ज़िद (जो चाहा वो पाया)

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jay
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ज़िद (जो चाहा वो पाया)

Post by jay » 12 Sep 2017 19:59

ज़िद (जो चाहा वो पाया)

मेरा एक फ्रेंड था….उसने हमारे सिटी के सबसे बड़े कॉलेज मे अड्मिशन लिया था….और वहाँ की लड़कियों के बारे मे आकर रोज मुझे बताता…..दिल मे ख्वाहिश पैदा हुई मुझे भी उस कॉलेज मे अड्मिशन लेना है…..पर कैसे…..

कुछ दोस्तो से बात की….उनमे से कुछ समझदार भी थे…..एक ने कहा यार दिल छोटा मत कर मेरे पास एक आइडिया है…तू एक साल के लिए कही जॉब कर ले……जो पैसे कमाएगा….उससे अगले साल अड्मिशन ले लेना….उसका आइडिया मेरे मन को भा गया…..दोस्तो पापा के किसी दोस्त के रेफरेन्स से जॉब भी मिल गयी. कंप्यूटर ऑपरेटर की……सॅलरी भी अच्छी थी….अब दोस्तो आप ही बताओ जिसकी जेब मे एक बार पैसे आने शुरू हो जाए…..उसके लिए पढ़ाई वढ़ाई क्या मायने रखती है….मे भी कुछ ऐसा ही था… नासमझ अपनी और सिर्फ़ अपनी ही मानने वाला…..किसी की सुनता ही कहाँ था…..

पैसे आए तो कुछ शॉंक भी पाल लिए…….नये कपड़े जूते मोबाइल फोन लॅपटॉप…..समझो जितना कमाता गया….उतना साथ-2 खरच करता गया….जो चीज़ मे अपने बॉस के पास देखता…वही मे खरीदेने की कॉसिश करता…..भले ही कम उम्र था…..पर सपने बहुत बड़े-2 थे……एक दिन मे ऑफीस मे बैठा हुआ था कि, एक लड़की हमारे ऑफीस से होते हुए, बॉस के कॅबिन मे गयी….मेरे साथ वाला मेरा कोलीग बोला……”यार इन अमीर जादियों की तो ऐश है…..पता है ये कॉन है……”

मे: नही यार मैने कभी देखा नही पहले……

रमेश: यार अपने बॉस की वाइफ है ना उसकी सहेली है….. साला सब पैसे का खेल है……

मे: चल छोड़ ना यार अपने को क्या लेना….हम यहाँ जॉब करते है…और वो हमे सॅलरी देता है…

तभी हमारा बॉस अपने कॅबिन से बाहर आया…..और मुझे अपने पास आने का इशारा किया….मे उसके पास गया…..” जी बॉस….” उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा……वैसे मे आप को अपने बॉस के बारे मे थोड़ा सा बता देता हूँ……बॉस एक रंगीन मिज़ाज आदमी था….स्टाफ के लोगो के साथ भी काफ़ी फ्रॅंक था. वहाँ काम करते हुए मुझे 6 मंत्स हो चले थे….और इन 6 मंत्स मे मैने उसे कभी स्टाफ एंप्लायी यानि वर्कर्स के साथ उँची आवाज़ मे बात करते हुए नही देखा था…..उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा और मुझे ऑफीस बाहर ले आया….और फिर तरफ घूमाते हुए बोला….”तुषार यार मेरा एक काम करेगा…..”

मे: बॉस आप ऐसे क्यों कह रहे है…..आप बॉस हो कहिए क्या करना है….

बॉस: यार कंपनी रेलेत्ड वर्क नही है……पर्सनल काम है…..

मे: तो क्या हुआ….कहिए ना क्या करना है…..

