परिवार में चुदाई की गाथा

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pongapandit
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Re: परिवार में चुदाई की गाथा

Post by pongapandit » 30 Aug 2017 13:57

काकी ताई के बूब्स में झपट जाती है और निप्पल को सहलाती है, बूब्स को मसलती है, ताई दबे मुह सिसकारियां भरती है, दूसरी तरफ मैं ताई के पेट को चूमने लगता हूँ, नाभि में जीभ घुसेड़ कर ताई में कामोत्तेजना पैदा करने का भरपूर प्रयास करता हूँ और इसका प्रभाव भी ताई पर दिखाई दिया..
ताई आहें भरने लगती है, सिहर उठती है, मैं ताई की कमर, पेट, टांगें, जांघें सब कुछ चाटता हूँ और प्रेमपूर्वक सहलाता हूँ, ताई की आँखों में हवस और कामोत्तेजना स्पष्ट पता चल रही थी, ऊपर काकी ताई के निप्पल भी चूसे जा रही है, ताई के काले, बड़े, लंबे, तने हुए, सख्त निप्पल ताई के गदराए हुए मरदाना विशालकाय बदन में चार चाँद लगा रहे थे)
मैं – काकी, इस रंडी के मुह से दुपट्टा हटा दे अब, चिल्लाएगी तो फिर से बाँध देंगे।
काकी – जो हुकुम स्वामी।
(काकी दुपट्टा खोल देती है)
ताई – बहन चोदों, भेन की लोड़ी रत्ना, मादरचोद पंडित, पाप चढ़ेगा तुम्हे भोसडी वालों… अह्ह्ह्ह्ह्ह… मार दिया माँ अह्ह्ह्ह… गयी मैं उईईई…
मैं – ताई, गाली न दे, तेरी माँ चोद दूंगा, मजे लेते रहे बस।
काकी – गाली किसे देती है हरामजादी, माँ की लोड़ी, तेरी बेटी सबसे बड़ी रंडी है गांव की पता है तुझे।
ताई – अह्ह्हह्ह्.. भक्क्क बहनचोद तेरी बेटी भी हरामी है, साली लाला के साथ देखा था मेने उसे, यकीन नहीं आता तो पूछना उसे, खुद की बेटी रंडी है दूसरों को बोलती है चिनल कहीं की.. अह्ह्हह्ह्ह्ह.. मार दिया पंडित बेटा.. अह्ह्ह्ह्ह्ह..
काकी – अगर ये सच हुआ तो मैं तेरी गुलाम बन जाऊंगी, जिंदगी भर तेरा चूत रस पान करूँगी, मुझे अपनी सपना पर पूरा भरोसा है, लेकिन अगर झूट हुआ तो तू और तेरी बेटी रोज मेरी चूत चाटेगी, बोल मंजूर है रांड?
ताई – अह्ह्ह्ह्ह्ह.. हाँ चिनाल मंजूर है तेरी शर्त, अब पहले मेरे बोब्बे चुस जल्दी, अह्ह्हह्ह्ह्ह.. उईईईई.. सहन ना होता अब रत्ना..
(अब ताई भी पुरे जोश में आ चुकी थी और अब ताई के दिमाग और बदन पर पूरा सेक्स का नियंत्रण था, ताई की तरफ से चोदने का निमंत्रण मिल चुका था, काकी गुस्से से रगड़ रगड़ कर ताई के निप्पल चुस रही थी, ताई को पीड़ा भी हो रही थी, ताई करर्ररा रही थी)
ताई – हाये, अह्ह्ह्हह्.. रत्ना.. चुस मेरी देवरानी उटीईई.. उम्ममम्म.. अह्ह्हह्ह्ह.. गयी रे अह्ह्ह्ह्ह.. दीवाना बना दिया तुम दोनों हरामियों ने तो।
मैं – ताई अभी तो देखती जा, ताऊ की याद में जो तू इतने साल से तड़प रही है, आज तेरा भतीजा तेरी सारी हवस मिटा देगा और तेरी कोख से आनन्दी को एक भाई देगा।
ताई – हाये दय्या, दे दे रे मुझे एक लड़का, लड़के के लिए कब से तरस रही हूँ मैं, मेरी कोख में बीज बो दे मेरे भतीजे।
(फिर मैं ताई की चूत का लंबा बाहर की तरफ निकला हुआ चमड़ा अपने हाथों की उँगलियों से चौड़ा करता हूँ, और खोल कर अपनी ताई का चूत दर्शन करता हूँ, सुर्ख लाल मांस से लबा लब भरी हुई ताई की चूत कम भोसडा ज्यादा लग रहा था, जो चूत के पानी से बिलकुल गीला हुआ था..
जब कसाई मुर्गी को काटता है तो जैसे मुर्गी का लाल मांस होता है वैसे ही ताई की चूत के अंदर का वीभत्स नज़ारा था, मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी, अब मेरा प्यार काकी से ताई की तरफ हो गया, ऐसा गर्म मांस से लबालब भरा भोसड़ा देखकर अब मैं ताई से प्यार करने लगा)
मैं – वाह ताई, मैं कितना भाग्यशाली हूँ, मुझे तेरी इस मास से लबालब भरी चूत के दर्शन हुए, तू कितनी सेक्सी है ताई, तेरे लिए जान भी कुर्बान।
काकी – पंडित, जान तो मेरे लिए है ना?
मैं – नहीं काकी, अब ताई के लिए है, अब मैं ताई से प्यार करने लगा हूँ, और अगर तूने ताई को कुछ बोला, तो तेरी बेटी चोद दूंगा, समझी?

