सातवें साल की खुजली complete

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jay
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सातवें साल की खुजली complete

Post by jay » 24 Aug 2017 17:51

सातवें साल की खुजली


दोस्तो बहुत दिन से बेकार बैठा था आप सब की कहानियाँ पढ़ कर मन बहला रहा था तो सोचा मैं भी एक कहानी शुरू कर ही दूं . दोस्तो कहते हैं शादी के पाँच छः साल तो मस्ती में गुजर जाते है पर बाद में थोड़ी नीरसता आने लगती है इसी नीरसता को किस तरह मैने और मेरे दोस्त राज ने दूर किया यही इस कहानी का ताना बाना है तो दोस्तो ये सुनिए कहानी राज की ज़ुबानी ..................................
मैं हूँ राज । आज मेरी ये सच्ची कहानी आप लोगो से शेयर कर रहा हूँ वात्स्यान ने कामसूत्र में योनी को नारी के शारीरिक आकर के हिसाब से ४ तरह से लिखा , जैसे शशक (खरोगश ), हिरनी , घोड़ी(अश्वनी) और हथनी ...शायद उस वक़्त वात्स्यान के दिमाग में सिर्फ योनी का आकर ही इक महत्वपूर्ण कारक था , इसलिए उसने योनी के आकर के हिसाब से नारी की वयख्या कर दी ...की सबसे छोटे कद की खरोगश और सबसे बड़े कद की हथनी ...और तो और उनके सफल और आनंदायक सम्भोग के लिए उन जैसे साथी का चयन भी बता दिया ...
पर मेरे अनुभव ने नारी की योनी को इन सबसे अलग इक नयी तरीके की वयख्या दी और योनी की सुन्दरता का इक पैमाना बनाया ...मेरे अनुभव ने यह समझाया की किसी भी नारी या पुरुष के शरीर के अनुपात में उसका गुप्तांग हो ऐसा जरुरी नहीं है , इसलिए किसी भारी भरकम नारी जो वात्स्यान के हिसाब से हथनी वाली श्रेणी में आती है की योनी का आकर भी बड़ा होगा और उसे सम्भोग में अपने जैसे हाथी टाइप बड़े आदमी से पूर्ण संतुष्टि मिलेगी , यह भी इक मिथ है ...
मेने उस दिन और बाद में भी जेंटलमैन क्लब में नारी की कई तरह की योनियाँ देखि , कई बार तो अच्छे लम्बे कद की लड़की की योनी बहुत छोटी और सिकुड़ी सी होती , इसके विपरीत इक छोटे कद की लड़की की योनी बड़े आकर में फैली सी होती और दोनों के योनी मार्ग भी उनकी योनियों के आकर अनुपात के हिसाब से ना होकर कभी बहुत ज्यादा खुले या तंग होते ...
मेने नारी की योनी को इक ऐसी श्रेणी में रखा जिसमे योनी की तुलना हम किसी संकरी सी गली के आगे लगे दरवाजे से कर सकते है ...इसे ऐसा समझे जैसे किसी घर के आगे इक दरवाजा है जिसमे दो पल्ले(कपाट) लगे है यानी दो किवाड़ वाला दरवाजा है ....अब यह उस दरवाजे की हालत पे निर्भर करता है की
1.दोनों कपाट इस तरह से भिड़े है की वह दोनों जुड़ कर लगभग बंद जैसे लगते है और उन दोनों कपाट के जुड़ने से दोनों के बीच में हलकी सी इक झिरी सी दिखती हो या
२. दोनों कपाट अंदर की तरफ थोड़े से खुले है, जैसे किसी ने दोनों दरवाजो को घर के अंदर धकेल का हल्का सा खोल कर छोड़ दिया है या
3. दोनों कपाट बहार की तरफ ऐसे खुले है जैसे किसी ने हड़बड़ी में दरवाजे बहार की तरफ खोल कर छोड़ दिए है या
४. इक कपाट के ऊपर दूसरा कपाट ऐसे सा चढ़ा , जैसे दरवाजा बंद करते वक़्त किसी ने अनाड़ीपन में इक कपाट पे दूसरा कपाट लगा कर छोड़ भर दिया है
मेरे अनुभव ने नारी की योनी को उनकी सुन्दरता , आकर और शारीरिक आकर के हिसाब से देखा और परखा , क्योकि नारी की योनी किसी विशेष समुदाय , देश ,रंग और जीन्स के हिसाब से अपना आकर लेती है और योनी की सुन्दरता और विशेषता या ऐसी नारी के प्रति पुरुषो में इच्छा भी उसके देश में उसी हिसाब से मापी भी जाति है ...
इन चारो श्रेणी की नारी में योनी का आकार बड़ा या छोटा कुछ भी हो सकता है और किसी व्यक्ति विशेस का अपनी योनी को स्वच्छ और साफ़ सुथरा रखना भी , योनी की सुन्दरता में चार चाँद लगा देता है ...एशियाई देश की अधिकतर नारी अपनी योनी के आसपास छोटे बाल रखती है और जापान में ऐसी योनी को बहुत आकर्षक भी माना जाता है ...इसके विपरीत योरोप के देश में अधिकतर नारी क्लीन शेव योनी रखती है या योनी के पास बाल की इक पतली लाइन सी और ऐसी योनी पुरुषो के आकर्षण का केद्र बिंदु भी होती है .....किसी पुरुष को नारी की सुनहरी या सांवली योनी में तो किसी को हलकी गुलाबी योनी में आकर्षण लगता है
मेने जितनी भी तरह की योनी को देखा और परखा , तो लगा योनी की तुलना होठो से की जा सकती है मुझे वह योनी सबसे ज्यादा आकर्षक लगी जिसमे दोनों कपाट जुड़ कर बंद से प्रतीत होते है , क्योकि यह ऐसी प्रतीत होती है जिसे किसी खुबसूरत लड़की के पतले होठ इक लिपस्टिक से सज कर जुड़े से हो , पर होठ अगर ज्यादा मोटे हो यां लटके हो तो उनमे इक तरह की बदसूरती सी आ जाति है , हो सकता है किसी को उस तह के होठ पसंद हो , क्योकि अभी कुछ दिन पहले फ़िल्मी हेरोइनो में मोटे होठो का फैशन बड़े जोरो पर था ...
मेरे अनुभव से किसी योनी के मार्ग में आगे की तरफ लटकी छोटी सी खाल जिसे मेडिकल टर्म में लाबिया मिनोर्मा (लघु कोष्ठ) बोलते है का ज्यादा फैला होना योनी की सुन्दरता को कम कर देता है ...उसका बहुत कम होना भी योनी की सुन्दरता को कम करता है ...अगर यह हद से ज्यादा हो तो सम्भोग में नारी को अनचाही दिक्कत का सामना भी करना पड़ता है , पर इसके विपरीत अगर यह थोडा आकर में छोटा हो तो , पार्टनर द्वारा मुख मैथुन में नारी को अतिरिक्त संतुष्टि और आनन्द देना वाला भी हो जाता है .... इसके विपरीत इसका ना होने से योनी में इक तह का अपना आकर्षण होता है
कितनी सारी योनियों में कंही किसी का द्वार बहुत बड़ा तो कंही सिकुड़ा सा होता , कंही लाबिया कुरूपता की हद तक लटकी होती तो कंही वह नाममात्र की जगह लेकर योनी को इक सुरक्षा कवर सा प्रदान करती , किसी किसी नारी की योनी के आसपास , लगी खरोचे या हलके दाने उनके प्रति इक अजीब सी उबकाई पैदा करते , तो किसी की योनी की चमक , उसके प्रति इक अजीब सी कशिश भी पैदा करती ...
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(वक्त का तमाशा running)..
(दास्तान ए चुदाई (माँ बेटी बेटा और किरायेदार ) complete) .. (सातवें साल की खुजली complete)
(एक राजा और चार रानियाँ complete).............(माया complete...)-----(तवायफ़ complete).............
(मेरी सेक्सी बहनें compleet)........(दोस्त की माँ नशीली बहन छबीली compleet)............(माँ का आँचल और बहन की लाज़ compleet)..........(दीवानगी compleet )....... (मेरी बर्बादी या आबादी (?) की ओर पहला कदमcompleet)........(मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग)........


