अधूरी हसरतें

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Re: अधूरी हसरतें

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Rohit Kapoor
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Re: अधूरी हसरतें

Post by Rohit Kapoor » 24 Nov 2017 20:29

निर्मला ने जैसे ही जानबूझकर अपने साड़ी का पल्लू कंधे से नीचे गिराई उसकी भारी छातियां ब्लाउज में कैद दोनों कबूतरों के साथ फड़फड़ा कर शुभम की आंखों के सामने आ गए। अपनी मां की बड़ी बड़ी चूचियां को देखकर जो कि अभी भी ब्लाउज में कैद थी,,,, शुभम के मुंह में पानी आ गया और जिस नजरिए से वह अपनी मां की चूची को देख रहा था यह देख कर निर्मला का मन खुशी से झूम उठा वह बड़ी प्यासी नजरों से अपनी मां की चुचियों को देखे जा रहा था। निर्मला भी अपने बेटे की हालत और ज्यादा खराब करते हुए हल्के से अपनी हथेली को अपनी एक चूची पर रखकर उसे सहलाते हुए अपनी जीभ से अपने सुर्ख होठों को गिला करते हुए बोली।

अब बता भी दे कि और क्या हुआ था। ( शीशे से बाहर झांकते हुए) देख मौसम भी कितना रोमांटिक होता जा रहा है शुभम की तो हालत खराब हुए जा रहीे थी, आज वह अपनी मां का एक नया रुप देख रहा था। आज उसकी मां कामसूत्र की कोई मूरत की तरह लग रही थी। उसके हाव भाव उसके बदन की रूपरेखा एकदम काम देवी की तरह लग रही थी।
शुभम के पेंट में उसका टनटनाया हुआ लंड गदर मचाये हुए था। जिसे बार-बार वह हाथ लगा कर बैठ आने की कोशिश कर रहा था निर्मला भी अपने बेटे की इस हरकत को काफी देर से गौर कर रही थी। शुभम के लिए भी अब सब कुछ साफ होता नजर आ रहा था जिस तरह से उसकी मां उसे से जानबुझकर यह सब पूछना चाहती थी उससे बिल्कुल साफ हो गया था कि आज कोई नया अद्भुत अध्याय उसकी जिंदगी की किताब से जुड़ने वाला है। इसलिए वह बोला।


मम्मी ऐसे तो मैं तुम्हें पता तो नहीं लेकिन तुम इतना जोर दे रही हो तो मैं बता रहा हूं लेकिन इसके बाद तुम मुझ पर गुस्सा मत करना।


नहीं करूंगी तू बता तो,,,,,

मम्मी घर के पीछे तुम्हें कपड़े धोते हुए देखकर वह भी एक दम नंगी तो मेरी हालत खराब हो गई मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं तुम्हारी बड़ी बड़ी गाड़ और चिकना बदन मेरे दिल की धड़कन बढ़ाता जा रहा था मेरे माथे पर पसीने की बूंदें उपस आई थी। जैसे जैसे तुम्हारे हाथों में कपड़े धोने के लिए हरकत हो रही थी वैसे वैसे तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड बड़ी अजीब सी थिरकन लिेए हुए मटक रही थी।
तुम्हारा वह रुप देख कर मेरी आंखें फटी की फटी रह गई थी सच कहूं तो मम्मी इससे पहले मैंने कभी किसी औरत को नंगी देखा ही नहीं था। नंगी औरत कैसी दिखती है मुझे कुछ भी नहीं मालूम था। जिंदगी में पहली बार मैंने किसी औरत को बिना कपड़ो के देखा था तभी तो मेरी सांसे एकदम तेज चलने लगी थी मुझे लेकिन वह समझ में नहीं आया कि जब आप सारे कपड़े धो चुकी थी उसके बाद ना जाने हाथ को इतनी तेजी से कहां रखकर हिला रही थी तुम्हारी पीठ मेरी आंखो के सामने थी इसलिए मुझे कुछ दिखाई नहीं दिया लेकिन जो भी तुम कर रही थी वह मेरी हालत खराब किए हुए थी। तुम्हें देखकर मेरा लंड एकदम टनटनाकर खड़ा हो गया था।( अपने बेटे की गरम बातें सुनकर निर्मला की हालत खराब होने लगी उसकी भी सांसे धीरे-धीरे तेज चलने लगी थी। धीरे-धीरे अभी भी अपनी जांघों को फैला रही थी जिस पर बार-बार शुभम की नजर पहुंच जाती थी और उसके बदन में ठंडे मौसम में भी गर्माहट फैल जाती थी। निर्मला अपनी एक उंगली को दोनो चुचियों की बीच की गहरी लकीर में हल्के से घुसाते हुए बोली।)


सच! क्या सच में तेरा लंड खड़ा हो गया था जब तेरा लंड खड़ा हो गया तब तूने क्या किया? ( निर्मला की जबान एकदम रंडियों की तरह हो गई थी वह अब अपने बेटे से बिल्कुल भी शर्म नहीं कर रही थी और जो भी मुंह में आ रहा था अपने बेटे से बोल दे रही थी। और यही सब बातें निर्मला के साथ-साथ शुभम के भी बदन में दबी हुई चिंगारी को भड़काने का काम कर रही थी।)

