आँचल की अय्याशियां

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pongapandit
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Re: आँचल की अय्याशियां

Post by pongapandit » 02 Dec 2017 14:58

अगली सुबह सुनील उठा तो उसका लंड पूरा तना हुआ था. रात में अपने पापा को रिया को चोदते हुए उसने देखा था. उसने अपने पापा का जितना बड़ा और मोटा लंड पहले कभी नही देखा था. उस मोटे लंड से रिया की जवान चूत की बेरहमी से हुई ठुकाई देखकर सुनील मंत्रमुग्ध हो गया था. ये होती है असली चुदाई.

अब उसकी नींद खुल चुकी थी , बेड पर लेटे हुए अपने खड़े लंड पर हाथ फिराते हुए सुनील के दिमाग़ में रिया की चूत को फैलाते हुए अंदर बाहर जाते उस मोटे लंड से चुदाई का सीन घूमने लगा.

सुनील की उत्तेजना बढ़ने लगी. उसने बगल में लेटी हुई आँचल को उठाने की कोशिश की. लेकिन रात में सुनील के साथ भरपूर चुदाई से संतुष्ट होकर आँचल बेसुध होकर सो रही थी.

सुनील ने देखा की आँचल तो उठ नही रही है, पर सुनील का लंड खड़ा हो रखा था , उसे मस्ती चढ़ी थी. वो नंगी सोई हुई आँचल की टांगों के बीच आ गया और आँचल की चूत के फूले हुए होठों पर मुँह लगाकर उन्हें चूसने लगा. अपनी जीभ से उसने चूत के होठों को चाटा और क्लिट को जीभ से छेड़ने लगा. छेड़ने से क्लिट में कसाव आने लगा और वो तनने लगी. सोई हुई आँचल के मुँह से एक हल्की सी सिसकारी निकल गयी.

अब सुनील और ज़ोर से क्लिट पर जीभ रगड़ने लगा और आँचल की चूत के मोटे होठों को अलग करके उनके बीच उंगली घुसा दी.

चूत में सुनील की उंगली अंदर बाहर होने से आँचल ने सिसकारी ली,” ऊओह……...आअहह…...”

सुनील ने आँचल के भरे हुए सुडौल नितंबों को दोनों हाथों से दबाया और उन्हें मसलने लगा. आँचल की चूत में उसने अपनी जीभ घुसा दी और चूत की नरम लिसलिसी दीवारों पर अपनी खुरदूरी जीभ रगड़ने लगा. बीच बीच में चूत से जीभ बाहर निकालकर क्लिट को भी जीभ से छेड़ दे रहा था.

“उउउन्न्नज्ज्ग…...ऊऊहह……आआअहह….” आँचल ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी.

आँचल अब जाग रही थी और सुनील से अपनी चूत चुसाई के पूरे मज़े ले रही थी. सुनील के हाथ उसके नितंबों को मसल रहे थे और उसकी जीभ चूत में घुसी हुई थी.

सुनील की हरकत से वो हैरान तो थी की पतिदेव पहले तो कभी इतने एक्साइटेड नही होते थे, आज तो सुबह सवेरे ही शुरू हो गये हैं. लेकिन ज़्यादा ना सोचते हुए वो अपनी चूत चुसाई का आनंद लेने लगी.

“ओह्ह ………..हाँ सुनील हाँ………………..ऐसे ही करते रहो……...बहुत मज़ा आ रहा है…..”, उत्तेजना में छटपटाकर आँचल अपने नितंबों को सुनील के मुँह पर उछालने लगी.

सुनील समझ गया की आँचल अब झड़ने वाली है. आँचल के ओर्गास्म को थोड़ी देर और रोकने के लिए उसने आँचल के नितंबों पर अपनी पकड़ और मज़बूत कर दी जिससे आँचल उन्हें ज़्यादा हिला डुला नही पाए. और अपनी जीभ चूत से बाहर निकाल ली.

आँचल को मज़ा मिलना बंद हो गया.

“आअहह………...सुनील ….रुक क्यूँ गये…….प्लीज़ मुझे झड़ने दो …..ओह……...” आँचल मदहोशी में गिड़गिडाई.

आँचल की बात सुनकर सुनील ने उसके नितंबों पर पकड़ ढीली कर दी और फिर से चूत में जीभ अंदर बाहर करने लगा. बीच बीच में आँचल की क्लिट को होठों के बीच दबाकर चूसने लगा.

सुनील की हरकतों से आँचल की उत्तेजना चरम पर पहुँच गयी. उसकी जांघें और नितंब फड़फड़ाने लगे.

“आऐईयईईई………....ऊऊहह……...सुनील………….उूउउफफफ्फ़…………...आआआहह……...”
आँचल ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेते हुए झड़ने लगी . उसको एक के बाद एक ओर्गास्म आने लगे.

तभी बेडरूम के दरवाजे को किसी ने खटखटाया. सुनील ने सुन लिया लेकिन आँचल आँखे बंद किए सिसकारियाँ लेती रही. जब उसकी सिसकारियाँ थोड़ी कम हुई तो सुनील ने फिर से खटखटाने की आवाज़ सुनी.

सुनील ने अपने पापा को अपना नाम लेते हुए सुना. दरवाज़े के बाहर से उसके पापा ने ‘सुनील …..सुनील’ कहा.

सुनील सोचने लगा , उसके पापा दरवाज़े पर क्यूँ हैं ? कहीं उन्होने आँचल की सिसकारियाँ तो नही सुन ली ?

आँचल सिसकारियाँ भी तो इतनी ज़ोर ज़ोर से लेती है. मदहोशी में आँचल को कुछ होश ही नही रहता है की घर पे और लोग भी हैं.

मुझे तो लगता है ज़रूर आँचल की सिसकारियाँ सुनकर ही पापा दरवाज़े को नॉक कर रहे हैं.
इस ख़याल से सुनील को बड़ी एक्साइट्मेंट हुई. उसके दिमाग़ में शरारत सूझी.

ओर्गास्म की मदहोशी में अपनी सांसो पर काबू करने का प्रयास करती आँचल से सुनील धीरे से बोला,” आँचल कोई दरवाज़ा खटखटा रहा है. शायद पापा हैं. जाकर देखो तो , क्या कह रहे हैं ?”

ऐसा बोलकर खुद बेडरूम में बने बाथरूम में चला गया.

आँचल अभी भी मदहोशी में थी. सुनील के बाथरूम जाने के बाद वो धीरे से बेड से उठी. बेड के पास पड़ी हुई एक पतली सी नाइटी उसने अपने नंगे बदन पर डाल ली. और बेडरूम का दरवाज़ा खोल दिया. बाहर उसका ससुर खड़ा था.

हुआ ये था की ओर्गास्म की मस्ती में आँचल ज़ोर से चिल्लाई थी. ससुर उनके बेडरूम के आगे से जा रहा था तो सिसकारियाँ सुनकर रुक गया. दरवाज़े पर खड़े रहकर उसने कुछ पलों तक आँचल की सिसकारियाँ सुनी. उन कामुक सिसकारियों को सुनकर ससुर का लंड पैजामे में तंबू बनाकर खड़ा हो गया. जानबूझकर उसने दरवाजा खटखटा दिया.

ससुर ने देखा आँचल की आँखे नशीली हो रखी हैं. उसकी बड़ी चूचियाँ गहरी साँसे लेने से ऊपर नीचे हिल रही हैं. एक पतली सी नाइटी पहन रखी है. शायद ये अंदर कुछ भी नही पहनी है. अभी भी मदहोशी में लग रही है. मादक आँचल का वो कामुक रूप देखकर ससुर सम्मोहित सा हो गया. अहा…... बहू कितनी कामुक लग रही है. अंग अंग से रस टपक रहा है.

आँचल का चेहरा सुर्ख लाल हो रखा था. उसके बदन से उठती मादक गंध और चूतरस की खुशबू ससुर ने अपने नथुनों में महसूस की.

आँचल ने देखा ससुर उसके बदन को ऊपर से नीचे तक घूर रहा है. उस पतली नाइटी में ससुर के घूरने से उसे लगा जैसे वो नंगी ही हो. कहीं ससुरजी ने मेरी सिसकारियाँ तो नही सुन ली ? जाने कब से खड़े थे बेडरूम के दरवाज़े पर. ये ऐसे क्यूँ मुझे घूर रहे हैं ? शायद इनको पता चल गया है की अंदर हम क्या कर रहे थे.

शरम से आँचल ने अपना चेहरा झुका लिया. आँखें नीचे होते ही उसकी नज़र ससुर के पैजामे में बने तंबू पर पड़ी. उईईइ माँ…....ससुरजी का लंड तो पैजामा फाड़ने को उतारू है. अब तो मुझे पक्का यकीन हो गया है की ये ठरकी बुड्ढा ज़रूर दरवाज़े पे खड़ा होके मेरी काम लीला की सिसकारियाँ सुन रहा होगा. तभी इसका लंड दरवाज़े को धक्का दे रहा है.

ससुर ने दरवाजा खटखटाया किससे था ? हाथ से या खंभे जैसे लौड़े से ?

दरवाज़े पर खड़े ससुर और आँचल में से किसी ने भी अभी तक एक शब्द नही बोला था.

ससुर आँचल को देख के सम्मोहित हो गया था. और अब आँचल भी नज़रें नीचे किए हुए ससुर के तंबू को देख रही थी.

सुनील बाथरूम के दरवाज़े से ये सब देख रहा था. जानबूझकर उसने नंगी और मदहोश आँचल को दरवाज़ा खोलने भेज दिया था.

”पापा के सामने पतली नाइटी में आँचल नंगी ही लग रही है. पीछे से तो इसके नितंबों का शेप साफ दिख रहा है. आगे से पापा को इसकी बड़ी बड़ी चूचियों और निपल का शेप साफ दिख रहा होगा. पापा कैसे घूर रहे हैं आँचल को . जैसे कोई भेड़िया किसी मेमने को घूरता है. दोनों कुछ नही बोल रहे हैं. “

ससुर और बहू के बीच सेक्सुअल टेंशन को सुनील भी महसूस कर रहा था. उसका लंड भी पैजामे में तन गया और सुपाड़े से प्री-कम निकलने लगा. अब क्या करते हैं पापा आँचल के साथ, देखता हूँ.