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(ननद की ट्रैनिंग compleet)..............( सियासत और साजिश)..........(सोलहवां सावन)...........(जोरू का गुलाम या जे के जी).........(मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन)........(कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास)........(काले जादू की दुनिया)....................(वो शाम कुछ अजीब थी)

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jay
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Re: सातवें साल की खुजली

Post by jay » 24 Aug 2017 17:52

कितनी सारी योनियों में कंही किसी का द्वार बहुत बड़ा तो कंही सिकुड़ा सा होता , कंही लाबिया कुरूपता की हद तक लटकी होती तो कंही वह नाममात्र की जगह लेकर योनी को इक सुरक्षा कवर सा प्रदान करती , किसी किसी नारी की योनी के आसपास , लगी खरोचे या हलके दाने उनके प्रति इक अजीब सी उबकाई पैदा करते , तो किसी की योनी की चमक , उसके प्रति इक अजीब सी कशिश भी पैदा करती ...
कहने का तात्पर्य यह है की , किसी नारी का चेहरा खुबसूरत, सांचे में ढला बदन और कामुक अदाए हो और उसकी योनी भी सुंदर और आकर्षित हो ऐसा बहुत ही कम देखने को मिलता , कई बार नारी की लापरवाही उनकी योनी में अनजानी बदसूरती भी उड़ेल देती ....जबकि वह नारी हर लिहाज से अनुपम सुन्दरी होती है ...
इसी खोज में मेने कई तरह की योनियों का अध्यन किया और आज भी जब किसी खुबसूरत नारी को देखता हूँ तो मेरा मन खुद से यह सवाल करता है की , इसकी सुन्दरता किस पैमाने से नापूं , इसे शारीरक रूप से देखू या इसकी अदाए कितनी मतवाली है या इसकी आँखे कितनी गहरी या इसकी चाल कितनी मस्त है या इसके होठ कितने रसीले या इसके बाल कैसे लहराते है या इसके गाल कैसा मीठा अहसास जगाते है या इसके उरोज कितने कामुक है या इसकी टांगे कितनी चिकनी होंगी यह कपड़ो में ज्यादा खुबसूरत होगी है या बिना कपड़ो के या इसका दिल कितना खुबसूरत है वह समझू ....
अगर यह बिना कपड़ो के होगी तो क्या इसका शरीर सांचे में ढला जैसा होगा या फिर इसके उभार कसमसाते से होंगे या फिर इसकी योनी की खूबसूरती मुझे मतवाली बना सकेगी .....

