अधूरी हसरतें

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Re: अधूरी हसरतें

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Rohit Kapoor
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Re: अधूरी हसरतें

Post by Rohit Kapoor » 27 Nov 2017 21:56

निर्मला के हाथ में अभी भी उसके बेटे का टनटनाया हुआ लंड था जिसे वह रह रह कर आगे पीछे कर के हिला दे रही थी। शुभम के चेहरे पर उत्तेजना की आवाज साफ नजर आ रही थी उसका मुंह खुला हुआ था और वह जोर जोर से सांसे ले रहा था हल्के होने के बावजूद भी उसके बदन में भारी-भारी सी गुदगुदी सी हो रही थी उसे उम्मीद नहीं थी कि आज की रात उसके साथ कुछ ऐसा होगा,,,,, शुभम अपनी मां की आंखों में देख रहा था और उसकी आंखों में वासना का समंदर साफ नजर आ रहा था उसे अपनी मां की कही गई बात याद आने लगी थी आज हम लोग कार में ही पार्टी मनाएंगे,,,,, निर्मला का दहकता बदन शुभम पर सोने बरसा रहा था उसकी अधनंगी आधी चूचियां किसी जीते-जागते बंम से कम नहीं थी जो कि कभी भी शुभम के सीने पर फट सकती थी। निर्मला की हथेली में शुभम का गरम लंड और भी ज्यादा टाइट हो चुका था निर्मला को शुभम के लंड का सुपाड़ा किसी हथौड़े की तरह ही मजबूत लग रहा था वह मन ही मन उस सुपाड़े को अपने बुर की दीवारों पर रगड़ता हुआ महसूस कर रही थी। निर्मला के बर्तन में उत्तेजना और वासना पूरी तरह से सवार हो चुका था वह धीरे-धीरे अब अपने बेटे के लंड को मुठीयाना शुरु कर दी जिसमें शुभम को भी बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी। अब तो निर्मला के लिए भी पीछे हट पाना बड़ा मुश्किल था बरसों से प्यासी बदन में चुदास से भरी हुई चिंगारी,, धीरे धीरे भड़क रही थी।
निर्मला शुभम के खड़े लंड को मुठीयाते हुए बोली,,,

शुभम लगता है कि तुझे काफी देर से पेशाब लगी थी लेकिन तूने अब तक किया क्यों नहीं,,,,

क्या करता मम्मी पेशाब करने गया था बाथरूम में लेकिन वहां तुम एकदम नंगी होकर नहा रही थी तो मेरी पेशाब ही बंद हो गई।
( शुभम की बात सुनते ही निर्मला को हंसी आ गई और हंसते हुए बोली।)

क्या शुभमं इस तरह से कोई अपनी पेशाब रोकता है अरे चले आना चाहिए था ना बाथरूम में,,,, जैसे अभी मेरे सामने पेशाब कर रहा है वैसे उधर भी कर लिया होता।
तुझे पेशाब करता हुआ देखकर मुझे भी पेशाब लग गई। अब क्या करूं कैसे करूं मैं भी कार के नीचे नहीं जा सकती नीचे पानी पानी होगा और घास झाड़ियों में जंगली जानवरों के होने का खतरा बना ही रहता है और बारिश भी बहुत तेज हो रही है। ( निर्मला जान बुझकर इस तरह से बोल रही थी क्योंकि वह शुभम के मन की बात जानना चाहती थीे ।वह देखना चाहती थी कि शुभम क्या कहता है। लेकिन शुभम क्या कहता वह तो खुद ही अचंबित हो चुका था अपनी मां के मुंह से पेशाब लगने की बात सुनकर। उत्तेजना के मारे निर्मला के हाथ में ही उसका लंड ठुनकी लेने लगा,,, निर्मला अबी भी शुभम की तरफ सवालिया नजरों से देख रही थी। शुभम यही चाहता था कि उसकी मां उसकी आंखों के सामने ही पेशाब करें वह फिर से आज बाथरूम वाले नजारे को एकदम नजदीक से देखना चाहता था। इसलिए वह अपनी मां से बोला।

मम्मी तुम भी यही कर लो,,,,,


यहां पर लेकिन मैं कैसे कर सकती हूं तू तो लड़का है कहीं से भी खड़ा होकर कर लेगा लेकिन मैं,,,,,

तो क्या हुआ मम्मी तुम भी मेरी तरह सीट पर घुटने के बल बैठ कर बाहर की तरफ कर लो,,,,,

