असली या नकली

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Re: असली या नकली

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jay
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Re: असली या नकली

Post by jay » 15 Nov 2017 09:34

congratulations for a new story
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(ज़िन्दगी एक सफ़र है बेगाना running.......).
(वक्त का तमाशा running)..
(ज़िद (जो चाहा वो पाया) complete).
(दास्तान ए चुदाई (माँ बेटी बेटा और किरायेदार ) complete) .. (सातवें साल की खुजली complete)
(एक राजा और चार रानियाँ complete).............(माया complete...)-----(तवायफ़ complete).............
(मेरी सेक्सी बहनें compleet)........(दोस्त की माँ नशीली बहन छबीली compleet)............(माँ का आँचल और बहन की लाज़ compleet)..........(दीवानगी compleet )....... (मेरी बर्बादी या आबादी (?) की ओर पहला कदमcompleet)........(मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग)........


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(कोई तो रोक लो)
(ननद की ट्रैनिंग compleet)..............( सियासत और साजिश)..........(सोलहवां सावन)...........(जोरू का गुलाम या जे के जी).........(मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन)........(कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास)........(काले जादू की दुनिया)....................(वो शाम कुछ अजीब थी)

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rajaarkey
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Re: असली या नकली

Post by rajaarkey » 15 Nov 2017 13:34

बहुत अच्छी शुरुआत है
(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &;
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj sharma

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Re: असली या नकली

Post by Kamini » 15 Nov 2017 17:34

Rohit Kapoor wrote:
14 Nov 2017 19:56
Keep writing dear, Excited for NEXT Update . . . .
Ankit wrote:
14 Nov 2017 16:11
superb update
pongapandit wrote:
14 Nov 2017 19:31
super hot super erotic incest
jay wrote:
15 Nov 2017 09:34
congratulations for a new story
rajaarkey wrote:
15 Nov 2017 13:34
बहुत अच्छी शुरुआत है
thanks you sooooooooooooooooooooooooo much

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Kamini
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Re: असली या नकली

Post by Kamini » 15 Nov 2017 17:35

मोहिनी ने कह तो दिया पर उसे क्या पता था कि उसके ऐसे कहने का आनंद पे क्या असर होगा, आनंद ने जब ये सुना तो उसके आश्चर्य का तो कोई ठिकाना ही ना था, वो तो मोहिनी के इस खुलेपन पर बिलकुल हैरान सा खड़ा था, पर इधर मोहिनी बेपरवाह हँसे जा रही थी, और उसके इस तरह हंसने से उसके बड़े बड़े खुबसूरत मम्मे उसकी ताल में ताल मिलाकर कूदे जा रहे थे

आनंद की हालत ख़राब होने लगी, बूब्स को अपने इतने पास देखकर उसकी हालत ख़राब हुए जा रही थी, उसने महसूस किया कि मोहिनी के बदन से एक मदहोश करने वाली खुसबू आ रही थी, जो उसके नथुनों में घुसकर सीधे उसके लंड पर असर दिखा रही थी, आज आनंद ने पहली बार मोहिनी को इस नज़र से देखा था, मोहिनी अपने हाथो में आनंद की अंडरवियर लिए बड़ी बेपरवाह तरीके से हँसे जा रही थी, और उसके कसे ही बदन से चिपकी लेगिंग्स में जकड़ी सुडोल सुंदर मांसल जांघे, और खुले गले में से झनकते खुबसूरत मम्मे आनंद के लंड की नसों को बुरी तरह तनने पर मजबूर किये जा रहे थे,

आनंद ने तुरंत इन विचारो को अपने मन से झटकने की कोशिश की परन्तु उसकी गुस्ताख नज़रे दोबारा इस सोने से चमकते बदन को बनावट को देखने के लिए उठ जाती, आनंद अभी इसी उधेड़बुन में लगा था कि मोहिनी ने उसे टोकते हुए कहा

“ओये बेवकूफ कहाँ खो गया तू, चल अब अपनी एक टांग उठा,ताकि मैं तुझे तेरी अंडरवियर पहना सकूं” मोहिनी ने कहा