अगर मैं आप लोगो से पुछु की नारी की योनी की सुन्दरता के क्या मापदंड है तो शायद अधिकतर आदमी बगले झाँकने लगेंगे , क्योकि योनी में भी सुन्दरता का कोई मापदंड हो सकता है ऐसी सोच शायद अभी विकसित नहीं हुई है या पुरुष इतनी दूर तक सोच नहीं पाया ?
इसके विपरीत नारी के मन में परुष के लिंग को लेकर कंही ना कंही इक सोच छीपी होती है , यह और बात है की अधिकतर नारी अपनी सोच को अपने मन के किसी कोने में दफना देती है और वह इस सोच को अपने पति या प्रेमी से कितना भी खुला होने के वावजूद उसे बताने में संकोच करती है .....पर यह सोच उसके उत्तेजित होने और चरम अवस्था में पहुँचने पर ही मालुम होती है ...की नारी की लिंग के प्रति क्या सोच है , वह उसे सिर्फ इक मिलन का माध्यम समझती है या बच्चे पैदा करने भर का अस्त्र या शारीरिक सुख का माध्यम या फिर उसमे उसे इक ऐसा विशेष आकर्षण होता है , जिसकी कल्पना वह सिर्फ अपने मन में करती है

एक बार मेरे ऑफिस में सारे स्टाफ का मिलन समारोह हुआ। वहां स्टाफ पति पत्नी के साथ में आमंत्रित थे। मेरी पत्नी डॉली की जवानी और खिली हुयी लगती थी। वह उस समय कोई २८ साल की होगी। हमारी लव मैरिज हुई थी।
डॉली अत्यन्त सुन्दर थी। वह कमर से तो पतली थी पर उसके उरोज (मम्मे) पूरे भरे भरे और तने हुए थे। उसका बदन लचीला और उसकी कमर से उसके उरोज का घुमाव और उसके नितम्ब का घुमाव को देख कर पुरुषों के मुंह में बरबस पानी आ जाना स्वाभाविक था। उसे पुरुषों से बात करने में कोई झिझक नहीं होती थी।

