काला साया

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rajsharma
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Re: काला साया

Post by rajsharma » 10 Nov 2017 18:39

बहुत ही अच्छी कहानी है डॉली अगले अपडेट का इंतजार है
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj sharma

Re: काला साया

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Dolly sharma
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Re: काला साया

Post by Dolly sharma » 11 Nov 2017 08:50

ढाबे का मालिक:-मुझे बचाने के लिए आपका बहुत-2 धन्यवाद,ये लीजिए आज से में अपनी अमानत आपको देता हूँ जो मुझे भी किसी आप जैसे ही प्राणी ने दिया था..!

में:-मेरे जैसे प्राणी से आप क्या कहना चाहते है..!

मालिक:-एक बार आसमान की ओर देखकर बस हँस देता है..!

आपको आपके जवाब आपकी मंज़िल पर मिल जाएँगे और ये लीजिए आज से ये आपकी अमानत है..!

फिर मेने वो वो छोटे कपड़े में बँधी हुई चीज़ को ले लिया,में उस आदमी को मना नही कर पाया..!

फिर मेने देखा कि मेरी फॅमिली पूरे गुस्से से मेरी तरफ बढ़ रही थी..!

लेकिन मेरे पास आने से पहले ही वो दुकान के मालिक की तरफ मूड गये..!

जय:-अजीब आदमी हैं आप अपना ढाबा छोड़ कर आप बाहर खड़े हैं,बताइए कितना बिल हुआ आपका..!

ढाबा.मालिक:-अरे इन्होने पूरे पैसे दे दिए मुझको..!

उसने मेरी तरफ इशारा करते हुए बोला और जब मेने उसकी ओर देखा तो उसने अपने हाथ जोड़ लिए..!

फिर हम सब कार में आए और मेने जय को ड्राइव करने को बोला और खुद आगे आ गया..!

जय ने कार हाइवे की तरफ दौड़ा ली तभी मेने साइड-व्यू मिरर में देखा एक आदमी को जिसका सर चमक रहा था और मेने अपना सर कार की विंडो निकाल के देखा तो वहाँ कोई नही था..!

फिर में आज की घटनाए सोचते-2 सो गया,लेकिन कुछ ही देर बाद मुझे अहसास हुआ कि कुछ जल रहा है,बहुत ही गरम चीज़ का ऐहसास हो रहा था और उसी वक़्त मेरी नींद भी खुल गयी.!

मेने अपने हाथ में पकड़ी पोटली को देखा तो वो चमक रही थी,मेने जैसे ही उसे खोला उसमे एक पत्थर था जो काफ़ी चमक रहा था..!

मेने जैसे ही अपना हाथ आगे बढ़ा कर उस पत्थर को छुआ मेरा हाथ ही जल गया,वो किसी जलते लावे की तरह गर्म था..!

मेने तुरंत उस पोटली को बाँध के फिर से अपनी जेब में रख लिया..!

फिर अचानक कार रुकी और मेने सामने की ओर ध्यान दिया..!

मासी माँ:-राज हम पहुँच गये,बस अब मेरी फ्रेंड का घर ढूंडना है..!

में:-यार कहाँ इस गाँव में लाके मुझे फसा दिया..!

फिर जय ने एक जगह कार पार्क की और हम उसमे से बाहर निकले..!


बाहर आके मेने ज़ोर से अंगड़ाई ली,क्योंकि बैठे-2 मेरे शरीर में दर्द होने लगा था..!

फिर हम आगे बढ़ने लगे.!
ये एक बहुत ही अजीब गाँव था जहाँ सब हमें बहुत ही अजीब तरीके से घूर रहे थे..!

फिर भी हम उन्हे इग्नोर करते हुए आगे बढ़े..!

तभी मेने देखा कि कुछ लोग जीप से कहीं जा रहे थे पर जैसे ही उन्होने हमें देखा वो रुक गये..!

वो सारे आदमी अपनी जीप से उतर कर हमारे पास आ गये..!

आदमी:-ओये छोरे,के लेने वास्ते आया है तू इधर..!

में कुछ नही बोला बस उन्हे अब्ज़र्व कर रहा था..!.

आदमी2:-मालिक काम-वाम छोड़ो देखो कितनी हसीन माल है इस छोरे के साथ,अगर मिल जाए तो ज़िंदगी बन जाएगी..!

आदमी:-बात तो तू ठीक कहे है..!

सुन ओये छोरे इन लड़कियो नू मेरे हवाले कर्दे हम तुझे छोड़ देंगे..!.