तू ठीक कह रहा है,,,, ( इतना कहने के साथ ही निर्मला कार की सीट पर थोड़ा सा पाव को ऊपर की तरफ रख कर,,,, अपनी कमर को कार की खिड़की की तरफ़ थोड़ा सा आगे बढ़ा ली,,,,, शुभम तो एकदम खुश हो गया और अपनी मां के इस फैसले पर उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी उसके दिल की धड़कन तेज होने लगी,,,, उसे लगने लगा कि आज वह है जो अभी तक नहीं देख पाया आज उस अंग को देख लेगा और वह भी एक दम करीब से,,, निर्मला भी होशियार थी वह एक हाथ स्टेरिंग पर रखकर और दूसरे हाथ से सीट को पकड़ ली और ऐसा जताने लगी की वह सहारा लेकर खड़ी है और स्टेरिंग और सीट पर से अपने हाथ को हटा नहीं सकती। शुभम ठीक अपनी मां के पीछे ही था और अपनी मां की हरकत को देख रहा था उसकी साड़ी घुटनों तक चढ़ी हुई थी और निर्मला की बड़ी बड़ी गांड साड़ी में होने के बावजूद भी शुभम के ऊपर कहर बरसा रही थी वह फटी आंखों से अपनी मां को देखे जा रहा था। तभी निर्मला पीछे की तरफ नजर घुमाकर शुभम से बोली।

शुभम मैं अपनी साड़ी ऊपर नहीं कर सकती क्योंकि मैं दोनों हाथों से टेका ली हुई हूं। तू खुद ही मेरी साड़ी को ऊपर चढ़ा कर मेरी मदद कर दे।

इतना सुनते ही शुभम की तो सांसे ऊपर नीचे हो गई उसकी मां जो करने को कह रही थी उसे करने के लिए दुनिया का कोई भी मर्द तुरंत तैयार हो जाए यहां तो निर्मला खुद अपने बेटे से कह रहे थे जो कि वह अपनी मां की खूबसूरत बदन से पूरी तरह से आकर्षित हो चुका था। उसका दिल जोरो से धड़कने लगा वह कभी सोच नहीं सकता था कि उसकी मां उससे ऐसा कुछ कराएगी,,,, वह तोें अपनी मां की साड़ी ऊपर उठाने के लिए पहले से ही तैयार बैठा था,, बस अपनी मां के इशारे का इंतजार कर रहा था। इशारा मिलते ही उसने तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ा कर दोनों छोर से साड़ी को पकड़ लिया और धीरे-धीरे उपर की तरफ उठाने लगा,,,, जैसे-जैसे साड़ी ऊपर की तरफ उठ रही थी वैसे वैसे निर्मला की नंगी जांघ चमक उठ रही थी,,,, शुभम की हालत खराब हुए जा रही थी उसके लंड की ऐंठन बढ़ती जा रही थी निर्मला भी बराबर नजर घुमाकर अपनी बेटे की हरकत को देख रही थी।
धीरे-धीरे करके आखिरकार शुभम ने अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठा ही दिया,,,, निर्मला की बड़ी-बड़ी और वराह अवतार गांड लाल पैंटी में लिपटी हुई शुभम की आंखों के सामने लपलपा रही थी उसे छल रही थी अपनी मायाजाल में और शुभम अपनी मां के नितंबों के माया जाल में फंसता चला जा रहा था और फंसता भी कैसे नहीं इस मायाजाल से आज तक कोई भी मर्द बच नहीं पाया तो शुभम. क्या चीज है। शुभम अपनी मां के नितंबों को फटी आंखो से देखे जा रहा था और उसकी मां भी नजरें घुमा कर अपने बेटे की हालत को देख कर मन ही मन मुस्करा रही थी। शुभम कुछ समझ पाता इससे पहले ही उसकी मां बोली,,,

बेटा मैं अपने हाथों से अपनी पेंटिंनहीं निकाल पाऊंगी तू खुद ही मेरी पैंटी को नीचे कर दे,,,,,

( शुभम को तो मुंह मांगी मुराद मिल रही थी उसने तुरंत अपने कांपते हाथों को आगे बढ़ाकर अपनी उंगलियों को पैंटी के दोनों छोर पर फसा लिया और धीरे-धीरे पैंटी को नीचे सरकाने लगा,,,, जैसे जैसे शुभम अपने कांपते हाथों से पेंटिं को नीचे सरका रहा था वैसे वेसे वह नंगी होती चली जा रही थी। और अगले ही पल शुभम ने अपनी मां की पैंटी को खींच कर नीचे जांघो तक कर दिया। अब शुभम की आंखों के सामने उसकी मां की नंगी गांड कार की डिम लाइट में चमक रही थी। वह अपनी नजर उठा कर अपनी मां की तरफ देखा तो उसकी मां उसे धन्यवाद देते हुए बोली।