जब तुम्हें देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया तो मुझे कुछ समझ में नहीं आया कि यह क्या हो रहा है मुझे ऐसा लगने लगा कि जैसे मुझे जोरों से पिशाब लगी है और ना चाहते हुए भी मैंने पेंट मेसे अपने लंड को बाहर निकाल लिया।

फिर क्या किया ? (निर्मला उत्सुकतावश बोली)

उसके बाद मुझे कुछ समझ में नहीं आया और मैंने झट से अपने लंड को पकड़ लिया और ना जाने क्यों मैं उसे आगे पीछे करके हिलाने लगा ऐसा मैं क्यों कर रहा था यह मुझे बिल्कुल भी समझ में नहीं आया लेकिन ऐसा करने में ना जाने मुझे क्यों मजा आ रहा था। जैसे जैसे तुम्हारे हाथ की हरकत बढ़ती जा रही थी वैसे वैसे मेरा हाथ भी जोर जोर से चल रहा था। और कुछ ही देर बाद मेरें लंड मेसे ना जाने कैसा सफेद सफेद पानी बाहर आ गया,,, लेकिन शायद वहां पानी बाहर निकल रहा था तो मुझे ना जाने अजीब प्रकार की सुख की अनुभूति हो रही थी ऐसा अनुभव मैंने इससे पहले कभी नहीं किया था। और मैं वहां से चला गया।
( शुभम भी निर्मला की तरह खोलकर अपनी मां से बातें करने लगा था वो जानबूझकर इतनी गरम गरम शब्दों में उस दिन की बातें बयान कर रहा था यह सब बातें सुनकर निर्मला की बुर ़ एकदम गीली हो चुकी थी। वह गर्म सांसे बाहर छोड़ते हुए बोली।)

शुभम तु तो एकदम से छिछोरा हो गया रे तू भी अपने दोस्तों की संगत में ऊन्ही की तरह करने लगा। अब वाकई में तू बहुत बड़ा हो गया है अच्छा यह बता कि बाद में तूने कब देखा मुझे बिना कपड़ों के।


आज ही तो देखा,,,,( इस बार शुभम एकदम बिंदास होकर बोला।)

आज,,,,,,,, आज कब देख लिया तूने ( निर्मला के चेहरे के भाव बदल रहे थे।)

अरे आज ही तो देखा,,,,,, जब मैं पार्टी में आने के लिए तैयार हो चुका था और मुझे पिशाब लगी तो मैं बाथरुम की तरफ जाने लगा और जैसे ही बाथरूम में पहुंचा तो दरवाजा थोड़ा सा खुला हुआ था लेकिन मुझे क्या मालूम था कि अंदर तुम हो। मैं तो एक बार फिर से तुम को देखकर एकदम दंग रह गया उस दिन की एकदम नंगी थी बाथरूम में आज भी तुम एकदम नंगी होकर नहा रही थी,,,, मम्मी तुम्हारी खूबसूरती नंगे पैर में और भी ज्यादा निकल कर सामने आती है और तुम्हारी खूबसूरती देखकर तो मेरा मुंह खुला का खुला रह जाता है उस समय भी ऐसा हुआ तुम नहा रही थी और मैं तुम्हें बाथरुम से बाहर खड़ा हो कर देख रहा था और फिर से मेरा लंड टनटनाकर खड़ा हो गया,,,,( शुभम की बात सुनकर निर्मला के चेहरे पर कामुक मुस्कान तैरने लगी।)
सच मम्मी फिर से तुम्हें नंगी देख कर मेरी हालत खराब होने लगी दिल को मैंने थोड़ा दूर से देखा था लेकिन आज लगभग बिल्कुल करीब से देख रहा था तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड पानी मैं भीगी हुई और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी मैं तो बस देखता ही रह गया। मेरी हालत खराब होने लगी मैं अपने आप को संभाल पाता इससे पहले ही आपने वह नजारा मुझे दिखा दीे कि मैं तो पागल होते होते बचा।


ऐसा क्या तू ने देख लिया और मैंने क्या दिखा दिया कि तू पागल होते होते बच गया।


पूछो मत मम्मी कि मैंने क्या देख लिया (अपने लंड को पेंट के ऊपर से सहलाते हुए) मैंने पहली बार तुम्हें पेशाब करते हुए देखा मेरी तो सांसे ही अटक गई मुझे यकीन नहीं आ रहा था कि मैं या क्या देख रहा हूं मुझे लगने लगा था कि कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा लेकिन सपना नहीं वह हकीकत था।
तुम जैसे ही बैठकर मौत ना शुरू करें ना जाने कहां से सीटी की आवाज मेरे कानों में गूंजने लगी मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि आवाज कहां से आ रही है बस इतना पता था कि तुम पेशाब कर रही हो मुझसे रहा नहीं गया और मैं अपने कमरे में जा कर एक बार फिर से अपने लंड को हिलाकर पानी निकाल दिया।

