अधूरी हसरतें

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Rohit Kapoor
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Re: अधूरी हसरतें

Post by Rohit Kapoor » 03 Nov 2017 18:57

शुभम अपनी मां के सामने एकदम निर्वस्त्र खड़ा था उसका लंड पूरी तरह से टन टनाकर छत की तरफ देख रहा था। निर्मला के कमरे का यह नजारा बेहद कामुकता से भरा हुआ था। इस द्रश्य की दोनों ने शायद कल्पना भी नहीं की थी निर्मला तो कभी सोच भी नहीं सकती थी कि उसकी जिंदगी में ऐसा भी पल आएगा,,,, कि वह अपने बेटे के दमदार लंड को इतने करीब से देख सकेगी।
हांलाकी शुभम ेत तो इस तरह के नजारे कि सिर्फ कल्पना ही कीया था और कल्पना में वह ऐसे नजारों में खुदको बहुत हिम्मत वाला मर्द समझता था जो कि अपनी मां के साथ सब कुछ करने की पहल करता था लेकिन कल्पना से वास्तविकता बिल्कुल अलग थी,,,,; इस समय शुभम अपनी मां के सामने नग्नावस्था मैं घबरा रहा था लेकिन उत्तेजना उसके बदन में पूरी तरह से छाई हुई थी लेकिन किसी भी बात के लिए पहल कर पाना उसके लिए मुशिकल ं हुए जा रहा था।
लेकिन कुछ भी हो जो भी होना था उसमें दोनों की इच्छा शामिल नहीं थी लेकिन पहन कर पाने में दोनों आनाकानी ही कर रहे थे मर्यादाओं की दीवार के बीच इस लुका छिपी के खेल में मजा तो दोनों को आ रहा था लेकिन आगे बढ़ने की हिम्मत किसी में नजर नहीं आ रही थी लेकिन अपनी मंजिल को पाने के लिए किसी ना किसी को तो आगे बढ़ना ही था निर्मला पूरी तरह से चुदवासी हो चुकी थी,,,, निर्मला बरसों से प्यासी थी उसे अपने बेटे जैसे ही दमदार लंड की जरूरत थी इसलिए तो वह ललचाई आंखों से अपने बेटे के लंड को देखे जा रही थी।
शुभम भी जवान हो रहा था औरतों के बदन के भूगोल के बारे में पूरी तरह से जानना चाहता था। और इस समय उसके लिए भूगोल की किताब खुद उसकी मां ही थी। जिस के बदन का हर एक पन्ना वह अपने हाथों से पलट कर उस से रूबरू होना चाहता था। भजन की किताब के हर एक पन्ने को अपनी आंखों से अपने होठों से उसके हर एक शब्द को पढ़ना चाहता था। इसलिए तो आज वह इतनी हिम्मत दिखा पाया था।

निर्मला अपने बेटे के लंड को एकटक देखते हुए कुछ पल यूं ही गुजार दी दोनों के बीच कोई भी बातचीत ना हो पाए शुभम था कि अपनी नजरें इधर उधर फेर कर अपनी भावनाओं पर काबू किए हुए था। और उसका खड़ा लंड था कि निर्मला की भावनाओं को और भी ज्यादा भड़का रहा था। कुछ समय तक यूं ही एक टक अपने लंड की तरफ अपनी मां को देखते हुए शुभम से रहा नहीं जा रहा था इसलिए वह बोला।

मम्मी मुझे दर्द हो रहा है। ( शुभम बात को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से बोला था और उसकी बात सुनकर जैसे निर्मला नींद से जागी हो इस तरह से हड़बड़ाते हुए बोली।)

हं हं,,,,,, तततत,,,, तु,,,,, तू मुझे बता की लगी कहां पर है कहां पर दर्द हो रहा है। मैं उस जगह पर दवा लगाकर मालिश कर देती हूं।


