ज़िन्दगी एक सफ़र है बेगाना

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Ankit
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Re: ज़िन्दगी एक सफ़र है बेगाना

Post by Ankit » 06 Dec 2017 11:45

superb update

Re: ज़िन्दगी एक सफ़र है बेगाना

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rajsharma
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Re: ज़िन्दगी एक सफ़र है बेगाना

Post by rajsharma » 06 Dec 2017 12:45

achha update hai Jay paji
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj sharma

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jay
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Re: ज़िन्दगी एक सफ़र है बेगाना

Post by jay » 06 Dec 2017 16:45

thanks to all friends
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(ज़िन्दगी एक सफ़र है बेगाना running.......).
(वक्त का तमाशा running)..
(ज़िद (जो चाहा वो पाया) complete).
(दास्तान ए चुदाई (माँ बेटी बेटा और किरायेदार ) complete) .. (सातवें साल की खुजली complete)
(एक राजा और चार रानियाँ complete).............(माया complete...)-----(तवायफ़ complete).............
(मेरी सेक्सी बहनें compleet)........(दोस्त की माँ नशीली बहन छबीली compleet)............(माँ का आँचल और बहन की लाज़ compleet)..........(दीवानगी compleet )....... (मेरी बर्बादी या आबादी (?) की ओर पहला कदमcompleet)........(मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग)........


Read my fev stories

(कोई तो रोक लो)
(ननद की ट्रैनिंग compleet)..............( सियासत और साजिश)..........(सोलहवां सावन)...........(जोरू का गुलाम या जे के जी).........(मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन)........(कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास)........(काले जादू की दुनिया)....................(वो शाम कुछ अजीब थी)

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jay
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Re: ज़िन्दगी एक सफ़र है बेगाना

Post by jay » 06 Dec 2017 16:46

हम इस तरह की डिसक्यूसषन कर ही रहे थे कि कोई 15-20 मिनट में ही एसपी का फोन आ गया, हमारी समझ में आ गया कि उन्होने इस मामले को सीरियस्ली लिया है.

फोन उठाते ही एसपी ने बताया कि उनकी बात कमिशनर साब से हो चुकी है, उन्होने भी चिंता जताते हुए मीटिंग का समय दे दिया है, अब हमें कल सुबह 10 बजे उनके ऑफीस पहुँचना है.

हम प्रिन्सिपल साब को गुड नाइट बोलके हॉस्टिल आ गये, मेस में खाना खाया और बिस्तर पे लेट गये, थकान की वजह से जल्दी नींद आ गयी.

सुबह मे और प्रिन्सिपल सर उनकी जीप से कमिशनर ऑफीस पहुँचे, एसपी वहाँ पहले से मौजूद थे.

कमिशनर के सामने प्रिन्सिपल ने मेरा परिचय दिया, मुझे देखकर वो बड़े खुश हुए, और हाथ मिलाया.

बैठो आप लोग, और बताओ क्या सिचुयेशन है..? कमिशनर साब बोले.

प्रिंसीपल- सर ये सब अरुण ही बताए तो ज़्यादा उचित होगा.

कमिशनर ने मेरी ओर देखा और बोलने का इशारा किया..हॅम..

मैने उन्हें सारी डीटेल्स नामों के साथ दी, वो कुछ चिंतित हो गये, कुछ देर शांति छाई रही.. फिर एसपी की तरफ रुख़ करके बोले..

कमिश्नर- एसपी , क्या कहना चाहोगे इस मामले मे, देखो पहले ही हम समाज सेवियों की वजह से प्रेशर में हैं, मीडीया भी पीछे लगा है, अब अगर इस मामले में भी कुछ नही किया, तो जबाब देना मुश्किल हो जाएगा.

एसपी कुछ बोल ही नही पाए, कुछ देर इंतजार करने के मैने कहा- सर मे कुछ कहूँ..?