( निर्मला तो अपने बेटे की इस बात को सुनकर एकदम हैरान हो गई उत्तेजना और आश्चर्य दोनों के भाव उसके चेहरे पर साफ नजर आ रहे थे। वह इस बात से बिल्कुल हैरान हो चुकी थी कि उसकी पीठ पीछे इतना कुछ हो गया और उसे भनक तक नहीं लगी। उसका बेटा उसे नंगी देख देख कर अपना लंड हिला कर मुठ मारता रहा लेकिन इस बात का उसे जरा भी अंदाजा ही नहीं हुआ। इसका मतलब था कि वह अपने बेटे को अब तक एकदम नादान समझती थी लेकिन उसका बेटा उसकी सोच से एक कदम आगे ही था।)

वाह बेटा तूने तो कमाल कर दिया मुझे तो इस बात की भनक तक नहीं लगी और तू मेरी पीठ पीछे मुझे एकदम नंगी देख देखकर ना जाने कैसे-कैसे ख्याल करके अपना पानी निकालता रहा।

मम्मी जो कुछ भी हुआ सब अनजाने में हुआ मुझे तो इस बारे में कुछ पता भी नहीं था।

चल कोई बात नहीं मुझे पता है कि यह उम्र ही है ऐसी है अच्छा यह बता कि तूने मेरे बदन का कौन कौन सा हिस्सा देखा है।

लगभग मम्मी मैंने आपके बदन का हर हिस्सा देख लिया हूं,,,

अरे देख लिया है तो बता तो सही कौन कौन सा हिस्सा देखा है नाम लेकर तो बता (निर्मला एक हाथ से धीरे-धीरे अपने ब्लाउज के बटन को खोलते हुए बोली)

मम्मी सबसे पहले तो मैंने आपकी दोनों बड़ी बड़ी चूचियां को देखा जिसे देख कर मैं एकदम हैरान हो गया और उसके बाद तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड को जिसका मटकना हालत खराब कर देता है।

और क्या देखा तूने,,,,( इतना कहने के साथ ही निर्मला ब्लाउज के पहले बटन को खोल चुकी थी जिस पर शुभम की नजरें गड़ी हुई थी।)

बस मम्मी इसे ज्यादा मैंने और कुछ नहीं देखा,,,,,

क्या इससे ज्यादा तूने और कुछ नहीं देखा और तू कहता है कि मैंने सब कुछ देख लिया,,,, तूने औरतों के सारे अंग को देख लिया लेकिन औरत के मुख्य द्वार को अभी तक नहीं देख. पाया,,,,

मुख्य द्वार ये मुख्य द्वार क्या होता है मम्मी?( शुभम भोलेपन से बोला।)

तो सच में बुद्धू है अरे मुख्य द्वार मतलब जिसे बूर कहते हैं।
वह तो तूने देखा ही नहीं और तो मुझे कह रहा है कि तूने मुझे पेशाब करते हुए देखा।

हां मम्मी मैंने सच में तुम्हें पेशाब करते हुए देखा हूं लेकिन तुम्हारी बुर को मेने नहीं देख पाया।

पेशाब करते हुए देखा लेकिन पेशाब कहां से निकलती है तुझे नहीं दिखाई दिया।


नहीं मम्मी मैं सच कह रहा हूं पेशाब करते हुए देखा लेकिन पेशाब कहां से निकलती है वह मुझे नहीं दिखाई दिया क्योंकि आप बैठी हुई थी तो मुझे ठीक से नहीं दिखा।


पागल जिसमें से पेशाब निकलती है उसे ही बुर कहते हैं। और इसी बुर को पाने के लिए तो दुनिया का हर मर्द तड़पता रहता है तुझे पता है,,,,, अच्छा तु यह बता तूने कभी किसी औरत को चुदवाते या किसी आदमी को चोदते देखा है?

( भीगती तुफानी बारीश मे कार के अंदर का तापमान एकदम गर्म हो चुका था। दोनों मां बेटे की गर्म बातों से कार के अंदर का माहौल एकदम गर्म हो चुका था दोनों कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि आपस में बैठकर इस तरह से गंदी बातें करेंगे और एक दूसरे के अंगों को प्यासी नजरों से देखेंगे लेकिन अब यह एक दम सच हो चुका था तूफानी बारिश में हाईवे के किनारे सुनसान जगह पर जंगली झाड़ियों के बीच दोनों मां बेटे किसी एक नए सफर के लिए निकल चुके थे जिसमें दोनों अपनी वासना का तूफान लिए दरिया को पार करने की पूरी कोशिश कर रहे थे।
गरम पात्रों की वजह से निर्मला की बुर पूरी तरह से की जा चुकी थी उसका एक बटन खुला हुआ था उसके चेहरे पर कामुकता साफ नजर आ रहीे थीे, यही हाल शुभम का भी था पेंट में उसका लंड तूफान मचाए हुए था वह बाहर आने के लिए तड़प रहा था जिसे वह बार बार अपने हाथों से शांत करने की कोशिश कर रहा था लेकिन वह शांत होने की वजह और भी ज्यादा भड़क रहा था। अपनी मां के कामुकता से भरे इस सवाल का जवाब देते हुए शुभम बोला।)