बॉस: यार तू ये 50000 रुपये रख और मेरे घर चला जा…..वहाँ पर मेरी वाइफ को ये पैसे देना…..और कहना कि सर ने भेजे है…..यार उसे नया मोबाइल लेकर देना था….और मे आज गाओं जा रहा हूँ….और हां अगर पूछे तो कह देना कि, सर से मिलने के लिए कुछ क्लाइंट आए हुए थे….उनके साथ जल्दी मे उनको गाओ जाना पड़ा…..वैसे मैने फोन करके बोल दिया है….और हां अगर कुछ पूछे तो भाई ध्यान रखना…..तू तो जानता है कि मे किस काम से गाओ जा रहा हूँ……

मे: (मुस्कुराते हुए) ओके सर मे समझ गया…..

बॉस: चल अब तू जल्दी से निकल और मे भी निकलता हूँ……

उसके बाद मैने अपनी बाइक उठाई….और बॉस के घर की तरफ चल पड़ा….दोस्तो मे पहले भी कई बार बॉस के घर जा चुका था…..पर कभी उनकी वाइफ को नही देखा था….क्योंकि ज़्यादातर मे तभी उनके घर गया था….जब बॉस घर पर होते थे…..और वो मुझसे अपने उस रूम मे मिलते थे… जो उन्होने कंपनी मॅटर्स के डिस्कशन के लिए बना रखा था…….खैर जैसे ही मे उनके बड़े से आलीशान घर के बाहर पहुँचा तो वहाँ खड़े सेक्यूरिटी गार्ड ने मुझे देखते ही गेट खोल दिया….क्योंकि मे पहले भी कई बार आ चुका था…..मैने बाइक अंदर की और सेक्यूरिटी गार्ड के कॅबिन के पास ही खड़ी कर दी तो वो गार्ड मुझसे बोला……

गार्ड: आप यहाँ पर सर तो ऑफीस जा चुके है…….?

मे: हां उन्हो ने ही भेजा है….कुछ पैसे दिए है….उनकी वाइफ को देने है…..

गार्ड: ओके सर आप जाए……

मे अंदर गया और बाहर के मेन डोर की बेल बजाई….तो थोड़ी देर बाद एक 33 से 38 साल के बीच की अधेड़ औरत ने डोर खोला…..उसका नाम सरोज था…..वो भी मुझे पहचानती थी….उसने मुझे अंदर आने को कहा….”मेडम है क्या घर पर…..” मैने हाल मे लगे हुए सोफ्फे पर बैठते हुए कहा….
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(वक्त का तमाशा running)..
(दास्तान ए चुदाई (माँ बेटी बेटा और किरायेदार ) complete) .. (सातवें साल की खुजली complete)
(एक राजा और चार रानियाँ complete).............(माया complete...)-----(तवायफ़ complete).............
(मेरी सेक्सी बहनें compleet)........(दोस्त की माँ नशीली बहन छबीली compleet)............(माँ का आँचल और बहन की लाज़ compleet)..........(दीवानगी compleet )....... (मेरी बर्बादी या आबादी (?) की ओर पहला कदमcompleet)........(मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग)........


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(ननद की ट्रैनिंग compleet)..............( सियासत और साजिश)..........(सोलहवां सावन)...........(जोरू का गुलाम या जे के जी).........(मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन)........(कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास)........(काले जादू की दुनिया)....................(वो शाम कुछ अजीब थी)

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Re: ज़िद (जो चाहा वो पाया)

Post by jay » 12 Sep 2017 20:00

“हां अंदर है अपने रूम में मे अभी बुला कर लाती हूँ…..” वो औरत अंदर चली गयी….गर्मियों के दिन थे…..सुबह 11 बजे ही धूप इतनी तेज थी कि गरमी से मेरा बुरा हाल था…..पर एसी की ठंडी हवा से कुछ राहत पहुँची…….थोड़ी देर बाद एक औरत (बॉस की वाइफ) हॉल मे एंटर हुई….उस समय उसकी एज 35 साल की थी……एक लड़का था…..जो उस समय शिमला के एक स्कूल मे पढ़ रहा था…और वही होस्टल मे रहता था…..बॉस की वाइफ का नाम नेहा है……