तभी ससुर ने आँचल का हाथ पकड़ लिया और अपने पैजामे के बाहर से लंड पर रख दिया. फनफनाने लंड पर हाथ रखते ही जैसे आँचल को बिजली का झटका लगा , उसने तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लिया. वो कुछ नही बोली लेकिन उसकी नज़रें तने हुए लंड पर ही थीं. ससुर ने फिर से आँचल का हाथ पकड़कर लंड पर रख दिया , आँचल ने दुबारा तुरंत हाथ हटा लिया.

ससुर सोचने लगा, देख मेरे लंड को ही रही है, लेकिन पकड़ नही रही.

अबकी बार ससुर ने आँचल का हाथ पकड़कर अपने लंड पर दबाया लेकिन टाइट पकड़े रखा ताकि आँचल हाथ हटा ना पाए. आँचल ने हाथ छुड़ाना चाहा ,पर ससुर ने कस के पकड़े रखा और आँचल के हाथ से अपने लंड को सहलाया. और फिर दूसरे हाथ से ज़ोर लगाकर आँचल की उँगलियों को अपने लंड पर लपेट दिया.

अब आँचल ने अपने दाएं हाथ से ससुर के फनफनाने लंड को पकड़ा हुआ था और आँचल के उस हाथ को ससुर ने अपने हाथों से कसके दबा रखा था. फनफनाने लंड के कड़ेपन का एहसास आँचल की उंगलियों को हुआ. आँचल के मुँह से सिसकारी निकल गयी. बाप रे……….. ससुर का खंभा तो लोहे जैसा सख़्त हो रखा है. आँचल की चूत से रस बहने लगा. उसके माथे पर पसीना आ गया. उसके होंठ सूख गये.

अपने सूखे होठों को जीभ फिराकर गीला करते हुए आँचल ने लंड से निकलती गर्मी को महसूस किया. अपने आप ही उसकी पकड़ लंड पर मजबूत हो गयी. खुद उसके अपने बदन में गर्मी बढ़ने लगी.

ससुर ने आँचल का हाथ छोड़ दिया था . उसे ये देखकर खुशी हुई की आँचल ने उसका लंड मजबूती से पकड़ रखा है. शायद आँचल को इस बात की होश ही नही थी की उसके हाथों के ऊपर से ससुर का हाथ हट चुका है.

बाथरूम के दरवाज़े से झाँककर सुनील ये सब देख रहा था. पापा के मोटे लंड को आँचल ने पैजामे के बाहर से पकड़ रखा है और अब हाथ छुड़ा भी नही रही है. अब इससे ज़्यादा सुनील से नही देखा गया. इस सीन को देखकर उसे इतनी एक्साइट्मेंट हुई की उसका पानी पैजामे में ही निकल गया.

“ओह्ह …….. शिट …..” अपने ओर्गास्म से सुनील खुद ही हैरान हुआ. और अपने पैजामे में निकले हुए वीर्य को देखने लगा. बिना लंड पर हाथ लगाए हुए ही वो झड़ गया था.

बाथरूम के दरवाज़े पर हुई खटपट से आँचल और ससुर दोनों चौंके.

आँचल ने एक झटके से अपना हाथ लंड से हटा लिया और साइड में मुड़कर देखा. बाथरूम का दरवाजा थोड़ा सा खुला हुआ था.

ससुर तुरंत बेडरूम के दरवाज़े से भाग लिया और जाते जाते ज़ोर से कह गया,” सुनील , नाश्ता तैयार है. मैं तो तुम दोनों को बुलाने आया था….”

सुनील को बाथरूम से बेडरूम में आते देखकर आँचल का चेहरा घबराहट और रोमांच से लाल हो गया. सुनील बाथरूम में है और ससुरजी मुझे अपना लंड पकड़ा रहे थे. अगर सुनील देख लेता तो ?

लेकिन आँचल को ये मालूम नही था की सुनील ने सब देख लिया है और ये सब उसका ही किया धरा है. पापाजी आँचल के साथ क्या करेंगे , देखता हूँ. इस प्लान से ही सुनील ने नंगी और मदहोशी में डूबी आँचल को दरवाज़ा खोलने भेज दिया था.

बाथरूम से बाहर आकर सुनील ने ऐसा दिखाया जैसे उसे कुछ पता ही नही. फिर आँचल बाथरूम चली गयी.

कुछ देर बाद दोनों नाश्ता करने डाइनिंग रूम में आ गये.

Agli subah Sunil utha to uska lund pura tana hua tha. raat mein apne papa ko riya ko chodte hue usne dekha tha. usne apne papa ka jitna bada aur mota lund pehle kabhi nahi dekha tha. us mote lund se riya ki jawan choot ki berahmi se hui thukai dekhkar sunil mantramugdh ho gaya tha. ye hoti hai asli chudai.

Ab uski nind khul chuki thi , bed par lete hue apne khade lund par hath firate hue sunil ke dimaag mein riya ki choot ko failate hue andar bahar jate us mote lund se chudai ka scene ghumne laga.

Sunil ki uttezna badne lagi. usne bagal mein leti hui aanchal ko uthane ki koshish ki. Lekin raat mein sunil ke sath bharpur chudai se santusht hokar Aanchal besudh hokar so rahi thi.

Sunil ne dekha ki aanchal to uth nahi rahi hai, par sunil ka lund khada ho rakha tha , use masti chadi thi. wo nangi soyi hui aanchal ki tango ke beech aa gaya aur aanchal ki choot ke phule hue hothon par munh lagakar unhe chusne laga. Apni jeebh se usne choot ke hothon ko chata aur clit ko jeebh se chedne laga. Chedne se clit mein kasav aane laga aur wo tanne lagi. soyi hui aanchal ke munh se ek halki si siskari nikal gayi.

Ab sunil aur jor se clit par jeebh ragadne laga aur aanchal ki choot ke mote hothon ko alag karke unke beech ungli ghusa di.

Choot mein sunil ki ungli andar bahar hone se aanchal ne siskari li,” ooohhhhh…….aaahhhhhhh….”

Sunil ne aanchal ke bhare hue sudol nitambon ko dono hathon se dabaya aur unhe masalne laga. Aanchal ki choot mein usne apni jeebh ghusa di aur choot ki naram lislisi deewaron par apni khurduri jeebh ragadne laga. Beech beech mein choot se jeebh bahar nikalkar clit ko bhi jeebh se ched de raha tha.

“uuunnnggg….oooohhhhhhhh……aaaaahhhhhh……” aanchal jor jor se siskariyan lene lagi.

Aanchal ab jaag rahi thi aur sunil se apni choot chusai ke pure maze le rahi thi. sunil ke hath uske nitambon ko masal rahe the aur uski jeebh choot mein ghusi hui thi.

Sunil ki harkat se wo hairaan to thi ki patidev pehle to kabhi itne excited nahi hote the, aaj to subah savere hi suru ho gaye hain. Lekin jyada na sochte hue wo apni choot chusai ka anand lene lagi.

“ohhhh……haan Sunil haan……aise hi karte raho….bahut maza aa raha hai…” , uttezna mein chatpatakar aanchal apne nitambon ko sunil ke munh par uchalne lagi.

Sunil samajh gaya ki aanchal ab jhadne wali hai. Aanchal ke orgasm ko thodi der aur rokne ke liye usne aanchal ke nitambon par apni pakad aur mazboot kar di jisse aanchal unhe jyada hila dula nahi paye. Aur apni jeebh choot se bahar nikaal li.

Aanchal ko maza milna band ho gaya.

“aaahhh…..sunil ….ruk kyun gaye….please mujhe jhadne do …..ohhhhh…..” aanchal madhoshi mein gidgidayi.

Aanchal ki baat sunkar sunil ne uske nitambon par pakad dhili kar di aur phir se choot mein jeebh andar bahar karne laga. Beech beech mein aanchal ki clit ko hothon ke beech dabakar chusne laga.

Sunil ki harkaton se Aanchal ki uttezna charam par pahunch gayi. uski janghe aur nitamb fadfadane lage.

“aaaiiiiii…..oooohhhhh….sunil……uuuuuffff…….aaaaaahhhhh…….”

Aanchal jor jor se siskariyan lete hue jhadne lagi . usko ek ke baad ek orgasm aane lage.

Tabhi bedroom ke darwaje ko kisi ne khatkhataya. Sunil ne sun liya lekin aanchal aankhe band kiye siskariyan leti rahi. Jab uski siskariyan thodi kam hui to sunil ne phir se khatkhatane ki awaz suni.

Sunil ne apne papa ko apna naam lete hue suna. Darwaze ke bahar se uske papa ne ‘sunil …..sunil’ kaha.

Sunil sochne laga , uske papa darwaze par kyun hain ? kahin unhone aanchal ki siskariyan to nahi sun li ?
Aanchal siskariyan bhi to itni zor zor se leti hai. Madhoshi mein aanchal ko kuch hosh hi nahi rehta hai ki ghar pe aur log bhi hain.

Mujhe to lagta hai jaroor aanchal ki siskariyan sunkar hi papa darwaze ko knock kar rahe hain.
Is khayal se sunil ko badi excitement hui. Uske dimaag mein shararat shujhi.

Orgasm ki madhoshi mein apni sanso par kaboo karne ka prayas karti aanchal se sunil dhire se bola,” Aanchal koi darawaza khatkhata raha hai. Sayad papa hain. Jakar dekho to , kya keh rahe hain ?”

Aisa bolkar khud bedroom mein bane bathroom mein chala gaya.

Aanchal abhi bhi madhoshi mein thi. sunil ke bathroom jane ke baad wo dhire se bed se uthi. Bed ke pass padi hui ek patli si nighty usne apne nange badan par daal li. Aur bedroom ka darwaza khol diya. Bahar uska sasur khada tha.

Hua ye tha ki orgasm ki masti mein aanchal jor se chillayi thi. sasur unke bedroom ke aage se ja raha tha to siskariyan sunkar ruk gaya. darwaze par khade rahkar usne kuch palon tak aanchal ki siskariyan suni. Un kamuk siskariyon ko sunkar sasur ka lund pyjame mein tambu banakar khada ho gaya. jaanboojhkar usne darwaja khatkhata diya.

