परिवार में चुदाई की गाथा

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pongapandit
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Re: परिवार में चुदाई की गाथा

Post by pongapandit » 01 Sep 2017 20:26

rajaarkey wrote:
30 Aug 2017 19:10
kamaal ki kahani hai dost
Kamini wrote:
30 Aug 2017 19:30
mast update
thanks mitro

Re: परिवार में चुदाई की गाथा

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pongapandit
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Re: परिवार में चुदाई की गाथा

Post by pongapandit » 01 Sep 2017 20:27

आदमी- मैडम, आप कहाँ से हो?
कामना- दिल्ली से भाई साहब और आप?
आदमी- मैं भी दिल्ली से हूँ. आपके हस्बैंड कहाँ काम करते है?
कामना- वो तो आर्मी में हैं, अभी असम में हैं इससे पहले लद्दाख़ में थे.
(ट्रेन के झटकों की वजह से आदमी का लण्ड कामना की गांड में छूने लगा और खड़ा हो गया, इस आदमी का लण्ड रमन के लण्ड से भी ज्यादा बड़ा था और कामना को साफ साफ इसका आभास हो रहा था परन्तु सीट न होने के कारण वो उस आदमी की गोद में बैठने को मजबूर थी, रमन ये सब ड्रामा देखे जा रहा था..
अचानक ट्रेन में जोर का झटका जोरों से लगता है और कामना आदमी की गोद से नीचे गिरने वाली होती है तो वो आदमी कामना को गिरने से बचा लेता है, वो कामना को टाइट पकड़ लेता है, जिस कारण उसके मोटे बूब्स आदमी के हाथों से दब जाते हैं, रमन को ये सब नजारा देखकर बहुत गुस्सा आता है)
कामना(डरते हुए)- हाये दय्या, मैं तो गिर गयी थी अभी, भाई साहब आपका धन्यवाद आपने बचा लिया मुझे.
आदमी- ये तो मेरा फर्ज था भाभी जी. अब मैंने आपको कस कर पकड़ रखा है, अब आप नहीं गिरोगे.
कामना- हाँ भाई साहब ऐसे ही पकडे रहो.
(आदमी ने कामना को टाइट पकड़ रखा था, ट्रेन चल रही थी, झटके लगातार लग रहे थे, आदमी का लण्ड कामना की गांड की दरार को छू रहा था, कामना को भी अहसास हो रहा था और आनंद की अनुभूति भी हो रही थी, कामना ने अपने होंटों को दांतों से दबा लिया और आँखें बंद कर दी..
यह सब देखकर रमन सब कुछ समझ गया और ऐसे ही अपनी माँ को तड़पते हुए देखता रहा, अब आदमी के झटके भी तेज़ होने लगे, कामना ने कोई विरोध नहीं किया.
अचानक आगे गुफा/सुरंग आई तो अन्धेरा हो गया, गुफा ख़त्म होने के बाद रमन ने देखा उसकी माँ का साड़ी का पल्लू नीचे गिरा था और उसमे से लगभग 60 प्रतिशत बूब्स बाहर आने को व्याकुल है, वो सब कुछ समझ गया कि अँधेरे में गुफा में क्या कारनामा हुआ.
दूसरी गुफा आती है तो उसके बाद कामना की साड़ी झांघों तक आ गयी थी, अब रमन की माँ कामना के बिना साड़ी के पल्लू केे बूब्स ट्रेन के डिब्बे में बैठे सभी लोगो के सामने थे और साड़ी झांघ तक थी, झांघ का काला तिल चमक रहा था..
अब तक डिब्बे में मौजूद सभी लोग समझ गए थे की अँधेरी सुरंग में क्या क्या हुआ, और सभी लोग रमन को देखकर हंस रहे थे क्योंकि उसकी माँ उसी के सामने मजे ले रही थी.
तीसरी सुरंग आती है इसके बाद रमन की माँ की काली ब्रा की स्ट्रिप लाल ब्लाउज में से साफ साफ बाहर दिखने लगती है और बूब्स लगभग 70 प्रतिशत बाहर आ गए जिसमे से हलके भूरे रंग के निप्पल का ऊपरी भाग भी नग्न था और सभी को नजर आ रहा था वहीँ दूसरी और उस अनजान आदमी के गालों में और गले में लिपस्टिक के निशान थे, और उसकी शर्ट के 4 बटन खुले हुए थे, ऐसा अश्लील वातावरण देखकर अब सभी को पता चल गया था कि क्या मामला है.
चौथी सुरंग आती है, सुरंग खत्म होने के बाद कामना का साड़ी का पीछे का हिस्सा पूरा खुला था और उसकी गांड में उस आदमी का लण्ड इस प्रकार घुसा हुआ था कि किसी को दिखाई न दे. कामना उस आदमी की गोद में बैठी आगे की और झुकी थी और उसके सर के बाल बिखर गए थे, माथे से पसीने की बूंदें उसके 70 प्रतिशत बाहर दिख रहे बूब्स की काली गहरी घाटी में समा रही थी, रमन को अब यकीन हो गया कि उसकी माँ चुद रही है. रमन कामना की ये हालत देख रहा था और कामना को घूरे जा रहा था.)
कामना(रमन की ओर देखते हुए)- गर्मी बहुत है न बेटा, तुझे नहीं लग रही क्या?
रमन- नहीं माँ, आपको बहुत ज्यादा लग रही है शायद.
कामना- हाँ बेटा, कैसे दूर होगी ये गर्मी.
आदमी- भाभी जी मैं कर देता हूँ दूर, अगली सुरंग आने दो.
(कामना और वो आदमी हंसने लगते हैं और रमन को अपनी माँ की इस करतूत पर बहुत गुस्सा आता है,
पांचवी सुरंग आती है, और ये सुरंग थोड़ा लंबी भी थी, कुछ दिखायी नही दे रहा था, लेकिन कामना और उस आदमी की आवाज सभी को सुनाई दे रही थी, कामना की चूड़ियों की तेज तेज खनखनाहट रेल के डब्बे में गूंज रही थी, कुछ लोग बात भी कर रहे थे कि आज तो रमन की माँ चुद गयी और हंस रहे थे, मजाक बना रहे थे)
कामना- अह्ह्ह्ह अह्ह्ह भाई साहब तेज… और तेज… जल्दी भाई साहब अह्ह्ह्ह उम्म्म्म्म…
आदमी- अह्ह्ह्ह्ह भाभी जी अह्ह्ह्ह उईई हो गया बस…. अह्ह्ह्ह…
(कुछ देर बाद आवाजें बंद हो जाती है और सुरंग भी खत्म हो जाती है, आदमी ने लण्ड कामना की गांड से बाहर निकालकर अपने पैजामे में डाल लिया था और कामना ने भी साड़ी निचे कर ली थी और ब्लाउज भी सही कर लिया था और ठीक तरीके से संस्कारी शादीशुदा नारी की भाँती आदमी की गोद में ऐसे बैठी हुयी थी जैसे कुछ हुआ ही न हो..