(काकी झंड हो जाती है, उसकी ताई के सामने बेइजती हो जाती है, काकी का मुह उतर जाता है और बेइज़्ज़ती से चेहरा लाल हो जाता है, क्योंकि अभी जो थोड़ी देर पहले खुद को रानी समझ रही थी, असल में उसकी औकात रंडी वाली है ये काकी भली भांति समझ गयी थी और गुस्सा हो गयी, वहीँ दूसरी और ताई की हंसी बंद नहीं हो रही थी)
ताई – हा हा हा, साली रंडी कहीं की, औकात पता चल गयी तुझे, माँ की लोड़ी..
काकी – चुप कर चिनल कहीं की।
मैं – काकी, बहन चोद तू चुप हो जा, रंडी, मेरी ताई मेरी रानी है, इस घर की रानी है, तू नौकरानी है समझी रांड?
(और मैंने काकी के गाल पर जोरदार थप्पड़ लगा दिया, और मैं फिर ताई के हाथ खोल देता हूँ, ताई खुलते ही मुझ से पत्नी की तरह लिपट जाती है और मेरे होंठ पर अपने होंठ रख देती है, हम करीब 5 मिनट तक एक दूसरे के होंठ और जीभ चूसते हैं, काकी ये सब नज़ारा देखकर दंग रह जाती है)
ताई – पंडित बेटा, जल्दी डाल दे अपना कोबरा मेरी चूत के अंदर और सारा वीर्य मेरी बच्चादानी में छोड़ दे।
मैं – जो हुकुम मेरी रानी।
(और मैं अपना खड़ा हुआ फंफनता लण्ड सीधा ताई की गर्म हुयी भट्टी जैसी चूत के अंदर डालता हूँ और फिर ताई और मेरी चुदाई प्रक्रिया शुरू हो जाती है, काकी सारा खेल देखे जा रही थी)
ताई – अह्ह्हह्ह्ह.. उम्ममम्मम.. उईईईई.. रेरेरेरेरेरे.. ऐसे ही चोद अपनी ताई को बेटा, अह्ह्ह्हह्ह्.. तेरा सुपाडा तो बहुत ही बड़ा है रे.. ममममम.. उईईईई माँ.. मर गयी..
मैं – ताई, सुनंदा, मेरी जान, आज तेरी कोख में अपना बीजारोपण कर दूंगा मेरी पत्नी.. अह्ह्ह्ह.. कितनी गर्म भट्टी है तेरी भोसड़ी, काकी की तो ठंडी है.. अह्ह्ह्ह..
काकी – पंडित तुम इतने जल्दी क्यों बदल गए बेटा, मुझ में क्या बुरा है, तुमने तो कहा था कि मैं नंगी फिल्मों की हीरोइन लगती हूँ?
मैं – भक्क्क चिनल, शक्ल देखि है आईने में अपनी, वो तो मैं झूट बोल रहा था, तेरा बदन अच्छा है बस चुदाई लायक,आह्ह्ह्ह.. 200 रूपये मिल जायेंगे तेरे बदन के गाँव के बाजार में, आहहहह.. और रहा सवाल मेरे बदलने का, मुझे जहाँ बड़ी चूत मिली, अच्छा स्वाद मिला, ममममम.. अह्ह्ह्हह्.. मैं वहीँ जाऊंगा, आज ताई मुझे पसंद आयी है तो मैं ताई का दीवाना हूँ, कल ताई की जगह तेरी बेटी सपना भी ले सकती है, उईईईई.. अह्ह्ह्हह्.. मैं झड़ने वाला हूँ ताई, अह्ह्ह्ह्ह.. मैं आया आया..
ताई – अंदर ही छोड़ दे बेटा, मुझे बच्चा चाहिए, अह्ह्हह्ह्ह्ह.. मैं भी फारिक होने वाली हूँ मेरे लाल, अह्ह्ह्ह्ह्.. उईईईई.. उम्ममम्मम्म.. आयी मैं भी जान..
(मेरा लण्ड फचापच फचापच ताई की बच्चादानी में गोते खा रहा था, मेरा लण्ड ताई की चूत के पानी से भीग कर और भी लचीला हो गया था, इस चुदाई के अंतिम चरम पर ताई और मैं तेज तेज झटकों के साथ पसीने में लटपट एक साथ झड़ जाते हैं और हमारा नंगन शरीर एक दूसरे से नाग नागिन की तरह लिपटा हुआ था)