Sasur ne dekha Aanchal ki aankhe nashili ho rakhi hain. Uski badi chuchiyan gehri sanse lene se upar niche hil rahi hain. Ek patli si nighty pahan rakhi hai. Sayad ye andar kuch bhi nahi pehni hai. Abhi bhi madhoshi mein lag rahi hai. Madak aanchal ka wo kamuk roop dekhkar sasur sammohit sa ho gaya. aha……. bahu kitni kamuk lag rahi hai. Ang ang se ras tapak raha hai.

Aanchal ka chehra surkh laal ho rakha tha. uske badan se uthti madak gandh aur chutras ki khusboo sasur ne apne nathuno mein mehsoos ki.

Aanchal ne dekha sasur uske badan ko upar se niche tak ghoor raha hai. Us patli nighty mein sasur ke ghurne se use laga jaise wo nangi hi ho. Kahin sasurji ne meri siskariyan to nahi sun li ? jane kab se khade the bedroom ke darwaze par. Ye aise kyun mujhe ghur rahe hain ? sayad inko pata chal gaya hai ki andar hum kya kar rahe the.

Sharam se aanchal ne apna chehra jhuka liya. Aankhen niche hote hi uski nazar sasur ke pyjame mein bane tambu par padi. Uiiii maa……sasurji ka lund to pyjama fadne ko utaru hai. Ab to mujhe pakka yakin ho gaya hai ki ye tharki buddha jarur darwaze pe khada hoke meri kaam leela ki siskariyan sun raha hoga. Tabhi iska lund darwaze ko dhakka de raha hai.

Sasur ne darwaja khatkhataya kisse tha ? hath se ya khambhe jaise laude se ?

Darwaze par khade sasur aur aanchal mein se kisi ne bhi abhi tak ek sabd nahi bola tha.

Sasur aanchal ko dekh ke sammohit ho gaya tha. aur ab aanchal bhi nazren niche kiye hue sasur ke tambu ko dekh rahi thi.

Sunil bathroom ke darwaze se ye sab dekh raha tha. jaanboojhkar usne nangi aur madhosh aanchal ko darwaza kholne bhej diya tha.

” papa ke samne patli nighty mein aanchal nangi hi lag rahi hai. Piche se to iske nitambon ka shape saaf dikh raha hai. Aage se papa ko iski badi badi chuchiyon aur nipple ka shape saaf dikh raha hoga. Papa kese ghoor rahe hain aanchal ko . jese koi bhediya kisi memne ko ghurta hai. Dono kuch nahi bol rahe hain. “

Sasur aur bahu ke beech sexual tension ko sunil bhi mehsoos kar raha tha. uska lund bhi pyjame mein tan gaya aur supade se precum nikalne laga. Ab kya karte hain papa aanchal ke sath, dekhta hun.

Tabhi sasur ne aanchal ka hath pakad liya aur apne pyjame ke bahar se lund par rakh diya. Fanfanate lund par hath rakhte hi jaise aanchal ko bijli ka jhatka laga , usne turant apna hath piche khinch liya. Wo kuch nahi boli lekin uski nazren tane hue lund par hi thi. sasur ne phir se aanchal ka hath pakadkar lund par rakh diya , aanchal ne dubara turant hath hata liya.

Sasur sochne laga, dekh mere lund ko hi rahi hai, lekin pakad nahi rahi.

Abki baar sasur ne aanchal ka hath pakadkar apne lund par dabaya lekin tight pakde rakha taki aanchal hath hata na paye. Aanchal ne hath chudana chaha ,par sasur ne kas ke pakde rakha aur aaanchal ke hath se apne lund ko sehlaya. Aur phir dusre hath se jor lagakar aanchal ki unglion ko apne lund par lapet diya.

Ab aanchal ne apne daye hath se sasur ke fanfanate lund ko pakda hua tha aur aanchal ke us hath ko sasur ne apne hathon se kaske daba rakha tha. funfanate lund ke kadepan ka ehsaas aanchal ki ungliyon ko hua. Aanchal ke munh se siskari nikal gayi. baap re……….. sasur ka khambha to lohe jaisa sakht ho rakha hai. Aanchal ki choot se ras behne laga. Uske mathe par paseena aa gaya. uske hoth sukh gaye.

Apne sukhe hothon ko jeebh firakar geela karte hue aanchal ne lund se nikalti garmi ko mehsoos kiya. apne aap hi uski pakad lund par majboot ho gayi. khud uske apne badan mein garmi badne lagi.

Sasur ne aanchal ka hath chod diya tha . use ye dekhkar khushi hui ki aanchal ne uska lund majbooti se pakad rakha hai. Sayad aanchal ko is baat ki hosh hi nahi thi ki uske hathon ke upar se sasur ka hath hat chuka hai.

Bathroom ke darwaze se jhankkar Sunil ye sab dekh raha tha. papa ke mote lund ko aanchal ne pyjame ke bahar se pakad rakha hai aur ab hath chuda bhi nahi rahi hai. Ab isse jyada sunil se nahi dekha gaya. is scene ko dekhkar use itni excitement hui ki uska pani pyjame mein hi nikal gaya.

“ ohhh….shit….” apne orgasm se sunil khud hi hairaan hua. Aur apne pyjame mein nikle hue viry ko dekhne laga. Bina lund par hath lagaye hue hi wo jhad gaya tha.
Bathroom ke darwaze par hui khatpat se aanchal aur sasur dono chaunke.

Aanchal ne ek jhatke se apna hath lund se hata liya aur side mein mudkar dekha. Bathroom ke darwaja thoda sa khula hua tha.

Sasur turant bedroom ke darwaze se bhag liya aur jate jate jor se keh gaya,” Sunil , nashta tayyar hai. Mai to tum dono ko bulane aaya tha…”

Sunil ko bathroom se bedroom mein aate dekhkar aanchal ka chehra ghabrahat aur romanch se laal ho gaya. sunil bathroom mein hai aur sasurji mujhe apna lund pakda rahe the. agar sunil dekh leta to ?

Lekin aanchal ko ye malum nahi tha ki sunil ne sab dekh liya hai aur ye sab uska hi kiya dhara hai. Papaji aanchal ke sath kya karenge , dekhta hun. Is plan se hi sunil ne nangi aur madhoshi mein doobi aanchal ko darwaza kholne bhej diya tha.

Bathroom se bahar aakar Sunil ne aisa dikhaya jaise use kuch pata hi nahi. Phir aanchal bathroom chali gayi.

Kuch der baad dono nashta karne dining room mein aa gaye.

Re: आँचल की अय्याशियां

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pongapandit
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Re: आँचल की अय्याशियां

Post by pongapandit » 02 Dec 2017 15:01

सुनील और आँचल नाश्ता करने डाइनिंग रूम में आ गये. आँचल ने नाइटगाउन पहना हुआ था.

वहाँ रवि और रिया बैठे हुए इंतज़ार कर रहे थे. रवि अपने कज़िन के घर से सुबह जल्दी ही आ गया था. रवि, रिया ने सुनील , आँचल को गुडमॉर्निंग विश की. फिर आँचल सबको नाश्ता सर्व करने लगी.

अपने बेडरूम के दरवाज़े पर ससुर की हरकत से आँचल अभी भी पूरी तरह से उबर नही पाई थी. सेक्सुअल एक्साइट्मेंट से उसका चेहरा अभी भी लाल हो रखा था. पतले नाइटगाउन के अंदर उसने सिर्फ़ पैंटी पहन रखी थी. उसकी बड़ी चूचियाँ ब्रा ना होने से नाश्ता सर्व करते समय हिल डुल रही थीं. आँचल की मांसल जांघों का शेप भी उस पतले नाइटगाउन में साफ दिख रहा था.

रिया ने देखा , नाश्ता सर्व करने के लिए किचन से डाइनिंग टेबल तक घूम रही आँचल को उसका मंगेतर रवि ललचाई नज़रों से घूर रहा है. रिया को जलन महसूस हुई और रवि पे बहुत गुस्सा आया. रिया ध्यान से देख रही थी, आँचल रवि को नाश्ता सर्व करते समय मुस्कुरा रही है और देखो तो रवि से कितना चिपक के खड़ी है . रवि की प्लेट में नाश्ता डालते समय जानबूझकर झुक रही है और उसको नाइटगाउन से अपना क्लीवेज दिखा रही है. नाइटगाउन भी कैसा पहन के आई है , फीते वाला, खुला खुला , टाँगें भी दिखा रही है. रिया को आँचल पर भी गुस्सा आया.

सुनील की नज़रें भी अपनी मादक बीवी पर ही थी. जो रिया ने देखा वो सुनील ने भी देखा. रवि भी मेरी बीवी को बहुत घूर रहा है. ये देखकर उसके मुरझाए लंड में हरकत हुई. दूसरे मर्द जब उसकी बीवी को घूरते हैं तो सुनील को एक्साइट्मेंट होती है . लेकिन पहले ऐसा नही था. ये तबसे शुरू हुआ जबसे चुदाई करते समय आँचल ने दूसरे लोगों द्वारा अपने बदन से छेड़खानी के किस्से सुनील को सुनाने शुरू किए. तभी से सुनील ने महसूस किया की ऐसी बातों से उसे बड़ी उत्तेजना आती है. अब उसे दूसरे मर्दों से जलन नही होती थी. ये बात आँचल भी जान गयी थी और बढ़ा चढ़ाकर छेड़खानी के किस्से सुनील को सुनाती थी. पर सुनील के मन में क्या है, वो अपनी बीवी को दूसरे मर्दों के साथ किस हद तक देखना स्वीकार करेगा , ये किसी को मालूम नही. आँचल यही सोचती है की सुनील ऐसी बातों से एक्साइट होता है , मगर सिर्फ़ बातें. सुनील के सामने किसी मर्द के साथ कुछ करने की तो वो सोच भी नही सकती. लेकिन उसे मालूम नही था की कुछ देर पहले बेडरूम के दरवाज़े पर ससुर का लंड पकड़े हुए सुनील ने उसे देख लिया है और ये देखकर सुनील को ज़रा भी ईर्ष्या या जलन नही हुई थी बल्कि उसे तो एक अजीब सा रोमांच हुआ था. जो क्यूँ हुआ था वो तो सुनील भी नही जानता. पर उसकी बॉडी अपनेआप ऐसे रेस्पॉन्ड कर रही थी. अपनी खूबसूरत बीवी को दूसरों के सामने शोऑफ तो वो पहले से ही करता था पर वो अलग बात थी. अब कुछ अलग ही हो रहा था.