मम्मी बस तुम रहने दो मैं दवा लगा लेता हुं मुझे शर्म आ रही है।

धत्त,,,,,,, पागल है तू अब शर्माने की क्या जरूरत है बंद कमरे में हम दोनों के सिवा और कौन है जो बेवजह शर्मा रहा है।
अब जल्दी से मुझे बता किस जगह पर दवा लगाना है वरना मैं तेरे पूरे लंड,,,,,,,,, पर ( अपनी बात को संभालते हुए) इस पर दवा लगा दूंगी,,,,,
( उन मादक माहौल का असर निर्मला पर पूरी तरह से छा चुका था इसलिए अनजाने में ही उसके मुंह से लंड शब्द निकल गया था। इस तरह के शब्द को सुनकर शुभम तो हैरान रह गया क्योंकि उसे आशा नहीं थी कि उसकी मां के मुंह से इस तरह के सब देख लेंगे इसलिए तो वह अपनी मां के मुंह से लंड शब्द सुनकर एकदम उत्तेजित हो गया। वैसे सही मायने में निर्मला को दी ऐसे शब्द बोलने की आदत तो थी नहीं,,, और ना ही कभी उसके मुंह से इस तरह की अश्लील शब्द निकले थे लेकिन आज उत्तेजना की वजह से वह अपने जज्बात पर कंट्रोल नहीं कर पाई और उसके मुंह से इस तरह की अश्लील शब्द निकल गए लेकिन यह शब्द बोलते हुए उसके बदन में भी झुनझुनी सी फैल गई थी। अपनी मां की यह बात सुनकर शुभम मन ही मन सोचने लगा कि अच्छा ही होता कि अगर,, मम्मी पूरे लंड पर दवा लगाकर मालिश करती तो उसे बेहद मजा आ जाता। इसलिए वह बहाना बनाते हुए बोला।

वैसे तो मम्मी पूरा लंड ही दुख रहा है लेकिन चोट इस जगह (उंगली से लंड की फूली हुई नस की तरफ इशारा करते हुए जो की चोट की वजह से नहीं बल्कि उत्तेजना की वजह से फुली हुई थी।) पर लगी है।

( शुभम के उंगली के द्वारा निर्देश की हुई जगह पर देखते हुए निर्मला बोली।)