pongapandit
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Re: परिवार में चुदाई की गाथा

Post by pongapandit » 30 Aug 2017 14:01


मैं – काकी, देख एक दिन सपना को भी ऐसे ही चोदुंगा।
काकी – बहुत हरामी है रे तू, मेरी बेटी पे रहम कर, वो छोटी है अभी, उसकी तो सील भी नहीं टूटी।
ताई – कितनी भोली है तू रत्ना छिनाल, तेरी बेटी तेरी पीठ के पीछे क्या क्या गुल खिलाती है तुझे पता भी नही, तू उसे शरीफ समझती है, गाँव में पीठ पीछे कितनी बात करते हैं तुझे क्या पता, तेरी बेटी रांड है रत्ना।
काकी – जबान पर लगाम दे सुनंदा, बहुत हो गया, खबरदार जो अब मेरी बेटी के खिलाफ एक भी शब्द कहा।
(मैं काकी का ये विकराल रूप देखकर डर गया और मैंने ऐसे समय में कुछ न कहना ही बेहतर समझा और काकी-ताई को उनके हाल में छोड़ दिया)
ताई – बोलूंगी मैं तो, क्या उखाड़ लेगी मेरा बता?
काकी – भेन की लॉड़ी, थप्पड़ जड़ दूंगी गाल पर, रंडी।
ताई – अपने बाप की बेटी है तो हाथ लगा, तेरा हाथ तोड़ के तेरी गांड में न दे दिया तो मेरा नाम भी सुनंदा नहीं।
(बाप पर बात आते ही काकी ताई पर झपट गई और फिर काकी-ताई की बिल्ली लड़ाई (कैट फाइट) शुरू हो गयी, दोनों नंगी एक दूसरे के बाल खिंचती हुयी लड़ रही थीं, एक दूसरे को चमाट मारते हुए लड़ाई कर रही थी, दोनों हट्टी कट्टी देहाती, मर्दाना औरतें नंगन अवस्था में युद्ध करते हुए बहुत ही आकर्षक लग रही थी..
शोरगुल और हो हल्ले के बीच सपना आ जाती है और अपनी माँ और ताई को इस अवस्था में देखकर भौचक्की रह जाती है, अपनी माँ रत्ना को पिटता देख वो भी ताई पर झपट जाती है और तब ताई की जो पिटाई शुरू होती है वो देखने लायक थी..
पतापत पतापत ताई के गालों पर रत्ना और सपना के बड़े बड़े हाथों द्वारा चमाट की बारिश होती है, नंगी सुनंदा को रत्ना और सपना लेटा लेटा कर लात घुसें मारते हैं, मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं किस की तरफ से वार करूँ..
अभी सपना को भी नाराज़ नहीं कर सकता क्योंकि उसकी चुदाई अभी करनी बाकि है, अगर सपना नाराज़ हो जाती तो उसे चुदाई के लिए पटाना कठिन काम था, काकी-ताई का मजा में लगभग ले ही चुका था, तो मैने पीटती हुयी ताई पर ही वार करने की सोची परंतु तभी अचानक आनन्दी का कमरे के आगमन हो जाता है..