यहाँ नाश्ते के दौरान भी यही हो रहा था. रवि आँचल को घूर रहा था और आँचल उसको देखकर मुस्करा रही थी. ये देखकर रिया गुस्सा हो रही थी लेकिन सुनील को इसमें मज़ा आ रहा था.

नाश्ते की टेबल पर ससुर भी अपने ख्यालों में डूबा हुआ था. आज बहू ने मेरा लंड पकड़ लिया था , मुझसे चुदने को तैयार थी , अगर सुनील वहाँ पर नही होता तो आज चुद ही जाती. एक और मौका हाथ से निकल गया. हर बार मछली हाथ से फिसल जाती है. पता नही अब कब मौका मिलेगा. ये खूबसूरत जवान छोकरी रिया कुछ ही दिन पहले हमारे घर आई और ये भी मुझसे चुद गयी और आँचल को एक साल से ज़्यादा हो गया हमारे घर आए बहू बनकर और अभी तक मुझे निराशा ही हाथ लगी है.

नाश्ते की टेबल पर आँचल की सास नही थी क्यूंकी वो पड़ोस में सतसंग में गयी थी.

इस तरह नाश्ता करते समय बातें कम ही हुई , सब अपने अपने ख्यालों में डूबे हुए थे.

रिया बोली, “मैं नहाने जा रही हूँ फिर तैयार भी होना है ” और टेबल से उठकर चली गयी.

सुनील भी अपने बेडरूम में चला गया. वो दोनो जल्दी नाश्ता करके उठ गये.

अब टेबल पर आँचल के साथ रवि और ससुर रह गये. आँचल दूसरों को सर्व कर रही थी इसलिए उसका नाश्ता अभी बचा हुआ था. लेकिन रवि और ससुर जानबूझकर धीरे धीरे नाश्ता कर रहे थे. सुनील और रिया के जाने के बाद, नाश्ता करते हुए दोनो आदमी अब खुलेआम आँचल पर नजरें गड़ाए हुए थे.

आँचल ने ससुर और रवि की ललचाई नज़रों को महसूस किया और सर झुकाकर चुपचाप नाश्ता करने लगी. जब भी नज़रें उठाती तो पाती , वो दोनो उसको ही देख रहे हैं.

तभी रिया ने रवि को आवाज़ दी ,” कितना टाइम लगा रहे हो नाश्ता करने में ? यहाँ आओ जल्दी.”

रिया समझ गयी थी की रवि जानबूझकर धीरे धीरे नाश्ता कर रहा है ताकि ज़्यादा से ज़्यादा देर तक आँचल के साथ बैठने का मौका मिले. इसलिए उसने रवि को डाँट कर बुला लिया और अपने बेडरूम में बैठने को कहा. ताकि रवि को आँचल को ताकने का मौका ना मिले.

रवि का मन नही हो रहा था वहाँ से जाने का. लेकिन रिया के डाँटने से उसने बचा हुआ नाश्ता फटाफट खत्म किया और वहाँ से उठ गया. लेकिन जाते जाते आँचल के गले लगकर थैंक्स कह गया, “ भाभीजी , बढ़िया नाश्ता कराने के लिए , थैंक्स.”

थैंक्स का तो बहाना था , इसके बहाने रवि ने आँचल के गालों से अपने गाल रगड़ दिए और उसकी पीठ पर हाथ फेर दिया.

उसके बाद वो रिया के पास उसके बेडरूम चला गया.

मिस्टर आलोक जोशी (ससुर) अभी भी खाने में ही थे.

“बहू , मेरी प्लेट में थोड़ी सब्ज़ी और डाल दो.”

आँचल उठी और ससुर के पास जाकर उसकी प्लेट पर सब्ज़ी डालने लगी.

सब्ज़ी का डोंगा पकड़े हुए आँचल ने अपनी पैंटी के ऊपर हाथ महसूस किया.

ससुर ने आँचल के नाइटगाउन के अंदर हाथ डाल दिया था और पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को पकड़ लिया. फिर पैंटी को थोड़ा खिसकाकर आँचल की चूत में अपनी मोटी उंगली डाल दी.

आँचल ससुर की हरकत से एकदम चौंक गयी .

“उउउऊहह…...” उसके मुँह से हल्की सिसकी निकल गयी.

अब ससुर आँचल की चूत में उंगली करने लगा और अंगूठे से उसकी क्लिट को रगड़ने लगा.

आँचल सब्ज़ी का डोंगा हाथ में पकड़े वहीं पर खड़ी रही और उसने ससुर को रोकने का कोई प्रयास नही किया.

“ओह्ह ……….ससुरजी……..” आँचल धीरे से सिसकी. उसके पाँव वहीं पर ज़म गये.

ससुर तेज़ी से उसकी चूत में उंगली घुमाने लगा.

“उनन्नज्ज्ग…………...बस कीजिए……...कोई आ जाएगा……... ओह्ह ….” आँचल की सिसकारियाँ बढ़ गयीं.

उसने सब्ज़ी का डोंगा टेबल पर रख दिया. उसकी टाँगें उत्तेजना से काँपने लगी. सपोर्ट के लिए उसने टेबल को पकड़ लिया.

लेकिन ससुर रुका ही नही. वो एक्सपीरियेन्स्ड आदमी था. एक्सपर्ट तरीके से आँचल की चूत और क्लिट को छेड़ते रहा. शायद सब्ज़ी माँगने का भी उसका बहाना था. उसने पहले ही सोच लिया होगा की आँचल सब्ज़ी डालने मेरे पास आएगी तो………...

ससुर उंगली करते रहा और टेबल पर हाथ टेककर आँचल सिसकते रही.

उन दोनो को पता ही नही चला की बुड्ढा रसोइया रामलाल किचन के दरवाज़े पे आ खड़ा हुआ है और वहीं से उन दोनो को देख रहा है. अच्छा तो ये ससुर बहूरानी मेमसाब के अंगुली कर रहा है टेबल के नीचे से , और बहूरानी मस्त हुई जा रही है.

रामलाल पहले एक बार आँचल को चोद चुका था. आँचल की कामुक सिसकारियों से उसका लंड खड़ा होने लगा. एक बार और मिल जाए मेमसाब चोदने को. कितनी कामुक है मेमसाब. ससुर भी पगला गया है इसके चक्कर में.

तभी बेडरूम से सुनील ने आवाज़ दी,” आँचल, मेरी शर्ट नही मिल रही है. कहाँ रख दी तुमने ?”

ससुर ने तुरंत आँचल की चूत से अपनी मोटी उंगली निकाल ली, उंगली चूतरस से भीगी हुई थी. आँचल सुनील के पास बेडरूम जाने लगी लेकिन ससुर ने उसे पकड़ लिया और अपनी गोद में बिठा दिया. आँचल को अपने नितंबों पर ससुर का खंभे जैसा लंड चुभा , जो पैजामे के अंदर फनफना रहा था. फिर ससुर ने चूतरस से भीगी अंगुली आँचल के मुँह में डाल दी और उससे चाटकर साफ करने को कहा. आँचल को ससुर की उंगली से अपना ही चूतरस चाटना पड़ा.

ससुर के चूत में ऊँगली करने से उसको ओर्गास्म आने ही वाला था लेकिन सुनील ने डिस्टर्ब कर दिया. अब अपने नितंबों के नीचे दबे हुए ससुर के बड़े लंड से उसकी उत्तेजना और बढ़ गयी. उसने ससुर की उंगली को चाटकर साफ कर दिया. और लंड के जैसे ही वो मोटी उंगली चूस डाली. और ससुर की गोद में बैठे हुए ही उसके फनफनाते लंड के ऊपर अपने नितंबों को हिला हिलाकर रगड़ दिया.

आँचल की मचलती जवानी ससुर के लिए गरम लावा जैसी साबित हुई. अपने लंड पर आँचल के बड़े बड़े सुडौल लेकिन मुलायम नितंबों की रगड़ से उसके लंड ने पानी छोड़ दिया. छल- छलाकर निकले वीर्य ने ससुर का पैजामा खराब कर दिया. ससुर को भी हैरानी हुई , इतना वीर्य तो मेरा कभी नही निकला. ये मादक बहू ने बाहर से ही नितंबों को रगड़कर मेरा इतना माल निकाल दिया की गोलियाँ सिकुड गयी , तो फिर जब मैं इसको चोदूँगा सोचो तब कितना निकलेगा.

तभी सुनील ने फिर से आँचल को आवाज़ दी, लेकिन इस बार वो आवाज़ उनके नज़दीक़ से आई थी.

आँचल जल्दी से ससुर की गोद से उठी और अपने बेडरूम में चली गयी. ससुर चेयर पे बैठा हुआ झड़ते हुए गहरी साँसे ले रहा था. उसके लंड से अभी भी वीर्य की बूंदे निकल रही थी.

बेडरूम में पहुँचकर आँचल बोली,” इतना क्यूँ चिल्ला रहे हो सुनील. आ तो रही हूँ. नाश्ता कर रही थी.”

ससुर की गोद में आँचल को मज़ा आ रहा था. और सुनील के डिस्टर्ब करने से उसका ओर्गास्म भी अधूरा रह गया था. इसलिए वो थोड़ी चिड़चिड़ा गयी थी.

“यहाँ तो आओ…..” बाथरूम से सुनील ने आवाज़ दी.

जैसे ही आँचल बाथरूम में घुसी , सुनील ने उसको पीछे से पकड़ लिया . बिना संभलने का मौका दिए सुनील ने आँचल को वॉश बेसिन पर झुका दिया. फिर पीछे से उसका गाउन ऊपर उठाकर पैंटी नीचे कर दी और आँचल की टाँगें थोड़ी फैलाकर अपना तना हुआ लंड उसकी गीली चूत में घुसा दिया.

आँचल जब तक कुछ समझ पाती की क्या हो रहा है तब तक उसकी चूत में पीछे से सुनील का लंड घुस चुका था.