डॉली के कॉलेज में हजारों लड़को में कुछ ही लड़कियां थी। उनमे से एक डॉली थी। परन्तु वह मन की इतनी मज़बूत थी की कोई लड़का उसे छेड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था। कई बार शरारती लड़कों को चप्पल से पीटने के कारण वह कॉलेज में बड़ी प्रख्यात थी। कॉलेज के लड़कों के मन में डॉली को पाने की ख्वाहिश तो थी।
पर न पा सकने के कारण उसकी पीठ पीछे कई लड़के डॉली के बारेमें ऐसी वैसी अफवाएं जरूर फैलाया करते थे। खास तौर से मैंने कॉलेज के कुछ लडकों को यह कहते सुना था की डॉली का उसके साथ या किसी और के साथ अफेयर था। वह कॉलेज में लडकोसे बिंदास मिलती थी पर किसकी क्या मजाल जो उससे भद्दा मजाक करने की हिम्मत करे।
मिलन समारोह में मैंने देखा की सारे पुरुष वर्ग मेरी पत्नी डॉली को छिप छिप कर घूर रहे थे। उन बेचारों का क्या दोष? मेरी पत्नी डॉली थी ही ऐसी। उसके स्तन एकदम भरे हुए पके बड़े आम की तरह अपने ब्लाउज में बड़ी मुश्किल से समा पाते थे। मेरी बीबी के स्तनों का नाप ३४ से कम नहीं था। मैं अपनी हथेली में एक स्तन को मुश्किल से ले पाता था। उसकी पतली कमर एवं नोकीले सुन्दर नितम्ब ऐसे थे के उसे देख कर ही अच्छे अच्छों का पानी निकल जाए। वह हमेशां पुरुषों की लालची और स्त्रियों की ईर्ष्या भरी नज़रों का शिकार रहती थी।
हमारी शादी को सात साल हो चुके थे और कहते है की सात साल के बाद एक तरह की खुजली होती है जिसे कहते है सातवें साल की खुजली (seven year itch)। तब अजीब ख्याल आते है और सेक्स में कुछ नयापन लाने की प्रबल इच्छा होती है।
शादी के कुछ सालों तक तो हमारी सेक्स लाइफ बड़ी गर्मजोश हुआ करतीथी। हम २४ घंटों में पहले तो तीन तीन बार, फिर दो बार, फिर एक बार ओर जिस समय की मैं बात कर रहा हूँ उनदिनों में तो बस कभी कभी सेक्स करते थे। शादी के सात सालों के बाद बहुत कुछ बदल जाता है। पति पत्नी के बीच कोई नवीनता नहीं रहती।
एक दूसरे की कमियां और विपरीत विचारों के कारण वैमनस्य पारस्परिक मधुरता पर हावी होने लगता है। और वैसे ही पति पत्नी एक दूसरे को “घर की मुर्गी दाल बराबर” समझने लगते हैं। उपरसे बच्चों की, नौकरी की, घर की, समाज की, भाई बहनों की, माँ बाप की, बगैरह जिम्मेदारी इतनी बढ़ जाती है की सेक्स के बारे में सोचने का समय बहुत कम मिलता है।
सामान्यतः मध्यम वर्ग की पत्नियों पर बोझ ज्यादा रहता है। इस कारण वह शाम होते होते शारीरिक एवं मानसिक रूपसे थक जाती है। वह अपने पति के क्रीड़ा केलि आलाप की ठीकठाक प्रतिक्रया देने में अपने को असमर्थ पाती है। उस समय पारस्परिक आकर्षण कम हो जाता है। अक्सर डॉली थक जाने की शिकायत करती और जल्दी सो जाती।
गरम होने पर भी मुझे मन मसोस कर सो जाना पड़ता था। इस कारण धीरे धीरे मेरे मनमे एक शंका ने घर कर लिया की शायद वह मेरी सेक्स करने की क्षमता से संतुष्ट नहीं है। बात भी कुछ हद तक गलत नहीं थी। जब वह गरम हो जाती थी तब कई बार उस से पहले ही मेरा वीर्य स्खलन हो जाता था। तब मेरी पत्नी शायद अपना मन मसोस कर रह जाती होगी। हालांकि डॉली ने मुझे कभी भी इस बारें में अपनी कोई शिकायत नहीं की।
मेरी बीबी को सेक्स में ज्यादा रस नहीं रहा था। जब मैं सेक्स के लिए ज्यादा तड़पता था और उसे आग्रह करता था, तो वह अपनी पैंटी निकाल कर, अपना घाघरा ऊपर करके, अपनी टाँगे खोलकर निष्क्रिय पड़ी रहती थी जब मैं उसे चोदता था। मुझे उसके यह वर्ताव से दुःख होता था, पर क्या करता?
पर कभी कबार अगर जब कोई कारण वश डॉली गरम हो जाती थी तो फिर खुब जोश से चुदाई करवाती थी। जब वह गरम होती थी तो उसे चोदने का मज़ा ही कुछ और होता था। इसी लिए मैं ऐसे कारण ढूंढ़ता था जिससे वह गरम हो जाए।
मेरी पत्नी को घूमने फिरनेका और सांस्कारिक कार्यक्रमों, नाटकों और फिल्मों देखने का बड़ा शौक था। ऐसे मौके पर वह बनठन कर तैयार हो जाती थी। और अगर उसको वह प्रोग्राम में मझा आया तो वह बड़े चाव से उसके बारे में बात करने लगती और फिर मैं उसीकी ही बात को दुहराते हुए उसके कपडे धीरे धीरे निकालता, उसके मम्मों को सहलाता और उसकी चूत में उंगली डाल कर उसे गरम करता। उस समय बाते करते हुए वह भी गरम हो जाती और बड़े आनंद से मेरा साथ देती और मुझसे अच्छी तरह चुदवाती। पर ऐसा मौक़ा ज्यादा नहीं मिलता था।
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Re: सातवें साल की खुजली