माहौल को भांपते हुए वो रत्ना और सपना पर टूट पड़ती है, दरअसल आनन्दी खेलकूद में काफी होशियार थी तो अपनी फुर्ती व चालाकी के दम पर वह, काकी-सपना पर भारी पड़ गयी.और अब दबदबा सुनंदा और आनन्दी का था..
लड़ाई इतनी बढ़ गयी कि आनन्दी और सुनंदा डंडे से लगातार रत्ना और सपना पर वार किए जा रहे थे, और काकी-सपना की हालत बेहोशी वाली हो गयी थी, अब काकी और सपना माफ़ी मांगने पर मजबूर हो गए थे।
काकी (रोते हुए) – माफ़ कर दे दीदी, माफ़ करदे, रहम कर मेरी बच्ची और मुझ पर।
ताई – रंडियों, अब माफ़ी मांगते हो, बोलो करोगे अब बदतमीजी ?
सपना – ना ताई, अब नहीं करेंगे, छोड़ दो हमे।
काकी – भगवान् के लिए छोड़ दो, पंडित बेटा बचा हमे।
मैं – माफ़ी मांग लो, मैं कुछ नहीं कर सकता, काकी आपको ताई का आदर करना चाहिए, वो आपकी माँ की तरह है।
काकी – आज से आदर करूँगी, जो बोलेगी वो करूँगी, गुलाम बन कर रहूंगी।
ताई – अब सजा तो मिलेगी तुम दोनों माँ बेटियों को.. आनन्दी इधर आ, अपना पैजामा खोल और इनके मुह और बदन पर मूत दे, मैं भी मुतती हूँ।
सपना – ऐसा मत करो ताई प्लीज, मत कर आनन्दी दीदी ऐसा।
आनन्दी – चुप कर रंडी साली.. कपड़े खोल अपने जल्दी नंगी हो जा।
सपना – नहीं दीदी नंगी मत कर प्लीज।
(आनन्दी और सुनंदा सपना को जबरन नंगी कर देते है उसके बाद काकी और सपना के ऊपर मूत्र विषर्जन करते हैं, इतना अपवित्र दृश्य देखकर मेरी आँखें भर आयी, काकी-सपना के प्रति मेरा हृदय पिघल गया, मुझे अब ताई और आनन्दी की इस अमानवीय हरकत पर गुस्सा आने लगा, लेकिन मेने अभी कुछ करना ठीक नहीं समझा..
फिर ताई और आनन्दी ने सपना से काकी की चूत चटवायी और काकी से भी सपना की गांड व चूत रस चटवाया.. इतना करने के बाद ताई और आनन्दी अपने कमरे में चले गए और काकी-सपना जमीन में लेटे रो रहे थे)
मैं – चल काकी अब नहा ले और कपड़े पहन ले, सपना बहन तू भी नहा ले।
काकी – तूने मुझे बचाया नहीं पंडित, तू बहुत गंदा है।
सपना – हाँ भाई, हमारा साथ नहीं दिया तूने।