नही मम्मी मैंने आज तक ऐसा कुछ भी नहीं देखा,,,


क्या बेटा तू क्या करता है इतना हैंडसम हो कर के भी इस उम्र में तूने अब तो कुछ भी नहीं देख पाया। तुझे पता है एक आदमी अपने लंड को औरत के किस अंग में डालकर उसे चोदता है।
( निर्मला के इस सवाल पर शुभम के चेहरे पर पसीने की बूंदे साफ झलतने लगी ऐसे ठंडे मौसम में भी दोनों मां बेटे के बदन से पसीना टपक रहा था। शुभम अपनी मां के सवाल का क्या जवाब दे उसके पास कोई जवाब नहीं था क्योंकि उसने आज तक चुदाई नामक कामक्रिडा को देखा ही नहीं था। उसे यह बिल्कुल भी नहीं पता था कि औरत अपनी किस्मत में आदमी की नंगी को बुला कर चुदवाती है जो आदमी अपने लंड को औरत की किस अंग में डाल कर चोदता है । इन सब बातों से शुभम बिल्कुल अंजान था उसने बस दोस्तों से सुन रहा था था चोदना चुदाई करना चुदवाना,,,, इन सब का उल्लेख वह शब्दों से ही जानता था। इतना तो उसे पता था कि यह सब करने से औरत और मर्द दोनों को आनंद ही आनंद आता है। लेकिन कैसे करते हैं यह उसे नहीं मालूम था। इसलिए अपनी मां के सवाल पर वह खामोश ही रहा लेकिन निर्मला शुभम की खामोशी को तोड़ते हुए बोली।)

क्या हुआ बता,,,,, तुझे नहीं मालूम है क्या?

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Re: अधूरी हसरतें

Post by Rohit Kapoor » 24 Nov 2017 20:30


( इस बार सुबह अपनी मां की अधनंगी जांघो और ब्लाउज के खुले बटन मैसे आधे से ज्यादा बाहर निकली हुई चूचीयो की तरफ पैंट के ऊपर से अपने लंड को मसलता हुआ ना में सिर हिला दिया। और अपनी बेटे का इशारा समझ कर वह मुस्कुराने लगी,,,, अपने बेटे के इशारे पर उसे वह समझ गई कि उसका बेटा वाकई में इस मामले में एकदम बुद्धू है भले ही उसके पास घोड़े के लंड की तरह हथियार है लेकिन उसकी बातों से साफ पता चलता है कि उसने अभी तक अपने लंड को सिर्फ हाथों से ही लाया है उसने अभी तक किसी भी लड़की या औरत की बुर का स्वाद नहीं चखा है। इस बात से वह एकदम प्रसन्न हो गई की उसका लड़का अभी तक एक दम कुंआरा था और सितल की बात याद आते हीै उसके मन में सतरंगी तरंग बजने लगे कि इस उम्र में जवान लंड से चुदवाने का मजा ही कुछ और होता है।.. निर्मला के होठो पर कुटिल मुस्कान फैल गई वह अपने बेटे की नादानी देख कर खुशी से गदगद होने लगी। उसे बड़ा अजीब लगा कि इस उम्र में उसका बेटा अभी तक यह नहीं जानता कि लड़के लड़की के किस अंग में लंड डालकर उसे छोड़ते हैं बल्कि उसकी उम्र में तो लड़की ना जाने क्या-क्या कर चुके होते हैं। निर्मला अपने बेटे की तरफ देखकर अपनी जवानी का जलवा दिखाते हुए मुस्कुराते हुए बोली।)

क्या सच में तुझे बिल्कुल भी नहीं मालूम है कि लंड किस अंग में डाल कर चुदाई की जाती है या तो सिर्फ ऐसे ही भोला बन रहा है।

सच मम्मी मुझे बिल्कुल भी नहीं मालूम मैंने तो अभी तक कुछ देखा ही नहीं तो कैसे बता दूं।( शुभम के बदन मे भी उत्तेजना की लहर पुरी तरह से अपना जाल बिछा चुकी थी इसलिए वह अपनी मां की आंखों के सामने जो अभी तक लंड को पैंट के ऊपर से ही दबा दे रहा था वह अब जान बूझकर मसलने लगा था।यह देखकर निर्मला की भी बुर कुलबुलाने लगी थी। उत्तेजना के मारे निर्मला का चेहरा लाल लाल हो गया था जोकिं इस समय बेहद कामुक लग रहा था।
वो फिर से अपने सूखे होंठ पर जीभ फिराते हुए बोली।)
क्या शुभम मुझे तो लगता था कि मेरा बेटा जरूर दो चार लड़कियों को अपनी गर्लफ्रेंड बना कर रखा होगा।

( अपनी मां की बात सुनकर शुभम हंसने लगा और शुभम को इस तरह हंसता हुआ देखकर निर्मला बोली।)

क्यों क्या हुआ हंस क्यों रहा है।

अब हंसु नहीं तो क्या करूं मम्मी मुझे देखकर तुम्हें ऐसा लगता है कि मैं ऐसा कर सकता हूं।

क्यों तुम मर्द नहीं ह?

