मुहब्बत और जंग में सब जायज़ है

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rajsharma
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Re: मुहब्बत और जंग में सब जायज़ है

Post by rajsharma » 06 Dec 2017 12:50

दूसरे ही लम्हे सुल्तान भाई ने मेरे जिस्म को अपने बाज़ूँ की गिरफ़्त में दबोच लिया.

“हां रुखसाना तुम ने ये ऐसी आग मेरे अंदर लगा दी है कि में चाहू भी तो तुम से अब दूर नही रह सकता मेरी बहन”सुल्तान भाई बुरी तरह से मेरे साथ लिपट गया .और अपने प्यासे होंठों को मेरे गुलाबी और रेशम की तरह सॉफ्ट होंठों पे जमा कर पागलों की तरह मेरे होंठों, मुँह और गालों पर चूमने लगा.

अजीब दास्तान है ये
कहाँ शुरू कहाँ ख़तम
ये मंज़िलें है कौन सी
ना वो समझ सके ना हम

अपने साथ अपने भाई के वलिहाना प्यार का ये अंदाज़ देख कर में भी खुशी से झूम उठी.

और मेरे बाज़ू खुद ब खुद सुल्तान भाई की कमर के इर्द गिर्द जकड गये.

फिर मैने भी अपने भाई को उसी गरमजोशी के साथ अपनी बाँहों में भर लिया.

अब मेरे और मेरे भाई सुल्तान के दरमियाँ किस्सिंग का एक ना रुकने वाला सिलसिला शुरू हो गया.

सुल्तान भाई की ज़ुबान मेरे मुँह में और मेरी ज़ुबान सुल्तान भाई के मुँह में फिसल रही थी.

मेरे मुँह में मुँह डालते ही सुल्तान भाई ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर मेरे गुदाज ,बड़े और मोटे मम्मे को अपने हाथ में थाम लिया और किस्सिंग के दौरान आहिस्ता आहिस्ता मेरे मम्मे से खैलने लगा.

अपने भाई का हाथ अपने मम्मे पर पा कर मेरे मुँह से एक सरूर भरी सिसकी निकली” अहहाआआआअ”

सुल्तान भाई बड़े चाव से मेरे बड़े और गोल मटोल मम्मे को अपने हाथ में ले कर सहलाने लगा.

कमीज़ के उपर से मुझे अपने मम्मे अपने भाई से मसलवाने में बहोत मज़ा आ रहा था.

इस मज़े को महसूस करते हुए मैने अपने आप को अपने भाई के मुकम्मल हवाले कर दिया.

हम दोनो बहन भाई के मुँह एक दूसरे के मुँह से पूरी तरह जुड़े हुए थे.

और हम एक दूसरे पर किस्सिंग की बरसात करने में मसरूफ़ थे.

इसी दौरान भाई ने मेरे मम्मे को आज़ाद करते हुए अपने हाथ को आगे बढ़ाया.

और मेरे पेट के उपर से अपने हाथ को फेरता हुआ मेरी रेशमी सलवार के उपर लिया और फिर मेरी चूत को अपनी मुट्ठी में भर लिया.

अपने भाई के हाथ अपनी गीली चूत पर पाते ही मेरे मुँह से फिर एक सिसकारी निकली” ओहााआआआआआआआ.

मेरी सरूर भरी सिसकी मेरे भाई के जज़्बात को भी शायद आग लगा गई.

“उफफफफफफफफ्फ़ रुखसाना कितनी गरम चूत है तुम्हारी”सुल्तान भाई ने जोश में आते हुए मेरी शलवार के उपर से मेरी चूत पर अपने हाथ का दबाव बढ़ा दिया.

सुल्तान भाई के हाथ की गर्मी ऑर सख्ती मेरी चूत ऑर मेरे सारे बदन में अग लगाने लगी..और में मज़ीद गरम हो कर लज़्ज़त भरी सिसकारियाँ लेने लगी.

साथ ही में भी अपने भाई की हरकत की तल्क़ीद (कॉपी) करते हुए अपना हाथ फॉरन नीचे लाई. और सुल्तान भाई की शलवार में उठे हुए भाई के जवान तगडे लंड को अपने काबू में कर लिया..

ज्यूँ ही मैने अपने भाई का तना हुआ लंड अपने हाथ में लिया. तो भाई को भी अपनी बहन के हाथों की गरमी का लामास अपने लंड पर महसूस कर के मज़े के मारे एक झटका सा लगा.