आँचल ने सपोर्ट के लिए वॉश बेसिन को पकड़ा हुआ था और सुनील उसकी चूत पर दनादन धक्के मारे जा रहा था.

वॉश बेसिन पर झुकी हुई आँचल सुनील के उतावलेपन से हैरान थी. आज तक सुनील ने उसे ऐसे झुकाकर पीछे से नही चोदा था और बाथरूम में तो कभी भी नही चोदा था.

[लेकिन एक बात पर आँचल ने गौर नहीं किया की सुनील ने जब दुबारा उसे आवाज़ दी थी तो वो आवाज़ नज़दीक से आयी थी . क्या उस बात पर और सुनील के उत्तेजित होकर आँचल को बाथरूम में चोदने के बीच कुछ सम्बन्ध था. कहीं सुनील ने......]

फिर सुनील ने आँचल की कमर को पकड़ा और आँचल को वॉश बेसिन पर थोड़ा और ज़्यादा झुका दिया. ऐसे ही झुकाकर आँचल की चूत में धक्के मारने लगा.

“ओह्ह ……....धीरे ……सुनील धीरे…… …उफफफ्फ़………....प्लीज़ सुनील धीरे धीरे से करो………….प्लीज़……....उफफफ्फ़…….”, आँचल ज़ोर से चिल्लाई.

असल में आँचल को सुनील के लंड से तकलीफ़ नही हो रही थी. सुनील का पतला लंड करीब 4.5 इंच का था. सुनील ने उसे वॉश बेसिन पर झुकाया हुआ था. उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ ठंडे मार्बल से दब कर दर्द कर रही थीं. तब वो चिल्लाई थी.

लेकिन सुनील ने उसकी बात अनसुनी कर दी. उसने आँचल को नीचे झुकाकर दबाए रखा और पीछे से और ज़ोर से धक्के मारने लगा. अब आँचल का पेट और जांघों का जोड़ वाला भाग भी वॉश बेसिन से टकराने लगा.

“आऐईयईईईई…....ओह……....नही करो…. ..सुनील…..…प्लीज़……..” आँचल दर्द से चिल्लाई.

सुनील ने आँचल की चूत में अपना वीर्य निकाल दिया और उसके बदन के ऊपर ही झुक गया. फिर सीधा हुआ तो देखा , झुकी हुई आँचल धीमे धीमे रो रही है.

सुनील ने आँचल को सीधा किया और उसे बेडरूम में ले गया और बेड पे लिटा दिया. खुद बाथरूम में नहाने चला गया.

आँचल बेड में लेटी हुई धीमे धीमे रोती रही. उसकी चूचियों पर मार्बल से रगड़ने के लाल निशान पड गये थे. और पेट के निचले हिस्से पर भी स्लैब पर टकराने से खरोंच के निशान थे. सुनील ने बेरहमी दिखाई थी और रगड़ खाने से तकलीफ़ हो रही है बताने के बावजूद उसने अनसुना कर दिया था. आँचल ने हर्ट फील किया और उसे रोना आ गया. सोचने लगी , ये मर्द ऐसे ही होते हैं , चोदते समय ऐसे बेरहम हो जाते हैं , जैसे औरत के जिस्म में जान ही न हो . उसके दर्द की बिलकुल परवाह ही नहीं करते .

Sunil aur Aanchal nashta karne dining room mein aa gaye. Aanchal ne nightgown pahna hua tha.

Wahan Ravi aur Riya baithe hue intzaar kar rahe the. Ravi apne cousin ke ghar se subah jaldi hi aa gaya tha. Ravi, Riya ne Sunil , Aanchal ko goodmorning wish ki. Phir Aanchal sabko nashta serv karne lagi.

Apne bedroom ke darwaze par Sasur ki harkat se Aanchal abhi bhi puri tarah se ubar nahi payi thi. sexual excitement se uska chehra abhi bhi laal ho rakha tha. patle nightgown ke andar usne sirf panty pahan rakhi thi. uski badi chuchiyan bra na hone se nashta serv karte samay hil dul rahi thin. Aanchal ki mansal janghon ka shape bhi us patle nightgown mein saaf dikh raha tha.

Riya ne dekha , nashta serv karne ke liye kitchen se dining table tak ghoom rahi Aanchal ko uska mangetar Ravi lalchayi nazron se ghoor raha hai. Riya ko jalan mehsoos hui aur Ravi pe bahut gussa aaya. Riya dhyan se dekh rahi thi, Aanchal Ravi ko nashta serv karte samay muskura rahi hai aur dekho to Ravi se kitna chipak ke khadi hai . Ravi ki plate mein nashta dalte samay jaanboojhkar jhuk rahi hai aur usko nightgown se apna cleavage dikha rahi hai. Nightgown bhi kesa pahan ke aayi hai , feete wala, khula khula , tange bhi dikha rahi hai. Riya ko aanchal par bhi gussa aaya.

Sunil ki nazren bhi apni madak biwi par hi thi. jo Riya ne dekha wo sunil ne bhi dekha. Ravi bhi meri biwi ko bahut ghoor raha hai. Ye dekhkar uske murjhaye lund mein harkat hui. Dusre mard jab uski biwi ko ghurte hain to sunil ko excitement hoti hai . lekin pehle aisa nahi tha. ye tabse suru hua jabse chudai karte samay aanchal ne dusre logon dwara apne badan se chedkhani ke kisse sunil ko sunane suru kiye. Tabhi se sunil ne mehsoos kiya ki aisi baaton se use badi uttezna aati hai. Ab use dusre mardon se jalan nahi hoti thi. ye baat aanchal bhi jaan gayi thi aur bada chadakar chedkhani ke kisse sunil ko sunati thi. par sunil ke man mein kya hai, wo apni biwi ko dusre mardon ke sath kis had tak dekhna swikar karega , ye kisi ko malum nahi. Aanchal yahi sochti hai ki sunil aisi baaton se excite hota hai , magar sirf baatein. Sunil ke samne kisi mard ke sath kuch karne ki to wo soch bhi nahi sakti. Lekin use malum nahi tha ki kuch der pehle bedroom ke darwaze par sasur ka lund pakde hue sunil ne use dekh liya hai aur ye dekhkar sunil ko jara bhi irshya ya jalan nahi hui thi balki use to ek ajeeb sa romanch hua tha. jo kyun hua tha wo to sunil bhi nahi janta. Par uski body apneaap aise respond kar rahi thi. apni khoobsurat biwi ko dusron ke samne showoff to wo pehle se hi karta tha par wo alag baat thi. ab kuch alag hi ho raha tha.

Yahan nashte ke dauran bhi yahi ho raha tha. Ravi aanchal ko ghoor raha tha aur aanchal usko dekhkar mushkura rahi thi. ye dekhkar riya gussa ho rahi thi lekin sunil ko isme maza aa raha tha.

Nashte ki table par sasur bhi apne khayalon mein dooba hua tha. aaj bahu ne mera lund pakad liya tha , mujhse chudne ko tayyar thi , agar sunil wahan par nahi hota to aaj chud hi jati. Ek aur mauka hath se nikal gaya. har baar machli hath se fisal jati hai. Pata nahi ab kab mauka milega. ye khoobsurat jawan chokri riya kuch hi din pehle hamare ghar aayi aur ye bhi mujhse chud gayi aur aanchal ko ek saal se jyada ho gaya hamare ghar aaye bahu bankar aur abhi tak mujhe nirasha hi hath lagi hai.

Nashte ki table par aanchal ki saas nahi thi kyunki wo pados mein satsang mein gayi thi.

Is tarah nashta karte samay baatein kam hi hui , sab apne apne khyalon mein doobe hue the.

Riya boli, “ mai nahane ja rahi hun phir tayyar bhi hona hai.” Aur table se uthkar chali gayi.

Sunil bhi apne bedroom mein chala gaya. wo dono jaldi nashta karke uth gaye.

Ab table par aanchal ke sath ravi aur sasur reh gaye. Aanchal dusron ko serv kar rahi thi isliye uska nashta abhi bacha hua tha. lekin ravi aur sasur jaanboojhkar dhire dhire nashta kar rahe the. Sunil aur Riya ke jaane ke baad, nashta karte hue dono aadmi ab khuleaam aanchal par nazre gadaye hue the.

Aanchal ne sasur aur ravi ki lalchayi nazron ko mehsoos kiya . aur sar jhukakar chupchap nashta karne lagi. jab bhi nazren uthati to pati wo dono usko hi dekh rahe hain.

Tabhi Riya ne Ravi ko awaz di ,” kitna time laga rahe ho nashta karne mein ? Yahan aawo jaldi.”

Riya samajh gayi thi ki ravi jaanboojhkar dhire dhire nashta kar raha hai taki jyada se jyada der tak aanchal ke sath baithne ka mauka mile. Isliye usne ravi ko daant kar bula liya aur apne bedroom mein baithne ko kaha. Taki ravi ko aanchal ko takne ka mauka na mile.

Ravi ka man nahi ho raha tha wahan se jane ka. Lekin riya ke dantne se usne bacha hua nashta fatafat khatam kiya aur wahan se uth gaya. lekin jate jate aanchal ke gale lag kar thanks keh gaya, “ bhabhiji , badiya nashta karane ke liye thanks .”

Thanks ka to bahana tha , iske bahane ravi ne aanchal ke gaalon se apne gaal ragad diye aur uski peeth par hath fer diya.

Uske baad wo riya ke pass uske bedroom chala gaya.

Mr Alok Joshi (sasur) abhi bhi khane mein hi the.

“bahu , meri plate mein thodi sabzi aur daal do.”

Aanchal uthi aur sasur ke pass jakar uski plate par sabzi dalne lagi.

Sabzi ka donga pakde hue aanchal ne apni panty ke upar hath mehsoos kiya.

Sasur ne aanchal ke nightgown ke andar hath daal diya tha aur panty ke upar se hi uski choot ko pakad liya. Phir panty ko thoda khiskakar aanchal ki choot mein apni moti ungli daal di.

Aanchal sasur ki harkat se ekdum chaunk gayi .

“uuuoohhhhh….” Uske munh se halki siski nikal gayi.