ऐसी बात नहीं है मम्मी,,,,,

फिर कैसी बात है,,,, हथियार तो बड़ा भारी रखा है,,,, लगता ही नहीं कि इंसान का है।
( शुभम अपनी मां की यह बात सुनकर उसे एकटक देखने लगा उसे समझ में नहीं आया कि उसकी मां क्या कह रही है बहुत बड़े ही आश्चर्य के साथ अपनी मां को देखते हुए बोला।)

क्या मतलब मैं कुछ समझा नहीं,,,,,,


तू सच में एकदम बुद्धू का बुद्धू ही है। इतना भी नहीं समझता। अच्छा क्या तुझे गर्मी महसूस हो रही है। ( निर्मला अपने माथे पर से पसीने को पोंछते हुए बोली।)

हां मम्मी मुझे भी गर्मी महसूस हो रही है देखो मेरे माथे पर भी पसीना ऊपस आया है,,,,।

तुझे मालूम है ऐसी बारिश के मौसम में पूरा वातावरण ठंडा हो जाता है और ऐसे में गर्मी महसूस नहीं होनी चाहिए लेकिन इस गर्मी के महसूस होने का कारण तु शायद नहीं जानता।

क्या कारण है मम्मी?

हम दोनों जिस तरह की बातें कर रहे हैं यह उन बातों में थोड़ी मस्ती की गर्मी है। तू भी अच्छी तरह से जानता है कि तेरे दोस्त भी इसी तरह की बातें करते हैं। और उनकी बातों को सुनकर तुझे भी मजा आता है सच सच बताना सुबह तेरे दोस्तों की बातें सुनकर तुझे भी मजा आता था ना। देखो झूठ मत बोलना सब कुछ खुलकर बोले झुकाते हैं अभी बोल दो आज की रात तेरे और मेरे बीच में शर्म की कोई दीवार नहीं होनी चाहिए मैं तुझसे पहले ही कह चुका हूं कि तुम मुझसे अपना दोस्त अपनी गर्ल फ्रेंड समझ कर बात कर,,,,,

हां मम्मी उन लोगों की बातें गंदी जरूर थीै लेकिन मुझे भी मजा आता था।

तो जब वो तेरी मम्मी के बारे में मतलब कि मेरे बारे में गंदी बातें कर रहे थे तो तो तू ऊनसे झगड़ा क्यों करने लगा,,,,।


तो क्या करता वह लोग तुम्हारे बारे में गंदी गंदी बातें कर रहे थे और ऐसी गंदी गंदी बातें जो कि मैंने कभी सोचा भी नहीं था तो ऐसी बातें सुनकर मुझे गुस्सा आ गया और,,,,, और मैं उन लोगों से झगड़ा कर बैठा।
( अपने बेटे की बात सुनकर निर्मला मुस्कुराने लगी और मुस्कुराती भी कैसे नहीं क्योंकि उसे भी अपने लिए उसके दोस्तों से उसका झगड़ा करना अच्छा लगा,,, तभी वह मुस्कुराते हुए अपने ब्लाउज की दूसरे बटन को भी खोलते हुए बोली।)

देख लगता है कि हम दोनों की बातें कुछ ज्यादा ही गर्म होती जा रही है इसलिए मुझे गर्मी कुछ ज्यादा ही लग रही है। ( ऐसा कहते हुए लेकिन मेरा नहीं अपने दूसरे बटन को भी खोल दी दूसरे बटन के खुलते ही उसकी आधे से भी ज्यादा चूचियां ऐसा लग रही थी कि अभी ब्लाउज की बाकी बचे बटन को तोड़कर बाहर आ जाएंगी। शुभम तो यह नजारा देख कर उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच गया उसकी सबसे बड़ी तेजी से चलने लगी और वह अपनी फटी आंखों से अपनी मां के सीने की गोलाइयों को देखने लगा। सांसों के साथ साथ ऊपर नीचे होती हुई निर्मला की चूचीयां किसी समुंदर में तैरते हुए पहाड़ की तरह लग रही थी। निर्मला भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसके हुस्न का जादू शुभम पर पूरी तरह से छा चुका था। निर्मला को अपनी बेटी की हालत पर हंसी आ रही थी आज पहली बार निर्मला ऐसे हालात के दौर से गुजर रही थी कि किसी के सामने वह अपने हुस्न का जलवा बिखेरते हुए अपने अंदर दबी हुई चिंगारी को भड़का रही थी। आज वह अपने बेटे के साथ रिश्तो की मर्यादा को तार-तार करने के लिए पूरी तरह से उतारू हो चुकी थी। बरसों की प्यासी निर्मला आज हर रिश्ते को भूल जाना चाहती थी । समाज के पन्ने पर लिखे हुए मां-बेटे के रिश्ते को वह वासना के रबड़ से मिटा देना चाहतेी थी। शुभम की सबसे बड़ी तेजी चल रही थी और उसका हाथ उसके लंड पर पेंट के ऊपर से ही उसे सहना रहा था वह भी अपनी शर्म को भूल चुका था इसमें उसकी भी कोई गलती नहीं थी हालात ही कुछ ऐसे बन चुके थे कि जिससे नजर. फेर पाना ऊसके बस मे नहीं था और वह कर भी क्या सकता था जिस उम्र के दौर सेवह गुजर रहा था ऐसे मैं अक्सर जवान होते लड़को की नजर ना चाहते हुए भी आपसी रिश्तो के पीछे छुपे खूबसूरत आकर्षण के प्रति आकर्षित हुए बिना नहीं रह पाते।
यही हाल शुभम का भी हो रहा था उसके सामने तो रूप खूबसूरती और सेक्स से भरा हुआ एक पतीला पड़ा था जिसमें से वह पेट भरना चाहता था,,, अपनेी प्यास को बुझाना चाहता था अपनी भुख मिटाना चाहता था। लेकिन स्वादिष्ट व्यंजन से भरे हुए पतीले में वह हाथ बढ़ाने से डरता था जबकि निर्मला तो खुद ही शुभम के सामने परोसी हुई थाली बन कर बैठी थी। भाभी शुभम के आगे हाथ बढ़ाने का इंतजार कर रही थी लेकिन उसकी हालत देखकर वह समझ गई थी कि शुभम से कुछ होने वाला नहीं है जो भी करना है उसे ही करना होगा।
रात गहराती जा रहे थे बादल अभी भी बरस रहे थे और साथ में गरज भी रहे थे दूर-दूर तक खाली बिजली के चमकने की रोशनी नजर आ रही थी सब कुछ वीरान पड़ा था ऐसे में निर्मला और शुभम एक ही कार में बैठ कर एक दूसरे के मन को उधेड़ रहे थे। आपसी बातचीत के दौरान दोनों को एक दूसरे को समझने में काफी मदद मिल रही थी। दोनों इतना तो जान ही चुके थे कि इस तूफानी बारिश का दूसरा अध्याय दोनों के लिए कुछ अजीब और अद्भुत लेकर आने वाला है।