थैंक्यू बेटा मदद करने के लिए ( और इतना कहने के साथ ही वह छल छला कर पेशाब करने लगी,,, बुर से पेशाब की धार निकलते ही उसमें से सीटी की आवाज आने लगी और उसकी आवाज शुभम के कानों में पड़ते ही वह बेचैन हो गया
वह एकदम तड़प उठा और अपने आप ही वह थोड़ा सा आगे आकर अपनी मां की बुर से निकलती पेशाब की धार को देखने लगा,,,,ऊफ्फ्फ्फ,,,,,, यह नजारा देखकर शुभम के मुंह से गर्म आह निकलने लगी वह कभी सोच भी नहीं सकता था कि ऐसा अद्भुत नजारा वो कभी इतने करीब से देख पाएगा,,,
मोह माया छल कपट प्यार वासना जादू सब कुछ था इस नजारे में और ऐसे नजारे को देखकर भला कौन सा दर्द होगा जो जानबूझकर इस अद्भुत नजारे को ना देख कर अपना मुंह मोडेगा। शुभम तो फटी आंखों से अपनी मां की बुर से निकलते पेशाब की धार को देखकर एकदम कामोत्तेजित हो गया। निर्मला अपने बेटे की हालत को देख कर मुस्कुरा रहेी थी,, और वह मुस्कुराते हुए बोली।)

ले ठीक से देख लें इसमें से ही पेशाब निकलती है जिसको बुर कहते हैं। ( जिस तरह से उसकी मां मुस्कुराकर बता रही थी उसकी मुस्कुराहट देखकर सुभम के दिल पर बिजलियां गिर रही थी,, आश्चर्य के साथ उसका मुंह खुला का खुला रह गया था वह कभी अपनी मां की बुर से निकल रही पेशाब को देखता तो कभी अपनी मां की तरफ देखता,,, उसकी हालत एकदम कटे मुर्गे की तरह हो गई थी। बदन बुरी तरह फड़फड़ा रहा था लेकिन जान नहीं निकल पा रही थी।
निर्मला की भी उत्तेजना की कोई सीमा नहीं थी उसने अपने जीवन में इस तरह की उत्तेजना का अनुभव कभी नहीं की थी। गजब का नजारा बना हुआ था वह भी कभी नहीं सोच सकती थी कि ऐसा पल उसकी जिंदगी में आएगा कि वह अपने बेटे के सामने ही उसकी आंखों के सामने ही खुद उसके हाथों से ही अपनी साड़ी को उठवाएगी और पेशाब करेगी यह सब बड़ा ही अद्भुत था दोनों के लिए शुभम के ना चाहते हुए भी खुद-ब-खुद उसका हाथ निर्मला की बड़ी-बड़ी गांड पर चला गया जिस पर हथेली रखते ही उसके बदन में करंट का अनुभव होने लगा,,,, पहली बार वह किसी गांड पर हाथ रख रहा था जो कि उसके बदन को पूरी तरह से झनझना दिया था। धीरे धीरे हल्के हल्के में अपनी मां की काम को करवाने लगा जो की निर्मला को बहुत ही अच्छा लग रहा था। निर्मला और शुभम दोनों यही चाह रहे थे कि यह पल यही थम जाए यहीं रुक जाए जो मजा इस पल में है ऐसा मजा किसी पल में नहीं मिलेगा,,,,, लेकिन ऐसा संभव नहीं था क्योंकि निर्मला पेशाब कर चुकी थी,,,, उस का मन भी कार की खिड़की से हटने का नहीं कर रहा था वह यही चाह रही थी कि उसका बेटा उसकी रसीली बुर को बस देखता ही रहे,,
लेकिन पेशाब करने के बाद वह ज्यादा देर तक इस तरह से नहीं खड़ी रह सकती थी इसलिए वह खिड़की पर से हटी लेकिन अभी भी उसकी सारी कमर तक ही चढ़ी हुई थी और पेंटी जांघों तक सरकी हुई थी। और वह भी अपने बेटे की तरह ही मैं तो सारी को नीचे की और ना ही पैंटी को कहीं नहीं बस वैसे ही सीट पर बैठ गई और जल्दी-जल्दी कार के सीसे को चढ़ाने लगे क्योंकि बाहर तेज हवा के साथ बारिश हो रही थी जिसकी वजह से पानी की बौछार से उसकी सारी और उसका ब्लाउज भीग चुका था। मैं सीट पर बैठ कर अपनी साड़ी को झाड़कर सुखाने की नाकाम कोशिश करने लगी,,,,,

लेकिन अपनी साड़ी को उतारने का इससे अच्छा मौका ना मिलेगा यह ख्याल उसके मन में आते हैं उसका मन मोर की तरह नाचने लगा,,,, लेकिन शुभम का ध्यान केवल उसकी रसीली बुर पर ही टिका हुआ था यह देख कर निर्मला उससे बोली।


ले ओर नजर भर कर इसे ठीक से देख ले ( इतना कहने के साथ ही वह अपनी जांघ को थोड़ा सा फैला दी,,, शुभम का तो गला सूखने लगा) अब तक औरत कि तूने इसी अंग को नहीं देखा था ना।

हां मम्मी मैंने तुम्हारा सब कुछ देख लिया था लेकिन इस अंग को नहीं देख पाया था (वह कांपतेे स्वर में बोला)