उस दिन मैने पहले बार नेहा को देखा था….. हाइट 5,7 इंच के करीब थी…..रंग हलका सा सांवला था…..बूब्स 36 सी साइज़ के थे…..उसने उस समय ब्लू कलर की शॉर्ट नाइटी पहन रखी थी…..पर ऊपर उसने मॅचिंग गाउन पहना हुआ था….वो हॉल मे आई “जी कहिए……” उसने मेरे सामने सोफे पर बैठते हुए कहा….उसने अपनी एक टाँग उठा कर दूसरी टाँग पर जैसे ही रखी….उसका गाउन उनकी टाँगो से सरक गया……एक पल के लिए ही सही पर मे उसके साँवली रंग की चमकती हुई जाँघो को देख कर एक दम से सन्न रह गया….मैने एक पल के लिए उसकी जांघों को देखा और फिर सर को नीचे झुका लिया..

वो मेरी हालत समझ चुकी थी…..इसलिए उसके होंठो पर मुस्कान फैल गयी…और अपने गाउन को सही करने लगी…..मे एक दम से खड़ा हुआ अपने जेब से पैसे निकाल कर उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा…. “ जी वो सर ने पैसे भेजे थे……”

उसने मेरे हाथ से पैसे लिए…..और सोफे पर एक साइड मे रखते हुए सरोज को आवाज़ लगाई……” क्या लोगे चाइ या ठंडा…..” उसने फिर से एक बार मेरी तरफ मुस्करा कर देखते हुए कहा….

.”जी सिर्फ़ पानी चलेगा….”

नेहा: कॉन से क्लाइंट आए हुए थे आज…..

मे: जी मे नही जानता…..5-6 लोग थे….शायद कोई नये पार्टी थी…

नेहा: ओके…..(इतने मे सरोज हॉल मे आई……) सरोज एक ग्लास पानी लेकर आओ….(सरोज पानी लेने वापिस चली गयी….) इतना भी क्या अर्जेंट काम था….सुबह बोल कर गये थे कि, साथ मे शॉपिंग के लिए चल्लेन्गे. और अब खुद 5 दिन के लिए बाहर जा रहे है….अच्छा एक बात बताओ तुम्हे तो मोबाइल्स के बारे मे काफ़ी नालेज होगी……किस फोन के फीचर्स अच्छे है और किसके नही…..

मे: जी थोड़ी बहुत……

नेहा: मुझे तो वो भी नही…..अच्छा एक काम करो…..तुम मेरे साथ चलो….और मुझे एक अच्छा से मोबाइल खरीदने मे हेल्प कर दो……

मे: जी मे…..पर मुझे ऑफीस भी जाना है……

नेहा: कोई बात नही मे तुम्हारे बॉस को कह दूँगी…..तुम बैठो मे अभी रेडी होकर आती हूँ…

उसके बाद वो उठ कर अंदर चली गयी…..सरोज पानी लेकर आई…..मैने पानी पी कर खाली ग्लास उसे जल्दी से थमा दिया….और उसके जाने के बाद ही मैने बॉस को कॉल करी……”हेलो हां बोलो तुषार क्या हुआ… मेडम नाराज़ तो नही है…..”

मे: नाराज़ तो नही है……पर मुझे मार्केट मे साथ चलने के लिए कह रही है…..

बॉस: क्यों क्या हुआ…..

मे: वो बोल रही है कि, मे उन्हे मोबाइल खरीद कर दिला दूं…..

बॉस: हाँ हां दिलवा देना ना यार वैसे उसे मोबाइल के बारे मे बहुत कम नालेज है….अच्छा यार मे थोड़ी देर बाद देल्ही पहुँच जाउन्गा…..तो एरपोर्ट पर पहुँचने के बाद मेरा फोन ऑफ हो जाएगा…..कुछ काम है तो बोल…..