Post by jay » 24 Aug 2017 17:54

हालांकि मेरी पत्नी डॉली बहुत शर्मीली, रूखी और रूढ़िवादी (मैं तो यही सोचता था) सी थी, पर जब उसे बाहर घूमने का मौका मिलता था तो वह बड़े चाव से बनठन कर तैयार होती थी। उसे कपडे पहननेका शौक था और उस समय वह शालीनता पूर्वक अपने सिमित अंग प्रदर्शन के बारे में ज्यादा चिंतित नहीं रहती थी।
उस मिलन समारोह में अपने घने लम्बे बाल डॉली ने खुले छोड़ रखे थे। इससे तो वह और भी सेक्सी लग रही थी। उसने साड़ी तो पहन रक्खीथी पर अंचल की परत ऐसी थी की उसकी पूरी पतली कमर दिख रहीथी जिसमे उसकी नाभि और नितम्ब का उभार पर सब ताक रहे थे। वहाँ ऐसा लग रहाथा जैसे सिर्फ मेरी पत्नी ही वहां थी और कोई औरत थी ही नहीं।
हालाँकि वहां करीब दस औरतें थीं। मुझे पुरुषों के डॉली को लालची निगाहों से देखना, पता नहीं क्यों, अच्छा लगता था। एक कारण तो यह था की मुझे बड़े गर्व का अनुभव होता था की मेरी पत्नी उन सब की पत्नियों से ज्यादा सुन्दर है।
तब घोषणा हुई की अब डांस होगा। सब को अपने साथीदार के साथ डांस फ्लोर पर आने के लिए कहा गया। उस पार्टी में मेरे बॉस ने डॉली के साथ कुछ ज्यादा ही छूट लेने की कोशिश की। वह डॉली के पास गया और उसने अपने साथ डांस करने के लिए डॉली का हाथ पकड़ा और उसे खींचने लगा। डॉली ने उसे जोरसे झटका दिया। मेरा बॉस लड़खड़ा गया। खिसियाता हुआ वह कहीं और चला गया। बॉस को डॉली पर लाइन मारते देख मेरे अंदर एक अजीब तरह का रोमांच हो रहा था।
उस पार्टी में मेरा एक दोस्त जय था। हम साथ में ही काम करते थे। वह मेरी ही उम्र का था और अच्छा लंबा तंदुरस्त और सुगठित मांस पेशियोँ वाला था। उस समय उसकी कोई ३०-३२ साल की उम्र रही होगी। वह गोरा चिट्टा और गोल सा चेहरे वाला था। उसके बाल जैसे काले घने बादल समान थे।
उसने मैरून रंग की शर्ट पहनी थी और गले में स्कार्फ़ सा बाँध रख था। उसकी धीमी और नरम आवाज और सबके साथ सहजसे घुलमिल जानेवाले स्वभाव के कारण सब उसे पसंद करते थे। यहां तक के सारी स्त्रियां भी उससे बात करने के लिए उतावली रहतीं थी। वह आसानी से महिलाओ से अच्छी खासी दोस्ती बना लेता था।
पहली बार जब मैंने उसे मेरी पत्नी डॉली से मिलाया तो वह डॉली को घूरता ही रह गया। जब उसे लगा की वह ज्यादा देर तक घूर रहा था तो उसने बड़ी विनम्रता और सहजता से माफ़ी मांगते हुए कहा, “भाभीजी, मुझे आपको घूर घूर कर देखने के लिए माफ़ कीजिये। मैंने इससे पहले आप सी सुन्दर लड़की नहीं देखी। मैं तो सोच भी नहीं सकता के आप शादी शुदा हैं। ”
भला कोई अगर एक शादी शुदा एक बच्चे की मांको बताये की वह एक बहुत सुन्दर लड़की है, तो वह तो पिघल जायेगी ही। बस और क्या था? मेरी पत्नी डॉली तो यह सुनते ही पानी पानी हो गयी और बाद में मुझसे बोली, “आपका मित्र वास्तव में बड़ा सभ्य और शालीन लगता है। क्या वह शादी शुदा है?”
तभी उसकी पत्नी कामिनी जो कही बाहर गयी थी उसे मैंने देखा और मैं डॉली से मिलवाने के लिए गया। कामिनी थोड़ी लम्बी और तने हुए बदन की थी। उसकी मुस्कुरान मुझे बहुत आकर्षक लगती थी। दोनों पत्नियां मिली और थोड़ी देर बातचीत करने के बाद डॉली और मैं एक और कपल से बातचीत करते हुए दूसरे कोने में जा के बैठ गए।
मैं देख रहा था की बार बार घूम फिर कर जय की आँखे मेरी बीबी को ताक रहीं थी। शायद डॉली ने भी यह महसूस किया होगा, पर वह कुछ न बोली। मुझे ऐसे लग रहा था जैसे वह डॉली पर फ़िदा ही हो गया था। जय की पत्नी कामिनी किसी और महिला से बातचीत करनेमें व्यस्त थी। मैंने देखा की जय खड़ा हो कर हॉल में इधर उधर घूम रहा था। घूमते घूमते जैसे स्वाभाविक रूपसे वह हमारे सामने आ खड़ा हुआ।
बड़ी सरलता से उसने अपना हाथ लम्बाया और अपना सर थोड़ा झुका कर उसने डॉली को डांस करने को आमंत्रित किया।
डॉली ने भोलेपन से कहा, “पर मुझे तो डांस करना नहीं आता।”
जय ने कहा, “यहां डांस कर रहे लोगों में से कितनों को आता है? तुम चिंता मत करो। मैं तुम्हे कुछ स्टेप्स सीखा दूंगा।“
डॉली ने मेरी तरफ देखा। वह मेरी इजाजत चाह रही थी। मैंने अपना सर हिला कर उसे इजाजत दे दी। डॉली तैयार हो गयी। मैंने देखा की जय मेरी पत्नी को अपनी बाँहों में लेकर एक हाथ उसकी कमर दूसरा उसके कंधे पर रखकर एकदम करीब से उसे स्टेप्स सीखा ने लगा। उनके डांस शुरू करने के दो तिन मिनट में ही संगीत की लय धीमी हो गयी जिससे डांस करने वाले एक दूसरे से लिपट कर डांस कर सके।
मैं उसी समय वाशरूम में जानेका बहाना करके खिसक गया और ऐसी जगह छिप गया जहाँसे मैं तो उन्हें देख सकता था, पर वह मुझे नहीं देख सकते थे। मेरी पत्नी बीच बीच में मुझे ढूंढ ने का प्रयास कर रही थी। मैंने देखा की जय मेरी पत्नी के साथ कुछ ऐसे स्टेप्स लेता था जिससे उन दोनों की कमर और उससे निचला हिस्सा और जिस्म एकदूसरे के साथ रगड़े। इस तरह दोनों ने थोड़े समय डांस किया।
जय को मेरी पत्नी के साथ अपने शरीर को रगड़ते हुए डांस करते देख कर मैं एकदम उत्तेजित सा हो गया। मुझे इसकी ईर्ष्या आनी चाहिए थी। पर उल्टा मैं तो गरम हो गया। पतलून में मेरा लण्ड खड़ा हो गया; जैसे की मैं चाहता था की जय मेरी पत्नी के साथ और भी छूट ले। मुझे मेरी पत्नी का पर पुरुष के साथ शारीरिक सम्बन्ध का विचार उकसाने लगा।
जब मैं वापस आया तो जय की पत्नी उसके पति को मेरी सुन्दर पत्नी के साथ करीब से डांस करते देख रही थी। मुझे कामिनी बहुत सुन्दर लग रही थी। मैं जय की पत्नी कामिनी की और बहुत आकर्षित था, पर अपने विचारों को मन में ही दबा कर रखता था।
कामिनी का आकर्षण मुझे तीन कारणों से बहुत ज्यादा लगा। एक उसकी सेक्सी आँखें। मुझे हमेशा ऐसा लगता था जैसे वह मुझे अपने पास बुला रही है और चुनौती दे रही है की हिम्मत हो तो पास आओ। दूसरे उसके भरे और उफान मारते हुए स्तन (मम्मे ) जो उसके ब्लाउज और ब्रा का बंधन तोड़कर खुल जाने के लिए व्याकुल लग रहे थे।