ओहहहहह,,,, तभी इधर की नस फूली हुई है ला मैं दवा लगा देती हूं,,,( इतना कहते हुए वह मुंव की ट्यूब को दबाकर उसमें से दवा निकालने लगी, और दवा को ऊंगली पर थोड़ा सा निकालकर) थोड़ा मेरे करीब तो आ,,,
( शुभम अपनी मां की बात मानते हुए थोड़ा सा और करीब आ गया अब शुभम के लंड और निर्मला के फोटो के बीच सिर्फ आधे पेट की दूरी थी निर्मला अपने बेटे के लंड के बिल्कुल करीब थी,,, निर्मला उत्तेजना से एक दम भर चुकी थी। निर्मला अब अपने बेटे के लंड पर दवा लगाना शुरू की और जैसे ही निर्मला की उंगलियां शुभम के खड़े लंड पर स्पर्ष हुई तो उस की गर्माहट उसे पूरी तरह से गर्म कर गई।
वह अपनी नाजुक नाजुक उंगलियों को हल्के हल्के से अपने बेटे के टाइट लंड पर फैिसलाने लगी,,,,, निर्मला तो कभी सोची भी नहीं थी कि वह कभी भी अपने बेटे के लंड को इस तरह के सह लाएगी भले ही दवा लगाने के ही बहाने ही सही। अपनी मां के नाजुक नाजुक उंगलियों का स्पर्श शुभम को अपने लंड पर होते ही उसका बदन पूरी तरह से गंनगना गया। उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसका आईडिया काम कर गया था। निर्मला भी बड़े मजे लेकर अपने बेटे के लंड पर दवा लगा रही थी। शुभम की सांसे उत्तेजना के मारे उखड़ने लगी थी वह सिर्फ कल्पना में ही इस दृश्य को देख कर मजे लिया करता था लेकिन आज हकीकत में इसकी कल्पना तादृश्य साकार हो रही थी। उत्तेजना के मारे उसका गला सूख रहा था ठीक से वह अपना थूक भी नहीं निकल पा रहा था। एक औरत के और वह भी उसकी खुद की मां के द्वारा लंड पर मालिश करने की वजह से लंड का कड़क पन और भी ज्यादा बढ़ गया था। उंगली का स्पर्श होने पर ही निर्मला को इसका आभास हो गया था कि उसके बेटे का लंड किसी लोहे की छड़ की तरह ही एकदम कड़क है।
शुभम आप बड़े ध्यान से अपनी मां की तरफ देख रहा था जो कि एकदम मस्ती से उसे दबा लगा रही थी और यह भी देख रहा था की उत्तेजना के मारे उसकी मां का चेहरा एकदम लाल टमाटर की तरह हो गया था उसका मुंह खुला का खुला था तभी शुभम की नजर निर्मला के चेहरे से नीचे की तरफ गई तो वह हैरान रह गया। क्योंकि निर्मला ने गाउन पहन रखी थी और वह भी लॉकट और थोड़ा सा नीचे झुक कर बैठने की वजह से उसकी आधे से भी ज्यादा चूचियां गांऊन से बाहर झांक रही थी। जिस पर नजर पड़ते ही शुभम की हालत और खराब होने लगी उसके जी में तो आ रहा था कि वह अपने दोनों हाथों में अपनी मां की चुचियां भरकर दबाए उसे मसले
लेकिन वह अपने मन को मसोस कर रह गया पर लगातार अपनी नजरें अपनी मां की चुचियों पर ही गडाए रहा इससे उसकी उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ती जा रही थी।
निर्मला भी मस्ती के साथ सिर्फ अंगुलियों से लंड को दवा के बहाने मसले जा रही थी। लंड पर भी चुदासपन का खुमार छाया हुआ था। तभी तो औरत के नाजुक ऊंगलियो का स्पर्श पाकर एकदम टनटना जा रहा था।
कुछ देर तक निर्मला यूं ही उपर ही ऊपर उंगलियों से दवा लगाती रही,,, लेकिन इतने से निर्मला का मन मानने वाला नहीं था बरसों के बाद तो वह चीज जिसके लिए तड़प रही थी वह आज वह चीज उसके हाथों में थी इसलिए इसका पूरा मजा लेना चाहती थी। वह अपने बेटे के लंड को पूरी तरह से अपनी मुट्ठी में भींचना चाहती थी। इसलिए वह मुस्कुराते हुए अपने बेटे की तरफ देखी और अपने बेटे की नजरों को अपने ही बदन पर टिका हुआ देखकर उसे तो पहले कुछ समझ में नहीं आया लेकिन जब उसने अपनी हालत पर गौर की तो हैरान रह गई क्योंकि उसे समझ में आ गया था कि सुभम उसकी बड़ी बड़ी चुचीयों को देख रहा था जो कि गांऊन से बाहर झांक रही थी। इतना समझ में आते ही निर्मला शर्मा गई लेकिन उसके बदन में भी चुदासपन की जो लहर दौड़ रही थी उसकी वजह से उसने ना तो शुभम को कुछ कहीं और ना ही अपनी चूचियों को व्यवस्थित करने की कोशिश ही की। उसे ना जाने क्यों इसमें मजा आने लगा आज पहली बार उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि अपना बदन दिखाने में कितनी आनंद की अनुभूति होती है। उत्तेजना के मारे निर्मला का भी गला सूखने लगा एक तो उसकी उंगलियां अपने ही बेटे के खड़े लंड को स्पर्श कर रही थी और दूसरी तरफ उसका बेटा था कि गांऊन से बाहर झांकती हुई बड़ी बड़ी चूचीयो को प्यासी नजरों से देखे जा रहा था ऐसा आभास हो रहा था कि अगर निर्मला इजाजत दे दे तो वह अपने दोनों हाथों से चूचियों को पकड़कर उसे मुंह में ले कर पीना शुरु कर दे।
शुभम भी थोड़ा थोड़ा डीठ हो गया था। वह बिना डरे मंत्रमुग्ध सा अपनी मां की चुचियों को देखे जा रहा था उसे इस बात का भी डर महसूस नहीं हो रहा था क्या करुं कि मां को पता चल गया तो वह क्या कहेगी। लेकिन कमरे के अंदर का माहौल पूरी तरह से बदल गया था अब ना तो निर्मला ही कुछ कहने वाली थी और ना ही शुभम दोनों एक दूसरे के अंगों से मजा ले रहे थे फर्क सिर्फ इतना था कि शुभम अपनी नजरों से अपनी मां की चुचियों को मसल रहा था और निर्मला अपने नाजुक नाजुक अंगुलियों से अपने बेटे के कठोर लंड का मजा ले रही थी।
निर्मला की बुर इतना ज्यादा पानी छोड़ रही थी कि उसकी पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी जिसे वह बार बार अपने हाथ लगाकर एडजस्ट कर ले रही थी। निर्मला को इस बात का डर लग रहा था कि अगर वह सुबह से कुछ बोलेगी तो वह कहीं प्यासी नजरों से उसकी चूचियों को घुरना ना बंद कर दे,,,, क्योंकि पहली बार वह किसी के इस तरह से अपने बदन को घूरने का आनंद ले रहीे थी। निर्मला अपने बेटे के लंड को पूरी तरह से अपनी मुट्ठी में भरकर हिलाना चाहती थी इसलिए कुछ देर बाद वह शुभम से बोली,,,,