मे: नही बॉस अभी और कोई काम नही है……

बॉस: चल ठीक है मे फोन रखता हूँ…..

मे वही बैठा इधर उधर देख रहा था……थोड़ी देर बाद नेहा हॉल मे दाखिल हुई तो मे एक दम से उसे देखता ही रह गया…..नेहा मेडम ने रेड कलर की बहुत ही हॉट साड़ी पहनी हुई थी….उसकी चुचियाँ उसके रेड कलर के ब्लाउस मे एक दम कसी हुई थी…..वो हॉल मे आई और हॉल मे लगे हुए आयने के सामने खड़े होकर अपने आप को देखते हुए बोली….”चले तुषार…….”

उनकी पीठ मेरी तरफ थी……आज शायद पहली बार किसी औरत को इस तरह से देख रहा था….मेरी पेंट मे अब मेरा लंड एक दम से अकड़ चुका था….तभी ऊपर एसी से आ रही हवा से उनकी साड़ी का पल्लू एक दम से सरक गया..

उसी पल वो मेरी तरफ मूडी थी…..जैसे ही उनके कंधे से उनके साड़ी का पल्लू सरका….उसके मम्मे जो उसके ब्लाउस मे बड़ी मुस्किल से आ रहे थे……आधे से ज़्यादा बाहर झलक रहे थे….उन्हे देख कर ऐसा लग रहा था…..मानो जैसे बाहर आने के लिए मचल रहे हो….सिचुयेशन ऐसी हो गयी थी कि, वो अपनी इस हालत पर शरमा भी रही थी…..और हंस भी रही थी….उसने जल्दी से अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक किया…..और हम बाहर आ गये…..बाहर आकर उसने अपनी कार निकाली, और हम दोनो उसमे बैठ कर मार्केट मे आ गये……

अब दोस्तो क्या बताऊ……उसने मुझे इतना घुमाया इतना घुमाया कि, पूछा मत, कभी इस शॉप पर तो कभी उस शॉप पर बहुत देर घुमाने और धक्के खाने के बाद आख़िर मॅम को फोन पसंद आ ही गया. मोबाइल खरीदने के बाद नेहा मुझसे बोली…..”तुषार मोबाइल तो खरीद लिया…चल अब किसी रेस्टोरेंट मे चल कर लंच करते है…….”

भूख तो मुझे भी लगी थी…..इसलिए हम एक रेस्टोरेंट मे गये और वहाँ चल कर लंच किया….दोपहर के 2 बज रहे थे…..और लंच के बाद हम उनके घर वापिस जा रहे थे….मे उनके साथ फ्रंट सीट पर ही बैठा हुआ था…..”तुषार तुम्हे विंडो इनस्टॉल करनी आती है……..? “ उसने मेरी तरफ देखते हुए पूछा…..

मे: जी आती है……

नेहा: तो मेरे लॅपटॉप की विंडो कर दो ना…..करप्ट हो गयी है……

मे: जी कर दूँगा…..

उसके बाद हम उनके घर पहुँचे तो वो मुझे सीधा अपने बेड रूम मे ले गयी…..उसने टेबल पर अपना लॅपटॉप खोला और मुझे चेयर पर बैठाते हुए बोली…..”तुषार ध्यान से करना…इसकी ए ड्राइव में मेरा बहुत इंपॉर्टेंट डेटा है…..उसे ग़लती से डेलीट मत कर देना….मे शवर लेकर आती हूँ…..” उसके बाद वो शवर लेने के लिए बाथरूम मे घुस गयी……मे विंडो इनस्टॉल करने लगा…..करीब 20 मिनिट बाद जब वो बाहर आई तो, उसने फिर से वही नाइटी पहनी हुई थी….और ऊपर गाउन पहना हुआ था.

नेहा: हां तुषार हो रही है विंडो इनस्टॉल…..