मैं – तो कौन सा मैंने ताई या आनन्दी का साथ दिया, सुन अभी आराम कर, कल कुछ सोचते हैं ताई को सबक सिखाने के बारे मे।

pongapandit
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Re: परिवार में चुदाई की गाथा

Post by pongapandit » 30 Aug 2017 14:08

सपना-कल क्या सोचेंगे भाई अभी सोच ना

मैं-देख सपना मैं तुझे एक कहानी सुनाता हूँ उसे सुनकर ही तू फ़ैसला करना

काकी- अरे पंडित अब इस मामले में ये कहानी कहाँ से आ गई

मैं- पहले तुम दोनों मेरी ये कहानी सुन लो फिर फ़ैसला करना

सपना- किसकी कहानी है और कैसी है चल शुरू कर भाई

काकी- हाँ पर ये तो बता ये कहानी है किसकी

मैं-ये कहानी मेरे दोस्त हापुड़ निवासी रमन, उसकी माँ कामना और छोटी बहन रिंकी की है.
रमन एक 21 वर्षीय लड़का है जिसका अभी हाल ही में दिल्ली के कॉलेज में एडमिशन हुआ है, रमन दिखने में हष्ट पुष्ट लड़का है जिसने अभी अभी कॉलेज की दुनिया में कदम रखा है.