कैसी लगी तुझे मेरी बुर (अपनी हथेली को अपनी बुर पर रखते हुए बोली)

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Re: अधूरी हसरतें

Post by Rohit Kapoor » 27 Nov 2017 21:58


गजब मम्मी एकदम अद्भुत मैंने आज तक इस से खूबसूरत कोई अंग नहीं देखा मुझे यकीन नहीं हो पा रहा है कि औरत के बदन में इस तरह का भी अंग होता है।


अच्छी लगी ना तुझे।

हां मम्मी बहुत अच्छी लगी,,,,,,


इसे छुने का दिल कर रहा है तेरा,,,,,


हां मम्मी मै ईसे छुना चाहता हूं देखना चाहता हूं कि छूने पर कैसा महसूस होता है।
( अपने बेटे की बात सुनकर निर्मला मुस्कुरादी,,,,)

तो ले छू कर देख ले बहुत गर्म होती है।

सच मम्मी,,,

हां रे सच कह रही हूं लैं छुकर देख ले।
( निर्मला का गला उत्तेजना के मारे सो रहा था उसका मन एकदम आनंदित हो चुका था,,, वासना ने उसके मन मस्तिष्क को पूरी तरह से अपने वश में कर लिया था। उस की रसीली बुर की गुलाबी फांकें अपने बेटे की उंगलियों के स्पर्श को आभास करके ही फुल पिचक रही थी। अपनी मां का आदेश का पाकर शुभम कैसे अपने आप को रोक पाता वह तो कब से ईस पल का सपना देख रहा था। शुभम अपने कांपते हाथों को अपनी मां की जांघों के बीच बढ़ाने लगा,,,, उसका दिमाग एकदम सुंन्न हो चुका था,, उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था उसकी आंखों के सामने बस उसे अपनी मां की बुर दिखाई दे रही थी जोंकि गुलाबी फांकों के बीच बेहद खूबसूरत लग रही थी अगले ही पल उसकी उंगलिया,, निर्मला की चिकनी बुर को स्पर्श कर रहीे थीे जैसे ही शुभम ने अपनी उंगली को अपनी मां की बुर से सटाया उसके बदन में जैसे करंट दौड़ गया हो इस तरह से उसका पूरा बदन गंनगना गया। अपनी मां की बुर को स्पर्श करने के बावजूद भी उसे यकीन नहीं हो रहा था उसे ऐसा लग रहा था कि वो सपना ही देख रहा है। तभी उसकी मां बोली,,,

कैसा लगा तुझे,,,,,

बहुत ही खूबसूरत मम्मी और वाकई में तुम्हारी बुर बहुत गर्म है।( वह अपनी मां की तरफ देखे बिना ही बोला अपने बेटे का जवाब सुनकर निर्मला मुस्कुराने लगी और धीरे-धीरे करके अपने ब्लाउज के बाकी बचे बटन को भी खोल दी,,, सुभम जब नजर उठा कर अपनी मां की तरफ देखा तो निर्मला बोली।

पानी की बौछार की वजह से मेरे कपड़े गीले हो गए हैं इसलिए इसे उतारना पड़ेगा,,,, ( शुभम तो और ज्यादा खुश हो गया क्योंकि उसे देखने लगा कि जैसे कि उसकी मां उसकी आंखों के सामने पूरी तरह से नंगी हो जाएगी आज सच में पार्टी की ही रात है। शुभम तू धीरे धीरे करके अपनी मां की बुर पर पूरी हथेली काही स्पर्श करने लगा,,,, रह-रहकर निर्मला अपनी बेटे की हथेली का स्पर्श अपनी बुर पर करके एकदम से उत्तेजना के मारे सिहरं ऊठ रही थी और उसके मुंह से गरम सिसकारी निकल जा ़ रही थी।अगले ही पल
निर्मला अपने ब्लाऊज के साथ साथ अपनी ब्रा को भी उतार दी जैसे ही उसने अपनी ब्रा को अपने बदन से अलग की वैसे ही ऊसकी बड़ी बड़ी चूचीया सीना ताने शुभम के सीने में चुभने लगी,,,, शुभम यह देखकर एकदम हैरान हो गया,,, उत्तेजना की मारे उसने अपनी हथेली में अपनी मां की बुर को भरकर दबोच लिया जिससे निर्मला की हल्की सी चीख निकल गई,,

आहहहहहह,,,, क्या कर रहा है रे,,,,
लगता है तुझे मेरी बुर कुछ ज्यादा ही पसंद आ गई है तभी तो देखना तेरा लंड कैसा खड़ा हो गया है। तुझे पता है अगर तेरी जगह और मेरी जगह कोई प्रेमी प्रेमिका होती तो ना जाने उसके प्रेमी में कब से इस खड़े लंड को अपनी प्रेमिका की बुर में डाल कर चोद दिया होता,,,,,
( यह बात अपनी मां के मुंह से सुनकर शुभम एकदम दंग रह गया वह समझ गया कि उसकी मां एकदम चुदवासी हो गई है और चुदवाना चाहती है। वह नादान बनते हुए बोला।)

सच मम्मीं क्या ऐसा ही होता है?

