अधूरी हसरतें

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Re: अधूरी हसरतें

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Rohit Kapoor
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Re: अधूरी हसरतें

Post by Rohit Kapoor » 24 Nov 2017 12:50

बारिश अपने जोरों पर थी हाईवे के किनारे की घनी झाड़ियों के बीच निर्मला अपनी कार को खड़ी कर दी थी घने पेड़ के नीचे,,,, वह लोग बारिश थमने तक आसरा लिए हुए वहीं रूके रहे। निर्मला क्या सोच रहे थे कि बारिश के रुकते ही वह फिर से शीतल के घर उस की सालगिरह मनाने चली जाएगी लेकिन बारिश का मिजाज देखते हुए ऐसा संभव हो पाना मुश्किल ही लग रहा था। निर्मला ने अपनी कार को ऐसी घनी झाड़ियों के बीच पाक की थी की हाईवे से आते जाते लोगों को भी कार नजर नहीं आती। बरसात की वजह से मौसम में ठंडक का अनुभव होने लगा था निर्मला अपने बेटे की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी और मुस्कुराते हुए बोली।

बेटा अब ऐसी बारिश में हमें तो यहां रुकना ही पड़ेगा लेकिन जैसा मैंने तुझे बोली कि जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है तो हो सकता है कि यहां रुकना हम दोनों के लिए कुछ अच्छा साबित हो जाए।

मम्मी ऐसी कोई बात है नहीं लेकिन आप कह रही हैं तो जरूर मुझे आप पर विश्वास है। (इतना कहने के साथ ही वह अपनी मां को बड़े गौर से देखने लगा जो कि इस समय मुस्कुराते हुए और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी।)

ऐसे क्या देख रहा है?

कुछ नहीं मम्मी मैं तो यह देख रहा हूं कि ऐसी मुसीबत की घड़ी मे भी आप मुस्कुराते हुए कितनी खूबसूरत लगती है।



अच्छा मैं तुझे खूबसूरत लगती हूं,,,,( निर्मला अपने बेटे की बात पर मुस्कुराते हुए बोली।)

हां मम्मी तुम मुझे बहुत खूबसूरत लगती हो।


अब बे वजह तू बातें मत बना,,,,,


नहीं मम्मी सच में अपनी कसम तुम मुझे बहुत खूबसूरत लगती हो खूबसूरत लगती क्या हो,,,, तुम हो ही बहुत खूबसूरत।

( निर्मला को अपने बेटे के मुंह से अपनी तारीफ सुन कर बहुत अच्छा लग रहा था वह मन ही मन मुस्कुरा भीे रही थी। वहां अपने बेटे की नजर को अच्छे से पहचान रही थी खूबसूरती के पीछे आकर्षण भी था जो कि उससे अपने बेटे की आंखों में साफ नजर आ रहा था कि वहां उसके बदन के प्रति आकर्षित है। लेकिन अभी उसके अंदर झिझक भरी हुई थी। निर्मला को तभी कुछ याद आया हो इस तरह से बोली।)

अच्छा मैं तुझसे एक सवाल पूछी थी लेकिन तूने उसका जवाब नहीं दिया,,,,,

कैसा सवाल मम्मी?

यही कि तेरे दोस्त भी तो गर्लफ्रेंड लड़कियों की बातें करते होंगे तुझ से उन लोगों ने तो तुझे कुछ बताया ही होगा कि प्यार व्यार क्या होता है।

नहीं मम्मी ऐसा कुछ भी नहीं है वह लोग मुझसे ऐसी बातें नहीं करते।

नहीं तू झूठ बोल रहा है ऐसा हो ही नहीं सकता लड़के अक्सर अपने दोस्तों से यह सब बातें जरूर शेयर करते हैं।
( निर्मला अपनी बात पर जोर देते हुए बोली वह अपने बेटे के मुंह से जानना चाहती थी कि प्यार व्यार के बारे में उसके दोस्त क्या बोलते हैं।)

नहीं मम्मी सच कह रहा हूं ऐसी कोई बात नहीं है।

नहीं तू जरुर झूठ बोल रहा है। देख बारिश को देखते हुए हम लोगों को लगता है कि सारी रात यहीं रुकना होगा और एक दूसरे से बातें किए बिना या रात कटने वाली नहीं है। यह तूफानी रात गुजारने के लिए हम दोनों को टाइम पास के लिए बातचीत तो करनी ही होगी अब मैं तुझ से घर गृहस्ती के बारे में बातचीत तो कर नहीं सकती इसलिए ऐसे टॉपिक पर बात करना चाहती हूं जिसमे तुझे भी इंटरेस्ट हो क्योंकि तेरी उम्र भी अब जवान हो रही है ऐसे में तेरा आकर्षण लड़कियों के प्रति जरूर होता होगा।
( अपनी मां की बात सुनकर सुदंर हैरान होते हुए अपनी मां को ही देखे जा रहा था अपने बेटे के चेहरे के भाव को पढ़ते हुए निर्मला बोली।)