कमिश्नर- हां-हाँ बोलो क्या कहना चाहते हो..?

मे- सर पोलीस का आप देखो, गुण्डों से हम निपट लेते हैं.

कमिश्नर- इतना आसान नही है यंग मॅन..! वो गुंडे बहुत पवरफुल हैं, उनके पास में पवर, मनी पवर, पॉल्टिकल पवर सब कुछ है.. कर पाओगे उनका मुकाबला..?

हमारे महकमे ने कई बार हकीम लुक्का पर हाथ डालने की कोशिश की है, लेकिन ना तो कोई ठोस सबूत मिला और उपर से पोलिटिकल प्रेशर और झेलना पड़ा सो अलग.

मे- उसका कारण भी आपकी पोलीस ही है सर, जिन लोगों को आपने कार्यवाही के लिए भेजा होगा, वो या तो उससे पहले से ही मिले होंगे या उसने खरीद लिया होगा.
और रही बात पावर की, तो सर हमारे पास सच्चाई की पवर है, देश के लिए कुछ कर गुजरने के जज़्बे की पवर है, आप पोलीस को संभलो, हमारे बीच में ना आए, जहाँ एक बार ये मामला सड़क पे आ गया, नेता भी अपनी साख बचाने के चक्कर में मुँह छिपाके बैठ जाएँगे एक कोने में छिप कर.

कमिश्नर मुँह बाए मेरी तरफ देखने लगे…! कहीं तुम चंद्रशेखर आज़ाद का पूनर जन्म तो नही हो..? वो बोले..तो प्रिन्सिपल और एसपी ठहाका लगाए बिना नही रह सके उनकी बात सुनकर..

मे- मुस्कराते हुए..! नही सर मे उस दिव्यात्मा के पैरों की धूल के बराबर भी नही हूँ, हां एक जज़्बा ज़रूर है कुछ अच्छा करने का.

कमिश्नर- देखो बच्चे, हम तुमसे सहमत हैं, और इसकी इजाज़त भी दे सकते हैं, परंतु ये मामला सड़कों तक ना पहुचे तो हम सबके लिए अच्छा रहेगा.

मे- नही पहुँचेगा सर..! लेकिन उससे पहले जितने करप्ट पुलिस वाले इसमें इन्वॉल्व हैं, उन्हें आपको साइड लाइन करना होगा.

कमिश्नर- एसपी, शहर के सभी थानों की लिस्ट निकालो, आप खुद कंट्रोल रूम से फोर्स लेकर उनपर दबिश दो, जो नाम अरुण ने बताए हैं उन सभी हरामी पुलसियों के खिलाफ आक्षन लो और सेकेंड लाइन को टेम्पररी चार्ज देदो, बाद में अपडेट कर लेंगे.

एसपी- यस सर, आज शाम 4 बजे तक रिपोर्ट आपके टेबल पर होगी..!

कमिश्नर- गुड.. , तो अरुण अब बोलो तुम्हारा क्या प्लान है..?

मे- सर मेरी रिपोर्ट कल सुबह के न्यूज़ पेपर के ज़रिए आप तक पहुँच जाएगी…!

कमिश्नर- चोन्क्ते हुए…! क्या मतलब..? क्या करने वाले हो..?

मे- अभी सर मे कुछ नही कह सकता.., अपने दोस्तों के साथ प्लान बना के ही कुछ फाइनल करूँगा.. हां इतना कह सकता हूँ, कि हकीम लुक्का कल या तो ईश्वरपूरी पहुँच चुका होगा या मेंटल हॉस्पिटल में.
तीनो अधिकारी गहरी नज़रों से मेरी ओर देखते रह गये, मे अपनी सीट से उठ खड़ा हुआ… और प्रिन्सिपल से बोला.. चलें सर.

प्रिन्सिपल जैसे नींद से जागे.. आन्ं.. हां चलो, चलते हैं.