और ये ठाकुर भानु का वादा है जब मेरा और मेरे साथियो का इनसे मन भर जाएगा तो में उन्हे तेरे यहाँ भेज दूँगा..!

और इतना बोलकर वो हँसने लगा,और साथ में उसके साथी भी..!

पर कहते हैं ना अगर कोई कुछ ना बोले तो उसे कमजोर नही समझना चाहिए,साला इन्होने तो हद ही पार कर दी..!

में:-जय तू सबको लेके कार में जा और में इनकी सारी गर्मी निकालता हूँ..!

जय:-राज पर..

में:-जय प्ल्ज़ भाई.,!

उसके जाते ही में उनकी ओर बढ़ा..!

में:-हाँ तो भाई लोग क्या बोल रहे थे तुम सब..!

अभी मेने इतना बोला ही था कि सब हँसने लगे..!

ठाकुर:-क्यों सुनने में परेशान हो क्या..!

में:-अभी पता चल जाएगा..!

और में उस ठाकुर के पास जाके उसके सामने खड़ा होगया और उसकी आँखों में देखते हुए बोला,तेरी माँ तो अब में चोद दूँगा..!

और इतना बोलकर मेने उसे सर से पकड़ा और उसे उठा के उसको ज़ोर से ज़मीन पर पटक दिया,उसने ज़मीन पर गिरते ही दम तोड़ दिया और उसका सर किसी फटे टमाटर की तरह हो गया..!

मेने ये सब इतनी जल्दी किया कि किसी को समझ नही आया और जबतक उन्हे समझ आया तबतक देर हो चुकी थी..!

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Dolly sharma
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Re: काला साया

Post by Dolly sharma » 11 Nov 2017 08:51

सारे गाँव वाले मुझे ऐसे घूर रहे थे जैसे में कोई अजूबा हूँ..!

तबतक मेरी फॅमिली मेरे पास आ गयी और फिर मासी माँ ने एक आदमी से उनके फ्रेंड के बारे में पूछा..!

बेचारा वो आदमी डरते-2 हमें अड्रेस बता रहा था..!

में:-आप सब हमसे डरो मत..!
हम आपको कोई नुकसान नही पहुँचाएंगे..!

और ये बोलकर में मासी माँ और सब के साथ आगे बढ़ गया..!

कुछ दूर चलने के बाद हम एक घर के सामने रुके जो बिल्कुल जंगल से सॅट के था..!

मासी माँ ने डोर नॉक किया तो एक ब्यूटिफुल औरत ने दरवाजा खोला,और ये ही थी मासी माँ की फ्रेंड..!

दोनो एक दूसरे को देखते ही बहुत जोश से गले मिली..!

मासी माँ ने मुझे बताया था कि वो यहाँ कोई रिसर्च कर रही है पर क्या ये शायद उन्हे भी नही पता..!

फिर मासी माँ ने अपनी फ्रेंड को मेरी तरफ टर्न किया,जिन्हे मेने हेलो बोला फिर हम सब अंदर आ गये..!

ये घर भी बाकी नॉर्मल घरो जैसा था पर इस गाँव का तो सबसे सुंदर घर था ये..!

हम अंदर आके मैं हॉल में सोफे पे बैठ गये..!

फिर मासी माँ और उनकी फ्रेंड बाते करते हुए किचन की ओर बढ़ गयी..!

कुछ देर बाद वो आई तो दोनो के हाथो में ट्रेस थे,जिसे वो टेबल पे रखकर सबको सर्व करने लगी..!

मासी माँ मुझे कॉफी पकड़ाते हुए बोली राज जैसा कि तुम जानते हो ये मेरी फ्रेंड है & हर नेम ईज़ कनक..!

में:-ओके.!

मासी माँ:-राज ये तुमसे अकेले में कुछ बात करना चाहती है,& आइ होप तुम्हे इनकी कंपनी अच्छी लगेगी..!

फिर में उठा और कनक के पीछे-2 चलने लगा और हम टॉप स्टेर्स पे आके रुके..!

में:-क्या में आपको कनक बुला सकता हूँ,मेने बहुत नॉर्मल वाय्स में पूछा..!

कनक:-हाँ श्योर,सो राज आप मुझे अपने बारे में सब कुछ बताओ..!

फिर क्या था मेने बताना शुरू किया अपने ड्रीम्स,फिर उस आंटिडोट और फिर यहाँ आने के सफ़र तक घटी सब घटनाओ के बारे में..!