और उस ने मज़े के मारे “सिसस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स” करते हुए अपने गरम होंठो का दबाव मेरे नादान होंठों पर बढ़ा दिया.

अब हम दोनो बहन भाई के हाथ एक दूसरे के लंड और फुद्दी से खेलने लगे.

और हमारे मुँह और ज़ुबान एक दूसरे से चिपक कर एक दूसरे के प्यासे लबों का रस निचोड़ रहे थे.

हवस की आग ने हम दोनो को इतना पागल कर दिया था.कि अब हम दोनो भूल चुके थे कि हम दोनो बहन भाई हैं.

जिस्मो की जलती आग में हम दोनो को अब एक ही रिश्ता याद था. और वो रिश्ता एक मर्द और औरत और चूत और लंड का ही था.
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
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Re: मुहब्बत और जंग में सब जायज़ है

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rajsharma
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Re: मुहब्बत और जंग में सब जायज़ है

Post by rajsharma » 06 Dec 2017 12:51

कुछ देर के बाद सुल्तान भाई ने मुझ अपने बाज़ू की क़ैद से आज़ाद किया और बोले “ जान ज़ेरा अपने कपड़े उतार कर अपने आशिक़ को अपने हसीन बदन का दीदार भी तो कर्वाओ ना”

लगता था कि लंड की गर्मी सुल्तान भाई के दिमाग़ को चढ़ गई थी.

इस लिए वो अब सारी “शर्म ओ हया” की “माँ बहन” करते हुए अपनी ही बहन को एक माशूक़ के तौर पर देखने लगा था.

मुझे भी अपने भाई के अपने आप को मेरा आशिक़ कहना अच्छा लगा.

और मेरा दिल भी अपने आप को नंगी कर के अपने भाई के सामने एक फॅशन मॉडेल की तरह कॅट वॉक करने को मचलने लगा.

वैसे तो सुल्तान भाई रात के अंधेरे में दो दफ़ा मेरे मम्मे और मेरी चूत को चूस और चोद तो चुके थे.

मगर इतना सब कुछ करने के बावजूद सुल्तान भाई अभी तक मेरे जिस्म के नंगे नज़ारे से महरूम थे.

इस लिए शायद सुल्तान भाई से अब मजीद सबर नही हो रहा था. और उस का दिल जल्द से जल्द अपनी सग़ी बहन को बे लिबास कर के दिन की रोशनी में उस के नंगे बदन को देखने के लिए मचल रहा था.

में: “भाई मुझे डर है कि कहीं नुसरत और गुल नवाज़ घर वापिस ना आ जाएँ और हम दोनो को इस हालत में रंगे हाथों पकड़ लें”

सुल्तान भाई: “तुम उन की फिकर मत करो,मेरे ख़याल में उन दोनो ने तो शूकर किया हो गा कि में उधर से चला आया.और मुझे पक्का यकीन है हमारी तरह वो दोनो बहन भाई भी इस वक़्त दिल खोल कर आपस में रंग रलियाँ मना रहे होंगे” सुल्तान भाई ने मेरी तरफ एक शरारती मुस्कराहट से देखते हुए जवाब दिया.

“भाई मुझ अपने कपड़े उतारने में शरम आ रही है”मैने जहनी तौर पर शरमाने का नाटक करते हुए भाई से कहा.

“ हाए ज़रा नखरे तो देखो मेरी गरम मस्तानी बहन के” भाई मेरी बात पर हंसते हुआ बोला और आ गये बढ़ कर पहले मेरी छाती से मेरे दुपट्टे को अलहदा किया.
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Re: मुहब्बत और जंग में सब जायज़ है

Post by jay » 06 Dec 2017 16:44

nice update bhai
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Re: मुहब्बत और जंग में सब जायज़ है

Post by Kamini » 06 Dec 2017 21:36

Mast update

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Re: मुहब्बत और जंग में सब जायज़ है

Post by rajsharma » 08 Dec 2017 23:43

“भाई मुझ अपने कपड़े उतारने में शरम आ रही है”मैने जहनी तौर पर शरमाने का नाटक करते हुए भाई से कहा.

“ हाए ज़रा नखरे तो देखो मेरी गरम मस्तानी बहन के” भाई मेरी बात पर हंसते हुआ बोला और आ गये बढ़ कर पहले मेरी छाती से मेरे दुपट्टे को अलहदा किया.