मे- रुक कर..! एक मिनट !, एसपी साब एक फेवर करेंगे..?
वो बोले- हां बोलो..

मे- मुझे 8 उन औथराइज्द गन्स चाहिए ! मिलेंगी..? मे वादा करता हूँ वापस कर दूँगा..

वो बोले- नही-2 इसकी कोई ज़रूरत नही है, लेकिन उनका भविष्य में ग़लत इस्तेमाल ना हो…बस.

मे- प्रॉमिस सर..! ग़लत इस्तेमाल ग़लत लोग करते हैं, और विस्वास करिए, हम में से कोई भी ग़लत नही है.

कमिश्नर- हमें तुम पर पूरा भरोसा है माइ बॉय, और फक्र भी. तुम जैसे अगर 5-10% लोग भी इस समाज में हों तो इस तरह की बुराइयाँ पनप ही ना सकें, क्यों प्रिन्सिपल साब में सही कह रहा हूँ ना..

प्रिंसीपल- बिल्कुल सच कहा सर आपने, इस लड़के ने हमारे कॉलेज को बर्बाद होने बचाया ही नही, अपितु नाम रोशन किया है.. पूरा कॅंपस इसका काफ़ी दिनों तक अभारी रहेगा, और शायद ये शहर भी.

एसपी ऑफीस से गन लेके हम निकल पड़े कॅंपस की ओर..

रास्ते में मैने प्रिन्सिपल साब से जीप यूज़ करने की पर्मीशन माँगी, तो उन्होने फ्री ऑफ हॅंड कुछ भी असेट्स उसे करने की अनुमति मुझे देदि.
प्रिन्सिपल साब अपने ऑफीस चले गये, मे अपने क्लास रूम मे चला गया, वहाँ से अपने दोस्तों को पकड़ा, फिर दूसरे चारों को बुलवाया और सभी हॉस्टिल में आ गये.

मे- बी सीरीयस दोस्तो, अब में जो कहने जा रहा हूँ, वो शायद आप लोगों को पसंद ना हो, लेकिन अब पीछे मुड़ने का चान्स नही रहा, अब सिर्फ़ आगे ही बढ़ा जा सकता है.

मुझे पता है कि हम अगर अपनी पूर्ण इक्षा शक्ति का उपयोग करें तो हम 8 जने 20 लोगों के बराबर हैं, और यही कॉन्फिडॅन्स हमें आज दिखाना है, मैने अपने ड्रॉयर से 8 खुकरी (कटार) म्यान के साथ निकाली और सबको 1-1 पकड़ा दी,

फिर 8 मंकी कॅप निकाले वो भी बाँट दिए..

मेरे प्लान के मुताबिक, वैसे तो हमें इन खुक्रियों की शायद ही ज़रूरत पड़े, फिर भी अगर उसे करनी पड़े, तो आप लोग मौके के हिसाब से खुलकर यूज़ कर सकते हो… ध्यान रहे, ज़रूरत पड़े तो.

अब हमें जल्दी से लंच लेके निकलना है, हो सकता है अब हम देर रात या कल सुबह ही लौट पाएँ.

सभी लोग मेरे मुँह की तरफ ही देखे जा रहे थे मानो मे कोई अजूबा हूँ या दूसरे गृह का प्राणी..

फिर भी कपिल से रहा नही गया, तो वो बोला- अरुण वैसे तो हम सब वचन बद्ध हैं, तुम्हारे कंधे से कंधा मिलकर चलने के लिए, फिर भी में चाहता हूँ कि जो भी हमें आज के दिन में करना है, उसे एक बार डीटेल डिसक्यूसषन करलें तो कैसा रहे..
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Re: ज़िन्दगी एक सफ़र है बेगाना

Post by jay » 06 Dec 2017 16:47

बिल्कुल ! और ये बात मुझे तुमसे एक्सपेक्टेड थी, ध्यान से सुनो, हमारे पास 4 अड्डों के अड्रेस हैं, उन चारों से हमें मुख्य अपराधी को उठाना है, मुझे नही लगता कि इस काम में हम में से 4 से ज़्यादा लोगों की ज़रूरत पड़े.