मे: जी बस 15-20 मिनिट और लगेंगे…..

नेहा: अच्छा मे किचन मे होकर आती हूँ…….

ये कह कर नेहा रूम से बाहर निकल गयी…..दर्सल विंडो तो लगभग इनस्टॉल हो चुकी थी…..पर मे ए ड्राइव मे पड़े हुए इंपॉर्टेंट डेटा को देखना चाहता था…..कि उसमे क्या है….क्योंकि जहाँ तक मे जानता था….वहाँ तक मॅम का बिज़्नेस से कोई लेना देना नही था….विंडो इनस्टॉल हुई तो मेने ए ड्राइव के छानबीन शुरू कर दी…..और जल्द ही मेडम का इंपॉर्टेंट डेटा सामने आ गया….. “क्या यार ये आज कल की औरतें तो आदमियों से भी ज़्यादा ठर्की होती है….एक से बढ़ कर एक पॉर्न वीडियोस भरे हुए थे……लगभर 200 जीबी हार्डिस्क मे पॉर्न मूवीस ही थी……

उसमे एक वीडियो पर मेरा ध्यान गया….टाइटल था माइ सेल्फ़ शॉट (नेहा) और जैसे ही मैने वो क्लिप स्टार्ट की तो मे एक दम से हैरान रह गया….नेहा मॅम बेड पर लेटी हुई थी….उनके बदन पर एक भी कपड़ा नही था…..उनके मम्मे जो सुबह मैने ब्लाउस मे कसे हुए देखे थे…वो मेरे आँखो के सामने थे…..क्या गजब के मम्मे थी….उसमे नेहा अपनी चूत की फांको के बीच मे अपनी उंगलियों को रगड़ते हुए सेक्सी आवाज़ें निकाल रही थी…
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Kamini
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Re: ज़िद (जो चाहा वो पाया)

Post by Kamini » 13 Sep 2017 13:53

mast update

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jay
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Re: ज़िद (जो चाहा वो पाया)

Post by jay » 13 Sep 2017 19:13

Kamini wrote:
13 Sep 2017 13:53
mast update
thanks dear
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Re: ज़िद (जो चाहा वो पाया)

Post by jay » 13 Sep 2017 19:14

उसमे एक वीडियो पर मेरा ध्यान गया….टाइटल था माइ सेल्फ़ शॉट (नेहा) और जैसे ही मैने वो क्लिप स्टार्ट की तो मे एक दम से हैरान रह गया….नेहा मॅम बेड पर लेटी हुई थी….उनके बदन पर एक भी कपड़ा नही था…..उनके मम्मे जो सुबह मैने ब्लाउस मे कसे हुए देखे थे…वो मेरे आँखो के सामने थे…..क्या गजब के मम्मे थी….उसमे नेहा अपनी चूत की फांको के बीच मे अपनी उंगलियों को रगड़ते हुए सेक्सी आवाज़ें निकाल रही थी…


मेरा हाथ कब मेरे पेंट के ऊपर से मेरे लंड पर आ चुका था….मुझे पता नही चला….पर मे डर भी रहा था कि, अचानक से वो अंदर ना जाए….इसलिए मैने वॉल्यूम को म्युट कर दिया…और उस क्लिप को देखते हुए अपने लंड को मसलने लगा…..मे नेहा के बदन को देख कर इस कदर मदहोश हो गया था कि, मुझे ये भी ख़याल नही रहा मे कहाँ हूँ और किस हाल मे हूँ….तभी एक दम से डोर खुला तो मेने एक दम चोन्कते हुए डोर की तरफ देखा…..दूर नेहा खड़ी हक्कीबक्की मुझे देख रही थी… लॅपटॉप की स्क्रीन पर कॉन सी क्लिप चल रही है…..वो उसे दिखाई नही दे रही थी…..मैने जल्दी से मूवी प्लेयर ऑफ किया और ए ड्राइवर को क्लोज़ कर दिया……