देख सुबह मैं जानती हूं कि ऐसी बातें करना ठीक नहीं है लेकिन मैं तेरी मां हूं और तुझे सही उम्र में सही बातों की जानकारी देना मेरा फर्ज बनता है और साथ ही में तो एक टीचर भी हूं इसके लिए तेरे हर सवालों का सही जवाब देना मेरा फर्ज बनता है और मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तेरी उम्र के लड़के अक्सर अपने दोस्तों से लड़कियों के बारे में अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में जरूर बात करते हैं इसलिए मुझसे तू झूठ मत बोल,,,,।
( निर्मला शुभम पर अपनी बातों का दबाव बराबर बनाई हुई थी,, और निर्मला के सवालों से शुभम का छटक पाना था। उसके लिए भी जवाब देना जरूरी होता जा रहा था वह थोड़ा सोचने लगा और फिर सोचता हुआ देखकर निर्मला फिर बोली।)

देख शुभम तू घबरा मत आज की रात तू दिल खोल कर जो तेरे मन में है सब कुछ मुझे बोल डाल क्योंकि जिस माहौल में हम दोनों फंसे हुए हैं ऐसे माहौल में अगर एक प्रेमी और प्रेमिका फंस जाते हैं और उन्हें इस तरह का एकांत मिल जाता है तो उनके लिए तो यह जन्नत के बराबर हो जाता है।
और शायद तो यह नहीं जानता की जिन लड़की लड़कियों को आपस में प्यार हो जाता है वह अक्सर ऐसे ही एकांत माहौल को ढूंढते रहते हैं।( शुभम अपनी मां की बात बड़े गौर से सुन रहा था और उसे अपनी मां की यह सब बातें बड़ी अजीब भी लग रही थी।) अच्छा तो मुझे एक बात सच सच बताना क्या तूने कभी किसी लड़की से प्यार किया है या तुझे किसी लड़की से प्यार हुआ है।

नहीं मम्मी ऐसा कुछ भी नहीं है।

देख तू सच सच बताओ झूठ मत बोल पूरे स्कूल में तुझे कौन सी लड़की सबसे अच्छी लगती है। ( निर्मला स्टीयरिंग पर अपने दोनों हथेलियों को रखते हुए बोली।)

नहीं मम्मी इन सब बातों पर मेरा कभी ध्यान ही नहीं गया।

हे भगवान तेरे जैसा लड़का तो मैंने आज तक नहीं देखी अच्छा यह तो बता कि तुझे कौन अच्छी लगती है।
( शुभम को अपनी मां की बातें और उसके बात करने का अंदाज कुछ अलग लग रहा था लेकिन तभी उसे अपने दोस्त की बात याद आ गई उसे भी लगने लगा कि आज उसकी मां उसके दोस्त की भाभी की तरह ही बात कर रही है जिस तरह से वह बहुत चुदवासी थी हो सकता है उसकी मां भी चुदवासी हो गई हो,, वरना इस तरह की बातें ना करती शुभम के लिए मौका बड़ा खास था वह मन ही मन सोचने लगा कि जब ऐसी बातें करते हुए उसके दोस्त की भाभी अपने ही देवर को ऊकसा कर उसके साथ चुदाई का सुख प्राप्त की। और आज उसकी मां थी अपनी बातों से उसे उकसा रही है हो सकता है कि आज उसका भी मन लंड लेने को कर रहा है यही सब सोचकर शुभम इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था वह अपनी मां की बातों का मतलब धीरे-धीरे समझ रहा था वरना ऐसी मुश्किल घड़ी में भी किसी औरत के चेहरे पर मुस्कुराहट नहीं आती लेकिन जिस तरह से निर्मला मुस्कुरा रही थी शुभम को अब लगने लगा था कि इस मुस्कुराहट के पीछे कोई वजह जरुर है। ओर यह वजह शारीरिक सुख से ही संबंधित है। इस बात की शंका शुभम के मन में होते ही उसके बदन में गुदगुदी सी होने लगी।अब वह भी अपनी मां से दूसरी तरह से ही बातें करना चाहता था क्योंकि उसकी मां ने ही बोली थी कि आज जो भी उसके मन में हो सब बोल डाले,,,,

क्या हुआ क्या सोच रहा है बता ना तुझे कौन अच्छी लगती है । (अपनी मां की बात सुनते ही जैसे उसकी तंद्रा भंग हुई हो इस तरह सेकपकाते हुए बोला)

कककक,,, कुछ तो नही,,,,


तो बताना तुझे कौन अच्छी लगती है ।

क्या मम्मी तुम तो मेरे पीछे ही पड़ गई हो,,,,,,,

अच्छा ठीक है कुछ मत बताओ मैं तुझसे अब कुछ पूछुंगी भी नहीं,,,( निर्मला बनावटी गुस्सा बताते हुए बोली।)

लो अब तुम नाराज हो गई मम्मी मैं कह रहा हूं फिर बताने जैसा नहीं है क्योंकि वह लोग प्यार व्यार की बातें नहीं करते थे वह लोग कुछ और ही बताते थे।

क्या बताते थे वह लोग कैसी बातें करते थे?