थोड़ी सी समय के हिसाब से ट्रिक लगाके काम किया जाए तो दो ग्रूप में, दो-दो के हिसाब से ये काम शांति पूर्वक 5-6 बजे तक निपट सकता है.

पोलीस की हमें परवाह करने की ज़रूरत नही है, लोगों को सिर्फ़ तमाशे से मतलब है, जैसा हम सब जानते हैं पब्लिक के बारे में.

रोहन – पोलीस की परवाह क्यों नही है..?

मे- पोलीस कहीं भी किसी मौके पर हम लोगों को नही मिलेगी, और अगर बाइ चान्स कोई एक-आध मिल भी जाए, तो उसे बोलना एसपी से बात करो.. बस.

आज शाम 4 बजे से पहले-2 सारे करप्ट पुलसीए एसपी ऑफीस में रेमंड पर पहुँच चुके होंगे, ये सब सीक्रेट प्लान है जो शायद शुरू भी हो गया होगा.

सभी एक साथ—क्या…??? क्या बोल रहा है यररर… सच में…?

मे- स्माइल के साथ.. हां.. बिल्कुल सच..!

उन चारों मुख्य बदमाशों को 5 बजे तक हमें अपने गुप्त ठिकाने तक पहुचाना ही होगा किसी भी सूरत में,

फिर हमने ल्यूक लिया और 4-4 के दो ग्रूप बनाए, ईस्ट ग्रूप-धनंजय, सागर, मोहन, जगेश.

सेकेंड ग्रूप- कपिल, रोहन, ऋषभ और अरुण.

उसके बाद अपने-2 शिकार बाँट कर हम निकल लिए...,
कॅंपस में दो महिंद्रा जीप थी, दोनो की चाबी ऑफीस से ली, और ग्रूप वाइज़ चल दिए अलग-अलग दिशाओं में…

थोड़ी बहुत मशक्कत के बाद हमारा आज का पहला मिशन पूरा हो गया, चारों मैं डीलरों को उठा लिया गया, हां हमारे वाले एक अड्डे पर एक चमचा ज़्यादा नौटंकी कर रहा था, अंदर जाने ही नही दे रहा था, तो ऋषभ ने उसे पेल दिया.

पता नही वो मरा या जिंदा रहा होगा, किसको फ़ुर्सत थी देखने की.

दूसरे ग्रूप में जगेश को थोड़ी चोट आ गई थी, बचते-बचाते भी एक गुंडे का चाकू उसके बाए शोल्डर को कट लगा ही गया था.

चारो गुण्डों को लाके अशरफ के साथ ही बाँध दिया गया, अशरफ को थोड़ा चाइ नाश्ता कराना नही भूले थे हम, इंसानियत का इतना तो तक़ाज़ा बनता ही है. और वैसे भी कल से भूखा प्यासा था बेचारा.

वे चारों गुंडे अशरफ को खा जाने वाली नज़रों से घूर रहे थे.

इन सबको उठाने का हमारा मेन मकसद था, लुक्का को अपाहिज़ बना देना.

सारे भृष्ट पुलसीए, शाम होते-होते एसपी की रेमंड में पहुँच चुके थे..
……………………………………………………………………….

इतनी सारी बुरी खबरें सुन-सुन के हकीम लुक्का तिलमिला रहा था, वो सोच भी नही पा रहा था कि अचानक ये हुआ तो कैसे हुआ, और किसके आदेश से हुआ..?

अभी शाम के 8 ही बजे थे, और इस समय लुक्का अपने क्लब ब्लू बर्ड में था, और बुरी तरह भन्नाया हुआ था.

और इसका असर उसके अपने आदमियों को झेलना पड़ रहा था.

