मुहब्बत और जंग में सब जायज़ है

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Re: मुहब्बत और जंग में सब जायज़ है

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rajsharma
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Re: मुहब्बत और जंग में सब जायज़ है

Post by rajsharma » 30 Nov 2017 12:40

Ankit wrote:
28 Nov 2017 14:13
Superb update Raj bhai
chusu wrote:
28 Nov 2017 16:30
sahi.............. ab ye jhanjhar phir chudwayegi
jay wrote:
28 Nov 2017 19:23
chusu wrote:
28 Nov 2017 16:30
sahi.............. ab ye jhanjhar phir chudwayegi
sahi kaha bro ........... jab bhai ho pas to kyon na bujhe pyaas
Kamini wrote:
29 Nov 2017 10:07
mast update
rangila wrote:
29 Nov 2017 21:02
super hot stori hai bhai keep writing.............
धन्यवाद दोस्तो अपडेट

थोड़ी ही देर में ...............
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
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Re: मुहब्बत और जंग में सब जायज़ है

Post by rajsharma » 30 Nov 2017 12:58

में ये बात खूब जानती थी. कि जो कुछ मेरे और भाई के बीच रात को हो चुका है वो अब कभी दुबारा नही होगा.

इस लिए अब में सिर्फ़ उस रात को याद कर के अपनी फुद्दी से खेलने के अलावा कुछ और करने से मजबूर थी. और इस लिए में अपनी फुद्दी में उगली डाल कर अपनी फुद्दी से खेलने लगी.

थोड़ी देर इस तरह अपने जिस्म से खुद लज़्जती करने के बाद मैने शवर लिया और फिर अपने कपड़े पहन कर बाथरूम से बाहर आ कर रसोई की तरफ चली आई.

रसोई की तरफ जाते हुए मेरा दिल धक धक कर रहा था. इस बात के बावजूद के रात को जो कुछ मेरे और भाई सुल्तान के दरमियाँ हुआ. वो रात की तन्हाई में हुआ था.

लेकिन इस के बावजूद नज़ाने क्यों मुझे अब अपने भाई का सामना करने में एक शर्म सी महसूस हो रही थी.

रोसोई में नुसरत अकेली बैठी नाश्ता बना रही थी. मुझ अंदाज़ा हो गया कि मेरा शोहर और भाई दोनो नाश्ता कर के अपने काम काज के सिलसिले में डेरे पर जा चुके हैं. ये बात जान कर मैने सकून का सांस लिया.

मुझ रसोई के अंदर आते देख कर नुसरत की तो खुशी से जैसे “आँखे” ही खिल गईं.

वो जल्दी से मेरी तरफ बढ़ी और बेताबी से पूछने लगी” क्यों बानो रानी फिर रात को अपने भाई से “ठुकवा” (चुदवा)लिया है ना”

मुझे नुसरत की बात सुन कर शरम तो बहुत आई मगर में सोच रही थी. कि अगर मैने अपनी भाई से रात को चुदवाया है तो क्या हुआ. मेरी तरह नुसरत भी तो अपने भाई से अपनी फुद्दी मरवा चुकी है.

इस लिए मैने सोचा कि पहले में इस को अपना और अपने भाई के दरमियाँ होने वाला सारा वाकीया सच सच बता दूँगी.

फिर उस से उस की और उस के भाई गुल नवाज़ की चुदाई का सारा किसा तफ़सील में नुसरत की ज़ुबान से सुन कर चस्के लूँगी.

ये ही सोचते हुए मैने नुसरत को अपनी तमाम दास्तान बयान कर दी.और साथ ही उस से अपने रात के सख़्त रवैये की माफी माँगते हुए उस के साथ देने का शुक्रिया भी अदा कर दिया.नुसरत मेरी सारी बात बहुत शौक और दिल चस्पी से सुनती रही.

“नुसरत अब तुम सूनाओ मेरे शोहर ने तुम्हे रात को तंग तो नही किया” मैने शरारती मुस्कुराहट में पूछा. में अभी उस को ये नही ज़ाहिर करना चाहती थी कि में उस के भाई गुल नवाज़ के साथ उस की चुदाई का सारा हाल खुद अपनी आँखो से देख चुकी थी.

“ सच पूछो तो रुखसाणा भाई गुल नवाज़ के साथ एक ही पलंग पर सोने के ख़याल ही से में बहुत डरी हुई थी.मगर भाई गुल नवाज़ तो कमरे में आते ही सो गया और शूकर है में अपने ही भाई के हाथों बे आबरू होने से बच गई” नुसरत मेरे मुँह पर ही झूट बोलते हुए रसोई से निकली और ये जा वो जा.

में उस के झूट को सुन कर उधर ही बुत बनी हेरान परेशान उसे जाता देखती रही.

अगर मैने खुद अपनी आँखों से उन की चुदाई का सारा मंज़र नामा ना देखा होता तो शायद में उस के झूठ पर यकीन कर लेती.

मगर मुझे ये बात समझ नही आई कि नुसरत क्यों अपनी और अपने भाई की चुदाई की बात मुझ से छुपा रही थी.