हां बिल्कुल ऐसा ही होता है तो शायद नहीं जानता क्योंकि तूने अभी तक ना तो चुदाई देखा है और ना ही किसी को चोदा है इसलिए तुझे समझ में नहीं आ रहा पता है यह लंड क्यों खड़ा होता है,,

क्यों खड़ा होता है मम्मी( वह अपनी हथेली को अपनी मां की बुर से रगड़ते हुए बोला)

बेवकूफ इस में जाने के लिए( वह उंगली के इशारे से शुभम को अपनी बुर दिखाते हुए बोली।)

क्या मम्मी कहीं इस छोटे से छेद में इतना मोटा और लंबा लंड घुस पाएगा,,,,( शुभम जानबूझकर नादान बनते हुए बोला)

अरे पागल एक छोटे से छेद में तो गधे का लंड घुस जाए,,,,
( सुभम अपनी मां के मुंह से ऐसी बात सुनकर एकदम से हैरान हो गया।)
तुझे लगता है मेरी बात पर विश्वास नहीं होता अरे इसी में तो मर्द अपने लंड को डाल कर लंड को अंदर बाहर करते हुए चोदता है और इसी को चुदाई कहते हैं। तेरा दोस्त जो कि अपनी भाभी को चोदने की बात तुझे बताया था और तेरा वह दोस्त जो अपनी मां को भी चोद़ चुका था वह लोग इसी तरह से अपनी मां और भाभी की बुर में लंड डालकर चोदेे होंगे,,,, और तू केवल चुदाई शब्द ही सुनकर इतना प्रसन्न हो जाता है और अभी तो तुझे चुदाई के बारे में कुछ भी पता ही नहीं है अच्छा यह बताओ तेरे दोस्तों की बात सुनकर तेरा मन भी तो औरत को चोदने को करता होगा।

( शुभम मुंह से तो कुछ नहीं बोला बस हां में सिर हिला दिया,, यह देखकर निर्मला मुस्कुरा दी और बोली।)

लेकिन कैसे,,, तुझे तो चोदना ही नहीं आता है अरे तुझे तो यह भी नहीं पता कि लंड कौन से अंग में डालकर चोदते हैं।
और मेरी बात पर विश्वास ही नहीं कर रहा कि इस बुर में ( ऊंगली से बुर की तरफ इशारा करते हुए )तेरा इतना मोटा लंबा तगड़ा लंड भी चला जाएगा,,,,,(
इतना कहते हुए उसने झट से अपने बेटे के लंड को पकड़ लेी
उसका मन एकदम से मचलने लगा उसके तन-बदन के अंदर फड़फड़ा रहा कबूतर बाहर आने के लिए तड़पने लगा,,,, उसके पास एक बहुत ही सुनहरा मौका था इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी। अपने बेटे के लंड को पकड़कर उस की चुदवाने की प्यास और ज्यादा बढ़ गई थी। उसकी नजर घड़ी पर गई तो तकरीबन पौने 4:00 का समय हो रहा था,,, बारिश का जोर भी धीरे-धीरे कम हो रहा था,,,,, बाप ने बेटी के लंड को मुंह में लेकर चूस ना चाहती थी जबकि उसने आज तक अपने मन से अपने पति का लंड अपने मुंह में नही ली थी,,, वह अपने बेटे से अपनी बुर चटवाना चाहती थी,,, अपनी बड़ी बड़ी चूचियां को उसके हाथों में सौंप कर उसे जोर जोर से मसलवाना चाहती थी,,, और अपनी चूची को उसके मुंह में देकर उसे से चुसवाना चाहती थी,,,,, लेकिन समय और बारिश का जोर कम होता देखकर वह अपने मन की बात को मन में ही दबा दूं क्योंकि यह सब के लिए ज्यादा समय नहीं बचा था,,,,, लेकिन इस समय वह अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में डलवा कर एक नए रिश्ते का उद्घाटन करना चाहती थी। क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी की अगर आज इसका बेटा अपने लंड को उसकी बुर में डाल कर चोद दिया तो वह पूरी तरह से उस का दीवाना हो जाएगा,,,, वह भी आजकी प्यासी रात को अपने बेटे के लंड से चुद कर तृप्त हो जाएगी,,,, और अगर आज चुदाई का कार्यक्रम संतुष्टी जनक से संपूर्ण हो गया तो यह चुसना चटवाना तो हमेशा होता रहेगा,,,, लेकिन जिस तरह से बातों ही बातों में समय बीतता जा रहा हूं अगर ऐसे ही बातें ही करते रहे तो हाथ में आया यह सुनहरा मौका निकल जाएगा और ना जाने भविष्य में ऐसा पल आएे ना आए,,
इसलिए वह अपने आप को पूरी तरह से अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में डलवाने के लिए तैयार कर ली,,,, और इसलिए वह अपने बेटे के लंड को आगे पीछे करते हुए मुट्ठीयाने लगी,,,,
समय रेती की तरह उसके हाथ से सरकता जा रहा था,,, बारिश का दौर एकदम कम हो चुका था और ऐसा लग रहा था कि कभी भी बारिश बंद हो सकती है। अब किसी भी बात को पूछने पुछाने का उसके पास समय नही था। शुभम भी बड़ी आतुरता के साथ अपनी मम्मी के अगले कदम का इंतजार कर रहा था। शुभम को बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी जब ऊसकी मां ऊसके लंड को अपनी मुट्ठी में लेकर आगे पीछे कर रही थी। लंड का मोटा सुपाड़ा निर्मला की बुर में खलबली मचाए हुआ था। धीरे से निर्मला अपने लिए जगह बनाने लगी स्टेरिंग सीट से थोड़ा सा बगल में सरक कर आ गई। वह सीट के बीचो-बीच बैठ गई और अपनी गांड को उचका कर थोड़ा सा सीट के एकदम किनारे पर रख दी,,, शुभम कैसी नजरों से अपनी मां के घर पर को देख रहा था लेकिन उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। उत्तेजना के मारे निर्मला की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी। शुभम का लंड अभी उसके हाथ में था। निर्मला कसमसाते हुए अपनी गांड को थोड़ा सा इधर उधर की,, ऊसकी पेंटी,अभी भी उसके घुटनो में अटकी हुई थी,,,, जिसकी वजह से निर्मला ठीक से पोजीशन नहीं बना पा रही थी इसलिए वह शुभम के लंड को छोड़कर अपने पंटि को अपनी टांगो से उतार फेंकी,,, अब वह कमर के नीचे से बिल्कुल नंगी हो चुकी थी चुचिया तो वह पहले से ही दिखा रही थी । यह सब देखकर शुभम से रहा नहीं गया वह एकदम कामोत्तेजित हो चुका था लेकिन फिर भी जब वह अपनी मां को अपनी पैंटी निकालते हुए देखा तो वह बोला।