क्या बताऊं मम्मी बताने लायक नहीं है।
( शुभम की यह बात सुनकर निर्मला के मन में उत्सुकता जागने लगी उसे लगने लगा कि शुभम कुछ गंदी बातें छुपा रहा है और यही मौका भी अच्छा है उसके मुंह से गंदी बातें उगलवा कर आज की रात हसीन करने का,, निर्मला के मन में ढेर सारी भावनाएं उमड़ने लगी वह शुभम से बोली।)

देख तू मुझसे शर्मा मत सब कुछ बोल डाल,,,,,


मम्मी मुझे बहुत शर्म आती है मैं कैसे बोलूं,,,,,,,

अच्छा तुम मुझे एक बात बता अगर मेरी जगह ऐसे मौके पर ऐसी सुनसान जगह पर और बरसती बारिश में तेरी कोई गर्लफ्रेंड होत तो क्या तू उसे नहीं बताताा,,,,,, देख शर्मा मत,,,,

( अपनी मां की ऐसी बातें सुनकर शुभम को लगने लगा कि आप जरुर उसके साथ कुछ ना कुछ अच्छा होने वाला है,,, वह भी मन ही मन सोचने लगा की जब उसकी मां खुद ही सब कुछ सुनने के लिए तैयार है तो उसे बोलने में क्या हर्ज है इसलिए वह बोला।)


मम्मी वह लोग गंदी बातें करते है।,,,,


कैसी गंदी बातें किसके बारे में,,,,( इतना कहने के साथ ही वह स्टेयरिंग पर से हाथ हटाकर एक हाथ को पीछे की सीट पर रखकर आराम से बैठ गई,,,,)

सससस,,, सेक्स के बारे में,,,,,,( शुभम एकदम से डरते हुए बोला आज पहली बार उसके मुंह से यह शब्द बाहर निकले थे निर्मला को भी अपने बेटे के मुंह से सेक्स शब्द सुनकर गर्माहट सी फैलने लगी। )

सेक्स के बारे में किस तरह के कैसी बातें जरा खुलकर तो बता मैं पहले ही तुझे बता चुकी हूं कि तू आज मत शर्मा,,, यह समझ ले कि तेरे सामने तेरी गर्लफ्रेंड बैठी है और वैसे भी तो मैं तुझे अच्छी लगती हुं ना,, तो यही समझ ले आज यहां पर इस एकांत में तेरे साथ तेरी मम्मी नहीं बल्कि तेरी गर्लफ्रेंड बैठीे है। और अपनी गर्लफ्रेंड से शर्माने की कोई जरूरत नहीं है।
( निर्मला के मन में पूरी तरह से वासना सवार हो चुकी थी कि शीतल वाली बात उसे अच्छी तरह से याद थी,,,, शीतल बार-बार उसे शुभम की तरफ इशारा करके उससे जवान लंड लेने की बात कर रही थी इसलिए निर्मला का मन अपने बेटे के प्रति आकर्षित होने लगा था और ऐसे माहौल में तो उसके बदन में एक अजीब सी उत्सुकता सीे फेल जा रही थी। शुभम भी अपनी मां की बातें सुनकर बोला।)

चचचच,, चुदाई,,,,, वाली बातें,,,,( शुभम फिर से शर्माते हुए बोला।,, अपनी मां से इस तरह की बातें करने में उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था जिसे वह बार-बार पैंट के ऊपर से एडजस्ट कर रहा था और निर्मला की नजर उसकी इस हरकत को ध्यान से देख रही थी। )

चुदाई वाली बातें तेरे दोस्त यह सब बातें करत लेकिन किस की चुदाई के बारे में बातें करते हैं

तेरे दोस्त इस तरह की बातें करते हैं। लेकीन कीसकी चुदाई की बाते करते हैं । ( निर्मला के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी अपने बेटे के मुंह से यह सब सुनकर उसका अंग अंग उन्माद से भरने लगा था। बाहर बारिश अपने जोरों पर अपना जलवा बिखेर रहे थे साथ ही बादलों की गड़गड़ाहट मौसम को और भी ज्यादा भयानक बना रहीे थी,,, लेकिन यह बारिश यह एकांत और बादलों की गड़गड़ाहट कार के अंदर के माहौल को गर्मी प्रदान कर रही थी। शुभम भी अपनी मां की बात का जवाब देते हुए बोला,,,,)

मम्मी वाला बहुत गंदी बातें करते थे मैं तो वह बातें सुनकर ही हैरान था कि आखिर वह इस तरह की बातें कर कैसे लेते हैं।