जिसे सुन कर उनके हाथो से उनका कॉफी कप छूट गया..!

कनक:-व्हाट दा फक.!
इट'स क्वाइट स्ट्रेंज..!

मुझे कल तुम्हारे सारे टेस्ट करने हैं,अभी तुम जाओ और जाके रेस्ट करो तुम काफ़ी थक गये हो..!

पता नही क्यो उनके बोलने के तरीके से ऐसा लगा जैसे वो मेरे बारे में बहुत कुछ जानती हो..!

पर मेने उनसे कुछ नही बोला और चुप-चाप नीचे आ गया..!

मुझे कुछ भी अच्छा नही लग रहा था तो में घर से बाहर निकल कर उसी जगह आ गया जहाँ मेने उन बन्दो को मारा था..!

मेने देखा वहाँ कुछ लोग वहाँ रहने वाले लोगो को मार रहे थे..!

मेरे आते ही वो सब रुक गये तभी उनमे से एक बोला..!

ओये छोरे नया आया है के..!

आदमी2:-ओये ये बता क्या तू जानता है हमारे मालिक को किसने मारा है..!

में:-हँसते हुए बोला,मेने..!

सब एक पल के लिए शॉक हो गये,अच्छा बे खुद को बहुत स्याना समझता है,तुझे पता भी है तूने किससे मारा है,ठाकुर राणा के एकलौते बेटे को..!

उनका आदेश है कि गुनहगार को जल्द-से-जल्द हवेली लाया जाए वरना वो सभी गाँव वालो को मार देंगे..!
उनमे से एक ने बोला..!

में:-बाप का राज है क्या मार दोगे सबको जाके बोल दो अपने ठाकुर से कि में उनका पालतू कुत्ता नही हूँ,उन्हे अगर मुझसे मिलना है तो वो खुद मुझसे आके मिले..!.

वरना माँ चुदाये ठाकुर और माँ चुदाओ तुम उसके पालतू कुत्ते..!

आदमी:-तू रुक जा हम फिर आएँगे,साले तब तेरी हेकड़ी निकालेंगे..!
उसने डरते हुए बोला..!

उसके जाते ही में गाँव वालो को शांत रहने का बोलके घर आ गया..!

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Dolly sharma
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Re: काला साया

Post by Dolly sharma » 12 Nov 2017 19:06

घर आया तो देखा भाभी जय और पायल बाते कर रहे थे,पर वहाँ मासी माँ और कनक मौजूद नही थे..!

फिर मेरे आते ही जय मेरे पास आया और कान में वो बोला जिसे सुन के में तो पूरा शॉक हो गया..!

जय:-क्या यार तू इतना गिर जाएगा मेने सोचा नही था..!

बाते तो बड़ी-2 करता था कि तुझे लड़कियाँ बस एक रात के लिए चाहिए होती हैं,और डेली नयी लड़की,पर तू तो पायल के पास गिड़गिडाता है..!

साले पायल है लेकिन बहुत अच्छी लड़की,चाय्स अच्छी है तेरे..!

में:-शॉक्ड टोन में बोला,भाई तू कहना क्या चाहता है..!.

जय:-यही कि तू पायल से प्यार करता है,उसके लिए मरता है पर उसे तुझमे कुछ ख़ास इंटेरेस्ट नही है.!

में:-तुझे ये सब किसने बताया..!..

जय:-पायल ने यार.!

में जैसे ही सोफे के पास पहुँचा तो दोनो की नज़र मुझपे गयी..!.

आक्च्युयली उनकी पीठ मेरी तरफ थी और अभी तक उन्होने मुझे नही देखा था..!.

सबसे ख़ास बात ये थी कि पायल की तो बोलती ही बंद हो गयी मुझे देख कर..!

भाभी:-राज आइ'म वेरी हॅपी फॉर यू,आख़िर तुम्हे भी कोई लड़की पसंद आ ही गयी..!

में:-पायल क्या तुम दो मिनट के लिए मेरे साथ आओगी प्ल्ज़..!

पायल:-यार आप यही बोलो में सुन रही हूँ..!

में:-पायल,मेने उसे आँख दिखाते हुए बोला.!

पायल:-चलती हूँ वेट,गुस्सा क्यो हो रहा है..!

फिर हम एक रूम में आए और मेने तुरंत डोर लॉक कर दिया..!

पायल तुरंत जाके बेड पे लेट गयी..!

में:-तुम इतनी उत्तावली हो क्या कि में तुम्हारे साथ कुछ करूँ..!