मे अब अपने आप पर बहुत शर्मिंदा हो रहा था…..मे एक दम से चेयर पर से उठा….मुझे ऐसा लग रहा था कि, अब तो मेरी गान्ड ज़रूर फटेगी…..अगर इसने बॉस को कुछ उल्टा सीधा बोल दिया तो मेरा क्या होगा……” वो वो आइ आम रियली सॉरी….वो मे….” मैने अपने सर को झुकाते हुए कहा….मेरी पेंट मे अभी भी उभार सॉफ नज़र आ रहा था….मेरी हालत देख कर वो मुस्कराने लगी….और मेरे पास आते हुए बोली……”इट्स ओके तुषार…..तुमने कॉन सा गुनाह कर दिया है……ये सब तो आज कल कामन सी बात है” मैने नेहा के बात सुन कर राहत के साँस ली….

मे: अच्छा अब मे चलता हूँ…….

नेहा: ओक तुषार बाइ……(मे जैसे ही उसके रूम से बाहर जाने लगा तो उसने मुझे आवाज़ देकर रोका. ) तुषार…..

मे: जी मॅम…..

नेहा: (कुछ पल सोचने के बाद) डू यू गिव मी आ फेवर ?

मे: यस ऑफ कोर्स……कहिए ना……

नेहा: तुषार अब जब तुम ये सब देख ही चुके हो तो क्या तुम मेरे लिए नये वीडियोस अरेंज कर दोगे…..वो नेट से डाउनलोड करने मे बहुत टाइम वेस्ट होता है…..और मुझे अच्छी साइट्स भी नही पता.

मे: जी मे कर दूँगा……

नेहा: अच्छा एक काम करो……कल तो सनडे है ना…..कल तुम घर आ जाना….और नेट से कुछ नये वीडियोस डाउनलोड कर देना…..

मे: जी ओके…….

मे रूम से बाहर आया…..और फिर घर से बाहर निकल कर अपनी बाइक उठाई….और अपने घर की तरफ चल पड़ा…..सारे रास्ते और घर पर सिर्फ़ यही सोचता रहा कि, कुछ ही अवर्स मे नेहा मॅम के कितने करीब आ गया हूँ…..कि उन्होने खुद मुझसे पॉर्न मूवीस डाउन लोड करने को कहा….हो सकता है वो गदराया हुआ माल मेरे हाथ लग जाए…… फिर दिमाग़ मे ख़याल आता…कि नही यार हो सकता है वो सिर्फ़ ओपन माइंडेड औरत हो…और सिर्फ़ अपनी ठरक पूरी करने के लिए नये वीडियोस डाउनलोड करने के लिए कह रही हो…..

खैर उस रात यही सोचते-2 मे खाना खा कर सो गया…..अगली सुबह उठा तो 8 बजे चुके थे…. मे फ्रेश हुआ और नीचे आकर मम्मी पापा और भाई के साथ नाश्ता किया……नाश्ते के बाद मे ऊपर अपने रूम मे आकर टीवी देखने लगा…तभी मेरा मोबाइल बजने लगा….मैने कॉल पिक के….”हेलो जी कॉन…”

नेहा: तुषार मे बोल रही हूँ नेहा….

मे: मॅम आप…? आपको मेरा नंबर कहाँ से मिला…..

नेहा: वो इनके पुराने वाले सेल फोन मे सेव था तुम्हारा नंबर….अच्छा तुम आ रहे हो ना….

मे: जी मॅम थोड़ी देर मे पहुँचता हूँ….

नेहा: अच्छा सुनो…..आज बाइक से मत आना…..

मे: क्यों क्या हुआ….बाइक से नही आउन्गा तो कैसे आउ….

नेहा: यार कोई ऑटो पकड़ कर आ जा ना….