अब कामना के बूब्स केवल 50 प्रतिशत बहार थे जो हररोज ऐसे ही बाहर लटकते थे, कुछ देर बाद उस आदमी का स्टेशन आ जाता है और वो ट्रेन से उतर जाता है)
कामना- रमन बेटा यहीं बैठे रहना, मैं अभी आई.
रमन- लेकिन माँ आप कहाँ जा रही हो?
कामना- 2 मिनट में आई बेटा, तू यहीं पर रुक कोई सीट न घेर ले.
(उस आदमी को उतरते देख कामना दौड़ी दौड़ी उसके पीछे जाती है और उसे रोकती है)
कामना- भाई साहब, रुकना…
आदमी- क्या हुआ भाभी जी?
(और कामना उस आदमी के होंठों से अपने होंठ मिला लेती है और किस करती है, स्टेशन पर मौजूद सभी लोग उन्हें देखते हैं, रमन के डब्बे के लोग भी उन्हें देखते हैं लेकिन रमन अपनी जगह में रहता है ताकि कोई जगह न घेर ले, इस चुम्बन का मनमोहक दृश्य देखने के लिए भीड़ इकट्ठा हो जाती है, और ट्रेन चलने वाली होती है तो कामना अपने डब्बे में आ जाती है, सभी लोग रमन और उसकी माँ को देखकर हंसते हैं और ट्रेन में मौजूद सभी हरामी किस्म के लौंडे कामना को कुत्तों की तरह ऊपर से निचे तक घूरते हैं)
रमन- कहाँ गयी थी माँ?
कामना- अरे उन भाई साहब का पर्स रह गया था वो देने गयी थी.
रमन- यहाँ अभी पता नहीं क्या हुआ, सभी लोग उस तरफ देखे जा रहे थे जहाँ आप गए, लेकिन मैं अपनी सीट से नहीं उठा ताकि हमारी जगह कोई घेर न ले.
कामना- मेरा राजा बेटा, लेकिन उन अंकल की जगह में तो कोई और बैठ गया, अब मैं तेरी गोद में बैठूंगी.
रमन- हाँ माँ आजाओ, बैठ जाओ.
(कामना फिर अपने बेटे रमन की गोद में बैठ जाती है, रमन का लण्ड एक बार फिर से अपनी माँ की गांड के घर्षण से झटके मारने लगता है और खड़ा हो जाता है, ट्रेन हिल हिल कर चलती है, रमन पहले ही झड़ चुका था और पुरे डब्बे में उसके माल की बदबू फैली हुयी थी वहीँ दूसरी और उस अनजान आदमी ने कामना की साड़ी के पीछे वीर्य गिराया हुआ था, जिसके बारे में कामना को पता नहीं था, उसकी भी बदबू फैल गयी थी, सभी लोगों ने अपने नाक में हाथ रख दिया था, केवल कामना और रमन को छोड़कर, अचानक रमन के हाथ में कामना की साड़ी से उस आदमी का वीर्य लग जाता है और वो अपनी माँ से पूछता है)
रमन- माँ ये चिपचिपा सा क्या लगा है आपकी साड़ी में?
कामना- ओहो, दिखा तो… अरे जब बाहर गयी थी तो तब लग गया होगा, जनरल डिब्बे में यही मुसीबत है, गंदगी ही गन्दगी रहती है.
अगली बार हम ए.सी. डिब्बे में जायेंगे ठीक है?
रमन- ठीक है माँ. माँ मैं आपको वैसे ही पकड़ लेता हूँ जैसे अंकल ने पकड़ा था, कहीं आप गिर न जाओ.
कामना- हाये राम… मेरा बेटा कितनी फिक्र करता है मेरी, पकड़ ले बेटा.
(रमन कामना को वैसे ही कस कर पकड़ लेता है, कामना फिर से उत्तेजित हो जाती है और अपनी जीभ अपने होंठों में फेरने लगती है, ट्रेन के झटकों से उसका पल्लू फिर से नीचे गिर जाता है..
डिब्बे में मौजूद सभी लोग कामना के 70 प्रतिशत बाहर झांकते हुए बूब्स का नज़ारा देख रहे थे और कुछ तो अपने लण्ड में हाथ भी फेर रहे थे. रमन ट्रेन के झटके के साथ साथ खुद भी जोर जोर से कामना की गांड में झटके मार रहा था, और उसका लण्ड कामना को गांड में महसूस हो रहा था..
कामना आगे की तरफ झुकी हुयी थी, उसके बूब्स की काली गहरी घाटी साफ दिख रही थी, गले का मंगलसूत्र लटका हुआ था, माथे पर लाल बिंदी, मांग पर लाल सिंदूर कामना की सुंदरता में चार चाँद लगा रहे थे..
रमन ने अपनी माँ को बूब्स के थोड़ा निचे हाथों से जकड़ा हुआ था और झटके मार रहा था, कामना ने अपने दोनों हाथ अपने घुटनो पर रखे थे, वो अपने बेटे रमन की हालत से वाकिफ थी और उसके मजे में कोई मुसीबत नहीं डालना चाहती थी..
कुछ लोग डिब्बे में कामना और उसके बेटे की करतूत देख कर मुठ मार रहे थे, और कुछ लोग नज़रअंदाज कर रहे थे, कुछ सभ्य परिवार के लोग पहले ही दूसरे डिब्बे में चले गए थे..