जैसे ही वह चलती थी तो उसकी छाती के दोनों परिपक्व फल ऐसे हिलते थे जैसे बारिश के मौसम में हवा के तेज झांको पर डालियाँ हिलती हैं। और तीसरे उसके कूल्हे। उसके बदन के परिमाण में वह थोड़े बड़े थे। पर थे बड़े सुडौल और सुगठित। अक्सर औरतो के बड़े कूल्हे भद्दे लगते हैं। पर कामिनी के कूल्हों को नंगा करके सहलाने का मेरा मन करता था।
मैंने आगे बढ़ कर उसको डांस करने के लिए आमंत्रित किया। वह मना कैसे करती? जिसकी पत्नी उसके पति के साथ डांस कर रही हो तो उसी के पति के साथ डांस करने से हिसाब बराबर हो जाता है न? जय की पत्नी तैयार हो गयी। वह बहुत सुन्दर थी। शायद डॉली और कामिनी में सुंदरता का मुकाबला हो तो यह कहना बड़ा मुश्किल होगा की कौन ज्यादा सुन्दर है। फर्क सिर्फ इतना ही था की कामिनी थोड़ी सी ज्यादा भरे बदन की थी, जब की डॉली थोड़ी सी पतली थी। ज्यादा फर्क नहींथा।
मैं डांस ख़त्म होने के बाद जब अपनी पत्नी से मिला तो मैंने उसको ये जताया की उनके डांस शुरू होने के तुरंत बाद मैं वाशरूम गया था और वहां कोई मिल गया था उससे बात कर रहा था। ये जाहिर होने नहीं दिया की मैंने उसको और जय को बदन रगड़ते हुए डांस करते देखा था।
जब हम वापस जा रहे थे तो मैंने डॉली से कहा, “कहीं ऐसा न हो के बॉस नाराज हो जाए। तुमने तो आज उसे बड़ा झटका दे दिया।“
तब डॉली ने मुझसे माफ़ी मांगी और कहा “यदि तुम्हारा बॉस मुझसे प्यार से धीरे से कहता तो शायद मैं उसके साथ डांस करने के लिए मना नहीं करती। परन्तु उसने जबरदस्ती करने की कोशिश की। अगर मेरे पति को कोई आपत्ति न हो तो भला मुझे किसीके साथ भी डांस करने में क्या आपत्ति हो सकती है? आखिरकार मैंने तुम्हारे दोस्त जय के साथ भी तो डांस किया ही था न? तुम बॉस से मेरी तरफ से मांफी मांग लेना।”
मैंने डॉली से पूछा, “क्या जय के साथ डांस करने में तुम्हे मझा आया?”
डॉली ने कहा, “इसमें मझे की क्या बात है? एक रस्म है डांस करने की तो मैंने निभाई, वर्ना डांस में क्या रखा है?”
तब मैंने अपनी भोली सी पत्नीसे कहा, “सारी कहानी डांस से ही तो शुरू होती है। पहले डांस, फिर एक दूसरे के बदन पर हाथ फेरना फिर और करीब से छूना, छेड़ खानी करना, बार बार मिलते रहना, मीठी मीठी बातें करके पटाते रहना और आखिर में सेक्स।”
डॉली मेरी तरफ थोडासा घबराते हुए देखने लगी और बोली, “राज, क्या डांस इसी लिए करते है? फिर तो गड़बड़ हो गयी। मुझे क्या पता? अब जय क्या सोचेगा? वह सोचेगा डॉली भाभी तो फिसल गयी। शायद इसी लिए वह मुझे दुबारा कब मिलेंगे ऐसे पूछने लगा। यह तो गलत हुआ। अब में क्या करूँ?”
मैंने हँसते हुए मेरी प्यारी पत्नी से कहा, “तुम ज़रा भी चिंता मत करो। मैं तो ऐसे ही मजाक कर रहा था। ऐसे कोई नहीं समझता। डांस करना तो आम बात है। पर हाँ, मैंने देखा था की जय तुम्हारे साथ डांस करते करते काफी गरम हो गया था। उसकी पतलून में उसका लण्ड खड़ा हो गया था। क्या तुमने अनुभव नहीं किया?” जय और डॉली ने चिपककर जो डांस किया था उसके बारेमें ना तो मैंने डॉली से पूछा था ना डॉली ने मुझे बताया था ।
डॉली झेंप सी गयी। उसके गाल लाल से हो गए। तब मैं समझ गया की डॉली ने भी जय के लण्ड को महसूस किया था। शायद वह इसे नजर अंदाज़ कर गयी। मैंने उसे ढाढस देते हुए कहा, “ऐसे तो होता ही है। अगर उसका लण्ड कड़क हो गया तो उसमे उसका क्या दोष? तुम चीज़ ही ऐसी हो। तुम इतनी सेक्सी हो की तुम्हे देखकर ही अच्छे अच्छों का पानी निकल जाये।”
डॉली थोड़ी देर चुप रही फिर बोली, “तुम भी तो कामिनी से बड़े चिपक चिपक कर डांस कर रहे थे। क्या तुम्हारा खड़ा नहीं हुआ था?” अब चुप रहने की बारी मेरी थी।
मैंने धीरे से कहा, “चलो हिसाब बराबर हो गया।”
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(दास्तान ए चुदाई (माँ बेटी बेटा और किरायेदार ) complete) .. (सातवें साल की खुजली complete)
(एक राजा और चार रानियाँ complete).............(माया complete...)-----(तवायफ़ complete).............
(मेरी सेक्सी बहनें compleet)........(दोस्त की माँ नशीली बहन छबीली compleet)............(माँ का आँचल और बहन की लाज़ compleet)..........(दीवानगी compleet )....... (मेरी बर्बादी या आबादी (?) की ओर पहला कदमcompleet)........(मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग)........


