अनौखा इंतकाम

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Kamini
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Re: अनौखा इंतकाम

Post by Kamini » 06 Dec 2017 21:37

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Re: अनौखा इंतकाम

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rajsharma
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Re: अनौखा इंतकाम

Post by rajsharma » 08 Dec 2017 23:40


ऐसे ही दिन गुज़र रहे थे. कहते हैं ना कि वक़्त सब से बड़ा मरहम होता है. इसलिए हर गुज़रते दिन के साथ साथ रूबीना का रवईया आहिस्ता आहिस्ता अपने शोहर से दुबारा थोड़ा बहतर होने लगा था.

उन दिनो गन्नों की बुआई का सीज़न चल रहा था. जिस वजह से मक़सूद दिन रात अपने खेतों में बिजी रहते थे. इसलिए पिछले दो हफ्तों से वो और रूबीना आपस में चुदाई नही पाए थे.

लेकिन आज सुबह जब रूबीना गाड़ी में बैठ कर हॉस्पिटल के लिए निकल रही थी. तो मक़सूद उस के पास आ कर कहने लगा कि काम ख़तम हो गया है और अब में फ्री हूँ .फिर उस ने आँख दबा कर रूबीना को इशारा किया “आज रात को” और खुद ही हंस पड़ा.

रूबीना ने मक़सूद की बात का कोई जवाब नही दिया और खामोशी से अपनी गाड़ी चला दी.

बेशक रूबीना मक़सूद के सामने खामोश रही थी. मगर हॉस्पिटल की तरफ गाड़ी दौड़ाते हुए रूबीना ने बेखयाली में जब अपनी चूत पर खारिश की. तो उसे अपनी टाँगों के बीच अपनी चूत बहुत गीली महसूस हुई.

रूबीना समझ गई कि अंदर ही अंदर आज काफ़ी टाइम बाद उस की फुद्दी को खुद ब खुद लंड की तलब हो रही थी.

उस रोज ना चाहते हुए भी बे इकतियार रूबीना सारा दिन बार बार अपनी घड़ी को देखती रही कि कब दिन ख़तम हो और कब वो घर जाय और अपने शोहर का लंड अपनी फुद्दी में डलवाए.

आज उस के दिल में एक अजीब सी एग्ज़ाइट्मेंट थी. और उस दिन दोपहर के बाद दो मेजर सर्जरी भी थीं सो काम भी बहुत था.

खैर दूसरी सर्जरी के दौरान रूबीना को उम्मीद से ज़यादा टाइम लग गया और वो बुरी तरह थक भी गई थी.

दो घंटे और थे और फिर वो होती और उस का शोहर और पूरी रात................................

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रात को अचानक रूबीना की आँख खुली. उस का बदन कमरे में गर्मी की शिद्दत से पसीना पसीना हो रहा था.

रूबीना को अहसास हुआ कि उस की कमीज़ उतरी हुई है और वो सिर्फ़ ब्रा और शलवार में अपने बेड पर लेटी हुई है.

गर्मी की शिद्दत की वजह से ना जाने कब और कैसे रूबीना ने अपनी कमीज़ उतार दी इस का उसे खुद भी पता नही चला.

रूबीना अभी भी नींद की खुमारी में थी और इस खुमारी में रूबीना ने महसूस किया उस के हाथ में उस के शोहर का लंड था.

जिसे वो खूब सहला रही थी. और शलवार में मौजूद उस के शोहर का लंड रूबीना के हाथों में झटके मार रहा था.

इतने में रुबीना का दूसरा हाथ मक़सूद के पेट से हल्का सा टच हुआ तो रूबीना को अंदाज़ा हुआ कि उस की तरह उस के शोहर की कमीज़ भी उतरी हुई है.

रूबीना अपने शोहर के लंड को अपने काबू में पा कर मुस्कराने लगी मगर सोते हुए भी उसने लंड को नही छोड़ा.

कमरे में अंधेरा था.जिस की वजह से कोई भी चीज़ दिखाई नही दे रही थी. मगर रूबीना को कमरे में गूँजती हुई अपने हज़्बेंड की तेज तेज़ सांसो से पता चल रहा था कि वो भी जाग रहे हैं.

रूबीना ने अपने शोहर के लंड पर नीचे से उपर तक हाथ फेरा तो उस के शोहर के मुँह से एक ज़ोरदार सी “सस्स्स्स्स्स्सस्स” सिसकारी निकली गई.

सिसकारी की आवाज़ से लगता था आज रूबीना का शोहर कुछ ज़यादा ही गरम हो रहा था.