pongapandit
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Re: परिवार में चुदाई की गाथा

Post by pongapandit » 01 Sep 2017 20:28

अचानक फिर सुरंग आती है और इस सुरंग के चलते जो 6-7 लोग मुठ मार रहे थे उन्होंने अपना अपना माल कामना के ऊपर डाल दिया और कुछ माल रमन के मुह पर भी पड़ा,कामना का मुह, गला और बूब्स तो माल से भीग गए थे, और रमन का माल भी कच्छे में निकल गया, कामना भी झड़ गयी..
कामना और रमन को पता भी नहीं चला कि ये किसने किया, कैसे हुआ क्योंकि सुरंग खत्म होने पर सभी लोग वैसे ही खड़े हो गए जैसे पहले थे, शक करें तो किस पर, सुरंग खत्म होने पर सबका स्टेशन आया और कामना का मुह 6-7 आदमियों के वीर्य से पूरा सफेद हो गया था..
रमन के भी मुह में माल था, दोनों सभी से नजर छुपाते हुए ट्रेन से जल्दी जल्दी उतरे और घर चले गए, घर पहुँच कर कामना ऐसा बर्ताव कर रही थी जैसे कुछ हुआ ही न हो, रिंकी कामना और अपने भाई रमन को देखकर बहुत खुश हुयी..
रिंकी ने स्कर्ट और ऊपर एक हलकी सी नेट वाली बनियान पहनी हुयी थी जिसमे उसके कच्ची अमिया जैसे बूब्स हल्के से उभरे हुए लग रहे थे और निप्पल का गोल आकार भी दिख रहा था..
रिंकी अपने भाई के गले लगती है और उससे चिपक जाती है, छोटी होने के कारण रमन रिंकी को गोद में उठा लेता है और उसे उसके कमरे में ले जाता है)
रिंकी- भैया आप मेरे लिए क्या लाये, और आपसे और माँ से इतनी बदबू क्यों आ रही है?
रमन- पगली तेरे लिए तरह तरह के टॉप, जीन्स, शॉर्ट्स लेकर आया हूँ, और बदबू पसीने की है, सफ़र की वजह से आ रही है, अभी नहाऊंगा चली जायेगी.
(रिंकी बहुत खुश हो जाती है, वहीँ दूसरी और कामना नहाने चली जाती है, रिंकी जब अपने भैया रमन द्वारा लाये गए छोटे छोटे साइज के जालीदार ब्रा और पेंटी देखती है तो चौंक जाती है और शरमा भी जाती है)
रिंकी- अरे भैया, ये क्या लाये आप मेरे लिए, मैं नहीं पहनती हूँ ये सब, ये सब तो माँ पहनती है.
रमन- सिस्टर अब तू जवान हो रही है, इन सब चीजों की तुझे जरुरत है, लेकिन माँ को मत बताना कि मैं तेरे लिए ये सब लाया हूँ, वो गुस्सा करेगी.
रिंकी- हाँ लेकिन मैं कैसे पहनू ये सब, माँ को दिख जायेगी तो.
रमन- पगली अगर माँ देख भी ले तो कहना तू अपनी फ्रेंड के साथ मार्किट से ये सब लायी.
रिंकी- ओके भैया, थैंक यू सो मच, आई लव यू भैया.
रमन- आई लव यू टू बेबी.
(और रिंकी बहुत ही खुश होती है और रमन के गले लग जाती है, जिस वजह से उसकी बनियान के अंदर सख्त गुठली से बने कच्चे बूब्स और उनके निप्पल रमन की छाती में टच हो जाते हैं और रमन का पूरा बदन सिहर जाता है, लण्ड खड़ा हो जाता है और जोर जोर से झटके मारने लगता है, उसके बाद रमन और रिंकी अलग होते हैं)
रिंकी- भैया, आज मुझे मैथ्स के कुछ सवाल सिखाना, आपकी मैथ्स काफी अच्छी है.
रमन- ठीक है बहना, मैं सब कुछ सीखा दूंगा तुझे, अभी नहा लेता हूँ, बहुत बदबू आ रही है.