रमन की चौड़ी छाती के घने बाल लड़कियों के लिए आकर्षण का कारण हैं, रमन के घर में उसकी छोटी बहिन रिंकी(उम्र *** वर्ष) और माँ कामना(उम्र 46 वर्ष) रहतीं हैं, रमन का बाप नाम- भास्कर फौजी है जो असम में रहता है.
रिंकी *** वर्षीय 12वीं की गोरी,पतली,सुंदर छात्रा है जिसके जीवन में जवानी का बीच अभी अभी उगा है, रिंकी के उभरते हुए अमिया जैसे कच्चे स्तन काफी टाइट हैं जिसमे उसके टाइट कसे हुए छोटे छोटे निप्पल उसके स्तनों की बनावट में चार चाँद लगाते हैं..
रिंकी की पतली कमर, उभरते हुए कूल्हे, गोरा बदन देखने लायक है, रिंकी ने हाल ही में जवानी में अपना पहला कदम रखा है जिसका प्रभाव उसके चेहरे की तड़प में साफ़ साफ़ नजर आता है..
रिंकी घर में बिना बाँहों वाला छोटा टॉप और निचे नेकर पहने रहती है जिसके कारण उसकी गोरी गोरी मोटी जांघों के दर्शन रमन को होते हैं तो रमन का भी मन डोलने लगता है, गोरी गोरी टांगों में रिंकी ने काले धागे बांधे हुए हैं ताकि उसके हुस्न बदन पर किसी की बुरी नजर न लगे. रमन कई बार अपनी बहन रिंकी से चिपकने का प्रयास करता है और उसके छोटे छोटे कच्चे अमिया जैसे बूब्स की एक झलक पाने के लिए हर समय आतुर रहता है.
वहीं दूसरी और रमन की माँ कामना जिसकी उम्र 45 वर्ष है पति के घर में न होने की वजह से काफी परेशान रहती है, घर में कामना सुबह से श्याम तक नाईटी पहन के रखती है और उसके अंदर कुछ नहीं पहनती..
कामना दिखने में मोटी भैंस जैसी गोरे और सुडौल बदन की मालकिन है जिसके सुडौल मोटे उभरे हुए बूब्स उसकी नाईटी को फाड़ने के लिए उतारू रहते हैं, उसके बड़े बड़े निप्प्ल का आकार उसकी नाईटी के बाहर से साफ साफ दिखता हुआ प्रतीत होता हैं..
लेकिन वो रमन और रिंकी से कभी नहीं शर्माती और घर में सुबह से शाम तक ऐसे ही बेझिझक नाईटी में रहती है, परन्तु रमन की गन्दी नजर अपनी माँ के मोटे गठीले सुडौल बदन पर हमेशा रहती है और अपनी माँ को देखकर उसका लण्ड हर बार खड़ा हो जाता है..
कभी कभी वो बाथरूम में अपने माँ के गोर, मोटे, हाथी जैसे सेक्सी और कामुक बदन के बारे में सोचते हुए अपना गाढ़ा सफेद पानी निकालता है. अपनी माँ के बूब्स की एक झलक पाने के लिए वो हर समय तैयार रहता है, जब कामना झाड़ू लगाती है, पौछा लगाती है या घर का कुछ काम करती है तो रमन अपनी माँ के बूब्स और गांड को चोरी छिपे देखता रहता है, कभी कभी उसकी वीडियो भी बना लेता है.
बात उस समय की है जब रमन और उसकी माँ कामना दिल्ली से ट्रेन में हापुड़ आ रहे थे, जनरल डिब्बे में सीट न होने की वजह से रमन को अपनी माँ की गोद पर बैठना पड़ा, गर्मी का मौसम था, कामना और रमन दोनों पसीने में लतपत थे..
थोड़ा सफर तय करने के बाद रमन कामना को अपनी गोद में बैठने को बोलता है. कामना रमन की गोद में आ जाती है, 110 किलो की रमन की 46 वर्षीय गोरी, मोटे बूब्स वाली माँ अब अपने बेटे की गोद में बैठी थी, ट्रेन स्पीड में थी और झटके मारते हुए चल रही थी और इसी झटके के साथ साथ कामना अपने बेटे की गोद में उछल रही थी जिस वजह से रमन के लण्ड पर दबाव पड़ा और उसका लण्ड खड़ा हो गया और कामना की गांड में चुभ रहा था..
कामना मजबूरी में कुछ कर भी नहीं सकती थी, वह ऐसे ही अपने बेटे की गोद में बैठी रही, वहीँ दूसरी ओर रमन की हालत खराब थी, उसका मन अपनी माँ की गांड में लण्ड डालने का कर रहा था लेकिन वो मजबूर था..
एक आदमी दूसरी सीट में बैठा हुआ ये सब दृश्य देख रहा था, उस आदमी की उम्र लगभग 52 वर्ष होगी, उसकी आँखों में हवस दिख रही थी, अचानक उस आदमी ने कहा –
आदमी- भाभी जी, आपका बेटा थक गया होगा, आप मेरी जगह में बैठ सकते हैं.
कामना- नहीं नहीं भाई साहब, धन्यवाद, अगर मैं आपकी जगह में बैठ गयी तो आप कहाँ बैठोगे फिर?
आदमी- भाभी जी, मैं खड़ा हो जाता हूँ थोड़ी देर तक.
कामना- नहीं भाई साहब, आपका बहुत बहुत शुक्रिया, मेरा बेटा अभी नहीं थका है, जब थक जाए तो मैं बता दूंगी.
आदमी- ठीक है भाभी जी.
(थोड़ा सफर तय करने के बाद झटके मारते हुए रमन के लण्ड ने कच्छे में ही सफेद गाढ़ा माल छोड़ दिया और पुरे डब्बे में रमन के वीर्य की दुर्गन्ध फैल गयी, कामना को ज्यादा बदबू आ रही थी, तो कामना ने उस आदमी को उठने के लिए बोला)
कामना- भाई साहब, अब उठ जाइए आप.
(आदमी ने थोड़ी जगह बनाते हुए कामना को थोड़ी सी सीट दी)
आदमी- उठने की जरुरत नही है भाभी जी, यहीं एडजस्ट कर लेंगे.

कामना- धन्यवाद भाई साहब.
(जगह कम होने की वजह से कामना धीरे धीरे ट्रेन के झटकों के साथ साथ उस आदमी की गोद में आ जाती है, अब कामना उस अनजान आदमी की गोद में बैठी थी, और आदमी से बात कर रही थी)

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Re: परिवार में चुदाई की गाथा

Post by rajaarkey » 30 Aug 2017 19:10

kamaal ki kahani hai dost
(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &;
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj sharma

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Re: परिवार में चुदाई की गाथा

Post by Kamini » 30 Aug 2017 19:30

mast update

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