Ab sasur aanchal ki choot mein ungli karne laga aur anguthe se uski clit ko ragadne laga.

Aanchal sabzi ka daunga hath mein pakde wahin par khadi rahi aur usne sasur ko rokne ka koi prayas nahi kiya.

“ohhhh…….sasurji….” aanchal dhire se siski. Uske paanv wahin par zam gaye.

Sasur teji se uski choot mein ungli ghumane laga.

“unnnggg…..bas kijiye….koi aa jayega…..ohhhh…” aanchal ki siskariyan bad gayi.

Usne sabzi ka daunga table par rakh diya. Uski tange uttezna se kanpne lagi. support ke liye usne table ko pakad liya.

Lekin sasur ruka hi nahi. Wo experienced aadmi tha. expert tarike se aanchal ki choot aur clit ko chedte raha. Sayad sabzi mangne ka bhi uska bahana tha. usne pehle hi soch liya hoga ki aanchal sabzi dalne mere pass aayegi to……..

Sasur ungli karte raha aur table par hath tekkar aanchal sisakte rahi.

Un dono ko pata hi nahi chala ki buddha rasoiyaa ramlaal kitchen ke darwaze pe aa khada hua hai aur wahin se un dono ko dekh raha hai. Accha to ye sasur bahurani ke anguli kar raha hai table ke niche se , aur bahurani mast hui ja rahi hai.

Ramlaal pehle ek baar aanchal ko chod chuka tha. aanchal ki kamuk siskariyon se uska lund khada hone laga. Ek baar aur mil jaye memsaab chodne ko. Kitni kamuk hai memsaab. Sasur bhi pagla gaya hai iske chakkar mein.

Tabhi bedroom se Sunil ne awaz di,” aanchal, meri shirt nahi mil rahi hai. Kahan rakh di tumne ?”

Sasur ne turant aanchal ki choot se apni moti ungli nikaal li, ungli chootras se bhigi hui thi. aanchal sunil ke pass bedroom jane lagi lekin sasur ne use pakad liya aur apni god mein bitha diya. Aanchal ko apne nitambon par sasur ka khambhe jaisa lund chubha , Jo pyjame ke andar fanfana raha tha. phir sasur ne chootras se bhigi anguli aanchal ke munh mein daal di aur usse chatkar saaf karne ko kaha. Aanchal ko sasur ki ungli se apna hi chootras chatna pada.

Sasur ke choot mein ungli karne se usko orgasm aane hi wala tha lekin sunil ne disturb kar diya. Ab apne nitambon ke niche dabe hue sasur ke bade lund se uski uttezna aur bad gayi. usne sasur ki ungli ko chatkar saaf kar diya. Aur lund ke jese hi wo moti ungli choos dali. Aur sasur ki god mein baithe hue hi uske fanfanate lund ke upar apne nitambon ko hila hilakar ragad diya.

Aanchal ki machalti jawani sasur ke liye garam lawa jesi sabit hui. Apne lund par aanchal ke bade bade sudol lekin mulayam nitambon ki ragad se uske lund ne pani chod diya. Chal-chalakar nikle viry ne sasur ka pyjama kharab kar diya. Sasur ko bhi hairaani hui , itna viry to mera kabhi nahi nikla. Ye madak bahu ne bahar se hi nitambon ko ragadkar mera itna maal nikaal diya ki goliyan sikud gayi , to phir jab mai isko chodunga socho tab kitna niklega.

Tabhi sunil ne phir se aanchal ko awaz di, lekin is baar wo awaz unke nazdeeq se aayi thi.

Aanchal jaldi se sasur ki god se uthi aur apne bedroom mein chali gayi. sasur chair pe baitha hua jhadte hue gehri saanse le raha tha. uske lund se abhi bhi viry ki bunde nikal rahi thi.

Bedroom mein pahunchkar aanchal boli,” itna kyun chilla rahe ho sunil. Aa to rahi hun. Nashta kar rahi thi.”

Sasur ki god mein aanchal ko maza aa raha tha. aur sunil ke disturb karne se uska orgasm bhi adhura reh gaya tha. isliye wo thodi chidchida gayi thi.

“yahan to aao…” bathroom se sunil ne awaz di.

Jese hi aanchal bathroom mein ghusi , sunil ne usko piche se pakad liya . bina sambhalne ka mauka diye sunil ne aanchal ko wash basin par jhuka diya. Phir piche se uska gown upar uthakar panty niche kar di aur aanchal ki tange thodi failakar apna tana hua lund uski gili choot mein ghusa diya.

Aanchal jab tak kuch samajh pati ki kya ho raha hai tab tak uski choot mein piche se sunil ka lund ghus chuka tha.

Aanchal ne support ke liye wash basin ko pakda hua tha aur sunil uski choot par danadan dhakke mare ja raha tha.

Wash basin par jhuki hui aanchal sunil ke utawlepan se hairaan thi. aaj tak sunil ne use aise jhukakar piche se nahi choda tha aur bathroom mein to kabhi bhi nahi choda tha.

[ lekin ek baat par Aanchal ne gaur nahi kiya ki sunil ne jab dubara use awaz di thi to wo awaz nazdeeq se aayi thi . kya us baat par aur sunil ke uttezit hokar aanchal ko bathroom mein chodne ke beech kuch sambandh tha. kahin sunil ne……..]

Phir Sunil ne aanchal ki kamar ko pakda aur aanchal ko wash basin par thoda aur jyada jhuka diya. Aise hi jhukakar aanchal ki choot mein dhakke marne laga.

“ohhh…..dhire ……sunil dhire …ufffffff……..please sunil dhire dhire se karo……please…..uffff…”, aanchal jor se chillayi.

Asal mein aanchal ko sunil ke lund se takleef nahi ho rahi thi. sunil ka patla lund kareeb 4.5 inch ka tha. sunil ne use wash basin par jhukaya hua tha. uski badi badi chuchiyan thande marble se dab kar dard kar rahi thin. Tab wo chillayi thi.

Lekin sunil ne uski baat unsuni kar di. usne aanchal ko niche jhukakar dabaye rakha aur piche se aur jor se dhakke marne laga. Ab aanchal ka pet aur janghon ka jod wala bhag bhi wash basin se takrane laga.

“aaaiiiiiii…..ohhhhhh…..nahi karo ..sunil …please…..” aanchal dard se chillayi.

Sunil ne aanchal ki choot mein apna viry nikal diya aur uske badan ke upar hi jhuk gaya. phir sidha hua to dekha , jhuki hui aanchal dhime dhime ro rahi hai.

Sunil ne aanchal ko sidha kiya aur use bedroom mein le gaya aur bed pe lita diya. Khud bathroom mein nahane chala gaya.

Aanchal bed mein leti hui dhime dhime roti rahi. Uski chuchiyon par marble se ragadne ke laal nishan pad gaye the. aur pet ke nichle hisse par bhi slab par takrane se kharoch ke nishaan the. sunil ne berahmi dikhayi thi aur ragad khane se takleef ho rahi hai batane ke bawjood usne unsuna kar diya tha. Aanchal ne hurt feel kiya aur use rona aa gaya. sochne lagi, ye mard aise hi hote hain , chodte samay aise beraham ho jate hain, jese aurat ke jism mein jaan hi na ho. Uske dard ki bilkul parvah hi nahi karte.

pongapandit
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Re: आँचल की अय्याशियां

Post by pongapandit » 02 Dec 2017 15:03

आँचल के जाने के बाद ससुर ने देखा उसके पैजामे में उसके वीर्य और आँचल के चूतरस का धब्बा लगा हुआ है. उसने जल्दी से एक अख़बार उठाया और उससे अपने पैजामे को ढकते हुए नहाने के लिए बाथरूम जाने लगा. बाथरूम जाते समय उसने देखा रिया और रवि में किसी बात को लेकर बहस हो रही है. कोई और समय होता तो बुड्ढा कान लगाकर सुनता की इनकी बहस क्यूँ हो रही है. लेकिन अभी वो जल्दी में था क्यूंकी धब्बा छुपाने के लिए उसने पैजामे के आगे अख़बार लगाया हुआ था.

बाथरूम में नहाते समय ससुर बहुत खुश था. आख़िरकार आँचल को पटाने में मैं सफल हो ही गया हूँ. कैसे उसने मेरा लंड पकड़ा था और मेरी गोद में बैठकर मेरे लंड पर अपने नितंबों को रगड़कर मेरा पानी निकाल दिया था . ये सब लक्षण बता रहे हैं की अब आँचल मुझसे चुदवाने को बिल्कुल तैयार है. अब मैं आँचल को सिखाऊँगा की चुदाई के मज़े कैसे लिए जाते हैं. ऐसे ख़यालों से खुश होते हुए ससुर ने रगड़ रगड़कर नहाया और फिर सुनील के साथ ऑफिस जाने के लिए तैयार हो गया.

ऑफिस जाने से पहले ससुर ने रिया को गले लगाया और गुडबाय विश की , क्यूंकी शाम को रिया चंडीगढ़ चले जाने वाली थी. रिया ने गले लगकर ससुर को पकड़े रखा , ससुर समझ गया रिया अलग होना नही चाह रही है. उसने रिया के साथ दो रात चुदाई के जमकर मज़े लिए थे और रिया ने भी ससुर के साथ बहुत मज़े किए थे. आज रिया अपने घर जा रही है लेकिन कभी चंडीगढ़ जाने का मौका लगा तो इस जवान छोकरी को फिर से ज़रूर चोदूँगा. ये तो वैसे भी मुझसे बिल्कुल पटी हुई है, गले लगकर भी हट नही रही और चिपक रही है.

सुनील भी रिया के जाने से उदास था , उसने भी रिया को गले लगाकर गुडबाय विश की. फिर वो पापा के साथ ऑफिस चला गया.

आँचल बाथरूम में नहा रही थी. नहाने के बाद वो लिविंग रूम में आई तो देखा रिया रवि से ज़ोर ज़ोर से बहस कर रही है.

आँचल उन दोनों की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली,” क्या बहस हो रही है तुम दोनों की ? मुझे भी तो बताओ .”

