने रूम में तेज़ी से चली गई और योगा पैंट और स्पोर्ट ब्रा उतार के फेंक दिया और सिर पकड़कर बेड पे धड़ाम से लेट गई।
10 मिनट बाद दरवाजे पे नाक हुआ- “मोना?” जबकि दरवाजा खुला था।
मैंने जवाब नहीं दिया, फिर मोम रूम में आई तो मैं बाथरूम में चली गई और दरवाजा बंद कर लिया।
बाहर से मोम ने कहा- “तू वापस क्यों आ गई? चल कपड़े पहन और आ जा एक्सरसाइज़ करने…”
मैंने फिर रुक के कहा- “नहीं, मेरे पैर में दर्द हो रहा है…”
मोम- “अच्छा बहाना है, चल आ ना बाहर…” उनकी आवाज़ में गुस्सा नहीं था, वो मनाने की कोशिस कर रही थी।
मैं अपना चेहरा धोकर बाहर आई। मोम ने मेरी आँखों को देखकर कुछ नहीं कहा और मेरे वापस योगा आउटकिट पहनने तक मेरा इंतजार करती रही। फिर मुझे लेकर एक्सरसाइज़ रूम में ले गई। भाई वहां पे पहले से ही था और पुस-अप कर रहा था। तब मुझे समझ में आया कि मोम मुझे देखकर चली नहीं गई थी, वो तो भाई के ना होने पे उसको लेने गई थी।
फिर हमने खूब पशीना बहाया। एक्सरसाइज़ के बाद एक फ़ायदा ये भी हुआ की दिमाग से कचरा निकल गया था। मोम कुछ ना कुछ पूछकर हमसे बात कर रही थीं। हमको पता था की मोम वापस आपस में नॉर्मल करना चाह रही थीं। इसलिए हमने भी पुरानी बात भुला दी।
शाम में कामया के मेशन के बैकयार्ड में बने पूल में हम लड़कियां स्वीमिंग करने के बाद हम सब क्लब गये। नेहा और कामया के बायफ्रेंड अभी भी उनसे उस पार्टी की वजह से नाराज़ थे। कामया अपने बायफ्रेंड को क्लब में एक लड़की के साथ देखकर वापस बाहर अपनी कार में बैठ गई।
मैं और नेहा भी वापस कार में बैठकर स्मोकिंग करते हुए बातें करने लगी, मुझे मोम का काल आया की वो और भाई ओफिस में ओवरटाइम की वजह से लेट हो जाएँगे। काल कट होने के बाद पायल और आकांक्षा खी-खी करती हुई आई- “तुम लोग यहां बैठे हो?”

नेहा ने पूछा - “शगुफ्ता कहां है?”
पायल ने जवाब दिया- “उसको कोई मिल गया है…”
15 मिनट बाद शगुफ्ता आई पर उसके साथ एक लड़का भी था। शगुफ्ता अंदर बैठी और बताने लगी, जब तक पायल और वो लड़का बाहर खड़े रहे। उसने बताया की वो सौरव है, उसकी छोटी बहन का क्लासमेट था और अभी साल भर के बाद मिला है।
कामया ने पूछा - “तो मैं क्या करूं?”
शगुफ्ता ने कहा की उसका प्लान उसके साथ मजे करने का है। लेकिन सौरव अपने दोस्त के साथ आया है, इसलिए वो चाहती थी की हम, शगुफ्ता और सौरव दोनों को उसके प्लेस पे ड्रॉप कर दें। कामया मान गई फिर शगुफ्ता और उसका दोस्त फ्रंट सीट पे बैठ गये और वो ड्राइव करने लगी।
सौरव के डायरेक्षण बताने पे हम सब उसके घर पहुँच गये। आकांक्षा ने शगुफ्ता से पूछा - “फिर तुम वापस अपने घर कैसे जाओगी?
शगुफ्ता ने कहा- “सौरव मुझको छोड़ देगा…”
तभी सौरव बोला- “मुझको बाइक नहीं चलानी आती…”
पायल बोली- “क्या? फिर तुम्हारी उम्र कितनी है?”
और जब सौरव ने बताया की वो 18 साल का है तो हम सब उसको छोड़कर शगुफ्ता को देखने लगे। सौरव दिखने में मासूम और क्यूट लुक में भी 19-20 साल का लग रहा था। हमने उसकी 5’ फुट की हाइट को अनदेखा कर दिया था। चलो उसकी नॉर्मल बाडी को अनदेखा कर भी दें, लेकिन 18 साल की उम्र के लड़के को शगुफ्ता क्यों उठाकर लाई है? कामया ने शगुफ्ता को वापस कार में बैठने को कहा।
शगुफ्ता सौरव को- “5 मिनट में आती हूँ , तुम चलो…” कहा और हमारे पास आई।
पायल ने कहा- “पागल है क्या तू ?”
नेहा बोली- “तेरा तो ब्रेकप नहीं हुआ है ना, फिर क्यों उस बच्चे को फँसा रही है?”
मैंने कहा- “उसको मज़ा करके आ, फिर चलते हैं यहां से…”
शगुफ्ता ने बताया- “मैं सौरव को पहले से जानती थी और फिर बातों-बातों में वो शर्त लगाने लगे, धीरे-धीरे ड्रिंक्स से पैसों पे हो गई, सौरव से उसकी 3 शर्त लगी थी, पहली दो शर्त पैसों वाली शर्त वो जीत गई थी, पर थीसरी शर्त में सौरव ने उसको सेक्सुअल शर्त लगाई जिसमें वो हार गई।

सौरव भी कार में था तो उसके सामने वो हमको बताना नहीं चाहती थी, इसलिए उसने हमें जाने को कहा।
कामया बोली- “तुम फिर क्या कल आटो से आओगी?
नेहा ने कहा- “वो लड़का कुछ मिनट में ही ढेर हो जाएगा, तू जा हम यही इंतजार करते हैं…”
शगुफ्ता बोली- “मुझे भी यही लगता है, तो तुम लोग मेरा इंतजार करोगे?”
उसी टाइम सौरव आया और हमको अंदर आने को बोला। हमने डिसाइड किया की शगुफ्ता का “काम” पूरा होने तक रुक जाते हैं।

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