निर्मला सही मौके का इंतजार कर रहे थे अपनी जिंदगी में जिसने कभी गाली को भी अपने होठों पर नहीं आने दी थी आज वह खुद अपने बदन को अपने बेटे के सामने खोलकर धीरे-धीरे उसे उकसा रही थी। उसकी साड़ी जांघो पर चढ़ी हुई थी ब्लाउज के दोनों बटन खुले हुए थे जिसमें से आधे से भी ज्यादा चुचीयां बाहर को लटकी हुई थी। यह सब देख कर शुभम की हालत संभाले नहीं संभल रही थी वह अपने लंड को पेंट के ऊपर से ही मसल रहा था। अपने बेटे को इस तरह से उसकी आंखों के सामने लंड को मसलता हुआ देखकर निर्मला की बुर में चीटियां रेंगने रखी थी। वह अपने बेटे के हथियार को अच्छी तरह से अपने हाथों में लेकर देख चुकी थी इसके लिए वह जानती थी कि उसमें कितना दम है बस आजमाना बाकी था। निर्मला अच्छी तरह से जानती थी कि उसके एक इशारे पर उसका बेटा उस पर टूट पड़ेगा और बरसों से ना बुझने वाली प्यासा कौ वह अपने लंड से रगड़ कर एकदम तृप्त कर देगा। निर्मला अपने आपको अपने बेटे के साथ सांभोगिक मुठभेड़ के लिए पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी लेकिन फिर भी अभी आगे बढऩे मैं थोड़ा सा कतरा रही थी। अभी भी थोड़ी सी झिझक ऊसके अंदर बाकी थीै और वह इस झिझक को बातचीत से खत्म करना चाहती थी।
रात काफी हो चुकी थी रात के तकरीबन 1:00 बज चुके थे। बातों की मस्ती में दोनों इस तरह से खोए की समय का ऊन्हे जरा भी पता ही नहीं चला। दोनों की आंखों से नींद कोसों दूर थी दोनों को नींद नहीं आ रही थी। हाथ में बड़ी गाड़ी पर नजर गई तो निर्मला के होश उड़ गए कब तीन-चार घंटे बीत गए उसे पता ही नहीं चला। उसे अब इस बात का डर था कि अगर ऐसे ही सिर्फ बातों में ही उलझे रहे तो सुबह हो जाएगी और यह सुनहरा मौका उसके हाथ से निकल जाएगा। बारिश थी कि थमने का नाम ही नहीं ले रही थी। शुभम प्यासी आंखों से अपनी मां को गोरे जा रहा था ।और उसका यह घूरना निर्मला को बेहद आनंद की अनुभूति करा रहा था। निर्मला समय को ऐसे गुजरने नहीं देना चाहती थी इसलिए वह हाथ में घडी घडी की तरफ देखते हुए शुभम से बोली।

अरे सुबह देखो तो बातों ही बातों में कब समय गुजर गया इसका पता ही नहीं चला 1:00 बज रहा है।

क्या बात कर रही हो मम्मी सच में 1:00 बज रहा है।

हां रे ले तू भी देख ले (शुभम की तरफ घड़ी दीखा़ाते हुए)