यह क्या कर रही हो मम्मी,,,,,

अब कुछ भी बताने का समय नहीं है,,,( इतना कहते हुए उसने अपनी टांगो को फैला ली इससे उसकी रसीली बुर एकदम साफ साफ शुभम को नजर आ रही थी इतना खूबसूरत नजारा उसने कभी नहीं देखा था,,,, इसलिए उसने और कुछ पूछने की जरूरत नहीं समझा वह अपनी मां को टांगे फैलाए सीट पर बैठे हुए देखकर उत्तेजित हो ही रहा था कि तभी उसकी मां ने फिर से शुभम का लंड पकड़ ली और ईस बार वह लंड को आगे की तरफ खींच कर उसके सुपाड़े को अपनी बुर के बिल्कुल करीब ले आई,,, यह देखकर शुभम की सांसे तीव्र गति से चलने लगी

निर्मला की भी हालत इस समय काफी खराब हो रही थी। वह अपने बेटे के लंड के सितारे को अपनी बुर के बिल्कुल करीब एकदम करीब ला कर रुक गई थी,,,, उसके मन में उत्तेजना के साथ-साथ उत्सुकता भी बढ़ती जा रही थी जवान लंड की रगड़ वह भी मोटे और लंबे तगड़े की बुर की अंदर की दीवारों पर कैसा कहर ढाती है इसे महसूस करने की उत्सुकता निर्मला के अंदर बढ़ती जा रही थी। शुभम समझ गया था कि अब उसका सपना पूरा होने वाला है। शुभम कुछ और सोच पाता इससे पहले ही निर्मला ने लंड के सुपाड़े को अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच सटा दी,,,, जैसे ही निर्मला ने अपने बेटे के लंड के सुपाड़े को,,,अपनी बुर की गुलाबी पत्तियो के बीच सटाई वेसे ही ऊसके पुरे बदन मे हलचल सी मच गई ऊत्तेजना के मारे ऊसकी बुर फुलने पिचकने लगी। उसे इस बात का एहसास हो गया कि आज उसकी बुर में एकदम सही लंड जाने वाला है। शुभम की को सबसे ऊपर नीचे हो रही थी वह एक नजर शुभम की तरफ घूमाई और बोली।

अब देख,,,, तू बोलता था ना कि ईतनी छोटी सी बुर में इतना मोटा लंबा लंड कैसे जाएगा देख मे तुझे बताती हूं कि कैसे जाएगा। ( इतना कहते हुए निर्मला ने एकदम ठीक से लंड के सुपाड़े को अपनी बुर के बीचो-बीच टीका दी,,, और बोली)