बेटा तेरे पूरे लंड में दर्द हो रहा है तो क्यों ना तेरे पूरे लंड में ही दवा लगा दुं इससे तुझे राहत भी मिल जाएगी।

( शुभम को तो मजा आ रहा था उसे भला एतराज क्या हो सकता था लेकिन उत्तेजना के मारे उसका गला सूख रहा था जिस वजह से वह अपनी मां को कुछ बोल भी नहीं सका लेकिन उसने अपनी नजरों को अपनी मां की चुचियों पर से हटाया नहीं और डंटा रहा उसको नजर भर कर देखने के लिए,,,,, निर्मला को लगा था कि शुभम शायद शरमाकर अपनी नजरों को हटा ले लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ तो वह भी अंदर से और भी ज्यादा आनंदित हो गई,,, आखिरकार उसे भी तो अपना बदन दिखाने में आज मजा आ रहा था। अपने बेटे का जवाब सुने बिना ही वह फिर से मुंव में से थोड़ा सा दवा निकालकर उंगली पर लगाई और उंगली से उसने अपने बेटे के पूरे लंड पर लगाना शुरु कर दी,,,
निर्मला को तो पूरी तरह से खुला दोर मिल चुका था वह अब अपनी मुट्ठी में भरकर दवा लगाने के बहाने अपने बेटे के लंड को मुट्ठीयाने लगी वैसा उसनें आज तक अपने पति के लंड को भी नहीं मुट्ठीयाई थी। इस तरह से तो शुभम को भी बेहद आनंद की प्राप्ति होने लगी और उसके लंड से लार की तरह पानी निकलने लगा । निर्मला से रहा नहीं जा रहा था वह अपने बेटे के लंड को आगे पीछे करते हुए बोली।


बेटा तू तो सच में बड़ा हो गया है मैं तो तुझे अब तक छोटा बच्चा ही समझती थी।

इस बार शुभम अपनी मां की बात सुनकर बोला।


ऐसा क्यों कह रही हो मम्मी मैं तो अभी भी छोटा हूं।


तू भले ही अभी भी छोटा है लेकिन तेरा हथियार काफी बड़ा हो गया है मुझे तो यकीन ही नहीं आता कि यह तेरा है।
( निर्मला ऊन्मादक स्थिति में अब थोड़ा-थोड़ा खुलने लगी थी। जिस लंड को अपनी कल्पनाओं में देख कर मजा लेती थी हालांकि उसनें एक बार अपने बेटे के खड़े और दमदार लंड को देख ली थी जिसकी बदौलत उसकी आंखों के सामने हमेशा उसके बेटे का लंड नाचते रहता था उसे आज अपने हाथों में लेकर उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे पूरी दुनिया उसकी हथेली में सिमट आई हो वह बेहद खुश थी और खुश से ज्यादा दुआ चुदवासी थी,,,, उसका मन तो ऐसा कर रहा था कि अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में डलवा कर जम कर चुदवाए. । ऐसा हो भी सकता था बस एक इशारे की ही जरूरत थी लेकिन दोनों में से यह ईसारा कौन करेगा यह तो किसी को भी पता नहीं था। निर्मला चाहती तो उसकी बुर की प्यास अभी ही अपने बेटे के लंड से बुझा सकती थी लेकिन इतना कुछ करने के बावजूद भी शायद इतनी हिम्मत ना तो निर्मला मे थी और ना ही शुभम में,,, बस दोनो अपने बदन कि प्यास को और ज्यादा बढ़ाते जा रहे थे। सभी शुभम अपनी मां के सवाल का जवाब देते हुए बोला।