मे: ठीक है मॅम मे देखता हूँ……

उसके बाद जैसे ही मैने फोन काटा तो सोचने लगा कि क्या मॅम ने मुझे यार कहा था….एक दिन की मुलाकात मे ऐसा क्या हो गया….जो मेरे बॉस की वाइफ मुझे यार कह कर बुलाने लगी थी…खैर मे जल्दी से तैयार हुआ, और घर मे यह कह के किसी दोस्त के घर जा रहा हूँ…..घर से निकल आया…बाहर रोड पर आकर एक ऑटो पकड़ा और बॉस के घर की तरफ चल पड़ा….ऑटो मे वहाँ पहुँचते-2 हाफ अन अवर लग गया था…..जैसे ही मे बॉस के घर के बाहर पहुँचा तो मुझे ये देख कर थोड़ा अजीब सा लगा कि, आज गेट पर सेक्यूरिटी गार्ड नही था….

मे अभी डोर बेल बजाने की सोच ही रहा था कि, सामने से हॉल का डोर खुला और नेहा बाहर आई. उसने आकर गेट खोला और मे अंदर आ गया…..”आज गार्ड नही है कहाँ गया….” मैने अंदर आते हुए पूछा…..”वो किसी काम से भेजा है उसे कुछ समान लाना था…..तुम अंदर आओ…” नेहा ने गेट बंद करते हुए कहा…..फिर मे उसके पीछे अंदर आ गया…..हॉल के अंदर पहुँचते ही नेहा ने हॉल के डोर को भी बंद कर दिया….ये सब मुझे अजीब सा लग रहा था…..पर दिल के किसी कोने से ये आवाज़ आ रही थी कि तुषार आज तेरे मन की मुराद पूरी होने वाली है शायद…..

नेहा सीधा मुझे अपने बेड रूम मे ले गयी…..उसका बेडरूम भी काफ़ी बड़ा था….बेड के साथ -2 सोफा सेट भी लगा हुआ था…..उसने मुझे सोफे पर बैठने के लिए कहा…..”तुम बैठो मे तुम्हारे लिए जूस लेकर आती हूँ….” नेहा ने बाहर की ओर जाते हुए कहा….थोड़ी देर बाद नेहा दो ग्लास मे जूस लेकर आई….और एक ग्लास मुझे पकड़ाते हुए, मेरे साथ बैठ गयी…..

मे: आज सरोज भी नही है क्या…..?

नेहा: है ना पीछे अपने रूम मे गयी हुई है…..इस समय वो चली जाती है…आराम करने के लिए….

मे: ओह्ह अच्छा…..लाइए मे मूवीस डाउनलोड कर देता हूँ….

नेहा ने अपना ग्लास सामने टेबल पर रखा और अपना लॅपटॉप वही उठा लाई……उस समय वाईफ़ाई जैसी सर्विस नही थी…….पर नेट की वाइयर काफ़ी लंबी थी….इसलिए वहाँ पर लॅपटॉप से कनेक्ट करने मे कोई परेशानी नही हुई….मैने उन साइट्स को ओपन करना शुरू किया……जिन्हे मे मोस्ट्ली यूज़ करता आ रहा था.. . जैसे -2 वो साइट्स ओपन होती जा रही थी….नेहा लॅपटॉप मे देखने के लिए मेरे नज़दीक खिसकती जा रही थी….”हां ये वाली ये डाउनलोड हो सकती है…..” उसने एक क्लिप पर हाथ रखते हुए कहा…. उस वीडियो के पोस्टर मे एक औरत पैरो के बल नीचे बैठी हुई थी…..उसने हाइ हील सॅंडल पहने हुए थी. और वो एक मोटे लंड के सुपाडे पर मुँह मे लिए हुए थी……

मे: है तो देसी बंदरिया…..लेकिन शॉंक तो देखो अंगरेज़ों वाले….(मेने मन ही मन नेहा के बारे मे सोचा) हां हो जाएग……
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