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(कोई तो रोक लो)
(ननद की ट्रैनिंग compleet)..............( सियासत और साजिश)..........(सोलहवां सावन)...........(जोरू का गुलाम या जे के जी).........(मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन)........(कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास)........(काले जादू की दुनिया)....................(वो शाम कुछ अजीब थी)

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jay
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Re: सातवें साल की खुजली

Post by jay » 24 Aug 2017 17:58

यह उस समय की बात है जब मैं जयपुर में एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव था। उस समय जयपुर बड़ी ही शांत जगह हुआ करती थी। हम एक शांत अच्छी कॉलोनी में रहते थे। जय हमसे करीब ३ किलो मीटर दूर दूसरी कॉलोनी में रहता था।
उस पार्टी के कुछ ही समय के बाद जय ने मेरी कंपनी छोड़ दूसरी कंपनी में ज्वाइन कर लिया। उसे करीब एक साल हो चला था। इस बीच हमारी घनिष्ठता बढ़ी और हम एक दूसरे के घर जाने लगे। जय की पत्नी कामिनी और मेरी पत्नी डॉली दोनों एक दूसरे की ख़ास सहेलियां बन गयीं।
हम एक दूसरे से चोरी छुपे एक दूसरे की पत्नियों को ललचा ने की कोशिश में लगे हुए थे। पर हमें बढ़िया मौका नहीं मिल रहा था। मैं कामिनी करीब जाने के लिए लालायित था और जय डॉली की और आकर्षित हुआ था। पर हमारी पत्नियां एक दूसरे के पति को कोई घास नहीं डाल रही थी। जय और मैं मिलते तो थे पर स्पष्ट बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे।
जय मेरे घर कई बार आता था। कई बार मैं घर में नहीं भी होता था। मेरी पत्नी डॉली उसे पानी चाय पिला देती थी, पर ज्यादा बात नहीं करती थी। जय जब भी मेरी अनुपस्थिति में घर आता था तो डॉली मुझे जय के आने के बारे में बता देती थी।