मेरे इतना बोलते ही वो बेड से उठ कर मेरे पास आई और बोली,ऐसा सोचना भी मत..!

में:-तुमने सबको ये क्यो बोला कि मेरे और तुम्हारे बीच कुछ चल रहा है,और तो और में तुमपे बिल्कुल फिदा हूँ..!

पायल:-वो-2,वो तो मेने थोड़ा इंप्रेशन जमाने को बोला था,वरना तुम जैसे लंगूर से प्यार,ईईईह.!

में:-तेरी तो रुक इधर,में लंगूर हूँ,हाँ बोल-2,और में अचानक उसे लेके बेड पे गिर गया..!

में बिल्कुल उसके उपर था,मेरे और उसके लिप्स बिल्कुल पास में थे,लेकिन तभी में उसके उपर से हॅट गया,एक बार तो उसने मेरा हाथ पकड़ के मुझे रोकना चाहा पर में नही रुका..!

बाहर आया तो देखा डिन्नर रेडी है और सब टीवी देखते हुए,डिन्नर कर रहे थे..!

मेरे आते ही कनक ने मुझे डिन्नर सर्व किया,जिसे मेने बेमन से खाया..!

में:-यार मुझे सोना है,बहुत थक गया हूँ,तो कोई सबसे बेस्ट रूम बताओ..!

कनक:-टॉप फ्लोर पर बस एक ही रूम है,बट वो सबसे शांत रूम है,वहाँ से ये पूरा जंगल दिखता है..!

फिर क्या था जल्दी से डिन्नर किया और अपने बॅग्स लेके उपर आ गया..!

फिर फ्रेश होके शवर लिया और बाल्कनी से ठंडी-2 हवा और उस सुहाने मौसम का मज़ा लेने लगा..!

कुछ देर वहाँ रहने के बाद में रूम में आने के लिए मुड़ा,पर अचानक मेने उस जंगल के आख़िरी छोर पे कुछ चमकती हुई चीज़ को देखा.!

जो मुझे अपनी तरफ बहुत ही ज़्यादा अट्रॅक्ट कर रही थी..!

में इतना खो गया था कि 5 मंज़िल से नीचे कूद गया और सीधा जंगल में आ गया..!

चोट तो बहुत आई पर जल्द ही सारे घाव भर गये,पर मुझे उस चमकती
चीज़ के पास जल्द से जल्द पहुँचना था..!

फिर में बस आगे बढ़ता गया,मुझे खुद नही पता था कि में जा कहा रहा हूँ..!

करीब 20 मिनट लगातार चलने के बाद भी में जंगल के आख़िरी छोर पर नही पहुँचा..!

अब पता नही क्यो मुझे ऐसा लग रहा था कि कुछ बहुत ख़ास मुझसे दूर जा रहा है..!

में लगभग दौड़ते हुए आगे बढ़ रहा था,मुझे पता ही नही चला कि कब में हवा में उड़ने लगा..!

अचानक में रुका और तेज रफ़्तार की वजह से में पेड़ से टकरा गया,वो पेड़ उसी वक़्त ख़तम हो गया..!

तभी मेने वो रोशनःी देखी में जब उसके पास पहुँचा तो वहाँ कोई नही था,वहाँ बस एक नदी थी..!

मेने जैसे ही उसमे झाँका तो देखा कि कुछ था जो मुझे उस नदी की ओर खींच रहा था..!.

में बेखौफ़ उसमे आगे बढ़ता गया बढ़ता गया,कुछ ही देर में नदी के अंदर था,बिल्कुल बीच में..!

तभी मेने एक बहुत ही मीठी आवाज़ सुनी..!

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Re: काला साया

Post by Dolly sharma » 12 Nov 2017 19:07

तुम यहाँ खुद नही आए,तुम्हारा यहाँ आना लिखा था..!
यही तुम्हारा अतीत भी है और यहीं तुम्हारा आने वाला भविश्य.!
तुम्हे अपने और अपने परिवार के बारे में यही जानने को मिलेगा.!
तुम बस किसी पे भी आँख बंद करके विश्वास नही करना,क्योंकि तुम्हारी सबसे ख़ास ने ही तुम्हारी असलियत तुमसे छुपाई है..!.
और फिर अचानक वो आवाज़ आना बंद हो गयी,और में बेहोश हो गया...!

आँख खुली तो सुबह हो गयी थी,मेने खुद को नदी के किनारे पे पाया..!