किस तरह की बातें बेटा मुझे भी तो बता,,,,,( निर्मला इस बार अपने एक पैर को सीट पर रख कर आराम से बैठ गई लेकिन वह अपने पैर को जानबूझ कर इतना उठाई थी की साड़ी ऊपर की तरफ सरक गई और उसकी पिंडलियां जो कि एकदम गोरी थी वह साफ साफ नजर आने लगी उस पिंडलियों पर शुभम की नजर चली गई,,,, जिसे देख कर उसका लंड ठुनकी लेने लगा,,,,। इस बात का एहसास निर्मला को भी है हो गया कि उसकी गोरी पिंडली को देखकर शुभम के बदन में हलचल सी मचनें लगी थी,,, इसलिए वह अपनी हथेली को अपनी पिंडली पर रखकर हल्के हल्के सहलाने लगी जिसे देखकर शुभम बावला होने लगा। और अपने बदन में अपनी मम्मी की गोरी गोरी पिंडली की गर्माहट को महसूस करते हुए बोला।)

मम्मी वह लोग एक दूसरे की बहन भाभी की गंदी बातें उनकी चुदाई करने की बातें करके मजा लेते थे,,,, ( निर्मला को अपने बेटे की बात सुनते ही उसके बदन में गुदगुदी होने लगी और वह बोली।)

क्या एक दूसरे की बहन भाभी को चोदने की बात करते थे,,,( निर्मला चोदने शब्द को कुछ ज्यादा ही भार देकर बोली थी ताकि शुभम के बदन में मस्ती की लहर दौडने़ लगे और वैसा हो भी रहा था शुभम कभी सोचा नहीं था कि उसकी मां ऐसे शब्दों का प्रयोग करेगी और वह भी उसके ही सामने इसलिए आज पहली बार अपनी मां के मुंह से सेक्स चुदाई की बात सुनकर उसके बदन में हलचल सी मच आने लगी थी। शुभम का भी मन खुलने लगा वह मन ही मन सोच रहा था कि जब उसकी मां इतना खुल सकती है तो वह भी अपनी बात को नमक मिर्च लगाकर क्यों नहीं बता सकता इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला इस बार वह अपने अंदर चल रही हलचल को अपने शब्दों में बाहर लाते हुए अपनी मां से बोला।)

और तो और मम्मी जब उन लोगों की मैंने यह बात सुनी कि वह लोग अपनी मम्मी को भी गंदी नजर से देखते हैं तो मेरा दिमाग एकदम सन्न हो गया।
( शुभम दोस्तों की मम्मी वाली बात जानबूझकर बोला था ताकि वह अपने लिए रास्ता साफ कर सके और अपने बेटे के मुंह से दोस्तों की मम्मी वाली बात सुनकर निर्मला भी हैरान थी वह शुभम से बोली।)

क्या वादों को अपनी मम्मी को गंदी नजर से देखते हैं पर तुझे कैसे मालूम पड़ा क्या बोल रहे थे वह लोग। ?

मम्मी कैसे बताऊं मुझे शर्म आ रही है,,,,

शर्मा मत देख मैं तुझे बता चुकी हूं कि तू मुझे अपनी गर्लफ्रेंड समझ और मुझे सब कुछ बता दे । (इतना कहने के साथ ही वह अपनी पिंडली को खुजलाते खुजलाते एक बहाने से साड़ी को हल्के से और ऊपर उठा दी जिससे निर्मला की जांघ का थोड़ा भाग नजर आने लगा। चिकनी गोरी जांघ का थोड़ा सा भाग देख कर शुभम के मन पर बिजलियां दौड़ने लगी,, और वह बोला।)

मम्मी बोलो ढेर सारी बातें करते थे जब हम लोग क्रिकेट खेलते रहते हैं और फील्डिंग करते रहते हैं तो आपस में वालों की यही बातें करते हैं जो कि मुझे साफ साफ सुनाई देती है एक तो अपने दोस्त से बोल रहा था कि,,,,, यार आज तो सुबह-सुबह ही मेरा मूड बन गया और मुझे मुठ मारना पड़ा,,,,
( निर्मला तो अपने बेटे के मुंह से मुठ शब्द सुनते ही दंग रह गई और बोली।)

मूड बन गया मतलब कैसे,,,,,?

मम्मी वह बोल रहा था कि जब वह सुबह उठ कर बाथरूम की तरफ गया तो उसे नहीं मालूम था कि बाथरुम में उसकी मां है और वह बाथरूम का दरवाजा हल्का सा खुला ही था कि उसकी मां उसे एकदम नंगी बाथरूम में नहाती मिल गई,,, और वह बताने लगा कि उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड और उसकी बड़ी बड़ी चूचियां को देखकर उसका लंड टनटनाकर खड़ा हो गया। ( लंड टनटनाकर खड़े होने की बात सुनते ही निर्मला की बुर में चीटियां रेंगने लगी। )
और तों और मम्मी जब उसने कहा कि,,, अगर उसकी मां जरा सा इशारा कर देती तो वह बाथरुम में घुसकर अपनी मां की बुर में लंड डालकर चोद दीया होता।
( अपने बेटे के मुंह से इस तरह की खूबी बातें सुनकर उसकी बुर उत्तेजना के मारे फुलने पिचकने लगी,,,, आश्चर्य के साथ उसका मुंह खुला का खुला रह गया था। निर्मला हैरान होते हुए और साथ ही अपनी गोरी जांघ को हथेली से सहलाते हुए बोली।)
फिर क्या किया उसने,,,