रवि बोला,” देखिए ना भाभी. रिया ज़िद कर रही है और आज मेरे साथ चंडीगढ़ नही जाना चाहती है. आप समझाइये ना इसे…”

आँचल ने सवालिया निगाहों से रिया को देखा,” क्यूँ रिया ? ऐसा क्यूँ ? रवि चंडीगढ़ से तुम्हें लेने ही तो आया है .”

“ आज मेरी तबीयत ठीक नही है. मैं कार से चंडीगढ़ नही जाना चाहती हूँ. मैं इससे कह तो रही हूँ की कल ट्रेन से आ जाऊँगी लेकिन ये ज़िद कर रहा है की आज ही कार से चलो. तुम समझाओ ना इसे की कल मैं शताब्दी से आ जाऊँगी.” रिया ने आँचल की बाँह पकड़कर उसे अपनी बात समझाई और उससे अपनी साइड लेने को कहा.

अब आँचल को समझ नही आया की वो किसकी साइड ले.

असल में रिया तबीयत का सिर्फ़ बहाना बना रही थी. वो एक एक दो दो दिन करके अपनी वापसी टाल रही थी. उसको रात में ससुर के साथ चुदाई का चस्का लग गया था.

रवि बोला,” देखो भाभी, इसकी कोई तबीयत खराब नही है ये सिर्फ़ फालतू में ज़िद कर रही है. कल ये अकेली कैसे आएगी ?”

“आँचल इसको बोलो मैं अकेली आ सकती हूँ. बल्कि मैंने मम्मी को फोन करके बता भी दिया है की कल शताब्दी से आऊँगी.” रिया ने आँचल के चेहरे को पकड़कर कहा.

रिया की ज़िद देखकर आँचल मान गयी,” रवि तुम आज अकेले ही जाओ और रिया को मेरे पास एक दिन और रहने दो. वैसे भी अगर अभी से तुम उसकी बात नही मानोगे तो शादी के बाद तो बिल्कुल ही नही मानोगे.”

आँचल को अपनी साइड लेती देखकर रिया खुश हो गयी.

“देखो रवि , मेरी बात मान लो और अपनी भाभी की भी. मैं कल ही आऊँगी. और अगर तुम्हें मेरे अकेले आने की इतनी ही चिंता है तो आँचल भी मेरे साथ आ जाएगी. कुछ दिन चंडीगढ़ घूम फिर लेगी. आँचल के लिए भी थोड़ा चेंज हो जाएगा.”

रिया के सुझाव से आँचल को थोड़ा आश्चर्य हुआ. लेकिन रवि खुश हो गया की आँचल भी चंडीगढ़ आएगी. और वो रिया को साथ ले जाने की ज़िद छोड़कर इस बात के लिए तुरंत तैयार हो गया.

“हाँ ये ठीक रहेगा. भाभी को चंडीगढ़ घुमा फिरा देंगे.”

आँचल को थोड़ा आनाकानी करते हुए देखकर रिया बोली,” तुम क्यूँ चिंता करती हो. जीजाजी को मैं मना लूँगी की वो तुम्हें मेरे साथ चंडीगढ़ भेज दें. बस अब ये बात पक्की हो गयी. अब कोई आनाकानी नही. कल आँचल और मैं चंडीगढ़ जा रहे हैं. बस अब कोई बहस नही.”

रिया की बात पर आँचल मुस्कुराने लगी और सोचने लगी, ठीक ही तो है मैं भी चंडीगढ़ घूम आऊँगी.

फिर रवि बोला,” भाभी मुझे कुछ शॉपिंग करनी है. रिया की तो तबीयत ठीक नही है. आप आओगी मेरे साथ ? थोड़ी हेल्प कर दोगी मेरी.”

आँचल बोली,” ठीक है, मैं चलूंगी तुम्हारे साथ.”

“शिट …...”, रिया का मूड ऑफ हो गया, लेकिन तबीयत खराब होने का बहाना तो उसी ने बनाया था इसलिए वो अब कुछ नही कर सकती थी.

“मैं अभी तैयार होकर आती हूँ…..” कहकर आँचल अपने बेडरूम में चली गयी.

थोड़ी देर बाद आँचल तैयार होकर आई तो रवि देखता ही रह गया.

आँचल ने वाइट कॉटन स्लीवलेस शर्ट और वाइट ट्राउज़र्स पहने हुए थे. कपड़े का मैटेरियल सॉफ्ट था इसलिए उसकी लेसी ब्रा दिख रही थी . ट्राउज़र्स के अंदर पैंटी लाइन भी दिख रही थी और ट्राउज़र्स में उसके बड़े नितंबों की मादक शेप दिख रही थी.

रवि ने आँचल को ऊपर से नीचे तक देखा , क्या सेक्सी औरत है यार. वाइट शर्ट और ट्राउज़र्स में क्या फिगर दिख रहा है. दिल कर रहा है अभी यहीं पर पकड़कर इसके नितंबों को मसल डालूं और चोद दूं.

रिया ने भी मॉडर्न लुक में आँचल को देखा और उसे ईर्ष्या हुई. मेरे रवि के साथ ऐसी सेक्सी बन के जा रही है . ये पागल तो आँचल को देखकर अभी से लार टपका रहा है. ओह गॉड ! मैंने तबीयत खराब का बहाना क्यूँ बनाया.

आँचल ने भी रिया की जलन को फील किया , उसके होठों पर मुस्कुराहट आ गयी.

“ बाय रिया. तुम्हारी तबीयत ठीक नही है तुम आराम करो , ओके ?”

फिर रवि को अंगुली से अपने पीछे आने का इशारा करके आँचल लिविंग रूम से बाहर आ गयी.

आँचल कार चला रही थी रवि भी उसके साथ बैठा था. रवि की नज़रें सामने ना होकर कार चलाती हुई आँचल पर ही थी. आँचल की गोरी बाँहें, उसकी कांख और उसके परफ्यूम की खुशबू में रवि मदहोश हो रहा था. उसकी शर्ट के बटन्स के बीच से किसी किसी समय उसकी लेसी ब्रा भी दिख रही थी. रवि का लंड पैंट में तनकर दर्द करने लगा.

आँचल सब समझ रही थी की बेचारा रवि तो उसके रूप के जादू से मर ही गया है. लेकिन उसे अच्छा लग रहा था की ये मेरी तरफ इतना आकर्षित हो रखा है. वो रवि को टीज़ करने के लिए अपनी छाती आगे को धकेल देती जिससे उसकी बड़ी चूचियाँ और तन जाती.

आँचल रवि को साउथ एक्सटेंशन मार्केट ले गयी वहाँ से रवि ने अपने लिए कुछ शर्ट और पैंट ली. आँचल ने अपने लिए कुछ नही खरीदा. शॉप्स के आगे चलते समय रवि जानबूझकर आँचल की बाँहों और बदन को बहाने से टच कर दे रहा था. कभी उसकी बाँह पकड़ लेता, चलो इस शॉप में चलते हैं.

आँचल मुस्कुराती रही , ले ले तू भी मज़े , क्या याद करेगा…...

फिर रवि बोला, “भाभी, रिया के लिए कुछ सेक्सी लिंजरी लेनी है, कोई शॉप बताओ.”

आँचल उसको ख़ान मार्केट में एक लिंजरी शॉप में ले गयी. इंपोर्टेड लिंजरी की वजह से वो थोड़ी महँगी शॉप थी , कस्टमर भी कम ही थे वहाँ.

रवि ने सेल्सगर्ल को रिया की नाप बताई और आइटम्स दिखाने को कहा.

“ बड़े बदमाश हो रवि. अभी शादी भी नही हुई और अभी से रिया की नाप सब मालूम है…..” आँचल ने रवि से चुटकी ली. सेल्सगर्ल भी हंसने लगी. रवि झेंप गया.

सेल्सगर्ल ने बहुत से डिज़ाइन लाकर सामने रख दिए. रवि सभी आइटम्स को खोलकर आँचल को दिखाने लगा, ये ठीक रहेगी या ये वाली.

सेल्सगर्ल के सामने हल्की फुल्की मस्ती चलती रही. रवि अब खुलकर आँचल की बाँह और बदन को टच कर दे रहा था. आँचल ने रवि को नही रोका और मुस्कुरा कर मज़े लेती रही.

रवि लिंजरी के अलग अलग डिज़ाइन्स को आँचल के ऊपर लगाकर देख रहा था, कैसी लगेगी.

आँचल भी रवि की मस्ती समझ रही थी, वो भी खुलकर बताने लगी.

ये वाली कुछ ज़्यादा ही सेक्सी है,………….इस वाली में रिया के बूब्स बड़े लगेंगे, …….ये वाली तो ट्रांसपेरेंट है , इसमें तो रिया के बूब्स साफ दिखेंगे.

रवि ने रिया के लिए लिंजरी के तीन डिज़ाइन पसंद किए. फिर रवि ने आँचल की चूचियों की तरफ इशारा करते हुए , सेल्सगर्ल से रिया के लिए आँचल की जैसी ही ब्रा दिखाने को कहा.

रवि की इस हरकत से आँचल शरमा गयी.

सेल्सगर्ल ने आँचल से कहा, “आप चेंजिंग रूम में आओ , मैं ठीक से देखती हूँ कैसा डिज़ाइन है.”

आँचल सेल्सगर्ल के साथ चेंजिंग रूम चली गयी. सेल्सगर्ल ने बिना दरवाज़ा बंद किए ही आँचल की शर्ट के बटन खोलने शुरू किए.

आँचल को मालूम नही था की रवि भी उनके पीछे वहाँ आ गया है. जैसे ही उसकी नज़र रवि पर पड़ी , उसने रवि को वहाँ से भगा दिया,” तुम क्यूँ आए यहाँ …..” और चेंजिंग रूम का दरवाज़ा बंद कर दिया.

Aanchal ke jane ke baad Sasur ne dekha uske pyjame mein uske viry aur aanchal ke chootras ka dhabba laga hua hai. Usne jaldi se ek akhbaar uthaya aur usse apne pyjame ko dhakte hue nahane ke liye bathroom jane laga. Bathroom jate samay usne dekha Riya aur Ravi mein kisi baat ko lekar bahas ho rahi hai. Koi aur samay hota to buddha kaan lagakar sunta ki inki bahas kyun ho rahi hai. Lekin abhi wo jaldi mein tha kyunki dhabba chupane ke liye usne pyjame ke aage akhbaar lagaya hua tha.