ऐसा क्यों कह रही हो मम्मी क्या ऐसा किसी का नहीं होता,,,,


होता है लेकिन शायद तेरे जैसा नहीं होता,,,, तेरा तो काफी बड़ा है,,,, तभी तो देख दवा लगाने में मुझे तकलीफ हो रही है।


तभी तो कह रहा था मम्मी कि तुम रहने दो मैं अपने हाथ से लगा लूंगा,,, आपको खामखा तकलीफ होगी,,,,


नहीं बेटा ऐसा बिल्कुल भी नहीं है तेरे लिए तो सारी तकलीफ सहने को मैं तैयार हूं। ( ऐसा कहते हुए निर्मला जोर-जोर से अपने बेटे के लंड को हिलाने लगी,,,,, शुभम की हालत खराब हो जा रहे हैं जो क्रिया वह अपनी हथेली में लेकर कर रहा था आज वही क्रिया उसकी मां अपने नरम नरम हथेली में लेकर कर रही थी जिसकी वजह से उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ चुकी थी। उत्तेजना के मारे से बंद के हाव भाव बदलने लगे थे उसका चेहरा उत्तेजित होकर एकदम लाल हो गया था निर्मला भी काफी देर से बुर की खुजली से परेशान हुए जा रही थी। कभी वह अपने बेटे के लंड को हिलाते हुए बोली।

अब बता कैसा लग रहा है तुझे,,, ( इतना कहते हुए वो अपनी नजरें उठाकर अपने बेटे की तरफ देखीे तो हैरान रह गई क्योंकि उसकी आंखें मस्ती के असर के कारण मुंदने लगी थी उसका मुंह खुला का खुला था वह जोर जोर से सांसे ले रहा था,,,,, वह एक दम मस्त हो चुका था उसकी हालत देखकर निर्मला को भी इस बात का एहसास होने लगा कि उसने उसका बेटा बड़ा हो गया था क्योंकि जिस तरह से उसके हाव भाव हो रहे थे उससे ऐसा साफ नजर आ रहा था कि उसे बहुत मजा आ रहा है यह देखकर निर्मला के सब्र का भी बांध टूटने लगा। उसकी बुर तो पहले से ही ज्यादा तड़प रही थी वासना भी उसके सर पर सवार हो चुकी थी उसने इस बात का बिल्कुल भी परवाह किए बिना कि उसका बेटा उसके करीब ही खड़ा है जो कि उससे अपने लंड पर दवा लगवा रहा है। जो की दवा लगवाने के बहाने शायद दोनों ही अपनी अपनी तरह से मजा ले रहे थे। शुभम की मस्ती देखकर निर्मला दे पूरी तरह से खुलने की कोशिश करने लगी और धीरे-धीरे करके उसने एक हाथ से अपने गांऊन को अपनी कमर पर चढ़ा ली,,, और एक हाथ अपनी पैंटी में डाल कर अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को मसलने लगी,,,, शुभम की आंखें अभी भी बंद थी,,,, निर्मला एक हाथ से अपने बेटे के लंड को हिलाते हुए और दूसरे हाथ से अपनी बुर को रगड़ते हुए फिर से बोली।

शुभम तुझे कैसा लग रहा है,,,,,,,
( इस बार शुभम आंखें खोलकर अपनी मां की तरफ देखा तो वह एकदम से हैरान रह गया उसे इस बात की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी अपनी मां को इस तरह से अपना गाउन कमर तक उठा कर एक हाथ पैंटी में डालकर अपनी बुर को रगड़ते हुए देखकर शुभम की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई,,,,, दोनों की आंखें आपस में टकरा गई लेकिन दोनों बोल कुछ नहीं रहे थे बल्कि एक दूसरे की आंखों की गहराई में खोते हुए एक दूसरे के अंगों से मजा ले रहे थे। शुभम कभी अपनी मां की आधी से ज्यादा चूचियों को देखता तो कभी अपने हाथ से अपनी बूर को लगा रहे पेंटिं की तरफ देखता,,,, और उत्तेजना से भरते हुए बोला।



बहुत मजा आ रहा है मम्मी ऐसा मज़ा मुझे कभी नहीं आया ( और ऐसा कहते हुए वह अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए हिलाने लगा,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी मां की हथेली को ही चोद रहा है। दोनों को बहुत मजा आ रहा था लेकिन मैं जोर-जोर से इतनी दूर को मसल रही थी और एक हाथ से अपने बेटे के लंड को हिला रही थी,,,,,