फिर उसने बताया मम्मी की वह वंही दरवाजे पर ही अपने आप को छुपा कर खड़ा रहा और धीरे से अपने पजामे को नीचे कर दिया,,, और वही खड़े खड़े अपनी मां को नंगी देखते हुए अपने लंड को हिलाने लगा,,,,, और तब तक हिलाते रहा जब तक कि उसका पानी नहीं निकल गया,,,,,

तुझे कैसे मालूम कि वह पानी निकलते तक हिलाते रहा।

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Re: अधूरी हसरतें

Post by Rohit Kapoor » 24 Nov 2017 12:51



उसी ने तो बताया था।( इतना कहते हुए वह फीर से अपने खड़े लंड को एडजस्ट करने लगा। जो कि अपने बेटे की ईस हरकत को वह कनखियों से देख रही थी। )

शुभम तेरे दोस्त तो बहुत ही गंदी बातें करते हैं । क्या वह सब सच में ऐसा करते हैं क्या सच में वह अपनी मां को चोदने की ख्वाहिश रखते हैं। ( निर्मला गहरी सांसे लेते हुए बोली और गहरी सांस लेने की वजह से उसकी बड़ी बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी जोकी शुभम को साफ साफ नजर आ रही थी। )


ख्वाहिश ही नहीं मम्मी एक दोस्त ने तो यहां तक बताया कि एक रात जब वह अपनी मां के पास सो रहा था तो धीरे-धीरे करके उसने अपनी मां की ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए,,, बटन खोलने के बाद वह धीरे धीरे अपनी मां की चुचियों को दबाने लगा,,,( अपने बेटे के मुंह से यह बात सुनते ही निर्मला की बुर से नमकीन पानी रिसने लगा,,, उसकी सांसे तेज चलने लगी।)


फीर क्या हुआ? ( निर्मला बड़ी ही उत्सुकता के साथ होली यह सब बातें शुभम जानबूझकर नमक मिर्च लगाकर बोल रहा था जबकि उसके दोस्त ऐसा कुछ किए नहीं थे ,, पर हां बल्कि वह लोग अपनी मां को देखते जरूर थे।)

फिर क्या मम्मी जब उसने देखा कि उसकी मां के बदन में जरा भी हलचल नहीं हो रहा है तो मैं धीरे-धीरे अपनी मां की साड़ी को ऊपर उठाने लगा। लेकिन उसकी मां सोई नहीं थी जो कि यह बात उसने खुद बताई बहुत याद आ रही थी अपने बेटे की हरकत की वजह से उसकी सांसे तेज चल रही थी। उसे भी मजा आ रहा था।
( यह सब सुनकर निर्मला की हालत खराब हुए जा रही थी।)

फीर क्या हुआ ?

उसके बाद उसने अपनी मां की साड़ी को पूरी कमर तक उठा दिया और धीरे-धीरे उसकी पैंटी को नीचे सरका कर अपने लंड को अपनी मां की गांड पर रगड़ने लगा। इतना करने से उसकी मां से रहा नहीं दिया और वह अपना हाथ पीछे ले जाकर अपने बेटे के लंड को पकड़ लि और अपने बुर से सटा दी,,,,

इसके बाद,,,,

इसके बाद क्या मम्मी उसके बाद तुम अपनी मां का इशारा पाकर वह अपनी मम्मी को रात भर चोदता रहा।
( निर्मला की तो सांस उखड़ने लगी उसकी बुर से पानी निकलने लगा वह धीरे-धीरे अपनी साड़ी को आधी जांघ तक सरका दी। और कामोत्तेजित होते हुए बोली।)

हां मम्मी सच में वह लोग एसी ही बातें करते हैं।

अच्छा जब वह लोग एक दूसरे की मां के बारे में खुद अपनी मां के बारे में गंदी बातें करते हैं तो वह लोग जरूर तेरी मां के बारे में भी कुछ ना कुछ तो बोले ही होंगे,,,,,
( शुभम समझ गया कि उसकी मां अपने बारे में भी सुनना चाहती है लेकिन फिर भी वह जान बूझकर ना बताने का नाटक करते हुए बोला।)

नहीं मम्मी जाने दो ना,,,,,

अरे कैसे जाने दो,,,,, बता तो सही वो लोग मेरे बारे में क्या बताते हैं तुझसे,,,,, क्या सोचते हैं वह लोग मेरे बारे में,,,,,