हां मम्मी सच में समय का तो पता ही नहीं चला।

अब तो शीतल की पार्टी भी ना जाने कब से खत्म हो चुकी होगी हम लोग उसकी पार्टी में जा नहीं पाए,,,,, लेकिन शुभम तू सच बताना पार्टी से ज्यादा मजा तुझे इधर एकांत में मेरे साथ आ रहा है कि नहीं।

हां मम्मी तुम सच कह रही हो पार्टी से ज्यादा मजा इधर आ रहा है । (शुभम अपनी मां की चुचियों की तरफ देखता हुआ बोला)

तु शायद नहीं जानता कि मैं तुझसे ऐसी बातें क्यों कर रही हूं मेरे अंदर यह सब बरसों से दबा हुआ है मैं यह सब बातें तेरे पापा से करना चाहती थी और एक पति भी अपनी पत्नी से इसी तरह की बातें करता है मस्ती करता है लेकिन तेरे पापा को मुझ पर ध्यान ही नहीं देते (इतना कहते हुए निर्मला में थोड़ा सा अपने घुटनों को मोदी जिससे उसकी सारी पूरी तरह से उसकी कमर तक चल गई और उसकी लाल रंग की पैंटी नजर आने लगी शुभम की नजर सीधे अपनी मां की पैंटी पर चली गई और वह अपने मां की लाल पेंटिं को देखे कर एकदम से उत्तेजना का अनुभव करने लगा और उसकी सांसे तेज चलने लगी उसका हाथ अपने आप पेंट के ऊपर से लंड को जोर-जोर से मसलने लगा,,,, यह तो बड़ा ही काम उत्तेजना से भरपूर नजारा था और एक जवान होते लड़के के लिए यह तो बेहद ही कामोत्तेजना और रोमांच से भरा हुआ नजारा था। निर्मला को भी आवास हो गया कि उसका लड़का और की पेंटिं को देखकर एकदम उत्तेजित हो चुका है लेकिन वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली।)
शुभम सहाय तू नहीं जानता कि तेरे पापा मुझसे हमेशा कटे कटे से रहते हैं मुझसे ठीक से बात भी नहीं करते इसलिए मैं हमेशा अपने दुखों को छुपा कर अपने चेहरे पर बनावटी हंसी लाकर दुनिया के सामने रहती हूं।

क्या बात कर रही हो मम्मी क्या पापा तुमसे प्यार नहीं करते?

अगर करते होते तो क्या मुझे तुझसे इस तरह की बातें करने की जरूरत पड़ती।( इतना कहते हुए उसने इस बार अपनी हथेली को अपनी पैंटी पर रखकर हल्के हल्के से सहलाने लगी यह नजारा देखकर शुभम से बिल्कुल भी रहा नहीं गया और वह गर्म आहें भरते हुए इस बात ना चाहते हुए भी पैंट के ऊपर से ही अपने लंड को मुट्ठी में भर लिया और यह देखकर निर्मला झट से बोली।)

क्या बात है बेटा मैं काफी देर से देख रही हुं कि तू बार बार अपना हाथ अपने लंड पर रख दे रहा है तुझे अभी भी आराम नहीं मिला है क्या?

( अपनी मां के मुंह से लंड शब्द सुनकर उसका लंड और भी ज्यादा टनटना गया। लेकिन वह बहाना बनाते हुए बोला।)

नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है मम्मी मुझे जोरों से पेशाब लगी है।

अरे तो फिर इतनी देर से तु रोका क्यों है कर क्यों नहीं लिया।


रुको मम्मी में करके आता हूं।
( अपने बेटे की बात सुनते ही देखें उसके दिमाग की बत्ती जली हो और उसने तुरंत अपने बेटे को रोकते हुए बोली।)

रुक जा बेटा कार से नीचे मत ज ऐसी तूफानी बारिश में इस जंगल झाड़ी में सांप बिच्छू के होने का खतरा बना रहता है।

तो मैं पेशाब केसे करूंगा मम्मी,,,,

रुक जा में शीशा नीचे कर देती हुं तु यहीं से पेशाब कर ले,,,,


ऐसे में मम्मी तुम्हारे सामने में कैसे कर सकता हूं।

अरे पागल अब मुझसे शर्माने की क्या जरूरत है रुक जा में शीशा नीचे कर देती हूं।( इतना कहने के साथ ही निर्मला अपने बेटे के करीब आ गई और वहां से सीशे को नीचे करने लगी,,,)

ले अब कर ले,,,,

( शुभम की हालत खराब हुए जा रही थी उसे सच में पेशाब लगी थी उसका लंड पूरी तरह से पेंट के अंदर खड़ा था और ऐसे मैं उसे अपनी मां के सामने पेशाब करने में शर्म आ रही थी। निर्मला अपने बेटे की स्थिति को अच्छी तरह से समझ गई और वह बोली।)