में बिना कुछ सोचे समझे घर आ गया क्योंकि मुझे बहुत नींद आ रही थी..!


घर आके सीधा अपने रूम में आया और बेड पे गिरते ही सो गया..!

पता नही क्यो मुझे इतनी नींद आ रही थी,कि में सोने के आगे कुछ और सोच ही नही पा रहा था..!

नींद खुली तो शाम हो गयी थी..!में उठा फ्रेश होके शवर लिया अभी रूम में कपड़े ही पहेन रहा था कि मुझे नीचे बहुत शोर सुनाई दे रहा था.!

में दौड़के नीचे आया तो देखा कोई आदमी घर के बाहर चेयर लगाके बैठा था,और कुछ आदमियो ने पायल को पकड़ रखा था..!

जैसे ही पायल ने मुझे देखा उसने मुझे भागने का इशारा किया पर वो नही जानती थी कि में क्या-2 कर सकता हूँ..!

में बाहर आया और जाके बाहर रखी एक चेयर पे जाके बैठ गया..!

में:-हाँ तो भाई लोग बताइए आपके यहाँ आने का कारण.!

ठाकुर राणा हैं हम,और ये सब-के-सब मेरे आदमी हैं..!

तुझे पता है तूने किसे मारा था..!

में:-अब्बे बहेनके लोडे साला एक ही डाइलॉग सुन-2 के पक गया हूँ में..!

जानता हूँ वो मादरचोद तेरा बेटा था..!

मेने ही मारा उसे बोल क्या उखाड़ लेगा तू मेरा..!

ठाकुर राणा:-अब्बे तुझे मुझसे डर नही लगता है क्या,उसने हँसते हुए मुझसे बोला..!

में:-डर और मुझे,तू भी क्या बात करता है..!

तभी मुझे पायल की चीखने की आवाज़ आई,राणा के कुछ आदमी पायल से ज़बरदस्ती करने की सोच रहे थे..!

राणा:-क्यो बे अब देख में तुझे कैसे डराता हूँ,और उसके कुछ आदमियो ने मुझे पकड़ लिया,और राणा पायल की तरफ बढ़ गया..!

जैसे ही मेने उसे पायल के करीब जाते देखा मेरा गुस्सा बढ़ने लगा और फिर एक ऐसा बवंडर आया मेरे गुस्से से कि उसके सब आदमी टुकड़ो में बँट गये..!

उन्हे पता भी नही चला कि कब में उन्हे मारता गया और आख़िर में मैं राणा के सामने जाके खड़ा हो गया..!

जैसे ही उसने मेरी आँखों में देखा
उसकी पॅंट गीली हो गयी..!

पर इससे पहले कि वो मुझसे कुछ बोलता
मेने उसके दिल पे जोरदार मुक्का मारा,वो अचानक पत्थर में बदल कर चूर हो गया..!

मुझे खुदको ये नही पता था कि में ये सब कैसे कर लेता था पर फिर भी उसे इग्नोर करते हुए गाँव वालो को ये खूसखबरी दी और उनकी बॉडीस को उनके ही घर पे फिकवा दिया..!

पता नही क्यो मेने देखा पायल मेरे पास नही आ पा रही थी.!

में जैसे ही उसके पास गया वो मुझसे दूर चली गयी..!

पायल:-कौन हो तुम,तुम मेरे राज नही हो सकते..!

अभी कुछ देर पहले तुम बिल्कुल बदल गये थे,तुम्हारी आँखो का कलर बदल रहा था,तुम्हारा शरीर बिल्कुल चमक रहा था,और तो और तुम्हारे दाँत भी बाहर आ गये थे!

में:-यार में तेरा राज हूँ,मुझे खुद नही पता कि मुझे क्या हो गया है..!

में बिल्कुल पागल हो जाउन्गा औऱ तू भी जानती है ना कि हम यहाँ मेरे बारे में जानने के लिए ही तो आए हैं..!

पायल मेरे पास आई और मेरे फोरहेड पे किस करके बोली,क्या यार स्वीटू तू सोच भी कैसे सकता है कि में तुझसे गुस्सा हो जाउन्गि..!
में बस मज़ाक कर रही थी,उसने बोला..!

गाँव में बिकुल फेमस हो गया था,हर जगह बस मेरी ही चर्चा थी,वो मुझे भगवान मानने लगे थे..!

हम फिर घर के अंदर आ गये कुछ देर बाद बाकी सब भी मार्केट से घर आ गये..!

और मासी माँ मुझपे भड़क गयी..!

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