जाने दो ना मम्मी क्या करोगे सुनकर वह लोग तुम्हारे बारे में इतनी गंदी बातें बोल रहे थे कि मेरा तो एक बार झगड़ा भी हो चुका था।,,,,

अरे बता तो सही बोलो क्या बोल रहे थे मैं भी तो सुनूं कि मेरे पीठ पीछे लोग क्या क्या मेरे बारे में बोलते हैं और सोचते हैं।
देखो शर्मा मत इतना कुछ बता दिया है तो यह भी बता दे।

मम्मी मेरे दोस्त मुझे बोल रही थी कि तेरी मम्मी क्या माल लगती है तेरी मम्मी की बड़ी बड़ी गांड देख कर हम लोगों का तो लंड ही खड़ा हो जाता है।
( निर्मला जानबूझकर अपने मुंह पर हाथ रखते हुए हैरान होने का नाटक करते हुए बोली।)

क्या तेरे दोस्त मेरे बारे में इस तरह की बातें करते हैं।( निर्मला हैरान होने का सिर्फ नाटक कर रही थी लेकिन उसे अपने बेटे की यह बात सुनकर बड़ा ही मजा आ रहा था।)

हां मम्मी वह लोग यह भी कह रहे थे कि अगर तेरी मम्मी हम लोगों को मौका दे तो तेरी मम्मी की बूर में सारी रात लंड डालकर सारी रात तेरी मम्मी की चुदाई करें और तेरी मम्मी जब चलती है तो क्या मटक मटक कर अपनी गांड मटका तेरी चलती है और तो और,,,, रोज सुबह तेरी मम्मी को याद करके हम लोगों को मुठ मारकर पानी निकालना पड़ता है।

शुभम तेरे दोस्त तों बड़े ही आवारा कीस्म के हैं,,,, सारे के सारे लगता है ठरकी हैं। सबके मन में कितना गंदा विचार है अपनी भी मम्मी के बारे में और दोस्तों की भी मम्मी के बारे में।


इसलिए तो मम्मी मुझे ऊन लोगों की दोस्ती पसंद नहीं है।
( कुछ देर तक दोनों के बीच खामोशी छाई रही शुभम के साथ साथ निर्मला भी पूरी तरह से काम होते जीत हो चुकी थी शुभम का लंड उसके पैंट में जोऱ दिए हुए था,, जिसे बार-बार वह अपने हाथ से एडजस्ट कर रहा था निर्मला की भी पैंटी पूरी तरह से गीली होने लगी थी थोड़ी देर बाद वह बोली,,,)

शुभम तेरे सभी दोस्त अपनी मां के बारे में गंदी विचार रखते हैं और वह लोग अपनी मां को चोद भी चुके हैं और चोदना भी चाहते हैं,,


तो अपने दोस्तों की बातें सुन कर तेरे मन में भी तो कुछ कुछ होता होगा,,,, तू भी मुझे गंदी नजर से देखता होगा मेरे बदन पर अपनी नजरें ़ दौड़ाता होगा,,,,, ( जांघों पर हथेली से सहलाते हुए) तू भी मुझे पीछे से देखता होगा जब मैं अपनी गांड मटका के चलती होऊंगी तब,,, तेरी नजर भी मेरी बड़ी बड़ी गांड पर टीकती होगी,,,, सच सच बताना शुभम क्योंकि मुझे नंगी देखा होगा ना।
( अपनी मां की यह बात सुनकर सुबह में एकदम से तक पका गया उसकी मां एकदम खुले शब्दों में उस से बातें कर रहे थे क्योंकि शुभम को अच्छी भी लग रही थी लेकिन ईस सवाल पर वह थोड़ा सा घबरा गया। उसे कुछ समझ में नहीं आया कि अपनी मां के सवाल का वह क्या जवाब दे। निर्मला अपने सवाल से अपने बेटे के चेहरे के बदले भाव को देख कर बोली।)
तू घबरा मत मैं तुझसे पहले ही कह चुकी हूं कि आज की रात तुम मुझसे बिल्कुल भी शर्म मत करना तुम मुझसे ऐसे बात करना कि जैसे तू अपनी गर्लफ्रेंड के साथ बात कर रहा हूं तुम मुझे अपना दोस्त समझ और सब कुछ बोल डाल अगर तूने मुझे दूसरी नजरिए से देखा भी है तो मुझे कोई एतराज नहीं होगा और तू कहीं मुझे एकदम नंगी भी देख चुका हे तो भी मैं तुझे कुछ नहीं कहूंगी बस तू मुझे सच सच बता दे तू ने मुझे नंगी देखा है कि नही।