अब आनंद ने डरते डरते आखिर अपनी एक टांग उठा ही ली, मोहिनी ने झट से अंडरवियर को उसकी टांग में डाला और फिर दूसरी टांग को कहा
आनंद तो जैसे कठपुतली बना हुआ था, उसने मोहिनी के कहे अनुसार अपनी पहली टांग वापस रख दूसरी उठा ली,आनंद के हाथ अभी भी अपने लंड के उभर पर ही था,जिसे वो किसी तरह मोहिनी से छुपाना चाहता था, पर कहते हैं ना किस्मत का लिखा कौन टाल सकता है?

और यही आनंद के साथ भी हुआ, मोहिनी अब धीरे-धीरे आनंद की अंडर वियर को तोलिये के अंदर ऊपर की ओर खिसकाने लगी, इधर आनंद की हालत मोहिनी के छूने से और भी ज्यादा खराब होती जा रही थी, क्योंकि उसका लंड बुरी तरह फुंकारने लगा था, आनंद ने अपने हाथों का पूरा जोर लगा कर अपने लंड को ऊपर उठने से रोका हुआ था

इधर मोहिनी अपने काम में पूरी तरह मग्न थी, दरअसल मोहिनी को तो ये लग रहा था कि शायद आनंद शर्माने की वजह से अपने हाथो से तोलिये को पकड़ा हुआ है, उसे ये बिलकुल अंदाज़ा नही था कि आनंद के हाथो के पीछे उसका खूंखार लंड सर उठाये खड़ा है

मोहिनी ने अब टॉवल के अंदर से अंडरवियर को घुटनों तक चढ़ा दिया था, पर अब उसे थोड़ी परेशानी हो रही थी और उपर बढने में

“तुम अपने टॉवल को थोडा सा उपर उठा लो न आनंद” मोहिनी बोली
“ठिक्क्क ...है..दीदी....” आनंद बोला और जैसे ही उसने अपने हाथो से टॉवल को उठाना चाहा, तो उसके हाथो की कैद में बंद उसका लंड स्प्रिंग की तरह उछल गया और टॉवल के अंदर से मिसाइल की तरह तनकर तोलिये को एक झटके में निचे गिरा दिया, यहाँ तक तो फिर भी ठीक था पर आज आनंद का लंड पूरा बागी हो चूका था, उसने न सिर्फ तोलिये को गिराया बल्कि सीधा जाकर मोहिनी के चेहरे से जा टकराया

“ ओह्ह्ह्हह्ह........म्य्यय्य्य्यय्य्य्य........godddddddddddddd......, ये.....ये........क्या है...........इतना बड़ा..........” मोहिनी के मुंह पर हैरानी के भाव थे

इधर आनंद ने तुरंत अपना तोलिया उठाया और भागकर बेड के पीछे छुप गया, इधर मोहिनी अभी भी सदमे में थी, उसे बिलकुल समझ नही आ रहा था की अचानक ये क्या हो गया, उसने पहली बार ज़िन्दगी में कोई लंड देखा था, और वो भी इतने करीब से पर देखा भी तो किसका अपने छोटे भाई का,


मोहिनी शरमाकर सीधी कमरे से भाग गई,
इधर आनंद भी बुरी तरह पसीने से लथपथ हो गया था, वो अपने आप को कोष रहा था

“क्यों मैंने आज मुठ नही मारी, क्यों आज मैं कपडे बाथरूम में साथ नही ले गया, अगर दीदी ने किसी को बता दिया तो” आनंद मन ही मन घबराए जा रहा था

अब उसने ज्यादा टाइम ख़राब नही किया और फटाफट कपड़े पहनकर सीधा बिना नाश्ता किये ऑफिस के लिए अपनी कार में निकल गया ,क्यूंकि वो अब मोहिनी को फेस नही करना चाहता था,

आनंद बिना नाश्ता किये सीधा ऑफिस के लिए निकल गया, ये आज पहली बार था जब आनंद ऑफिस जा रहा था,और इसीलिए आनंद को वहाँ कोई नही पहचानता था, क्यूंकि आज तक किसी ने आनंद को देखा ही नही था,