क्लब की हॉल नुमा लॉबी में जुए, और ड्रग्स के दौर चल रहे थे, सुंदरियाँ अपने ग्राहकों का मन बहलाने का भरसक प्रयास कर रही थी,

सारे हॉल में स्मेक, चरस, गांजे की स्मेल फैली हुई थी..

लॉबी क्रॉस करके काउंटर के साइड से होते हुए एक गेट के ज़रिए अंदर जाया जाता था, जहाँ अपने ऑफीस में लुक्का अपने खास सिपहसालारों के साथ बैठा था.

हकीम लुक्का एक 6’3” लंबा, भारी भरकम कद काठी वाला मीडियम कलर का इंसान था, उसके मजबूत शरीर से अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि उसमें कितनी ताक़त होगी.

लुक्का के दोनो तरफ दो अर्धनग्न सुंदरियाँ बैठी उसे जाम पिला रही थी, नशे में लुक्का की आँखें दहक्ते अँगारे की तरह लग रही थी.

लुक्का आज खुश नही था और उसकी खुशी को छीनने वाले कॉन हैं ? उसे ये भी नही पता था ? वो तो इस सब के पीछे पोलीस की आज की कार्यवाही को ही मान रहा था.

रात के करीब 11 बज चुके थे ज़्यादा तर ग्राहक या तो जा चुके थे, या वो नशे की अधिकता के कारण अपनी अपनी जगहों पर लुढ़के पड़े थे.

तभी वहाँ 4 नौजवान दाखिल हुए, आवरेज हाइट और कद के इन नौजवानों के चेहरों पर हल्की-हल्की दाढ़ी थी, जो उनकी उम्र से कुछ अधिक लग रही थी.
लेकिन क्लब की धुंधली सी, अधूरी सी रोशनी में पता नही चल रहा था कि उनकी ये दाढ़ी असली है या नकली.

वो चारों सीधे काउंटर पर पहुँचे, और वहाँ जाकर खड़े हो गये, काउंटर के पीछे बैठे शख्स ने उनसे पुछा, बोलिए किससे मिलना है ?

उनमें से एक नौजवान बोला- हमें तुम्हारे बॉस हकीम लुक्का से मिलना है, उसको बोलो राजपुरा से राका आया है,

वो बंदा अंदर गया, इतने में पीछे से चार और नौजवान लॉबी में अंदर घुसे, घुसते ही उन्होने मेन गेट बंद कर दिया और वहाँ लुढ़के पड़े नशेडियों के बीच में वो भी लुढ़क गये, मानो वो उनमें से ही हों.

अंदर जाकर उस बंदे ने जब लुक्का को बताया, कि कोई राजपुरा का राका नाम का आदमी अपने 3 साथियों के साथ आया है, आपसे मिलना चाहता है…

लुक्का सोच में पड़ गया, वो किसी राका से पहले कभी नही मिला था, फिर ये कॉन है ? फिर कुछ सोचते हुए उन्हें अंदर बुलाने को कहा.

वो बंदा बाहर आया, और उसने उन नौजवानो को अंदर जाने को कहा.

सामने ही एक मास्टर सोफे के उपर लंबा चौड़ा लुक्का किसी बादशाह की तरह बैठा था, उसके पीछे उसके 5 हट्टे-कट्टे ख़ूँख़ार से दिखने वाले गुंडे अपने सीनों पर हाथ बँधे खड़े थे.

बगलों में सोफे पर दो अर्धनग्न लाड़िकयँ उससे चिपकी हुई बैठी थी, लुक्का ने अपने दोनो बाजू, उनकी नंगी कमर मे डाले हुए थे.

जैसे ही वो नौजवान उसके सामने पहुँचे, वो उन चारों की ओर सवालिया नज़रों से देखने लगा.

तुम में से राका कॉन है ?

एक नौजवान आगे बढ़ा और उसने लुक्का की तरफ अपना हाथ बढ़ा दिया.
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