एक बार डॉली ने मुझे कहा की जय की नियत कुछ ठीक नहीं लगती। डॉली को लगा की वह उसपर शायद लाइन मार रहा है। सुनकर मैं मनमें ही बड़ा उत्तेजित हो गया। यदि जय मेरी पत्नी के पीछे पड़ा है तो इससे मैंने दो फायदे देखे।
एक तो यह की जय का इतिहास और चरित्र देखते हुए तो यही लग रहा था डॉली के साथ वह कुछ न कुछ तो करेगा ही।यह सोच कर मेरी धड़कन बढ़ गयी। मैं चाहता था की मेरी पत्नी और जय के बीच बात आगे बढे। तभी तो मैं भी उसकी बीबी के पास आसानी से जा सकता था। हालांकि मेरी पत्नी जय से काफी प्रभावित तो थी परन्तु वह जय को जराभी आगे बढ़ने मौका नहीं दे रही थी, ।
एक दिन मेरी अनुपस्थिति में जय ने मेरी पत्नी डॉली को एक उपहार देना चाहा। डॉली ने उसे लेने से सख्ती से इन्कार कर दिया। जय मायूस सा हो गया। जब हम अगली बार मिले तो मैंने उसे दुखी देख कर पूछा की आखिर बात क्या थी। जय ने बताया की वह जोधपुर गया था और वहां से एक अच्छे हेंडीक्राफ्ट के दो सैंपल लाया था जिसमे से एक वह हमें देना चाहता था, पर डॉली ने उसे हड़का दिया।
जय ने बात बात में मुझसे कहा की उसका मेरे छोटे से बेटे से खेलने का बहुत मन करता है। मेरा बेटा जय से काफी घुलमिल गया था। जय चाहता था की वह उसके लिए कुछ खिलौना लाये, पर वह डॉली से डरता था। तब मैंने उसे सांत्वना देते हुए कहा की उस रात को मैं डॉली से बात करूँगा।
उस रात जब हम सोने के लिए तैयार हुए तब मैंने डॉली से उस बात को छेड़ा। मैंने कहा, “डॉली डार्लिंग, आपने जय का दिल क्यों दुखाया? वह बेचारा हमारे लिए कुछ छोटी मोटी गिफ्ट लाया तो आपने उसे बुरी तरह से डांट दिया।”
यह सुन डॉली खिसिया गयी और बोली, “मुझे पता नहीं था की वह इस बारेमें आपसे बात करता है। मैंने सोचा शायद वह आपसे छुपकर मुझसे मिलने आता है और ऐसे उपहार देकर मुझे पटाने की कोशिश कर रहा है।”
मैंने कहा, “नहीं, ऐसा नहीं है। वह मुझे सब कुछ बताता है। मैंने ही उसे हमारे यहाँ आकर मुन्नुसे खेलने के लिए कहा है। उसकी गिफ्ट तुमने वापस की तो वह बड़ा दुखी है। तुम उसकी गिफ्ट का गलत मतलब मत निकालना। मैं मानता हूँ की वह तुम्हारी तरफ कुछ आकर्षित तो है, पर उसमे उसका कोई दोष नहीं। भला कौन मर्द ऐसा है जो तुमसे आकर्षित न होगा? तुम इतनी सेक्सी जो हो।” ऐसा कह कर मैंने बात बात में डॉली को यह कह दिया की जय उसके प्रति आकर्षित है।
डॉली ने थोड़ा शर्मा कर कहा, “ठीक है बाबा, गलती हो गयी। तुम कह रहे हो तो अबसे मैं ध्यान रखूंगी तुम्हारे दोस्तका। उसे दुखी नहीं करुँगी, बस? अब तो खुश?” मैंने डॉली के पास जाकर उसे बाँहों में भर कर एक चुम्बन कर लिया। मुझे ऐसे लगा जैसे मरी पत्नी ने मेरी यह बात सुन कर राहत की सांस ली। वह मेरी बात सुनकर खुश दिख रही थी। मुझे लगा जैसे मैंने उसके मन की बात ही कह डाली। शायद उसे खुद अफ़सोस हो रहा था की क्यों उसने जय को डांट दिया।
डॉली ने भी मेरे होंठ से होंठ चिपका कर और मेरे मुंह में अपनी जीभ डालकर मेरा रस चूसते हुए मेरी बाँहों में सिमटकर बोली, “तुम बहुत ही भले इंसान और एक संवेदनशील पति हो। तुम्हारी जगह कोई और होता तो अपने दोस्त को इतना सपोर्ट न करता। मुझे जय का चाल चलन ठीक नहीं लग रहा था और इसी वजह से मैं उसे दूर रखना चाहती थी। कई बार मुझे लगता है को वह एक अच्छा इंसान है। कभी कभी लगता है की वह मुझ पर डोरे डाल रहा है। अब तुम मुझे रोक रहे हो और उसे छूट दे रहे हो तो फिर मैं क्या करूँ?“


एक पल के लिए मुझे लगा जैसे मेरी पत्नी ने अपनी नाराजगी और असहायता प्रगट की। फिर उस ने आँख नचाते हुए कहा, “मेरी राय में तो ऐसे दोस्त को प्रोत्साहन देना ठीक नहीं , कहीं ऐसा न हो की वह तुम्हारी बीबी को वशमें कर ले और तुम हाथ मलते रह जाओ।“
मैं कहाँ चुप रहने वाला था। मैंने भी डॉली से उसी लहजे में कहा, “डार्लिंग तुम अपने आप को जानती हो उससे मैं तुम्हे ज्यादा अच्छा जानता हूँ। मैं जानता हूँ की तुम पर कोई कितने ही डोरे डाले या ऐसा हो जाए की आवेश में तुम किसी के साथ कुछ कर भी लो फिर भी तुम मेरी ही रहोगी। हमारे तन मात्र की ही शादी नहीं हुयी, शादी हमारे मन की और परिवार की भी तो हुयी है , सही है या गलत?”
मेरी सीधी सादी बीबी कुछ सोचमें पड़ गयी और फिर अपना सर हिलाते हुए कहा, “हाँ तुम सही कह रहे हो।” फिर वह मुझसे लिपट गयी और बोली, “डार्लिंग क्या सच में तुम्हें तुम्हारी पत्नी पर इतना विश्वास है?

उस वक्त ही मैं समझ गया की मेरी घरेलु वफादार पत्नी असमंजस में तो है परंतु थोड़ी सी पिघली भी है।
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Re: सातवें साल की खुजली

Post by jay » 24 Aug 2017 18:08

मित्रो कहानी की शुरुआत कर दी है शुरुआत कैसी रही

आपके साथ की बहुत आवश्यकता रहेगी तभी मेरा मन भी लगेगा

वैसे भी अब हमारी इस साइट के रीडर्स सिर्फ़ कहानी पढ़ते ही नही लेखक की हौंसलाअफजाई भी करते हैं
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