Bathroom mein nahate samay sasur bahut khush tha. akhirkaar aanchal ko patane mein mai safal ho hi gaya hun. Kese usne mera lund pakda tha aur meri god mein baithkar mere lund par apne nitambon ko ragadkar mera pani nikaal diya tha. Ye sab lakshan bata rahe hain ki ab aanchal mujhse chudwane ko bilkul tayyar hai. Ab mai aanchal ko sikhaunga ki chudai ke maze kese liye jate hain. Aise khayalon se khush hote hue sasur ne ragad ragadkar nahaya aur phir sunil ke sath office jane ke liye tayyar ho gaya.

Office jane se pehle sasur ne Riya ko gale lagaya aur goodbye wish ki , kyunki sham ko riya chandigarh chale jane wali thi. Riya ne gale lagkar sasur ko pakde rakha , sasur samajh gaya Riya alag hona nahi chah rahi hai. Usne riya ke sath do raat chudai ke jamkar maze liye the aur riya ne bhi sasur ke sath bahut maze kiye the. aaj riya apne ghar ja rahi hai lekin kabhi chandigarh jane ka mauka laga to is jawan chokri ko phir se jarur chodunga. Ye to waise bhi mujhse bilkul pati hui hai, gale lagkar bhi hat nahi rahi aur chipak rahi hai.

Sunil bhi riya ke jane se udaas tha , usne bhi riya ko gale lagakar goodbye wish ki. Phir wo papa ke sath office chala gaya.

Aanchal bathroom mein naha rahi thi. nahane ke baad wo living room mein aayi to dekha Riya Ravi se jor jor se bahas kar rahi hai.

Aanchal un dono ki taraf dekhkar muskurate hue boli,” kya bahas ho rahi hai tum dono ki ? mujhe bhi to batao .”

Ravi bola,” dekhiye na bhabhi. Riya jid kar rahi hai ki aur aaj mere sath chandigarh nahi jana chahti hai. Aap samjhaiye na ise…”

Aanchal ne sawaliya nigahon se riya ko dekha,” kyun riya ? aisa kyun ? ravi chandigarh se tumhe lene hi to aaya hai .”

“ aaj meri tabiyat theek nahi hai. Mai car se chandigarh nahi jana chahti hun. Mai isse keh to rahi hun ki kal train se aa jaungi lekin ye jid kar raha hai ki aaj hi car se chalo. tum samjhao na ise ki kal mai shatabdi se aa jaungi.” Riya ne aanchal ki banh pakadkar use apni baat samjhayi aur usse apni side lene ko kaha.

Ab aanchal ko samajh nahi aaya ki wo kiski side le.

Asal mein riya tabiyat ka sirf bahana bana rahi thi. wo ek ek do do din karke apni wapsi taal rahi thi. usko raat mein sasur ke sath chudai ka chaska lag gaya tha.

Ravi bola,” dekho bhabhi, iski koi tabiyat kharab nahi hai ye sirf faltu mein jid kar rahi hai. Kal ye akeli kese aayegi ?”

“Aanchal isko bolo mai akeli aa sakti hun. Balki mene mummy ko phone karke bata bhi diya hai ki kal shatabdi se aaungi.” Riya ne aanchal ke chehre ko pakadkar kaha.

Riya ki jid dekhkar Aanchal maan gayi,” Ravi tum aaj akele hi jao aur riya ko mere pass ek din aur rehne do. Wese bhi agar abhi se tum uski baat nahi manoge to shadi ke baad to bilkul hi nahi manoge.”

Aanchal ko apni side leti dekhkar riya khush ho gayi.

“dekho ravi , meri baat maan lo aur apni bhabhi ki bhi. Mai kal hi aaungi. Aur agar tumhe mere akele aane ki itni hi chinta hai to aanchal bhi mere sath aa jayegi. Kuch din chandigarh ghoom fir legi. Aanchal ke liye bhi thoda change ho jayega.”

Riya ke sujhaav se Aanchal ko thoda ascharya hua. Lekin Ravi khush ho gaya ki aanchal bhi chandigarh aayegi. Aur wo riya ko sath le jane ki jid chodkar is baat ke liye turant tayyar ho gaya.

“ haan ye theek rahega. Bhabhi ko chandigarh ghuma phira denge.”

Aanchal ko thoda aanakani karte hue dekhkar riya boli,” tum kyun chinta karti ho. Jijaji ko mai mana lungi ki wo tumhe mere sath chandigarh bhej dein. Bas ab ye baat pakki ho gayi. ab koi aanakani nahi. Kal aanchal aur mai chandigarh ja rahe hain. Bas ab koi bahas nahi.”

Riya ki baat par Aanchal muskurane lagi aur sochne lagi, theek hi to hai mai bhi chandigarh ghoom aaungi.

Phir ravi bola,” bhabhi mujhe kuch shopping karni hai. Riya ki to tabiyat theek nahi hai. Aap aaogi mere sath ? thodi help kar dogi meri.”

Aanchal boli,” theek hai, mai chalungi tumhare sath.”

“shit….”, Riya ka mood off ho gaya, lekin tabiyat kharab hone ka bahana to usi ne banaya tha isliye wo ab kuch nahi kar sakti thi.

“mai abhi tayyar hokar aati hun…” kehkar aanchal apne bedroom mein chali gayi.

Thodi der baad aanchal tayyar hokar aayi to ravi dekhta hi reh gaya.

Aanchal ne white cotton sleeveless shirt aur white trousers pehne hue the. kapde ka mterial soft tha isliye uski lacy bra dikh rahi thi . trousers ke andar panty line bhi dikh rahi thi aur trousers mein uske bade nitambon ki madak shape dikh rahi thi.

Ravi ne aanchal ko upar se niche tak dekha , kya sexy aurat hai yaar. White shirt aur trousers mein kya figure dikh raha hai. Dil kar raha hai abhi yahin par pakadkar iske nitambon ko masal dalun aur chod dun.

Riya ne bhi modern look mein aanchal ko dekha aur use irshya hui. Mere ravi ke sath aisi sexy ban ke ja rahi hai . ye pagal to aanchal ko dekhkar abhi se laar tapka raha hai. oh god ! mene tabiyat kharab ka bahana kyun banaya.

Aanchal ne bhi riya ki jalan ko feel kiya , uske hothon par muskurahat aa gayi.

“ bye riya. Tumhari tabiyat theek nahi hai tum aaraam karo , ok ?”

Phir ravi ko anguli se apne piche aane ka isahara karke aanchal living room se bahar aa gayi.

Aanchal car chala rahi thi ravi bhi uske sath baitha tha. Ravi ki nazren samne na hokar car chalati hui aanchal par hi thi. aanchal ki gori banhen, uski kankh aur uske perfume ki khusboo mein ravi madhosh ho raha tha. uski shirt ke buttons ke beech se kisi kisi samay uski lacy bra bhi dikh rahi thi. ravi ka lund pant mein tankar dard karne laga.

Aanchal sab samajh rahi thi ki bechara ravi to uske roop ke jadoo se mar hi gaya hai. Lekin use accha lag raha tha ki ye meri taraf itna akarshit ho rakha hai. Wo ravi ko tease karne ke liye apni chati aage ko dhakel deti jisse uski badi chuchiyan aur tan jati.

Aanchal Ravi ko south extension market le gayi wahan se Ravi ne apne liye kuch shirt aur pant li. Aanchal ne apne liye kuch nahi kharida. Shops ke aage chalte samay ravi jaanboojhkar aanchal ki banhon aur badan ko bahane se touch kar de raha tha. kabhi uski baanh pakad leta, chalo is shop mein chalte hain.

Aanchal muskurati rahi , le le tu bhi maze , kya yaad karega…….

Phir Ravi bola, “bhabhi, riya ke liye kuch sexy lingerie leni hai, koi shop batao.”

Aanchal usko khan market mein ek lingerie shop mein le gayi. imported lingerie ki wajah se wo thodi mahangi shop thi , customer bhi kam hi the wahan.

Ravi ne salesgirl ko riya ki naap batayi aur items dikhane ko kaha.

“ bade badmash ho ravi. Abhi shadi bhi nahi hui aur abhi se riya ki naap sab malum hai…” Aanchal ne ravi se chutki li. Salesgirl bhi hasne lagi. Ravi jhenp gaya.

Salesgirl ne bahut se design lakar samne rakh diye. Ravi sabhi items ko kholkar aanchal ko dikhane laga, ye theek rahegi ya ye wali.

Salesgirl ke samne halki fulki masti chalti rahi. Ravi ab khulkar aanchal ki banh aur badan ko touch kar de raha tha. Aanchal ne ravi ko nahi roka aur muskura kar maze leti rahi.

Ravi lingerie ke alag alag designs ko aanchal ke upar lagakar dekh raha tha, kesi lagegi.

Aanchal bhi ravi ki masti samajh rahi thi, wo bhi khulkar batane lagi.

ye wali kuch jyada hi sexy hai,………….is wali mein riya ke boobs bade lagenge, …….ye wali to transparent hai , isme to riya ke boobs saaf dikhenge.

Ravi ne riya ke liye lingerie ke teen design pasand kiye. Phir ravi ne aanchal ki chuchiyon ki taraf ishara karte hue , salesgirl se riya ke liye aanchal ki jesi hi bra dikhane ko kaha.

Ravi ki is harkat se aanchal sharma gayi.

Salesgirl ne Aanchal se kaha, “aap changing room mein aao , mai theek se dekhti hun kaisa design hai.”

Aanchal salesgirl ke sath changing room chali gayi. salesgirl ne bina darwaza band kiye hi aanchal ki shirt ke button kholne suru kiye.

Aanchal ko malum nahi tha ki ravi bhi unke piche wahan aa gaya hai. Jese hi uski nazar ravi par padi , usne ravi ko wahan se bhaga diya,” tum kyun aaye yahan …..” aur changing room ka darwaza band kar diya.

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Re: आँचल की अय्याशियां

Post by Ankit » 02 Dec 2017 18:41

superb update bhai

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Kamini
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Re: आँचल की अय्याशियां

Post by Kamini » 03 Dec 2017 09:02

Mast update

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