(रमन से भी माल की काफी बदबू आ रही थी, कामना नहा कर अपनी जालीदार नाईटी पहन लेती है, जिसमें से उसके बड़े बड़े तरबूज जैसे स्तन काफी विशाल लग रहे थे..
नाईटी के अंदर ब्रा न पहनने के कारण उसके निप्प्ल्स का उभार स्पष्ट प्रतीत हो रहा था जिसे देखकर रमन का लण्ड अपनी माँ के हुस्न से भरे हुए कामुक सुडौल बदन को सलामी देने लगा, और जब कामना ने रमन की ये हालत देखी तो एक कुटिल कामुक मुस्कान उसके चेहरे पर आई, अब रमन और उसकी माँ कामना के रिश्तों में थोड़ा परिवर्तन दिखाई दे रहा था..
कामना का रमन के प्रति बर्ताव बदल रहा था, और रमन भी अपनी माँ को माँ की नज़र से नहीं बल्कि किसी वैश्या की नज़र से देखने लगा था, ट्रेन की घटना के बाद ज्यादातर टाइम रमन का लण्ड अपनी माँ के ख्यालों में खड़ा रहता था और घर में पैजामे के ऊपर लण्ड का उभार साफ दिखाई देता था, और कामना रमन के लण्ड के उभार को हमेशा घूर घूर के देखा करती थी और मंद मंद कामुक हरामी वाली हंसी देती थी, धीरे धीरे रमन का हौसला भी बुलंद होता चला गया..
कभी कभी रमन अपनी माँ के सामने पैजामे के अंदर अपने लण्ड को इतना खड़ा कर देता था की साफ साफ उभार दिखाई देता था और झटके मारते हुए हिलता भी था, लेकिन कामना का कोई विरोध नहीं था)
(रात का समय था, रिंकी ने रमन को उसे मैथ्स पढ़ाने को कहा)
रिंकी- भैया, प्लीज समझा दो कुछ सवाल. मेरे कमरे में चलो.
रमन- चल बहना.
(रमन और रिंकी कमरे में जाते हैं, रिंकी ने एक टाइट लाल रंग का टॉप पहना हुआ था, जिसके अंदर गुलाबी रंग की उसके भाई रमन द्वारा लायी हुयी जालीदार ब्रा पहनी थी, और उसके बूब्स पहले से थोडा सा बड़े लग रहे थे..
टॉप इतना छोटा था की उसका पेट साफ साफ दिख रहा था, ** साल की उम्र की गोरी लड़की की गहरी नाभि भी दिख रही थी, नीचे उसने एक जीन्स की नेकर पहनी थी और उसके अंदर भी गुलाबी पेंटी पहनी थी जो उसके पिछवाड़े के ऊपर से दिखाई दे रही थी..
उसकी गोरी चिकनी मोटी झांघें बहुत ही सेक्सी लग रही थी जिसमे हलके हलके सुनहरे भूरे रंग के बाल रमन का लण्ड खड़ा कर रहे थे, बुरी नजर से बचने के लिए दोनों पैरों में बंधा हुआ काला धागा उसकी गोरी टांगों के सेक्सिपन की शोभा बढ़ा रहा था..
अपनी बहन को इस वेशभूषा में देखकर उसे उसको पढ़ाने का मन नहीं बल्कि चोदने का मन ज्यादा कर रहा था, रमन की हालत खराब थी, लेकिन उसकी भोली भाली बहन उसके इरादों से वाकिफ नहीं थी, रमन उसे सवाल समझने लगा)
रमन- बहना तूने कपडे पहन लिए जो मैं लाया था, बहुत अच्छी लग रही है तू कसम से.
रिंकी- झूठ बोल रहे हो भैया. सच सच बताओ.
रमन- माँ की कसम, बहुत ज्यादा हॉट और सेक्सी लग रही है.
रिंकी- बहुत गंदे हो आप भैया, कोई अपनी बहन के लिए ऐसे बोलता है.
रमन- इसमें क्या बुरा है, तू सही में गजब लग रही है, मेने तो बस सच बोला बहना.
रिंकी- चलो कोई बात नहीं, थैंक्स.
रमन- अब तू सारे सवाल कर तब तक मैं कंप्यूटर में गेम खेलता हूँ.