रूबीना को भी अपने हाथ में थामा हुआ अपने शोहर का लंड आज कुछ ज़यादा ही लंबा,मोटा और सख़्त लग रहा था. खास कर लंड की मोटाई से तो आज ऐसे महसूस हो रहा था कि लंड जैसे फूल कर डबल हो गया हो.

रूबीना को पूरे दिन की सख़्त मेहनत का अब फल मिल रहा था.
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
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Re: अनौखा इंतकाम

Post by rajsharma » 08 Dec 2017 23:41

वो आज पूरा दिन हॉस्पिटल में बहुत ही बिजी रही थी.

और फिर शाम को दूसरी सर्जरी में कॉंप्लिकेशन्स की वजह से रूबीना को हॉस्पिटल में काफ़ी देर हो गई थी और रूबीना को ऐसे लग रहा था कि वो आज रात अपने घर नही जा पाएगी...इतनी रात....इतनी रात.....

अचानक रूबीना के दिमाग़ ने झटका खाया और वो नीद से पूरी तरह जाग गई.

उफ्फ रात को तो में बहुत लेट हो गयी थी और फिर मेने घर फोन किया था कि में घर नही आ पाऊँगी......फिर में अपने भाई के फ्लॅट पर.... सोते सोते ये सोच कर ही अचानक रूबीना के पूरे जिस्म में एक झुरझरी सी दौड़ गई......

“में अपने शोहर के साथ नही.... बल्कि मे अपने सगे भाई.....

नही नही नही.....नही....................” सर्दी की ठंडी रात में भी रूबीना का बदन पसीने से तरबतर हो गया.

“ये हुआ कैसे” रूबीना सोच रही थी.

जब वो रमीज़ के फ्लॅट में आई थी तो उस का भाई सोया हुया था.

फ्लॅट की एक चाभी रूबीना पास भी थी. रूबीना ने दरवाज़ा खोला और कपड़े चेंज किए बिना ही लेट गई और लेटते ही उसे नींद आ गई.

फ्लॅट में आते वक़्त रूबीना इतना थकि हुई थी. जिस की वजह से उसे डर था कि नींद के मारे वो कहीं रास्ते में ही ना गिर जाए.

तो फिर क्या रात में भाई ने. “नही, एसा नही हो सकता...मेरा भाई एसा नही है! तो फिर कैसे?”

रूबीना सोच रही थी...”कैसे मेरे हाथ में अपने भाई का लंड आ गया ... अगर उसने कोई ग़लत हरकत नही की”

रूबीना ने जब आँखे खोल कर गौर से देखा तो उसे अंदाज़ा हुआ कि रात को नींद की वजह से वो करवटें बदलते बदलते ना जाने किस तरह अपने भाई के बेड पर चली आई है.

हालाँकि दोनो बेड पूरे जुड़े हुए नही थे. लेकिन वो इतने करीब थे कि नींद में करवटें बदलते हुए इंसान एक बेड से दूसरे बेड पर ब आसानी जा सकता था.

“तो इसका मतलब में ही... अपने भाई के बेड पर....उसका लंड हाथ में लेकर....उफफफफफफफफ्फ़ नही...वो क्या सोचता होगा मेरे बारे में?....रूबीना अपनी नींद के खुमार में अपने आप से ही बातें किए जा रही थी.

रूबीना ने अपने भाई की तरफ से कोई हलचल महसूस नही की.लगता था शायद रमीज़ को अंदाज़ा हो गया था कि उस की बहन रूबीना अब शायद जाग गयी है और ये जो कुछ उन के बीच हुआ वो सब नींद में होने की वजह से हो गया था.

दोनो बहन भाई के बीच में मुश्किल से दो फीट का फासला होगा और वो दोनो चुप चाप लेटे हुए थे.

रूबीना की समझ में कुछ नही आ रहा था कि वो क्या करे. वो ये सोच कर शर्म से पानी पानी हो रही कि उस का भाई उस के बारे में क्या सोचेगा.

कमरे में बिल्कुल सन्नाटा था. रह रह का रूबीना अपने दिल-ओ-दिमाग़ में अपने आप को मालमत कर रही थी.

”ये तूने क्या कर दिया?अब रमीज़ क्या सोचता होगा? मेरी बड़ी बहन एसी है... अपने भाई के लंड को...?

रूबीना अभी इन ही सोचो में गुम थी कि उसे एक और झटका लगा.

रूबीना ने अभी भी अपने भाई का लंड पकड़ा हुआ था. जब कि उसे नींद से जागे हुए कोई पंद्रह मिनिट हो गये थे.
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
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Re: अनौखा इंतकाम

Post by Jemsbond » 09 Dec 2017 13:00

Superb........
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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
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Re: अनौखा इंतकाम

Post by Kamini » 09 Dec 2017 20:39

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