अच्छा रुक जा मैं जानती हूं तू मेरे सामने शर्मा रहा है,,, मैं ही तेरे लंड को तेरे पेंट से बाहर निकाल देती हूं उसके बाद तो पेशाब कर लेना,,,,
( शुभम कुछ सोच पाता इससे पहले ही निर्मला झट से उसके पेंट के बटन को खोलने लगी निर्मला के बगल में झुनझुनी सी फेल जा रही थी जब वह अपने बेटे के पेंट में बने तंबू को देख रही थी। निर्मला आज वासना के वशीभूत होकर वह भी करने को तैयार हो गई थी जो कि उसने आज तक अपनी पती के साथ भी नहीं की थी इस तरह से वह अपने पति के पेंट को नहीं खोली थी। अगले ही पल निर्मला ने अपने बेटे की पेंट को खोलकर जांगो तक सरकादी और अंडरवियर को भी नीचे सरका दि,, जेसे ही उसका खड़ा लंड अंडरवियर के बाहर आया तो वह हवा में झूलने लगा जिसे देखकर निर्मला की बुर उत्तेजना के मारे फूलने पिचकने लगी। वह आंख फाड़े अपने बेटे के लंड को ही देखे जा रही थी,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अपने बेटे के लंड के मोटे सुपाड़े को देखकर उसका मन एकदम से ललच रहा था। उसके जी में तो आ रहा था कि वह अपने बेटे के लंड को मुंह में भरकर लॉलीपॉप की तरह चूस डाले,,,,,, तभी निर्मला की नजर अपने बेटे की नजर से टकराई तो वह बेशर्मों की तरह अपने बेटे की आंख से आंख मिला कर देखने लगी,,,, शुभम भी अपनी मां की नजर में वासना का उठा हुआ तूफान देख रहा था जिसके अंदर वह खुद को डूबता हुआ नजर आ रहा था शुभम की हालत एकदम खराब हो रही थी अजब सा माहौल बना हुआ था तूफानी बारिश ठंडा मौसम उसके बावजूद भी कार का तापमान एकदम गर्म था। उत्तेजना के मारे निर्मला का गला सूख रहा था उसका चेहरा लाल सुर्ख हो चुका था वह अपने बेटे के लंड को अपने हथेली में पकड़ कर ना चाहते हुए भी ऊपर नीचे कर के हिलाते हुए बोली,,,,

देख मैं ना कहती थी कि तेरा हथियार देख कर लगता ही नहीं कि इंसान का हथियार है।( शुभम अपनी मां की बात सुनकर एकदम खामोश था और कह भी क्या सकता था और निर्मला शुभम के लंड को पकड़ कर गाड़ी की खिड़की से थोड़ा सा बाहर निकाल कर बोली,,,)

अब ले मूत ले,,,,,,,

निर्मला का इतना कहना था कि शुभम के लंड से पेशाब की पिचकारी निकलने लगी जो की बड़ी तेज रफ्तार से निकल रही थी। शुभम के लंड को निर्मला अभी भी अपनी हथेली में कस के पकड़े हुए थी। शुभम की उत्तेजना का ठिकाना ना था उसे इस पल बेहद आनंद के अनुभूति हो रही थी वह कभी सोच भी नहीं सकता था कि उसकी जिंदगी में ऐसा भी पल आएगा। निर्मला को बस एक टक अपने बेटे के लंड को और उसमें से निकलती तेजधार को देखे जा रही थी। शुभम पेशाब गाड़ी के बाहर कर रहा था लेकिन गिली उसकी बुर हो रही थी। निर्मला भी ईससे पहले किसी मर्द को पेशाब करते हुए नहीं देखी थी। निर्मला से रहा नहीं गया तो वह एक हाथ से पेंटी के ऊपर से अपनी बुर को मसलने लगी जो कि काफी गीली हो चुकी थी। निर्मला की पल-पल हालत खराब होती जा रही थी और कुछ ही देर में शुभम एकदम हल्का हो गया लेकिन उसके लंड का तनाव एकदम बरकरार था।
कार के अंदर का माहौल अब पूरी तरह से घर में आ चुका था शुभम पेशाब कर चुका था लेकिन उसे पैंट पहनने की शुध बिल्कुल भी नहीं थी,,,, ज्यों का त्यों वह अपनी मां की आंखों में देखता हुआ वहीं बैठ गया,,,, उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था जो कि अभी भी निर्मला के ही हाथ में था निर्मला भी नहीं चाहती थी कि शुभम पैंट पहनकर इस अद्भुत नजारे पर पर्दा गिरा दे। निर्मला को भी पेशाब का अनुभव होने लगा उसे भी जोरों की पेशाब आई थी। वह अपने बेटे के लंड को हाथ में लिए हुए ही सोचने लगी कि,,,, यही सही मौका है उसे अपने बेटे को अपनी बुर दिखाने का है जिसे उसने आज तक नहीं देख पाया था। वह मन ही मन पूरी तरह से अपने मन में यह धारणा बना ली थी कि वह अपनी रसीली बुर अपने बेटे को दिखा कर उसे संभोग के लिए उत्तेजित और उत्साहित कर लेगी,,, उसे अपनी इस धारणा पर पक्का विश्वास था कि उसका बेटा उसकी चिकनी रसीली बुर को देखेगा तो जरुर ऊसे चोदने के लिए तड़प ऊठेगा।

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Kamini
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Re: अधूरी हसरतें

Post by Kamini » 25 Nov 2017 09:26

mast update

SUNITASBS
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Re: अधूरी हसरतें

Post by SUNITASBS » 26 Nov 2017 14:12

nice update

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