रिंकी- ठीक है भैया.

pongapandit
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Re: परिवार में चुदाई की गाथा

Post by pongapandit » 01 Sep 2017 20:29

(रमन गेम खेलने लगता है, रिंकी पढ़ाई करती है, तभी कामना कमरे में आती है और रिंकी और रमन को कोल्ड्रिंक देती है, कामना रिंकी के छोटे कपडे देखती है, रिंकी की गुलाबी ब्रा की स्ट्रिप उसके टॉप से साफ दिखाई दे रही थी और, पेंटी भी दिखाई दे रही थी, कामना रिंकी को डाँटते हुए पूछती है)
कामना- ये क्या है रिंकी, कैसे कपडे पहने है, आजकल के बच्चों को पता नहीं क्या हो गया, कौन लाया ये तेरे लिए, इतने छोटे कपडे हमारी संस्कृति में नहीं पहनते.
रिंकी- माँ… आप भी ना पुराने जमाने की औरत हो, मैं अपनी दोस्त सुरभि के साथ बाजार से लायी ये सब, उसने भी अपने लिए खरीदे ऐसे कपडे, आजकल सब यही पहनते हैं.
कामना- सूट सलवार पहना कर, ये सब अच्छा नहीं है, कल से ऐसे नहीं दिखनी चाहिए तू, समझी??
रमन- अरे माँ, जाने दो, जमाना बदल गया है, आजकल सभी ऐसे ही कपडे पहनते हैं, मेरे कॉलेज में भी सब लड़कियां छोटे छोटे कपडे पहनती है.
कामना- तू चुप कर, क्या खेल रहा है तू कंप्यूटर में, कभी अपनी माँ को भी कंप्यूटर चलाना सीखा दे.
रमन- आज सीख लो, आ जाओ.
(वहां केवल 1 ही कुर्सी थी तो रमन उठने लगा)
कामना- अरे बैठे रह तू, तेरी गोद में बैठ जाऊंगी, ट्रेन में भी तो ऐसे ही बैठी थी.
रिंकी- हा हा हा, माँ आप क्या भैया की गोद में बैठकर आई, भैया तो पिचक गए होंगे.
कामना- तू पढ़ाई में ध्यान लगा, ज्यादा शैतानी मत कर.
(कामना रमन की गोद में बैठ जाती है, कामना ने नाईटी के अंदर कुछ नहीं पहना था, उसका पूरा नंगा बदन वैसे ही नाईटी के बाहर से दिख रहा था, और अब वो रमन की गोद में बैठ गयी थी..
रमन ने पैजामा पहना हुआ था, जिसके अंदर उसने कच्छा नहीं पहना था, ऊपर केवल बनियान डाली हुयी थी, जिसमे उसके छाती के बड़े बड़े बाल दिखाई दे रहे थे, रमन का लण्ड अपनी माँ की गांड के स्पर्श से खड़ा हो गया और कामना की गांड में झटके मारने लगा जिसका अहसास कामना को हो रहा था)
कामना- सीधे बैठे रह, ऐसे हिल मत.
रमन- माँ मैं कहाँ हिल रहा हूँ.
कामना- तो कौन हिल रहा है फिर?
रमन- छोड़ो अब, मैं आपको एक गेम खिलाता हूँ.
(रमन कामना को गेम लगा कर देता है, कामना को गेम खेलना नहीं आता, तो रमन खुद ही गेम खेलता है, उसकी गोद में उसकी माँ बैठी थी, अपनी माँ के बगल से हाथ बाहर निकालकर, अपनी छाती माँ की पीठ से सटाकर रमन गेम खेलता है और लण्ड से कामना की गांड में झटके भी देता है, कामना भी उछल रही थी और रमन का साथ दे रही थी, रिंकी ये सब देखे जा रही थी)