आनंद अपनी कार को स्पीड में भगाए जा रहा था, उसका मन आज की घटनाओ से पूरी तरह हिला हुआ था, उसे समझ नही आ रहा था कि आखिर ये सब कैसे हो गया, साथ ही उसे इस बात का सबसे ज्यादा दर था कि मोहिनी कहीं किसी को कुछ बता न दे,वरना उसकी शामत आ जानी है,

इसी तरह की उधेड़बुन में लगा हुआ आखिर वो ऑफिस पहुंच ही गया, पर जब उसने टाइम देखा तो लगभग 9:30 बजने वाले थे

“ओह्ह्ह्हह......शिट ......मैं लेट हो गया, उस मोहिनी की वजह से,.....अब दादाजी पक्का डांटेंगे” आनंद मन ही मन सोच रहा था, आनंद ने फटाफट अपनी गाड़ी पार्क की, और अंदर की ओर बढने लगा,

“ओये.......किधर जा रहा है तू....बिना पूछे अंदर कैसे घुस आया....” गेट पर खड़े पठान चोकीदार ने आनंद को रोकते हुए कहा

“देखो चोकीदार , मैं पहले ही काफी लेट हो चूका हूँ , मुझे जाने दो” आनंद बोला

“ऐसे कैसे जाने दूँ, अपने बाप का ऑफिस समझा है क्या...?” चोकीदार गुस्से से बोला

“हाँ....ये मेरे बाप का ऑफिस ही है” आनंद बड़े कैजुअल तरीके से बोला

“मुझसे जबान लडाता है, खबिज़ का बच्चा, रुक अभी तेरी हड्डी पसली एक करता हूँ” चोकीदार ने गुस्से से कहा और पास में रखा अपना डंडा उठा लिया

“बहनचोद ....ये साला हो क्या रहा है आज मेरे साथ......पता नही सुबह सुबह किसका मुंह देखा था....अरे हाँ उस चुड़ैल मोहिनी का मुंह जो देखा था, तभी तो साला ये दो कोडी का चोकीदार भी गांड में ऊँगली कर रहा है, आज का तो साला दिन ही मनहूस है” आनंद मन ही मन सोचे जा रहा था

“अबे तू यही खड़ा है, भाग जा वरना मार मार कर कचूमर निकाल दूंगा, ये डंडा देखा है ना” चोकीदार आनंद को धमकाते हुए बोला

“देखो भैया, प्लीज़ मुझे जाने दो, ये सच में मेरे बाप का ऑफिस है” आनंद ने थोड़ी नरमी से काम लेना चाहा

“रुक तू , ऐसे नही मानने वाला” चोकीदार ने डंडा को हवा में लहराते हुए कहा
अब तो आनंद को लगा कि ये साला सच में डंडा ना घुमा दे, गलती से भी कहीं लग गया तो कई दिनों तक बिस्तर से लगे रहना पड़ेगा, इसलिए आनंद वापस मुडकर भागने लगा

“फिर कभी देख लूँगा चोकीदार के बच्चे” आनंद पीछे की तरफ मुंह करता हुआ भाग रहा था कि तभी उसकी टक्कर किसी से हो गयी, और जिस सख्श से टक्कर हुई उसका सारा सामान इधर उधर बिखर गया, आनंद देख नही पाया था की वो किससे टकराया है क्यूंकि उसका ध्यान तो चोकीदार की तरफ था

“हाय...मार डाला कमबख्त ने......” एक प्यारी सी आवाज़ जिससे ये डांट भी शहद की तरह मीठी सुनाई पड़ रही थी,

आनंद ने तुरंत पलट कर देखा और आवाज़ का पिछा करते हुए उस चेहरे तक पहुंच गया जिसके मुंह से ये आवाज़ निकल रही थी,

कोई 22 -23 साल की खुबसूरत सी लडकी, लॉन्ग स्कर्ट पहने हुए, उपर ऑफिस लेडीज शर्ट पहने,




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