देख अब कैसे जाता है तू अपनी कमर को आगे की तरफ ठैल,,, अपने लंड को थोड़ा सा धक्का देकर मेरी बुर में डालने की कोशिश कर,,,,
( अपनी मां की बात सुनकर तो शुभम पसीने से तरबतर हो गया उस की पराकाष्ठा की कोई सीमा नहीं थी,,, उसके मन में एक उमंग सी जग़ गई थी,,, चुदाई क्या होती है कैसे होती है आज यह उसकी मा सिखाने वाली थी वह भी अपनी मां की बात को मानते हुए,, अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलना शुरू किया,,,, निर्मला की बुर उत्तेजना के मारे काफी समय से पानी छोड़ रही थी इसलिए उसकी बुर की दीवारें पूरी तरह से गीली हो चुकी थी जिससे शुभम के लंड का सुपाड़ा बुर के अंदर सरकने लगा। इतने से ही निर्मला को आभास हो गया कि उसके बेटे का लंड काफी मोटा है। जैसे-जैसे शुभम अपनी कमर को आगे की तरफ बढ़ा रहा था वैसे वैसे लंड का सुपाड़ा निर्मला की बुर की दीवारों को फैलीता हुआ अंदर की तरफ सरक रहा था और निर्मला को हल्के हल्के दर्द का अनुभव होने लगा। जैसे-जैसे निर्मला की बुर का मुख्य खुल रहा था वैसे वैसे दर्द के मारे निर्मला का भी मुंह खुलता चला जा रहा था। शुभम की तो हालत खराब हुए जा रहीे थीे, उसे इस बात का आभास बिल्कुल भी नहीं था कि बुर की अंदरूनी दीवारें बहुत ही ज्यादा गर्म होती है उसे ऐसा महसुस होने लगा कि उसका लंड गर्मी सें कही पिघल न जाए।
शुभम की हालत खराब हो जा रही थी मुझसे अब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था तो उसके दिमाग पर उत्तेजना पूरी तरह से हावी हो चुकी थी,,, किसी उत्तेजना के चलते वह जोर से अपनी कमर को झटका दिया और इस बार उसका लंड आधे से ज्यादा निर्मला की बुर में समा गया,,,,,,,
लेकिन इस धक्के ने निर्मला की चीख निकाल दिया निर्मला इस धक्के के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं थी,,, वह तो अच्छा हुआ कि वह लोग एकांत जगह पर थे इसलिए उसकी चीख दूसरा कोई नहीं सुन पाया,, शुभम अपनी मां की चीख को सुनकर रुक गया और बोला।

क्या हुआ मम्मी ऐसे क्यों चिल्लाई,,,,

कुछ नही बेटा तेरा दम देख कर मेरी चीख निकल गई तू फिक्र मत कर देख कैसे तेरा आधे से भी ज्यादा लंड मेरी बुर में समा गया है अब धीरे धीरे करके पूरा डाल दे।

( शुभम अभी संभोग के दौरान औरत के मुंह से निकलने वाली चीख से बिल्कुल भी अनजान था उसे इस बात का चेहरा भी ज्ञान नहीं था कि ऐसी चीजें संभोग के दौरान औरत को और भी ज्यादा मस्त कर देती है। शुभम सीख वाली बात पर बिलकुल भी ध्यान ना देते हुए अब फिर से आगे जुट चुका था। पनियाई बुर की वजह से धीरे-धीरे करके शुभम का मंडी आगे बढ़ रहा था और निर्मला को बेहद दर्द की अनुभूति भी होने लगी थी। अपने पति के लंड को जब भी बुर में लेती थी तो कभी भी उसे दर्द की अनुभूति नहीं हुई। वह नजरे नीचे झुका कर अपने बेटे के मोटे लंड को अपनी रसीली बुर के अंदर घुसता हुआ देख रही थी। उसकी सांसे बड़ी तेज चल रही थी और तेज चलती सांसो के साथ साथ उसकी नंगी चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी जोकी शुभम के जोस को और ज्यादा बढ़ा रही थी। आखिरकार धीरे धीरे करके शुभम ने अपने समुचे लंड को अपनी मां की बुर में डाल ही दिया,,
जैसे ही शुभम का पूरा लंड निर्मला की बुर में कहीं खो सा गया हो ऐसा लगने लगा तब निर्मला एकदम प्रसन्न होती हुई शुभम से बोली,,,

देख बेटा अपनी आंखो से देख ले मैं सच कह रही थी या झूठ,,,,,

हमने तुम बिल्कुल सच कह रही हो मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा,,,,( शुभम कांपते स्वर में बोला। उसका पूरा लंड अपनी मां की बुर में डालकर वह अपनी मां की आंखों में देख रहा था। और अपनी मां की आंखों में देखता हुआ बोला।

अब क्या करूं मम्मी,,,,,( शुभम बड़े ही भोले पन से बोला।)