रिंकी- माँ-भैया आप ऐसे उछल क्यों रहे हो.
कामना- ये रमन उछल रहा है गेम खेलकर और मुझे भी उछाल रहा है.
रमन- गेम ही इतना खतरनाक है माँ, कहीं आउट न हो जाऊं इसलिए उछल रहा हूँ.
(और ऐसे ही उछलते उछलते झटके मारते मारते रमन गेम में तो आउट हो ही जाता है लेकिन असली गेम में भी आउट हो जाता है और उसका सफेद वीर्य पैजामे में निकल जाता है जिसका साफ साफ गीलापन दिखाई दे रहा था और बदबू भी आ रही थी, कुछ वीर्य का गीलापन कामना की नाईटी में भी लग जाता है)
रमन- अह्ह्ह्ह…. ओह माँ… आउट हो गया मैं तो… अह्ह्ह्ह्ह..
कामना- इतनी जल्दी आउट हो गया, क्या होगा तेरा.
(और कामना हँसते हुए रमन की गोद से खड़ी हो जाती है और रमन के पैजामे में लण्ड की तरफ देखकर मुस्कान देती है और कमरे से बाहर चली जाती है, कामना और रमन दोनों एक दूसरे के इरादों को भांप लेते हैं लेकिन अभी भी कहीं न कहीं दोनों के बीच में माँ-बेटे के रिश्ते की शर्म थी इसलिए दोनों खुल नहीं पा रहे थे लेकिन अनऔपचारिक रूप से दोनों मजे ले रहे थे..
कामना के बाहर जाते ही रिंकी सीधे दौड़ी दौड़ी गेम खेलने के लिए रमन की गोद में बैठ जाती है, रमन का लण्ड अभी भी कड़क था और पूरा गीला था जो सीधा रिंकी के नेकर में गांड में घुसता है और रिंकी को झटका लगता है)
रिंकी- उईई माँ, आऊच…. ये क्या है भैया, आपने तो सुसु कर दिया पैजामे में, गीला हो रखा है.
रमन- सुसु नही है बहना, ये तो पसीना है, जब ज्यादा गर्मी लगती है तो अपनेआप निकल आता है, तू बैठ जा आजा, भैया की गोद में बैठ जा.
रिंकी- और ये खड़ी कैसे हुयी है आपकी नुन्नू?
रमन- बहना, तू कितनी भोली है, तुझे सब समझाना पड़ता है, ये नुन्नू जब किसी सुन्दर लड़की को देखती है तो ऐसे ही खड़ी हो जाती है.
रिंकी- अच्छा ऐसा होता है, जैसे मैं सुन्दर हूँ, ये नुन्नू मुझे देखकर खड़ी हो गयी? स्कूल में तो फिर मुझे देखकर सब की नुन्नू खड़ी हो जाती होगी.
रमन- हाँ बहना तुझे देखकर खड़ी तो हो गयी लेकिन तुझ से पहले इस कमरे में एक और सुन्दर औरत थी, ये नुन्नू उसी ने खड़ी करी है.
रिंकी- माँ ने ?
रमन- हाँ बहना, माँ अभी मेरी गोद में बैठी थी ना, तब में उछल रहा था तो ये खड़ी हो गयी, आजा अब तू भैया की गोद में बैठकर गेम खेल, तेरे बैठने से कुछ देर बाद ये खुद ब खुद बैठ जायेगी.
रिंकी- ठीक है भैया, मैं बैठ जाती हूँ आपकी गोद में.