और फिर पीछे से मेरी कमीज़ की ज़िप को खोल कर मेरे गीली बदन से चिमटी हुई मेरी कमीज़ को उतार कर बिस्तर पर फैंक दिया. इस दौरान मैने भी अपने हाथ उपर उठा कर अपनी कमीज़ उतारने में अपने भाई की मदद की.

मेरी कमीज़ को मेरे जिस्म से उतार कर सुल्तान भाई मेरे जिस्म का पहली बार नज़ारा करने के लिए थोड़ा पीछा हटा.

आज मैने सफेद रंग का ब्रेजियर पहना हुआ था. जो मेरे बड़े मम्मो को काबू करने से कसीर था.

जिस की वजह से मेरे आधे से ज़ेयादा मम्मे ब्रेजियर से बाहर झलक रहे थे.

सुल्तान भाई ने जब मेरे ब्रेजियर से बाहर छलकते हुए मम्मो को पहली दफ़ा दिन की रोशनी में देखा.

तो अपनी बहन के मम्मो के हुश्न को देख कर वो तो जैसे जोश और मस्ती में पागल हो गया.

और भाई के मुँह से बेसखता ये अल्फ़ाज़ निकले” माश*****” “चस्मे बद्दूर”.

“उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ रुखसाना,तुम्हारा जिस्म और तुम्हारे मम्मे कितने प्यारे और कितने खूबसूरत हैं मेरी बहन”

अपने भाई से दो दफ़ा पहले चुदाई करवाने के बावजूद मुझे उस वक़्त यूँ पहली बार अपने भाई के सामने आधा नंगा हो कर बैठने में थोड़ी शरम आ रही थी.

क्यों कि जो भी हो सुल्तान था तो मेरा सगा भाई. और एक बहन होने के नाते मैने तो उस के सामने अपना दुपट्टा भी अपने सर से कभी नही उतारा था.

और आज में ना सिर्फ़ खुद अपने भाई को अपने कपड़े उतारने का कह चुकी थी.बल्कि मैने खुद भी अपनी कमीज़ उतारने में अपने भाई की मदद की थी.

थोड़ी देर मेरे आधे नंगे मम्मो को देखने के बाद सुल्तान भाई आहिस्ता आहिस्ता चलता हुआ मेरे करीब आया और झुक कर मेरी ब्रेजियर से बाहर छलकते हुए मम्मो के उपर अपनी ज़ुबान फेरने लगा.

“उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़”भाई की गरम ज़ुबान मेरी छातियों के गोश्त पर लगने की देर थी. कि मेरी चूत से पानी एक सेलाब उमड़ा जो मेरी शलवार को भिगोता हुआ मेरी रानो को भी तर कर गया...

सुल्तान भाई ने बड़े प्यार से मेरी छातियों पर अपने प्यार की बरसात भिगो दिया और में मज़े से सिसकने लगी.

थोड़ी देर मेरे मम्मो की दरमियाँ वाली जगह (क्लीवेज़) को चाटने के बाद. सुल्तान भाई अपने हाथ को मेरे नंगे पेट पर फेरते फेरते मेरी शलवार के नाडे की तरफ बढ़ने लगा.

जैसे जैसे भाई का हाथ मेरे पेट पर फिरता गया मुझ पर एक नशा सा चढ़ता गया.और मेरे बदन में एक सनसनी सी चढ़ती गई.

सुल्तान भाई का हाथ बढ़ता हुआ मेरे नाडे तक पहुँचा और फिर भाई ने अपनी बहन के नाडे को हाथ में ले कर हकला सा झटका दिया.

तो मेरी शलवार “खुल जा सिम सिम” की तरह अपने भाई की नज़रों के “मनो रंजन” के लिए खुलती ही चली गई.

में शादी के बाद आज तक कितनी ही दफ़ा अपने शोहर गुल नवाज़ के हाथों पूरी नगी हुई थी.

और इस से पहले भी रात की तन्हाई में एक दफ़ा अपने भाई के हाथों अपने कपड़े उतरवा चुकी थी.

मगर आज दिन की रोशनी में अपने सुहाग वाले बिस्तर पर अपने ही भाई के हाथ अपने आप को अपने कपड़ों की क़ैद से आज़ाद होता देख कर मेरी फुद्दी पानी पानी होने लगी.

सुल्तान भाई ने मेरी शलवार को उतार कर उसे भी मेरी कमीज़ के पास ही फैंक दिया.

अब में कपड़ों के बगैर सिर्फ़ अपने ब्रेजियर में आधी नगी बिस्तर पर बैठी थी.
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
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