बस अब तू अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए लंड को अंदर बाहर कर के मुझे चोद,,, ईसको ही चुदाई कहते हैं। ( निर्मला बड़े ही उत्तेजनात्मक स्वर मे बोली,,, बस फिर क्या था शुभम शुरू बन गया वह अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाने लगा,,,, उसके अंदर पूरी तरह से जोश बढ़ चुका था निर्मला को शुभम से इतनी तेज झटकों की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी। वह तो सोच रही थी कि शुभम बड़े आराम से धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए ऊसे चोदेगा लेकीन ऊसकी गिनती बिल्कुल ऊलटी पड़ गई थी। शुभम बड़ी तेजी ऊसे चोद रहा था । ऊसकी चुदाई देखकर ऊसका पुरा वजुद हील गया था। ऊसे यकीन नही हो रहा था की शुभम ऊसको चोद रहा है। क्योंकी शुभम अभी बिल्कुल नादान था। लेकीन वह ईस समय पुरी तरह से ऊत्तेजित हो चुका था। ईसलिए ऊसके रुकने का तो सवाल ही नही ऊठता था। वैसे भी निर्मला अब उसे रोकने के लिए और धीरे-धीरे करने के लिए बोल ही नहीं सकती थी क्योंकि जिस रफ्तार से वह अपने लंड को बुर में अंदर बाहर कर रहा था उसे बहुत ही ज्यादा आनंद की अनुभूति हो रही थी।
फच्च फच्च करते हुए शुभम का लंड निर्मला की बुर में अंदर बाहर हो रहा था। शुभम की रफ्तार बिल्कुल भी कम नहीं हो रही थी वह लगातार अपनी मां की बुर में लंड अंदर बाहर करते हुए उसे चोद रहा था। थोड़ी ही देर में पूरी कार निर्मला की गरम सिसकारियों से गूंजने लगी।
सससससहहहहहह,, आहहहहहह,,,,, शुभम क्या मस्त चोद रहा है तू और चोद,,,,आहहहह,,, आहहहहहह,,,,

निर्मला की गरम सिसकारियां सुनकर सुभम का जोश और ज्यादा बढ़ने लगा और वह जोर जोर से धक्के लगाते हुए अपनी मां को चोदने लगा,,,,,
निर्मला की हालत खराब होने लगी थी काफी देर से शुभम एक ही लय मे अपनी मां को चोदे जा रहा था,,,, निर्मला हैरान थी की अभी तक शुभम का पानी नहीं निकला था,,,, शुभम की बुर में धक्के पर धक्का पड़ रहे थे ऊसको जब धक्का बर्दाश्त नहीं हुआ तो वह थोड़ा सा पीछे की तरफ झुक गई।
हर धक्के के साथ निर्मला की बड़ी बड़ी चूचियां ऊछल जा रही थी। इसलिए निर्मला खुद ही अपने बेटे के दोनों हांथ को पकड़ कर अपनी अपनी बड़ी बड़ी चुचीयाे पर रखकर ऊसे जोर जोर से दबाने के लिए बोली ।
शुभम तो दोनों खरबूजे को दोनों हाथ से पकड़ कर जोर जोर से दबाते हुए अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा,,, निर्मला और शुभम दोनों को बहुत मजा आ रहा था उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसे एकांत में तूफानी बारिश में वो लोग इस तरह की पार्टी मनाएंगे। तकरीबन चालीस 45 मिनट तक शुभम अपनी मां की बुर को रौंदता रहा। और उसके बाद दोनों एक साथ झड़ गए,,,, जब सुभम झड़ने वाला था तो निर्मला को इस का आभास हो गया और उसने कसके अपने बेटे की कमर को पकड़ कर अपनी बुर में दबाए रखी ताकि वह ऊसकी बुर में हि झड़े,,, तूफान एकदम से शांत हो गया था कार के अंदर वासना का अौर कार के बाहर बारीश का,,,
निर्मला ने घड़ी देखी तो 5:00 बज रहा था सुबह हो चुकी थी बारिश भी एक दम से थक चुकी थी अब दूर दूर तक गाड़ियों की हेडलाइट नजर आ रही थी अब यहां पर रुकना ठीक नहीं था इसलिए निर्मला ने जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहन कर एकदम से तैयार हो गई और गाड़ी को वापस हाईवे पर लाकर घर की तरफ बढ़ा दी।

vnraj
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Re: अधूरी हसरतें

Post by vnraj » 27 Nov 2017 23:08

ऊफफफफफफ भाई ईस तरह के हालात हो तो हजारों पार्टी कूरबान गजब का मस्ती वाली और सबकी टनटनाने वाली अपडेट दिया है आपने

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007
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Re: अधूरी हसरतें

Post by 007 » 28 Nov 2017 21:55

hot update
(¨`·.·´¨) Always

`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &

(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !

`·.¸.·´
-- 007

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