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Re: परिवार में चुदाई की गाथा

Post by pongapandit » 01 Sep 2017 20:34

(रिंकी रमन की गोद में बैठती है लेकिन उसकी गांड में अभी भी रमन का लण्ड चुभ रहा था)
रिंकी- भैया ये चुभ रही है, आपने तो कहा था ये बैठ जायेगी, लेकिन ये तो बहुत ज्यादा टाइट हो गयी, प्लीज भैया इसे बैठाओ आप किसी भी तरह.
रमन- तू गेम खेलते रह, थोड़ी देर में बैठ जायेगी, जैसे मैं माँ को गोद में बैठाकर उछल रहा था वैसे ही उछलना पड़ेगा, तुझे परेशानी तो नहीं होगी ?
रिंकी- नहीं भैया, आप उछल लो, कोई परेशानी नहीं होगी.
(फिर रमन धीरे धीरे अपना लण्ड रिंकी की गांड में रगड़ने लगता है, रिंकी रमन की गोद में बैठकर गेम खेल रही थी)
रमन- बहना तू कितनी गोरी है, और तेरी ब्रा तेरे कन्धों पर दिख रही है बहना जो मैं तेरे लिए लाया था, तूने सही से नहीं पहनी, तभी माँ को तेरी ब्रा और पेंटी दिख गयी.
रिंकी- भैया अभी मुझे पहनना नहीं आया, धीरे धीरे सिख जाउंगी.
रमन- बहना तू बहुत मस्त है सही में, सेक्सी है.
रिंकी- भाई चुप कर, फिर शुरू हो गया, मुझे ऐसे शब्द अच्छे नही लगते, मेने पहले भी कहा था.
रमन- लेकिन जब तू परी जैसे लग रही है तो मैं बोलूंगा ही, अच्छा एक बात पूछूँ?
रिंकी- हाँ पूछो भैया.
रमन- तेरे गले में एक तिल है, उसमे मुझे किस करने का मन है कर लूँ?
रिंकी- ये भी कोई पूछने की बात है भैया, आप मेरे बड़े भैया हो, अपनी बहन को किस कर सकते हो आप.
रमन- थैंक यू बेबी, आई लव यू.
रिंकी- आई लव यू टू भैया.