और जोर से मम्मी और जोर से हिलाओ मुझे मजा आ. रहा है।


हां बेटा मुझे भी बहुत मजा आ रहा है।

( दोनों के सर पर वासना सवार हो चुकी थी दोनों उन्माद की लहर में रहने लगे थे दोनों क्या कह रहे हैं शायद उस समय उस बात से दोनों को मजा आ रहा था,,,,, शुभम की इच्छा हो रही थी कि वह आगे बढ़ कर अपनी मां की चुचियों को पकड़ ले और अपनी मां की हथेली को हटाकर खुद अपनी हथेली से बुर को मसले । लेकिन ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि अभी भी उसके मन में थोड़ा बहोत डर बना हुआ था।
दोनों अपनी अपनी मस्ती में खोए हुए थे दोनों इससे आगे बढ़ना चाहते थे लेकिन आगे बढ़ने से कतरा रहे थे। निर्मला के मुंह से गर्म पिचकारी निकलने लगी थी और शुभम भी अपनी मस्ती में अपनी कमर को जोर-जोर से आगे पीछे करते हुए हीला रहा था। शुभम का लंड ठीक निर्मला के मुंह के करीब था,,, अगर वो थोड़ा सा भी आगे बढ़ती तो तुरंत अपने बेटे के लंड को मुंह में ले लेती,,,, और उसका मनीषा कर भी रहा था वह मन ही मन में सोच रही थी कि अपने बेटे के लंड को मुंह में ले कर चूसने लगे लेकिन शायद अभी भी दोनों पूरी तरह से नहीं खुले हुए थे।
पूरे कमरे में दोनों की गरम सिसकारी गूंज रही थी। कमरे का नजारा पूरी तरह से गर्म हो चुका था निर्मला की गरम सिसकारी शुभम की हालत और खराब किए जा रही थी जिसकी वजह से शुभम भी,,, आहहहहहह आहहहहहह करते हुए अपनी कमर को आगे पीछे जोर जोर से हिला रहा था। निर्मला की बुर भी पानी पानी हो चुकी थी जिससे निर्मला की पूरी पैंटी गीली हो चुकी थी। थोड़ी ही देर बाद दोनों का बदन अकडने़ लगा,,,, निर्मला का हाथ शुभम के लंड पर और हथेली अपनी बुर पर बड़ी तेजी से चलने लगी,,,,
और कुछ ही सेकंड में दोनों के मुंह से जोर से चीख निकली और दोनों के नाजुक अंगों से पानी की पिचकारी फूट पड़ी,,,,, लेकिन शुभम के ल** से निकली पिचकारी निर्मला के चेहरे पर पड़ने लगी जिसकी वजह से कुछ ही सेकंड में जबरदस्त तेज पिचकारी के कारण निर्मला का पूरा चेहरा शुभम के लंड के पानी से भर गया। निर्मला को उत्तेजना के कारण इस बात का अंदाजा नहीं था कि शुभम के लंड से पिचकारी निकल कर सीधे उसके मुंह पर आएगी। शुभम अपने लंड की पिचकारी अपनी मां के चेहरे पर गिरता हुआ देखकर आनंद से सराबोर हो गया,,,, और निर्मला इस बात से अक्षर में तेजी मंदी से इतनी तेज पिचकारी भी निकल सकती है इस बात की जानकारी उसे पहले कभी नहीं थी।
निर्मला जोर से अपने होंठों को भींच ली थी ताकी शुभम के लंड से निकला पानी उसके मुंह में ना जा पाएं।
निर्मला भी अपनी बुर का ढेर सारा पानी निकालकर पानी पानी हो गई थी और शुभम भी झड़ चुका था।
थोड़ी देर बाद दोनों का नशा उतरा तो निर्मला अपनी स्थिति को देखकर शर्म से पानी-पानी हो गई और भागते हुए सीधे बाथरूम में घुस गई।


Re: अधूरी हसरतें

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dil1857
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Re: अधूरी हसरतें

Post by dil1857 » 03 Nov 2017 20:25

अपडेट का इंतज़ार

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Ankit
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Re: अधूरी हसरतें

Post by Ankit » 04 Nov 2017 12:01

Superb update

SUNITASBS
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Re: अधूरी हसरतें

Post by SUNITASBS » 06 Nov 2017 11:50

next update


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