( अपनी मां की बात सुनकर उसके मन में थोड़ी राहत हुई उसे तो यह सब अच्छा लग रहा था कि आज उसकी मां बिल्कुल खुले शब्दों में उससे बातें भी कर रही है और लगभग उसका साथ भी दे रही है। शुभम को इससे ज्यादा और क्या चाहिए था वैसे भी शुभम तू अपनी मां के ख्यालों में खोया रहता था और आज तो उसे भरपूर मौका मिला था और वह भी उसकी मां उसे साफ साफ शब्दों में सारा भी कर रही थी अगर आज शुभम इस मौके का फायदा नहीं उठाएगा तो शायद ही ऐसा मौका उसे दोबारा मिले वैसे भी बारिश कम होने का नाम नहीं ले रही थी तो यहां से जाने का सवाल ही नहीं होता था बादलों की गड़गड़ाहट से मौसम में एक रोमांच सा भर गया था। सुबह फिर भी एक गाय कितना खुलना नहीं चाहता था वह जान बूझकर अपनी मम्मी से बोला।)

नहीं मम्मी जैसा तुम समझ रही हो वैसा बिलकुल भी नहीं है।


अरे ऐसे कैसे नहीं है तेरे दोस्त तेरे सामने ही अपनी मम्मी को चोदने का और एक दूसरे की मम्मी को चोदने की बात करते हैं और मैं जानती हूं इस उमर में लड़कों को यह सब अच्छा भीं लगता है तो मैं कैसे मान लूं कि तेरे दोस्तों की बात सुनने के बाद भी तेरे मन में मेरे प्रति कोई आकर्षण नहीं जगा हो। क्या मैं तुझे अच्छी नहीं लगती हूं कि मेरा बदल इस लायक नहीं है कि तू मुझे पसंद ना कर सके,,, जबकि तू खुद अभी-अभी बोला था कि मैं तुझे बहुत अच्छी लगती हूं।


हां मम्मी तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो लेकिन,,,,,,,( इतना कहने के साथ ही वह फिर से शांत हो गया,,,, उसे शांत देखकर निर्मला फिर बोली।)

लेकिन क्या,,,,,,,( निर्मला धीरे से साड़ी को ऊपर चढ़ाते हुए बोली अब उसकी जांघों का आधे से भी ज्यादा भाग नजर आने लगा था जिस पर नजर पड़ते ही शुभम की आंखों में चमक नजर आने लगी,,,, और वह बोला।)

मम्मी अब मैं क्या बताऊं मुझसे कुछ बोला नहीं जा रहा है।


क्या सुनाऊं तू भी औरतों की तरह शर्मा रहा है देखने औरत होने के बावजूद भी कितना बिंदास होकर तुझसे बातें कर रही हुं। क्योंकि आज की रात कुछ खास है देख जो होता है अच्छे के लिए ही होता है हो सकता है यहां रुकना हम दोनों के लिए अच्छा ही हो वरना हम दोनों तो निकले थे शीतल की शादी की सालगिरह के लिए लेकिन एकाएक मौसम खराब हो गया बल्कि मौसम कितना साफ था। तु देख धीरे-धीरे कितना समय बीत गया अगर हम लोग इस तरह की बातें नहीं करते तो समय काटना भी बड़ा मुश्किल होता जाता और ऊपर से तूफानी बारिश में डर भी लगता। इसलिए जो बोलना है तो एकदम बिंदास बोल,,,,( अपनी मां की बात को बड़े ध्यान से सुन रहा था और अपनी मां के खूबसूरत चेहरे की तरफ देखते हुए वह बोला।)

क्या बोलूं मम्मी मुझे तो समझ में नहीं आ रहा कि कहां से शुरू करूं,,,,,,

मतलब तू मुझे नंगी देख चुका है,,,,( निर्मला अपने बेटे की आंखों में झांकते हुए बोली,,,,, शुभम अपनी मां की यह बात सुनकर सिर्फ हां में सिर हिलाकर नजरे नीचे झुका लिया अपने बेटे का जवाब सुनकर निर्मला के बदन में गुदगुदी सी होने लगी,,,, एक अजीब प्रकार का रोमांच उसके बदन में फैल गया। मन ही मन में सोचने लगी कि कब देखा होगा शुभम उसे नंगी,,, वो क्या कर रहीे थीे जब उसने उसे नंगी देखा होगा कैसा लगा होगा जब उसने उस के नंगे बदन को देखा होगा क्या उसमें भी उसके दोस्त की ही तरह अपनी मां को नंगी देखकर अपने लंड को हिलाया होगा क्या उसके मन में भी है भावना जगी होगी कि वह अपनी मां की चुदाई करें यही सब सोचकर निर्मला का बदन उत्तेजना के मारे गनगना गया। उसकी सांसे तेज चलने लगी और सीने में अंदर बाहर हो रही सांसों के साथ साथ उसकी बड़ी बड़ी चूचियां भी पहाड़ी घाटी की तरह ऊपर नीचे होते हुए कार के अंदर अपने बेटे पर कहर ढा रही थी। वह चहकते हुए बोली।)