(भोली भाली ** साल की पतली दुबली, गोरी चिट्टी, कच्ची कली रमन की बहन रिंकी को रमन के इरादों के बारे में पता नहीं था, उसे लगा उसका भाई उसे बहन की तरह प्यार करेगा, लेकिन रमन ने अपनी लंबी जीभ जब रिंकी के गले में फेरी तो रिंकी सिहर गयी)
रिंकी- अह्ह्ह्ह्ह ये क्या कर रहे हो भैया, आपने तो किस के लिए कहा, और आप मेरा गला चाट रहे हो.
रमन- बहना किस करने से पहले ऐसा ही करते हैं, तुझे अच्छा नहीं लगा क्या?
रिंकी- मजा आया बहुत लेकिन अजीब सा अहसास हुआ भैया पता नहीं क्यों.
रमन- तेरी उम्र में हर लड़की को ऐसा ही अहसास होता है बहना, तू गेम खेलते रह.
रिंकी- ठीक है भैया, ऐसे ही चाटना बहुत मजा आया.
(और रमन अपनी जीभ रिंकी के कान से लेकर गले से और फिर कंधे में फेरता हैं, अब रिंकी की चूत में भी पानी आने लगता है, और रिंकी को बहुत मजा आने लगता है, और रिंकी सिसकारी भरने लगती है)
रिंकी- अह्ह्ह्ह अहो हो भैया, मजा आ रहा है, अह्ह्ह्ह… ऐसा क्यों हो रहा है भैया, मुझे कुछ कुछ हो रहा है भैया. ऐसे ही करो प्लीज भैया.
रमन- तू ज्यादा आवाज़ मत निकाल मेरी सेक्सी बहना, वरना माँ आ जायेगी, तू चुपचाप गेम खेल, मैं तुझे और मजे देता हूँ.
(फिर रमन रिंकी के गले में जोरदार किस करता है और काटता भी है जिससे रिंकी चिल्लाती है और उसकी आवाज कामना के कमरे तक चली जाती है)
रिंकी- आउच… अह्ह्ह्ह… आराम से भैया.
रमन- शहह्ह्ह्ह्ह… ज्यादा आवाज़ नहीं, माँ आ जायेगी.
(तभी कामना उनके कमरे में आती है और रिंकी को रमन की गोद में देखकर चौंक जाती है)
कामना- क्या कर रहे हो तुम दोनों, इतनी आवाजें क्यों निकाल रही है रिंकी तू, क्या कर रहा था रमन?
रमन- कुछ नहीं माँ, रिंकी गेम खेल रही थी तो आउट हो गयी…
रिंकी- हां और मेरे आउट होने पर भैया ने मेरे गले में काट दिया, हा हा हा
कामना- रिंकी ये अच्छी बात नहीं है, भैया की गोद में ऐसे नहीं बैठते, जाओ अपने बेड पर.
रिंकी- क्यों, आप भी तो बैठे थे, मैं क्यों नही बैठ सकती.
कामना- तू मानेगी नहीं मतलब, शैतान लड़की…
रमन- माँ, बैठे रहने दो उसे, उसका मन है, गेम खेलकर उठ जायेगी, आप अपने कमरे में जाओ.
कामना- माँ की बात नहीं मान रहे हो तुम दोनों, तुम्हारे जो मन में वो करो, और सुन रमन आज मेरे कमरे में ही सोना, तेरे कमरे का पंखा ख़राब है, और जल्दी सोने आ जाना.
रमन- ठीक है माँ, मैं आता हूँ.
(कामना चली जाती है और रमन की जान में जान आती है और रिंकी और रमन दोनों हंसने लगते हैं)
रिंकी- कैसे चिल्ला रही थी चुड़ैल की तरह हा हा हा.
रमन- रिंकी ऐसे नहीं बोलते माँ को.
रिंकी- मैं तो बोलूंगी, चुड़ैल, चुड़ैल चुड़ैल…
रमन- रुक तू, ऐसे नहीं मानेगी.
(और रमन रिंकी को कस कर पकड़कर बेड में पटक देता है, और दोनों की कुश्ती शुरू हो जाती है, रिंकी भी रमन को मारने में कोई कसर नहीं छोड़ती, जब रमन रिंकी पर भारी पड़ जाता है तो रिंकी रमन का लण्ड पकड़ लेती है)

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