शायद वो इस बात से डर रही थी. कि कहीं में उस को ये ताना ना दूं कि जिस काम से वो मुझे मना कर रही थी. उस को वो खुद ही अपने भाई के साथ कर चुकी थी.

या फिर वो इस बात को राज़ में रख कर मुझे एक रंडी और अपने आप को सती सावित्री (इनोसेंट) साबित करना चाहती थी.

नुसरत के रसोई से जाने के बाद मैने नाश्ता किया और घर के काम काज में लग गई.

शाम को जब मेरा शोहर और भाई सुल्तान वापिस लोटे. तो उन की हालत से लग रहा था कि आज वो दोनो शराब पी कर नही आए थे.

ये बात मेरे लिए थोड़ी हेरान कन थी. क्यों कि शादी के बाद से अब तक वो दोनो तकरीबन हर शाम ही चुस्की लगा कर घर लोटे थे.

मैने रसोई में अपने शोहर गुल नवाज़ और भाई सुल्तान को खाना दिया.

खाना देते वक़्त में चुपके चुपके अपने भाई के चेहरे और जिस्म को देख रही थी.

भाई को देख कर मेरी नज़रों में रात वाला मंज़र दौड़ रहा था और नीचे मेरी चूत पानी पानी हो रही थी.

मैने इस से पहले लाखों दफ़ा अपने भाई को देखा था. मगर इस से पहले कभी मेरी हालत नही हुई थी.

खाने के बाद हम सब अपने अपने कमरों में चले गये. मेरी चूत बहुत गरम हो रही थी और उस को लंड की शिदत से तलब थी.

कमरे में जाते ही में अपने शोहर के लंड के उपर चढ़ गई. और उसी तरह अपने शोहर गुल नवाज़ से अपनी फुद्दी मरवाने लगी जिस तरह मेरे भाई ने काल रात मुझे अपने लौडे के उपर बैठा कर चोदा था.

आज मैने महसूस किया कि मेरी तरफ मेरा शोहर गुल नवाज़ भी एक नये जोश और वलवले से मुझे चोद रहा था.

दूसरी तरफ भाई सुल्तान कुछ काम के सिलसिले में अकेला ही शहर गया जब कि मेरा शोहर गुल नवाज़ घर में ही था.

सारा दिन में और नुसरत घर के काम काज में मसरूफ़ थीं. जब कि मेरा शोहर गुल नवाज़ बरामदे में कुर्सी पर बैठा हाथ की फन्खि से हवा ले रहा था.

काम काज के दौरान मैने नोट किया कि मेरा शोहर गुल नवाज़ मुझ से चोरी चोरी अपनी बहन नुसरत के जिस्म का बगौर जायज़ा लेने में मगन है.

पहले तो मैने इसे अपना वेहम समझा. मगर फिर जब नुसरत कपड़े धोने के लिए घर के सहन में आई तो में जान भूज कर अपने कमरे में चली आई.

ताकि ये देख सकूँ कि मेरा ख़याल सच है या फिर सिर्फ़ मेरा वेहम है.

में कमरे में जाते ही खिड़की के पर्दे के पीछे खड़ी हो गई और छुप कर बाहर देखने लगी.

बाहर सहन में नुसरत अपनी बड़ी गान्ड मटकाती इधर उधर घूम रही थी. और पीछे से मेरा शोहर बहुत गौर के साथ अपनी बहन की थिरकती गान्ड के नज़ारे लेने में मसरूफ़ था.

मेरा शक सच निकला कि गुल नवाज़ वाकई ही अपनी बहन के बदन से अपनी आँखों को सैंक रहा था.

में सोचने लगी कि शायद उस रात गुल नवाज़ को शक हो गया हो. कि बाथरूम में उस ने जिसे चोदा है वो उस की बीवी नही बल्कि बहन थी.

इसी लिए वो अब अपनी बहन के बदन को देख कर अपना शक दूर करना चाहता हो.या फिर वो वैसे ही आज गरम हो रहा था.

थोड़ी देर कमरे में गुज़ारने के बाद में बाहर निकली तो मेरा शोहर गुल नवाज़ मुझ बाहर आता देख कर उठ कर घर से बाहर चला गया.

में भी सब कुछ भूल कर फिर से घर के कामों मे जुट गई और इसी तरह ये दिन भी गुजर गया.

अगले दिन शाम को भाई सुल्तान और मेरा शोहर गुल नवाज़ रात का खाना खाने के बाद घर से बाहर दोस्तो से मिलने चले गये.

में उस वक़्त सहन में चारपाई पर बैठी उन को बाहर जाता देखती रही.

मुझे यकीन था कि आज फिर वो पी कर ही रात को देर से घर वापिस आएँगे. इस लिए में सोचने लगी कि अपने कमरे में जा कर सो जाऊं.

अभी में चारपाई से उठने का इरादा कर ही रही थी कि इतने में नुसरत मेरे पास आन बैठी.
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
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Re: मुहब्बत और जंग में सब जायज़ है

Post by Smoothdad » 30 Nov 2017 14:43

शानदार अपडेट।
जारी रखे, आगे की प्रतीक्षा में

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xyz
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Re: मुहब्बत और जंग में सब जायज़ है

Post by xyz » 30 Nov 2017 18:17

nice update

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