क्या तूने सच मे मुझे नंगी देखा है कब देखा और कहां देखा मैं क्या कर रहीे थी जब तुने मुझे नंगी देखा था। बता ना देखा बिलकुल भी मत शर्माना इतना कुछ बता दिया है तो यह भी बता दे।
( शुभम को अब इस बात का पूरी तरह से आवास हो चुका था कि आज उसके साथ जरुर कुछ ना कुछ अच्छा ही होने वाला है वह तो अंदर ही अंदर मचल रहा था सब कुछ बताने के लिए बस थोड़ा सा नाटक कर रहा था वह नजरें उठाकर अपनी मां की आंख में झांकते हुए बोला।)

दो तीन बार देख चुका हूं हालांकि मैं नंगी देखने के उद्देश्य से जगह पर नहीं पहुंचा था लेकिन फिर भी देख लिया,,,,

सच कहां कहां देखा था क्या मैं उसमे बिल्कुल नंगी थी क्या कर रही थीे मै,,


बाथरूम में ही देख चुका हूं और एक दिन घर के पीछे वाले भाग मे जब तुम कपड़े धो रहीे थी,,,
( घर के पीछे वाले भाग में देखने के नाम से ही निर्मला की बदन में उत्तेजना की तेज बाहर दौड़ने लगी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि घर के पीछे वाले भाग में जब वह कपड़े धो रहे थे तो एकदम बिंदास होकर अपनी बुर में उंगली डालकर अपने हाथों से अपनी बुर की प्यास बुझा रही थी।)

घर के पीछे वाले भाग में,,,,, तू कहां से देख लिया और क्या करने आया था पीछे?

मम्मी तुम उस दिन मुझे कहीं भी नजर नहीं आई मैं बस तुम्हें ढूंढते ढूंढते वहां पहुंच गया तो देखा कि तुम एकदम नंगी होकर कपड़े धो रही हो,,,,,

मुझे एकदम नंगी देख कर तुझे कैसा लगा,,,,


मम्मी अब मैं क्या बताऊं उस दिन पहली बार मैंने तुम्हें नहीं देखा था मुझे तो समझ में ही नहीं आया कि यह क्या हो रहा है मेरा तो दिमाग ही काम करना बंद कर दिया था अब तक मैंने तुम्हें कपड़ों में देखा था कपड़ो में आप काफी खूबसूरत लगती हो लेकिन उस दिन बिना कपड़ों की एकदम नंगी देख कर मुझे पता चला कि आप बेहद और ज्यादा बेहद खूबसूरत हो,,,,,

( अपने बेटे के मुंह से अपने बदन की तारीफ सुनकर निर्मला को बहुत अच्छा लग रहा था वह खुश होते हुए बात को आगे बढ़ाते हुए बोली।)

सच में मैं तुझे बेहद खूबसूरत लगती हूं अच्छा यह बता उस दिन मैं वहां क्या कर रही थी।


तुम कपड़े धो रही थी।

सिर्फ कपड़े धो रही थी या और कुछ भी कर रही थी।

( अपनी मां की बात सुनकर शुभम समझ गया कि उसकी मां उसके मुंह से क्या सुनना चाहती है। वह भी कहां पीछे हटने वाला था वह भी उस दिन जोे देखा वह साफ साफ बताया लेकिन थोड़ा घुमा फिरा कर,,,,)

मम्मी तुम कपड़े धोने के बाद अपने हाथ को नीचे की तरफ ले जा कर जोर जोर से ना जाने क्या कर रही थी मुझे दूर से तो कुछ साफ नहीं दिखाई दिया बस तुम्हारे हाथ की हरकत यह देख रही थी लेकिन यह समझ में नहीं आया कि तुम कर क्या रही हो,,,,,,
( शुभम की बात सुनकर निर्मला मुस्कुराने लगी वह समझ गई कि शुभम अभी तक कुल नादान है इसलिए आवाज नहीं समझ पाया कि वह क्या कर रही है इसलिए वह बात को आगे बढ़ाते हुए बोली।)

अच्छा यह तो बता कि मुझे एकदम नंगी देख कर तुझे कुछ हुआ था।

पता नहीं मम्मी तुम्हें ऊस समय एकदम नंगी देखकर मेरे बदन में ना जाने क्या होने लगा पूरे बदन में गर्मी महसूस होने लगी मेरे माथे से पसीने की बूंदें टपकने लगी और,,,,,,,
( इतना कहकर वह चुप हो गया इस तरह से उसने चुप हो जा देख कर निर्मला बोली।)

और,,,,, और क्या हुआ तो चुप क्यों हो गया बताना,,,,

मम्मी मुझे शर्म आ रही है।


अरे तू शर्मा मत जो भी उस दिन तुझे महसूस हुआ सब कुछ बता दे ( इतना कहते हुए जानबूझकर निर्मला ने अपने कंधे पर से साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दी जिससे उसकी भरी भरी छातियां शुभम की आंखों के सामने फड़फड़ाने लगी।

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kunal
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Re: अधूरी हसरतें

Post by kunal » 24 Nov 2017 13:49

Thanks for update
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